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भोपाल न्यू मार्केट आग मामले में छोले-भटूरे दुकान संचालक पर FIR, आज से हॉकर्स की शिफ्टिंग

भोपाल। न्यू मार्केट में 8 अक्टूबर को लगी भीषण आग के मामले में पुलिस ने बालाजी छोले-भटूरे दुकान के संचालक दीप उर्फ दीपू अग्रवाल के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस की जांच में सामने आया कि दुकान में भट्टी के पास रखे कपड़े में आग लगी थी, जिसके बाद लपटें फैल गईं। हादसे में आसपास की चार अन्य दुकानों और 12 से ज्यादा रेहड़ियों को नुकसान पहुंचा था। आग से करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है। घटना के बाद नगर निगम ने न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन बनाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। गुरुवार से हॉकर्स को टीटी नगर स्टेडियम के पास हाट बाजार में शिफ्ट करने की तैयारी है। निगम ने चेतावनी दी है कि तय स्थान पर नहीं जाने वाले हॉकर्स का सामान जब्त किया जा सकता है। भट्टी के पास रखे कपड़े में लगी थी आग पुलिस की जांच के मुताबिक, बालाजी छोले-भटूरे दुकान में भट्टी जल रही थी। इसके पास रखे कपड़े में आग लगने के बाद लपटें फैल गईं और आसपास की दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। हादसे में आम्रपाली रेस्टोरेंट, विजय स्टोर, एक कैफे और मोबाइल दुकान को नुकसान पहुंचा था। घटना के बाद आम्रपाली रेस्टोरेंट के संचालक पवन अग्रवाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने दुकान संचालक के खिलाफ लापरवाही और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। टीटी नगर थाना प्रभारी गौरव सिंह दोहर के मुताबिक, आग भट्टी के पास रखे कपड़े से शुरू हुई थी। वहीं, दुकान में अग्नि सुरक्षा के जरूरी इंतजाम मौजूद थे या नहीं, इसकी जांच नगर निगम कर रहा है। न्यू मार्केट में दमकल की पहुंच जांचने के लिए मॉकड्रिल आग की घटना के बाद नगर निगम ने न्यू मार्केट में दमकल की पहुंच और रास्तों में आने वाली बाधाओं की जांच शुरू की है। बुधवार को करीब तीन घंटे तक मॉकड्रिल की गई। इस दौरान दो दमकल वाहनों को पूरे मार्केट में घुमाया गया। जहां दमकल को रुकना पड़ा, वहां से निगम ने सामान जब्त किया। 8 अक्टूबर को आग लगने के दौरान दुकानों के सामने रखा सामान दमकल वाहनों के रास्ते में बाधा बना था। इसी को देखते हुए निगम ने बाजार में अतिक्रमण हटाने और रास्ते खाली रखने की कार्रवाई तेज की है। टीटी नगर स्टेडियम के पास शिफ्ट होंगे हॉकर्स नगर निगम ने बुधवार को पूरे दिन मुनादी कराकर हॉकर्स को गुरुवार से निर्धारित स्थान पर जाने की सूचना दी। अतिक्रमण अधिकारी शैलेंद्र सिंह भदौरिया के मुताबिक, न्यू मार्केट के नो-व्हीकल जोन में रेहड़ी लगाकर व्यवसाय करने वाले हॉकर्स को टीटी नगर स्टेडियम के पास स्थित हाट बाजार में विस्थापित किया जाएगा। निगम की योजना न्यू मार्केट को नो-हॉकर्स जोन बनाने की है, ताकि बाजार के रास्ते खुले रहें और आपात स्थिति में दमकल वाहनों को पहुंचने में परेशानी न हो। दुकानों के सामने पीली लाइन की दोबारा मार्किंग नगर निगम दुकानों के सामने पीली लाइन की दोबारा मार्किंग भी कर रहा है। बुधवार से यह प्रक्रिया शुरू की गई। दुकानदारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पीली लाइन से आगे सामान रखने पर जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। निगम का उद्देश्य दुकानों के सामने का रास्ता खाली रखना है, ताकि आग या किसी अन्य आपात स्थिति में बचाव कार्य प्रभावित न हो। आग वाली जगह से 100 फीट दूर भी जलती हैं भट्टियां आग लगने वाली जगह से करीब 100 फीट की दूरी पर छोले-भटूरे की दो अन्य दुकानें भी संचालित हो रही हैं। आसपास दो से तीन नमकीन की दुकानें भी हैं, जहां सुबह से रात तक भट्टियां जलती हैं। ऐसे में आग से बचाव के इंतजामों और भट्टियों के आसपास रखे सामान की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दुकानों में अग्नि सुरक्षा के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी नियमित जांच जरूरी मानी जा रही है। चौक बाजार में 22 लाख का फायर हाइड्रेंट सिस्टम भी सवालों में शहर के पुराने बाजारों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंताएं सामने आई हैं। जानकारी के मुताबिक, चौक बाजार और इब्राहिमपुरा की 10 से 12 फीट चौड़ी गलियों में आग बुझाने के लिए नगर निगम ने करीब 22 लाख रुपये की लागत से अंडरग्राउंड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया था। जुलाई 2026 में नेमा डिजाइनर स्टूडियो में आग लगने के दौरान इस सिस्टम के काम नहीं करने की बात सामने आई थी। इसके बाद सिस्टम की प्रेशर टेस्टिंग और रखरखाव को लेकर सवाल उठे। जुमेराती, इब्राहिमपुरा, नदीम रोड और घोड़ा नक्कास समेत शहर के आठ प्रमुख बाजारों में भी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की नियमित जांच और रखरखाव की जरूरत बताई जा रही है। बैरागढ़ के फायर सेफ्टी सिस्टम के रखरखाव पर भी सवाल 17 दिसंबर 2017 को बैरागढ़ के संत हिरदाराम शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में भीषण आग लगी थी, जिसमें 100 से ज्यादा कपड़े की दुकानें जलकर खाक हो गई थीं। घटना के बाद होज-रील पाइप, ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर और फायर वाटर पंप लगाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सिस्टम लगाने के बाद उसके रखरखाव में कमी और उपकरणों पर जंग लगने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। मेन कॉरिडोर में अतिक्रमण और मॉकड्रिल नहीं होने की बात भी कही गई है। न्यू मार्केट की आग के बाद अब सवाल केवल अतिक्रमण हटाने का नहीं, बल्कि बाजारों में अग्नि सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच, रखरखाव और आपातकालीन रास्ते खुले रखने का भी है।
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DAVV में शुरू होगा गर्भ संस्कार पर PG डिप्लोमा कोर्स, पहले बैच में 30 विद्यार्थियों को मिलेगा प्रवेश

इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) गर्भावस्था और मां-बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर नया पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रहा है। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फिजिकल एजुकेशन के अंतर्गत स्कूल ऑफ योगा में गर्भ संस्कार पर पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा (PG Diploma) कोर्स शुरू करने की योजना है। इसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू करने का प्रस्ताव है। पहले बैच में 30 विद्यार्थियों को प्रवेश देने की योजना बनाई गई है। इस पाठ्यक्रम में भारतीय परंपरा में प्रचलित गर्भ संस्कार की अवधारणा को आधुनिक गर्भावस्था देखभाल से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। विद्यार्थियों को गर्भधारण से लेकर प्रसव तक महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। गर्भावस्था से प्रसव तक की देखभाल की पढ़ाई प्रस्तावित कोर्स में गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में होने वाले बदलाव, भ्रूण का विकास, संतुलित पोषण और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषय शामिल होंगे। इसके अलावा योग, प्राणायाम, ध्यान और मां तथा गर्भस्थ शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव से जुड़े पहलुओं को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की योजना है। विद्यार्थियों को गर्भावस्था के अलग-अलग चरणों में सुरक्षित शारीरिक गतिविधियों और तनाव प्रबंधन के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान देखभाल से संबंधित विषयों की व्यवस्थित जानकारी देना है। सैद्धांतिक पढ़ाई के साथ अस्पतालों में प्रशिक्षण गर्भ संस्कार के पीजी डिप्लोमा में कक्षा में पढ़ाई के साथ अस्पतालों में व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की भी योजना है। इससे विद्यार्थियों को गर्भावस्था देखभाल से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिल सकेगा। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान योग, व्यायाम, पोषण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी उपायों को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह जरूरी है। यह पाठ्यक्रम चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख और निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप तैयार किया जाना महत्वपूर्ण होगा। योग से जुड़े तीन सर्टिफिकेट कोर्स भी प्रस्तावित DAVV के स्कूल ऑफ योगा में पीजी डिप्लोमा के साथ तीन सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने की भी तैयारी है। इनमें शामिल हैं: इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को योग, पोषण, प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धतियों और एक्यूप्रेशर से जुड़े विषयों की बुनियादी जानकारी देने की योजना है। विश्वविद्यालय की इस पहल के तहत योग और स्वास्थ्य से जुड़े नए शैक्षणिक विकल्प उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। पाठ्यक्रमों के प्रवेश और संचालन से संबंधित विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक घोषणा के बाद स्पष्ट होगी।
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इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।
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भोपाल के केरवा डैम के अतिक्रमणों की होगी जांच, NGT ने कमेटी को दिए निरीक्षण के निर्देश

भोपाल के केरवा डैम की सीमा और उसके आसपास हुए अतिक्रमणों को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने सख्ती दिखाई है। ट्रिब्यूनल ने संबंधित कमेटी को डैम के फुल टैंक लेवल (FTL) और बफर एरिया का अंतिम निर्धारण करने के लिए निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया में सरकारी रिकॉर्ड, जल संसाधन विभाग के कंटूर और टोपोग्राफिकल मैप, ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजरी और मौके पर किए जाने वाले भौतिक सत्यापन को आधार बनाया जाएगा। बुधवार को प्रस्तावित ग्राउंड ट्रूथिंग अंतिम समय पर स्थगित कर दी गई। अब गुरुवार को टीम के निरीक्षण करने की संभावना है। NGT ने FTL और बफर एरिया तय करने के दिए निर्देश केरवा डैम के आसपास अतिक्रमणों को लेकर हाल ही में हुई सुनवाई में NGT ने कमेटी को उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर जलाशय की वास्तविक सीमा का निरीक्षण करने को कहा था। ट्रिब्यूनल के निर्देशों के अनुसार, FTL और बफर एरिया का अंतिम निर्धारण ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट तस्वीरों, ग्राउंड ट्रूथिंग और सरकारी दस्तावेजों के मिलान के बाद किया जाएगा। कमेटी को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश करनी है। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को निर्धारित है। 108 सीमा-चिह्नों की भी होगी जांच उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड के अनुसार, केरवा डैम का जलमग्न क्षेत्र लगभग 462.150 हेक्टेयर है। पहले इसकी सीमा को 1,080 कंक्रीट ब्लॉकों और खंभों से चिह्नित किया गया था। अब भौतिक सत्यापन के दौरान यह भी देखा जाएगा कि इनमें से कितने सीमा-चिह्न मौके पर मौजूद हैं और क्या उनकी स्थिति पुराने रिकॉर्ड से मेल खाती है। इससे जलाशय की वास्तविक सीमा निर्धारित करने में मदद मिलेगी। पहले की जांच में मिले थे 33 अतिक्रमण पूर्व में हुई जांच के दौरान केरवा जलाशय क्षेत्र में कुल 33 अतिक्रमण चिह्नित किए गए थे। इनमें 18 संरचनाएं सरकारी भूमि और 15 निजी भूमि से संबंधित बताई गई थीं। अब ड्रोन सर्वे और जमीनी निरीक्षण के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि पहले चिह्नित अतिक्रमणों में से कितने अभी भी मौके पर मौजूद हैं। साथ ही, उनकी वास्तविक स्थिति और निर्धारित जलाशय सीमा से उनकी दूरी का सत्यापन भी किया जाएगा। तीन सप्ताह में रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश NGT ने कमेटी को FTL और उसके बफर एरिया के अंतिम निर्धारण की प्रक्रिया तीन सप्ताह में पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत टीम को उपलब्ध सरकारी दस्तावेजों और मौके की स्थिति का मिलान करना होगा। निरीक्षण के बाद तैयार रिपोर्ट से केरवा डैम की सीमा और आसपास मौजूद अतिक्रमणों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हालांकि, अतिक्रमणों को लेकर आगे क्या कार्रवाई होगी, यह निरीक्षण और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा।
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इंदौर के होलकर कॉलेज में छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल, एक छात्र की तबीयत बिगड़ी; युवती बेहोश

इंदौर के होलकर कॉलेज में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर श्री राजपूत करणी सेना छात्र संगठन के पदाधिकारी और विद्यार्थी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। सोमवार को शुरू हुई भूख हड़ताल मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही। इस दौरान एक छात्र की तबीयत बिगड़ गई और उसे उल्टी होने लगी, जबकि प्रदर्शन में शामिल एक युवती बेहोश हो गई। संगठन के होलकर कॉलेज इकाई के उपाध्यक्ष और छात्र हर्ष तिवारी के मुताबिक, 25 सितंबर को कॉलेज में दो गुटों के बीच विवाद हुआ था। इस मामले में उन्हें और उनके सात साथियों को ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) दे दिया गया। साथ ही, उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई। सस्पेंशन लेटर की तारीख पर उठाए सवाल हर्ष तिवारी ने कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि विवाद 25 सितंबर को हुआ था, लेकिन सस्पेंशन लेटर कॉलेज की वेबसाइट पर 24 सितंबर की तारीख में तैयार दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, पत्र पर आधिकारिक मुहर और हस्ताक्षर भी हैं। संगठन का कहना है कि इस मामले में कॉलेज प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इसी मांग को लेकर छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। भूख हड़ताल के दौरान छात्र की तबीयत बिगड़ी मंगलवार को भूख हड़ताल के दौरान एक छात्र की तबीयत खराब हो गई और उसे उल्टी हुई। वहीं, प्रदर्शन में शामिल एक युवती भी बेहोश हो गई। घटना के बाद प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने कॉलेज प्रबंधन से जवाब मांगा और अपनी मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की। छात्र संगठन की चार प्रमुख मांगें श्री राजपूत करणी सेना छात्र संगठन ने कॉलेज प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं। फिलहाल, छात्र संगठन की मांगों और कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
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खंडवा में 35 वर्षीय पूजा जायसवाल की संदिग्ध मौत, मायके पक्ष ने जताई हत्या की आशंका

शहर की बाहेती कॉलोनी में रविवार देर रात 35 वर्षीय पूजा जायसवाल की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उन्होंने घर में कीटनाशक दवा का सेवन कर लिया था। गंभीर हालत में उनके पति आकाश जायसवाल उन्हें बुलेट मोटरसाइकिल से अस्पताल लेकर पहुंचे। वहीं, मायके पक्ष ने मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए ससुराल पक्ष पर हत्या की आशंका जताई है। रात करीब 11 बजे बिगड़ी थी तबीयत परिजनों के अनुसार, रविवार रात करीब 11 बजे पूजा की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। इसके बाद उनके पति आकाश उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे। बताया गया कि उस समय पूजा जोर-जोर से चिल्ला रही थीं। हालांकि, उन्होंने किन परिस्थितियों में कीटनाशक का सेवन किया और घटना से पहले क्या हुआ था, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। मायके पक्ष ने लगाए गंभीर आरोप पूजा की बड़ी बहन रीना, जो रतलाम जिले के आलोट की निवासी हैं, ने मौत को संदिग्ध बताते हुए ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि पूजा के गले पर निशान थे। उन्होंने मारपीट की आशंका भी जताई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। मायके पक्ष ने कहा है कि मौत की परिस्थितियों की बारीकी से जांच की जाए और जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। हालांकि, हत्या के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। सात साल पहले हुई थी शादी पूजा मूल रूप से रतलाम जिले के आलोट की रहने वाली थीं। करीब सात साल पहले उनका विवाह खंडवा निवासी आकाश जायसवाल से हुआ था। दंपती के छह साल के जुड़वां बच्चे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगी मौत की वजह फिलहाल पूजा की मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं है। कीटनाशक सेवन की परिस्थितियों और गले पर बताए गए निशानों की जांच महत्वपूर्ण होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्यों और पुलिस जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही मौत की वजह स्पष्ट हो सकेगी। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और जांच की वर्तमान स्थिति सामने आने के बाद आगे की जानकारी अपडेट की जा सकेगी।
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MGM मेडिकल कॉलेज में 45 लाख रुपए के टैक्सी भुगतान पर सवाल, तीन दिन में रिपोर्ट देगी जांच समिति

महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (MGM) में कार-टैक्सी के इस्तेमाल पर करीब 40 से 45 लाख रुपए के भुगतान को लेकर सवाल उठे हैं। मामले में कॉलेज प्रबंधन ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। आरोप है कि भोपाल और इंदौर के बीच यात्रा के लिए इस्तेमाल किए गए वाहन का भुगतान कॉलेज के स्वशासी मद से किया गया, लेकिन इस राशि का ऑडिट नहीं हुआ और न ही कार्यकारिणी की बैठक में भुगतान को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, मामले में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। तीन साल में 40 से 45 लाख रुपए भुगतान का दावा कॉलेज प्रबंधन के दस्तावेजों के अनुसार, तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री के निजी स्थापना से भेजे गए पत्रों के आधार पर ट्रैवल एजेंसी को वर्ष 2021, 2022 और 2023 में करीब 14 से 15 लाख रुपए सालाना भुगतान किया गया। तीन वर्षों में कुल भुगतान लगभग 40 से 45 लाख रुपए बताया गया है। जानकारी के मुताबिक, कोरोना काल के दौरान मंत्री के नाम पर वाहन अटैच किया गया था और इसका भुगतान MGM मेडिकल कॉलेज के स्वशासी मद से किया गया। कॉलेज के अनुसार, संबंधित वाहन का उपयोग डॉ. राहुल रोकड़े कर रहे थे। रोकड़े पूर्व में तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के ओएसडी रह चुके हैं और वर्तमान में MGM मेडिकल कॉलेज में एमटीए के अध्यक्ष हैं। 16 सितंबर को की गई थी शिकायत ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक राधेश्याम मुवेल ने 16 सितंबर 2026 को इस मामले में कॉलेज के डीन को शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि भोपाल-इंदौर यात्रा के लिए टैक्सी का भुगतान निर्धारित नियमों के विपरीत किया गया। शिकायत में भुगतान का ऑडिट नहीं होने और कार्यकारिणी की बैठक में इसकी मंजूरी नहीं लिए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। इसके बाद कॉलेज प्रबंधन ने पूरे मामले की जांच कराने का फैसला लिया। भुगतान की मंजूरी और वित्तीय रिकॉर्ड खंगालेगी समिति जांच समिति यह पता लगाएगी कि वाहन के भुगतान के लिए किन आदेशों और नियमों का पालन किया गया था। साथ ही, भुगतान से पहले जरूरी स्वीकृतियां ली गई थीं या नहीं और वित्तीय प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। इसके लिए संबंधित आदेशों, स्वीकृतियों, भुगतान के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की जाएगी। समिति की रिपोर्ट के बाद ही मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। चार सदस्यीय समिति गठित, तीन दिन में देनी होगी रिपोर्ट MGM मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने जांच के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें एनाटॉमी विभाग की सह प्राध्यापक डॉ. शीनू मलिक सूरी को अध्यक्ष बनाया गया है। माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. दीपक गवली और प्रशासनिक अधिकारी टीएस बघेल को सदस्य नियुक्त किया गया है। वहीं, लेखा शाखा के सहायक वर्ग-2 कर्मचारी अनिष फतरोड को प्रस्तुतकर्ता की जिम्मेदारी सौंपी गई है। समिति को तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। डॉ. राहुल रोकड़े ने आरोपों पर दी सफाई मामले में डॉ. राहुल रोकड़े ने कहा कि उन्होंने कोई भुगतान नहीं किया है। उनका कहना है कि वाहन मंत्री के निजी स्थापना में लगा था। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई अनियमितता बताई जा रही है, तो इसकी जांच मंत्री कार्यालय से कराई जानी चाहिए। अब जांच समिति की रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि वाहन के उपयोग और भुगतान की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
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MP में दिव्यांगों के लिए 20 हजार पदों पर भर्ती अभियान शुरू, 31 दिसंबर तक चलेगी प्रक्रियाr

भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भर्ती अभियान शुरू किया गया है। प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में दिव्यांगजन के लिए आरक्षित करीब 20 हजार खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के निर्देशों के मुताबिक, पहला विशेष भर्ती अभियान 9 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक चलेगा। सरकार ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए इंटरव्यू के अलग से अंक देने का प्रावधान नहीं रखा है। अभ्यर्थियों का चयन संबंधित पद के भर्ती नियमों, शैक्षणिक योग्यता और निर्धारित पात्रता के आधार पर तैयार मेरिट सूची से किया जाएगा। प्रदेश में दिव्यांगों के लिए 20 हजार पद खाली विभागीय सर्वे के अनुसार, मध्य प्रदेश में दिव्यांगजन के लिए कुल 36 हजार पद आरक्षित हैं। इनमें से करीब 16 हजार पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि लगभग 20 हजार पद खाली बताए गए हैं। आयुक्त दिव्यांगजन डॉ. अजय खेमरिया के मुताबिक, दिव्यांगों के लिए विशेष भर्ती अभियान शुरू करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। सरकार की मंजूरी के बाद अब इन रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इंटरव्यू के अंक नहीं, मेरिट से होगा चयन सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, चयन प्रक्रिया संबंधित पद के भर्ती नियमों के तहत पूरी की जाएगी। इसमें इंटरव्यू के लिए अलग से अंक नहीं जोड़े जाएंगे। अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता और अन्य निर्धारित पात्रता के आधार पर मेरिट सूची तैयार होगी। इससे भर्ती प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है। विज्ञापन के कम से कम 30 दिन बाद भर्ती प्रक्रिया भर्ती से संबंधित जानकारी अधिक से अधिक पात्र अभ्यर्थियों तक पहुंचाने के लिए विभागों को विज्ञापन जारी करना होगा। इसके लिए कम से कम दो प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों के साथ संबंधित विभाग की वेबसाइट और सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। विज्ञापन में रिक्त पदों की संख्या, दिव्यांगता की श्रेणी, शैक्षणिक योग्यता और अन्य पात्रता शर्तों का स्पष्ट उल्लेख करना होगा। विज्ञापन प्रकाशित होने के कम से कम 30 दिन बाद ही भर्ती अभियान की तारीख और स्थान तय किए जाएंगे। दस्तावेजों की जांच के बाद 15 दिन में कर सकेंगे आपत्ति आवेदनों और दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच के बाद पात्र और अपात्र अभ्यर्थियों की अलग-अलग सूची तैयार कर वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। अपात्र सूची में शामिल अभ्यर्थियों को अपनी पात्रता के संबंध में दावा-आपत्ति दर्ज कराने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा। इसके बाद मेरिट के आधार पर विज्ञापित पदों की संख्या से अधिकतम दो गुना अभ्यर्थियों को मूल दस्तावेजों के सत्यापन के लिए बुलाया जाएगा। यदि किसी अभ्यर्थी का चयन दो विभागों में हो जाता है और वह एक विभाग का विकल्प चुनता है, तो दूसरे विभाग में खाली हुआ पद वेटिंग लिस्ट के जरिए भरा जाएगा। अब हर साल जनवरी से मार्च तक चलेगा अभियान सरकार ने विशेष भर्ती अभियान को नियमित व्यवस्था का हिस्सा बनाने के लिए वार्षिक कैलेंडर निर्धारित किया है। आगामी वर्षों में हर साल 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच यह अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही 29 अप्रैल 2025 को जारी पुराने फॉर्म को निरस्त कर नया ऑनलाइन रिकॉर्ड सिस्टम लागू करने की जानकारी दी गई है। अभ्यर्थियों के लिए जरूरी सलाह: इच्छुक उम्मीदवार अपने शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, वैध दिव्यांगता प्रमाण-पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार रखें। आवेदन करने से पहले संबंधित विभाग का आधिकारिक विज्ञापन पढ़कर पद की पात्रता और आवेदन की शर्तों की पुष्टि जरूर करें।
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सिंहस्थ 2028 से पहले इंदौर-उज्जैन में बढ़ेंगी होटल सुविधाएं, CM मोहन यादव बोले- मालवा तेजी से बन रहा मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र

इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मालवा क्षेत्र तेजी से मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित हो रहा है। पर्यटन, व्यापार और निवेश की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। इससे पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। मुख्यमंत्री मंगलवार को इंदौर में एक निजी होटल के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार के लिए आधुनिक होटल सुविधाओं को महत्वपूर्ण बताया। सिंहस्थ 2028 के लिए होटल सुविधाओं का विस्तार जरूरी मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन होना है। ऐसे में इंदौर और उज्जैन सहित आसपास के क्षेत्रों में होटल सुविधाओं का विस्तार महत्वपूर्ण हो जाता है। दोनों शहरों की नजदीकी के कारण सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, पर्यटकों और अन्य लोगों के आने की संभावना है। उन्होंने कहा कि व्यापारिक गतिविधियों, कॉर्पोरेट बैठकों और विभिन्न आयोजनों के लिए भी आधुनिक होटल सुविधाओं की जरूरत होती है। नए होटल इन जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित होंगे। निवेश बढ़ने से पैदा होंगे रोजगार के अवसर सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर व्यावसायिक और पर्यटन से जुड़ी परियोजनाएं विकसित हो रही हैं। इनसे लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, निवेश बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। पर्यटन और व्यापार का विस्तार प्रदेश की आर्थिक प्रगति में भी योगदान देगा। नवरात्रि के दौरान नई होटल सुविधा की शुरुआत मुख्यमंत्री ने कहा कि नवरात्रि शक्ति की आराधना का पर्व है। ऐसे समय में इंदौर में होटल की नई सुविधा शुरू होना भविष्य की जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। उन्होंने मालवा क्षेत्र में हो रहे बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यापार, पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार से यह क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री एयरपोर्ट से सीधे होटल के उद्घाटन समारोह में पहुंचे। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, सांसद शंकर लालवानी, विधायक मधु वर्मा और रमेश मेंदोला सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
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Shivraj Singh Chouhan

Shivraj Singh Chouhan की अपील: नवरात्रि पर महिलाओं के सम्मान का लें संकल्प

नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ महिलाओं के सम्मान की बात भी उतनी ही जरूरी है। इसी संदेश के साथ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह (Shivraj Singh Chouhan) चौहान ने सोशल मीडिया पर एक Reel शेयर की और लोगों से बेटियों, बहनों और माताओं का आदर करने की अपील की। उनके संदेश का सार है कि अगर हम मां दुर्गा की पूजा करते हैं, तो हमें अपने जीवन में भी महिलाओं को सम्मान देना चाहिए। शिवराज सिंह चौहान की यह अपील ऐसे समय में सामने आई है, जब नवरात्रि के दौरान देशभर में देवी आराधना और कन्या पूजन की तैयारियां चल रही हैं। उनका संदेश लोगों को यह सोचने का मौका देता है कि पूजा-पाठ के साथ हमारा व्यवहार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। Shivraj Singh Chouhan ने Reel शेयर कर क्या संदेश दिया? शिवराज सिंह चौहान ने नवरात्रि के अवसर पर Reel के जरिए महिलाओं के सम्मान का मुद्दा उठाया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी बेटियों और बहनों के प्रति आदर का भाव रखें और महिलाओं को सम्मानजनक माहौल देने का संकल्प लें। उनके संदेश का मुख्य भाव है कि मां दुर्गा की आराधना केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। महिलाओं के साथ घर, समाज और सार्वजनिक स्थानों पर कैसा व्यवहार किया जाता है, यह भी हमारी सोच और संस्कार को दर्शाता है। ‘बेटी-बहन का सम्मान नहीं, तो मां की पूजा बेकार’ यह संदेश सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ता है। नवरात्रि में हम मां दुर्गा को शक्ति का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं। ऐसे में अपने आसपास की महिलाओं के साथ सम्मान और समानता का व्यवहार करना भी जरूरी है। महिलाओं का सम्मान सिर्फ अच्छी बातें कहने तक सीमित नहीं है। उनकी राय सुनना, उनकी पसंद और फैसलों का आदर करना, भेदभाव से बचना और उन्हें सुरक्षित माहौल देना भी इसका हिस्सा है। शिवराज सिंह चौहान की अपील इसी बात पर जोर देती है कि धार्मिक आस्था और सामाजिक जिम्मेदारी एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। Women Respect और Safety क्यों है जरूरी? महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने में परिवार, समाज और प्रशासन सभी की भूमिका होती है। बेटियों को आगे बढ़ने के अवसर देना, उनके साथ भेदभाव न करना और गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। अक्सर त्योहारों के दौरान हम अच्छे विचारों और संकल्पों की बात करते हैं, लेकिन असली बदलाव तब आता है, जब इन विचारों को रोजमर्रा के जीवन में अपनाया जाए। घर में बेटियों को बराबरी का अधिकार देना और महिलाओं की स्वतंत्रता का सम्मान करना इसी बदलाव की शुरुआत हो सकती है। नवरात्रि पर लें महिलाओं के सम्मान का संकल्प नवरात्रि आस्था, शक्ति और सकारात्मक बदलाव का पर्व है। इस दौरान मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। यह अवसर अपने व्यवहार और सोच पर विचार करने का भी है। शिवराज सिंह चौहान की अपील का संदेश यही है कि मां दुर्गा की पूजा के साथ बेटियों, बहनों और माताओं को सम्मान देना भी हमारी जिम्मेदारी है। महिलाओं के प्रति आदर केवल नवरात्रि के नौ दिनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। क्योंकि पूजा का भाव तभी सार्थक होता है, जब हम अपने व्यवहार में भी सम्मान, समानता और संवेदनशीलता को जगह दें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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