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दिल्ली जल बोर्ड के जल मंथन 2026 का समापन, 24×7 जल आपूर्ति और यमुना कायाकल्प का रोडमैप तैयार

नई दिल्ली: दिल्ली जल बोर्ड के दो दिवसीय सम्मेलन ‘जल मंथन 2026’ का बुधवार को समापन हो गया। 15 और 16 सितंबर को आयोजित इस सम्मेलन में दिल्ली को जल सुरक्षा प्रदान करने, हर घर तक 24×7 गुणवत्तापूर्ण पानी पहुंचाने और यमुना के कायाकल्प के लिए व्यापक रोडमैप तैयार करने पर चर्चा हुई। सम्मेलन में भारत के अलावा इजराइल, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फ्रांस के जल विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में शामिल हुए। जल नेटवर्क में AI और डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल पर जोर जल मंथन 2026 के दौरान पानी की लीकेज रोकने और जल आपूर्ति नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। इनमें शामिल हैं: इन तकनीकों की मदद से जल नेटवर्क की निगरानी, लीकेज की पहचान और पानी की आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर विचार किया गया। उपचारित अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग पर सहमति सम्मेलन में उपचारित अपशिष्ट जल और कीचड़ के पुन: उपयोग तथा पुनर्चक्रण की रणनीति पर भी चर्चा हुई। इसके तहत उपचारित पानी का इस्तेमाल गैर-पेय जरूरतों के लिए करने पर जोर दिया गया। इससे ताजे पानी की मांग को कम करने और यमुना पर पड़ने वाले दबाव को घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। 24×7 जल आपूर्ति और सर्कुलर वॉटर इकोनॉमी पर चर्चा जल मंथन में दिल्ली की जल व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे: विभिन्न कार्य समूहों की सिफारिशों को ‘जल संकल्प’ के रूप में संकलित किया गया है। इन सुझावों को दिल्ली की जल व्यवस्था में लागू करने के लिए आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जल मंत्री ने बताया सम्मेलन का उद्देश्य दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि ‘जल मंथन’ का उद्देश्य केवल चर्चा तक सीमित रहना नहीं है। इसका लक्ष्य दुनिया में इस्तेमाल हो रही बेहतर तकनीकों और विचारों को दिल्ली की जरूरतों के अनुसार जमीन पर लागू करना है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर घर तक गुणवत्तापूर्ण पानी पहुंचाना और यमुना की स्थिति में स्पष्ट सुधार लाना है। सम्मेलन में सामने आए सुझावों के आधार पर दिल्ली की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने और यमुना पुनरुद्धार के लिए आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
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सपा नेता पवन यादव की हत्या के बाद हाईवे जाम, 2 करोड़ मुआवजे और नौकरी की मांग; पुलिस मुठभेड़ में 2 आरोपी घायल

समाजवादी पार्टी के नेता पवन यादव की हत्या के बाद बुधवार शाम प्रयागराज में तनाव की स्थिति बन गई। पोस्टमॉर्टम के बाद शाम करीब 4 बजे शव घर पहुंचा, जिसके बाद सैकड़ों की संख्या में लोग सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने शव रखकर वाराणसी-प्रयागराज नेशनल हाईवे जाम कर दिया। हाईवे जाम होने से सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोपियों को फांसी देने की मांग की। बैरिकेडिंग तोड़ी, बोर्ड उखाड़कर फेंके प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने हाईवे पर लगी पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ दी। इसके अलावा मौके पर लगे कुछ बोर्ड भी उखाड़कर फेंक दिए गए। इससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन परिजन और ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। मौके पर करीब 200 पुलिसकर्मी, 10 एसीपी, 9 थानों की फोर्स और पीएसी की पांच गाड़ियां तैनात होने की जानकारी है। फिलहाल शव को जमीन पर रखकर अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत चल रही है। डीएम को बुलाने और लिखित आश्वासन की मांग परिजन और ग्रामीण जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल हैं: लोगों का कहना है कि जब तक लिखित रूप से आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। पुलिस मुठभेड़ में दो आरोपी घायल पवन यादव हत्याकांड के आरोपियों की तलाश के दौरान बुधवार दोपहर हंडिया थाना क्षेत्र के बरौत इलाके में पुलिस की हिस्ट्रीशीटर लल्ला यादव और निहाल से मुठभेड़ हो गई। पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ में दोनों आरोपियों के पैर में गोली लगी। पुलिस ने घायल लल्ला यादव और निहाल के अलावा प्रधानपति समेत कुल चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों घायलों को हंडिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया है। अन्य आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हत्याकांड से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। आरोपियों के कब्जे से हथियार और अन्य साक्ष्य मिलने की भी जांच की जा रही है। लल्ला यादव पर 12 से ज्यादा मुकदमे दर्ज पुलिस के अनुसार, जितेंद्र यादव उर्फ लल्ला हंडिया थाना क्षेत्र के मुगरांव गांव का रहने वाला है। उसके खिलाफ जिले के कई थानों में हत्या, हत्या के प्रयास और लूट समेत गंभीर धाराओं में 12 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पवन यादव पर गोली लल्ला यादव ने चलाई थी। पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों के 42 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके बाद संदिग्धों की पहचान कर कार्रवाई की गई। एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बाइक पर सवार हमलावर दिखाई दे रहे हैं। वारदात में इस्तेमाल बाइक और दो तमंचे बरामद जांच के आधार पर पुलिस ने लल्ला यादव, बृजेश यादव और निहाल अली को हिरासत में लिया। पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली कि तीनों बाइक से वारदात को अंजाम देने पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि निहाल बाइक चला रहा था, बृजेश बीच में बैठा था और लल्ला यादव सबसे पीछे बैठा था। आरोप है कि लल्ला यादव ने पवन यादव पर गोली चलाई। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल बाइक और दो तमंचे बरामद किए हैं। पूछताछ में दोनों तमंचे और कारतूस करीब 20 हजार रुपए में खरीदे जाने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है। पुलिस के अनुसार, पवन यादव और लल्ला यादव के बीच पुरानी रंजिश की बात भी जांच में सामने आई है। छोटे भाई ने की बुलडोजर कार्रवाई की मांग पवन यादव के छोटे भाई बृजेश यादव ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि उनके बड़े भाई की हत्या हुई है और परिवार न्याय चाहता है। बृजेश यादव ने कहा कि जो आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाने की भी मांग की। सपा प्रवक्ता ने सरकार पर साधा निशाना समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता निधि यादव ने घटना को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हंडिया टाउन एरिया जैसे व्यस्त इलाके में दिनदहाड़े पूर्व प्रधान संघ के अध्यक्ष की हत्या होना गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है और सरकार लोगों को सुरक्षा देने में असफल रही है। क्या है पूरा मामला? पवन यादव प्रयागराज के मुगरांव गांव के रहने वाले थे। वह पहले प्रधान रह चुके थे और वर्तमान में समाजवादी पार्टी के जिला सचिव के पद पर थे। उनके परिवार में पत्नी नीतू, तीन बेटियां खुशी, मुस्कान और छोटी तथा एक बेटा प्रिंस है। मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे पवन यादव अपनी कार से हंडिया कस्बे पहुंचे थे। उन्होंने कर्मनाशा मोहल्ले में सड़क किनारे कार खड़ी की और पास के एक कैफे में दोस्तों से बातचीत करने चले गए। करीब दो घंटे बाद शाम 5:20 बजे वह कैफे से बाहर निकले और अपनी कार के पास पहुंचे। इसी दौरान प्रयागराज की ओर से बाइक पर सवार तीन बदमाश वहां पहुंचे। इनमें से दो ने हेलमेट पहन रखा था। पुलिस के मुताबिक, बाइक की रफ्तार धीमी करने के बाद पीछे बैठे बदमाश ने पवन यादव को नजदीक से गोली मार दी। गोली उनकी पीठ में लगी, जिसके बाद वह सड़क पर गिर पड़े। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास अफरा-तफरी मच गई। वारदात हंडिया थाने से करीब 500 मीटर की दूरी पर हुई। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घायल पवन यादव को हंडिया के एक निजी अस्पताल ले गई। हालत गंभीर होने पर उन्हें टैगोर स्थित निजी अस्पताल और फिर एसआरएन अस्पताल रेफर किया गया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और मामले की जांच जारी है।
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पूर्णिया के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर पर आय से अधिक संपत्ति का केस, चार ठिकानों पर निगरानी की छापेमारी

बिहार के पूर्णिया में भवन निर्माण विभाग के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर सत्येंद्र कुमार चौधरी के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (VIB) ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में केस दर्ज किया है। उन पर करीब 1 करोड़ 97 लाख 58 हजार 70 रुपए की आय से अधिक संपत्तिअर्जित करने का आरोप है। बुधवार, 16 सितंबर को निगरानी विभाग की टीम ने सत्येंद्र कुमार चौधरी के चार ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई पूर्णिया और पटना में की गई। पूर्णिया और पटना में चार ठिकानों पर छापेमारी निगरानी टीम ने पूर्णिया स्थित सत्येंद्र कुमार चौधरी के सरकारी आवास और कार्यालय में तलाशी ली। वहीं, पटना के शास्त्री नगर थाना क्षेत्र के कृषि नगर, शेखपुरा स्थित आवास और पटना एम्स से करीब एक किलोमीटर पहले इंडियन बैंक के पास स्थित स्वास्तिक भवन में भी छापेमारी की गई। जानकारी के अनुसार, स्वास्तिक भवन की अनुमानित कीमत करीब 10 करोड़ रुपए बताई जा रही है। छापेमारी के दौरान सत्येंद्र चौधरी पूर्णिया स्थित सरकारी आवास में मौजूद थे। जुलाई 2026 में बने थे सुपरिटेंडेंट इंजीनियर सत्येंद्र कुमार चौधरी जुलाई 2026 में एग्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद से प्रमोट होकर सुपरिटेंडेंट इंजीनियर बने थे। प्रमोशन के बाद उनका तबादला पटना से पूर्णिया कर दिया गया था। निगरानी विभाग की कार्रवाई विशेष निगरानी न्यायालय से सर्च वारंट मिलने के बाद शुरू की गई। तीन टीमों ने पटना में दो और पूर्णिया में एक ठिकाने पर तलाशी अभियान चलाया। पत्नी और परिजनों के नाम पर भी संपत्तियां जांच एजेंसी के अनुसार, सत्येंद्र कुमार चौधरी, उनकी पत्नी उषा देवी और अन्य परिजनों के नाम पर कई अचल संपत्तियां मिली हैं। परिवार के नाम पर कुल सात अचल संपत्तियां होने की बात सामने आई है, जिनमें पटना और पूर्णिया में स्थित मकान और जमीन शामिल हैं। तलाशी के दौरान मकान, जमीन, बैंक खाते, निवेश और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच की जा रही है। कार्यालय में फाइलों और कंप्यूटर रिकॉर्ड की जांच पूर्णिया में बुधवार सुबह करीब 7 बजे निगरानी टीम ने सुपरिटेंडेंट इंजीनियर के आवास और कार्यालय पर एक साथ कार्रवाई की। यह छापेमारी डीएसपी संतोष कुमार और बिनोद कुमार के नेतृत्व में नौ सदस्यीय टीम ने की। कार्यालय में अधिकारियों ने फाइलों, कंप्यूटर रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की। वहीं, आवास पर बैंक खातों, पासबुक, वित्तीय लेनदेन, जमीन-मकान और चल-अचल संपत्तियों से संबंधित कागजात खंगाले गए। तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों को जब्त कर सीलबंद किया गया और टीम अपने साथ ले गई। जब्त दस्तावेजों तथा संपत्तियों का मूल्यांकन किया जा रहा है। बैंक खातों और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड भी मिले छापेमारी के दौरान निगरानी टीम को संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों का विवरण, निवेश संबंधी कागजात और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड मिलने की जानकारी है। अधिकारी इन दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं, ताकि संपत्तियों के स्रोत और सत्येंद्र कुमार चौधरी की घोषित आय के बीच संबंधों का सत्यापन किया जा सके। बैंकिंग लेनदेन और अन्य वित्तीय गतिविधियों की भी जांच जारी है। निगरानी विभाग की तलाशी कार्रवाई अभी जारी है। आगे की जांच के बाद मामले में और जानकारी सामने आने की संभावना है।
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अमेरिका से तनाव के बीच कनाडा को EU का पहला एसोसिएट मेंबर बनाने का प्रस्ताव, रक्षा और AI समेत कई क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग

अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक और कूटनीतिक तनाव के बीच कनाडा यूरोपीय संघ (EU) के साथ अपने संबंध मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को कनाडा को यूरोपीय संघ का पहला ‘एसोसिएट मेंबर’ बनाने की दिशा में काम करने का प्रस्ताव रखा। यह प्रस्ताव कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मौजूदगी में यूरोपीय संसद में दिया गया। हालांकि, एसोसिएट सदस्यता का दर्जा अभी यूरोपीय संघ के मौजूदा नियमों में मौजूद नहीं है। इसके लिए नए नियमों और सदस्य देशों की सहमति की जरूरत होगी। कनाडा को क्या फायदा हो सकता है? एसोसिएट मेंबर बनने की स्थिति में कनाडा यूरोपीय संघ के 27 पूर्ण सदस्य देशों का हिस्सा नहीं होगा। उसे EU के फैसलों पर मतदान का अधिकार भी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। प्रस्तावित साझेदारी के तहत रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), तकनीक, ऊर्जा, जरूरी खनिज, साइबर सुरक्षा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की योजना है। इसमें उन्नत विनिर्माण, बैटरी और आर्कटिक क्षेत्र से जुड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हो सकते हैं। वॉन डेर लेयेन ने इस व्यापक साझेदारी को ‘एलायंस फॉर द फ्यूचर’ यानी भविष्य के लिए गठबंधन से जोड़कर पेश किया। मार्क कार्नी ने पहले भी जताई थी विशेष गठबंधन की इच्छा कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इससे पहले यूरोपीय संघ के साथ एक ‘विशेष गठबंधन’ बनाने की इच्छा जताई थी। उन्होंने स्पष्ट किया था कि कनाडा पूर्ण रूप से EU का सदस्य बनने की मांग नहीं कर रहा, बल्कि आर्थिक और सुरक्षा सहयोग का एक अलग मॉडल चाहता है। कनाडा अमेरिका पर अपनी व्यापारिक निर्भरता कम करने और यूरोप के साथ संबंधों को व्यापक बनाने की कोशिश कर रहा है। दोनों पक्ष अक्टूबर में होने वाले कनाडा-EU शिखर सम्मेलन में सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर आगे चर्चा कर सकते हैं। यूरोप के लिए नई सिक्योरिटी काउंसिल का प्रस्ताव वॉन डेर लेयेन ने यूरोप की सुरक्षा मजबूत करने के लिए एक नई यूरोपीय सिक्योरिटी काउंसिल बनाने का विचार भी रखा है। इसमें यूरोपीय संघ से बाहर के साझेदार देशों को शामिल किया जा सकता है। प्रस्तावित व्यवस्था में ब्रिटेन, कनाडा, नॉर्वे और यूक्रेन जैसे देशों की भागीदारी पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ड्रोन हमलों, साइबर हमलों, तोड़फोड़ और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाना है। EU और कनाडा के बीच पहले से है CETA समझौता यूरोपीय संघ और कनाडा के बीच पहले से ही CETA नाम का व्यापार समझौता लागू है। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों के बीच अधिकांश वस्तुओं पर आयात शुल्क कम या समाप्त किया गया है। अब दोनों पक्ष मौजूदा व्यापार संबंधों को रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और रणनीतिक आपूर्ति श्रृंखलाओं तक विस्तार देने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, CETA को लेकर यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों की घरेलू मंजूरी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार तनाव जारी अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार संबंधों को लेकर पिछले कई महीनों से तनाव बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और कनाडा से जुड़े बयानों के बाद दोनों देशों के संबंधों में खिंचाव बढ़ा है। टैरिफ विवाद के बीच कनाडा यूरोप सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ व्यापार और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है। वहीं, यूरोपीय संघ भी वैश्विक अस्थिरता और व्यापारिक चुनौतियों के बीच नए रणनीतिक साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करना चाहता है। एसोसिएट सदस्यता पर अभी अंतिम फैसला नहीं कनाडा को यूरोपीय संघ का एसोसिएट मेंबर बनाने का प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है। EU के नियमों में इस तरह की सदस्यता का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसलिए आगे की प्रक्रिया में कानूनी, राजनीतिक और सदस्य देशों की सहमति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। प्रस्ताव के अंतिम स्वरूप, अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
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UPI शुल्क पर वित्त मंत्रालय की सफाई- किसी विदेशी दबाव में नहीं लिया फैसला, राहुल गांधी के आरोपों पर BJP का जवाब

नई दिल्ली। UPI के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लागू करने के फैसले को लेकर सियासी विवाद शुरू हो गया है। वित्त मंत्रालय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि UPI से जुड़े फैसले भारत की घरेलू जरूरतों के आधार पर स्वतंत्र रूप से लिए गए हैं। मंत्रालय ने विदेशी दबाव के आरोपों को खारिज किया है। मंत्रालय के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा। हालांकि, यह शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा। सरकार के मुताबिक, करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन इस शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे। ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR नए फ्रेमवर्क के तहत ₹2,000 से अधिक के निर्धारित मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर इसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेन-देन होगी। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई टैक्स नहीं है और इसे सरकार या NPCI द्वारा सीधे वसूल नहीं किया जाएगा। यह शुल्क पेमेंट इकोसिस्टम में शामिल बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और UPI ऐप प्रोवाइडर्स के बीच वितरित किया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) ट्रांजैक्शन पूरी तरह नि:शुल्क रहेंगे। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट और छोटे व्यापारियों से जुड़े शून्य-MDR प्रावधानों के तहत आने वाले लेन-देन भी शुल्क मुक्त रहेंगे। राहुल गांधी ने फैसले पर उठाए सवाल इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने UPI पर शुल्क लागू करने के फैसले की आलोचना की थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि इस फैसले से अमेरिका को फायदा होगा। उन्होंने सरकार से फैसले को वापस लेने की मांग की। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि राहुल गांधी को हर जगह अमेरिका का भूत दिखाई देता है। उन्होंने यह भी कहा कि UPI शुल्क ग्राहकों से लेने की कोई सिफारिश नहीं की गई है। वहीं, वित्त मंत्रालय ने दोहराया कि UPI से जुड़े फैसले देश की घरेलू जरूरतों और डिजिटल पेमेंट सिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता को ध्यान में रखकर लिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल UPI के नए शुल्क नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। याचिका में अदालत से नए नियम को रद्द करने की मांग की गई है। हालांकि, नियमों की न्यायिक समीक्षा और याचिका पर आगे की कार्रवाई का विवरण अदालत की कार्यवाही पर निर्भर करेगा। नितिन कामथ ने ब्रोकिंग सेक्टर को लेकर जताई चिंता जिरोधा के फाउंडर और CEO नितिन कामथ ने UPI MDR के प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि UPI का इस्तेमाल बड़े स्तर पर हो रहा है, इसलिए MDR की जरूरत पर चर्चा हो सकती है। लेकिन इन्वेस्टिंग और ब्रोकिंग जैसे क्षेत्रों में मौजूदा शुल्क व्यवस्था व्यावहारिक नहीं लगती। उन्होंने मर्चेंट और ब्रोकर के बीच अंतर समझाते हुए कहा कि कोई ग्राहक ₹20,000 का सामान खरीदता है तो भुगतान सीधे मर्चेंट के कारोबार से जुड़ा होता है। दूसरी ओर, कोई ग्राहक ₹2 लाख अपने ट्रेडिंग अकाउंट में जमा कर सकता है, लेकिन उस दिन कोई शेयर नहीं खरीद सकता। ऐसे मामले में ब्रोकर को तत्काल ट्रेडिंग रेवेन्यू नहीं मिलता, लेकिन UPI भुगतान से जुड़ा MDR खर्च उसके ऊपर आ सकता है। कामथ ने इसी अंतर को लेकर चिंता जताई है। विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा AAP आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि UPI शुल्क का असर आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इससे छोटे कारोबारियों का डिजिटल कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। RJD RJD नेता तेजस्वी यादव ने UPI के जरिए बड़े पैमाने पर होने वाले भुगतान का जिक्र करते हुए शुल्क लगाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने इसे महंगाई और जनता की आर्थिक परेशानियों से जोड़कर सरकार पर निशाना साधा। NCP (SP) NCP (SP) की राष्ट्रीय प्रवक्ता सीमा मलिक ने कहा कि सरकार ने पहले लोगों को डिजिटल भुगतान की आदत डलवाई और अब शुल्क लगाने की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने UPI के व्यापक इस्तेमाल का उल्लेख करते हुए इस फैसले पर सवाल उठाए। आवश्यक सेवाओं और पूंजी बाजार के लिए अलग शुल्क वित्त मंत्रालय के स्पष्टीकरण के अनुसार, कुछ आवश्यक क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लागू होगा। इसमें रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्र शामिल हैं। वहीं, म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज, स्टॉकब्रोकर और डीलर से जुड़े पूंजी बाजार ट्रांजैक्शन पर 0.02 प्रतिशत MDR का प्रावधान है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन होगी। UPI को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी प्रोत्साहन योजना सरकार ने UPI को बढ़ावा देने और छोटे व्यापारियों के लिए डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। इसके तहत छोटे व्यापारियों को किए जाने वाले निर्धारित कम मूल्य के UPI पेमेंट पर इंसेंटिव का प्रावधान रहा है। वित्त मंत्रालय का कहना है कि नया फ्रेमवर्क UPI इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने, डिजिटल भुगतान के विस्तार और साइबर सुरक्षा जैसी जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
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Pakistan

Arabian Sea में India-Pakistan Warships की टक्कर, 15 साल पुरानी घटना फिर चर्चा में

भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच रिश्तों में तनाव के बीच अरब सागर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने दोनों देशों की नौसेनाओं को फिर चर्चा में ला दिया है। 15 सितंबर 2026 की शाम उत्तरी अरब सागर में पाकिस्तानी नौसेना के एक जहाज की भारतीय नौसेना के युद्धपोत से टक्कर हो गई। घटना के बाद भारत ने इसे गंभीरता से लेते हुए नई दिल्ली में पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब किया और औपचारिक विरोध दर्ज कराया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, टक्कर में किसी बड़े नुकसान या भारतीय नौसैनिक के घायल होने की खबर नहीं है। Surveillance Mission पर था भारतीय युद्धपोत रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय नौसेना का युद्धपोत समुद्र में अपने नियमित surveillance mission पर था। इसी दौरान पाकिस्तानी नौसेना का जहाज भारतीय युद्धपोत के करीब पहुंचा। भारतीय पक्ष के अनुसार, पाकिस्तानी जहाज तेज गति से आगे बढ़ रहा था और उसके maneuver के दौरान दोनों नौसैनिक जहाज आपस में टकरा गए। घटना अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुई। टक्कर के बाद भारतीय युद्धपोत ने अपना मिशन जारी रखा। शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े structural damage की जानकारी सामने नहीं आई है। भारत ने Pakistan के सामने जताया Strong Protest घटना के बाद विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के Charge d’Affaires को तलब किया। भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के व्यवहार को “unacceptable and unprofessional” बताया। भारत की ओर से कहा गया कि समुद्र में सैन्य जहाजों को अंतरराष्ट्रीय maritime safety practices और दोनों देशों के बीच लागू समझौतों का ध्यान रखना चाहिए। भारत ने इस्लामाबाद में मौजूद अपने Charge d’Affaires को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने यह मामला उठाने का निर्देश दिया है। 1991 के Agreement का भी हुआ जिक्र इस पूरे मामले में 1991 India-Pakistan Agreement का भी जिक्र सामने आया है। भारत ने समझौते के Article 10 का हवाला देते हुए सैन्य गतिविधियों के दौरान जरूरी सावधानी और निर्धारित नियमों के पालन पर जोर दिया है। इस घटना को लेकर अब दोनों देशों के अधिकारियों के बीच diplomatic level पर बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ सकता है। 15 साल पहले भी टकराए थे दोनों देशों के Warships भारत और पाकिस्तान के युद्धपोतों के बीच समुद्र में ऐसी घटना पहले भी हो चुकी है। करीब 15 साल पहले 2011 में Gulf of Aden में भारतीय नौसेना के INS Godavari और पाकिस्तानी नौसेना के PNS Babur के बीच भी टक्कर की घटना सामने आई थी। उस समय दोनों देशों के जहाज MV Suez से जुड़े anti-piracy operation के दौरान क्षेत्र में मौजूद थे। घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान के सामने विरोध दर्ज कराया था। 2011 की घटना में INS Godavari के helicopter deck की safety net को मामूली नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। 2011 से 2026 तक फिर वही समुद्री तनाव करीब डेढ़ दशक बाद दोनों देशों के नौसैनिक जहाजों से जुड़ी ऐसी घटना का सामने आना ध्यान खींच रहा है। हालांकि, दोनों घटनाओं की परिस्थितियां एक जैसी नहीं थीं और इनके बीच सीधे तौर पर समानता निकालना उचित नहीं होगा। फिलहाल 2026 की घटना में सबसे अहम बात यह है कि भारत ने राजनयिक स्तर पर पाकिस्तान के सामने आपत्ति दर्ज करा दी है। अरब सागर रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है। ऐसे में वहां भारतीय और पाकिस्तानी नौसैनिक जहाजों की गतिविधियों के दौरान छोटी-सी घटना भी diplomatic discussion का विषय बन सकती है। अब आगे क्या? ताजा मामले में भारत की ओर से विरोध दर्ज कराया जा चुका है। अब आगे दोनों देशों के संबंधित अधिकारी इस घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों पर चर्चा कर सकते हैं। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की जानकारी नहीं है, लेकिन यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि India-Pakistan के बीच समुद्री क्षेत्र में communication, navigation और safety protocols कितने महत्वपूर्ण हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jantar Mantar

Jantar Mantar Case Update: सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बदलने की मांग ठुकराई, जांच रहेगी जारी

जंतर-मंतर (Jantar Mantar) से जुड़े छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। अदालत ने कमेटी के पुनर्गठन और उसके सदस्यों में बदलाव की मांग को स्वीकार नहीं किया। इसका मतलब है कि पहले से बनाई गई पांच सदस्यीय कमेटी ही अब मामले की जांच आगे बढ़ाएगी। इस मामले में प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए गए थे। इन्हीं पहलुओं की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को High-Powered Inquiry Committee का गठन किया था। जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में बनी है कमेटी सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। कमेटी में कुल पांच सदस्य हैं, जिन्हें मामले से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जांच की जिम्मेदारी दी गई है। हाल की सुनवाई में कमेटी के एक सदस्य को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई। याचिकाकर्ता की ओर से सदस्य की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए हितों के टकराव की आशंका जताई गई और कमेटी में बदलाव की मांग की गई। हालांकि, अदालत ने इस मांग को मंजूरी नहीं दी। अब मौजूदा कमेटी ही अपनी तय जिम्मेदारियों के अनुसार जांच करेगी। Protest के दौरान हुई घटनाओं की होगी पड़ताल High-Powered Committee को जंतर-मंतर समेत अन्य स्थानों पर हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े घटनाक्रम की जांच करनी है। प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, पुलिस कार्रवाई और सामने आई शिकायतों से जुड़े तथ्यों को जांच के दायरे में रखा गया है। कमेटी संबंधित लोगों की बात सुन सकती है और मामले से जुड़े दस्तावेज या अन्य सामग्री भी देख सकती है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी जाएगी। 17 Metro Stations बंद करने का मामला भी उठा सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में दिल्ली के 17 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने का मुद्दा भी सामने आया। प्रदर्शन के दौरान इन स्टेशनों को बंद रखने के फैसले पर सवाल उठाए गए। इस मुद्दे पर अदालत ने संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। ऐसे में अब जांच और आगे की सुनवाई में मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले से जुड़े कारणों पर भी चर्चा हो सकती है। नाबालिगों की सुरक्षा पर भी हुई बात मामले में सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े दो नाबालिगों की सुरक्षा का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया। उनकी ओर से कथित धमकियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर चिंता जताई गई। अदालत ने मामले से जुड़े लोगों की सुरक्षा के पहलू पर भी ध्यान देने की बात कही है। इससे साफ है कि सुनवाई में केवल प्रदर्शन की घटना ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े दूसरे मानवीय पहलुओं पर भी गौर किया जा रहा है। अब कमेटी की Report का इंतजार सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद हाई-पावर्ड कमेटी में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। कमेटी अपने मौजूदा स्वरूप में जांच जारी रखेगी और अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपेगी। अब सबकी नजर कमेटी की जांच और उसकी रिपोर्ट पर रहेगी। रिपोर्ट सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट मामले में आगे के निर्देश दे सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Karnataka कांग्रेस विधायक की भतीजी पर बिना काम ₹70 हजार सैलरी लेने का आरोप

Karnataka कांग्रेस विधायक की भतीजी पर बिना काम ₹70 हजार सैलरी लेने का आरोप

Karnataka में कांग्रेस विधायक की भतीजी को लेकर सरकारी नौकरी से जुड़ा एक मामला सामने आया है। आरोप है कि उन्हें बिना नियमित रूप से काम किए हर महीने करीब 70 हजार रुपये की सैलरी मिल रही है। बताया जा रहा है कि वह पिछले करीब 6 महीने से सरकारी क्लीनिक नहीं गईं, जहां उनकी नियुक्ति बताई गई है। मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि सरकारी नौकरी के साथ वह अपनी पढ़ाई भी कर रही हैं। इसको लेकर सरकारी व्यवस्था और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, संबंधित महिला की नियुक्ति एक सरकारी क्लीनिक में की गई थी। हालांकि, आरोप है कि लंबे समय से वह क्लीनिक में अपनी ड्यूटी पर नहीं पहुंच रही हैं, इसके बावजूद उनका वेतन जारी है। मामला सामने आने के बाद संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली और उपस्थिति व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक जांच और उसके निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में है, क्योंकि महिला का संबंध एक कांग्रेस विधायक के परिवार से बताया जा रहा है। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया और विभागीय जांच के बाद मामले में आगे की स्थिति साफ होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rajasthan

Rajasthan Politics: निकाय चुनाव के बाद तेज हुआ जोड़-तोड़, पार्षदों की Resort Politics चर्चा में

राजस्थान (Rajasthan) में निकाय चुनाव खत्म हो चुके हैं, नतीजे भी सामने आ गए हैं, लेकिन सियासी हलचल अभी थमी नहीं है। अब नजरें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं में बोर्ड बनाने पर टिक गई हैं। जहां किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, वहां निर्दलीय और बागी पार्षदों की भूमिका अचानक काफी अहम हो गई है। इसी के साथ राजस्थान में एक बार फिर ‘Resort Politics’ यानी पार्षदों की बाड़ेबंदी की चर्चा तेज हो गई है। कई जगह राजनीतिक दल अपने पार्षदों को होटल और रिसॉर्ट में ठहरा रहे हैं। इस बीच कुछ जगहों पर पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए करोड़ों रुपये की कथित बोली लगाए जाने की चर्चाएं भी सामने आई हैं। हालांकि, इन रकमों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बोर्ड बनाने के लिए शुरू हुआ नंबर गेम निकाय चुनाव के बाद अब राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बहुमत जुटाने की है। जिन निकायों में बीजेपी या कांग्रेस बहुमत से पीछे रह गई हैं, वहां निर्दलीय पार्षदों का समर्थन निर्णायक हो सकता है। यही वजह है कि चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद पार्षदों से संपर्क साधने का दौर शुरू हो गया। कई जगह पार्टी नेतृत्व अपने निर्वाचित पार्षदों को एक साथ रख रहा है, ताकि बोर्ड गठन तक राजनीतिक समीकरण में कोई बड़ा बदलाव न हो। होटल और रिसॉर्ट बने सियासी ठिकाने राजस्थान में Resort Politics कोई नई बात नहीं है। जब भी किसी चुनाव के बाद बहुमत का आंकड़ा उलझता है, तब राजनीतिक दल अपने समर्थक पार्षदों को एक जगह रखने की रणनीति अपनाते हैं। अजमेर समेत कई शहरों में पार्षदों की बाड़ेबंदी की खबरें सामने आई हैं। जयपुर में भी पार्टी उम्मीदवारों को रिसॉर्ट में ठहराने की जानकारी सामने आई। इसका मकसद पार्षदों को एकजुट रखना और विरोधी खेमे की संभावित सेंध को रोकना बताया जा रहा है। निर्दलीय पार्षदों की बढ़ी अहमियत इस पूरे सियासी खेल में सबसे ज्यादा चर्चा निर्दलीय पार्षदों की है। कई जगह मुकाबला इतना करीबी है कि कुछ निर्दलीय पार्षदों का समर्थन पूरे बोर्ड का गणित बदल सकता है। ऐसे में जिन पार्षदों को चुनाव के दौरान ज्यादा महत्व नहीं मिला, वे अब बोर्ड गठन के समय ‘किंगमेकर’ की भूमिका में नजर आ सकते हैं। राजनीतिक दलों के लिए उनका समर्थन हासिल करना इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है। करोड़ों की बोली की चर्चा कितनी सच? निकाय चुनाव के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में पार्षदों को अपने पक्ष में करने के लिए बड़ी रकम की पेशकश की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ रिपोर्टों में करोड़ों रुपये तक की कथित बोली लगाए जाने का जिक्र है। हालांकि, किस पार्षद को कितनी रकम की पेशकश हुई, इसका कोई स्वतंत्र और ठोस प्रमाण सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया है। इसलिए इन दावों को फिलहाल आरोप या राजनीतिक चर्चा के तौर पर ही देखा जा रहा है। 21 सितंबर पर टिकी नजरें अब राजस्थान की स्थानीय राजनीति में अगला बड़ा पड़ाव 21 सितंबर है। इसी दिन कई निकायों में महापौर और चेयरमैन पद के चुनाव होने हैं। इन चुनावों से पहले पार्षदों की बाड़ेबंदी और जोड़-तोड़ की कोशिशें तेज रहने की संभावना है। खासकर उन निकायों में जहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीटों का अंतर कम है, वहां हर पार्षद का वोट महत्वपूर्ण हो गया है। चुनाव जीतने के बाद भी जारी है सियासी मुकाबला निकाय चुनाव का मतदान और मतगणना भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन स्थानीय सत्ता की असली तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। अब मुकाबला बोर्ड बनाने और बहुमत साबित करने का है। रिसॉर्ट में ठहराए जा रहे पार्षद, निर्दलीयों से संपर्क और करोड़ों की कथित बोली की चर्चाओं ने राजस्थान की स्थानीय राजनीति को फिर सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिनों में तस्वीर तब साफ होगी, जब महापौर और चेयरमैन चुनाव के नतीजे सामने आएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi Schoolmate Asgar: 8 दिन बाद BJP MLA ने छोड़ा जमीन का कब्जा, Land Dispute में बड़ा Twist

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने स्कूल साथी असगर अली वोरा इन दिनों महाराष्ट्र के एक जमीन विवाद को लेकर चर्चा में हैं। करीब 15 साल से चल रहे इस मामले में उस समय बड़ा मोड़ आया, जब वोरा ने 8 सितंबर को PM मोदी (PM Modi) से मुलाकात कर अपनी जमीन से जुड़ी शिकायत उनके सामने रखी। इसके करीब आठ दिन बाद BJP विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और उससे जुड़ी निर्माण अनुमति वापस करने की बात कही है। PM मोदी से मुलाकात के बाद बदला मामला 81 वर्षीय असगर अली वोरा और नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडनगर के BN School में साथ पढ़ाई की थी। वोरा ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में मौजूद जमीन को लेकर चल रहे विवाद की जानकारी दी। वोरा का दावा है कि उन्होंने 1989 में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। उनका कहना है कि उन्होंने जमीन को न तो बेचा और न ही किसी दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर किया। बाद में जमीन से जुड़े दस्तावेजों को लेकर विवाद सामने आया। 15 साल से परेशान थे असगर असगर अली वोरा के मुताबिक, वह पिछले करीब 15 वर्षों से अपनी जमीन के मामले को लेकर अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि 2011 में जमीन से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। उनका यह भी दावा है कि बाद में जमीन को अलग-अलग हिस्सों में दिखाया गया और इससे जुड़े मामलों में बिल्डरों के नाम सामने आए। हालांकि, इन आरोपों से जुड़े दस्तावेजों और कानूनी दावों की अंतिम स्थिति संबंधित जांच और रिकॉर्ड से ही तय होगी। BJP MLA नरेंद्र मेहता ने लिया बड़ा फैसला PM मोदी से मुलाकात के बाद महाराष्ट्र सरकार के स्तर पर भी इस मामले को लेकर बैठक हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में मंत्रालय में बैठक हुई। इसके बाद BJP विधायक नरेंद्र मेहता ने Town Planning Department को पत्र देकर विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और Construction Permission वापस करने की जानकारी दी। मेहता ने पुलिस को भी पत्र लिखकर असगर वोरा के खिलाफ पहले दर्ज कराई गई शिकायत वापस लेने की बात कही। उनके अनुसार, दोनों पक्षों के बीच इस मामले में समझौता हुआ है। 1989 में खरीदी थी जमीन, 2015 में FIR वोरा के अनुसार, जमीन खरीदने के कई साल बाद विवाद शुरू हुआ। उन्होंने कथित फर्जीवाड़े को लेकर 2015 में FIR दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि मामले की जांच में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई गई। वोरा ने प्रधानमंत्री के सामने इस पूरे मामले की जांच की मांग रखी थी। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने मामले में CBI जांच की मांग भी की थी। अब जमीन विवाद में क्या होगा? नरेंद्र मेहता की ओर से कब्जा छोड़ने और निर्माण अनुमति वापस करने की बात सामने आने के बाद इस पुराने विवाद में नया मोड़ आया है। साथ ही पुलिस शिकायत वापस लेने की जानकारी ने भी मामले को चर्चा में ला दिया है। हालांकि, जमीन के मालिकाना हक, पुराने दस्तावेजों और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े सवालों का अंतिम फैसला संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही होगा। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि PM मोदी से असगर अली वोरा की मुलाकात के कुछ ही दिनों बाद विवादित जमीन को लेकर BJP विधायक की ओर से पीछे हटने की बात सामने आई है। इससे करीब डेढ़ दशक पुराने इस Land Dispute पर सबकी नजरें टिक गई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मां कूष्मांडा

Navratri 2026: चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा, जानें कथा, भोग और मंत्र

नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में उन्हें सृष्टि की रचनात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। माना जाता है कि उनकी आराधना से भक्तों को उत्साह, सकारात्मकता और नई शुरुआत की प्रेरणा मिलती है। मां कूष्मांडा की पौराणिक कथा पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब चारों ओर अंधकार था, तब मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। यह कथा सृजन और ऊर्जा के महत्त्व को दर्शाती है। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः। भोग: मां को मालपुआ या मीठे फल अर्पित करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gandhinagar

Gandhinagar Municipal Election: भाजपा को बहुमत, कांग्रेस को फायदा; AAP को एक भी सीट नहीं

Gandhinagar Municipal Election गुजरात की राजधानी गांधीनगर के नगर निगम चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर अपना दबदबा कायम रखा है। 44 सीटों वाले नगर निगम में भाजपा ने 38 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। वहीं, कांग्रेस 5 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) इस बार अपना खाता भी नहीं खोल पाई। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। 13 अक्टूबर को सामने आए चुनाव परिणामों में भाजपा के लिए राहत की बात यह रही कि नगर निगम की सत्ता उसके पास बनी रही। हालांकि, पिछली बार के मुकाबले पार्टी की सीटें कम हुई हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस ने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर स्थानीय राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। Gandhinagar Election Result: BJP को 38, कांग्रेस को मिलीं 5 सीटें गांधीनगर नगर निगम की 44 सीटों के लिए 11 अक्टूबर को मतदान हुआ था। चुनाव में अलग-अलग राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई। मतगणना के बाद भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। पार्टीवार नतीजे इस प्रकार रहे: इन आंकड़ों से साफ है कि भाजपा ने नगर निगम में बहुमत बनाए रखा है। वहीं, कांग्रेस को मिली पांच सीटें और AAP का खाता नहीं खुलना इस चुनाव के प्रमुख नतीजे रहे। पिछली बार से BJP की सीटें घटीं, कांग्रेस ने बढ़ाई ताकत गांधीनगर नगर निगम के पिछले चुनाव अक्टूबर 2021 में हुए थे। उस समय भाजपा ने 44 में से 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस को दो सीटें मिली थीं, जबकि आम आदमी पार्टी ने भी एक सीट हासिल की थी। इस बार तस्वीर में कुछ बदलाव देखने को मिला। भाजपा की सीटें 41 से घटकर 38 रह गईं, जबकि कांग्रेस दो से बढ़कर पांच सीटों तक पहुंच गई। AAP पिछले चुनाव में मिली अपनी एकमात्र सीट भी नहीं बचा सकी। यानी भाजपा ने अपनी सत्ता कायम रखी, लेकिन कांग्रेस ने पिछली बार के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। इन नतीजों ने गांधीनगर की स्थानीय राजनीति में दोनों प्रमुख दलों की स्थिति को फिर चर्चा में ला दिया है। Ward No. 6 Result: कांग्रेस ने चारों सीटों पर दर्ज की जीत गांधीनगर नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 6 का परिणाम भी खास रहा। यहां कांग्रेस ने सभी चार सीटों पर जीत दर्ज की। वार्ड नंबर 7 में भी कांग्रेस को एक सीट मिली, जबकि बाकी तीन सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार विजयी रहे। इसके अलावा, वार्ड नंबर 2 में निर्दलीय उम्मीदवार दीपिका वाघेला ने जीत हासिल की। यह परिणाम दिखाता है कि भाजपा को कुल मिलाकर स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद कुछ वार्डों में मुकाबला अलग रहा। Gandhinagar Municipal Election: कितना रहा मतदान? गांधीनगर नगर निगम चुनाव में 59.25 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। चुनाव के लिए 11 वार्डों की 44 सीटों पर कुल 130 उम्मीदवार मैदान में थे। 11 अक्टूबर को मतदान के बाद 13 अक्टूबर को मतगणना हुई। नतीजे सामने आने के साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि भाजपा नगर निगम में अपना बहुमत बरकरार रखने में सफल रही है। Gujarat Civic Polls: थारा और ओखा में भी BJP को बढ़त गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में गांधीनगर के अलावा थारा और ओखा नगरपालिका के नतीजे भी चर्चा में रहे। थारा नगरपालिका की 24 सीटों में भाजपा ने 19 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को पांच सीटें मिलीं। वहीं, ओखा नगरपालिका में मतदान वाली 32 सीटों में भाजपा ने 29 और कांग्रेस ने तीन सीटों पर जीत दर्ज की। ओखा में चार अन्य सीटें भाजपा पहले ही निर्विरोध जीत चुकी थी। इस तरह गांधीनगर, थारा और ओखा के चुनाव परिणामों में भाजपा ने अपनी स्थिति बनाए रखी। हालांकि, गांधीनगर में कांग्रेस की सीटें बढ़ना भी इन नतीजों का एक अहम पहलू रहा। Gandhinagar Election Result 2026: आगे किस पर रहेगी नजर? चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद अब गांधीनगर नगर निगम में नई परिषद के गठन और महापौर के चयन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। महापौर पद को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल, चुनाव का सबसे बड़ा नतीजा यही है कि भाजपा ने 38 सीटों के साथ नगर निगम में अपना बहुमत बरकरार रखा है। कांग्रेस को पिछले चुनाव के मुकाबले तीन सीटों का फायदा हुआ, जबकि AAP इस बार एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी। गांधीनगर के ये नतीजे स्थानीय निकाय की राजनीति में भाजपा की स्थिति और कांग्रेस की बढ़ी हुई सीटों, दोनों को सामने रखते हैं। आने वाले समय में नगर निगम के फैसलों और नई परिषद के कामकाज पर लोगों की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UPI

UPI Charges Update: ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% फीस, दिवाली तक टला फैसला

UPI Transaction Charges में डिजिटल पेमेंट करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों के लिए UPI चार्ज से जुड़ा अहम अपडेट सामने आया है। ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस लगाने की व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी थी, लेकिन त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे दिवाली तक टालने की जानकारी सामने आई है। इससे त्योहारों के दौरान डिजिटल पेमेंट करने वाले कारोबारियों को फिलहाल राहत मिल सकती है। हालांकि, इस फैसले से जुड़ी नई तारीख और लागू होने वाली शर्तों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। इसलिए ग्राहकों और दुकानदारों को किसी भी बदलाव से पहले संबंधित दिशानिर्देशों पर ध्यान देना चाहिए। UPI Payment Charges: क्या है पूरा मामला? आज देश में छोटी दुकानों से लेकर बड़े शोरूम तक UPI के जरिए भुगतान किया जाता है। सब्जी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग और बड़े बिलों का भुगतान करने तक, QR कोड स्कैन करना लोगों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। इसी बीच ₹2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की चर्चा है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर से लागू होने वाली थी, लेकिन दिवाली के दौरान बाजार में बढ़ने वाली खरीदारी और डिजिटल लेनदेन को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने की बात कही गई है। यहां समझना जरूरी है कि MDR का संबंध कारोबारी भुगतान से है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर UPI यूजर को पैसे भेजने या प्राप्त करने पर अतिरिक्त फीस देनी होगी। क्या PhonePe और Google Pay से पेमेंट करना होगा महंगा? UPI चार्ज की खबर सामने आने के बाद कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या PhonePe, Google Pay और दूसरे UPI ऐप से भुगतान करने पर अब अतिरिक्त पैसे देने होंगे। फिलहाल आम ग्राहकों को यह समझना चाहिए कि प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज और व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले UPI ट्रांसफर अलग-अलग हैं। सामान्य P2P ट्रांजैक्शन पर इस तरह का MDR लागू नहीं होता। इसी तरह, निर्धारित नियमों के तहत आने वाले छोटे मूल्य के मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी इस चार्ज से बाहर रह सकते हैं। इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि ₹2,000 से अधिक का हर UPI पेमेंट महंगा हो जाएगा। दुकानदारों को क्यों मिल सकती है राहत? दिवाली के समय बाजारों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ जाती है। कपड़े, मिठाई, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल और घरेलू सामान की दुकानों पर डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ता है। ऐसे में ट्रांजैक्शन चार्ज से जुड़े फैसले को आगे बढ़ाने से कारोबारियों को त्योहार के दौरान भुगतान व्यवस्था में बदलाव के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है। खासकर छोटे दुकानदारों के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके कारोबार में UPI पेमेंट की बड़ी भूमिका होती है। हालांकि, चार्ज किस पर और किन शर्तों के तहत लागू होगा, यह संबंधित आधिकारिक नियमों पर निर्भर करेगा। UPI Transaction Fee: कब लागू होगा नया नियम? ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% फीस से जुड़े फैसले को दिवाली तक टालने की खबर सामने आई है। लेकिन नई लागू तारीख और अंतिम नियमों की पुष्टि आधिकारिक घोषणा से ही की जानी चाहिए। इसलिए ग्राहकों और कारोबारियों को फिलहाल किसी भी अपुष्ट जानकारी के आधार पर यह नहीं मानना चाहिए कि सभी UPI पेमेंट पर चार्ज लगने वाला है। UPI यूजर्स के लिए जरूरी सलाह UPI ने देश में डिजिटल भुगतान को आसान और तेज बनाया है। ऐसे में चार्ज से जुड़ी किसी भी नई व्यवस्था का असर समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि नियम किस प्रकार के ट्रांजैक्शन पर लागू होता है। आम यूजर्स को अपने सामान्य डिजिटल पेमेंट को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। वहीं, दुकानदारों को किसी भी संभावित चार्ज के बारे में अपने बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर से जानकारी लेनी चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
SIR

Patna SIR Protest: पटना में छात्रों का हंगामा, बैरिकेडिंग तोड़ी; छात्राओं को खींचकर ले जाने का आरोप

बिहार की राजधानी पटना (Patna) में SIR (Special Intensive Revision) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में सड़क पर उतरे छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबर सामने आई। वहीं, पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने और प्रदर्शन कर रही छात्राओं को खींचकर ले जाने के आरोपों ने भी इस मामले को चर्चा में ला दिया है। प्रदर्शन की इन घटनाओं के बीच अब पुलिस की कार्रवाई और SIR की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर सबकी नजर है। Patna में SIR के खिलाफ प्रदर्शन, सड़क पर उतरे छात्र पटना में SIR के विरोध में छात्रों और विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की नाराजगी मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से मतदाता सूची से न हटे। SIR यानी Special Intensive Revision का उद्देश्य मतदाता सूची की विशेष जांच और उसे अपडेट करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। Protest के दौरान टूटी बैरिकेडिंग, पुलिस से टकराव प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी। इसके बाद मौके पर तनाव बढ़ गया और पुलिस के साथ टकराव की स्थिति बन गई। इसी दौरान पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने की घटना भी सामने आई है। हालांकि, इस घटना की परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों के बारे में आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। छात्राओं को खींचकर ले जाने का आरोप पटना में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि प्रदर्शन कर रही कुछ छात्राओं को पुलिसकर्मी खींचकर वहां से ले गए। इस घटना को लेकर प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, छात्राओं की संख्या, उन्हें हिरासत में लिए जाने की स्थिति और इस मामले में पुलिस का पक्ष स्पष्ट होने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी जानकारी सामने आएगी। क्या है SIR और क्यों हो रहा है इसका विरोध? SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision है। यह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाताओं के विवरण की जांच की जाती है और सूची को अपडेट किया जाता है। इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे संगठनों की प्रमुख चिंता यह है कि जांच के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। उनका जोर पारदर्शिता, सही दस्तावेजों और मतदाताओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने का उचित अवसर देने पर है। वहीं, मतदाता सूची को अपडेट करना चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। ऐसे में इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशा-निर्देश और शिकायतों का समय पर समाधान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Patna Protest के बाद पुलिस की कार्रवाई पर नजर पटना में SIR के खिलाफ हुए इस प्रदर्शन के बाद अब पुलिस की कार्रवाई और घटनास्थल से सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी। बैरिकेडिंग तोड़ने, पुलिस की गाड़ी की चाबी लेकर भागने और छात्राओं को खींचकर ले जाने के आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक बयान और उपलब्ध वीडियो अहम होंगे। फिलहाल, इस घटना से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और हिरासत से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 600 अंक उछला, Nifty में 200 अंकों की तेजी; IT और Banking Stocks में खरीदारी

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में मंगलवार, 13 अक्टूबर को कारोबार के दौरान अच्छी तेजी देखने को मिली। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स ने जोरदार वापसी की और 600 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज की। वहीं, निफ्टी भी करीब 200 अंक चढ़ गया। IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी बढ़ने से बाजार को सहारा मिला। सुबह करीब 10 बजे BSE Sensex 72,500 के ऊपर कारोबार कर रहा था, जबकि NSE Nifty 50 भी 22,500 के पार पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों को राहत मिली। हालांकि, कई शेयरों में बिकवाली जारी रहने से बाजार की तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं रही। Sensex-Nifty में तेजी, निवेशकों को मिली राहत शेयर बाजार में मंगलवार को खरीदारी का माहौल मजबूत होता दिखाई दिया। सेंसेक्स करीब 660 अंक चढ़कर 72,585 के आसपास पहुंच गया। दूसरी ओर, निफ्टी में लगभग 202 अंकों की बढ़त दर्ज की गई और यह 22,565 के स्तर के करीब कारोबार करता नजर आया। पिछले सत्रों में बाजार पर दबाव देखने को मिला था। ऐसे में प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत दी। हालांकि, बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। IT Stocks में सबसे ज्यादा हलचल मंगलवार को IT सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। HCL Technologies और Tata Consultancy Services (TCS) के शेयरों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा Infosys और Tech Mahindra के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर रही। IT कंपनियों के तिमाही नतीजों और कारोबार से जुड़े अपडेट का असर शेयरों पर दिखाई दिया। खासकर HCLTech के नतीजों से जुड़ी सकारात्मक खबरों ने सेक्टर में खरीदारी को बढ़ावा दिया। IT शेयरों में आई तेजी ने सेंसेक्स और निफ्टी को ऊपर ले जाने में अहम भूमिका निभाई। Banking Stocks ने भी दिया बाजार का साथ IT शेयरों के साथ बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में भी निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई। HDFC Bank, State Bank of India (SBI), Bajaj Finance और Bajaj Finserv जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। बैंकिंग शेयरों में बढ़त का असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर भी पड़ा। हालांकि, सभी सेक्टरों में एक जैसी तेजी नहीं रही। कुछ शेयरों में कमजोरी बनी रही, जिससे पता चलता है कि निवेशक चुनिंदा कंपनियों में ही पैसा लगा रहे थे। रुपये की मजबूती से बाजार को सहारा शेयर बाजार के अलावा मुद्रा बाजार में भी हलचल देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती से निवेशकों की धारणा को कुछ समर्थन मिला। रुपये की चाल पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कदमों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और डॉलर की वैश्विक स्थिति का असर पड़ता है। हालांकि, आने वाले दिनों में रुपये की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक हालात पर निर्भर करेगी। महंगाई और कच्चे तेल पर भी रहेगी नजर बाजार में तेजी के बावजूद निवेशकों की चिंताएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। खुदरा महंगाई, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का रुख आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे समय में कंपनियों के तिमाही नतीजे भी महत्वपूर्ण हैं। बेहतर नतीजे पेश करने वाली कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाले शेयरों पर दबाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? सेंसेक्स और निफ्टी में आई तेजी बाजार के लिए राहत की खबर है, लेकिन इसे लगातार तेजी की गारंटी नहीं माना जा सकता। बाजार में निवेश करने से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, शेयर की कीमत और उससे जुड़े जोखिमों को समझना जरूरी है। कुल मिलाकर, 13 अक्टूबर को IT और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती दिखाई। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बाजार अपनी बढ़त को कितना बरकरार रखता है और आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेत किस तरह असर डालते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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