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Operation Sindoor, Rahul Gandhi vs BJP, S Jaishankar Statement,

Operation Sindoor Controversy: राहुल बोले अपराध था पाकिस्तान को बताना, BJP बोली- कितने पाकिस्तानी जेट गिराए, ये क्यों नहीं पूछा?

नई दिल्ली | देश हरपलOperation Sindoor को लेकर एक बार फिर देश की सियासत गरमा गई है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आरोपों के बाद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जोरदार पलटवार करते हुए कहा है कि राहुल गांधी “पाकिस्तान की भाषा” बोल रहे हैं। BJP आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल को यह सवाल उठाना चाहिए था कि हमने कितने पाकिस्तानी फाइटर जेट गिराए। लेकिन वे सिर्फ यही पूछते रह गए कि हमने कितने विमान खोए। क्या राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इतने सफल ऑपरेशन के लिए एक बार भी बधाई दी?” क्या है राहुल गांधी का आरोप? कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के एक पुराने बयान को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने से पहले भारत ने पाकिस्तान को इसकी सूचना दी, जो कि एक “अपराध” था। राहुल ने सवाल उठाया, “हमले से पहले पाकिस्तान को बताने का निर्णय किसने लिया? इससे हमें क्या नुकसान हुआ? वायुसेना ने कितने विमान गंवाए?” राहुल का कहना है कि जयशंकर ने खुद सार्वजनिक रूप से यह बात स्वीकार की है, और इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए। BJP का तीखा पलटवार भाजपा ने राहुल गांधी के बयान को लेकर दो टूक शब्दों में कहा, “राहुल को पाकिस्तान और उसके हितैषियों की लाइन पर चलते देखना कोई आश्चर्य नहीं है। वे बार-बार हमारे नुकसान पूछते हैं लेकिन यह नहीं पूछते कि हमने कितने पाकिस्तानी एयरबेस पर हमला किया और वहां खड़े विमानों को तबाह किया।” बीजेपी नेताओं ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने ना सिर्फ प्रधानमंत्री की आलोचना की, बल्कि हमारी सेना के मनोबल को भी चोट पहुंचाई। अमित मालवीय ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा, “क्या अब राहुल गांधी को निशान-ए-पाकिस्तान मिलने वाला है?” विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने क्या कहा था? दिल्ली में होंडुरास दूतावास के उद्घाटन के दौरान जयशंकर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था, “हमारे लक्ष्य आतंकवादी ढांचे को नष्ट करना था, जो हमने किया। शुरुआत में ही पाकिस्तान को यह बताया गया था कि हमला उनकी सेना पर नहीं, बल्कि आतंकवाद पर है। अगर वे हस्तक्षेप नहीं करते, तो हम इसे संघर्ष नहीं मानेंगे।” राजनीतिक विश्लेषण राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर हो रही यह बयानबाज़ी सिर्फ सरकार और विपक्ष की रणनीतिक सोच को दर्शाती है।जहां सरकार इसे एक रणनीतिक विजय बता रही है, वहीं विपक्ष सवाल उठाकर इसे जवाबदेही का मुद्दा बना रहा है। ऑपरेशन सिंदूर अब सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं रह गया है, यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। राहुल गांधी के आरोप और भाजपा का तीखा जवाब इस बात को साफ करते हैं कि 2025 की राजनीति में राष्ट्रीय सुरक्षा भी अब एक चुनावी मुद्दा बन सकती है।
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Dr. Yatri Controversy: YouTuber Navankur Dhankhar in Spotlight after Jyoti Malhotra's Arrest

YouTuber Jyoti Malhotra Pakistan Case-ज्योति की गिरफ्तारी के बाद सुर्खियों में यूट्यूबर ‘यात्री डॉक्टर

Dr. Yatri Controversy: YouTuber Navankur Dhankhar in Spotlight after Jyoti Malhotra’s Arrest हरियाणा की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तारी के बाद एक और यूट्यूबर सुर्खियों में है। इस बार यूट्यूबर नवांकुर धनखड़, जो ‘डॉक्टर यात्री’ के नाम से यूट्यूब चैनल चलाते हैं, विवादों में घिर गए हैं। पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में पकड़ी गई ज्योति मल्होत्रा के सोशल मीडिया अकाउंट पर नवांकुर के साथ एक सेल्फी पोस्ट की गई थी। सोशल मीडिया पर यह चर्चा जोरों पर है कि नवांकुर भी पाकिस्तान दूतावास के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि पिछले साल मार्च में आयोजित पाकिस्तानी दूतावास की नेशनल डे पार्टी में डॉक्टर यात्री भी नजर आए थे। नवांकुर का सफाई बयान Navankur Dhankhar ने एक वीडियो जारी कर सफाई देते हुए कहा, ‘मैं फिलहाल आयरलैंड में हूं। सुबह उठा तो सोशल मीडिया पर ज्योति की गिरफ्तारी की खबर देखी। लोग कह रहे हैं कि डॉक्टर यात्री भी पाकिस्तान गया था। जैसे ही मैं भारत लौटूंगा और पासपोर्ट स्कैन होगा, पुलिस को पता चल जाएगा। अगर मैंने भारत की सुरक्षा का उल्लंघन किया है या मेरे खिलाफ कोई सबूत मिला है, तो मुझे एयरपोर्ट से ही गिरफ्तार कर लें।’ डॉक्टर यात्री: ट्रैवल से फेमस होने तक नवांकुर धनखड़ ने MBBS की डिग्री हासिल की लेकिन डॉक्टरी में मन न लगने के कारण उन्होंने ट्रैवल ब्लॉगिंग शुरू कर दी। 30 सितंबर 2017 को उन्होंने ‘डॉक्टर यात्री’ नाम से यूट्यूब चैनल शुरू किया और अपनी ट्रैवल जर्नी शेयर करते हुए फेमस हो गए। अब तक नवांकुर 95 से अधिक देशों की यात्रा कर चुके हैं, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है। विवाद और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया ज्योति की गिरफ्तारी के बाद नवांकुर पर भी जासूसी के आरोप लगने लगे। सोशल मीडिया पर लोग उनकी यात्रा और पाकिस्तान कनेक्शन पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, नवांकुर ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे निर्दोष हैं और जांच के लिए तैयार हैं। नवांकुर की यात्रा और निजी जिंदगी नवांकुर ने हाल ही में बहादुरगढ़ की युवती से शादी की है। शादी का वीडियो उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। उनके यूट्यूब चैनल पर साढ़े 17 लाख सब्सक्राइबर्स और इंस्टाग्राम पर 6 लाख फॉलोअर्स हैं।
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Golden Temple

Golden Temple Attack, Pakistani Drone-Missile हमला नाकाम, Indian Army ने ऐसे किया फेल

भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने अमृतसर स्थित Golden Temple (स्वर्ण मंदिर) को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए। लेकिन भारतीय सेना और वायु रक्षा प्रणाली ने इन हमलों को समय रहते विफल कर दिया और देश की धार्मिक विरासत को सुरक्षित रखा। Operation Sindoor के बाद पाकिस्तान की बौखलाहट 5 मई को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान जाने के बाद भारत ने 7 मई को जवाबी कार्रवाई करते हुए “ऑपरेशन सिंदूर” लॉन्च किया। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में कई आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया। भारत की इस कार्रवाई से बौखलाए पाकिस्तान ने भारत के कई शहरों को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइल हमलों की योजना बनाई, जिसमें स्वर्ण मंदिर को विशेष रूप से टारगेट किया गया। Indian Air Defence ने कैसे रोकी Golden Temple पर तबाही? भारतीय सेना पहले से सतर्क थी और उसने पंजाब के संवेदनशील क्षेत्रों में मजबूत वायु सुरक्षा कवच तैयार कर रखा था। Golden Temple जैसे धार्मिक स्थलों को पूरी सुरक्षा दी गई थी। भारतीय वायु रक्षा तंत्र में तैनात प्रमुख हथियार सिस्टम: इन सभी सिस्टम को Akashteer नेटवर्क के तहत जोड़ा गया, जिससे एक सेकेंड में लक्ष्य पहचान और हमले का जवाब संभव हो पाया। Golden Temple तक नहीं पहुंच पाया एक भी पाकिस्तानी हथियार सेना की सूझबूझ और तकनीकी दक्षता के चलते पाकिस्तान का एक भी ड्रोन या मिसाइल Golden Temple की ओर नहीं बढ़ सका। सभी हवाई हमलों को रास्ते में ही हवा में उड़ा दिया गया। भारतीय सेना ने बाद में मलबे के टुकड़े दिखाकर यह सिद्ध कर दिया कि पाकिस्तान की यह साजिश पूरी तरह नाकाम रही। 🇮🇳 धार्मिक स्थलों और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि इस पूरे ऑपरेशन से यह साबित हो गया कि Indian Army और Air Defence न सिर्फ सीमाओं की रक्षा करने में सक्षम हैं, बल्कि देश की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को भी सुरक्षित रखने में पूरी तरह सक्षम हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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COVID-19 Surge

COVID-19 Surge: एशिया में फिर बढ़े कोरोना केस, हांगकांग-सिंगापुर में हालात चिंताजनक

19 मई 2025, देश हरपल डेस्क COVID-19 एक बार फिर एशिया में अपने पैर पसार रहा है। हांगकांग और सिंगापुर जैसे विकसित शहरों में संक्रमण के मामलों में तेज़ वृद्धि देखी जा रही है, जिससे स्वास्थ्य अधिकारियों और आम जनता में चिंता बढ़ गई है। हांगकांग में 10 हफ्तों में 30 गुना वृद्धि हांगकांग में मार्च 2025 से COVID-19 मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले 10 हफ्तों में संक्रमण के मामलों में 30 गुना तक की बढ़ोतरी हुई है। Sewage surveillance और आउटपेशेंट क्लीनिकों में COVID-19 के मामलों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। सिंगापुर में भी संक्रमण में उछाल सिंगापुर में मई के पहले सप्ताह में COVID-19 के मामलों में 28% की वृद्धि हुई है, और अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या में भी 30% तक की बढ़ोतरी देखी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जनता से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। नया वैरिएंट और लक्षणस्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, Omicron JN.1 वैरिएंट इस नए उछाल के पीछे हो सकता है। इस वैरिएंट के कारण मरीजों में खांसी, गले में खराश, मतली, उल्टी, ब्रेन फॉग और आंखों में जलन जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। भारत में स्थिति और सतर्कता भारत में भी कुछ शहरों में COVID-19 के मामलों में हल्की वृद्धि देखी जा रही है। मुंबई में डॉक्टरों ने हाल ही में कुछ नए मामलों की पुष्टि की है, हालांकि अधिकांश मामले हल्के हैं और गंभीर चिंता की आवश्यकता नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने जनता से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है। बचाव के उपाय और सलाह स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता और सावधानी बरतकर हम इस नए उछाल से बच सकते हैं। निष्कर्ष COVID-19 का यह नया उछाल हमें याद दिलाता है कि महामारी अभी समाप्त नहीं हुई है। हांगकांग और सिंगापुर जैसे देशों में मामलों की वृद्धि हमें सतर्क रहने की आवश्यकता का संकेत देती है। भारत में स्थिति अभी नियंत्रण में है, लेकिन हमें सतर्क रहना और आवश्यक सावधानियां बरतनी चाहिए।
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ट्रैवल व्लॉगर से जासूस तक: ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी से सोशल मीडिया में हड़कंप

Breaking: Travel Vlogger Jyoti Malhotra Arrested for Alleged Espionage for Pakistan हरियाणा के हिसार की रहने वाली ट्रैवल व्लॉगर और यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। ज्योति, जो ‘Desi-Indo-Joe’ नामक यूट्यूब चैनल और @travelwithjo1 इंस्टाग्राम हैंडल से मशहूर थीं, पर आरोप है कि उन्होंने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के एजेंटों को संवेदनशील जानकारी साझा की। सोशल मीडिया की आड़ में जासूसी ज्योति ने 2023 में पाकिस्तान की यात्रा की थी, जिसके दौरान वह पाकिस्तान उच्चायोग के एक कर्मचारी एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश के संपर्क में आईं। उनके बीच घनिष्ठ संबंध विकसित हुए, और आरोप है कि इसी दौरान ज्योति ने संवेदनशील जानकारी साझा की। राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा ज्योति की गिरफ्तारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा पर उठते सवालों को फिर से उजागर किया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की गहन जांच कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं और भी तो कोई शामिल नहीं है। सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता हाल के वर्षों में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से भारतीय नागरिकों को हनी ट्रैप में फंसाने के कई मामले सामने आए हैं। इसलिए सुरक्षा एजेंसियां अब सोशल मीडिया पर अधिक सतर्कता बरत रही हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। निष्कर्ष ज्योति मल्होत्रा की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का दुरुपयोग करके राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला जा सकता है। यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चेतावनी है कि वे सोशल मीडिया पर होने वाली गतिविधियों पर कड़ी नजर रखें और समय रहते कार्रवाई करें।
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Operation Sindoor: Shashi Tharoor

Operation Sindoor: शशि थरूर के नेतृत्व में विदेशी डेलिगेशन, कांग्रेस में मचा घमासान

केंद्र सरकार द्वारा पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उजागर करने के लिए गठित किए गए डेलिगेशन में कांग्रेस सांसद शशि थरूर को शामिल करने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। जहां एक ओर थरूर ने इस पहल का स्वागत किया है, वहीं कांग्रेस पार्टी के भीतर इस पर असंतोष की लहर दौड़ गई है। ऑपरेशन सिंदूर: भारत की कूटनीतिक पहल पिछले महीने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, जिसमें 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी, भारत सरकार ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत एक कूटनीतिक अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद को वैश्विक मंचों पर उजागर करना है। इसके तहत, शशि थरूर के नेतृत्व में एक बहुदलीय डेलिगेशन को अमेरिका भेजा जाएगा, जिसमें मिलिंद देवड़ा और शंभवी चौधरी जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं। कांग्रेस में असंतोष: जयराम रमेश और उदित राज की प्रतिक्रिया कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सरकार के इस कदम को “बेईमानी” करार देते हुए कहा कि पार्टी द्वारा प्रस्तावित चार सांसदों की सूची को नजरअंदाज कर शशि थरूर को शामिल किया गया है। उन्होंने इसे इंदिरा गांधी के कार्यकाल की एकतरफा नीतियों से तुलना करते हुए आलोचना की। वहीं, कांग्रेस नेता उदित राज ने थरूर की पाकिस्तान के खिलाफ तीखी टिप्पणियों पर सवाल उठाते हुए पूछा, “क्या वे बीजेपी के प्रवक्ता बन गए हैं?” उन्होंने थरूर की पार्टी के प्रति निष्ठा पर भी संदेह जताया। थरूर का पक्ष: राष्ट्रहित सर्वोपरि शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां व्यक्तिगत हैं और पार्टी की आधिकारिक नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं। उन्होंने कहा, “मैं अपने देश के लिए बोलता हूं, और मुझे इस मिशन का हिस्सा बनने पर गर्व है।” थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें पार्टी की ओर से कोई औपचारिक चेतावनी नहीं मिली है। बीजेपी का तंज: राहुल गांधी पर निशाना बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए पूछा, “राहुल गांधी उन लोगों से नफरत क्यों करते हैं जो भारत के लिए बोलते हैं?” पार्टी ने थरूर को डेलिगेशन से बाहर रखने के कांग्रेस के फैसले पर सवाल उठाया और इसे राष्ट्रहित के खिलाफ बताया। निष्कर्ष: कूटनीति बनाम राजनीति शशि थरूर की डेलिगेशन में नियुक्ति ने एक बार फिर दिखाया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति के मुद्दों पर भी राजनीतिक दलों के बीच मतभेद गहरे हैं। जहां एक ओर सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्षी दलों के भीतर इस पर असहमति और आंतरिक संघर्ष स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे है
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Rajnath Singh

Pakistan का जवाब Rajnath Singh के Nuclear Weapons Statement पर – IAEA पर उठाया सवाल

भारतीय रक्षा मंत्री Rajnath Singh द्वारा पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर दिए गए बयान के बाद, भारत-पाक के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है। Rajnath Singh ने श्रीनगर के बडामी बाग कैंटोनमेंट में कहा था कि पाकिस्तान जैसे “irresponsible और rogue nation” के पास nuclear weapons सुरक्षित नहीं हैं और इन्हें IAEA (International Atomic Energy Agency) की निगरानी में लाना चाहिए। इस बयान पर Pakistan Foreign Ministry ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह टिप्पणी IAEA की भूमिका और अधिकार को लेकर “पूर्ण अज्ञानता” को दर्शाती है। पाकिस्तान ने इसे भारत की “असुरक्षा और कुंठा” का प्रतीक बताया और कहा कि उसकी defence and deterrence capabilities भारत की पारंपरिक आक्रामकता का प्रभावी जवाब दे रही हैं। IAEA ने Radiation Leak की रिपोर्ट को किया खारिज इससे पहले मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि भारत के Operation Sindoor airstrikes के दौरान पाकिस्तान के Kirana Hills, Sargodha स्थित परमाणु स्थलों पर हमला हुआ और रेडिएशन लीक की आशंका जताई गई। हालांकि, IAEA ने ऐसी सभी खबरों को खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान के किसी भी nuclear facility से कोई radiation leak नहीं हुआ। बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा पर सवाल हाल के दिनों में भारत-पाकिस्तान के बीच सीमाई झड़पें, ceasefire violations और कड़े बयानों का सिलसिला तेज हुआ है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि भारत उन्हें “एक बड़े संघर्ष” की ओर धकेल रहा है, वहीं भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने और युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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President

President द्रौपदी मुर्मू ने Supreme Court से मांगा Clarification: बिल (Bills) मंजूरी पर 14 अहम Constitutional Questions

President द्रौपदी मुर्मू ने भारत के संविधान के Article 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांगी है। इस संदर्भ में उन्होंने राज्यपाल और राष्ट्रपति के द्वारा विधेयकों (Bills) को मंजूरी देने (Assent) की प्रक्रिया और समय-सीमा (Timelines) को लेकर 14 महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल (Constitutional Questions) कोर्ट के सामने रखे हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 8 अप्रैल 2025 के फैसले के बाद उठाया गया, जिसमें बिल मंजूरी देने की निश्चित समय-सीमा तय की गई थी। 14 Constitutional Questions: President ने क्या पूछा? क्यों महत्वपूर्ण है यह सवाल? सुप्रीम कोर्ट ने अपने अप्रैल 2025 के फैसले में कहा कि राज्यपालों द्वारा बिलों को मंजूरी देने में अनावश्यक देरी unconstitutional है। इसलिए अदालत ने तय किया कि राज्यपाल को 3 महीने के अंदर निर्णय लेना होगा और यदि बिल राष्ट्रपति के पास जाता है तो राष्ट्रपति को भी 3 महीने के भीतर निर्णय देना होगा। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई बिल “स्पष्ट असंवैधानिक” हो तो राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट की सलाह लेना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jammu-Kashmir

Jammu-Kashmir Encounter: अवंतीपोरा और शोपियां में 6 आतंकी ढेर, Operation Sindoor के तहत पाकिस्तान में बड़ी कार्रवाई

जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। अवंतीपोरा (Awantipora) और शोपियां (Shopian) में हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ों (Encounter) में कुल छह आतंकवादी मारे गए हैं। इन अभियानों के तहत सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई ने आतंकियों के नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है। अवंतीपोरा मुठभेड़ में तीन जैश-ए-मोहम्मद आतंकी मारे गए 15 मई को पुलवामा जिले के त्राल और नाडेर इलाकों में हुए एनकाउंटर में जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammed) से जुड़े तीन आतंकी ढेर कर दिए गए। इनकी पहचान आसिफ अहमद शेख, आमिर नज़ीर वानी और यावर अहमद भट के रूप में हुई है। तीनों पुलवामा के निवासी थे और लंबे समय से आतंकी गतिविधियों में शामिल थे। शोपियां के ऑपरेशन केलर में तीन लश्कर-ए-तैयबा आतंकी ढेर इससे दो दिन पहले, 13 मई को, शोपियां जिले के केलर वन क्षेत्र में ‘ऑपरेशन केलर’ (Operation Keller) के तहत लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) के तीन आतंकी मारे गए थे। इस अभियान के दौरान सुरक्षाबलों ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया, जिसमें AK सीरीज की राइफलें, ग्रेनेड और अन्य हथियार शामिल थे। पहलगाम हमले के बाद बढ़ा सुरक्षा अभियान 22 अप्रैल को पहलगाम (Pahalgam) में हुए भयानक आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत के बाद घाटी में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सख्त कर दी गई है। हमले में मारे गए लोगों में कई पर्यटक भी शामिल थे, जिसने देशभर में रोष फैलाया। ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान में आतंक के ठिकानों पर सीधा प्रहार इस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत Jammu-Kashmir (PoJK) में मौजूद आतंकवादी लॉन्चपैड्स पर सीधी कार्रवाई की। 7 मई को शुरू हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के तहत नौ आतंकी ठिकानों को तबाह किया गया। इसके बाद 10 मई को भारत और पाकिस्तान के बीच एक संघर्षविराम समझौता हुआ, जो शाम 5 बजे से लागू हुआ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Purnam Kumar Shaw

BSF जवान Purnam Kumar Shaw की Pakistan से वतन वापसी | आँखों पर पट्टी, 21 दिन की हिरासत की पूरी कहानी

सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान पूर्णम कुमार शॉ (Purnam Kumar Shaw) की पाकिस्तान से भारत वापसी ने पूरे देश को राहत की सांस दी। 23 अप्रैल 2025 को पंजाब बॉर्डर पर गश्त करते हुए वह गलती से भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर गए थे, जिसके बाद उन्हें Pakistan Rangers द्वारा हिरासत में ले लिया गया। Blindfolded तस्वीर ने देश को झकझोरा पाकिस्तानी मीडिया और सेना द्वारा जारी की गई एक तस्वीर में Purnam Kumar Shaw जवान की आंखों पर पट्टी (blindfold) बंधी थी और वह बेहद थके व असहाय नजर आ रहे थे। यह छवि सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिससे जनता में गुस्सा और जवान की सुरक्षित वापसी की मांग तेज हो गई। Pahalgam Terror Attack के बाद तनावपूर्ण माहौल इस घटना के एक दिन पहले 22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला हुआ था। इसके चलते भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही तनाव था, जिससे राजनयिक बातचीत पूरी तरह रुक गई थी। पत्नी की गुहार और ममता बनर्जी का समर्थन कोलकाता निवासी जवान की पत्नी रजनी शॉ, जो उस वक्त गर्भवती थीं, ने BSF और राज्य सरकार से मदद की गुहार लगाई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें फोन कर भरोसा दिलाया कि सरकार उनके साथ है और हरसंभव मदद करेगी। India-Pakistan ने की Soldier Exchange लगभग तीन हफ्ते (21 दिन) बाद, 14 मई 2025 को पूर्णम कुमार शॉ को अटारी-वाघा सीमा (Attari-Wagah Border) से भारत लाया गया। इसके बदले भारत ने भी एक पाकिस्तानी रेंजर को रिहा किया, जो करीब दो सप्ताह से भारतीय हिरासत में था। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Govind Giri

मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: Govind Giri का बड़ा दावा, बोले- गलत बताए जा रहे चोरी के आंकड़े

मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर अब गोविंद गिरी महाराज ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चोरी की रकम को लेकर चल रही चर्चाओं पर सफाई देते हुए कहा कि घटना में नुकसान को लेकर जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे वास्तविकता से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जा रहे हैं। गोविंद गिरी के मुताबिक, चोरी की राशि 3 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। बिना आधिकारिक पुष्टि के बड़ी रकम के दावे करना सही नहीं है, क्योंकि इससे लोगों में भ्रम फैलता है। Govind Giri ने क्या कहा? Govind Giri ने चढ़ावा चोरी मामले पर बोलते हुए कहा कि मंदिरों में आने वाला दान और चढ़ावा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होता है। इसलिए इस तरह के मामलों में सही जानकारी सामने आना बेहद जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि चोरी की रकम को लेकर कुछ जगहों पर जो आंकड़े बताए जा रहे हैं, वे वास्तविक स्थिति से काफी अलग हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी खबर पर विश्वास करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें। चोरी की रकम को लेकर बना हुआ है विवाद चढ़ावा चोरी की खबर सामने आने के बाद से ही नुकसान की राशि को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे थे। कुछ रिपोर्ट्स में बड़ी रकम का जिक्र किया गया था, जिसके बाद यह मामला काफी चर्चा में आ गया। अब गोविंद गिरी के बयान के बाद एक बार फिर चोरी की वास्तविक राशि को लेकर बहस शुरू हो गई है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कुल कितना नुकसान हुआ है। जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई फिलहाल मामले की जांच जारी है। संबंधित अधिकारी घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि चोरी कैसे हुई और इसमें कितनी राशि या सामान का नुकसान हुआ। गोविंद गिरी ने उम्मीद जताई कि जांच के बाद पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल इस घटना के बाद धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिरों में दान और चढ़ावे की सुरक्षा के लिए आधुनिक निगरानी व्यवस्था और बेहतर प्रबंधन जरूरी है। मंदिरों में आने वाला चढ़ावा लाखों लोगों की आस्था से जुड़ा होता है, ऐसे में इस तरह की घटनाएं चिंता बढ़ाती हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CBSE

CBSE Education Rule 2026: Third Language Assessment में फेल हुए तो नहीं मिलेगा 10वीं का Certificate

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए भाषा शिक्षा से जुड़ा एक बड़ा बदलाव किया है। नए नियम के तहत अब छात्रों को Class 10 Pass Certificate पाने के लिए Third Language (तीसरी भाषा) में भी सफल होना जरूरी होगा। हालांकि, थर्ड लैंग्वेज की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी, लेकिन स्कूल द्वारा कराए जाने वाले Internal Assessment में पास होना अनिवार्य रहेगा। यह नया नियम उन छात्रों पर लागू होगा जो Academic Session 2026-27 में Class 9 में प्रवेश लेंगे और 2027-28 में Class 10 Board Exam देंगे। CBSE का यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत छात्रों में बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। CBSE Third Language Rule: क्या बदला है? अब तक कई छात्र तीसरी भाषा को केवल एक अतिरिक्त विषय के रूप में देखते थे, लेकिन नए नियम के बाद इसकी अहमियत बढ़ जाएगी। CBSE के अनुसार, कक्षा 9 और 10 के छात्रों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा। नए नियम की मुख्य बातें: Third Language में Fail होने पर क्या होगा? CBSE ने छात्रों को राहत देते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि अगर कोई छात्र Third Language Internal Assessment में सफल नहीं हो पाता है, तो उसे सुधार का मौका दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में: NEP 2020 के तहत क्यों आया यह बदलाव? CBSE का मानना है कि आज के समय में भाषा का ज्ञान केवल परीक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए। नई शिक्षा नीति 2020 में छात्रों को कई भाषाओं को समझने और सीखने पर जोर दिया गया है। Third Language को अनिवार्य करने का उद्देश्य है कि छात्र: Students और Parents के लिए जरूरी जानकारी नए नियम को लेकर छात्रों और अभिभावकों के मन में कई सवाल हैं। उन्हें ध्यान रखना होगा कि: CBSE Education System में बड़ा बदलाव CBSE का यह फैसला स्कूल शिक्षा प्रणाली में भाषा सीखने के तरीके को बदल सकता है। अब छात्रों को केवल मुख्य विषयों पर ही नहीं, बल्कि भाषा कौशल पर भी ध्यान देना होगा। छात्रों के लिए यह जरूरी है कि वे Third Language को बोझ न समझें, बल्कि इसे नई भाषा सीखने और अपनी क्षमता बढ़ाने के अवसर के रूप में देखें।
FIFA World Cup 2026

FIFA World Cup 2026: France vs Spain का हाई-वोल्टेज Semifinal, 20 साल पुरानी राइवलरी फिर होगी ताजा

FIFA World Cup 2026 अब अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। फुटबॉल प्रेमियों की नजरें मंगलवार को अमेरिका के डलास स्थित AT&T Stadium पर टिकी होंगी, जहां टूर्नामेंट का पहला सेमीफाइनल France और Spain के बीच खेला जाएगा। यह मुकाबला सिर्फ फाइनल में पहुंचने की जंग नहीं है, बल्कि दो ऐसी टीमों की भिड़ंत भी है, जिन्होंने पिछले कई वर्षों में विश्व फुटबॉल पर अपनी अलग छाप छोड़ी है। इस मैच की सबसे खास बात यह है कि फ्रांस और स्पेन 20 साल बाद फीफा वर्ल्ड कप के नॉकआउट मुकाबले में आमने-सामने होंगे। आखिरी बार दोनों टीमें 2006 विश्व कप के प्री-क्वार्टर फाइनल में भिड़ी थीं, जहां फ्रांस ने 3-1 से जीत दर्ज कर स्पेन का सफर समाप्त कर दिया था। 20 साल पुरानी यादें फिर होंगी ताजा 2006 के उस मुकाबले में जिदान की कप्तानी वाली फ्रांस टीम ने शानदार प्रदर्शन किया था। अब दो दशक बाद तस्वीर बदल चुकी है। दोनों टीमों में नए सितारे हैं, नई रणनीतियां हैं और लक्ष्य सिर्फ एक—विश्व कप के फाइनल में जगह बनाना। फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह मुकाबला इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दोनों टीमें इस समय बेहतरीन फॉर्म में हैं और पूरे टूर्नामेंट में दमदार प्रदर्शन करते हुए अंतिम चार तक पहुंची हैं। Mbappe vs Lamine Yamal: मैच का सबसे बड़ा आकर्षण अगर इस सेमीफाइनल की सबसे बड़ी व्यक्तिगत टक्कर की बात करें तो सभी की नजरें किलियन एम्बाप्पे और लामिन यमाल पर रहेंगी। फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे इस विश्व कप में अब तक 8 गोल कर चुके हैं। उनकी गति, शानदार फिनिशिंग और बड़े मैचों में दबाव झेलने की क्षमता फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। गोल्डन बूट की रेस में भी वे सबसे आगे हैं। वहीं, स्पेन के युवा स्टार लामिन यमाल ने अपनी तेज रफ्तार, बेहतरीन ड्रिब्लिंग और आक्रामक खेल से दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों का दिल जीत लिया है। कम उम्र में जिस आत्मविश्वास के साथ वह बड़े मुकाबले खेल रहे हैं, उसने उन्हें इस टूर्नामेंट के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है। दोनों टीमों का सेमीफाइनल तक का सफर फ्रांस ने पूरे टूर्नामेंट में संतुलित प्रदर्शन किया है। मजबूत डिफेंस और तेज काउंटर अटैक के दम पर टीम ने हर चुनौती का सामना किया। क्वार्टर फाइनल में मोरक्को को हराकर फ्रांस ने अंतिम चार में जगह बनाई। दूसरी ओर, स्पेन ने अपनी पारंपरिक पासिंग फुटबॉल और युवा खिलाड़ियों के दम पर शानदार प्रदर्शन किया। बेल्जियम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल जीतने के बाद टीम पूरे आत्मविश्वास के साथ सेमीफाइनल में उतरेगी। फ्रांस बनाएगा रिकॉर्ड या स्पेन लिखेगा नया इतिहास? फ्रांस के पास लगातार तीसरी बार विश्व कप फाइनल में पहुंचने का मौका है। अगर टीम जीत हासिल करती है तो यह आधुनिक फुटबॉल के सबसे बड़े रिकॉर्ड्स में शामिल होगा। वहीं स्पेन की कोशिश 2010 के बाद एक बार फिर विश्व कप ट्रॉफी जीतने की उम्मीदों को मजबूत करने की होगी। युवा खिलाड़ियों से सजी टीम के पास इतिहास बदलने का सुनहरा अवसर है। डलास में होगा हाई-वोल्टेज मुकाबला अमेरिका का AT&T Stadium इस महामुकाबले का गवाह बनेगा। स्टेडियम में हजारों दर्शकों के पहुंचने की उम्मीद है, जबकि दुनिया भर के करोड़ों फुटबॉल फैंस टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस मैच को देखेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुकाबला केवल स्टार खिलाड़ियों का नहीं, बल्कि दोनों कोचों की रणनीति की भी परीक्षा होगी। जहां फ्रांस तेज काउंटर अटैक पर भरोसा करेगा, वहीं स्पेन गेंद पर नियंत्रण रखते हुए विपक्षी टीम पर लगातार दबाव बनाने की कोशिश करेगा। फाइनल का टिकट दांव पर इस मुकाबले की विजेता टीम सीधे FIFA World Cup 2026 Final में पहुंचेगी, जहां उसका सामना दूसरे सेमीफाइनल की विजेता टीम से होगा। ऐसे में दोनों टीमों के लिए यह मैच किसी फाइनल से कम नहीं है। फुटबॉल प्रेमियों को उम्मीद है कि France vs Spain का यह मुकाबला रोमांच, गति, शानदार गोल और यादगार पलों से भरपूर होगा। एक ओर एम्बाप्पे का अनुभव है तो दूसरी ओर यमाल का युवा जोश। अब देखना दिलचस्प होगा कि डलास की इस जंग में जीत किसकी होती है और विश्व कप ट्रॉफी की ओर एक कदम आगे कौन बढ़ाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Monsoon

IMD Weather Alert: Monsoon Break का असर, उत्तर भारत में थमी बारिश, Arunachal में ITBP के 15 जवान फंसे

देशभर में मानसून (Monsoon) की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है। जुलाई के मध्य में जहां आमतौर पर कई राज्यों में झमाझम बारिश होती है, वहीं इस बार मौसम ने अलग ही तस्वीर पेश की है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 11 साल में तीसरी बार ऐसा Monsoon Break देखने को मिल रहा है। इसका सीधा असर उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर, पूर्वोत्तर राज्यों में लगातार बारिश और भूस्खलन से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। अरुणाचल प्रदेश में ITBP के 15 जवान खराब मौसम के कारण दुर्गम इलाके में फंस गए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए राहत अभियान जारी है। क्या है Monsoon Break और क्यों हुआ? Monsoon Break वह स्थिति होती है, जब कुछ दिनों के लिए मानसून की सक्रियता अचानक कम हो जाती है। इस दौरान उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश लगभग रुक जाती है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्रों में बारिश जारी रह सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस समय मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक गई है। साथ ही बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम सक्रिय नहीं होने के कारण बारिश का सिलसिला कमजोर पड़ गया है। UP और MP में बारिश की कमी बढ़ी चिंता मानसून की सुस्ती का सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ने लगा है। बारिश कम होने से धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है। कई जिलों में किसान सिंचाई के वैकल्पिक साधनों का सहारा लेने लगे हैं। राजस्थान, दिल्ली और आसपास के राज्यों में बढ़ी उमस मानसून कमजोर पड़ने का असर राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में भी महसूस किया जा रहा है। इन इलाकों में दिन का तापमान बढ़ा है और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक इन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना कम रहेगी। Arunachal Pradesh में ITBP के जवान फंसे पूर्वोत्तर भारत में स्थिति बिल्कुल अलग है। अरुणाचल प्रदेश में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण कई सड़कें बंद हो गई हैं। इसी बीच ITBP के 15 जवान एक दुर्गम इलाके में फंस गए। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। मौसम साफ होते ही जवानों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश तेज की जाएगी। किसानों की बढ़ी चिंता जुलाई का महीना खरीफ फसलों के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे समय में बारिश कम होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं होती, तो कई क्षेत्रों में फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार सिंचाई और फसल प्रबंधन की योजना बनाएं। IMD ने क्या कहा? भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर सिस्टम बनने की संभावना है। यदि यह सिस्टम मजबूत होता है, तो उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है और अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। हालांकि, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में फिलहाल बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
LPG Cylinder

10kg Gas Cylinder: अब भारी सिलेंडर से मिलेगी राहत, जानें नया LPG Cylinder कब होगा उपलब्ध

देशभर के करोड़ों LPG उपभोक्ताओं के लिए जल्द एक नई सुविधा शुरू हो सकती है। सरकारी तेल कंपनियां 10kg के नए Lightweight LPG Cylinder को बड़े स्तर पर उपलब्ध कराने की तैयारी कर रही हैं। यह सिलेंडर खासतौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है, जिन्हें 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर भारी लगता है या जिनके घर में गैस की खपत कम होती है। हालांकि, इस योजना को लागू करने से पहले सरकार की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी मिलने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से अलग-अलग शहरों में उपलब्ध कराया जाएगा। क्या है 10kg LPG Cylinder की खासियत? नया 10kg LPG सिलेंडर वजन में हल्का होगा और इसे उठाना, ले जाना व इस्तेमाल करना पहले की तुलना में काफी आसान रहेगा। तेल कंपनियों का मानना है कि यह सिलेंडर छोटे परिवारों और सीमित गैस उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह नया विकल्प पारंपरिक 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की जगह नहीं लेगा, बल्कि ग्राहकों को एक अतिरिक्त सुविधा देगा। किन लोगों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा? 10kg LPG Cylinder कई वर्गों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। इनमें शामिल हैं— हल्का होने की वजह से इसे बदलना और एक जगह से दूसरी जगह ले जाना भी आसान होगा। 10kg LPG Cylinder की कितनी होगी कीमत? फिलहाल तेल कंपनियों ने इसकी आधिकारिक कीमत का ऐलान नहीं किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सिलेंडर को कमर्शियल कैटेगरी में उपलब्ध कराया जा सकता है। ऐसे में इसकी कीमत शहर और उस समय लागू LPG दरों के आधार पर तय होगी। सरकार या तेल कंपनियों की ओर से कीमत को लेकर अंतिम घोषणा अभी बाकी है। क्या बंद हो जाएगा 14.2kg घरेलू LPG Cylinder? इस सवाल का जवाब है—नहीं। 14.2 किलो वाला घरेलू LPG सिलेंडर पहले की तरह मिलता रहेगा। नया 10kg सिलेंडर केवल एक अतिरिक्त विकल्प होगा, ताकि उपभोक्ता अपनी जरूरत और बजट के अनुसार सही सिलेंडर चुन सकें। अभी कितनी है घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत? वर्तमान में 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत अलग-अलग शहरों में अलग है। दिल्ली में इसकी कीमत करीब ₹942 है। वहीं कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें भी समय-समय पर तेल कंपनियों द्वारा संशोधित की जाती हैं। कब से शुरू होगी 10kg LPG Cylinder की सुविधा? अभी तक इसकी लॉन्च डेट तय नहीं की गई है। तेल कंपनियां इस योजना पर काम कर रही हैं और आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद इसे पहले चुनिंदा शहरों में शुरू किया जा सकता है। बाद में इसकी उपलब्धता पूरे देश में बढ़ाई जाएगी। उपभोक्ताओं के लिए क्यों है यह बड़ी खबर? बदलती जीवनशैली और छोटे परिवारों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 10kg LPG Cylinder एक बेहतर विकल्प बन सकता है। इससे उपभोक्ताओं को अपनी जरूरत के अनुसार गैस सिलेंडर चुनने की सुविधा मिलेगी। खासकर ऐसे लोग जो कम गैस का इस्तेमाल करते हैं या भारी सिलेंडर उठाने में असुविधा महसूस करते हैं, उनके लिए यह योजना काफी राहत देने वाली साबित हो सकती है। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो आने वाले समय में लाखों उपभोक्ताओं को हल्का, सुविधाजनक और जरूरत के हिसाब से LPG सिलेंडर का नया विकल्प मिल सकेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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