एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडरों में कथित गड़बड़ी के मामले में मंगलवार को पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO उदित प्रकाश राय भी शामिल हैं।
ACB का आरोप है कि STP के टेंडरों की शर्तें इस तरह तैयार की गई थीं, जिससे एक खास कंपनी को फायदा पहुंचाया जा सके। जांच एजेंसी के मुताबिक, उदित प्रकाश राय को कथित तौर पर ₹1.52 करोड़ की रिश्वत दी गई थी।
सत्येंद्र जैन और उदित प्रकाश राय के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व कॉन्ट्रैक्चुअल कंसल्टेंट अंकित श्रीवास्तव तथा कंपनियों से जुड़े नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा को भी गिरफ्तार किया गया है। ACB की जांच अभी जारी है।
2024 में 872 दिन बाद जेल से बाहर आए थे जैन
सत्येंद्र जैन को ED ने 30 मई 2022 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। वह करीब 872 दिन जेल में रहे। 18 अक्टूबर 2024 को दिल्ली की अदालत ने उन्हें जमानत दी थी और इसके बाद वह तिहाड़ जेल से बाहर आए थे।
ED ने जैन पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए थे। जैन ने इन आरोपों से इनकार करते हुए इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया था।
क्या है दिल्ली जल बोर्ड का STP टेंडर मामला?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, दिल्ली जल बोर्ड के चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के अपग्रेडेशन से जुड़े टेंडरों में कथित अनियमितताएं हुईं।
आरोप है कि टेंडर की शर्तें इस तरह तैयार की गईं कि एक खास कंपनी को फायदा मिल सके। ED ने दिसंबर 2025 में इस मामले में सत्येंद्र जैन समेत 14 लोगों के खिलाफ करीब ₹17.70 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्जशीट दाखिल की थी।
ACB ने सत्येंद्र जैन पर क्या आरोप लगाए?
ACB के मुताबिक, इस मामले में 11 मई 2024 को केस दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि STP के अपग्रेडेशन के लिए जारी टेंडर की शर्तों में इस तरह बदलाव किए गए, जिससे एक विशेष कंपनी को फायदा पहुंचाया जा सके।
जांच में यह भी आरोप है कि ऐसी शर्तें जोड़ी गईं, जिनसे व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।
ACB के अनुसार, जांच के दौरान बिचौलियों और सरकारी अधिकारियों के बीच बातचीत से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले। ई-मेल की जांच में कथित तौर पर यह सामने आया कि टेंडर के दस्तावेज कंपनियों के साथ पहले ही साझा किए गए थे।
सत्येंद्र जैन पर पहले भी दर्ज हो चुके हैं मामले
आय से अधिक संपत्ति: CBI ने 24 अगस्त 2017 को सत्येंद्र जैन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था। आरोप था कि फरवरी 2015 से मई 2017 के बीच उनकी ज्ञात आय की तुलना में करीब ₹1.47 करोड़ की कथित विसंगति थी। बाद में CBI ने चार्जशीट दाखिल की और ED ने इससे जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच शुरू की।
मनी लॉन्ड्रिंग: CBI के मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग आरोपों में ED ने 30 मई 2022 को जैन को गिरफ्तार किया था। ED का आरोप था कि उनसे जुड़े चार कंपनियों के जरिए धन को वैध दिखाने की कोशिश की गई। जैन ने आरोपों से इनकार किया और इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया। मार्च 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया था।
CCTV प्रोजेक्ट: मार्च 2025 में दिल्ली ACB ने ₹571 करोड़ के CCTV कैमरा प्रोजेक्ट में कथित भ्रष्टाचार को लेकर सत्येंद्र जैन के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
स्कूल क्लासरूम निर्माण: ED ने 2025 में दिल्ली सरकार के क्लासरूम निर्माण प्रोजेक्ट में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी जैन को आरोपी बनाया था। इस मामले में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का नाम भी सामने आया था।
संपत्ति अटैचमेंट: सितंबर 2025 में ED ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत सत्येंद्र जैन से जुड़ी करीब ₹7.44 करोड़ की अचल संपत्तियां अटैच की थीं। ED का आरोप था कि ये संपत्तियां उन कंपनियों से जुड़ी थीं, जिन पर जैन का स्वामित्व या नियंत्रण था।
तिहाड़ में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों से भी चर्चा में रहे
सत्येंद्र जैन तिहाड़ जेल में कथित VIP ट्रीटमेंट को लेकर भी सुर्खियों में रहे थे। ED ने कोर्ट में हलफनामा और कुछ तस्वीरें पेश कर आरोप लगाया था कि उन्हें जेल में कई तरह की सुविधाएं मिल रही थीं।
जेल से सामने आए CCTV फुटेज में जैन को कथित तौर पर बैक और फुट मसाज कराते हुए देखा गया था। ED ने यह भी आरोप लगाया था कि जेल सुपरिंटेंडेंट नियमों के विपरीत उनसे मुलाकात करते थे और जेल में उनकी सुविधाओं को लेकर पूछताछ करते थे।
फिलहाल STP टेंडर मामले में ACB की जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मामले में आगे और नाम सामने आने की संभावना है।

