देशभर में मानसून (Monsoon) की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है। जुलाई के मध्य में जहां आमतौर पर कई राज्यों में झमाझम बारिश होती है, वहीं इस बार मौसम ने अलग ही तस्वीर पेश की है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 11 साल में तीसरी बार ऐसा Monsoon Break देखने को मिल रहा है। इसका सीधा असर उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों में दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। दूसरी ओर, पूर्वोत्तर राज्यों में लगातार बारिश और भूस्खलन से हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। अरुणाचल प्रदेश में ITBP के 15 जवान खराब मौसम के कारण दुर्गम इलाके में फंस गए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए राहत अभियान जारी है। क्या है Monsoon Break और क्यों हुआ? Monsoon Break वह स्थिति होती है, जब कुछ दिनों के लिए मानसून की सक्रियता अचानक कम हो जाती है। इस दौरान उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश लगभग रुक जाती है, जबकि पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्रों में बारिश जारी रह सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस समय मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक गई है। साथ ही बंगाल की खाड़ी में कोई मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम सक्रिय नहीं होने के कारण बारिश का सिलसिला कमजोर पड़ गया है। UP और MP में बारिश की कमी बढ़ी चिंता मानसून की सुस्ती का सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ने लगा है। बारिश कम होने से धान, सोयाबीन, मक्का और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है। कई जिलों में किसान सिंचाई के वैकल्पिक साधनों का सहारा लेने लगे हैं। राजस्थान, दिल्ली और आसपास के राज्यों में बढ़ी उमस मानसून कमजोर पड़ने का असर राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में भी महसूस किया जा रहा है। इन इलाकों में दिन का तापमान बढ़ा है और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक इन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना कम रहेगी। Arunachal Pradesh में ITBP के जवान फंसे पूर्वोत्तर भारत में स्थिति बिल्कुल अलग है। अरुणाचल प्रदेश में लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण कई सड़कें बंद हो गई हैं। इसी बीच ITBP के 15 जवान एक दुर्गम इलाके में फंस गए। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। मौसम साफ होते ही जवानों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश तेज की जाएगी। किसानों की बढ़ी चिंता जुलाई का महीना खरीफ फसलों के लिए बेहद अहम माना जाता है। ऐसे समय में बारिश कम होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं होती, तो कई क्षेत्रों में फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार सिंचाई और फसल प्रबंधन की योजना बनाएं। IMD ने क्या कहा? भारतीय मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर सिस्टम बनने की संभावना है। यदि यह सिस्टम मजबूत होता है, तो उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मानसून फिर से सक्रिय हो सकता है और अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। हालांकि, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में फिलहाल बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!