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Tariff Relief

US ने India को दी 90 दिन की Tariff Relief, PM Modi-Trump Deal से बढ़ेगा ₹500 Billion का Trade

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त आयात शुल्क (Tariffs) पर 90 दिनों की राहत देने का फैसला किया है। इस फैसले का स्वागत करते हुए भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा कि भारत इस पूरे मामले को बेहद कुशलता से संभाल रहा है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फरवरी में ही इस दिशा में सहमति बन चुकी थी। PM Modi और Trump पहले ही कर चुके थे Trade Deal की Planning पीयूष गोयल ने ANI से बातचीत में कहा,“PM नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप ने फरवरी में ही यह तय कर लिया था कि दोनों देश एक Bilateral Trade Agreement पर साइन करेंगे, जिससे व्यापार 500 अरब डॉलर तक पहुंच सकेगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों देशों के बीच बातचीत अच्छी प्रगति कर रही है और इस 90 दिनों की राहत से बातचीत को अंतिम रूप देने में मदद मिलेगी। Exporters को मिली राहत, अब समझौतों पर तेज़ी से होगा काम फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के अध्यक्ष एस.सी. रल्हान ने भी अमेरिकी प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा:“यह हमारे निर्यातकों के लिए बहुत बड़ी राहत है। यह 90 दिन की राहत एक कूटनीतिक खिड़की की तरह है, जिसमें हम अहम व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दे सकते हैं।” वाणिज्य मंत्रालय ने भी आश्वासन दिया है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते को जल्द से जल्द फाइनल किया जाएगा। चीन पर टैरिफ बढ़ा, लेकिन India को मिली छूट ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता के बीच अमेरिका ने चीन पर टैरिफ बढ़ाकर 125% कर दिया है, जबकि भारत सहित कई अन्य देशों को 90 दिनों की छूट दी गई है। हालांकि भारत पर अब भी 10% का बेसिक टैरिफ लागू है, जो 5 अप्रैल से प्रभावी हुआ है। अमेरिका ने भारत पर कुल मिलाकर 26% अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिसमें से अधिकतर पर अस्थायी राहत दी गई है। क्या है आगे की राह? इस अस्थायी राहत के चलते भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह वार्ता सफल रहती है, तो दोनों देशों के बीच $500 अरब डॉलर का व्यापार संभव है। इससे न केवल व्यापार संबंध बेहतर होंगे, बल्कि निवेश और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे। निष्कर्ष:अमेरिका की तरफ से दी गई यह 90 दिनों की टैरिफ राहत भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह न केवल एक्सपोर्टर्स को राहत देगा, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का रास्ता खोलता है।
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तहव्वुर राणा

26/11 का गुनहगार तहव्वुर राणा जल्द भारत में, US कोर्ट ने प्रत्यर्पण को दी मंज़ूरी

2008 के मुंबई आतंकी हमलों (26/11) के एक मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा को अमेरिका से भारत लाया जा रहा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उसकी प्रत्यर्पण याचिका खारिज कर दी, जिससे भारत आने का रास्ता साफ हो गया है। भारत की जांच एजेंसियों NIA (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) और RAW की टीमें पहले से ही अमेरिका में हैं और उसे जल्द भारत लाया जाएगा। कौन है तहव्वुर राणा? तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक हैं, जिनका नाम 26/11 हमलों की साजिश में सामने आया था। वे डेविड कोलमैन हेडली के करीबी दोस्त हैं, जो पहले ही भारत की अदालत में हमलों की साजिश कबूल कर चुका है। हेडली ने भारत में रेकी की थी और आतंकियों को जानकारी दी थी – जिसमें तहव्वुर राणा की भूमिका सहयोगी की थी। राणा पर आरोप है कि उसने फर्जी बिजनेस वीज़ा और ट्रैवल एजेंसी के जरिए हेडली को भारत भेजा, ताकि वह मुंबई में हमले की तैयारी कर सके। कैसे हुआ प्रत्यर्पण का रास्ता साफ? राणा लंबे समय से अमेरिका में जेल में बंद था। भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की थी। हालांकि, राणा ने अदालत में कई बार याचिकाएं डालकर भारत भेजे जाने का विरोध किया। मगर आखिरकार, अमेरिका की अदालत ने साफ कर दिया कि उसे भारत भेजा जा सकता है। यह फैसला भारत की कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह भी संदेश गया है कि आतंक के खिलाफ भारत वैश्विक मंच पर गंभीरता से काम कर रहा है। 26/11 हमलों की पृष्ठभूमि 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर आतंकी हमला हुआ था। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने शहर के कई बड़े स्थानों जैसे ताज होटल, ओबेरॉय, सीएसटी स्टेशन, नरीमन हाउस आदि को निशाना बनाया था। इस हमले में 166 मासूम लोगों की जान गई, जिनमें कई विदेशी नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे। भारत ने इस घटना को कभी नहीं भूला और लगातार दोषियों को सजा दिलाने की कोशिश की। भारत के लिए क्यों है यह महत्वपूर्ण? तहव्वुर राणा का भारत आना 26/11 के पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए न्याय की ओर एक बड़ा कदम है। इससे NIA को जांच को आगे बढ़ाने और नए सबूत जुटाने में मदद मिलेगी। इससे यह भी साबित होता है कि भारत अब केवल आतंकी हमलों को सहने वाला देश नहीं, बल्कि उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाने वाला राष्ट्र बन चुका है।
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Mitra Vibhushan

PM Modi को मिला Sri Lanka का ‘Mitra Vibhushan’, कहा– पड़ोसी ही नहीं, सच्चा दोस्त है श्रीलंका

भारत और श्रीलंका के बीच गहरे और ऐतिहासिक संबंधों की एक और मिसाल उस वक्त सामने आई जब श्रीलंका सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च विदेशी सम्मान “मित्र विभूषण” से नवाजा। इस सम्मान के जरिए श्रीलंका ने पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा दिए गए सहयोग, विशेष रूप से आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक क्षेत्रों में किए गए योगदान की सराहना की। PM Modi बोले – श्रीलंका भारत का सिर्फ पड़ोसी नहीं, बल्कि भरोसेमंद मित्र है सम्मान प्राप्त करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “यह सिर्फ एक सम्मान नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच गहरे विश्वास और मित्रता का प्रतीक है। श्रीलंका सिर्फ भारत का पड़ोसी नहीं, बल्कि एक ऐसा मित्र है जो हर परिस्थिति में साथ खड़ा रहता है।” क्या है ‘मित्र विभूषण’ सम्मान? ‘मित्र विभूषण’ श्रीलंका का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है जो किसी विदेशी नेता को दिया जाता है। अब तक यह सम्मान केवल तीन बार दिया गया है, जिससे इसकी विशेषता का अंदाजा लगाया जा सकता है। द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा पीएम मोदी की यह यात्रा श्रीलंका के नए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के न्योते पर हुई। दोनों देशों ने कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देने पर सहमति जताई, जिनमें प्रमुख हैं: चीन के प्रभाव को संतुलित करने की रणनीति भारत और श्रीलंका के इस सहयोग को चीन के बढ़ते प्रभाव के मुकाबले में एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है। हंबनटोटा बंदरगाह पर चीन की उपस्थिति को देखते हुए भारत की यह साझेदारी श्रीलंका के लिए भी संतुलन का काम करेगी। सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का ज़िक्र पीएम मोदी ने कहा कि भारत और श्रीलंका के संबंध केवल राजनीतिक या आर्थिक नहीं हैं, बल्कि ये सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में यह साझेदारी पूरे दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और विकास का रास्ता खोलेगी।
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China ने USA पर 34% जवाबी टैरिफ लगाया, राष्ट्रपति ट्रम्प बोले – ‘वो डर गए हैं, ये कदम उन्हें भारी पड़ेगा’

“देश हरपल” विशेष रिपोर्ट 📅 दिनांक: 4 अप्रैल 2025✍🏻 देश हरपल ब्यूरो अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक जंग ने एक बार फिर तगड़ा मोड़ ले लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, जो 2024 में दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, अब चीन को आर्थिक मोर्चे पर घेरने में पूरी आक्रामकता दिखा रहे हैं। अमेरिका ने लगाया 34% टैरिफ, चीन ने दिया जवाब हाल ही में राष्ट्रपति ट्रम्प ने 60 देशों पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसमें चीन पर 34% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया। इससे पहले ट्रम्प प्रशासन ने एक महीने में दो बार चीन पर 10-10% टैरिफ लगाया था। अब चीन पर कुल मिलाकर 54% आयात शुल्क लागू हो चुका है।इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिका पर 34% का जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है, जो 10 अप्रैल 2025 से लागू होगा। ट्रम्प ने इस मुद्दे पर ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा: “चीन ने गलत कदम उठाया है। वे घबरा गए हैं। यह एक ऐसी चीज है जिसे वे बर्दाश्त नहीं कर सकते। चीन का जवाबी टैरिफ उन्हें बहुत भारी पड़ेगा।” चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “अमेरिका का यह कदम WTO नियमों का उल्लंघन है। इससे चीन के कानूनी व्यापारिक अधिकारों का हनन हो रहा है। हम अपने अधिकारों की रक्षा करेंगे।” ट्रम्प की नीति: ‘अमेरिका फर्स्ट’ 2.0 ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से ही उन्होंने व्यापारिक मोर्चे पर ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को और तेज़ कर दिया है। ट्रम्प का मानना है कि चीन वर्षों से अमेरिकी व्यापार और टेक्नोलॉजी का शोषण करता आया है और अब समय आ गया है कि अमेरिका मजबूत जवाब दे। ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि नए टैरिफ से चीन की अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा और अमेरिकी उद्योगों को फायदा होगा। वैश्विक बाजारों पर असर इस व्यापार युद्ध के कारण वैश्विक बाजारों में हलचल देखने को मिल रही है। एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट आई है, वहीं डॉलर में मजबूती देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबा चला, तो इससे वैश्विक सप्लाई चेन और आर्थिक स्थिरता पर बुरा असर पड़ सकता है। भारत के लिए अवसर या चुनौती? भारत के लिए यह परिस्थिति दोधारी तलवार की तरह है। एक ओर जहां अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते तनाव से भारत को वैकल्पिक सप्लायर बनने का मौका मिल सकता है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर भारत की निर्यात नीति पर भी पड़ सकता है। निष्कर्ष:डोनाल्ड ट्रम्प की चीन को लेकर आक्रामक नीति एक बार फिर वैश्विक व्यापार जगत को नई दिशा दे रही है। आने वाले हफ्तों में इस व्यापार युद्ध का असर न केवल अमेरिका और चीन, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखेगा। 👉 देश-विदेश से जुड़ी ऐसी ही बड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहिए देश हरपल – हरपल आपके साथ।
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बैंकॉक में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की अहम मुलाकात: बांग्लादेश ने किया था बैठक का अनुरोध

रिपोर्ट: देश हरपल न्यूज | दिनांक: 4 अप्रैल 2025 बैंकॉक में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की अहम मुलाकात, बांग्लादेश ने खुद रखा था अनुरोध – दक्षिण एशिया में बदलते समीकरणों के बीच बड़ी कूटनीतिक बातचीत बैंकॉक में BIMSTEC सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के बीच एक विशेष मुलाकात हुई। यह मुलाकात अपने आप में कई राजनीतिक और कूटनीतिक संकेतों से भरी हुई मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो चुकी है और देश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरें अंतरराष्ट्रीय मंच पर चिंता का विषय बनी हुई हैं। बांग्लादेश की तरफ से हुआ था मुलाकात का अनुरोधमीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बैठक की पहल बांग्लादेश की ओर से की गई थी। मोहम्मद यूनुस जो कि एक प्रसिद्ध सामाजिक उद्यमी और ‘ग्रामीण बैंक’ के संस्थापक हैं, उन्होंने खुद पीएम मोदी से भेंट करने की इच्छा जताई थी। बांग्लादेश की मौजूदा सत्ता परिवर्तन के बीच यह कदम कई मायनों में महत्वपूर्ण है। राजनीतिक संदेशों से भरी बातचीतमाना जा रहा है कि यह मुलाकात सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि इसके जरिए बांग्लादेश की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भारत को एक भरोसा दिलाने की कोशिश की गई है। भारत, जो कि बांग्लादेश का सबसे करीबी और बड़ा पड़ोसी है, वहां के हालिया घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है। मोहम्मद यूनुस की पीएम मोदी से मुलाकात को वहां की नई राजनीतिक व्यवस्था के संभावित संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अल्पसंख्यकों पर हमलों की पृष्ठभूमि में मुलाकात पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध और ईसाई समुदायों पर हुए हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे वहां की सामाजिक स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। भारत इन मुद्दों को लेकर लगातार सतर्क रहा है। ऐसे में मोहम्मद यूनुस की यह मुलाकात यह संकेत भी देती है कि बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद, नई सरकार या उसके समर्थक भारत से रिश्तों को और बेहतर करना चाहते हैं। यूनुस को लेकर बांग्लादेश में भी उथल-पुथलयह भी ध्यान देने योग्य है कि मोहम्मद यूनुस खुद भी बांग्लादेश की राजनीति में एक विवादित शख्सियत रहे हैं। शेख हसीना की सरकार के कार्यकाल में उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले भी दर्ज हुए थे। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी छवि एक विचारशील और परिवर्तनकारी नेता की रही है। भारत-बांग्लादेश रिश्तों में नया अध्याय?बैंकॉक में हुई इस मुलाकात को भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के संभावित नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखा जा सकता है। पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की यह बातचीत केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि रणनीतिक भी हो सकती है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के संबंध किस दिशा में बढ़ते हैं, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा। देश और विदेश की ऐसी ही अहम खबरों के लिए जुड़े रहिए — देश हरपल न्यूज़ के साथ।
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Donald Trump के 26% टैरिफ

Donald Trump के 26% टैरिफ से भारत को नुकसान या फायदा? सरकार कर रही है असर का विश्लेषण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में 26% अतिरिक्त टैरिफ (टैक्स) लगाने का ऐलान किया है। इस फैसले का असर भारत सहित कई देशों पर पड़ सकता है। भारत सरकार इस टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण कर रही है और इसका हल निकालने की कोशिश कर रही है। टैरिफ कब लागू होगा? टैरिफ दो चरणों में लागू होगा: भारत सरकार की रणनीति भारत सरकार ने पहले से ही इस स्थिति से निपटने की तैयारी कर रखी थी। वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पर नजर बनाए रखने के लिए एक कंट्रोल रूम बनाया था। सरकार का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है, क्योंकि अभी बातचीत की गुंजाइश बाकी है। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिया है कि अगर कोई देश अमेरिका की व्यापारिक चिंताओं को दूर करता है, तो टैरिफ में राहत मिल सकती है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कोशिशें भारत ने इस टैरिफ से छूट पाने के लिए पहले ही अमेरिका से बातचीत शुरू कर दी थी। इसी सिलसिले में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पिछले महीने अमेरिका गए थे। दोनों देशों के बीच एक व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसका पहला चरण सितंबर-अक्टूबर तक पूरा करने की योजना है। इसके अलावा, भारत पहले ही कुछ कदम उठा चुका है: डोनाल्ड ट्रंप का बयान और भारत पर असर 2 अप्रैल को ट्रंप ने इस टैरिफ की घोषणा की और इसे “लिबरेशन डे” (मुक्ति दिवस) करार दिया। उन्होंने कहा कि यह अमेरिकी उद्योग को फिर से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। ट्रंप ने भारत की व्यापार नीतियों की आलोचना करते हुए कहा, “भारत हमसे 52% टैक्स लेता है, जो बहुत ज्यादा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन मैंने उनसे कहा कि यह सही नहीं है।” उन्होंने बताया कि अमेरिका ने भारत पर “डिस्काउंटेड” यानी रियायती टैरिफ लगाया है, जो 26% है। भारत पर क्या असर पड़ेगा? भारत सरकार इस टैरिफ के प्रभाव का विश्लेषण कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है। क्या होगा आगे?
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Trump

ट्रंप का ‘डर्टी-15’ लिस्ट: किन देशों पर गिरेगी भारी टैरिफ की गाज?

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति और 2024 के चुनावी दौड़ में फिर से मैदान में उतरे डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संभावित आर्थिक एजेंडे का एक बड़ा खुलासा किया है। ट्रंप ने ‘डर्टी-15’ नाम से उन 15 देशों की सूची तैयार की है, जिन पर वह भारी टैरिफ लगाने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि ये देश अमेरिका के साथ व्यापार में “अनुचित लाभ” उठा रहे हैं और इसलिए इन्हें ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ (पारस्परिक शुल्क) देना होगा। क्या है ट्रंप की ‘डर्टी-15’ लिस्ट? ट्रंप ने अमेरिका के व्यापारिक हितों को ध्यान में रखते हुए उन देशों की पहचान की है, जिन पर नए टैरिफ लगाए जाएंगे। इनमें चीन, भारत, मैक्सिको, जर्मनी, वियतनाम, जापान, कनाडा और कई अन्य देश शामिल हैं। ट्रंप के मुताबिक, ये देश अमेरिका के बाजारों से फायदा उठाते हैं लेकिन बदले में समान अवसर नहीं देते। किन देशों को झेलनी पड़ेगी टैरिफ की मार? इस लिस्ट में प्रमुख रूप से वे देश हैं जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर निर्यात करते हैं, लेकिन बदले में अमेरिकी सामान पर ऊंचे शुल्क लगाते हैं या व्यापार में असंतुलन बनाए रखते हैं। भारत और चीन खासतौर पर इस नीति से प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि दोनों देश अमेरिका को बड़े पैमाने पर टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटोमोबाइल और आईटी सेक्टर में सेवाएं और उत्पाद निर्यात करते हैं। ट्रंप की व्यापार नीति और प्रभाव ट्रंप का यह कदम उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे अमेरिका में कुछ उद्योगों को फायदा हो सकता है, लेकिन कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों और निर्यात पर निर्भर देशों को बड़ा झटका लग सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ट्रंप 2024 का चुनाव जीतते हैं, तो उनकी टैरिफ नीति वैश्विक व्यापार को अस्थिर कर सकती है और चीन, भारत जैसे देशों के साथ आर्थिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है। भारत पर असर? भारत, जो अमेरिका के लिए एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है, ट्रंप की इस नई नीति से प्रभावित हो सकता है। अगर ट्रंप भारी टैरिफ लगाते हैं, तो भारत के टेक्सटाइल, आईटी और फार्मास्युटिकल उद्योगों को नुकसान हो सकता है। क्या ट्रंप का यह फैसला वाकई अमेरिका के हित में होगा या वैश्विक व्यापार के लिए एक नई चुनौती खड़ी करेगा? यह आने वाले समय में साफ होगा।
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नेपाल में पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह नजरबंद, मुकदमा चलाने की तैयारी, राजा समर्थक बड़े नेता गिरफ्तार

नेपाल में हाल ही में पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह के समर्थकों द्वारा राजशाही की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए हैं। इन प्रदर्शनों के बीच, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और अन्य प्रमुख नेताओं ने स्पष्ट रूप से कहा है कि नेपाल में राजशाही की वापसी संभव नहीं है। प्रधानमंत्री ओली ने सुझाव दिया कि यदि पूर्व राजा को अपनी लोकप्रियता पर विश्वास है, तो उन्हें संविधान के अनुसार अपनी पार्टी बनाकर चुनाव लड़ना चाहिए नेपाल में राजशाही समर्थक गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है, जिसमें पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह की सक्रिय भूमिका की चर्चा हो रही है। राजशाही समर्थक पार्टी ‘राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी’ भी देश के विभिन्न हिस्सों में राजशाही की बहाली के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित कर रही है प्रधानमंत्री ओली ने इन गतिविधियों के पीछे भारत की भूमिका का आरोप लगाया है और संसद में इस मुद्दे को उठाने की बात कही है। उन्होंने पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह को गिरफ्तार कराने की भी कसम खाई है इन घटनाओं के बीच, नेपाल की राजनीतिक स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। पूर्व राजा के समर्थकों की बढ़ती सक्रियता और सरकार की सख्त प्रतिक्रिया से देश में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। आने वाले दिनों में नेपाल की राजनीति में और भी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
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भूकंप से म्यांमार और थाईलैंड में भारी तबाही, 10 हजार से ज्यादा मौतों की आशंका

भूकंप से म्यांमार और थाईलैंड में भारी तबाही, 10 हजार से ज्यादा मौतों की आशंका

म्यांमार और थाईलैंड में शुक्रवार को आए भीषण भूकंप ने भारी तबाही मचाई। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के मुताबिक, इस भूकंप में मरने वालों की संख्या 10 हजार से ज्यादा हो सकती है। भूकंप की तीव्रता 7.7 थी और इसके झटके भारत, बांग्लादेश और चीन तक महसूस किए गए। बैंकॉक में गिरी 30 मंजिला इमारत थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में इस भूकंप के कारण एक 30 मंजिला इमारत गिर गई। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 110 लोग मलबे में दब गए। स्थानीय प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज कर दिया है। म्यांमार में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, म्यांमार की सैन्य सरकार ने बताया कि अब तक 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 2,300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इस आपदा के कारण म्यांमार के 6 राज्यों में और पूरे थाईलैंड में इमरजेंसी लागू कर दी गई है। https://twitter.com/Top_Disaster/status/1905545455364194747 200 साल का सबसे बड़ा भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि यह म्यांमार और थाईलैंड में पिछले 200 साल का सबसे बड़ा भूकंप है। लोग डर के कारण घरों से बाहर आ गए और कई जगहों पर सड़कें फट गईं। भारत ने भेजी राहत सामग्री भूकंप के तुरंत बाद भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत सरकार ने म्यांमार को 15 टन राहत सामग्री की पहली खेप भेजी है। इस मिशन को ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ नाम दिया गया है। राहत सामग्री में दवाइयां, भोजन और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई आपबीती बैंकॉक में रह रहे भारतीय नागरिकों ने इस भूकंप के अनुभव साझा किए। एक व्यक्ति ने कहा, ‘हमने अपनी आंखों के सामने बिल्डिंग गिरते देखी, यह बहुत डरावना था। ऐसा पहले कभी नहीं देखा।’ अभी भी जारी हैं राहत कार्य मलबे में फंसे लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन मिलकर लोगों की मदद कर रहे हैं।
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ट्रंप से नाराज कनाडा ने अमेरिका से तोड़े रिश्ते

ट्रंप से नाराज कनाडा ने अमेरिका से तोड़े रिश्ते? जानिए इस विवाद का सच

अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में हाल ही में तनाव बढ़ गया है। इसकी वजह अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान हैं, जिनमें उन्होंने कनाडा को अमेरिका में मिलाने का सुझाव दिया। इसके बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस प्रस्ताव को सख्ती से खारिज कर दिया। इस बयानबाजी के बाद दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट देखने को मिल रही है। आइए जानते हैं कि इस विवाद का क्या असर हो सकता है। ट्रंप ने दिया कनाडा को अमेरिका में शामिल करने का सुझाव डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि अमेरिका हर साल कनाडा को 100 अरब डॉलर से अधिक की सब्सिडी देता है। इस आधार पर उन्होंने सुझाव दिया कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बना देना चाहिए। ट्रंप ने कहा कि इससे दोनों देशों को आर्थिक और सुरक्षा लाभ होंगे। ट्रूडो ने दिया करारा जवाब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ट्रंप के इस प्रस्ताव को सख्ती से नकार दिया। उन्होंने कहा कि कनाडा हमेशा स्वतंत्र और संप्रभु रहेगा। ट्रूडो ने स्पष्ट किया कि उनका देश अमेरिका के अधीन नहीं जाएगा और अपनी स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं करेगा। क्या कनाडा ने अमेरिका से तोड़ दिए रिश्ते? हालांकि, इस बयानबाजी के बाद भी कनाडा और अमेरिका के बीच राजनयिक और व्यापारिक रिश्ते यथावत हैं। अभी तक दोनों देशों ने अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया है। हालांकि, इस मुद्दे को लेकर दोनों देशों में तनाव जरूर बढ़ गया है। इस विवाद का असर क्या होगा? इस तरह के बयानों से दोनों देशों के व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, ऐसे में अगर तनाव बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक बाजार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, ट्रूडो सरकार अमेरिका के साथ अपने संबंधों को संतुलित बनाए रखने की कोशिश कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में यह विवाद और कितना गहराता है या फिर दोनों देश इसे सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।
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Tibet-Nepal

Tibet-Nepal Border पर भारी तबाही, 11 दिन बाद Foreign Journalists ने देखा Ground Reality

Tibet-Nepal की सीमा पर 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और मलबे की तबाही के 11 दिन बाद आखिरकार विदेशी मीडिया को तिब्बत के प्रभावित इलाके तक पहुंच मिली। चीन के विदेश मंत्रालय की व्यवस्था के तहत चुनिंदा International Journalists को Gyirong County ले जाया गया, जहां आपदा के बाद की तस्वीरें पहली बार दुनिया के सामने ज्यादा साफ तौर पर आई हैं। यह आपदा इतनी भयावह थी कि चीन-नेपाल सीमा पर मौजूद कभी व्यस्त रहने वाला Gyirong Border Crossing मलबे और कीचड़ में बदल गया। पांच मंजिला कस्टम बिल्डिंग समेत कई ढांचे बाढ़ की चपेट में आ गए। मौके पर पहुंचे पत्रकारों ने बड़े पैमाने पर तबाही देखी, जबकि Rescue Teams अब भी मलबे के बीच लापता लोगों की तलाश में जुटी हैं। Nepal में 5,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता इस प्राकृतिक आपदा का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि नेपाल और तिब्बत में मिलाकर 5,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों की संख्या भी 1,300 के पार पहुंच चुकी है। नेपाल में बड़ी संख्या में लापता लोग Hydropower Projects से जुड़े कर्मचारी हैं। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक करीब 900 हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता हैं। इनमें 121 लोगों के सुरंगों के भीतर फंसे होने की आशंका जताई गई है। मलबे से घिरी सुरंगों तक पहुंचना Rescue Teams के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। तबाही के बीच जिंदा बचने की उम्मीद इतनी बड़ी त्रासदी के बीच कुछ घटनाओं ने उम्मीद भी जगाई है। नेपाल में दो हाइड्रोपावर कर्मचारियों को करीब नौ दिन बाद सुरंग से जिंदा बाहर निकाला गया। उनके बचने की कहानी ने उन परिवारों में भी उम्मीद पैदा की है, जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। बचाव अभियान में नेपाल के साथ भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और अमेरिका समेत कई देशों की टीमें मदद कर रही हैं। मुश्किल पहाड़ी इलाका, भारी मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें और सुरंगों में जमा पानी Rescue Operation को लगातार कठिन बना रहे हैं। Tibet में 43 मौतें, 519 लोग Missing चीन की ओर से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक तिब्बत के Gyirong इलाके में अब तक 43 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 519 लोग लापता हैं। इनमें 23 देशों के 261 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं। यही वजह है कि लापता लोगों के परिवार लगातार जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। कुछ विदेशी राजनयिकों और परिवारों ने चीन से राहत अभियान और Missing Persons को लेकर ज्यादा जानकारी साझा करने की मांग की है। Foreign Media की पहुंच पर क्यों उठे सवाल? आपदा के शुरुआती दिनों में तिब्बत के प्रभावित हिस्से तक विदेशी पत्रकारों की पहुंच सीमित रही। नेपाल की तरफ से आपदा की तस्वीरें और जमीनी रिपोर्ट लगातार सामने आती रहीं, लेकिन चीनी हिस्से की स्थिति को लेकर जानकारी अपेक्षाकृत कम उपलब्ध थी। अब 11 दिन बाद चीन की ओर से चुनिंदा विदेशी पत्रकारों को Gyirong ले जाने के बाद सीमा क्षेत्र में हुई तबाही की तस्वीरें सामने आई हैं। इससे वहां चल रहे Search and Rescue Operation और नुकसान के वास्तविक स्तर को समझने में मदद मिली है। भारत के नागरिक भी प्रभावित इस आपदा में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार 275 भारतीय नागरिक अब भी लापता बताए गए हैं, जबकि 166 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। भारत ने नेपाल के राहत अभियान में करीब 95 टन राहत सामग्री और विशेषज्ञों की टीम भेजी है। भारतीय टीमों में Tunnel Rescue, Forensic और Medical Experts भी शामिल हैं। इन टीमों की मदद से मलबे और सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश का अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है। सिर्फ बाढ़ नहीं, Himalayan Disaster का बड़ा संकेत इस पूरी घटना ने हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते ग्लेशियर और Glacial Lake से जुड़े जोखिमों पर भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के लिए यह हादसा केवल एक स्थानीय प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि पहाड़ी इलाकों में Infrastructure और Disaster Preparedness को लेकर बड़ी चेतावनी भी है। फिलहाल Nepal और Tibet में हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। राहत और बचाव दल मलबे, सुरंगों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में लगातार Search Operation चला रहे हैं। कुछ लोगों के कई दिनों बाद जिंदा मिलने से उम्मीद जरूर बनी है, लेकिन 5,500 से ज्यादा लोगों का अब भी लापता होना इस आपदा की भयावहता को बयां करता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Vishwas Sarang

Vishwas Sarang को बहनों का बेशुमार प्यार, Narela Rakshabandhan Mahotsav में बना नया उत्साह

नरेला विधानसभा क्षेत्र में चल रहे Rakshabandhan Mahotsav 2026 में रविवार को भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। वार्ड नंबर 36, 37 और 70 में आयोजित कार्यक्रम के पांचवें दिन 24 हजार 604 बहनों ने मंत्री Vishwas Sarang को रक्षासूत्र बांधा। बहनों ने राखी बांधकर उनके प्रति स्नेह और आशीर्वाद जताया। कार्यक्रम में पहुंचते ही मंत्री विश्वास सारंग का स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। ढोल-ताशों और DJ की गूंज के बीच उन्हें बग्गी से मुख्य कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। मंच पर पहुंचने के बाद सारंग ने बहनों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। बहनों के प्यार को बताया अपनी ताकत रक्षाबंधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वास सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच विश्वास, स्नेह और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में बहनों का प्यार और आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में पहुंचीं बहनों से उन्होंने राखी बंधवाई और उनका आशीर्वाद लिया। सारंग ने कहा कि लाखों बहनों का स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। चौथे दिन भी उमड़ा था बहनों का सैलाब नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में बहनें कार्यक्रम में पहुंची थीं। उस दिन 31,117 बहनों ने मंत्री विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। आयोजकों के अनुसार, पिछले साल के महोत्सव में कुल 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने रक्षासूत्र बांधा था। इस बार भी लगातार बढ़ रही भागीदारी को देखते हुए पिछले साल का आंकड़ा पार होने की उम्मीद जताई जा रही है। 7 सितंबर को इन दो वार्डों में होगा आयोजन नरेला रक्षाबंधन महोत्सव का अगला चरण 7 सितंबर 2026 को होगा। इस दिन दो वार्डों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में बहनों के शामिल होने की उम्मीद है। महोत्सव के जरिए रक्षाबंधन के पारंपरिक रिश्ते को सामाजिक जुड़ाव और भाईचारे के भाव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। नरेला क्षेत्र में लगातार कई दिनों से चल रहे इस आयोजन में बहनों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। पांचवें दिन 24,604 रक्षासूत्र बांधे जाने के साथ महोत्सव का उत्साह और बढ़ गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM रेखा गुप्ता

Satya Niketan हादसे पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, Deputy Commissioner समेत 5 Suspend

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। पांच मंजिला इमारत के अचानक गिरने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद CM रेखा गुप्ता ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। MCD के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को Suspend कर दिया गया है। सरकार के इस एक्शन के बाद नगर निगम के कामकाज और इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद MCD में बड़ा Action सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद MCD ने पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर सहित इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इमारत की हालत को लेकर पहले कोई शिकायत या नोटिस जारी हुआ था या नहीं और निर्माण या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी इमारत बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग का हिस्सा ढहा, उसका इस्तेमाल PG accommodation के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय वहां कई लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। धूल का गुबार उठ गया और लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचने लगे। इसके बाद दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। 7 लोगों की मौत, कई घायल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद आसपास के लोगों में भी डर का माहौल है। स्थानीय स्तर पर दूसरी पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। Building Owner भी पुलिस की गिरफ्त में मामले में पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई थीं। बाद में उसे भिवाड़ी से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब हादसे से जुड़े दस्तावेज, बिल्डिंग की स्थिति और निर्माण या मरम्मत से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। आसपास की इमारतों की भी जांच सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने आसपास की इमारतों की स्थिति को लेकर भी जांच शुरू की है। अधिकारियों की नजर खास तौर पर उन भवनों पर है जो पुराने हैं या जिनमें निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा है। इस घटना ने दिल्ली में old buildings, PG और construction safety को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इमारत में पहले से कोई खामी थी, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया? सरकार के Action से उठे कई सवाल MCD के पांच अधिकारियों का निलंबन सरकार की ओर से उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। सत्य निकेतन की इस घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में हादसे की असली वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM House

CM House March पर Police का पहरा, Hamidia में Intern Doctors से धक्का-मुक्की

अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास (CM House) की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन हमीदिया अस्पताल के पास पुलिस ने उनका रास्ता रोक दिया। डॉक्टरों को आगे जाने से रोकने के लिए पुलिस ने आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। इस दौरान डॉक्टरों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन को देखते हुए हमीदिया अस्पताल परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मौके पर Water Cannon भी तैयार रखा गया। CM House की तरफ मार्च करना चाहते थे डॉक्टर इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसी सिलसिले में डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया। डॉक्टरों का समूह हमीदिया अस्पताल से आगे बढ़ने लगा तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस की Barricading के बाद डॉक्टरों ने मौके पर नारेबाजी शुरू कर दी। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे नहीं जाने के लिए समझाती रही। चारों तरफ से रास्ते किए गए बंद प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हमीदिया के आसपास कई रास्तों को बंद कर दिया। बैरिकेड लगाकर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। मौके पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई, ताकि भीड़ को संभाला जा सके। Water Cannon की मौजूदगी से साफ था कि प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में था। हालांकि, डॉक्टरों का प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर जारी रहा। मांगों पर सरकार से जवाब चाहते हैं Intern Doctors प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। CM House तक मार्च के जरिए उनका उद्देश्य सीधे सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना था। फिलहाल पुलिस ने डॉक्टरों को मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोक दिया है। हमीदिया अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और स्थिति पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा डॉक्टरों की मांगों और सरकार की ओर से संभावित बातचीत को लेकर है। अब देखना होगा कि प्रदर्शन के बाद प्रशासन और इंटर्न डॉक्टरों के बीच क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Rate Today: सोने की कीमत ₹2409 गिरी, चांदी भी ₹3967 सस्ती

सोना खरीदने वालों के लिए सोमवार को बाजार से थोड़ी राहत की खबर आई। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोने (Gold) और चांदी (Silver) दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। आपके दिए बाजार आंकड़ों के मुताबिक सोना करीब ₹2,409 और चांदी करीब ₹3,967 सस्ती हुई है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख, जबकि एक किलो चांदी करीब ₹2.35 लाख के आसपास पहुंच गई। हालांकि, अलग-अलग बाजार, शुद्धता और कारोबार के समय के हिसाब से रेट में अंतर हो सकता है। सोमवार को एक अन्य बाजार रिपोर्ट में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,52,590 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,36,240 प्रति किलो बताया गया। सोने के भाव में फिर आई नरमी पिछले कुछ समय से रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रहा Gold सोमवार को दबाव में नजर आया। घरेलू बाजार में भी इसकी कीमत में कमजोरी देखने को मिली। MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत इससे कम है। अगर आप ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं तो ध्यान रखें कि दुकान पर मिलने वाला अंतिम रेट बाजार भाव से अलग हो सकता है। Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ चांदी में भी कमजोरी रही। चांदी करीब ₹3,967 प्रति किलो सस्ती होने के बाद लगभग ₹2.35 लाख प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। हालांकि, सोमवार के अलग-अलग बाजार अपडेट में चांदी का भाव करीब ₹2.36 लाख प्रति किलो भी बताया गया है। इससे साफ है कि कारोबार के समय के साथ कीमतों में बदलाव हो रहा है। आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना और चांदी? कीमती धातुओं में इस गिरावट का कनेक्शन सीधे ग्लोबल मार्केट से जुड़ा है। अमेरिका के रोजगार आंकड़े उम्मीद से मजबूत रहने के बाद वहां Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदली हैं। मजबूत अमेरिकी जॉब डेटा के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लेकर दांव बढ़े हैं। इसका असर सोने पर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Spot Gold करीब 0.7% नीचे आया। वहीं Silver में भी लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। अब आगे क्या होगा? अब बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है। इस सप्ताह PPI और CPI जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होने हैं। इनसे Federal Reserve की अगली ब्याज दर नीति को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में Gold और Silver में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशकों के साथ-साथ शादी या त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले लोगों की भी बाजार पर नजर बनी हुई है। Gold खरीदते समय सिर्फ भाव न देखें अगर आप आज सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो सिर्फ 10 ग्राम का बाजार भाव देखकर फैसला न लें। 22K या 24K purity, GST, making charges और ज्वेलर के अन्य शुल्क अंतिम कीमत को बदल सकते हैं। अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के बीच भी रेट में अंतर हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने स्थानीय ज्वेलर से उसी समय का ताजा रेट जरूर पता करें। बाजार में तेजी से बदलाव होने के कारण सुबह और शाम के भाव में भी अंतर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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