दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मंडल में आरपीएफ ने अंतर्राज्यीय रेलवे टिकट दलाल गिरोह का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान आरोपियों के मोबाइल से करीब 3.68 लाख रुपये कीमत के 60 रेलवे आरक्षित टिकटों से जुड़ी जानकारी मिली है। मामले में आरपीएफ ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
आरपीएफ निरीक्षक अंबिकापुर सुनीता मिंज की जांच में सामने आया कि टिकट दलालों का नेटवर्क छत्तीसगढ़ के बैकुंठपुर से लेकर उत्तर प्रदेश के बनारस और भदोही तक फैला था। जांच में एक संविदा कर्मचारी की भूमिका भी सामने आई है, जो कथित तौर पर अवैध तरीके से रेलवे के आरक्षित टिकट बनाता था।
बैकुंठपुर से बनारस तक फैला था नेटवर्क
जांच में पता चला कि बैकुंठपुर के सिटी पीआरएस से टिकट तैयार किए जाते थे। इसके बाद इन टिकटों को बनारस भेजा जाता था, जहां मौजूद दलाल इन्हें ग्राहकों को अधिक कीमत पर बेचते थे।
टिकटों को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने के लिए बस चालकों का इस्तेमाल किया जाता था। इस पूरे नेटवर्क के जरिए टिकटों पर कमीशन और अतिरिक्त रकम कमाई जाती थी।
मोबाइल में मिली 60 टिकटों की जानकारी
आरपीएफ की जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से व्हाट्सऐप चैट मिली। इसमें 60 रेलवे आरक्षित टिकटों से संबंधित जानकारी मौजूद थी। इन टिकटों की कुल कीमत करीब 3.68 लाख रुपये बताई गई है।
जांच में 14 टिकटों पर पीएनआर और अन्य जरूरी जानकारी हाथ से लिखी हुई भी मिली। आरपीएफ अब इन टिकटों से जुड़े लेन-देन और ग्राहकों की जानकारी की भी जांच कर रही है।
रेल अधिनियम के तहत 3 आरोपी गिरफ्तार
आरपीएफ ने मामले में रेल अधिनियम की धारा 143 के तहत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अविनाश कुमार (35), निवासी कोरिया; संजय विश्वकर्मा (48), निवासी भदोही, उत्तर प्रदेश और रवि शंकर (38), निवासी सूरजपुर के रूप में हुई है।
गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश
तीनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर आरपीएफ गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
आरपीएफ की इस कार्रवाई से रेलवे टिकट तैयार करने से लेकर उन्हें दूसरे राज्यों में भेजने और ग्राहकों को अधिक कीमत पर बेचने तक चल रहे एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

