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Breaking: 47 साल बाद अमेरिका-ईरान रिश्तों में बड़ी बर्फ पिघली, ट्रम्प बोले- ‘तेल को फिर बहने दो’ दुनिया की सबसे तनावपूर्ण दुश्मनियों में से एक माने जाने वाले अमेरिका और ईरान के रिश्तों में बड़ा मोड़ आता दिखाई दे रहा है। दोनों देशों ने कई महीनों तक चली कठिन और गोपनीय बातचीत के बाद एक प्रारंभिक शांति समझौते (MoU) को अंतिम रूप देने पर सहमति जता दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान के साथ समझौता लगभग पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाएगी। ट्रम्प ने अपने संदेश में लिखा, “दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को फिर बहने दो।” 19 जून को जेनेवा में हो सकते हैं हस्ताक्षर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के अनुसार दोनों देशों के प्रतिनिधि 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में प्रस्तावित समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। यदि यह बैठक होती है तो यह करीब 47 वर्षों में अमेरिका और ईरान के बीच सबसे महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय संपर्क माना जाएगा। ईरान ने रखीं तीन अहम शर्तें ईरानी अधिकारियों के अनुसार अंतिम समझौते से पहले अमेरिका को तीन प्रमुख कदम उठाने होंगे— ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने स्पष्ट किया है कि आगामी 60 दिनों की बातचीत इन्हीं शर्तों के पालन पर निर्भर करेगी। 24 अरब डॉलर की संपत्तियां जारी होने की चर्चा ईरानी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका 24 अरब डॉलर तक की ईरानी जमी हुई संपत्तियां चरणबद्ध तरीके से जारी कर सकता है। इनमें से लगभग 12 अरब डॉलर शुरुआती दौर में उपलब्ध कराए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस दावे की अमेरिका की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। परमाणु कार्यक्रम बना रहेगा सबसे बड़ा मुद्दा विशेषज्ञों का मानना है कि असली परीक्षा अब शुरू होगी। 2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के बाद दोनों देशों के बीच अविश्वास लगातार बढ़ा था। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की पिछली रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने यूरेनियम संवर्धन का स्तर 60 प्रतिशत तक पहुंचा दिया था, जिसे पश्चिमी देश चिंता का विषय मानते हैं। आगामी 60 दिनों की बातचीत में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा प्रमुख मुद्दे रहेंगे। इजराइल की चुप्पी बढ़ा रही अटकलें अमेरिका-ईरान समझौते को लेकर इजराइल ने अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इजराइल समझौते की कुछ शर्तों को लेकर असहज है क्योंकि उसे वार्ता प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। ईरान में भी उठ रहे विरोध के स्वर समझौते की खबर सामने आने के बाद ईरान के कट्टरपंथी समूहों और कुछ रूढ़िवादी नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह समझौता ईरान की रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है। हालांकि राष्ट्रपति मसूद पेजशकियान ने आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि देशहित में काम करने वालों को गद्दार कहना उचित नहीं है। वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिल सकती है राहत यदि समझौता सफल रहता है तो इसका सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर देखने को मिल सकता है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसके खुलने से तेल आपूर्ति सामान्य होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है। फिलहाल दुनिया की नजरें 19 जून को जेनेवा में होने वाली संभावित बैठक पर टिकी हैं, जहां यह ऐतिहासिक समझौता औपचारिक रूप ले सकता है।
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Madhya Pradesh : ट्रेन में अफरा-तफरी के बीच बड़ा हादसा, पत्नी और बेटे को आंखों के सामने ट्रेन ने कुचला

Madhya Pradesh : ट्रेन में अफरा-तफरी के बीच बड़ा हादसा, पत्नी और बेटे को आंखों के सामने ट्रेन ने कुचला

Madhya Pradesh : रेलवे स्टेशन पर अचानक मची अफरा-तफरी ने कुछ ही पलों में कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ट्रेन में किसी ने अचानक चिल्ला दिया कि “आग लग गई है।” इसके बाद यात्रियों में भगदड़ मच गई और जान बचाने के लिए लोग ट्रेन से कूदने लगे। इसी दौरान दर्दनाक हादसा हो गया, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। हादसे में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और बेटे को अपनी आंखों के सामने ट्रेन से कटते देखा। घटना को याद करते हुए वह बेसुध हो गया। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक स्टेशन पर चीख-पुकार और भगदड़ का माहौल था। लोग बिना कुछ समझे ट्रेन से नीचे उतरने और भागने लगे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार हादसे में मरने वालों में एक मां और उसका बेटा भी शामिल हैं। कई यात्री गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे के बाद स्टेशन पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अगर समय रहते सही जानकारी दी जाती और भीड़ को संभाला जाता तो शायद इतनी बड़ी घटना टाली जा सकती थी। घटना के बाद यात्रियों और स्थानीय लोगों में गुस्सा भी देखने को मिला। रेलवे ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जाएगा कि ट्रेन में आग लगने की अफवाह कैसे फैली और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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Brazil Adventure Accident: रोमांचक जंप बना आखिरी सफर, 21 वर्षीय मारिया की मौत से सदमे में लोग

Brazil Adventure Accident: रोमांचक जंप बना आखिरी सफर, 21 वर्षीय मारिया की मौत से सदमे में लोग

Brazil में एडवेंचर एक्टिविटी के दौरान हुई एक दर्दनाक घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। 21 वर्षीय मारिया एडुआर्दा रोड्रिग्स डी फ्रेटास रोमांचक जंप का अनुभव लेने पहुंची थीं, लेकिन कुछ ही सेकंड में यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हादसे से कुछ समय पहले मारिया ने सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें शेयर की थीं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा था कि आखिर कौन उन्हें पुल से कूदने दे रहा है। हादसे के बाद उनका यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने इसे बेहद भावुक कर देने वाला बताया। एडवेंचर स्पोर्ट्स की सुरक्षा पर उठे सवाल इस घटना के बाद एडवेंचर स्पोर्ट्स और एडवेंचर टूरिज्म की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बंजी या रोप जंपिंग जैसी गतिविधियों में कई स्तरों पर सुरक्षा जांच की जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि उपकरणों की अंतिम जांच या सुरक्षा प्रक्रिया में थोड़ी भी लापरवाही हो जाए तो इसके परिणाम बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।
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Gujarat Jama Masjid Controversy: भरुच की 700 साल पुरानी मस्जिद को लेकर नई बहस, वैज्ञानिक सर्वे की मांग

Gujarat Jama Masjid Controversy: भरुच की 700 साल पुरानी मस्जिद को लेकर नई बहस, वैज्ञानिक सर्वे की मांग

Gujarat के भरुच स्थित करीब 700 साल पुरानी जामा मस्जिद एक बार फिर चर्चा में आ गई है। हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो के बाद इस ऐतिहासिक स्थल के मूल स्वरूप को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। वीडियो में मस्जिद के कथित अंडरग्राउंड हिस्से में जैन तीर्थंकरों और हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी प्राचीन मूर्तियां तथा नक्काशीदार पत्थर दिखाई देने का दावा किया गया है। हालांकि इन दावों की अब तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मंदिर या जैन विहार होने का दावा कुछ हिंदू और जैन संगठनों के प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि यह स्थल मूल रूप से किसी प्राचीन मंदिर या जैन विहार का हिस्सा था, जिसे बाद में मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया। इन दावों के बाद संबंधित पक्षों ने पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराने और ऐतिहासिक तथ्यों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। ASI के संरक्षण में है स्मारक बताया जा रहा है कि यह ऐतिहासिक स्मारक फिलहाल Archaeological Survey of India (ASI) के संरक्षण में है। विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन और ASI ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और परिसर के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन सतर्क, जांच की मांग तेज स्थानीय प्रशासन का कहना है कि फिलहाल मामले पर नजर रखी जा रही है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं। वहीं, इतिहासकारों और विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वैज्ञानिक सर्वे और आधिकारिक जांच जरूरी है। सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। कई लोग ऐतिहासिक तथ्यों की जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और शांति बनाए रखने की अपील की है।
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India-Russia Oil Trade: रूस से सस्ते तेल की खरीद रिकॉर्ड स्तर पर, मई 2026 में बढ़ा आयात

India-Russia Oil Trade: रूस से सस्ते तेल की खरीद रिकॉर्ड स्तर पर, मई 2026 में बढ़ा आयात

India और Russia के बीच ऊर्जा व्यापार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारत ने मई 2026 में रूस से रिकॉर्ड स्तर पर तेल और अन्य जीवाश्म ईंधनों का आयात किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने मई महीने में रूस से करीब 6.7 अरब डॉलर मूल्य के हाइड्रोकार्बन खरीदे। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी कच्चे तेल की रही। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय रिफाइनरियों में सस्ते रूसी तेल की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। अप्रैल के मुकाबले 21% बढ़ा आयात यूरोपीय थिंक टैंक Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) की रिपोर्ट के अनुसार, रूस से कच्चे तेल का भारतीय आयात अप्रैल की तुलना में 21 फीसदी बढ़ा है। वहीं देश के कुल कच्चे तेल आयात में भी 8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि भारत ने मई में लगभग 4.8 अरब यूरो मूल्य का रूसी कच्चा तेल खरीदा, जो रूस से आयात किए गए कुल हाइड्रोकार्बन का करीब 83 फीसदी हिस्सा था। भारतीय रिफाइनरियों को मिल रहा फायदा विशेषज्ञों का मानना है कि रियायती दरों पर मिलने वाला रूसी तेल भारतीय रिफाइनरियों के लिए फायदेमंद साबित हो रहा है। इससे ईंधन लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल रही है और घरेलू बाजार पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। वैश्विक दबाव के बीच मजबूत व्यापारिक रिश्ते यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर कई पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन इसके बावजूद भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार मजबूत बना हुआ है। भारत ने हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की नजर भारत पर ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है, इसलिए रूस से बढ़ती खरीद पर वैश्विक बाजार और पश्चिमी देशों की नजर बनी हुई है।
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Bengaluru Protest: केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर Cockroach Party का प्रदर्शन

Bengaluru Protest: केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर Cockroach Party का प्रदर्शन

Bengaluru में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच पार्टी ने विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। पार्टी के अनुसार रविवार शाम 4 बजे फ्रीडम पार्क में समर्थक जुटेंगे और अपनी मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। Freedom Park में होगा प्रदर्शन प्रदर्शन का आयोजन Freedom Park में किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि प्रदर्शन पूरी तरह लोकतांत्रिक और अहिंसक तरीके से आयोजित होगा। कॉकरोच पार्टी के संस्थापक Abhijeet Deepke ने कहा कि पार्टी सरकार के सामने अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन जनता की आवाज उठाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। समर्थकों से बड़ी संख्या में पहुंचने की अपील पार्टी ने अपने समर्थकों से बड़ी संख्या में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की है। सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है।
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West Bengal Fake Signature Case: CID मुख्यालय पहुंचे Abhishek Banerjee, फिर होगी पूछताछ

West Bengal Fake Signature Case: CID मुख्यालय पहुंचे Abhishek Banerjee, फिर होगी पूछताछ

West Bengal में विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर मामले को लेकर जांच तेज हो गई है। इसी केस में Abhishek Banerjee रविवार को एक बार फिर CID मुख्यालय पहुंचे, जहां उनसे पूछताछ की जा रही है। यह मामला विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षरों के आरोपों से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी के मुताबिक पिछली पूछताछ में मिले जवाबों से पूरी संतुष्टि नहीं मिली थी, जिसके बाद उन्हें दोबारा तलब किया गया। कुणाल घोष को भी भेजा गया समन CID ने इस मामले में Kunal Ghosh को भी पूछताछ के लिए बुलाया है। जानकारी के अनुसार उन्हें दोपहर करीब 3 बजे भवानी भवन स्थित CID कार्यालय में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी दोनों नेताओं को आमने-सामने बैठाकर भी सवाल-जवाब कर सकती है ताकि मामले के अलग-अलग पहलुओं को स्पष्ट किया जा सके। जरूरी दस्तावेज भी मांगे गए अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज भी अभिषेक बनर्जी से मांगे गए हैं। इन दस्तावेजों की मदद से जांच को आगे बढ़ाने और कथित फर्जी हस्ताक्षरों की सच्चाई सामने लाने की कोशिश की जा रही है। पहले भी हो चुकी है पूछताछ जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार CID इससे पहले भी अभिषेक बनर्जी से पूछताछ कर चुकी है। हालांकि कई सवालों के जवाबों को लेकर एजेंसी को स्पष्टता नहीं मिल पाई थी। इसी वजह से उन्हें दोबारा समन जारी किया गया।
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Assam AN-32 Plane Crash: जोरहाट हादसे में वायुसेना के 5 जवान शहीद, जांच के आदेश

Assam AN-32 Plane Crash: जोरहाट हादसे में वायुसेना के 5 जवान शहीद, जांच के आदेश

Assam के जोरहाट में भारतीय वायुसेना के एएन-32 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से देश ने अपने पांच वीर सपूतों को खो दिया। यह हादसा उस समय हुआ जब विमान वायुसेना स्टेशन पर लैंडिंग कर रहा था। दुर्घटना में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीर वायु दानिश आलम शहीद हो गए। देशभर में शोक की लहर इस दुखद हादसे के बाद पूरे देश में शोक की लहर है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन वीर जवानों को देश हमेशा गर्व और कृतज्ञता के साथ याद रखेगा। उन्होंने शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में पूरा देश उनके साथ मजबूती से खड़ा है। लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा जानकारी के अनुसार भारतीय वायुसेना का Antonov An-32 विमान जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर लैंडिंग कर रहा था, तभी यह हादसा हुआ। दुर्घटना के तुरंत बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया, लेकिन विमान में सवार पांचों जवानों को बचाया नहीं जा सका।
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Ayodhya Ram Mandir Donation Case: चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों की जांच तेज, SIT गठित

Ayodhya Ram Mandir Donation Case: चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोपों की जांच तेज, SIT गठित

Ayodhya Ram Mandir में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ी के मामले में जांच तेज हो गई है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। जानकारी के मुताबिक हिरासत में लिया गया युवक रुदौली क्षेत्र का रहने वाला है। जांच के दौरान उसके घर से करीब 10 लाख रुपये नकद बरामद होने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दानपात्रों में जमा राशि की गिनती और उससे जुड़े कार्यों में उसकी क्या भूमिका थी। कई कर्मचारी जांच के दायरे में अधिकारियों के अनुसार मामले में केवल एक व्यक्ति ही नहीं, बल्कि चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कई कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं। जांच टीम सीसीटीवी फुटेज, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक दान राशि की गिनती और रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई शुरू की गई। अब जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क और संभावित लापरवाही या गड़बड़ी की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। सात दिनों में रिपोर्ट देगी SIT Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust के अनुरोध पर गठित SIT को सात दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाएगी।
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Kangana Ranaut की फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ Haryana में Tax-Free, CM Saini ने की सराहना

Kangana Ranaut की फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ Haryana में Tax-Free, CM Saini ने की सराहना

बॉलीवुड अभिनेत्री Kangana Ranaut की हालिया रिलीज फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ को हरियाणा सरकार ने टैक्स-फ्री घोषित कर दिया है। यह फिल्म 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और दर्शकों से इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने चंडीगढ़ में आयोजित फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग में हिस्सा लिया। फिल्म देखने के बाद उन्होंने इसकी जमकर तारीफ की और कहा कि ‘भारत भाग्य विधाता’ साहस, करुणा, कर्तव्य और इंसानियत का मजबूत संदेश देने वाली प्रेरणादायक फिल्म है। समाज को सकारात्मक संदेश देती है फिल्म मीडिया से बातचीत के दौरान सीएम सैनी ने कहा कि ऐसी फिल्में समाज को सही दिशा देने का काम करती हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं और आम लोगों को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने वाली फिल्मों को बढ़ावा मिलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी सोच के साथ हरियाणा सरकार ने फिल्म को राज्य में टैक्स-फ्री करने का फैसला लिया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस फिल्म को देख सकें। दर्शकों से मिल रहा अच्छा रिस्पॉन्स फिल्म रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। दर्शक फिल्म की कहानी और संदेश की सराहना कर रहे हैं। फिल्म में देशभक्ति और सामाजिक मूल्यों को खास तरीके से दिखाने की कोशिश की गई है। कंगना रनौत की चर्चा फिर तेज फिल्म के टैक्स-फ्री होने के बाद एक बार फिर कंगना रनौत चर्चा में आ गई हैं। इससे पहले भी उनकी कई फिल्मों को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस देखने को मिल चुकी है।
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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