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GOA

Goa Fire Accident क्लब में लगी आग, दिल्ली के चार लोग नहीं लौट पाए घर

Goa की रात, संगीत और छुट्टियों की खुशी अचानक मातम में बदल गई। अर्पोरा के लोकप्रिय नाइटक्लब Birch by Romeo Lane में आग लगने से 25 लोगों की मौत हो गई। इन मृतकों में दिल्ली के एक ही परिवार के चार सदस्य भी शामिल थे, जो पहली बार गोवा घूमने आए थे। कैसे शुरू हुआ हादसा? शनिवार की देर रात क्लब के अंदर डांस शो चल रहा था। उसी दौरान स्पेशल इफेक्ट्स के लिए cold pyro guns चलाए गए। इनसे निकली चिंगारियां बांस और फाइबर की छत को छू गईं।कुछ ही सेकंड में आग फैल गई और धुआं पूरे क्लब में भरने लगा। क्लब में लगभग 200 लोग थे। तेज़ आग, घबराहट और संकरे एग्जिट गेट्स के कारण कई लोग बाहर नहीं निकल पाए। Delhi family की दिल दहला देने वाली कहानी दिल्ली के करावल नगर से आए परिवार के लिए यह पहला Goa ट्रिप था। वे 4 दिसंबर को पहुंचे थे और सोमवार को वापस लौटने वाले थे। हादसे में जान गंवाने वाले: परिवार की एकमात्र सदस्य भावना जोशी किसी तरह बच गईं।घर पर इंतज़ार कर रही बुजुर्ग मां को अभी तक यह खबर नहीं दी गई है, क्योंकि परिवार को डर है कि वह सदमे को सहन नहीं कर पाएंगी। बाकी मृतक कौन थे? हादसे में मारे गए लोगों में 20 लोग क्लब में काम करने वाले कर्मचारी थे।वे अलग-अलग राज्यों और नेपाल से आए थे।बहुत से लोग लकड़ी और फर्नीचर के बीच फंस गए, जो तेज़ी से जलने लगा। जांच, कार्रवाई और सवाल हादसे के बाद: सबसे बड़ा सवाल यही है:क्या इतनी बड़ी त्रासदी रोकी जा सकती थी? सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है: लेकिन कई जगहों पर नियम किताबों में लिखे रहते हैं, ज़मीन पर नहीं। छुट्टियों की जगह मातम जो लोग Goa में छुट्टियां, संगीत और आज़ादी की रात मनाने आए थे, वे कुछ ही घंटों में दर्द, धुआं और चीखों के बीच घिर गए।कई परिवार आज सिर्फ यात्रियों की नहीं, यादों की तलाश में हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Barbi

West Bengal में Babri की नींव रखने की तैयारी 3 हजार सुरक्षाबल तैनात

मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में 6 दिसंबर 2025 को बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) की तरह नई मस्जिद के foundation stone रखने का कार्यक्रम सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजक हुमायूं कबीर हैं, जिन्हें हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित किया गया था। क्यों बन गया विवाद 6 दिसंबर की तारीख ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि इसी दिन 1992 में बाबरी मस्जिद का विध्वंस हुआ था। उसी दिन बाबरी शैली की मस्जिद का शिलान्यास करना राजनीतिक और धार्मिक दृष्टि से विवादास्पद माना जा रहा है। टीएमसी ने कबीर के इस कदम को “सांप्रदायिक राजनीति” करार दिया और पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के कदम वोट बैंक और धार्मिक भावनाओं के माध्यम से लोकप्रियता बनाने का प्रयास माना जा सकता है। हुमायूं कबीर का बयान कबीर ने अपने कदम को purely धार्मिक बताया। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक बयानबाजी नहीं है, बल्कि धार्मिक भावना का प्रतीक है। इस कार्यक्रम के लिए: कबीर ने यह संकेत भी दिया कि अगर ज़रूरत पड़ी तो वे 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में नई राजनीतिक पार्टी के साथ भी सक्रिय होंगे। सुरक्षा और कानून-व्यवस्था स्थानीय प्रशासन ने पूरे इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। पुलिस और केंद्रीय बलों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की हिंसा या तनाव की संभावना को रोका जा सके। कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति या समूह ऐसा कदम न उठाए जिससे साम्प्रदायिक अस्थिरता फैल सके। स्थानीय और राजनीतिक प्रतिक्रिया घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। टीएमसी ने कहा कि कबीर का यह व्यक्तिगत फैसला है और पार्टी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, स्थानीय समुदायों और धार्मिक संगठनों में इस कार्यक्रम को लेकर चर्चा और चिंता जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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HTLS

India’s Future at HTLS 2025 Economy Reforms से लेकर Global Relations तक

भारत का हर नया साल सिर्फ कैलेंडर नहीं बदलता – सोच, दिशा और उम्मीदें भी बदलता है। इसी परिवर्तन की भावना को समझने के लिए Hindustan Times Leadership Summit 2025 (HTLS) में बड़े नेता, नीति-निर्माता और global experts एक साथ आए।थीम थी — “Transforming Tomorrow”।यानी, आज की चर्चा से कल का भारत कैसे बनेगा। इस summit में तीन बातें सबसे ज्यादा उभरकर सामने आईं:अर्थव्यवस्था (Economy),न्याय (Justice),विदेश नीति (Foreign Policy)। Economy: टैक्स आसान, सिस्टम साफ… और अगला लक्ष्य – Customs Reforms वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंच पर आते ही एक सीधी बात कही —“Complex tax system से हम आगे बढ़ चुके हैं।” टैक्स आतंकवाद, यानी टैक्स के नाम पर डर, दिक्कत, झंझट… उसे कम करने के लिए सरकार ने: आयकर को simplified कियाonline और faceless process बढ़ाईtransparency को प्राथमिकता दी अब अगला लक्ष्य?Customs सुधार। उन्होंने कहा कि imports और border-related taxes को भी उसी तरह साफ, clear और technology-based बनाना जरूरी है।इससे व्यापारियों, exporters और consumers – तीनों को फायदा होगा। ये संकेत है कि आने वाले वित्त वर्ष में बड़े structural changes दिख सकते हैं। Justice System: “Fast, Fair, Accessible” – यही नया मंत्र मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने अपने संबोधन में एक सच्चाई स्वीकार की:“न्यायालयों में pendency है। लोगों को इंतज़ार करना पड़ता है।” लेकिन समाधान भी सामने रखा: प्राथमिकता तय करनासमयbound सुनवाईdistrict courts को empower करनाऔर सबसे अहम — मध्यस्थता (mediation) उन्होंने कहा कि mediation विवादों को जल्दी, सस्ते और amicable तरीके से सुलझाने का रास्ता खोलती है। इसका असली मतलब?आम आदमी के लिए न्याय की दूरी कम करना। कानूनी system तब ही सफल है जब गाँव, कस्बे, छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को भी आसानी से न्याय मिले। Foreign Policy: India का अपना रास्ता, अपनी आवाज विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने summit में एक बात बहुत स्पष्ट कही:“India will choose its partners based on national interest.” रूस के राष्ट्रपति पुतिन की हालिया भारत यात्रा इसी दिशा में थी।यह visit सिर्फ protocol नहीं था —आर्थिक साझेदारीdefence cooperationऔर strategic balance तीनों पर focus था। उन्होंने यह भी कहा कि: इसका सीधा अर्थ:भारत गुटनिरपेक्ष नहीं, गुटबद्ध नहींभारत स्वायत्त हैभारत अपना रास्ता खुद बनाएगा Summit की असली भावना: Practical Optimism पूरे तीन दिनों में चर्चा कितनी भी तकनीकी रही हो, माहौल सकारात्मक था। लोगों को लगा —दिशा साफ है, इरादे स्पष्ट हैं। तीनों एक-दूसरे से जुड़े हैं। जब टैक्स आसान होगा, व्यापार बढ़ेगा।जब न्याय तेज होगा, भरोसा बढ़ेगा।जब विदेश नीति संतुलित होगी, भारत मजबूत बनेगा। यही है summit का संदेश:“कल बेहतर बनेगा, अगर आज समझदारी से चलें।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Indigo

Indigo Crisis पायलट की कमी से 1,700 से ज्यादा Flights Cancel, यात्रियों की परेशानी बढ़ी

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo बीते कुछ दिनों से मुश्किल दौर से गुजर रही है। पायलटों की कमी और नए नियमों की वजह से 1700 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं, जिससे हज़ारों यात्री फंस गए। एयरपोर्ट पर भीड़, गुस्सा और चिंता — सब कुछ एक साथ देखने को मिला। लोगों के चेहरे देखकर साफ महसूस हो रहा था कि यह सिर्फ खबर नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ा मामला है। किसी की शादी, किसी का इलाज, किसी का इंटरव्यू — अचानक योजनाएँ टूट गईं। क्यों रद्द हो रही हैं Indigo Flights? इस पूरे संकट की वजह सिर्फ एक नहीं, कई बातें एक साथ आ गईं: यही वजह है कि एक-एक दिन में 1000 से अधिक उड़ानें रद्द हो गईं। Delhi, Mumbai, Bengaluru… कई बड़े एयरपोर्ट प्रभावित सबसे ज्यादा असर बड़े शहरों में दिखा: एक यात्री ने कहा, “टिकट मेरे पास था, लेकिन उड़ान मेरे पास से चले गई। बस मैं यहीं खड़ा रह गया।” ऐसा दर्द सिर्फ आंकड़ों में नहीं दिखता, यह मानवीय अनुभव है। भोपाल और इंदौर में भी असर: लोग अचानक अटके मध्यप्रदेश के यात्री भी परेशान हुए।भोपाल और इंदौर एयरपोर्ट पर: कई लोगों ने कहा कि उन्हें किसी की योजना, किसी की उम्मीद बीच में लटक गई। सरकार और DGCA की कार्रवाई हालात संभालने के लिए कदम उठाए गए: लक्ष्य साफ है — operations को normal करना और यात्री भरोसा वापस लाना। कब तक चलेगी यह समस्या? IndiGo का कहना है कि: इस बीच यात्रियों के लिए सबसे ज़रूरी है — सूचना सही समय पर मिलना। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Repo Rate

Repo Rate Down 0.25% Cut से होम लोन पर बंपर फायदा, EMI में सीधी बचत

भारतीय रिज़र्व बैंक ने 2025 की मौद्रिक नीति बैठक में अहम फैसला लिया। RBI ने रेपो रेट (Repo Rate) में 0.25% की कटौती करते हुए इसे 5.25% कर दिया। इस बदलाव का सीधा फायदा उन लोगों को होगा जिनके पास home loan, car loan या personal loan हैं। EMI कम होने की उम्मीद है और नए लोन भी पहले से सस्ते हो सकते हैं। क्यों घटाया गया Repo Rate? पिछले कुछ महीनों में देश में महंगाई अचानक बहुत नीचे आ गई। कई शहरों में रोजमर्रा के सामान के दाम स्थिर रहे और अक्टूबर में महंगाई लगभग 0.25% तक पहुंच गई।दूसरी तरफ, अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन मजबूत रहा। इसी वजह से RBI ने GDP Growth Estimate बढ़ाकर 7.3% कर दिया। RBI ने कहा — जब inflation कम हो और growth अच्छी हो, तो ब्याज दर घटाना संतुलित कदम होता है। नीति रुख Neutral रखा गया है। यानी आगे क्या होगा, यह पूरी तरह आने वाले डेटा पर निर्भर करेगा। EMI पर सीधा असर – कितना होगा फायदा? अब सबसे बड़ा सवाल: EMI कितनी कम होगी? यह बैंक-to-bank अलग होगा, लेकिन बाजार का रुझान साफ है:सस्ता कर्ज, आसान खरीदारी, ज्यादा demand Home Buyers का Confidence बढ़ेगा रियल एस्टेट सेक्टर की तरफ से इस निर्णय का स्वागत किया जा रहा है।पहले से बने प्लान अब तेज़ी पकड़ सकते हैं: जो परिवार घर खरीदने का इंतज़ार कर रहे थे, उन्हें यह कटौती भावनात्मक राहत भी देती है। EMI की चिंता कम हो जाए तो घर का सपना सच के ज्यादा करीब महसूस होता है। Car और Personal Loan लेने वालों के लिए Positive News रेपो रेट घटने का असर सिर्फ घर तक सीमित नहीं है: इन सब पर भी ब्याज कम हो सकता है।बैंकों ने संकेत दिए हैं कि वे जल्द दरों में बदलाव लागू कर सकते हैं। अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा? कम ब्याज दर का मतलब है: जब खरीदारी बढ़ती है, तो बाजार में उत्साह लौटता है।RBI का पूरा फोकस है कि growth और stability एक साथ आगे बढ़ें। अगला कदम क्या हो सकता है? हालांकि RBI ने साफ कहा कि फैसला data-based होगा।अगर: तो भविष्य में और कटौती की संभावना भी खुली रहती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Modi

Modi-Putin India Visit रक्षा Deals, Oil Discount और Strategic Partnership का नया chapter

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा सिर्फ एक राजनयिक मुलाक़ात नहीं थी—यह एक दोस्ती, भरोसा और रणनीति की कहानी थी। 4–5 दिसंबर की इस यात्रा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन ने वह संदेश दिया, जो दुनिया साफ-साफ समझ गई:India और Russia आज भी एक दूसरे के लिए सबसे भरोसेमंद पार्टनर हैं। दबाव के बीच दोस्ती — India का बड़ा मैसेज यूक्रेन युद्ध के बाद कई देश रूस से दूरी बना चुके हैं, लेकिन भारत ने ऐसा नहीं किया।पश्चिमी देशों के प्रतिबंध, तेल पर निगरानी, और defence deals पर दबाव—सबके बावजूद भारत ने पुतिन का राजकीय सम्मान के साथ स्वागत किया। यह वही India है जो किसी का साइड नहीं लेता।India अपने हित देखता है, अपनी जनता देखता है। यह यात्रा दुनिया के लिए एक सीधा संकेत थी:“भारत strategic autonomy से चलेगा—अपने फैसले खुद लेगा।” Defence पर बड़े फैसले | S-400, S-500 और Fighter Jets मीटिंग के दौरान defence cooperation सबसे आगे रहा।मुख्य मुद्दे: S-400 air defence system की अतिरिक्त इकाइयाँfuturistic S-500 system पर प्रारम्भिक बातचीतSukhoi-30MKI fleet का modernisationBrahMos जैसी joint missile projects का विस्तार“Make in India Defence” पर ज़ोर भारत और रूस सिर्फ़ खरीद-बिक्री नहीं कर रहे, बल्कि technology sharing और joint manufacturing की ओर बढ़ रहे हैं। यह deal सिर्फ रक्षा की नहीं, बल्कि रोज़गार और उद्योग से जुड़ी है। Oil Deals: Discount और long-term energy security तेल इस दौरे का बड़ा विषय था।भारत अभी भी सस्ती रूसी crude oil का सबसे बड़ा खरीदार है। यात्रा से निकलकर तीन बातें साफ हुईं: Russia ने extra discount की पेशकश कीlong-term supply secure करने पर सहमतिpayment में rupee-rouble system को बढ़ाने की योजना India को फायदा:सस्ता तेल, stable supply, महंगाई पर राहत Russia को फायदा: एक बड़ा और भरोसेमंद ग्राहक Trade, Shipping, Nuclear, Healthcare — नए समझौते रक्षा और तेल के अलावा भी कई front पर बात हुई: लक्ष्य तय किया गया:2030 तक trade को 100 billion USD तक ले जाना ये सिर्फ numbers नहीं, आने वाले व्यापार, रोजगार और growth की झलक हैं। Global Message: India की नई भूमिका इस यात्रा से तीन global संदेश साफ निकले: दुनिया यह देख रही है कि India केवल बाजार नहीं—एक निर्णायक शक्ति है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR

SIR & BLO Issues Supreme Court ने सुनवाई में कहा ड्यूटी अनिवार्य, पर Human Approach जरूरी

देश भर में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान अनेक सरकारी कर्मचारियों को बूथ स्तर पर ड्यूटी दे दी गई है। रोज़मर्रा की नौकरी के साथ यह अतिरिक्त ज़िम्मेदारी कई जगहों पर मुश्किलें खड़ी कर रही थी। इसी मुद्दे पर Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है, जिसमें कर्तव्य भी है और राहत भी। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश: जिम्मेदारी निभाना ज़रूरी अदालत ने कहा कि: इसमें BLOs, शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, क्लर्क और अन्य सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। लेकिन राहत भी: जरूरत पड़े तो Extra Staff लगाया जाए Supreme Court ने यह भी स्पष्ट कहा कि: यह निर्देश ऐसे समय आया है जब कई क्षेत्रों में कर्मचारी सुबह बहुत जल्दी और रात देर तक SIR कार्य कर रहे थे। कर्मचारियों की पीड़ा भी सुनी गई याचिका में बताया गया कि: सुप्रीम कोर्ट ने संवेदनशीलता के साथ कहा: यदि किसी कर्मचारी के पास वाजिब कारण है, वह ड्यूटी से छूट की मांग कर सकता है।राज्य सरकार को केस-टू-केस आधार पर विचार करना चाहिए। कानूनी स्थिति: FIR तक का अधिकार चुनाव आयोग के पास कानूनन अधिकार है कि: मुआवजे का प्रश्न याचिका में मांग की गई थी कि जिन कर्मचारियों की मृत्यु या नुकसान SIR कार्य के दौरान हुआ, उनके परिवार को मुआवजा मिले। Supreme Court ने कहा: यह परिवारों को न्याय पाने का सीधा रास्ता देता है। यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है Human Touch: ड्यूटी भी, इंसानियत भी इस आदेश का सार यह है: “Democracy का पहिया तभी चलेगा, जब काम करने वाले इंसान टूटे नहीं।” हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Babri

Bengal में Babri Replica मस्जिद बनाने का विवाद और Humayun Kabir की सस्पेंशन

Trinamool Congress (TMC) के विधायक हुमायूँ कबीर ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में Babri Masjid की प्रतिकृति बनाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि मस्जिद का नींव‑पत्थर 6 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा। इस घोषणा ने राजनीतिक और सामाजिक हलचल मचा दी। Kabir का बयान विवाद और प्रतिक्रिया TMC की कार्रवाई आगे क्या हो सकता है पश्चिम बंगाल जैसे विविधतापूर्ण राज्य में ऐसे कदम सोच-समझकर ही उठाए जाने चाहिए। Humayun Kabir का विवाद यह सिखाता है कि धर्म और राजनीति का मेल बहुत संवेदनशील मुद्दा है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Putin

Vladimir Putin in India भारत-रूस के रिश्तों में नया मोड़, 2025 Summit से क्या-क्या होगा फायदेमंद?

भारत और रूस के रिश्ते हमेशा से भरोसे और साझेदारी पर टिके रहे हैं। दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin का भारत दौरा इसी भरोसे को एक नए दौर में ले जाने जैसा माना जा रहा है। 4–5 दिसंबर को होने वाला यह India-Russia Annual Summit कई बड़े फैसलों और मजबूत आर्थिक-सामरिक समझौतों का मंच बन सकता है। यह लेख आपको पूरे दौरे की गहराई, संभावनाओं, चुनौतियों और दोनों देशों के रिश्तों पर इसके असर को आसान भाषा में समझाता है। क्या है इस बार के दौरे की खासियत? लगभग चार साल बाद, पुतिन भारत आ रहे हैं और यह यात्रा समय की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रही है—ऊर्जा संकट, आर्थिक अस्थिरता, और बदलते सामरिक समीकरण।ऐसे समय में भारत और रूस की मुलाकात केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाली बातचीत है। Defence Cooperation: सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी में बड़ा कदम Trade & Economy: 2030 तक $100 Billion का Vision दोनों देशों का फोकस अब रक्षा से आगे बढ़कर व्यापार पर भी है।दौरे के दौरान: पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इसमें शामिल होंगे: दोनों देश मिलकर 2030 तक $100 बिलियन bilateral trade का लक्ष्य बना रहे हैं। Energy Deals: भारत की जरूरतें, रूस के अवसर भारत की ऊर्जा सुरक्षा में रूस बड़ी भूमिका निभा रहा है।इस बार कच्चे तेल (crude oil), LNG, कोयला और उर्वरक की सप्लाई पर बड़े फैसले हो सकते हैं। ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता से भारत को राहत मिलेगी और रूस को दीर्घकालिक खरीदार। Labour Mobility Agreement: भारतीय युवाओं के लिए नए अवसर इस यात्रा का सबसे मानवीय और प्रभावशाली पहलू है एक संभावित Labour Mobility Pact। इससे: में भारतीय युवाओं को रूस में रोजगार के बड़े अवसर मिल सकते हैं। रूस की जनसंख्या घट रही है, जबकि भारत के पास कुशल जनशक्ति की बड़ी ताकत है—दोनों देशों के हित आपस में मिलते हैं। Space, Health, Technology: नए क्षेत्रों में कदम Gaganyaan से लेकर उपग्रह तकनीक तक, भारत-रूस साझेदारी पहले से ही मजबूत है।इस बार: जैसे क्षेत्रों में नई पहल शुरू होने की संभावना है। रणनीतिक नज़रिए से क्यों जरूरी है यह दौरा? दौरा दोनों देशों के रिश्तों को अगले दशक के लिए नई दिशा देगा। चुनौतियाँ भी कम नहीं इन चुनौतियों को समझना और संभालना दोनों देशों के लिए जरूरी होगा। पुतिन का भारत दौरा केवल protocol visit नहीं है।यह दोस्त से बढ़कर साझेदार जैसे रिश्ते का प्रतीक है—जहाँ defence एक मजबूत स्तंभ है और trade उसका नया इंजन बनने जा रहा है। अगर सभी प्रस्तावित समझौते वास्तविक रूप में आगे बढ़ते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत-रूस संबंध एक नई ऊँचाई पर पहुंच सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IndiGo

IndiGo Airlines क्रू शॉर्टेज के बीच सैकड़ों फ्लाइट्स कैंसल, DGCA ने मांगा जवाब

देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन IndiGo इस समय ऐसे परिचालन संकट से गुजर रही है, जिसने हजारों यात्रियों की यात्रा योजनाएँ बिगाड़ दी हैं। बीते कुछ दिनों में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कई बड़े एयरपोर्ट्स पर इंडिगो की उड़ानें लगातार कैंसल और लंबे समय तक लेट हो रही हैं। कई लोग रातभर एयरपोर्ट पर फंसे रहे, कई की कनेक्टिंग फ्लाइट छूट गई, और बहुत-सी यात्राएँ आखिरी मिनट पर बिगड़ गईं। हालात इतने खराब बने कि DGCA को हस्तक्षेप करना पड़ा। आखिर इंडिगो में ये संकट क्यों आया? इंडस्ट्री सूत्रों और रिपोर्टों से सामने आई कुछ मुख्य वजहें: 1. Crew Shortage – पायलट और क्रू की भारी कमी नई FDTL (Flight Duty Time Limitations) नियमावली लागू होने के बाद क्रू की उपलब्धता कम हो गई। एयरलाइन आवश्यक संख्या में पायलट और कैबिन क्रू तैनात नहीं कर सकी। इसकी वजह से कई उड़ानों को मजबूरन कैंसिल या री-शेड्यूल करना पड़ा। 2. Technical Glitches – सिस्टम दिक्कतें कई एयरपोर्ट्स पर चेक-इन सिस्टम, बैगेज मैनेजमेंट और कोऑर्डिनेशन में तकनीकी दिक्कतें देखी गईं, जिससे लेट बढ़ता चला गया। 3. Airport Congestion – एयरपोर्ट पर भीड़ का दबाव सीजन पीक चल रहा है, ऐसे में भीड़ और अतिरिक्त ट्रैफिक ने देरी को और बढ़ा दिया। एयरलाइन शेड्यूल तेजी से एडजस्ट नहीं कर पाई। यात्रियों पर असर: नाराज़गी, इंतज़ार और उथल-पुथल यात्रियों के अनुभव बताते हैं कि लोगों में नाराज़गी जितनी बड़ी है, उतना ही भ्रम और थकान भी बढ़ी है। DGCA की कार्रवाई: जवाब तलब शुरू DGCA ने इंडिगो से तुरंत रिपोर्ट मांगी है और पूछा है कि यह अफरा-तफरी कैसे हुई।नियामक ने स्पष्ट कहा है कि एयरलाइन को IndiGo ने बयान जारी कर कहा है कि अगले 48 घंटों में हालात सामान्य करने की कोशिश की जा रही है। क्यों है यह मुद्दा इतना बड़ा? IndiGo भारत के घरेलू एविएशन मार्केट का सबसे बड़ा हिस्सा संभालती है। लाखों लोग रोजाना इसके शेड्यूल पर निर्भर होते हैं।ऐसे में फ्लाइट-कैंसिलेशन की यह लहर सिर्फ यात्रियों का भरोसा नहीं तोड़ती, बल्कि भारतीय उड्डयन व्यवस्था में मौजूद खामियों को भी उजागर करती है। यात्रियों के लिए उपयोगी सलाह अगर आपकी उड़ान आने वाले दिनों में इंडिगो से है, तो: इंडिगो का यह संकट सिर्फ एक एयरलाइन की अंदरूनी खराबी नहीं, बल्कि भारतीय एविएशन सेक्टर के दबाव और क्षमता की सच्चाई भी दिखाता है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में क्रू की कमी दूर होगी, तकनीकी दिक्कतें सुधरेंगी और यात्रियों को फिर वही भरोसेमंद सेवा मिलेगी जिसकी वजह से IndiGo देश की नंबर-1 एयरलाइन बन पाई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold Mining: ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज से बदलेगी तस्वीर, भारत को मिल सकता है नया सप्लायर

भारत में सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि लोगों की बचत और निवेश का भी अहम हिस्सा है। शादी का सीजन हो या दिवाली-धनतेरस, सोने की खरीदारी को लेकर बाजार में हमेशा हलचल रहती है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से आई सोने की खोज और बढ़ते निवेश की खबर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया में सोने की नई खोज के लिए कंपनियां बड़े स्तर पर खर्च कर रही हैं। इससे आने वाले समय में सोने की वैश्विक सप्लाई बढ़ने की संभावना है। भारत जैसे देश के लिए यह एक अहम घटनाक्रम है, क्योंकि अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए भारत को दूसरे देशों से सोना आयात करना पड़ता है। Australia में Gold Exploration पर कितना खर्च हुआ? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज से जुड़ा निवेश जून 2026 की तिमाही में बढ़कर लगभग 565.6 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पहुंच गया। ऑस्ट्रेलियाई सांख्यिकी ब्यूरो (ABS) के आंकड़ों के अनुसार, पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 23.6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह खर्च जमीन के नीचे मौजूद सोने के संभावित भंडार का पता लगाने, ड्रिलिंग और खनन की संभावनाओं का आकलन करने जैसे कामों पर किया जाता है। हालांकि, खोज पर खर्च बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर जगह सोने का नया भंडार मिल गया है। किसी जगह सोना मिलने के बाद भी यह देखना पड़ता है कि वहां से उसे निकालना आर्थिक रूप से कितना व्यावहारिक होगा। ऑस्ट्रेलिया में कितना Gold Reserve मौजूद है? ऑस्ट्रेलिया दुनिया के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। सरकारी संस्था Geoscience Australia के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2024 तक देश के अनुमानित Ore Reserves करीब 4,785 टन थे। वहीं, पहचाने गए कुल Gold Resources का आंकड़ा इससे काफी ज्यादा था। यहां एक बात समझना जरूरी है। Gold Resources में सोने के संभावित और पहचाने गए संसाधन शामिल होते हैं, जबकि Ore Reserves उस सोने को दर्शाते हैं जिसे मौजूदा तकनीकी और आर्थिक परिस्थितियों में निकालना व्यावहारिक माना जाता है। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने के बड़े भंडार होने और किसी नई खोज को दुनिया का सबसे बड़ा भंडार बताने में अंतर है। किसी खास नई खोज के बारे में ऐसा दावा करने से पहले उसके आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है। भारत को कैसे मिल सकता है फायदा? भारत में सोने की मांग काफी बड़ी है और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर ऑस्ट्रेलिया में आने वाले वर्षों में सोने का उत्पादन बढ़ता है, तो भारतीय आयातकों के लिए सप्लाई का एक अतिरिक्त विकल्प तैयार हो सकता है। इसके तीन संभावित फायदे हो सकते हैं: हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में निकाला गया सोना अपने आप भारत नहीं पहुंचेगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उत्पादन कितना बढ़ता है, कंपनियां किस देश को निर्यात करती हैं और भारतीय आयातकों के साथ किस तरह के व्यापारिक समझौते होते हैं। क्या भारत में सस्ता हो जाएगा सोना? सोने की नई खोज की खबर सुनकर खरीदारों के मन में सबसे पहले यही सवाल आता है कि क्या अब Gold Price कम होगा? फिलहाल ऐसा कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत केवल उत्पादन पर निर्भर नहीं करती। निवेशकों की मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर की चाल और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां भी भाव को प्रभावित करती हैं। भारत में इसके अलावा रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स और घरेलू मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज बढ़ने के बावजूद भारतीय बाजार में कीमतें तुरंत कम होंगी, इसकी गारंटी नहीं है। ₹13,000 करोड़ के निवेश की खबर कितनी सही है? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर खर्च बढ़ने के आंकड़े सामने आए हैं। लेकिन ₹13,000 करोड़ के निवेश को किसी खास नई खोज या दुनिया के सबसे बड़े सोना भंडार से जोड़ने के लिए संबंधित कंपनी और परियोजना के आधिकारिक दस्तावेजों की जरूरत है। इसलिए इस रकम को किसी एक नए गोल्ड रिजर्व की खोज पर खर्च हुई राशि बताने से पहले इसकी पुष्टि करना जरूरी है। खोज पर किया गया खर्च, जमीन में मौजूद कुल सोने का मूल्य और खनन परियोजना में कुल निवेश तीन अलग-अलग बातें हैं। आगे क्या होगा? ऑस्ट्रेलिया में सोने की खोज पर बढ़ता खर्च वैश्विक गोल्ड इंडस्ट्री के लिए अहम है। अगर आने वाले वर्षों में नए भंडार की पहचान होती है और उनसे व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो पाता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय सप्लाई के विकल्प बढ़ सकते हैं। भारत के लिए भी यह एक संभावित अवसर है। लेकिन नए सप्लायर की भूमिका, आयात पर असर और सोने की कीमतों में बदलाव का पता तभी चलेगा, जब वास्तविक उत्पादन और निर्यात के आंकड़े सामने आएंगे। फिलहाल, ऑस्ट्रेलिया की गोल्ड इंडस्ट्री पर नजर रखना जरूरी है, लेकिन नई खोज के नाम पर सोना सस्ता होने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में 175 डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के अटैचमेंट खत्म, मूल पदस्थापना पर जॉइनिंग के बाद ही मिलेगा अक्टूबर का वेतन

स्वास्थ्य विभाग में मूल पदस्थापना के बजाय दूसरी जगह काम कर रहे 175 डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों के अटैचमेंट समाप्त कर दिए गए हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. माधव प्रसाद हसानी ने 16 अक्टूबर को आदेश जारी कर सभी अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। आदेश के बाद संबंधित कर्मचारियों को अपने मूल पदस्थापना स्थल पर वापस जाकर जॉइनिंग देनी होगी। ऐसा करने के बाद ही उन्हें अक्टूबर महीने का वेतन मिल सकेगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। तत्काल कार्यमुक्त कर मूल पदस्थापना पर भेजने के निर्देश CMHO के आदेश के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों को अटैचमेंट पर काम कर रहे कर्मचारियों को उसी दिन कार्यमुक्त कर उनके मूल पदस्थापना स्थल पर भेजना होगा। इसकी जानकारी CMHO कार्यालय को भी उपलब्ध करानी होगी। वेतन आहरण केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर उपस्थिति सुनिश्चित होने के बाद ही अक्टूबर का वेतन जारी किया जाए। इससे कर्मचारियों को अपने निर्धारित कार्यस्थल पर लौटना अनिवार्य होगा। अटैचमेंट जारी मिला तो जिम्मेदार अधिकारी पर होगी कार्रवाई स्वास्थ्य विभाग ने आदेश के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। CMHO ने स्पष्ट किया है कि आदेश जारी होने के बाद भी कोई कर्मचारी या अधिकारी अटैचमेंट पर काम करता पाया गया, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी संबंधित संस्था के प्रभारी की होगी। विभाग ने अधिकारियों को निर्देशों का पालन कराने और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थाओं को भेजा गया आदेश यह आदेश सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, देपालपुर, मानपुर, सांवेर और हातोद के खंड चिकित्सा अधिकारियों, महू सहित विभिन्न अस्पतालों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों, शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक के प्रभारियों को भेजा गया है। आदेश में भोपाल में हुई बैठकों और 16 अक्टूबर को मुख्यालय स्तर से मिले निर्देशों का भी हवाला दिया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से आदेश लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं।

नवरात्रि पर रायपुर सेंट्रल जेल में सेवा की मिसाल, काली माता सेवा समिति ने 1300 बंदियों को बांटे फल

नवरात्रि के अवसर पर काली माता सेवा समिति ने रायपुर सेंट्रल जेल में करीब 1300 बंदियों को फल वितरित किए। समिति ने यह पहल उन बंदियों के लिए की, जो नवरात्रि में उपवास रखकर माता रानी की आराधना कर रहे हैं। इस आयोजन के जरिए समिति ने सेवा, करुणा और मानवीय संवेदना का संदेश दिया। समिति के अध्यक्ष दीपक भारद्वाज (पोल्ले) ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य बंदियों के प्रति संवेदनशीलता और सेवा भाव को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की गलती या अपराध से उसके सुधरने और बेहतर जीवन जीने की संभावनाएं समाप्त नहीं हो जातीं। बंदियों के सुधार और पुनर्वास पर दिया जोर दीपक भारद्वाज ने कहा कि समाज को न्याय के प्रति सम्मान बनाए रखने के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास की भावना को भी महत्व देना चाहिए। बंदियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने से समाज में मानवीय मूल्यों को मजबूती मिलती है। समिति का मानना है कि जेल में बंद लोगों के साथ भी सम्मानजनक और मानवीय व्यवहार होना चाहिए, ताकि उनमें सकारात्मक बदलाव की भावना विकसित हो सके। पहले भी जेल में कर चुके हैं फल वितरण काली माता सेवा समिति के अनुसार, वह पहले भी कई बार जेल में बंदियों को फल वितरित कर चुकी है। समिति का कहना है कि नवरात्रि केवल पूजा-पाठ और उपवास तक सीमित पर्व नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा और सद्भावना को जीवन में अपनाने का अवसर भी है। इसी भावना के साथ समिति के सदस्यों ने उपवास रखने वाले बंदियों तक फल पहुंचाए। आगे भी जारी रहेंगे सेवा कार्य समिति ने समाज में सेवा, सद्भावना और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी जारी रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में अशोक त्रिपाठी, गुड्डू, सुनील प्रमुख, राजू भाई तारवानी और रामकृष्ण धीवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
वैभव सूर्यवंशी

IND vs WI T20: वैभव सूर्यवंशी का भरोसा कायम, 4 दिन में दूसरी पोस्ट; अब भी मौके का इंतजार

भारत और वेस्टइंडीज (IND vs WI) के बीच T-20 सीरीज के निर्णायक मुकाबले से पहले युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी एक बार फिर चर्चा में हैं। सीरीज में अब तक खेलने का मौका नहीं मिलने के बावजूद वैभव ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। चार दिन के भीतर उनकी दूसरी सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई है, जिसमें भरोसे का संदेश देखने को मिला। वैभव को इस सीरीज में अब तक मैदान पर उतरने का मौका नहीं मिला है। ऐसे में क्रिकेट फैंस के मन में एक ही सवाल है—क्या पांचवें टी-20 में उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा? Vaibhav Sooryavanshi की दूसरी पोस्ट ने खींचा ध्यान वैभव सूर्यवंशी की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर फैंस के बीच चर्चा हो रही है। चार दिन में दूसरी पोस्ट आने के बाद उनके संदेश पर लोगों की नजरें टिकी हैं। हालांकि, पोस्ट को टीम में चयन या किसी खास फैसले से जोड़कर देखना सही नहीं होगा, क्योंकि प्लेइंग-11 में किसे मौका मिलेगा, इसका फैसला टीम मैनेजमेंट करता है। कम उम्र में अपनी बल्लेबाजी से पहचान बनाने वाले वैभव के लिए टीम के साथ रहना और मौके का इंतजार करना भी अनुभव का हिस्सा है। अब देखना होगा कि उन्हें इस सीरीज में खेलने का मौका मिलता है या नहीं। IND vs WI 5th T20: निर्णायक मुकाबले पर नजर भारत और वेस्टइंडीज की टी-20 सीरीज का पांचवां मुकाबला दोनों टीमों के लिए अहम है। सीरीज के आखिरी मैच में जीत हासिल करने वाली टीम खिताब अपने नाम करेगी। ऐसे में भारतीय टीम की प्लेइंग-11 को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। फैंस यह जानना चाहते हैं कि क्या टीम मैनेजमेंट इस मुकाबले में युवा खिलाड़ियों को मौका देगा। वैभव सूर्यवंशी का नाम भी इसी चर्चा में शामिल है। हालांकि, उनके खेलने को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। क्या वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा डेब्यू का मौका? वैभव को लेकर उत्सुकता की एक बड़ी वजह उनकी कम उम्र और क्रिकेट में तेजी से बनी पहचान है। फैंस उन्हें भारतीय टीम की जर्सी में खेलते देखना चाहते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौका मिलना टीम की जरूरत और चयन रणनीति पर निर्भर करता है। फिलहाल वैभव के लिए इंतजार जारी है। पांचवें टी-20 में उनका नाम प्लेइंग-11 में शामिल होता है या नहीं, इसका पता टीम की आधिकारिक घोषणा के बाद ही चलेगा। क्रिकेट में हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। वैभव के समर्थकों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द ही मैदान पर अपनी काबिलियत दिखाने का अवसर मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
लालकृष्ण आडवाणी

LK Advani Hospitalised ICU में भर्ती लालकृष्ण आडवाणी की सेहत कैसी? जानें ताजा अपडेट

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की सेहत को लेकर 17 अक्टूबर को ताजा जानकारी सामने आई है। 98 वर्षीय आडवाणी को सीने में संक्रमण (Chest Infection) की शिकायत के बाद दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है और डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। परिवार और समर्थकों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली जरूर है, लेकिन फिलहाल राहत की बात यह है कि अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक उनकी स्थिति स्थिर है। डॉक्टर उनकी सेहत से जुड़ी जरूरी जांच कर रहे हैं और इलाज जारी है। LK Advani Health Update: अस्पताल में क्या चल रहा है इलाज? लालकृष्ण आडवाणी को शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 की शाम करीब 7:30 बजे अस्पताल लाया गया था। उन्हें सीने में संक्रमण की शिकायत के बाद पल्मोनरी विभाग में भर्ती किया गया। यहां डॉक्टरों की एक टीम उनकी सेहत पर नजर रख रही है और जरूरी मेडिकल जांच की जा रही है। 17 अक्टूबर तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी हालत स्थिर है। हालांकि, उनकी सेहत में आगे कितना सुधार हुआ है और अस्पताल से छुट्टी कब मिलेगी, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पहले भी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं लालकृष्ण आडवाणी लालकृष्ण आडवाणी को इससे पहले मई 2026 में भी उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। दिसंबर 2024 में भी उन्हें अपोलो अस्पताल की ICU में रखा गया था। उस समय डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल जांच और इलाज किया था। जून और जुलाई 2024 में भी उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बढ़ती उम्र को देखते हुए उनकी सेहत पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मौजूदा समय में डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। PM Modi ने हाल ही में की थी लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात लालकृष्ण आडवाणी के अस्पताल में भर्ती होने से कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2026 को उनके दिल्ली स्थित आवास पर मुलाकात की थी। इस दौरान प्रधानमंत्री ने उनसे आशीर्वाद लिया और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान की सराहना की थी। आडवाणी लंबे समय तक बीजेपी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थापित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही वजह है कि उनकी सेहत से जुड़ी खबर पर राजनीतिक जगत और उनके समर्थकों की नजर बनी हुई है। राम रथ यात्रा से उपप्रधानमंत्री तक का सफर लालकृष्ण आडवाणी का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा है। वह भारतीय जनता पार्टी के तीन बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और पार्टी के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। साल 1990 में निकाली गई उनकी राम रथ यात्रा ने राष्ट्रीय राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2002 से 2004 तक वह भारत के उपप्रधानमंत्री रहे। देश की राजनीति में उनके लंबे योगदान को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। LK Advani अब अगले हेल्थ अपडेट का इंतजार लालकृष्ण आडवाणी फिलहाल दिल्ली के अपोलो अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं। 17 अक्टूबर तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है और सीने में संक्रमण के लिए इलाज चल रहा है। अब सभी की नजर अस्पताल की ओर से जारी होने वाले अगले हेल्थ अपडेट पर है। उनकी सेहत में सुधार, इलाज की स्थिति और डिस्चार्ज को लेकर नई जानकारी मिलने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल सबसे अहम बात यही है कि लालकृष्ण आडवाणी की हालत स्थिर बताई गई है और उनका इलाज जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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