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Jharkhand

Jharkhand Exam Controversy: परीक्षा गड़बड़ी पर छात्रों का प्रदर्शन जारी, सरकार से बातचीत के लिए तैयार लेकिन रखी बड़ी शर्त

Jharkhand में कथित परीक्षा गड़बड़ी (Exam Scam) को लेकर जारी छात्र आंदोलन अब बातचीत की दिशा में बढ़ता नजर आ रहा है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कहा है कि वे सरकार के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी मांग है कि मुख्यमंत्री (CM) खुद मीडिया के सामने आकर छात्रों से संवाद करें। छात्रों का कहना है कि खुली बातचीत से प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और जनता भी पूरे मामले को समझ सकेगी। छात्रों का कहना- मुद्दा सिर्फ विरोध नहीं, भविष्य का सवाल है प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल आंदोलन करना नहीं है, बल्कि अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं ने हजारों अभ्यर्थियों की मेहनत और भविष्य पर असर डाला है। कई छात्रों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक तैयारी की, लेकिन परीक्षा विवाद के कारण उनके सपनों पर संकट खड़ा हो गया। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुने और ऐसा फैसला ले जिससे आगे होने वाली परीक्षाओं में भरोसा कायम हो सके। Exam Scam Case में अब तक 19 गिरफ्तार परीक्षा गड़बड़ी मामले में प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। इस केस में अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच जारी है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। छात्रों की प्रमुख मांगें क्या हैं? छात्रों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें मुख्य रूप से: CM से Open Dialogue की उम्मीद, समाधान पर टिकी नजरें अब सभी की नजर सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर है। छात्र चाहते हैं कि मुख्यमंत्री सीधे उनसे संवाद करें और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की पहल करें। अगर सरकार और छात्रों के बीच सकारात्मक बातचीत होती है, तो लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ सकता है। वहीं, जांच की प्रगति और सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी। युवाओं को फैसले का इंतजार झारखंड के छात्र अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था ही युवाओं के भरोसे को वापस ला सकती है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख और छात्रों के साथ होने वाली बातचीत इस आंदोलन के भविष्य को तय करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Meta

Meta Action पर मचा बवाल: PM Modi Video हटाने के बाद Zuckerberg ने मांगी माफी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े एक वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद मामला अब तूल पकड़ चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो हटाए जाने को लेकर सरकार ने Meta के सामने नाराजगी जताई और कंपनी को तीन दिन के भीतर मामले पर जवाब देने का अल्टीमेटम दिया। इसके बाद Meta की ओर से इस मामले में माफी मांगे जाने की बात सामने आई है। मामला उस समय का है, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन चल रहा था। इसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया। कुछ समय बाद यह वीडियो प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। वीडियो हटने के बाद सवाल उठे कि आखिर इसे किस आधार पर हटाया गया और इसके पीछे Meta की क्या वजह थी। Jantar Mantar Protest के दौरान पोस्ट हुआ था Video बताया जा रहा है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था। प्रदर्शन से जुड़े इस वीडियो के हटने के बाद मामला सरकारी स्तर तक पहुंच गया। सरकार की ओर से Meta से इस कार्रवाई को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया। साथ ही कंपनी को तीन दिन के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर कंटेंट हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। Government के Ultimatum के बाद Meta ने मांगी माफी सरकार की ओर से समयसीमा दिए जाने के बाद Meta की तरफ से मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने वीडियो हटाए जाने को लेकर माफी मांगी है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि Social Media Platforms पर राजनीतिक और सार्वजनिक महत्व वाले कंटेंट को हटाने का फैसला किस प्रक्रिया के तहत लिया जाता है। किसी वीडियो को हटाने से पहले प्लेटफॉर्म की नीतियों और परिस्थितियों का आकलन किस तरह किया जाता है, यह भी चर्चा का विषय बन गया है। PM Modi से जुड़े Content पर क्यों बढ़ी चर्चा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी किसी भी पोस्ट या वीडियो पर सोशल मीडिया पर तेजी से प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। ऐसे में किसी वीडियो का अचानक हटना स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचता है। इस मामले में सरकार के हस्तक्षेप और उसके बाद Meta की ओर से माफी की खबर ने पूरे घटनाक्रम को और अहम बना दिया है। हालांकि, वीडियो हटाने की सटीक वजह और Meta की आंतरिक प्रक्रिया को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है। Social Media Companies की Accountability पर सवाल यह घटना केवल एक वीडियो हटाए जाने तक सीमित नहीं है। इससे सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही और Content Moderation Policy पर भी सवाल उठ रहे हैं। आज करोड़ों लोग सोशल मीडिया को खबरों और सूचनाओं के प्रमुख माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण वीडियो या पोस्ट को हटाए जाने पर प्लेटफॉर्म की ओर से स्पष्ट कारण बताना और पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा सरकार के तीन दिन के अल्टीमेटम और उसके बाद Meta की ओर से आई माफी को लेकर है। आने वाले समय में कंपनी की ओर से इस मामले पर और स्पष्ट जानकारी सामने आती है या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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RBI

RBI On Plastic Currency: ₹10-₹20 के Plastic Notes को लेकर सामने आया नया Update

अगर आपके बटुए में रखे ₹10 और ₹20 के नोट कुछ ही दिनों में पुराने और मुड़े-तुड़े नजर आने लगते हैं, तो आने वाले समय में इसमें बदलाव देखने को मिल सकता है। ₹10 और ₹20 के Plastic यानी Polymer Notes को लेकर RBI की तैयारी एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से इन नोटों को लाने की बात चल रही है और अब इसके संभावित लॉन्च को लेकर भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है कि Polymer Notes को लेकर प्रक्रिया अभी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगी। पहले इनका ट्रायल और जरूरी तकनीकी जांच होगी। इसके बाद ही इन्हें बड़े स्तर पर बाजार में उतारने का फैसला किया जाएगा। क्यों जरूरी महसूस हो रहे हैं Plastic Notes? भारत में ₹10 और ₹20 के नोटों का इस्तेमाल रोजमर्रा की छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए खूब होता है। चाय की दुकान से लेकर ऑटो का किराया और छोटे-मोटे सामान की खरीदारी तक, इन नोटों का इस्तेमाल लगातार होता रहता है। यही वजह है कि ये नोट अपेक्षाकृत जल्दी खराब भी हो जाते हैं। Polymer Notes इसी समस्या का एक संभावित समाधान माने जा रहे हैं। ये कागजी नोटों के मुकाबले ज्यादा टिकाऊ होते हैं और पानी या नमी के संपर्क में आने पर भी बेहतर तरीके से टिक सकते हैं। ₹10 और ₹20 के नोटों से क्यों हो सकती है शुरुआत? Plastic Currency को लेकर शुरुआती फोकस ₹10 और ₹20 denomination पर रहने की संभावना है। इन दोनों मूल्यवर्ग के नोटों का सर्कुलेशन काफी ज्यादा है। ऐसे में इनके Polymer Version को इस्तेमाल में लाकर इसकी व्यावहारिकता को बेहतर तरीके से परखा जा सकता है। अगर ट्रायल सफल रहता है और लोगों के इस्तेमाल से जुड़े पहलू संतोषजनक पाए जाते हैं, तो आगे चलकर दूसरे मूल्यवर्ग की करेंसी पर भी विचार हो सकता है। कब लॉन्च होंगे Polymer Notes? सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ₹10 और ₹20 के Plastic Notes आम लोगों के हाथ में कब पहुंचेंगे? उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पहले field trial और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद RBI इनके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को लेकर फैसला करेगा। इसलिए अभी इसे ऐसी योजना नहीं माना जा सकता जिसमें कोई निश्चित तारीख तय हो चुकी हो। यानी लोगों को फिलहाल पुराने ₹10 और ₹20 के नोटों को लेकर किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं है। मौजूदा नोट सामान्य रूप से चलन में बने रहेंगे, जब तक RBI की तरफ से कोई अलग निर्देश जारी नहीं किया जाता। नकली नोटों पर भी लग सकती है लगाम Polymer Currency का एक अहम फायदा इसकी security features से भी जुड़ा है। इन नोटों में ऐसे सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं, जिन्हें कॉपी करना नकली नोट बनाने वालों के लिए मुश्किल हो। हालांकि, किसी नए नोट को जारी करने से पहले RBI को उसकी सुरक्षा के साथ-साथ ATM, cash counting machines और दूसरे banking systems के साथ compatibility भी जांचनी होती है। क्या पुराने ₹10 और ₹20 के नोट बंद हो जाएंगे? नहीं। Polymer Notes आने का मतलब यह नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट तुरंत बंद कर दिए जाएंगे। अगर नए नोट जारी होते हैं तो RBI की ओर से उनकी वैधता और पुराने नोटों के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट जानकारी दी जाएगी। इसलिए अभी सोशल मीडिया पर चलने वाली ऐसी किसी भी खबर पर भरोसा करने से बचें जिसमें पुराने ₹10 या ₹20 के नोटों को अचानक बंद किए जाने का दावा किया जा रहा हो। भारत में Currency का बदलता रूप भारत में समय के साथ करेंसी में कई बदलाव हुए हैं। सुरक्षा फीचर्स को मजबूत करने से लेकर नोटों के डिजाइन और आकार में बदलाव तक, RBI लगातार करेंसी सिस्टम को बेहतर बनाने पर काम करता रहा है। अब अगर Polymer Notes का प्रयोग सफल रहता है, तो यह भारतीय करेंसी के क्षेत्र में एक और बड़ा बदलाव हो सकता है। खासकर छोटे नोटों की durability बढ़ाने में इसका फायदा मिल सकता है। RBI के फैसले पर टिकी नजर फिलहाल ₹10 और ₹20 के Plastic Notes को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रक्रिया अभी आगे बढ़ रही है और अंतिम लॉन्च से पहले ट्रायल व जरूरी जांच पूरी की जाएगी। इसलिए निश्चित लॉन्च डेट को लेकर RBI की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना ही सही रहेगा। आम लोगों के लिए फिलहाल राहत की बात यही है कि मौजूदा ₹10 और ₹20 के नोट चलते रहेंगे। Polymer Notes आते हैं तो RBI उनकी उपलब्धता, इस्तेमाल और पुराने नोटों को लेकर पूरी जानकारी सार्वजनिक करेगा।
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Supreme Court

Car-Bike Insurance पर Supreme Court सख्त, नई Car के लिए 4 साल और Bike के लिए 6 साल का Cover

अगर आप कार या बाइक चलाते हैं, तो वाहन के इंश्योरेंस से जुड़ी यह खबर आपके काम की है। Supreme Court ने बिना वैध बीमा वाले वाहनों पर सख्ती की जरूरत बताई है। कोर्ट के निर्देश के बाद अब ऐसे इंतजाम पर जोर दिया जा रहा है, जिससे बिना इंश्योरेंस वाले वाहन सड़कों पर न चल सकें और उन्हें पेट्रोल-डीजल भी आसानी से न मिल पाए। इस मामले में नई गाड़ियों के लिए लंबी अवधि के बीमा कवर की व्यवस्था का भी जिक्र हुआ है। इसके तहत नई कार के लिए 4 साल और नई बाइक के लिए 6 साल का Insurance Cover रखने की बात सामने आई है। इसका मकसद वाहन खरीदने के कुछ समय बाद इंश्योरेंस खत्म होने और उसके बाद बिना बीमा वाहन चलाने की समस्या पर लगाम लगाना है। बिना Insurance गाड़ी चलाने वालों पर बढ़ेगी सख्ती देश में कई वाहन ऐसे हैं जिनका इंश्योरेंस खत्म हो चुका होता है, लेकिन वे फिर भी सड़कों पर दौड़ते रहते हैं। सड़क दुर्घटना की स्थिति में ऐसे वाहनों के कारण पीड़ितों को मुआवजा मिलने में परेशानी हो सकती है। यही वजह है कि वैध Motor Insurance को लेकर नियमों के पालन पर लगातार जोर दिया जा रहा है। Supreme Court की ओर से जिस व्यवस्था पर जोर दिया गया है, उसमें पेट्रोल पंप पर वाहन का Insurance Status चेक करने की संभावना भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी वाहन का बीमा वैध नहीं पाया जाता है, तो उसे Petrol या Diesel देने पर रोक लगाने की व्यवस्था की जा सकती है। नई Car खरीदने वालों के लिए 4 साल का Insurance नई कार खरीदने वालों के लिए 4 साल का बीमा कवर एक महत्वपूर्ण बदलाव हो सकता है। इससे ग्राहक को कार खरीदने के बाद शुरुआती वर्षों में बीमा रिन्यू कराने की परेशानी कम होगी। इसी तरह नई बाइक खरीदने वालों के लिए 6 साल का Insurance Cover रखने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। लंबी अवधि का बीमा होने से दोपहिया वाहन मालिकों के लिए पॉलिसी की वैधता बनाए रखना आसान हो सकता है। Petrol Pump पर कैसे होगी Insurance की जांच? अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो पेट्रोल पंप पर वाहन का नंबर डालकर उसके Insurance की वैधता जांची जा सकती है। इसके लिए सरकारी वाहन रिकॉर्ड और Insurance Database को आपस में जोड़ना होगा। ऐसी व्यवस्था सफल रहती है तो पेट्रोल पंप पर ही बिना बीमा वाले वाहन की पहचान की जा सकेगी। इससे वाहन मालिकों पर अपने इंश्योरेंस को समय पर Renew कराने का दबाव बढ़ेगा। वाहन मालिक अभी से कर लें यह काम अगर आपके पास Car, Bike या कोई अन्य वाहन है, तो सबसे पहले अपनी Insurance Policy की Expiry Date चेक कर लें। बीमा खत्म हो गया है तो वाहन चलाने से पहले उसे Renew कराना जरूरी है। सिर्फ चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से भी Valid Insurance बेहद जरूरी है। खासकर पुराने वाहनों के मालिकों को अपनी पॉलिसी की स्थिति नियमित रूप से जांचते रहना चाहिए। क्यों अहम है Supreme Court का यह निर्देश? इस पूरी कवायद का उद्देश्य सड़क पर चलने वाले वाहनों को बीमा के दायरे में लाना और दुर्घटना के बाद पीड़ितों को मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना है। अगर पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता को भी वैध Insurance से जोड़ दिया जाता है, तो बिना बीमा वाहन चलाने वालों पर प्रभावी रोक लग सकती है। यानी आने वाले समय में वाहन मालिकों के लिए RC और Driving Licence के साथ Valid Insurance रखना भी उतना ही जरूरी हो सकता है। नई व्यवस्था लागू होने पर इसका सीधा असर वाहन मालिकों और पेट्रोल पंप संचालकों, दोनों पर देखने को मिलेगा।
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परिसीमन Bill

Parliament Special Session: परिसीमन Bill पर सरकार का बड़ा प्लान, जल्द हो सकता है फैसला

देश की राजनीति में एक बार फिर Delimitation (परिसीमन) का मुद्दा चर्चा में है। केंद्र सरकार परिसीमन Bill को आगे बढ़ाने के लिए संसद का Special Session बुलाने के विकल्प पर विचार कर सकती है। अगर सरकार इस दिशा में आगे बढ़ती है, तो संसद के साथ-साथ राज्यों की राजनीति पर भी इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। परिसीमन का मामला सिर्फ लोकसभा सीटों की संख्या बदलने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं तय होती हैं और राज्यों को मिलने वाले राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर भी इसका असर पड़ सकता है। यही कारण है कि इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी दलों और राज्यों की भी नजर बनी हुई है। Special Session क्यों बुलाने की चर्चा? परिसीमन से जुड़े प्रस्ताव को संसद में लाने के लिए सरकार विशेष सत्र का रास्ता अपना सकती है। हालांकि, अभी तक विशेष सत्र की तारीख या बिल के अंतिम प्रारूप को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सरकार अगर विशेष सत्र बुलाती है, तो इस दौरान परिसीमन से जुड़े संवैधानिक और कानूनी पहलुओं पर चर्चा हो सकती है। साथ ही राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिश भी की जा सकती है। आखिर Delimitation क्या होता है? सरल भाषा में समझें तो Delimitation यानी परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों का पुनर्निर्धारण है। इसका उद्देश्य जनसंख्या में हुए बदलाव के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करना होता है। देश में आखिरी बड़े परिसीमन की प्रक्रिया 1970 के दशक में हुई थी। इसके बाद लोकसभा सीटों के राज्यों के बीच आवंटन को लेकर एक निश्चित व्यवस्था लागू रही। अब 2026 के बाद होने वाली प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। किन राज्यों पर पड़ सकता है असर? परिसीमन की चर्चा में सबसे बड़ा सवाल राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का है। जिन राज्यों में पिछले दशकों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है, वहां लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जाती रही है। दूसरी ओर, दक्षिण भारत के कई राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। इन राज्यों में यह चिंता रही है कि अगर सिर्फ मौजूदा जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण किया गया, तो उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि परिसीमन को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन एक अहम राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। विपक्ष के सामने भी बड़ा मुद्दा अगर Delimitation Bill संसद में पेश होता है, तो विपक्ष इस पर सरकार से कई सवाल पूछ सकता है। राज्यों के प्रतिनिधित्व, जनसंख्या नियंत्रण और संघीय ढांचे से जुड़े मुद्दे बहस के केंद्र में रह सकते हैं। विपक्षी दलों की कोशिश होगी कि परिसीमन की प्रक्रिया में राज्यों के हितों को नजरअंदाज न किया जाए। वहीं सरकार की ओर से जनसंख्या के बदलते आंकड़ों और समान प्रतिनिधित्व की जरूरत को आधार बनाया जा सकता है। क्या बदल सकती है लोकसभा की तस्वीर? परिसीमन होने की स्थिति में लोकसभा के निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव के साथ सीटों की संख्या में भी बदलाव संभव है। इसका सीधा असर आने वाले लोकसभा चुनावों के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि किस राज्य को कितनी सीटें मिलेंगी। इसके लिए परिसीमन आयोग की प्रक्रिया, जनगणना के आंकड़े और सरकार की ओर से तय किए जाने वाले कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण होंगे। सरकार के अगले कदम पर नजर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार परिसीमन को लेकर कब और किस रूप में कदम उठाती है। अगर संसद का Special Session बुलाया जाता है और Bill पेश होता है, तो यह मौजूदा राजनीतिक माहौल में एक बड़ा घटनाक्रम होगा। परिसीमन का असर लंबे समय तक देश की चुनावी राजनीति पर रह सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में सरकार की घोषणा के साथ-साथ विपक्ष और राज्यों की प्रतिक्रिया भी काफी महत्वपूर्ण होगी।
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CJP

Maharashtra में CJP की बड़ी बैठक, दीपक ने साफ किया- नहीं बनाएंगे Political Party

Maharashtra में CJP की दो दिवसीय बैठक शुरू हो गई है। बैठक के बीच दीपक ने संगठन की आगे की दिशा को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि CJP कोई Political Party नहीं बनाएगा, बल्कि Pressure Group की तरह काम करते हुए जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। महाराष्ट्र में CJP की दो दिन की बैठक शुरू होने के साथ ही संगठन की आगे की रणनीति पर चर्चा तेज हो गई है। बैठक में देश के मौजूदा हालात, जनता से जुड़े मुद्दों और संगठन की भूमिका को लेकर विचार-विमर्श किया जा रहा है। इसी दौरान दीपक ने स्पष्ट कर दिया कि CJP का फिलहाल चुनावी राजनीति में उतरने का कोई इरादा नहीं है। दीपक ने कहा कि संगठन को Political Party बनाने के बजाय Pressure Group के तौर पर काम किया जाएगा। इसका मकसद सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि जनता के मुद्दों को सामने लाना और जरूरत पड़ने पर सरकार तथा राजनीतिक दलों पर लोकतांत्रिक तरीके से दबाव बनाना होगा। ‘देश को एक बड़े जन-आंदोलन की जरूरत’ दीपक ने देश में जन-आंदोलन की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक सिर्फ चुनाव लड़ने या सरकार बदलने से हर समस्या का समाधान नहीं हो सकता। समाज के लोगों को अपने अधिकारों और मुद्दों को लेकर जागरूक होना होगा। उन्होंने कहा कि जब आम लोग किसी मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी आवाज उठाते हैं, तो व्यवस्था पर उसका असर पड़ता है। CJP इसी सोच के साथ जनता के बीच काम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। Maharashtra Meeting में किन मुद्दों पर मंथन? दो दिवसीय बैठक में संगठन के भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हो रही है। इसमें जनभागीदारी बढ़ाने, संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग मुद्दों पर अभियान चलाने जैसे विषयों पर विचार किया जा रहा है। बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि आने वाले समय में CJP की गतिविधियों का स्वरूप इसी रणनीति के आधार पर तय हो सकता है। संगठन का जोर सीधे चुनावी मैदान में उतरने के बजाय सामाजिक और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रहने का है। Political Party से अलग क्यों रहेगा CJP? दीपक के बयान से साफ है कि CJP अपनी पहचान एक राजनीतिक दल के रूप में नहीं बनाना चाहता। संगठन का दावा है कि वह किसी एक पार्टी की राजनीति तक सीमित रहने के बजाय जनता के सवालों को प्राथमिकता देगा। Pressure Group के रूप में काम करते हुए CJP सरकार की नीतियों और फैसलों से जुड़े जनहित के मुद्दों को उठाने की कोशिश करेगा। इसके लिए लोगों के बीच जागरूकता अभियान और सामूहिक भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगे क्या करेगा CJP? महाराष्ट्र में चल रही बैठक के बाद CJP की आगामी रणनीति को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है। संगठन किन मुद्दों को प्राथमिकता देगा और किस तरह के जन-अभियान शुरू करेगा, इस पर आने वाले दिनों में नजर रहेगी। फिलहाल दीपक के बयान ने एक बात स्पष्ट कर दी है—CJP चुनावी पार्टी बनने के बजाय Pressure Group के रूप में जनता के बीच अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है। अब असली चुनौती इस सोच को जमीन पर उतारने और लोगों को बड़े स्तर पर इससे जोड़ने की होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pradeep Rawat

Pradeep Rawat Funeral: ‘गजनी’ के विलेन को आज दी जाएगी अंतिम विदाई, 2 बजे होगा अंतिम संस्कार

फिल्म इंडस्ट्री से एक दुखद खबर सामने आई है। ‘लगान’ और ‘गजनी’ जैसी फिल्मों में अपनी दमदार एक्टिंग से पहचान बनाने वाले अभिनेता प्रदीप रावत (Pradeep Rawat) नहीं रहे। 74 साल की उम्र में मंगलवार शाम उनका निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से बॉलीवुड के साथ-साथ साउथ फिल्म इंडस्ट्री में भी शोक का माहौल है। परिवार और करीबी लोगों के लिए यह बेहद भावुक पल है। प्रदीप रावत को आज अंतिम विदाई दी जाएगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार दोपहर 2 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 2 बजे होगी Pradeep Rawat की अंतिम विदाई प्रदीप रावत ने मंगलवार शाम करीब 6 से 6:30 बजे के बीच अंतिम सांस ली। उनके मैनेजर के मुताबिक, अभिनेता पहले भी कैंसर से जंग लड़ चुके थे। कुछ समय पहले बीमारी दोबारा सामने आई, जिसके बाद उनका इलाज चल रहा था। बीमारी के बावजूद उन्होंने अपने करियर में लंबे समय तक काम किया और दर्शकों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए रखी। अब उनके निधन के बाद परिवार, दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग उन्हें याद कर रहे हैं। ‘महाभारत’ के अश्वत्थामा से घर-घर में पहचान प्रदीप रावत का एक्टिंग करियर फिल्मों तक सीमित नहीं था। टीवी के मशहूर धारावाहिक ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा की भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई थी। इसके बाद उन्होंने बड़े पर्दे का रुख किया और धीरे-धीरे अपनी मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जाने जाने लगे। गंभीर और नकारात्मक किरदारों में उनकी पकड़ खास तौर पर मजबूत मानी जाती थी। ‘लगान’ के देवा सिंह सोढ़ी को आज भी याद करते हैं दर्शक आमिर खान की चर्चित फिल्म ‘लगान’ प्रदीप रावत के करियर की यादगार फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में उन्होंने देवा सिंह सोढ़ी का किरदार निभाया था। फिल्म की कहानी और कलाकारों की टीम में उनका किरदार भले ही मुख्य भूमिका में नहीं था, लेकिन उनकी मौजूदगी ने दर्शकों का ध्यान खींचा। ‘लगान’ की लोकप्रियता के साथ प्रदीप रावत भी बड़ी संख्या में दर्शकों के बीच पहचाने जाने लगे। ‘गजनी’ में विलेन बनकर छोड़ी अलग छाप प्रदीप रावत को सबसे ज्यादा चर्चा ‘गजनी’ के किरदार को लेकर मिली। आमिर खान स्टारर हिंदी फिल्म में उन्होंने विलेन की भूमिका निभाई थी। उनका अंदाज, आवाज और स्क्रीन पर दिखाई देने वाला रौबदार व्यक्तित्व इस किरदार की खासियत बना। यही वजह है कि आज भी जब ‘गजनी’ के यादगार विलेन की बात होती है, तो प्रदीप रावत का नाम जरूर लिया जाता है। Bollywood के साथ South फिल्मों में भी किया काम प्रदीप रावत ने सिर्फ हिंदी सिनेमा में ही काम नहीं किया। उन्होंने Telugu, Tamil, Kannada और दूसरी भाषाओं की फिल्मों में भी अपनी एक्टिंग का हुनर दिखाया। उनके खाते में ‘सरफरोश’, ‘लगान’, ‘गजनी’, ‘चांदनी चौक टू चाइना’ समेत कई चर्चित फिल्में हैं। साउथ इंडियन फिल्मों में भी उन्होंने कई प्रभावशाली किरदार निभाए और वहां के दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई। साथी कलाकारों ने दी श्रद्धांजलि प्रदीप रावत के निधन की खबर सामने आने के बाद उनके साथ काम कर चुके कलाकारों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने उन्हें याद किया। ‘लगान’ के को-स्टार यशपाल शर्मा ने भी अभिनेता के निधन पर दुख जताया और उनकी अंतिम विदाई से जुड़ी जानकारी साझा की। प्रदीप रावत का जाना सिर्फ एक अभिनेता का चले जाना नहीं है, बल्कि उन किरदारों की याद भी है जिन्हें उन्होंने अपनी आवाज और अंदाज से यादगार बना दिया। अश्वत्थामा से लेकर देवा सिंह सोढ़ी और ‘गजनी’ के विलेन तक, उन्होंने अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी छाप छोड़ी। आज जब उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी, तब उनके चाहने वालों के जेहन में उनके वही दमदार किरदार और पर्दे पर उनका खास अंदाज जरूर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Parliament

Parliament Protest: चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर विपक्ष का हल्ला बोल, Rahul Gandhi से मिले Kiren Rijiju

संसद (Parliament) परिसर में बुधवार को सियासी माहौल उस वक्त गरमा गया, जब विपक्षी सांसदों ने चढ़ावा चोरी और प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज के मुद्दे को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। विपक्ष ने इन घटनाओं पर सरकार से जवाब मांगा और कार्रवाई की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान संसद परिसर में नारेबाजी भी हुई, जिसका असर लोकसभा की कार्यवाही पर दिखाई दिया। विपक्षी सांसदों का कहना है कि जिन मुद्दों को लेकर वे प्रदर्शन कर रहे हैं, उन पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने सरकार पर विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष की ओर से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने पर जोर दिया गया। Parliament परिसर में विपक्ष का Protest संसद परिसर में विपक्षी सांसद हाथों में तख्तियां लेकर पहुंचे और संबंधित घटनाओं को लेकर विरोध जताया। चढ़ावा चोरी के मामले और प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए। विपक्ष का आरोप है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले लोगों के खिलाफ बल प्रयोग किया गया। नेताओं ने मांग की कि पूरे घटनाक्रम की जांच हो और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। हंगामे के बीच Lok Sabha की कार्यवाही प्रभावित विरोध प्रदर्शन का असर संसद के कामकाज पर भी पड़ा। लोकसभा में विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और हंगामे के चलते कार्यवाही बाधित हुई। लगातार शोर-शराबे के बीच सदन को स्थगित करना पड़ा। संसद में इस तरह का गतिरोध कोई नया नहीं है, लेकिन इस बार विपक्ष ने जिन मुद्दों को उठाया है, उन्हें लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सत्ता पक्ष की ओर से सदन चलने देने की अपील की जा रही है। Kiren Rijiju की Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi से मुलाकात इसी बीच संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात की। संसद में जारी गतिरोध के बीच हुई इस बैठक को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। माना जा रहा है कि बैठक का उद्देश्य संसद की कार्यवाही को सुचारू बनाने और मौजूदा गतिरोध को कम करने की कोशिश से जुड़ा था। हालांकि, मुलाकात में किन-किन मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। विपक्ष और सरकार आमने-सामने संसद परिसर में हुए प्रदर्शन ने एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान को सामने ला दिया है। विपक्ष लगातार अपने मुद्दों को संसद में उठाने और सरकार से जवाब मांगने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। वहीं, सरकार के सामने चुनौती है कि सदन की कार्यवाही बिना व्यवधान के चले और महत्वपूर्ण विधायी कामकाज पूरा हो। ऐसे में रिजिजू की विपक्षी नेताओं के साथ मुलाकात को गतिरोध कम करने की दिशा में एक अहम कदम के तौर पर देखा जा रहा है। क्या है पूरा मामला? चढ़ावा चोरी और लाठीचार्ज से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही भी प्रभावित हुई और सदन को स्थगित करना पड़ा। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए संसद में जारी गतिरोध को खत्म किया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UPI

UPI Payment पर लगेगा Charge? ₹2000 से ऊपर Transaction पर 0.40% Fee की चर्चा

UPI ने आम आदमी की जिंदगी में डिजिटल पेमेंट को बेहद आसान बना दिया है। चाय की दुकान से लेकर बड़े स्टोर तक, आज कुछ सेकंड में मोबाइल से भुगतान हो जाता है। ऐसे में अगर UPI Transaction पर चार्ज की व्यवस्था आती है, तो इसका असर सीधे करोड़ों लोगों और कारोबारियों पर पड़ सकता है। दरअसल, ₹2,000 से ज्यादा के UPI Transaction पर MDR (Merchant Discount Rate) लगाने का प्रस्ताव चर्चा में है। इसमें अधिकतम 0.40 फीसदी तक शुल्क लगाए जाने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, अभी इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता है। शुल्क कब और किन ट्रांजैक्शन पर लागू होगा, यह आधिकारिक नियम आने के बाद ही साफ होगा। ₹2000 से ज्यादा के UPI Payment पर क्या बदलेगा? प्रस्तावित व्यवस्था में ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI Payment को शुल्क के दायरे में लाने की बात सामने आई है। इसका मकसद छोटे और रोजमर्रा के डिजिटल पेमेंट को प्रभावित किए बिना बड़े ट्रांजैक्शन से जुड़े खर्च की भरपाई के लिए नया मॉडल तैयार करना हो सकता है। यानी अगर कोई व्यक्ति छोटी रकम का भुगतान करता है, तो उस पर अलग व्यवस्था हो सकती है। वहीं बड़े भुगतान के लिए MDR लागू किए जाने की संभावना है। क्या हर UPI Transaction पर 0.40% Charge लगेगा? नहीं, फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। 0.40% को संभावित अधिकतम MDR दर के तौर पर बताया जा रहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर ₹2,000 से ज्यादा के UPI Payment पर अनिवार्य रूप से 0.40% चार्ज लगेगा। अंतिम नियमों में यह तय होगा कि शुल्क की दर कितनी होगी, कौन-से ट्रांजैक्शन इसके दायरे में आएंगे और भुगतान का बोझ ग्राहक या व्यापारी में से किस पर पड़ेगा। MDR Charge क्या होता है? MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट को स्वीकार करने वाले कारोबारी से पेमेंट सिस्टम के तहत लिया जा सकता है। UPI के मामले में लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि इतने बड़े डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को चलाने की लागत की भरपाई किस तरह की जाए। बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और दूसरे सिस्टम पार्टनर इसके संचालन से जुड़े खर्च उठाते हैं। इसी वजह से UPI के लिए एक स्थायी Revenue Model को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। ₹10,000 के UPI Payment पर कितना Charge हो सकता है? मान लीजिए किसी पात्र ट्रांजैक्शन पर 0.40% MDR लागू होता है। ऐसे में ₹10,000 के भुगतान पर गणना के हिसाब से शुल्क करीब ₹40 बनता है। लेकिन इसे केवल उदाहरण के तौर पर समझना चाहिए। वास्तविक स्थिति में शुल्क की दर, टैक्स और अन्य नियम अलग हो सकते हैं। अंतिम व्यवस्था लागू होने के बाद ही सही रकम स्पष्ट होगी। आम UPI Users को सबसे ज्यादा चिंता किस बात की है? सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या UPI से पैसा भेजते समय सीधे यूजर के बैंक अकाउंट से चार्ज काटा जाएगा? जरूरी नहीं। MDR का संबंध मुख्य रूप से मर्चेंट और पेमेंट सिस्टम से जुड़ी शुल्क व्यवस्था से होता है। इसलिए MDR की चर्चा का सीधा मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक को UPI Payment करते समय अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा। हालांकि, भविष्य में अगर शुल्क व्यवस्था बदली जाती है, तो इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम नियम किस तरह तैयार किए जाते हैं। छोटे दुकानदारों और ग्राहकों पर क्या होगा असर? UPI का सबसे बड़ा फायदा यही रहा है कि छोटे कारोबारी भी बिना कैश के भुगतान ले सकते हैं। किराना दुकान, सब्जी वाला, रेस्टोरेंट या स्थानीय दुकानदार—हर जगह QR Code से भुगतान करना आसान हो गया है। अगर ₹2,000 की सीमा के आधार पर नया मॉडल बनाया जाता है, तो छोटे मूल्य वाले पेमेंट को इससे बाहर रखने की कोशिश की जा सकती है। इससे रोजाना होने वाले छोटे UPI Transactions पर असर सीमित रह सकता है। हालांकि, कारोबारियों के लिए बड़े भुगतान पर शुल्क का मुद्दा महत्वपूर्ण रहेगा। यही वजह है कि अंतिम नियम आने के बाद मर्चेंट और ग्राहक दोनों की प्रतिक्रिया अहम होगी। UPI पर Charge लगाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है? भारत में UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। करोड़ों लोग रोजाना डिजिटल पेमेंट के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। लेकिन इतने बड़े नेटवर्क को संचालित करने में तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग सिस्टम और पेमेंट कंपनियों की लागत भी जुड़ी होती है। ऐसे में UPI को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए Revenue Model पर चर्चा होती रही है। MDR इसी बहस का एक संभावित हिस्सा है। अभी UPI Users को क्या करना चाहिए? फिलहाल UPI Payment को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। ₹2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर 0.40% तक MDR की बात एक प्रस्तावित व्यवस्था के रूप में सामने आई है। इसे हर UPI Payment पर लागू हो चुका नियम समझना सही नहीं होगा। अंतिम फैसला आने के बाद ही पता चलेगा कि शुल्क किन ट्रांजैक्शन पर लागू होगा और इसका भुगतान कौन करेगा। UPI ने भारत में डिजिटल पेमेंट का तरीका ही बदल दिया है। ऐसे में किसी भी तरह की Fee या MDR व्यवस्था का असर बड़ा हो सकता है। ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर संभावित 0.40% तक MDR Charge की चर्चा इसी वजह से महत्वपूर्ण है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अंतिम नियम क्या होते हैं और सरकार किस तरह छोटे पेमेंट, आम ग्राहकों और कारोबारियों के हितों के बीच संतुलन बनाती है।
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Monsoon

Monsoon का कहर: UP-Jharkhand में 17 मौतें, Uttarakhand-Himachal में 300 Roads बंद

देश के कई हिस्सों में मानसून (Monsoon) अब राहत से ज्यादा आफत बनता नजर आ रहा है। कहीं तेज बारिश के बीच बिजली गिरने से लोगों की जान जा रही है, तो कहीं पहाड़ दरकने से सड़कें बंद हो गई हैं। उत्तर प्रदेश और झारखंड में बारिश व आकाशीय बिजली से 17 लोगों की मौत की खबर है। वहीं हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण कई जगह Landslide हुआ है, जिससे करीब 300 सड़कें प्रभावित हुई हैं। केरल में भी बारिश से हालात चिंताजनक बने हुए हैं और पिछले चार दिनों में 25 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। UP-Jharkhand में बारिश और बिजली बनी जानलेवा उत्तर प्रदेश और झारखंड के कई इलाकों में तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अलग-अलग घटनाओं में 17 लोगों की जान चली गई। बारिश के दौरान बिजली गिरने की घटनाओं ने खासकर ग्रामीण और खुले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम खराब होने पर लोगों को खुले स्थानों पर जाने से बचने और सुरक्षित जगह पर रहने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन भी प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए है। Himachal और Uttarakhand में Landslide से रास्ते बंद पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश का असर और ज्यादा गंभीर दिखाई दे रहा है। लगातार बारिश के कारण कई जगह पहाड़ों से मलबा सड़कों पर आ गया, जिसके चलते यातायात रोकना पड़ा। जानकारी के मुताबिक करीब 300 सड़कें बंद हैं। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पहाड़ी क्षेत्रों में आने-जाने वाले यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। सड़कें खोलने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें लगातार काम कर रही हैं। बारिश के बीच पहाड़ी रास्तों पर सफर करना भी जोखिम भरा हो गया है। ऐसे में प्रशासन की ओर से लोगों से मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा करने की अपील की जा रही है। Kerala में भी बारिश का कहर, 4 दिन में 25 मौतें दक्षिण भारत में केरल भी भारी बारिश से प्रभावित है। राज्य में पिछले चार दिनों के दौरान बारिश से जुड़ी घटनाओं में 25 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। कई इलाकों में लगातार बारिश के कारण जलभराव की स्थिति बनी हुई है। निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। राहत और बचाव एजेंसियां स्थिति पर नजर रख रही हैं। Monsoon ने बढ़ाई राज्यों की चिंता देश के अलग-अलग हिस्सों से सामने आ रही तस्वीरें बताती हैं कि इस समय मानसून का असर काफी तेज है। मैदानी राज्यों में जहां भारी बारिश और Lightning लोगों के लिए खतरा बनी हुई है, वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में Landslide और सड़क बंद होने से सामान्य जीवन प्रभावित है। सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों में है जहां बारिश के साथ भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है। सड़कें बंद होने से जरूरी सेवाओं और आवाजाही पर भी असर पड़ सकता है। प्रशासन Alert, लोगों से सावधानी बरतने की अपील बारिश और प्राकृतिक घटनाओं को देखते हुए प्रभावित राज्यों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। बंद सड़कों को जल्द खोलने और जरूरत पड़ने पर लोगों तक राहत पहुंचाने का काम किया जा रहा है। मौसम खराब होने के दौरान लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की Advisory पर ध्यान देने की जरूरत है। खासकर पहाड़ी इलाकों में बिना जरूरी काम के यात्रा से बचना बेहतर होगा। मानसून के इस दौर में देश के कई राज्यों में मौसम ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यूपी और झारखंड में बिजली गिरने से हुई मौतों से लेकर हिमाचल-उत्तराखंड में Landslide और केरल में बारिश से हुई मौतों तक, हालात पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और सरकारी Advisory का पालन करने की जरूरत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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