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Covid-19 cases in India 2025, JN.1 variant India,

Covid Surge Alert: भारत में फिर बढ़े कोरोना केस, जेएन.1 वैरिएंट बना चिंता का कारण

कोरोना फिर से दे रहा है दस्तक! सिंगापुर और हांगकांग के बाद अब भारत में भी Covid-19 Cases में हल्का लेकिन चिंताजनक इजाफा देखने को मिल रहा है। देश के कई राज्यों ने Corona Advisory जारी कर दी है। स्वास्थ्य एजेंसियों की रिपोर्ट्स के अनुसार, नए मामलों में JN.1 वैरिएंट सक्रिय भूमिका निभा रहा है। फोर्टिस हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर डायरेक्टर डॉ. विकास मौर्य के मुताबिक, “JN.1 variant अब तक केवल हल्के से मध्यम लक्षण ही दिखा रहा है और इससे गंभीर बीमारी का खतरा बहुत कम है।” New Covid variant in Asia-एशिया में तेजी से फैल रहा है संक्रमण चीन में कोविड के गंभीर मामले पिछले महीने 3.3% से बढ़कर 5.5% हो गए हैं। अस्पतालों में A&E (Accident & Emergency) रोगियों की दर 7.5% से बढ़कर 16.2% हो चुकी है। ताइवान में भी कोविड-19 के चलते अस्पतालों में भर्ती बढ़ने लगे हैं। संक्रमण के लक्षण क्या हैं? डॉक्टरों के अनुसार, नए वैरिएंट के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं: गंभीर लक्षण बहुत कम मामलों में देखे गए हैं और उनमें भी ज्यादातर मरीज रिकवरी की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। क्या वैक्सीन और इम्यूनिटी काम कर रही है? विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण की हल्की प्रकृति का कारण भारत की जनता में विकसित हुई Natural Immunity और पहले से ली गई वैक्सीनेशन डोज़ हैं। इसलिए कोविड की पहली लहर जैसी गंभीरता की फिलहाल कोई आशंका नहीं है। सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों की तैयारी केंद्र और राज्य सरकारें अलर्ट मोड में हैं। कुछ राज्यों ने मास्क पहनने और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में सावधानी बरतने की एडवाइजरी जारी की है। हालांकि, लॉकडाउन या बड़े प्रतिबंधों की कोई योजना नहीं है। क्या करना चाहिए आम जनता को? घबराएं नहीं, सतर्क रहें Covid-19 का खतरा पूरी तरह टला नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात घबराने वाले नहीं हैं। अगर हम जरूरी सावधानियाँ बरतें और सरकार की गाइडलाइंस का पालन करें, तो स्थिति नियंत्रण में रह सकती है।
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COVID-19 Surge

COVID-19 Surge: एशिया में फिर बढ़े कोरोना केस, हांगकांग-सिंगापुर में हालात चिंताजनक

19 मई 2025, देश हरपल डेस्क COVID-19 एक बार फिर एशिया में अपने पैर पसार रहा है। हांगकांग और सिंगापुर जैसे विकसित शहरों में संक्रमण के मामलों में तेज़ वृद्धि देखी जा रही है, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों और आम जनता में चिंता बढ़ गई है। हांगकांग में 10 हफ्तों में 30 गुना वृद्धि हांगकांग में मार्च 2025 से COVID-19 मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले 10 हफ्तों में संक्रमण के मामलों में 30 गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। Sewage surveillance और आउटपेशेंट क्लीनिकों में COVID-19 के मामलों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। सिंगापुर में भी संक्रमण में उछाल सिंगापुर में मई के पहले सप्ताह में COVID-19 के मामलों में 28% की वृद्धि हुई है, और अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या में भी 30% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनता से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। नया वैरिएंट और लक्षणस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, Omicron JN.1 वैरिएंट इस नए उछाल के पीछे हो सकता है। इस वैरिएंट के कारण मरीजों में खांसी, गले में खराश, मतली, उल्टी, ब्रेन फॉग और आंखों में जलन जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। भारत में स्थिति और सतर्कता भारत में भी कुछ शहरों में COVID-19 के मामलों में हल्की वृद्धि देखी जा रही है। मुंबई में डॉक्टरों ने हाल ही में कुछ नए मामलों की पुष्टि की है, हालांकि अधिकांश मामले हल्के हैं और गंभीर चिंता की आवश्यकता नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने जनता से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। बचाव के उपाय और सलाह स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता और सावधानी बरतकर हम इस नए उछाल से बच सकते हैं। निष्कर्ष COVID-19 का यह नया उछाल हमें याद दिलाता है कि महामारी अभी समाप्त नहीं हुई है। हांगकांग और सिंगापुर जैसे देशों में मामलों की वृद्धि हमें सतर्क रहने की आवश्यकता का संकेत देती है। भारत में स्थिति अभी नियंत्रण में है, लेकिन हमें सतर्क रहना और आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए।
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Women hear better than men

Women Hear Better Than Men: महिलाएं मर्दों से ज्यादा जल्दी और साफ़ सुन लेती हैं?

Women Hear Better Than Men: अब यह सिर्फ एक धारणा नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक तथ्य है। हाल ही में ब्रिटेन और फ्रांस के वैज्ञानिकों ने 13 देशों में की गई Hearing research study के आधार पर यह दावा किया है कि महिलाएं आम तौर पर पुरुषों की तुलना में बेहतर सुनने की क्षमता रखती हैं। 🔬 क्या कहती है स्टडी?यह स्टडी ब्रिटिश और फ्रेंच रिसर्चर्स की टीम द्वारा की गई, जिसमें अलग-अलग देशों के लोगों की ऑडिटरी क्षमता (hearing ability) का विश्लेषण किया गया। नतीजों में साफ़ देखा गया कि महिलाओं की सुनने की संवेदनशीलता (auditory sensitivity) अधिक थी, खासकर हाई-फ्रीक्वेंसी साउंड्स में। 🧠 इसके पीछे साइंटिफिक कारण क्या हैं?विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतर हॉर्मोनल स्ट्रक्चर और ब्रेन प्रोसेसिंग के कारण होता है। महिलाओं का दिमाग साउंड प्रोसेसिंग में ज्यादा एक्टिव रहता है। एस्ट्रोजन हार्मोन भी इसमें मददगार होता है, जिससे सुनने की क्षमता तेज़ बनी रहती है। 👩‍⚕️ इसका असर रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कैसे पड़ता है?इस अंतर के कारण महिलाएं न सिर्फ बच्चों की रोने की आवाज़ जल्दी पकड़ती हैं, बल्कि आपसी बातचीत में भी ज्यादा अलर्ट रहती हैं। यही वजह है कि कॉल सेंटर्स और नर्सिंग जैसे प्रोफेशन में महिलाएं ज्यादा प्रभावी साबित होती हैं। 📢 क्यों है ये रिसर्च ज़रूरी?यह स्टडी सिर्फ सुनने की क्षमता पर नहीं, बल्कि हेल्थकेयर, एजुकेशन और कम्युनिकेशन से जुड़े फैसलों पर भी असर डाल सकती है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि पुरुषों और महिलाओं के लिए हेल्थ डिवाइसेज़ और कम्युनिकेशन टूल्स अलग-अलग तरीके से डिज़ाइन किए जाने चाहिए। 📝 निष्कर्षअगर अगली बार कोई महिला बिना कहे आपकी बात पकड़ ले, तो हैरान मत होइए — यह साइंस का कमाल है!
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Heatwave Mental Impact

Heatwave Mental Impact: गर्मी सिर्फ शरीर नहीं, दिमाग को भी कर रही है बीमार

समाचार रिपोर्ट | देश हरपलगर्मी का असर अब सिर्फ डिहाइड्रेशन, सनबर्न या लू तक सीमित नहीं रहा। Heatwave Mental Impact अब एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा कर रहा है। हाल के अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय के अनुसार, जैसे सर्दियों में “SAD” यानी Seasonal Affective Disorder होता है, उसी तरह गर्मियों में भी डिप्रेशन और मूड डिसऑर्डर देखने को मिल रहे हैं। इसे Summer SAD या Reverse SAD भी कहा जाता है। गर्मी में बढ़ती धूप, ऊंचा तापमान और बिगड़ी नींद की वजह से ब्रेन के केमिकल्स जैसे सेरोटोनिन और मेलाटोनिन प्रभावित होते हैं। ये दो हार्मोन हमारे मूड और नींद को कंट्रोल करते हैं। जब इनमें गड़बड़ी आती है, तो मन उदास रहने लगता है, गुस्सा बढ़ जाता है और चिड़चिड़ापन हावी हो जाता है। नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, जब तापमान बहुत ज्यादा हो जाता है तो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े इमरजेंसी केस 8% तक बढ़ जाते हैं। यानी सिर्फ शारीरिक नहीं, मानसिक स्तर पर भी हीटवेव का सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है। क्या होता है Summer SAD? Summer SAD एक प्रकार का मौसम-जनित मानसिक विकार है जो खासतौर पर गर्मियों में होता है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं: यह स्थिति तब और भी गंभीर हो सकती है जब व्यक्ति पहले से मानसिक तनाव या डिप्रेशन से जूझ रहा हो। गर्मियों में मेंटल हेल्थ क्यों बिगड़ती है? गर्मी में हमारे शरीर और दिमाग को मौसम के अनुरूप ढलने में समय लगता है। कुछ प्रमुख कारण जो मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं: क्या करें? कैसे बचें? निष्कर्ष:गर्मी का असर केवल त्वचा और शरीर तक सीमित नहीं है। हमारा दिमाग भी इस मौसम की मार झेलता है। अगर हर साल गर्मी में आपका मूड डाउन रहता है, गुस्सा आता है और सब कुछ उबाऊ लगता है, तो इसे हल्के में न लें। यह Summer SAD का संकेत हो सकता है। समय रहते पहचानें, सजग रहें और सही कदम उठाएं। देश हरपल पर ऐसे ही जरूरी और उपयोगी स्वास्थ्य समाचारों के लिए जुड़े रहें।
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Heart Attack While Studying for IIT: इंदौर में देर रात पढ़ाई करते वक्त छात्र को आया Silent Heart Attack, भाई के सामने तोड़ा दम

इंदौर (Desh Harpal News Desk):मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहां IIT की तैयारी कर रहे एक 18 वर्षीय छात्र को अचानक Silent Heart Attack आया और उसने अपने बड़े भाई के सामने ही दम तोड़ दिया। इस हादसे ने न सिर्फ छात्र के परिवार को बल्कि पूरे छात्र समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है। जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र पीयूष मुरैना जिले का निवासी था और अपने बड़े भाई के साथ इंदौर के भंवरकुआं थाना क्षेत्र के चितावद इलाके में एक किराए के मकान में रहकर IIT entrance exam की तैयारी कर रहा था। हर दिन की तरह पीयूष देर रात पढ़ाई में व्यस्त था। तभी अचानक उसके सीने में तेज दर्द उठा। उसने तुरंत अपने बड़े भाई को इसकी जानकारी दी। भाई ने प्राथमिक इलाज के लिए घर पर रखी कुछ दवाइयाँ दीं, लेकिन आराम न मिलने पर उसे फौरन नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। दुर्भाग्यवश, अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने पीयूष को Dead on Arrival घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक यह मामला Silent Heart Attack का है। यानी ऐसा हार्ट अटैक जिसमें पहले से कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते और अचानक स्थिति गंभीर हो जाती है। पुलिस ने इस घटना की सूचना मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस परिजनों और भाई के बयानों के आधार पर आगे की पड़ताल कर रही है। प्रारंभिक जांच में हार्ट अटैक को ही मौत का संभावित कारण बताया गया है। पीयूष की मौत से उसके दोस्तों और आसपास के छात्रों में शोक की लहर फैल गई है। पढ़ाई के लिए अपने घर से दूर आए इस होनहार छात्र की असामयिक मृत्यु ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या युवा छात्रों में बढ़ता मानसिक तनाव और अनहेल्दी लाइफस्टाइल इस तरह की घटनाओं का कारण बन रहे हैं? Desh Harpal आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करेगा। तब तक अपने बच्चों और छात्रों की सेहत पर ध्यान दें—Health is as important as Hard Work.
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Whooping cough: New research से कूकर खांसी के भविष्य के Vaccines में आ सकती है क्रांतिकारी सुधार

नई दिल्ली – एक समय था जब कूकर खांसी (जिसे हूपिंग कफ या पर्टुसिस भी कहा जाता है) बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण हुआ करती थी, खासकर अमेरिका और दुनिया के अन्य हिस्सों में। लेकिन 1940 के दशक में जब इसका टीका अस्तित्व में आया, तब इस जानलेवा बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सका। हालांकि, बीते कुछ दशकों में यह देखने को मिला है कि टीकाकरण के बावजूद whooping cough(हूपिंग कफ) के मामले दोबारा बढ़ रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि मौजूदा टीकों की प्रभावशीलता समय के साथ घट जाती है, जिससे इस बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। अब एक नई रिसर्च ने इस दिशा में आशा की किरण दिखाई है। इस शोध में यह समझने की कोशिश की गई है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) किस प्रकार हूपिंग कफ के बैक्टीरिया बोर्डेटेला पर्टुसिस पर प्रतिक्रिया करता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि मौजूदा टीके शरीर में “मेमोरी टी-सेल्स” को उतनी मजबूती से सक्रिय नहीं करते, जो कि दीर्घकालिक प्रतिरक्षा के लिए जरूरी हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि हम इस प्रतिक्रिया को बेहतर ढंग से समझ पाएं, तो ऐसे नए टीके विकसित किए जा सकते हैं जो लंबे समय तक प्रभावी रहेंगे और बच्चों को दोबारा इस बीमारी के खतरे से बचा सकेंगे। अमेरिका में हुए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने विशेष रूप से बच्चों और किशोरों में प्रतिरक्षा प्रणाली की गतिविधियों का विश्लेषण किया। इसके अलावा उन्होंने यह भी अध्ययन किया कि क्यों वर्तमान टीके समय के साथ कम प्रभावी हो जाते हैं। यह शोध आने वाले समय में टीका वैज्ञानिकों को ऐसे फार्मूले बनाने में मदद करेगा, जो न केवल लंबे समय तक प्रभावी होंगे, बल्कि महामारी जैसी स्थितियों में भी ज्यादा सुरक्षा प्रदान कर पाएंगे। निष्कर्षयह रिसर्च इस बात की ओर इशारा करती है कि केवल बीमारी से बचाव ही नहीं, बल्कि टीकों की गुणवत्ता और टिकाऊपन में सुधार करना अब समय की मांग है। यदि यह नई रिसर्च सफलतापूर्वक प्रैक्टिकल रूप में लागू होती है, तो हूपिंग कफ जैसी घातक बीमारी को पूरी तरह खत्म करने का सपना जल्द ही साकार हो सकता है।
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ड्डा का राहुल पर पलटवार: बोले- कांग्रेस बताए अपने राज्यों में पेपर लीक क्यों हुए, सरकार चर्चा को तैयार

पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस पहले यह बताए कि उसके शासन वाले राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं। नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार इस गंभीर विषय पर संसद में विस्तृत चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है, जबकि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में है। दरअसल, राहुल गांधी ने हाल ही में दावा किया था कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने में विफल रहने का आरोप लगाया था। इस पर जवाब देते हुए नड्डा ने कहा कि केवल आंकड़े पेश करने से काम नहीं चलेगा। कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि जिन राज्यों में उसकी सरकारें रही हैं, वहां भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं क्यों हुईं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा संसद में इस विषय पर सार्थक चर्चा का स्वागत करती है।

अजमेर में मार्बल व्यापारी पर जानलेवा हमला, CCTV में कैद हुई वारदात

राजस्थान के अजमेर जिले के किशनगढ़ में बुधवार सुबह मार्बल व्यापारी पर चार बदमाशों ने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। स्कॉर्पियो से आए हमलावरों ने गोदाम में घुसकर व्यापारी के साथ बेरहमी से मारपीट की। पूरी घटना गोदाम में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। गोदाम में घुसकर किया हमला गांधीनगर थाना क्षेत्र स्थित मार्बल एरिया में बुधवार सुबह करीब 8:20 बजे स्कॉर्पियो में सवार चार युवक गोदाम के बाहर पहुंचे। गोदाम में बैठे मार्बल व्यापारी गोवर्धन पर उन्होंने लाठी-डंडों से हमला कर दिया। व्यापारी ने शुरुआत में हमलावरों का मुकाबला करने की कोशिश की, लेकिन चारों बदमाशों ने उसे घेर लिया और जमीन पर गिराकर लगातार लाठियों से पीटा। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। सिर और हाथ में गंभीर चोट हमले में व्यापारी के सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल किशनगढ़ के राजकीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पीड़ित ने दर्ज कराई शिकायत गांधीनगर थाना प्रभारी अनिल शर्मा ने बताया कि पीड़ित व्यापारी की शिकायत पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है। भाई के साथ गोदाम में मौजूद था व्यापारी पीड़ित गोवर्धन ने बताया कि वह बुधवार सुबह अपने भाई के साथ गोदाम में बैठा था। इसी दौरान स्कॉर्पियो में सवार चार युवक पहुंचे और बिना किसी बातचीत के अचानक हमला कर दिया। बदमाशों ने गोदाम के अंदर घुसकर उन्हें नीचे गिराया और लाठियों से बेरहमी से पीटा। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

BPCL को जून तिमाही में ₹3,962 करोड़ का घाटा, कच्चे तेल की महंगाई से बिगड़े नतीजे

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने वित्त वर्ष 2026-27 की जून तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को इस तिमाही में ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले साल की समान तिमाही में कंपनी ने ₹6,124 करोड़ का मुनाफा कमाया था, जबकि मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का लाभ दर्ज किया गया था। 23% बढ़ा कंपनी का रेवेन्यू घाटे के बावजूद BPCL का परिचालन से राजस्व (Revenue from Operations) बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंच गया। यह पिछले साल की समान तिमाही के ₹1.29 लाख करोड़ के मुकाबले करीब 23% अधिक है। वहीं, मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ की तुलना में इसमें करीब 18% की वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल की महंगाई बनी घाटे की वजह कंपनी के अनुसार, अमेरिका-ईरान तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं। इसके साथ ही शिपिंग (भाड़ा) और इंश्योरेंस लागत भी बढ़ गई। हालांकि, बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में नहीं डाला जा सका, जिससे कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई और तिमाही घाटे में बदल गई। शेयर में गिरावट नतीजों के बाद BPCL का शेयर 3% की गिरावट के साथ ₹309 पर बंद हुआ। BPCL के बारे में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों में शामिल है। इसकी स्थापना 24 जनवरी 1976 को हुई थी। कंपनी मुंबई, कोच्चि, नुमालीगढ़ और बीना में रिफाइनरियों का संचालन करती है, जिनकी कुल रिफाइनिंग क्षमता 40 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है। BPCL पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, लुब्रिकेंट्स और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के रिफाइनिंग व वितरण का कार्य करती है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू का इस्तीफा, विवादित कृषि बिल के विरोध में छोड़ा पद

फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबू ने विवादित कृषि विधेयक के विरोध में इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है। इस बिल में दो प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित इस्तेमाल और सिंचाई के लिए बड़े जलाशय बनाने की अनुमति देने का प्रावधान है। वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे मधुमक्खियों, जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो सकता है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के अनुसार, बारबू बुधवार को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को अपना इस्तीफा सौंपेंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पर्यावरण संरक्षण के अपने वादों से पीछे हटते हुए ऐसे प्रावधानों को मंजूरी दी, जिनका वह लगातार विरोध करती रही थीं। बिल के दो विवादित प्रावधान 1. प्रतिबंधित कीटनाशकों को मंजूरीविधेयक में एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन जैसे प्रतिबंधित कीटनाशकों के सीमित उपयोग की अनुमति दी गई है। इनका इस्तेमाल चुकंदर, सेब और चेरी जैसी फसलों में किया जा सकेगा। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि ये रसायन मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले कीड़ों के लिए बेहद हानिकारक हैं, जिससे कृषि उत्पादन और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों प्रभावित हो सकते हैं। 2. सिंचाई के लिए बड़े जलाशयों की अनुमतिबिल में किसानों को सिंचाई के लिए बड़े जलाशय और कृत्रिम तालाब बनाने की प्रक्रिया आसान करने का भी प्रावधान है। पर्यावरणविदों का तर्क है कि इससे भूजल और नदियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और गर्मियों में जल संकट बढ़ सकता है। संसद से पास हुआ विधेयक फ्रांस की संसद में मंगलवार को पेश किए गए इस विधेयक को सीनेट ने 214 के मुकाबले 111 मतों से पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि यह कानून किसानों की बढ़ती लागत और घटती आय को देखते हुए लाया गया है, ताकि वे यूरोप के अन्य देशों के किसानों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। बारबू ने जताई नाराजगी मोनिक बारबू ने कहा कि विवादित प्रावधान आखिरी समय में बिल में जोड़े गए और उन्हें हटाने पर सरकार ने कोई गंभीर चर्चा नहीं की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पिछले नौ महीनों में उन्होंने जंगलों, स्वच्छ जल, साफ हवा और जैव विविधता की रक्षा के लिए काम किया, लेकिन अब वह अपने उद्देश्यों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। पहले भी विवादों में रहा कीटनाशक एसेटामिप्रिड और फ्लुपाइराडीफ्यूरोन नियोनिकोटिनॉइड समूह के कीटनाशक हैं। फ्रांस ने 2018 में एसेटामिप्रिड पर प्रतिबंध लगाया था। इससे पहले भी इस प्रतिबंध को हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन फ्रांस की सर्वोच्च अदालत ने पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com

इंदौर में छात्र आंदोलन को मिला कांग्रेस का समर्थन, दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी धरने में पहुंचे

इंदौर के टंट्याभील चौराहे पर चल रहे छात्र आंदोलन को बुधवार रात कांग्रेस का खुला समर्थन मिला। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी धरना स्थल पहुंचे और छात्रों के बीच बैठकर उनके आंदोलन में शामिल हुए। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। टंट्याभील चौराहे पर पिछले कई दिनों से छात्र शिक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन और सोनम वांगचुक को हिरासत में लिए जाने के बाद इंदौर में भी आंदोलन तेज हो गया है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र धरना स्थल पर पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे हैं। बुधवार रात दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने छात्रों के बीच बैठकर आंदोलन का समर्थन किया। उनके साथ शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे सहित कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी धरने में शामिल हुए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पिछले 25 दिनों से यह मांग उठा रही है और उन्होंने स्वयं 21 जून को भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी थी। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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