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भरतपुर में जमीन विवाद को लेकर युवक पर लाठी-डंडों से हमला, CCTV में कैद हुई वारदात

भरतपुर। राजस्थान के भरतपुर जिले में जमीन विवाद को लेकर एक युवक पर कथित तौर पर लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। हमलावरों ने बीच सड़क पर करीब पांच मिनट तक युवक की पिटाई की। गंभीर रूप से घायल युवक को परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसके हाथ-पैर में कई फ्रैक्चर होने की पुष्टि हुई है। घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है। यह घटना 4 अगस्त की शाम करीब 6 बजे खेड़ली मोड़ थाना क्षेत्र में हुई। चारा लेकर लौट रहे युवक को रास्ते में रोका पीड़ित के पिता नेमी सिंह, निवासी छोंकरवाड़ा कलां, द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार उनका बेटा अरुण सिंह अपनी भतीजी के साथ बाइक से पशुओं का चारा लेकर घर लौट रहा था। आरोप है कि रास्ते में ट्यूबवेल के पास उनके रिश्तेदार हितेश और बाल बिहारी ने उसे रोक लिया। शिकायत के मुताबिक, पहले गाली-गलौज की गई और इसके बाद दोनों आरोपियों ने कथित रूप से लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला कर दिया। मारपीट में अरुण सिंह के हाथ-पैर सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। आसपास मौजूद लोगों के हस्तक्षेप के बाद हमलावर मौके से भाग गए। अस्पताल में भर्ती, कई जगह फ्रैक्चर परिजनों ने घायल युवक को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। परिवार का दावा है कि हमले में उसके हाथ-पैर की कई हड्डियां टूट गईं और शरीर पर गंभीर चोटें आई हैं। डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। जान से मारने की धमकी देने का आरोप एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि वारदात के बाद आरोपी परिवार को जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जमीन के पुराने विवाद को बताया वजह पीड़ित परिवार का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच वर्षों पुराना जमीन का विवाद चल रहा है। नेमी सिंह के अनुसार, उनके पिता और आरोपियों के दादा के बीच वर्षों पहले पांच बिस्सा जमीन की अदला-बदली हुई थी। उनके परिवार ने उस जमीन पर मकान बना लिया, जबकि दूसरी ओर आरोपी पक्ष उनकी जमीन का उपयोग कर रहा है। परिवार का आरोप है कि करीब दो वर्ष पहले परिसीमन के बाद खसरा नंबर बदलने के कारण विवाद और बढ़ गया। इसके बाद से आरोपी पक्ष कथित तौर पर जमीन वापस लेने का दबाव बना रहा था। इसी रंजिश में हमला किए जाने का आरोप लगाया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। राजस्थान और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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सितंबर से देशभर में ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान चलाएगी CJP, अभिजीत दीपके बोले- बेरोजगारी और महंगी शिक्षा होंगे मुख्य मुद्दे

छत्रपति संभाजीनगर। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि उनकी संस्था सितंबर से देशभर में ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत गांवों और शहरों में जाकर युवाओं से संवाद किया जाएगा तथा बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। गुरुवार को संभाजीनगर में आयोजित बैठक के दौरान दीपके ने कहा कि देश में बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था मुनाफे का माध्यम बन गई है, जिसे बदलने की जरूरत है। CJP चुनाव नहीं लड़ेगी, प्रेशर ग्रुप के तौर पर करेगी काम अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि कॉकरोच जनता पार्टी चुनावी राजनीतिक दल नहीं बनेगी। उनके अनुसार, संगठन लोकतांत्रिक संस्थाओं और शासन व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक पब्लिक प्रेशर ग्रुप के रूप में काम करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य जनता की आवाज को प्रभावी तरीके से सामने लाना और जनहित से जुड़े मुद्दों पर दबाव बनाना है। अभियान के प्रमुख मुद्दे दीपके के अनुसार, ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान के दौरान इन विषयों पर विशेष फोकस रहेगा— नेशनल वर्किंग कमेटी का गठन बैठक के दौरान CJP ने अपनी नेशनल वर्किंग कमेटी के सदस्यों की भी घोषणा की। संगठन ने बताया कि अगले छह महीनों में विभिन्न राज्यों में समन्वय समितियों के साथ लोकसभा और शहर स्तर पर भी संगठनात्मक इकाइयों का गठन किया जाएगा। जंतर-मंतर आंदोलन की हुई समीक्षा दीपके ने बताया कि बैठक में जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन की समीक्षा के साथ-साथ ई-20 पेट्रोल, शिक्षा व्यवस्था, संगठन विस्तार और भविष्य के आंदोलनों की रणनीति पर भी चर्चा की गई। गौरतलब है कि NEET पेपर लीक मामले को लेकर CJP ने 20 जून से 25 जुलाई तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक धरना दिया था। बाद में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संगठन ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की थी। सोशल मीडिया अभियान से शुरू हुई थी CJP अभिजीत दीपके ने पहले भी कहा था कि देश को नए राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि एक मजबूत प्रेशर ग्रुप की जरूरत है। CJP की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में हुई थी। बाद में यह छात्र और युवा मुद्दों पर सक्रिय एक संगठित अभियान के रूप में सामने आया, जिसने शिक्षा और रोजगार जैसे विषयों पर अपनी गतिविधियां तेज कीं। देश और राजनीति से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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मोहन भागवत बोले- Gen-Z और Gen Alpha सबसे ज्यादा देशभक्त, संवाद की कमी से हुए आंदोलन

मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में Gen-Z और Gen Alpha के युवाओं से संवाद किया। करीब एक घंटे तक चले इस संवाद में उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक देशभक्त और ईमानदार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं की बात सुनना जरूरी है और संवाद की कमी ही कई बार आंदोलनों की वजह बनती है। भागवत ने यह संबोधन इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिया। कार्यक्रम में 11 से 19 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 2,000 छात्र-छात्राएं शामिल हुए। संवाद की कमी से आंदोलन की नौबत आई मोहन भागवत ने कहा कि जब बातचीत सफल नहीं होती, तब आंदोलन का रास्ता अपनाया जाता है। उनके अनुसार यदि समय रहते संवाद हो जाए, तो कई विवाद टाले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन भी संवाद का एक माध्यम है और उसे इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए। Gen-Z सवाल पूछती है, जवाब भी चाहती है भागवत ने कहा कि पहले की पीढ़ी बड़े-बुजुर्गों की बात बिना सवाल किए मान लेती थी, लेकिन आज की युवा पीढ़ी हर विषय पर सवाल पूछती है और तर्कसंगत जवाब चाहती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल उत्तर ही नहीं, बल्कि विश्वास और अपनापन भी चाहिए। आंदोलन को देशविरोध से न जोड़ें RSS प्रमुख ने कहा कि यदि युवा किसी मुद्दे पर आंदोलन कर रहे हैं, तो उन्हें देशविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए। उनके अनुसार वे देश की अगली पीढ़ी हैं और उनकी चिंताओं को गंभीरता से समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आंदोलन व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से होना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ। जंतर-मंतर की घटना पर कही यह बात जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के सवाल पर भागवत ने कहा कि किसी भी घटना पर निष्कर्ष निकालने से पहले उसके कारणों को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों में कुछ उपद्रवियों के शामिल होने की बात सामने आई है, लेकिन यदि उन्हें किसी पर भरोसा करना हो तो वह देश के युवाओं पर करेंगे। शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर जोर भागवत ने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए और इसके लिए सरकार के साथ समाज की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बाद ही पाठ्यक्रम जैसे विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। विदेश नीति और सामाजिक मुद्दों पर भी रखी राय उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति में देश को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए, लेकिन संघर्ष समाप्त होने के बाद बातचीत का रास्ता तलाशना भी जरूरी है। समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि किसी भी सामाजिक व्यवस्था में बदलाव से पहले समाज को उसके लिए तैयार करना आवश्यक है। वहीं महिलाओं की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि उन्हें हर क्षेत्र में समान अवसर और बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। ‘फिंगर क्लैप’ भी बना चर्चा का विषय कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने युवाओं के बीच लोकप्रिय ‘फिंगर क्लैप’ शैली में भी अपनी प्रतिक्रिया दी। यह ताली बजाने का एक तरीका है, जिसमें हथेलियों की बजाय उंगलियों से हल्की चुटकी जैसी आवाज निकालकर सराहना व्यक्त की जाती है। हाल के वर्षों में यह शैली सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुई है। देश, राजनीति और राष्ट्रीय घटनाक्रम की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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CCMP

Doctors vs Government in Maharashtra: CCMP Issue पर बढ़ा विवाद

महाराष्ट्र में Doctors Strike अब बड़ा मुद्दा बन गई है। CCMP (Certificate Course in Modern Pharmacology) को लेकर राज्यभर के डॉक्टरों ने विरोध तेज कर दिया है। डॉक्टर हाथों में ‘No CCMP’ लिखी तख्तियां लेकर सड़कों पर उतरे और सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस बीच कोर्ट ने भी मामले पर स्वत: संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेते हुए हस्तक्षेप किया है। क्या है Maharashtra CCMP Controversy? महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, जिसमें CCMP कोर्स पूरा करने वाले कुछ होम्योपैथी डॉक्टरों को आधुनिक चिकित्सा (Modern Medicine/Allopathy) से जुड़ी दवाओं के इस्तेमाल और पंजीकरण की अनुमति देने का रास्ता खुलता है। विरोध कर रहे MBBS डॉक्टरों और मेडिकल संगठनों का कहना है कि एलोपैथिक इलाज के लिए लंबी और गहन मेडिकल ट्रेनिंग जरूरी होती है। उनका तर्क है कि सीमित अवधि के कोर्स के आधार पर आधुनिक चिकित्सा की अनुमति देने से मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो सकते हैं। Doctors ने क्यों शुरू की Indefinite Strike? CCMP के खिलाफ डॉक्टर संगठनों ने राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया है। कई अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों में डॉक्टरों ने प्रदर्शन करते हुए “No CCMP” के नारे लगाए। डॉक्टरों का कहना है कि यह केवल एक कोर्स या पंजीकरण का मामला नहीं है, बल्कि यह patient safety और healthcare quality से जुड़ा मुद्दा है। उनके अनुसार चिकित्सा क्षेत्र में अलग-अलग प्रणालियों के बीच स्पष्ट नियम और जिम्मेदारियां तय होना जरूरी है। डॉक्टरों की मांग क्या है? प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि CCMP के आधार पर होम्योपैथी चिकित्सकों को एलोपैथिक प्रैक्टिस की अनुमति नहीं दी जाए। डॉक्टर संगठनों का कहना है कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में इलाज करने के लिए MBBS और उसके बाद की विशेषज्ञ ट्रेनिंग जरूरी है। उन्होंने सरकार से इस फैसले को वापस लेने या दोबारा समीक्षा करने की मांग की है। सरकार का पक्ष क्या है? दूसरी ओर, CCMP व्यवस्था के समर्थकों का कहना है कि महाराष्ट्र के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकता है। सरकार का उद्देश्य उन क्षेत्रों में मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराना बताया जा रहा है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या कम है। Court ने लिया Suo Motu Cognizance इस विवाद के बीच अदालत की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। न्यायपालिका के हस्तक्षेप के बाद अब नजर इस बात पर है कि अदालत इस पूरे विवाद में क्या दिशा-निर्देश देती है और सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। Maharashtra Healthcare System पर असर लंबी चलने वाली डॉक्टरों की हड़ताल से राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को जारी रखने की बात कही जा रही है, लेकिन अगर विवाद जल्द नहीं सुलझा तो मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद? महाराष्ट्र का CCMP विवाद केवल डॉक्टरों और सरकार के बीच का मतभेद नहीं है। यह देश में medical education, healthcare regulation और patient safety से जुड़े बड़े सवालों को सामने ला रहा है। अब सभी की नजर सरकार, डॉक्टर संगठनों और कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि महाराष्ट्र में CCMP व्यवस्था को लेकर क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Atiq Ahmed

Atiq Ahmed Son Accident: भाई से मुलाकात के लिए निकले अबान की रास्ते में मौत

उत्तर प्रदेश से एक बड़ी खबर सामने आई है। माफिया-राजनेता अतीक अहमद (Atiq Ahmed) के बेटे अबान अहमद की सड़क हादसे में मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, अबान अपने बड़े भाई से मिलने झांसी जेल जा रहा था, इसी दौरान रास्ते में उसकी कार बेकाबू होकर डिवाइडर से टकरा गई। हादसा इतना गंभीर था कि अबान ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और दुर्घटना की जांच शुरू कर दी। शुरुआती जानकारी के अनुसार, कार की रफ्तार अधिक होने या अचानक नियंत्रण बिगड़ने के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल पाएगा। Jhansi Road Accident: भाई से मिलने जा रहा था अबान बताया जा रहा है कि अबान अहमद झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई से मुलाकात करने के लिए निकला था। सफर के दौरान अचानक कार अनियंत्रित हो गई और सड़क के बीच बने डिवाइडर से जा टकराई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। Atiq Ahmed Family: लगातार चर्चा में रहा परिवार अतीक अहमद का परिवार पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध से जुड़ी खबरों में रहा है। अतीक अहमद के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं और उसकी गतिविधियों को लेकर लंबे समय तक जांच एजेंसियां सक्रिय रहीं। अतीक अहमद के बड़े बेटे अली अहमद भी जेल में बंद हैं। वहीं, इससे पहले अतीक के बेटे असद अहमद की झांसी में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मौत हुई थी। असद उमेश पाल हत्याकांड में आरोपी था। सड़क हादसे के बाद उठे कई सवाल अबान अहमद की मौत के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर कार किस वजह से अनियंत्रित हुई। क्या वाहन की गति अधिक थी या फिर किसी अन्य कारण से दुर्घटना हुई, इसकी जांच की जा रही है। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस हादसे के बाद अतीक अहमद परिवार से जुड़ी चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Cockroach Janta Party

Cockroach Janta Party का ऐलान: Election Politics से दूरी, अब Youth Movement पर रहेगा Focus

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से एक नए तरह की राजनीतिक चर्चा सामने आई है। Cockroach Janta Party (CJP) ने फिलहाल चुनावी राजनीति में उतरने से इनकार करते हुए खुद को एक जन आंदोलन (People’s Movement) के रूप में आगे बढ़ाने का फैसला किया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनका उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाना और व्यवस्था में जवाबदेही लाना है। CJP का चुनाव लड़ने से इनकार, आंदोलन के रास्ते पर आगे बढ़ेगा संगठन प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अभिजीत दीपके ने साफ किया कि Cockroach Janta Party अभी किसी राजनीतिक पार्टी के रूप में चुनाव नहीं लड़ेगी। उनका कहना है कि वर्तमान समय में देश के सामने कई गंभीर समस्याएं हैं, जिन पर जनता की भागीदारी और दबाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है। एक मजबूत लोकतंत्र के लिए जरूरी है कि सरकार, संस्थाएं और प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेह रहें। Youth Issues और Education System बने CJP के मुख्य मुद्दे Cockroach Janta Party पिछले कुछ समय से युवाओं और छात्रों से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रही है। संगठन ने exam paper leak, competitive exams में गड़बड़ी और education system में सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। CJP का कहना है कि लाखों युवाओं का भविष्य परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा है। अगर इन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं होगी तो इसका सीधा असर छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ेगा। किसी Political Party के साथ गठबंधन नहीं करेगी CJP अभिजीत दीपके ने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन किसी मौजूदा राजनीतिक दल के साथ नहीं जुड़ेगा। उनका कहना है कि Cockroach Janta Party का लक्ष्य किसी पार्टी का समर्थन करना या सत्ता की राजनीति करना नहीं है, बल्कि जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाना है। हालांकि, जो लोग या संगठन उनके उठाए गए मुद्दों का समर्थन करना चाहते हैं, वे आंदोलन के साथ जुड़ सकते हैं। Social Media से शुरू हुआ आंदोलन बना राष्ट्रीय चर्चा का विषय Cockroach Janta Party की पहचान एक युवा केंद्रित आंदोलन के रूप में बनी है। सोशल मीडिया के जरिए संगठन ने छात्रों, युवाओं और आम लोगों के बीच अपनी पहुंच बनाई। कम समय में CJP के मुद्दे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने, खासकर परीक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही जैसे मामलों को लेकर। CJP का अगला कदम क्या होगा? अब Cockroach Janta Party का फोकस देशभर में युवाओं और आम लोगों को जोड़ने पर है। संगठन खुद को एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में पेश करना चाहता है जहां लोग अपने मुद्दों को सामने रख सकें और सरकारों से जवाब मांग सकें। राजनीतिक विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि क्या CJP एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले पाएगी या भविष्य में चुनावी राजनीति में वापसी करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

15 August 2026 से पहले Delhi में हाई अलर्ट, सुरक्षा घेरा मजबूत

Independence Day 2026 से पहले राजधानी Delhi में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। खुफिया इनपुट और संभावित सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए दिल्ली पुलिस समेत कई सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। खासतौर पर Pakistan-supported terror organizations और Khalistani extremist networks से जुड़े संभावित खतरों को ध्यान में रखते हुए राजधानी में विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। हर साल 15 अगस्त के मौके पर दिल्ली में सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होती है। लाल किले पर होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह में देश के शीर्ष नेता, गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में आम लोग शामिल होते हैं। ऐसे में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने पहले से व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। Delhi Security Alert: संवेदनशील इलाकों में बढ़ाई गई निगरानी दिल्ली के संवेदनशील क्षेत्रों, प्रमुख बाजारों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस की अतिरिक्त टीमें तैनात की गई हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया है। लाल किले और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा का विशेष घेरा बनाया गया है। कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी कैमरों और अन्य सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल किया जा रहा है। Terror Groups और Khalistani Elements को लेकर एजेंसियां सतर्क सुरक्षा एजेंसियां उन संगठनों और नेटवर्क पर नजर बनाए हुए हैं जो देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, बड़े राष्ट्रीय आयोजनों के दौरान आतंकी संगठन अपनी मौजूदगी दर्ज कराने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर सकते हैं। इसी को देखते हुए ऑनलाइन गतिविधियों, संदिग्ध संपर्कों और संभावित स्लीपर नेटवर्क की निगरानी बढ़ाई गई है। एजेंसियां किसी भी छोटी सूचना को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई कर रही हैं। Delhi Police ने बढ़ाई पेट्रोलिंग, Verification Drive तेज राजधानी में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है। होटल, गेस्ट हाउस और किराएदारों के सत्यापन अभियान को भी तेज किया गया है। इसके अलावा दिल्ली की सीमाओं पर भी सुरक्षा जांच को मजबूत किया गया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि को रोका जा सके। सुरक्षा बलों के बीच बेहतर तालमेल के लिए लगातार बैठकें की जा रही हैं और सभी जरूरी सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की जा रही है। 15 August Security Arrangements: शांतिपूर्ण आयोजन की तैयारी स्वतंत्रता दिवस समारोह को सुरक्षित और सफल बनाने के लिए दिल्ली पुलिस, खुफिया एजेंसियां और अन्य सुरक्षा बल मिलकर काम कर रहे हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि आम लोग बिना किसी चिंता के राष्ट्रीय पर्व में हिस्सा ले सकें और समारोह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और राजधानी की सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon Session

Monsoon Session: लोकसभा की कार्यवाही हंगामे के बीच स्थगित

संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) के दौरान लोकसभा में गुरुवार को जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई। लोकसभा स्पीकर ने विपक्ष के व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है। लगातार हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्ष के हंगामे से लोकसभा की कार्यवाही प्रभावित लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने कई मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। सदन में नारेबाजी बढ़ने के कारण प्रश्नकाल और अन्य जरूरी कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। स्पीकर ने सांसदों से शांति बनाए रखने और संसदीय नियमों का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सदन में अनुशासन और गरिमा बनाए रखना बेहद जरूरी है। हालांकि, विपक्ष के लगातार विरोध के कारण स्थिति सामान्य नहीं हो पाई और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। Speaker ने विपक्ष के आचरण पर जताई नाराजगी लोकसभा स्पीकर ने विपक्षी सदस्यों के व्यवहार को लेकर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन सदन की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं है। स्पीकर ने सभी दलों से अपील की कि वे चर्चा और संवाद के माध्यम से अपने मुद्दे उठाएं ताकि संसद की कार्यवाही बेहतर तरीके से चल सके। Foreign Fund Bill पर Amit Shah का जवाब संभव इस बीच, केंद्र सरकार के एक अहम विधेयक को लेकर सदन में चर्चा होने की संभावना है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह विदेशी फंड से जुड़े बिल पर सरकार का पक्ष रख सकते हैं। यह बिल विदेशी धन के उपयोग, निगरानी और नियमों से संबंधित है। सरकार का कहना है कि ऐसे प्रावधानों से पारदर्शिता बढ़ेगी और विदेशी फंड के इस्तेमाल पर बेहतर नियंत्रण हो सकेगा। वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से कई सवाल पूछ रहा है। संसद में आगे की कार्यवाही पर नजर लोकसभा में जारी गतिरोध के बीच अब सबकी नजर आगे की कार्यवाही पर है। विपक्ष और सरकार के बीच मतभेदों के बावजूद सदन में महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा होना जरूरी माना जा रहा है। अमित शाह के जवाब के बाद विदेशी फंड से जुड़े बिल पर संसद में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tarun Tejpal

Breaking Tarun Tejpal Case में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, Trial Court Verdict पलटा, दोषी करार

वरिष्ठ पत्रकार और तहलका (Tehelka) के पूर्व संपादक-इन-चीफ तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal) से जुड़े 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने गोवा की ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें तेजपाल को आरोपों से बरी कर दिया गया था। अब हाईकोर्ट ने उन्हें इस मामले में दोषी करार दिया है। करीब 13 साल पुराने इस मामले में आया यह फैसला एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। यह केस भारतीय मीडिया जगत के सबसे चर्चित मामलों में से एक रहा है, जिसने कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और यौन उत्पीड़न के मुद्दे पर व्यापक बहस को जन्म दिया था। क्या है Tarun Tejpal Sexual Assault Case? मामला साल 2013 का है, जब गोवा में तहलका पत्रिका के एक कार्यक्रम के दौरान एक महिला सहकर्मी ने तरुण तेजपाल पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। शिकायत के अनुसार, घटना गोवा के एक होटल की लिफ्ट में हुई थी। आरोप सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की गई। इस केस ने मीडिया संस्थानों में Internal Complaints Committee (ICC), महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर सम्मानजनक माहौल को लेकर कई सवाल खड़े किए। 2021 में Trial Court ने किया था बरी गोवा की सत्र अदालत ने साल 2021 में तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के बाद गोवा सरकार ने इसे बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। राज्य सरकार की ओर से दायर अपील में कहा गया था कि निचली अदालत ने मामले में मौजूद सबूतों और परिस्थितियों का सही मूल्यांकन नहीं किया। Bombay High Court ने बदला फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट के फैसले की समीक्षा की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकॉर्ड में मौजूद तथ्यों पर विचार करने के बाद निचली अदालत के फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया गया है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और सजा से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान रहेगा। क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला? Tarun Tejpal Case सिर्फ एक व्यक्ति से जुड़ा मामला नहीं रहा, बल्कि यह भारत में workplace safety और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े बड़े मुद्दों के बीच सामने आया था। इस केस ने यह बहस भी तेज की कि प्रभावशाली पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ती है। लंबे इंतजार के बाद आया फैसला 2013 में शुरू हुआ यह मामला कई कानूनी पड़ावों से गुजरने के बाद अब एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंचा है। ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद हाईकोर्ट का यह निर्णय इस केस की दिशा बदलने वाला माना जा रहा है। तरुण तेजपाल मामले पर अब आगे की कानूनी कार्रवाई और अदालत के अगले निर्देशों पर सभी की नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Heavy Rain

Heavy Rain Alert: यूपी के 40 Schools में घुसा पानी, 100 साल पुराना मकान गिरा

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश (Heavy Rain) ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार हो रही बारिश के कारण जहां यूपी के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, वहीं उत्तराखंड में पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्राकृतिक आपदाओं के बीच कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। यूपी में बाढ़ का असर, 40 स्कूलों में घुसा पानी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बारिश के बाद जलभराव और बाढ़ की स्थिति देखने को मिल रही है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब 40 स्कूलों में पानी भर गया है। स्कूल परिसरों में पानी आने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है और प्रशासन को हालात संभालने के लिए कदम उठाने पड़ रहे हैं। ग्रामीण और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का काम जारी है। 100 साल पुराना मकान गिरा, हादसे में 6 लोगों की मौत बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसे ने लोगों को झकझोर दिया। एक करीब 100 साल पुराना मकान अचानक ढह गया, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद इलाके में शोक का माहौल है। राहत और बचाव टीमों ने मलबा हटाकर लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। यह घटना पुराने और कमजोर भवनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा रही है। बारिश के मौसम में जर्जर मकानों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। Kedarnath Highway पर Landslide, मलबे में दबे कई वाहन उत्तराखंड में भारी बारिश का असर पहाड़ी इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। केदारनाथ हाईवे पर भूस्खलन के कारण बड़ी मात्रा में मलबा सड़क पर आ गया, जिसकी वजह से यातायात प्रभावित हुआ। कई गाड़ियों के मलबे में दबने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन और सड़क निर्माण विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और रास्ता खोलने में जुटी हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रियों और स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बारिश और बाढ़ से बढ़ी चुनौतियां उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक बारिश ने कई इलाकों में परेशानी खड़ी कर दी है। कहीं स्कूल बंद करने की नौबत आ गई है तो कहीं सड़कें और रास्ते बाधित हो गए हैं। प्रशासन, आपदा राहत दल और स्थानीय टीमें प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटी हैं। मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी, नाले और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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