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पीएम मोदी ने परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए बड़े कदम उठाने की बात कही। पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लगातार काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं और संसद में कठोर सजा के प्रावधान से जुड़ा विधेयक लाने की तैयारी है। पीएम मोदी ने कहा कि केवल कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य की परीक्षा व्यवस्था को भी मजबूत बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली को भरोसेमंद बनाने के लिए इसमें आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने बताया कि परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में एक हाई पावर टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया गया है। यह टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली में सुधार, पारदर्शिता बढ़ाने और तकनीक के बेहतर उपयोग पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें छात्रों को निष्पक्ष अवसर मिले और किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश कम हो। पीएम मोदी का यह बयान देश में हाल के दिनों में सामने आए परीक्षा संबंधी विवादों के बीच आया है। सरकार अब परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कदम उठा रही है।
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NEET पेपर लीक मामला: शिक्षा मंत्रालय का बड़ा एक्शन, NTA के 47 अधिकारी बर्खास्त, दर्ज होंगे आपराधिक केस

नई दिल्ली। देशभर में NEET पेपर लीक मामले को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। समाचार एजेंसी ANI के सूत्रों के अनुसार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही इन अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। यह कार्रवाई परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार का अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। एक दिन पहले हुए थे बड़े प्रशासनिक फेरबदल इससे पहले गुरुवार को केंद्र सरकार ने 17 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और पदोन्नति के आदेश जारी किए थे। सबसे बड़ा बदलाव शिक्षा मंत्रालय में हुआ, जहां 1994 बैच के राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का नया सचिव नियुक्त किया गया। उन्होंने विनीत जोशी का स्थान लिया है, जिन्हें पंचायती राज मंत्रालय का सचिव बनाया गया है। इसके अलावा 1995 बैच के IAS अधिकारी टी.के. अनिल कुमार को पदोन्नत कर स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। पेपर लीक पर सरकार लगातार दे रही सख्त संदेश पिछले कुछ दिनों में केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों पर लगातार कड़े रुख के संकेत दिए हैं। 24 जुलाई: सख्त कानून लाने का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात जारी वीडियो संदेश में कहा कि पेपर लीक जैसे अपराधों को रोकने के लिए कड़े दंड का प्रावधान करने वाला विधेयक संसद में लाया जाएगा। 23 जुलाई: फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि पेपर लीक मामलों में दोषियों को जल्द सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए। 21 जुलाई: “पेपर लीक घोर पाप है” एनडीए संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा था कि पेपर लीक युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा अन्याय है। उन्होंने बताया कि मामले में अब तक 13 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही राज्यों से भी इस तरह की घटनाओं को रोकने में सहयोग की अपील की गई। युवाओं के भविष्य पर सरकार का फोकस सरकार का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से प्रशासनिक कार्रवाई, कानूनी सुधार और जांच प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। देश, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी हर बड़ी और विश्वसनीय खबर के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस बिल में दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल और सिंचाई के लिए बड़े जलाशय बनाने की अनुमति देने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मधुमक्खियों, जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, बारबू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के अपने वादों से पीछे हटते हुए ऐसे प्रावधानों को मंजूरी दी, जिनका वह लगातार विरोध करती रही थीं। बिल के दो विवादित प्रावधान 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरीविधेयक में एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है। इनका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी जैसी फसलों में किया जा सकेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों के लिए बेहद हानिकारक हैं, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 2. सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमतिबिल में किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जलाशय और कृत्रिम तालाब बनाने की प्रक्रिया आसान करने का भी प्रावधान है। पर्यावरणविदों का तर्क है कि इससे भूजल और नदियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गर्मियों में जल संकट बढ़ सकता है। संसद से पास हुआ विधेयक फ्रांस की संसद में मंगलवार को पेश किए गए इस विधेयक को सीनेट ने 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को देखते हुए लाया गया है, ताकि वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। बारबू ने जताई नाराजगी मोनिक बारबू ने कहा कि विवादित प्रावधान आखिरी समय में बिल में जोड़े गए और उन्हें हटाने पर सरकार ने कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने जंगलों, स्वच्छ जल, साफ हवा और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। पहले भी विवादों में रहा कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन नियोनिकोटिनॉइड समूह के कीटनाशक हैं। फ्रांस ने 2018 में एसेटामिप्रिड पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इस प्रतिबंध को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन फ्रांस की सर्वोच्च अदालत ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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16 साल बाद भारत लौट सकते हैं IPL के संस्थापक ललित मोदी, FEMA मामले में ट्रिब्यूनल से मिली बड़ी राहत

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के संस्थापक ललित मोदी 16 साल बाद भारत लौटने की तैयारी में हैं। 16 जुलाई को अपीलीय ट्रिब्यूनल ने IPL 2009 के दक्षिण अफ्रीका आयोजन से जुड़े विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) मामले में उन्हें बड़ी राहत देते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा लगाया गया जुर्माना रद्द कर दिया। फैसले के बाद ललित मोदी ने कहा कि अब उनकी भारत वापसी का रास्ता साफ हो गया है और वह इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत में भारत लौट सकते हैं। यह मामला 2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान IPL को भारत से दक्षिण अफ्रीका स्थानांतरित किए जाने से जुड़ा था। टूर्नामेंट के आयोजन के लिए BCCI ने दक्षिण अफ्रीका करीब 243.45 करोड़ रुपये भेजे थे। ED का आरोप था कि यह राशि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की पूर्व मंजूरी के बिना विदेश भेजी गई, जिससे FEMA का उल्लंघन हुआ। इसी आधार पर 2018 में ललित मोदी पर 10.65 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। अपीलीय ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि दक्षिण अफ्रीका भेजी गई राशि करंट अकाउंट ट्रांजैक्शन थी, न कि कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शन। ऐसे में इसके लिए RBI की पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं थी। साथ ही ट्रिब्यूनल ने माना कि ललित मोदी व्यक्तिगत रूप से BCCI की ओर से FEMA अनुपालन के लिए जिम्मेदार नहीं थे और उनके पास वे वित्तीय अधिकार भी नहीं थे, जिनका दावा ED ने किया था। हालांकि यह राहत केवल IPL 2009 के FEMA मामले तक सीमित है। ललित मोदी के खिलाफ IPL ब्रॉडकास्ट राइट्स, मनी लॉन्ड्रिंग और BCCI की अनुशासनात्मक कार्रवाई सहित अन्य मामले अब भी अलग-अलग स्तर पर लंबित हैं। 2013 में BCCI ने उन्हें क्रिकेट से जुड़ी सभी गतिविधियों के लिए आजीवन प्रतिबंधित कर दिया था। ललित मोदी वर्ष 2010 से लंदन में रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी अक्टूबर में बच्चे को जन्म देने वाली है, जिसके बाद वह भारत लौटने की योजना बना रहे हैं। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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CJP

CJP अभिजीत दीपके का बड़ा फैसला, सरकार से बातचीत के संकेत मिलने पर Hunger Strike समाप्त

अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे CJP के प्रवक्ता अभिजीत दीपके ने आखिरकार अपना आंदोलन खत्म कर दिया। CJP की ओर से दावा किया गया कि सरकार ने उन्हें बातचीत के लिए मिलने का न्योता दिया है। इसके बाद अभिजीत दीपके ने अपनी Hunger Strike (भूख हड़ताल) समाप्त करने का फैसला लिया। कई दिनों से जारी इस विरोध प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे थे। उनका कहना था कि लोकतंत्र में अपनी बात रखने और समस्याओं के समाधान के लिए संवाद सबसे प्रभावी माध्यम है। Government Meeting के आश्वासन के बाद खत्म हुआ Protest CJP प्रवक्ता के मुताबिक, सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव मिलने के बाद भूख हड़ताल खत्म की गई। संगठन का मानना है कि अब चर्चा के जरिए उठाए गए मुद्दों पर आगे बढ़ने का रास्ता खुलेगा। अभिजीत दीपके ने आंदोलन खत्म करने के बाद उम्मीद जताई कि सरकार के साथ होने वाली बैठक में उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विरोध का उद्देश्य किसी से टकराव नहीं, बल्कि अपनी आवाज जिम्मेदार लोगों तक पहुंचाना था। समर्थकों में दिखा उत्साह, बातचीत पर टिकी नजरें अभिजीत दीपके के समर्थन में कई लोग आंदोलन से जुड़े रहे। समर्थकों ने शांतिपूर्ण तरीके से उनकी मांगों का समर्थन किया और सरकार से समाधान निकालने की अपील की। अब सबकी नजर आने वाली Government Meeting और बातचीत की प्रक्रिया पर है। माना जा रहा है कि बैठक के बाद ही साफ होगा कि सरकार और CJP के बीच किन मुद्दों पर सहमति बनती है। आंदोलन से बातचीत तक का सफर अभिजीत दीपके की भूख हड़ताल खत्म होने के बाद यह मामला अब बातचीत के दौर में पहुंच गया है। CJP का कहना है कि वह आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपने मुद्दे उठाता रहेगा। सरकार की ओर से मिले बातचीत के संकेत को आंदोलनकारियों के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अब आगे की दिशा बैठक और चर्चा के परिणामों पर निर्भर करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRGC का दावा- अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले जारी, MQ-9 रीपर ड्रोन मार गिराने का भी किया दावा

तेहरान। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन, कुवैत, ओमान और अन्य देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं। IRGC का कहना है कि यह सैन्य अभियान अभी जारी रहेगा और आने वाले समय में भी कार्रवाई तेज की जाएगी। IRGC ने यह भी दावा किया कि उसने ईरान के खुजेस्तान प्रांत के अहवाज क्षेत्र में अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को इंटरसेप्ट कर मार गिराया है। ईरानी सरकारी मीडिया ने ड्रोन गिराने का कथित वीडियो भी जारी किया है। हालांकि, अमेरिका की ओर से अब तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। उधर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए बताया कि अरब सागर में तैनात USS Boxer (LHD-4) पर मौजूद F-35B स्टेल्थ फाइटर जेट्स को ऑपरेशन के लिए तैयार रखा गया है। F-35B लड़ाकू विमान कम दूरी के रनवे और युद्धपोतों से उड़ान भरने में सक्षम हैं तथा रडार से बचते हुए सटीक हमले करने की क्षमता रखते हैं। पिछले 24 घंटे के प्रमुख घटनाक्रम अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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Bhopal Chaturmas 2026: आचार्य समय सागर महाराज का भव्य स्वागत, नारायण नगर से निकली विशाल शोभायात्रा

Bhopal Chaturmas 2026: आचार्य समय सागर महाराज का भव्य स्वागत, नारायण नगर से निकली विशाल शोभायात्रा

भोपाल। जैन समाज के लिए चतुर्मास का समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी क्रम में आचार्य समय सागर महाराज के भोपाल आगमन पर रविवार को श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत नजारा देखने को मिला। नारायण नगर स्थित जैन मंदिर से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा, बुजुर्ग और बच्चे शामिल हुए। शोभायात्रा के दौरान पूरा वातावरण धार्मिक जयघोष, भक्ति गीतों और मंगल ध्वनि से गूंज उठा। श्रद्धालु हाथों में धर्म ध्वज लिए आचार्य श्री के स्वागत में आगे बढ़ते नजर आए। जगह-जगह पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया गया। भक्ति और उत्साह का दिखा अनोखा संगम शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा पहनकर धार्मिक आस्था का परिचय दिया। महिलाओं ने मंगल गीत गाए, जबकि बच्चों और युवाओं ने भी पूरे उत्साह के साथ यात्रा में भाग लिया। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने भगवान महावीर और जैन धर्म से जुड़े जयकारे लगाए। चतुर्मास में होंगे धार्मिक आयोजन आचार्य समय सागर महाराज चतुर्मास के दौरान भोपाल में प्रवास करेंगे। इस अवधि में प्रवचन, धर्मसभा, स्वाध्याय, तप, ध्यान और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जैन समाज के लोगों का मानना है कि चतुर्मास के दौरान संतों के सान्निध्य में धर्म सुनने और आत्मचिंतन का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह आचार्य श्री के आगमन को लेकर कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं। शोभायात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरे मार्ग पर अनुशासन के साथ यात्रा संपन्न हुई। समाज के लोगों ने इसे आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक एकता का प्रतीक बताया।
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अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ा, डिसैलिनेशन प्लांट बने निशाना; ईरान ने अमेरिकी हमले का लगाया आरोप

तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाने वाले डिसैलिनेशन (जल शोधन) प्लांटों तक पहुंच गया है। ईरान ने शनिवार को दावा किया कि अमेरिकी हवाई हमले में होर्मोजगान प्रांत स्थित बोंजी डिसैलिनेशन प्लांट पूरी तरह तबाह हो गया, जिससे करीब 20 गांवों के 10 हजार लोगों की पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है। दूसरी ओर, कुवैत ने भी आरोप लगाया है कि लगातार दूसरे दिन उसके जल शोधन संयंत्र को निशाना बनाया गया। कुवैत में लगभग 90 प्रतिशत पेयजल समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले डिसैलिनेशन प्लांटों से प्राप्त होता है। ऐसे में इन संयंत्रों पर किसी भी तरह का हमला देश की जल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जा रहा है। पिछले 24 घंटे के प्रमुख घटनाक्रम बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पश्चिम एशिया में जल, ऊर्जा और रणनीतिक ठिकानों पर हमलों ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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US Iran War Latest Update America Iran Conflict Iran Attack on Kuwait Bahrain US Military Base Strait of Hormuz News HIMARS Missile Launcher Middle East Breaking News

Breaking: अमेरिका-ईरान संघर्ष और भड़का, कुवैत-बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का जवाबी हमला, होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा खतरा

Baking News: US-Iran War Latest Update | Iran Attacks US Bases in Kuwait & Bahrain | Hormuz Crisis अमेरिका के ईरान पर बड़े हमलों के बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला करने का दावा किया। जानिए ताजा अपडेट। नई दिल्ली/तेहरान | Desh Harpal Desk मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रविवार को अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। इसके जवाब में सोमवार को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। अमेरिका ने 140 से अधिक ठिकानों को बनाया निशाना अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में किश्म, सीरिक, बंदर अब्बास, जास्क, बुशेहर, खोंदाब, महशहर, बेहबहान, अंदीमेश्क, देजफुल, अहवाज, अबादान और खुर्रमशहर सहित कई अहम सैन्य और सामरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि पिछले कुछ दिनों में ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की गई है, जिनमें मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन स्टोरेज और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। ईरान का पलटवार IRGC के अनुसार— होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा संकट ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि होर्मुज स्ट्रेट उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे अहम हिस्सा है। ईरान के वरिष्ठ नेता के सलाहकार मोहसिन रेजाई ने कहा, “होर्मुज स्ट्रेट हमारे लिए कई परमाणु बमों से भी अधिक महत्वपूर्ण है।” यही जलमार्ग दुनिया के लगभग 20% तेल व्यापार का प्रमुख रास्ता माना जाता है। यहां बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट 1. ओमान के पास जहाज पर हमला ‘GFS Galaxy’ जहाज पर हुए हमले में 11 भारतीय सवार थे। 10 को सुरक्षित बचा लिया गया जबकि एक भारतीय अभी भी लापता है। भारत सरकार ने नागरिक जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा की है। 2. अमेरिका का दावा अमेरिका का कहना है कि पिछले तीन दिनों में उसने ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। 3. लेबनान पर इजराइल की कार्रवाई दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में इजराइली सेना ने नए हमले किए हैं। 4. कुवैत की सीमा चौकियों को नुकसान कुवैत ने पुष्टि की है कि हालिया हमलों में उत्तरी क्षेत्र की तीन सीमा चौकियां प्रभावित हुई हैं। 5. ईरान के खुजेस्तान में हमला महशहर के एक वाटर प्रोजेक्ट पर प्रोजेक्टाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत और चार लोग घायल हुए हैं। ईरान की मिसाइल ताकत कितनी बड़ी? अमेरिकी खुफिया एजेंसी ODNI के अनुसार— वैश्विक असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और बढ़ता है तो इसका सीधा असर—
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Delhi Building Collapse: पांच मंजिला मकान ढहा, मलबे में दबकर 1 की मौत, 2 घायल; कई लोगों के फंसे होने की आशंका

Delhi Building Collapse: पांच मंजिला मकान ढहा, मलबे में दबकर 1 की मौत, 2 घायल; कई लोगों के फंसे होने की आशंका

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बड़ा हादसा सामने आया है। शहर के एक इलाके में पांच मंजिला मकान अचानक भरभराकर गिर गया। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो लोग घायल हुए हैं। आशंका जताई जा रही है कि अभी भी चार से पांच लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं। अचानक गिरा पांच मंजिला मकान प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मकान गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। हादसे के बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा और मलबा हटाने का काम शुरू किया। राहत और बचाव अभियान जारी पुलिस, दमकल विभाग और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। अब तक दो घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। कई लोगों के फंसे होने की आशंका प्रशासन के मुताबिक, मलबे के नीचे अभी भी चार से पांच लोगों के फंसे होने की आशंका है। इसी वजह से बचाव अभियान तेज कर दिया गया है और भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है।
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Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

Teachers Day 2026: PM Modi ने Award-Winning Teachers से की बात, Public Speaking पर भी हुई चर्चा

शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि बच्चों के अंदर आत्मविश्वास और बेहतर सोच भी पैदा करते हैं। Teachers’ Day से पहले PM Modi ने National Teachers’ Award 2026 के लिए चुने गए शिक्षकों और educators से मुलाकात की। इस दौरान पढ़ाई के तरीकों से लेकर बच्चों की बदलती आदतों तक कई मुद्दों पर बातचीत हुई। मुलाकात के दौरान माहौल काफी सहज नजर आया। प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से उनके अनुभव जानने के साथ यह भी समझने की कोशिश की कि वे बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए किस तरह के नए तरीके अपना रहे हैं। PM Modi ने पूछा- Public से कैसे करें बात? बातचीत के दौरान Public Speaking और लोगों के सामने अपनी बात रखने का मुद्दा भी सामने आया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बारे में सवाल किया तो एक महिला Teacher ने सीधा जवाब दिया कि लोगों के सामने प्रभावी तरीके से बात करने के लिए सबसे जरूरी चीज Confidence यानी आत्मविश्वास है। उनकी यह बात छोटी जरूर थी, लेकिन Public Speaking को लेकर एक बड़ा संदेश देती है। किसी भी मंच पर अपनी बात रखने के लिए केवल जानकारी होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे भरोसे और स्पष्टता के साथ सामने रखना भी जरूरी है। Teachers ने PM Modi को बताए अपने Innovative Ideas प्रधानमंत्री मोदी ने Award-winning Teachers से उनके Teaching Experience और Classroom में अपनाए जा रहे नए प्रयोगों के बारे में भी जाना। शिक्षकों ने बताया कि वे बच्चों के लिए पढ़ाई को आसान और दिलचस्प बनाने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आज के समय में सिर्फ किताब और ब्लैकबोर्ड तक सीमित पढ़ाई बच्चों को हमेशा आकर्षित नहीं करती। ऐसे में कई शिक्षक Technology, Practical Activities और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े उदाहरणों की मदद से विषयों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। बच्चों में Screen Addiction को लेकर भी चर्चा PM Modi ने बच्चों में बढ़ते Screen Time और Digital Addiction को लेकर भी शिक्षकों से चर्चा की। उन्होंने बच्चों को खेल, Physical Activities और रचनात्मक कामों से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही युवा छात्रों में नशे की समस्या को लेकर शिक्षकों को सतर्क रहने की बात भी कही गई। प्रधानमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को केवल Classroom तक सीमित नहीं माना। बच्चों के व्यवहार, उनकी आदतों और मानसिक-सामाजिक विकास में भी शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 5 सितंबर को 48 Teachers को National Award Teachers’ Day के मौके पर 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 48 स्कूल शिक्षकों को National Teachers’ Awards प्रदान करेंगी। इन शिक्षकों का चयन देशभर से एक निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए किया गया है। National Teachers’ Awards का मकसद ऐसे शिक्षकों को पहचान और सम्मान देना है, जिन्होंने पढ़ाई को बेहतर बनाने के साथ विद्यार्थियों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। यह पुरस्कार हर साल Teachers’ Day पर शिक्षकों के योगदान को सम्मानित करने के लिए दिए जाते हैं। PM Modi की Teachers से मुलाकात का संदेश प्रधानमंत्री और शिक्षकों की इस मुलाकात में एक बात साफ तौर पर सामने आई—एक अच्छा Teacher सिर्फ पाठ नहीं पढ़ाता, बल्कि बच्चों को जीवन के लिए तैयार करता है। चाहे Public Speaking में Confidence की बात हो या Classroom में नए Teaching Methods अपनाने की, बदलते समय के साथ शिक्षकों की भूमिका भी लगातार व्यापक हो रही है। Teachers’ Day से पहले हुई यह मुलाकात इसी बदलाव और शिक्षकों के योगदान को रेखांकित करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ujjain

Ujjain में बनेगी Malakhamb Academy, 111 करोड़ के Project से खिलाड़ियों को मिलेंगी World-Class सुविधाएं

मध्यप्रदेश के मलखंब खिलाड़ियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश सरकार Ujjain में एक ऐसी Malakhamb और Gymnastics Academy विकसित करने की तैयारी में है, जहां खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण के साथ आधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के प्रयासों से तैयार किए गए प्रस्ताव के मुताबिक, करीब 20 एकड़ जमीन पर इस अकादमी को विकसित किया जाएगा। अकादमी में खिलाड़ियों के लिए खेल अधोसंरचना, हॉस्टल, आधुनिक उपकरण, फिटनेस सेंटर, फिजियोथेरेपी और खेल विज्ञान से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका मकसद प्रदेश की युवा मलखंब प्रतिभाओं को कम उम्र से ही बेहतर ट्रेनिंग देकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करना है। 111 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रस्ताव प्रस्तावित मलखंब एवं जिम्नास्टिक अकादमी के निर्माण पर करीब 86 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक अकादमी के संचालन के लिए लगभग 25.33 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। इस तरह निर्माण और संचालन को मिलाकर परियोजना की कुल प्रस्तावित लागत करीब 111.33 करोड़ रुपये बताई गई है। खिलाड़ियों को सिर्फ Training नहीं, पूरी सुविधा मिलेगी इस अकादमी की खास बात यह होगी कि खिलाड़ियों को केवल मलखंब की ट्रेनिंग तक सीमित सुविधाएं नहीं मिलेंगी। यहां हॉस्टल, आधुनिक खेल उपकरण, फिटनेस, फिजियोथेरेपी और Sports Science आधारित प्रशिक्षण की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। सरकार का जोर ऐसे Training Environment पर है, जहां खिलाड़ियों की तकनीक के साथ उनकी फिटनेस और खेल प्रदर्शन पर भी लगातार काम किया जा सके। 70 खिलाड़ियों को मिलेगा मौका प्रस्ताव के अनुसार अकादमी में कुल 70 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें: शामिल होंगे। यानी कुल 50 खिलाड़ी बोर्डिंग और 20 खिलाड़ी डे-बोर्डिंग व्यवस्था में रहेंगे। खिलाड़ियों का चयन Talent Search के माध्यम से किए जाने का प्रस्ताव है। Academy शुरू होने से पहले उज्जैन में शुरू होगी Training स्थायी अकादमी की इमारत तैयार होने में समय लगने के दौरान भी खिलाड़ियों की ट्रेनिंग को रोका नहीं जाएगा। वर्ष 2026-27 और 2027-28 में अकादमी को राजमाता खेल परिसर, तानाखेड़ा, उज्जैन में डे-बोर्डिंग मॉडल पर संचालित करने का प्रस्ताव है। इस शुरुआती चरण में कुल 40 खिलाड़ियों को प्रवेश देने की योजना है। इनमें 30 बालक और 10 बालिकाएं शामिल होंगी। उज्जैन से बाहर के चयनित खिलाड़ियों के लिए विभाग की ओर से आवास की व्यवस्था करने का भी प्रस्ताव है। Expert Coaches के साथ Sports Science पर रहेगा फोकस नई अकादमी में खिलाड़ियों को आधुनिक और उच्च तकनीकी प्रशिक्षण देने की तैयारी है। इसके लिए उच्च तकनीकी सलाहकार और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की सेवाएं अनुबंध के आधार पर लेने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। डे-बोर्डिंग व्यवस्था में खिलाड़ियों को प्रशिक्षकों के साथ फिजियोथेरेपिस्ट और मसाजर की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना है। इसमें एक महिला फिजियोथेरेपिस्ट और दो मसाजर—एक महिला तथा एक पुरुष—का प्रावधान प्रस्तावित है। मंत्री विश्वास सारंग बोले- प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंच खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के मुताबिक मध्यप्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि इन खिलाड़ियों को सही समय पर आधुनिक सुविधाएं, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और बेहतर अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि मलखंब मध्यप्रदेश की गौरवशाली खेल परंपरा का हिस्सा है और प्रदेश के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित की है। प्रस्तावित अकादमी के जरिए खिलाड़ियों को शुरुआती उम्र से वैज्ञानिक और तकनीकी प्रशिक्षण देने पर जोर रहेगा। मंत्री के अनुसार लक्ष्य यह है कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। Khelo India में MP के Malakhamb खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन मलखंब अकादमी की जरूरत इसलिए भी महसूस की गई क्योंकि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने हाल के वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है। Khelo India Youth Games 2025, बिहार में मध्यप्रदेश के मलखंब खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक जीते। इनमें 7 Gold, 2 Silver और 1 Bronze Medal शामिल रहे। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि प्रदेश में मलखंब की प्रतिभाओं की मजबूत नींव मौजूद है। अब नई अकादमी के जरिए इन खिलाड़ियों को लगातार और बेहतर प्रशिक्षण देने की दिशा में काम किया जा रहा है। उज्जैन बन सकता है Malakhamb Talent Hub अकादमी के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी, उज्जैन को देने का प्रस्ताव है। शुरुआत में विभाग में उपलब्ध स्टाफ के जरिए अकादमी की दैनिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। उज्जैन जिले के लिए कुल 12 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें संभागीय खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी, जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी, लेखापाल, सहायक ग्रेड-2, सहायक ग्रेड-3 और भृत्य के पद शामिल हैं। खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद उज्जैन में प्रस्तावित Malakhamb Academy सिर्फ एक नई खेल सुविधा नहीं, बल्कि प्रदेश की युवा प्रतिभाओं के लिए आगे बढ़ने का बड़ा रास्ता बन सकती है। अभी जहां खिलाड़ी अलग-अलग स्थानों पर प्रशिक्षण लेते हैं, वहीं भविष्य में उन्हें एक ही जगह पर ट्रेनिंग, फिटनेस, आवास और Sports Science जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। अगर प्रस्तावित योजना अपने स्वरूप में आगे बढ़ती है, तो उज्जैन आने वाले समय में मध्यप्रदेश की मलखंब प्रतिभाओं की नई नर्सरी और प्रमुख Training Hub के रूप में अपनी पहचान बना सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
India-Belgium

India-Belgium Partnership: जोरावर Tank बना नई दोस्ती की पहचान, कई अहम MoU पर सहमति

India-Belgium के रिश्तों में गुरुवार को एक अहम पड़ाव जुड़ गया। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर भारत दौरे पर पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। बातचीत के बाद दोनों देशों ने Defence, Clean Energy, Critical Minerals, Semiconductor, Maritime Cooperation और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद कहा कि भारत और बेल्जियम के संबंध अब केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश अब Defence और Clean Energy जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी तेजी से साथ आ रहे हैं। इसी दौरान पीएम मोदी ने जोरावर Tank का भी जिक्र किया। जोरावर Tank ने बढ़ाया Defence Cooperation भारत के लिए पहाड़ी और कठिन इलाकों में इस्तेमाल होने वाला हल्का जोरावर टैंक Defence Sector का अहम प्रोजेक्ट है। पीएम मोदी ने भारत-बेल्जियम सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देश आधुनिक रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में साथ काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच Military Exchanges और Training Cooperation बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। इससे भारतीय और बेल्जियम की सेनाओं के बीच संपर्क और अनुभव साझा करने के अवसर बढ़ेंगे। हालांकि, जोरावर टैंक को लेकर इसे सीधे तौर पर कोई अलग Tank Purchase Deal कहना सही नहीं होगा। इस प्रोजेक्ट का उल्लेख दोनों देशों के बढ़ते Defence और Technology Cooperation के उदाहरण के तौर पर किया गया है। Clean Energy में भी नई Partnership Defence के साथ-साथ Green Energy भारत-बेल्जियम सहयोग का एक और बड़ा क्षेत्र बनकर सामने आया है। दोनों देशों ने Renewable Energy के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता किया है। पीएम मोदी ने आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में विकसित हो रहे Green Ammonia Project का भी जिक्र किया। भारत की बढ़ती Clean Energy जरूरतों और बेल्जियम की तकनीकी क्षमता को देखते हुए यह Partnership आने वाले समय में काफी अहम हो सकती है। Critical Minerals और Semiconductor पर नजर आज की Technology Economy में Critical Minerals और Semiconductor की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत और बेल्जियम ने इन क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों देश Critical Minerals की Processing और Recycling में मिलकर काम करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। वहीं Semiconductor Sector में बेल्जियम की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत के बड़े Manufacturing Ecosystem को जोड़ने पर जोर दिया गया है। खास तौर पर बेल्जियम के प्रसिद्ध Research Institute IMEC और भारत के Semiconductor Ecosystem के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 5 साल में Double हो सकता है Bilateral Trade बैठक में आर्थिक रिश्तों को लेकर भी बड़ा लक्ष्य सामने आया। भारत और बेल्जियम अगले पांच वर्षों में Bilateral Trade को दोगुना करने की दिशा में काम करेंगे। भारत और बेल्जियम के बीच व्यापार में Diamond Industry की लंबे समय से बड़ी भूमिका रही है। बेल्जियम का एंटवर्प शहर दुनिया के प्रमुख Diamond Trading Hubs में शामिल है और यहां भारतीय कारोबारियों की भी मजबूत मौजूदगी है। अब दोनों देश इस पुराने व्यापारिक रिश्ते को Defence, Technology, Energy और Critical Minerals जैसे नए क्षेत्रों से जोड़ना चाहते हैं। Maritime और Startup Sector में भी बढ़ेगा सहयोग भारत और बेल्जियम के बीच सहयोग का दायरा केवल Defence और Trade तक नहीं रहेगा। दोनों देशों ने Maritime Sector में Capacity Building और Startups के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इसके अलावा Cybercrime से मुकाबला, Diplomatic Training और अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौते किए गए हैं। दोनों देश Migration and Mobility Partnership Agreement को जल्द पूरा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच छात्रों, Professionals और लोगों के आवागमन से जुड़े अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। Terrorism पर भारत-बेल्जियम का एक सुर बैठक में आतंकवाद और दुनिया में चल रहे विभिन्न संघर्षों पर भी चर्चा हुई। भारत और बेल्जियम ने आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश Dialogue और Diplomacy के जरिए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास रखते हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत और बेल्जियम के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। भारत-बेल्जियम रिश्तों की पुरानी कहानी पीएम मोदी ने दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों का भी जिक्र किया। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बेल्जियम में भारतीय सैनिकों के योगदान और बलिदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और बेल्जियम के संबंध काफी पुराने हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। एंटवर्प के मेयर के तौर पर उनका भारत और भारतीय समुदाय से पहले भी संपर्क रहा है। अब Diamond Trade से आगे बढ़ रही दोस्ती भारत और बेल्जियम की दोस्ती की पहचान लंबे समय तक Diamond Trade से जुड़ी रही है। लेकिन बदलती दुनिया में दोनों देशों के रिश्ते अब एक बड़े दायरे में फैल रहे हैं। जोरावर Tank से Defence Cooperation, Green Energy से Critical Minerals और Semiconductor से Bilateral Trade तक, भारत और बेल्जियम कई नए क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। पीएम मोदी और बार्ट डी वेवर की बैठक को इसी बदलती Partnership की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में अगर इन समझौतों और सहयोग योजनाओं को जमीन पर तेजी से उतारा जाता है, तो भारत-बेल्जियम संबंध आर्थिक रिश्तों से आगे बढ़कर एक मजबूत Strategic Partnership का रूप ले सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Tibet

Nepal Flood के बीच बड़ा Earthquake: Tibet में 5.1 Magnitude के झटके, अब तक 1,273 लोगों की मौत

Nepal-Tibet Flood हिमालयी इलाके में पिछले एक हफ्ते से जारी तबाही के बीच गुरुवार को एक और झटका महसूस किया गया। चीन के तिब्बत (Tibet) क्षेत्र में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप ऐसे वक्त आया है, जब नेपाल और तिब्बत में भीषण Flood और Landslide के बाद हजारों लोग लापता हैं और राहत-बचाव अभियान लगातार चल रहा है। 26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ ने देखते ही देखते कई इलाकों की तस्वीर बदल दी थी। घर, सड़कें, पुल और Hydropower Projects मलबे और पानी की चपेट में आ गए। अब तक इस आपदा में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर 1,273 लोगों की मौत हो चुकी है। Tibet में 5.1 तीव्रता का Earthquake जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार गुरुवार को तिब्बत में 5.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप करीब 10 किलोमीटर की गहराई पर आया और इसका क्षेत्र नेपाल तथा भारत की सीमाओं के आसपास बताया गया है। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में इस भूकंप से बड़े पैमाने पर नए नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पहले से तबाह इलाके में इसके झटके ने लोगों और Rescue Teams की चिंता जरूर बढ़ा दी है। एक हफ्ते पहले आई बाढ़ ने मचाई थी भारी तबाही 26 अगस्त को Bhote Koshi River के आसपास अचानक आई बाढ़ ने नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। अधिकारियों और विशेषज्ञों के मुताबिक इस आपदा के पीछे ग्लेशियर और चट्टानों के खिसकने से पैदा हुआ भारी मलबा और पानी प्रमुख वजह रहा। बाढ़ का तेज बहाव अपने साथ मिट्टी, चट्टान और मलबा लेकर नीचे की ओर आया और रास्ते में आने वाले घरों, सड़कों और पुलों को तबाह करता चला गया। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को बेहद असाधारण बताते हुए इसे ‘Himalayan Tsunami’ तक कहा है। तिब्बत की ओर Gyirong Port भी बुरी तरह प्रभावित हुआ था। संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचने से शुरुआती दौर में राहत सामग्री और भारी मशीनरी को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती बन गया। Nepal-Tibet Disaster में 1,273 लोगों की मौत 3 सितंबर तक सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार नेपाल में 1,252 लोगों की मौत हो चुकी है और कम से कम 4,216 लोग अब भी लापता हैं। वहीं चीन के तिब्बत क्षेत्र में 21 लोगों की मौत और 541 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इस तरह दोनों क्षेत्रों में मृतकों की संख्या 1,273 हो गई है। नेपाल में सबसे ज्यादा मौतें चितवन, नवलपरासी पूर्व, नवलपरासी पश्चिम और नुवाकोट जैसे जिलों में दर्ज हुई हैं। कई शवों की पहचान अभी बाकी है, जिससे परिवारों की बेचैनी और बढ़ गई है। हजारों लोग अब भी Missing, Tunnel में फंसे लोगों की तलाश सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। नेपाल में हजारों लोगों के लापता होने के अलावा कई Hydropower Projects में काम करने वाले कर्मचारियों के भी फंसे होने की आशंका है। करीब 900 Hydropower workers के अब भी लापता होने की बात सामने आई है। कुछ लोगों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका के चलते Rescue Teams भारी मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद से मलबा हटाने में जुटी हैं। नेपाल सरकार के मुताबिक भारत, चीन और दक्षिण कोरिया की Tunnel Rescue Teams नेपाली सेना के साथ मिलकर अभियान चला रही हैं। ड्रोन, भारी मशीनरी और अन्य राहत उपकरणों की मदद भी ली जा रही है। हजारों घर हुए तबाह, सामने बड़ी Rebuilding Challenge बाढ़ ने सिर्फ लोगों की जान नहीं ली, बल्कि हजारों परिवारों से उनका घर और रोजी-रोटी भी छीन ली। Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल में करीब 7,500 घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और लगभग 20,000 घरों को दोबारा बनाने की जरूरत पड़ सकती है। सड़क और पुल टूटने के कारण कई इलाकों में राहत पहुंचाना अभी भी मुश्किल है। कुछ जगहों पर लोगों को नदी पार करने के लिए अस्थायी साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। Rescue Operation के बीच नया भूकंप चिंता की वजह राहत और बचाव दल पहले ही बारिश, मलबे, तेज बहाव और अस्थिर पहाड़ी ढलानों से जूझ रहे हैं। ऐसे में तिब्बत में आया नया भूकंप हालात को और संवेदनशील बना सकता है। फिलहाल अधिकारियों की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है। नेपाल सरकार के मुताबिक Search and Rescue Operation अभी भी पूरी क्षमता के साथ जारी है। हिमालयी क्षेत्र की इस त्रासदी ने एक बार फिर दिखाया है कि पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदाएं कितनी तेजी से बड़े संकट में बदल सकती हैं। बाढ़ के बाद भूकंप के झटके ने प्रभावित लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं, लेकिन Rescue Teams अब भी मलबे के बीच जिंदगी की तलाश में जुटी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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