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सलमान खान की को-स्टार का बड़ा खुलासा: कास्टिंग काउच का सामना, कहा- “मैं खुद को क्यों बेचूं?”

एक्ट्रेस Indira Krishnan ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने शुरुआती दिनों का एक चौंकाने वाला अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि एक समय उन्हें कास्टिंग काउच जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा, जहां उनसे “कंफर्टेबल होने” की बात कही गई थी। इस पर उन्होंने साफ इनकार करते हुए कहा था, “मैं खुद को क्यों बेचूं?” उनका यह बयान अब फिर से चर्चा में आ गया है। क्या बताया इंदिरा कृष्णन ने? इंदिरा कृष्णन के मुताबिक, करियर के शुरुआती दौर में उन्हें एक प्रोजेक्ट के लिए ऐसे संकेत मिले, जिन्हें वह असहज मानती थीं। उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने अपने आत्मसम्मान को प्राथमिकता दी और किसी भी तरह के समझौते से इनकार कर दिया। इंडस्ट्री में पुरानी बहस फिर चर्चा में कास्टिंग काउच को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में पहले भी कई बार खुलकर बयान सामने आ चुके हैं। कई कलाकारों ने इसे कड़वी सच्चाई बताया है, वहीं कुछ इसे व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित मानते हैं।
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INDDORE : 356 करोड़ के बैंक फ्रॉड में ED की बड़ी कार्रवाई: धनलक्ष्मी सॉल्वेक्स केस में 35.52 करोड़ की संपत्ति कुर्क

INDORE : 356 करोड़ के बैंक फ्रॉड में ED की बड़ी कार्रवाई: धनलक्ष्मी सॉल्वेक्स केस में 35.52 करोड़ की संपत्ति कुर्क

INDORE : इंदौर में सामने आए 356 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। धनलक्ष्मी सॉल्वेक्स से जुड़े इस केस में जांच एजेंसी ने इंदौर और शाजापुर में करीब 35.52 करोड़ रुपये की संपत्ति को कुर्क कर लिया है। ED की जांच में सामने आया है कि कंपनी और उससे जुड़े लोगों ने बैंकिंग सिस्टम के जरिए भारी वित्तीय अनियमितताएं कीं। आरोप है कि फर्जी लेन-देन और गलत दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये का गबन किया गया। कार्रवाई के तहत ED ने कई अचल संपत्तियों को जब्त किया है, जिनमें जमीन और अन्य व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं। टीम अब पूरे नेटवर्क और लेन-देन की कड़ी को खंगाल रही है। इस कार्रवाई के बाद संबंधित कारोबारियों और वित्तीय हलकों में हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में आगे और संपत्तियां भी कुर्क की जा सकती हैं।
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Pune में सनसनीखेज वारदात: मंगेतर को 400 फीट गहरी खाई में फेंका, बिजनेसमैन की बेटी पर गंभीर आरोप

Pune में सनसनीखेज वारदात: मंगेतर को 400 फीट गहरी खाई में फेंका, बिजनेसमैन की बेटी पर गंभीर आरोप

Pune में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसे लोग सोनम रघुवंशी केस जैसा बता रहे हैं। आरोप है कि एक बिजनेसमैन की बेटी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने मंगेतर को 400 फीट गहरी खाई में धक्का दे दिया। जानकारी के मुताबिक, युवक की नवंबर में शादी होने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही यह दर्दनाक घटना हो गई। बताया जा रहा है कि वारदात को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में प्रेम प्रसंग और आपसी विवाद की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच जारी है। मृतक के परिवार में इस घटना के बाद कोहराम मचा हुआ है।
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Bhopal Airport Taxi Strike Update: VVIP मूवमेंट के चलते टली टैक्सी चालकों की हड़ताल, यात्रियों को मिली राहत

Bhopal Airport Taxi Strike Update: VVIP मूवमेंट के चलते टली टैक्सी चालकों की हड़ताल, यात्रियों को मिली राहत

Bhopal राजधानी भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर प्रस्तावित टैक्सी चालकों की हड़ताल फिलहाल स्थगित कर दी गई है। प्रशासन ने VVIP मूवमेंट का हवाला देते हुए हड़ताल की अनुमति नहीं दी। इसके बाद टैक्सी यूनियन ने अपना प्रदर्शन फिलहाल टालने का फैसला लिया है। इस फैसले से रोजाना एयरपोर्ट आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को राहत मिली है। यदि हड़ताल होती तो यात्रियों को एयरपोर्ट से शहर तक पहुंचने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता था। रोजाना 34 फ्लाइट्स से आते हैं करीब 4,500 यात्री भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर हर दिन लगभग 34 फ्लाइट्स का संचालन होता है। इन उड़ानों के जरिए करीब 4,500 यात्री शहर पहुंचते हैं या यहां से यात्रा करते हैं। ऐसे में टैक्सी सेवा बंद होने पर परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी। VVIP मूवमेंट के कारण नहीं मिली अनुमति प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण VVIP मूवमेंट निर्धारित है। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए एयरपोर्ट परिसर में किसी भी तरह के प्रदर्शन या हड़ताल की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद टैक्सी यूनियन ने फिलहाल अपना आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया है। हालांकि यूनियन ने साफ किया है कि उनकी मांगें अभी भी बरकरार हैं और जरूरत पड़ने पर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
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MP UCC Update: लिव-इन रिलेशनशिप पर नया नियम, 30 दिन में कराना होगा रजिस्ट्रेशन

MP UCC Update: लिव-इन रिलेशनशिप पर नया नियम, 30 दिन में कराना होगा रजिस्ट्रेशन

मध्य प्रदेश में Uniform Civil Code (UCC) को लेकर तेजी से काम आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों को लेकर एक अहम प्रस्ताव सामने आया है। प्रस्ताव के अनुसार, यदि कोई कपल लिव-इन रिलेशनशिप में साथ रहना चाहता है, तो उसे 30 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस नियम का उद्देश्य संबंधों में पारदर्शिता लाना और कानूनी रिकॉर्ड को मजबूत करना है। रजिस्ट्रेशन नहीं कराने पर क्या होगा? प्रस्तावित नियम के तहत यदि तय समय सीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जाता है, तो संबंधित कपल को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अंतिम नियम लागू होने के बाद ही इसकी विस्तृत प्रक्रिया स्पष्ट होगी। UCC लागू करने की दिशा में कदम मध्य प्रदेश सरकार UCC लागू करने की दिशा में विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही है। इसमें विवाह, परिवार और साथ रहने से जुड़े नियमों को एक समान कानूनी ढांचे में लाने पर चर्चा चल रही है। कानूनी विशेषज्ञों की राय कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नियमों से रिश्तों में पारदर्शिता बढ़ सकती है, लेकिन इसके सामाजिक प्रभावों पर भी गहन चर्चा जरूरी है। आने वाले दिनों में इस प्रस्ताव पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है।
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Mumbai में झमाझम बारिश से मानसून फिर हुआ एक्टिव, देशभर में गर्मी का असर बरकरार

Mumbai में झमाझम बारिश से मानसून फिर हुआ एक्टिव, देशभर में गर्मी का असर बरकरार

Mumbai में तेज बारिश के साथ मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। लंबे इंतजार के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिला है और माना जा रहा है कि अब मानसून आगे की ओर बढ़ सकता है। मुंबई में बारिश से मौसम हुआ सुहाना मुंबई में लगातार बारिश के चलते लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। कई इलाकों में पानी भरने की भी स्थिति बनी, लेकिन तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। सोलापुर के पास 14 दिनों से रुका था मानसून मौसम विभाग के अनुसार मानसून पिछले लगभग 14 दिनों से Solapur के आसपास अटका हुआ था। अब बारिश की गतिविधियों में तेजी आने के बाद इसके आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। 8 राज्यों में 40°C से ऊपर तापमान दूसरी ओर देश के कई हिस्सों में गर्मी अभी भी लोगों को परेशान कर रही है। 8 राज्यों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया है, जिससे हीटवेव जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग का अनुमान मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में मानसून की गति और तेज हो सकती है, जिससे कई राज्यों में बारिश का दायरा बढ़ेगा।
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“कॉकरोच जनता पार्टी” CJP का तीसरे दिन भी प्रदर्शन जारी, अभिजीत ने किसानों और छात्रों से मांगा समर्थन

“कॉकरोच जनता पार्टी” CJP का तीसरे दिन भी प्रदर्शन जारी, अभिजीत ने किसानों और छात्रों से मांगा समर्थन

देश में एक अनोखा प्रदर्शन लगातार चर्चा में बना हुआ है। “कॉकरोच जनता पार्टी” CJP नाम से चल रहा आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहेगा। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अभिजीत ने अब किसानों और छात्रों से खुलकर समर्थन की अपील की है। प्रदर्शन का तीसरा दिन भी जारी रहेगा आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर सरकार या प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। इसी वजह से प्रदर्शन को आगे भी जारी रखने का फैसला लिया गया है। किसानों से समर्थन की अपील अभिजीत ने कहा है कि किसानों को इस आंदोलन से जुड़ना चाहिए क्योंकि यह मुद्दा सिर्फ एक वर्ग का नहीं बल्कि पूरे समाज से जुड़ा है। उन्होंने दावा किया कि किसानों का समर्थन आंदोलन को और मजबूत करेगा। छात्रों से भी जुड़ने की अपील उन्होंने छात्रों से भी अपील की है कि वे परीक्षा के बाद इस आंदोलन का हिस्सा बनें। उनका कहना है कि युवाओं की भागीदारी से आंदोलन को नई दिशा मिलेगी।
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Trump vs Meloni: फोटो को लेकर बढ़ा विवाद, इटली PM ने ट्रम्प के दावे को बताया झूठ

Trump vs Meloni: फोटो को लेकर बढ़ा विवाद, इटली PM ने ट्रम्प के दावे को बताया झूठ

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donlad trump और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच बयानबाजी का नया विवाद सामने आया है। ट्रम्प ने दावा किया कि मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बेहद उत्सुक थीं और लगातार उनकी मौजूदगी चाहती थीं। हालांकि, ट्रम्प के इस बयान पर इटली की प्रधानमंत्री ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। मेलोनी ने ट्रम्प के दावे को पूरी तरह झूठा बताते हुए कहा कि उनकी ओर से कही गई बातें वास्तविकता से मेल नहीं खातीं। इस विवाद के बीच इटली के विदेश मंत्री ने भी अमेरिका का प्रस्तावित दौरा रद्द कर दिया, जिससे दोनों देशों के राजनीतिक रिश्तों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक और कूटनीतिक असर भी देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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MP Congress Attack on BJP Government: आदिवासियों की 1.26 लाख हेक्टेयर जमीन हस्तांतरण का आरोप, सरकार से मांगा जवाब

MP Congress Attack on BJP Government: आदिवासियों की 1.26 लाख हेक्टेयर जमीन हस्तांतरण का आरोप, सरकार से मांगा जवाब

MP कांग्रेस ने राज्य की भाजपा सरकार पर आदिवासियों के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि प्रदेश में आदिवासियों की करीब 1.26 लाख हेक्टेयर जमीन का हस्तांतरण किया गया है, जिससे आदिवासी समुदाय के हित प्रभावित हुए हैं। कांग्रेस ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में भूमि संरक्षण के लिए बने नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए। पार्टी का आरोप है कि जमीन हस्तांतरण के मामलों में पारदर्शिता की कमी रही है और सरकार को इस विषय पर स्पष्ट जानकारी जनता के सामने रखनी चाहिए। कांग्रेस ने उठाए कई सवाल कांग्रेस नेताओं ने सरकार से पूछा है कि आदिवासियों की जमीन किन परिस्थितियों में हस्तांतरित की गई और इसके लिए क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई। पार्टी का कहना है कि आदिवासी समुदाय की जमीन और संसाधनों की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार से जांच की मांग कांग्रेस ने मामले की विस्तृत जांच कराने और संबंधित आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार कांग्रेस के आरोपों के बाद अब भाजपा सरकार की प्रतिक्रिया पर नजरें टिकी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में चर्चा का बड़ा विषय बन सकता है। आदिवासी अधिकारों पर बढ़ी बहस इस मुद्दे के सामने आने के बाद प्रदेश में आदिवासी अधिकारों, भूमि संरक्षण और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले में पारदर्शिता और तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है।
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Shaheed Air Force Officer Case: ₹21 लाख की सहायता राशि पर विवाद, माता-पिता ने जताई नाराजगी

Shaheed Air Force Officer Case: ₹21 लाख की सहायता राशि पर विवाद, माता-पिता ने जताई नाराजगी

Shaheed Air Force Officer Case : असम में हुए एयरफोर्स विमान हादसे में जान गंवाने वाले एक शहीद अधिकारी के परिवार में अब आर्थिक सहायता राशि को लेकर विवाद सामने आया है। शहीद की पत्नी को ₹21 लाख की सहायता राशि मिलने के बाद उनके माता-पिता ने नाराजगी जाहिर की है और कई गंभीर आरोप लगाए हैं। क्या है पूरा मामला? जानकारी के अनुसार, असम में एयरफोर्स के विमान दुर्घटनाग्रस्त होने से अधिकारी की मौत हो गई थी। हादसे के बाद सरकार और संबंधित संस्थाओं की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसी क्रम में शहीद की पत्नी को ₹21 लाख की सहायता राशि दी गई। हालांकि, इस फैसले पर शहीद के माता-पिता ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि उनके बेटे ने परिवार की इच्छा के विरुद्ध कोर्ट मैरिज की थी और उन्हें इस संबंध में पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। माता-पिता ने लगाए आरोप शहीद के माता-पिता का आरोप है कि उनके बेटे को बहलाकर और प्रभावित करके कोर्ट मैरिज कराई गई थी। उन्होंने कहा कि परिवार को इस विवाह से जुड़े कई पहलुओं की जानकारी बाद में मिली। इसी वजह से वे सहायता राशि के वितरण को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पत्नी का पक्ष भी महत्वपूर्ण दूसरी ओर, कानूनी रूप से पत्नी को मृतक की निकटतम परिजन (Next of Kin) माना जाता है। ऐसे मामलों में सरकारी नियमों और कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर सहायता राशि तथा अन्य लाभों का वितरण किया जाता है। प्रशासन और कानूनी प्रक्रिया पर नजर मामला सामने आने के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर है। यदि परिवार की ओर से कोई औपचारिक शिकायत या कानूनी चुनौती दी जाती है, तो आगे की प्रक्रिया अदालत या संबंधित अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार तय हो सकती है।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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