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केतन अग्रवाल हत्याकांड: क्या कोर्ट में साबित हो पाएगा सिया गोयल पर हत्या का आरोप? जानिए पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती

नेशनल डेस्क | DeshHarpal पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस का दावा है कि सिया गोयल ने अपने कथित बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर मंगेतर केतन अग्रवाल की हत्या की। आरोप है कि दोनों ने लोहगढ़ किले से धक्का देकर केतन की जान ले ली क्योंकि सिया शादी नहीं करना चाहती थी। हालांकि, पुलिस की यह थ्योरी अदालत में साबित करना आसान नहीं होगा। कानून के जानकारों के अनुसार, केवल संदेह या परिस्थितियां पर्याप्त नहीं हैं। अभियोजन पक्ष को ठोस साक्ष्यों के जरिए यह साबित करना होगा कि केतन की मौत हादसा नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी। पुलिस ने किन आधारों पर बनाया आरोपी? जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे तथ्य मिले, जिनके आधार पर सिया गोयल और चेतन चौधरी को आरोपी बनाया गया। परिवार के शक से बदली जांच की दिशा शुरुआत में पुलिस इस घटना को हादसा मान रही थी। लेकिन अंतिम संस्कार के बाद केतन के परिजनों ने सिया के बदलते बयानों और व्यवहार पर सवाल उठाए। इसके बाद पुलिस ने हत्या के एंगल से जांच शुरू की। सिया के बदलते बयान पुलिस के मुताबिक, सिया ने घटना को लेकर अलग-अलग बयान दिए। पहले उसने कहा कि तेज हवा के कारण केतन गिर गए, बाद में पानी की बोतल देते समय संतुलन बिगड़ने की बात कही। दोनों बयानों में विरोधाभास मिलने पर पुलिस का शक गहरा गया। CCTV में संदिग्ध युवक लोहगढ़ किले के सीसीटीवी फुटेज में एक युवक हुडी पहनकर सिया और केतन के आसपास दिखाई दिया। पुलिस का दावा है कि यह युवक चेतन चौधरी था, जो अपनी पहचान छिपाने की कोशिश कर रहा था। मोबाइल लोकेशन और इंटरनेट रिकॉर्ड जांच में सामने आया कि घटना वाले दिन चेतन के मोबाइल का इंटरनेट कई घंटों तक बंद था। वहीं, उसके सहयोगी के मोबाइल की लोकेशन लोहगढ़ किले के आसपास मिली। पुलिस का दावा है कि चेतन मौके पर मौजूद था। हजारों कॉल्स का रिकॉर्ड पुलिस के अनुसार, सिया और चेतन के बीच जनवरी से घटना वाले दिन तक 2,000 से अधिक कॉल्स और करीब 338 घंटे बातचीत हुई थी। इसे पुलिस दोनों के करीबी रिश्ते और कथित साजिश का अहम आधार मान रही है। कोर्ट में क्या साबित करना होगा? कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि हत्या के मामले में केवल शक या परिस्थितियां पर्याप्त नहीं होतीं। यदि प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं हैं, तो पुलिस को परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की ऐसी मजबूत श्रृंखला पेश करनी होगी, जिससे यह साबित हो जाए कि केतन की मौत केवल हत्या से ही संभव थी और किसी अन्य संभावना की गुंजाइश नहीं बचती। इसके लिए पुलिस को यह साबित करना होगा कि— क्या कबूलनामा पर्याप्त होगा? पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपियों ने पूछताछ में हत्या की बात स्वीकार की है। लेकिन भारतीय कानून के तहत पुलिस के सामने दिया गया कबूलनामा अपने आप में अदालत में स्वीकार्य साक्ष्य नहीं माना जाता। इसलिए अभियोजन पक्ष को स्वतंत्र और विश्वसनीय सबूत पेश करने होंगे। बचाव पक्ष को कैसे मिल सकता है फायदा? कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि अभियोजन की साक्ष्य श्रृंखला में एक भी महत्वपूर्ण कड़ी कमजोर पड़ती है या घटना की कोई वैकल्पिक संभावना सामने आती है, तो आरोपियों को संदेह का लाभ मिल सकता है। बचाव पक्ष यह दलील दे सकता है कि— ऐसी स्थिति में अदालत आरोपियों को दोषमुक्त भी कर सकती है। आरुषि-हेमराज केस जैसी चुनौती कानूनी जानकार इस मामले की तुलना आरुषि-हेमराज हत्याकांड से भी कर रहे हैं। उस मामले में भी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर निचली अदालत ने सजा सुनाई थी, लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने पर्याप्त सबूत नहीं मिलने पर आरोपियों को बरी कर दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि केतन अग्रवाल हत्याकांड में भी अंतिम फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि पुलिस अपने दावों को अदालत में कितनी मजबूती से साबित कर पाती है। अधिक राष्ट्रीय समाचार और एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए विजिट करें deshharpal.com
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One Nation One Election

One Nation One Election Bill: 2029 में बदल सकती है चुनाव व्यवस्था, संसदीय समिति अध्यक्ष बोले- जनता का मिला समर्थन

भारत की चुनाव व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी के बीच One Nation One Election (एक देश, एक चुनाव) को लेकर चर्चा तेज हो गई है। संसदीय समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा है कि अगर सभी जरूरी प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो 2029 के लोकसभा चुनाव से इस व्यवस्था को लागू किया जा सकता है। इस प्रस्ताव को लेकर संसदीय समिति लगातार काम कर रही है और देश के अलग-अलग राज्यों में विशेषज्ञों, राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों से बातचीत कर रही है। समिति का मकसद एक ऐसी चुनाव प्रणाली तैयार करना है, जिसमें लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की संभावनाओं का अध्ययन किया जा सके। 99% लोगों ने किया One Nation One Election का समर्थन JPC अध्यक्ष पीपी चौधरी ने दावा किया कि समिति द्वारा किए गए संवाद और सुझाव प्रक्रिया के दौरान करीब 99 प्रतिशत लोगों ने One Nation One Election के विचार का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि देश में बार-बार चुनाव होने से प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण कई बार सरकारों के विकास कार्य और योजनाएं प्रभावित होती हैं। राज्यों से ली जा रही राय, विशेषज्ञों से हो रही चर्चा ‘एक देश, एक चुनाव’ को लागू करने से पहले राज्यों की भूमिका और उनकी चिंताओं को समझना जरूरी माना जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए संसदीय समिति राज्यों के विशेषज्ञों और अलग-अलग क्षेत्रों के जानकारों से सुझाव ले रही है। समिति चुनाव प्रक्रिया, संविधान में संभावित बदलाव, कानूनी चुनौतियों और चुनाव प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर रही है। क्या है One Nation One Election का पूरा विचार? One Nation One Election का मतलब है कि पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं। अभी भारत में अलग-अलग राज्यों में विधानसभा चुनाव अलग समय पर होते हैं, जबकि लोकसभा चुनाव अपने तय समय पर होते हैं। इस प्रस्ताव के तहत चुनावों को एक निश्चित चक्र में कराने की योजना है, जिससे बार-बार चुनाव कराने की जरूरत कम हो सकती है। एक साथ चुनाव कराने के क्या फायदे बताए जा रहे हैं? इस व्यवस्था के समर्थकों का मानना है कि इससे कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। समर्थकों का तर्क है कि लगातार चुनावी माहौल रहने से प्रशासनिक काम प्रभावित होते हैं, इसलिए एक साथ चुनाव व्यवस्था ज्यादा प्रभावी साबित हो सकती है। विपक्ष और विशेषज्ञों की अलग राय हालांकि, One Nation One Election को लेकर सभी की राय एक जैसी नहीं है। कुछ विपक्षी दल और विशेषज्ञ इसके कुछ पहलुओं पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि एक साथ चुनाव होने से राष्ट्रीय मुद्दे ज्यादा प्रभावी हो सकते हैं और स्थानीय मुद्दों को पर्याप्त महत्व नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा राज्यों की स्वायत्तता और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा जारी है। 2029 में लागू होने की उम्मीद क्यों? संसदीय समिति फिलहाल सभी पक्षों से राय जुटाने और रिपोर्ट तैयार करने में लगी है। इसके बाद ही आगे की संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी। अगर सरकार और संसद स्तर पर सभी जरूरी मंजूरी मिल जाती है, तो 2029 का लोकसभा चुनाव भारत में नई चुनाव व्यवस्था की शुरुआत का आधार बन सकता है। One Nation One Election सिर्फ चुनाव कराने का तरीका बदलने का प्रस्ताव नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। आने वाले समय में संसदीय समिति की रिपोर्ट और सरकार के फैसले इस दिशा को तय करेंगे।
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INS Mahendragiri

INS Mahendragiri: Project 17A का स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट Navy में शामिल, समुद्री सुरक्षा होगी और मजबूत

भारत ने समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया अत्याधुनिक स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS Mahendragiri अब आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना का हिस्सा बन गया है। इस युद्धपोत के शामिल होने से न सिर्फ Indian Navy की ताकत बढ़ेगी, बल्कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी नई मजबूती मिलेगी। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि INS महेंद्रगिरि केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी क्षमता, स्वदेशी निर्माण और आत्मनिर्भर रक्षा उद्योग की सफलता का प्रतीक है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में भारत रक्षा निर्माण के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी मजबूत पहचान बनाएगा। INS Mahendragiri क्यों है इतना खास? INS Mahendragiri को भारतीय नौसेना के Project 17A के तहत विकसित किया गया है। यह नई पीढ़ी का स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे आधुनिक समुद्री युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टेल्थ तकनीक है, जिससे दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा यह जहाज हवा, समुद्र और पनडुब्बियों से होने वाले खतरों का मुकाबला करने में सक्षम है। आधुनिक तकनीक से लैस है युद्धपोत INS Mahendragiri को कई अत्याधुनिक हथियारों और सुरक्षा प्रणालियों से सुसज्जित किया गया है। इसमें आधुनिक मिसाइल सिस्टम, एडवांस रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और लंबी दूरी तक निगरानी करने वाले सेंसर लगाए गए हैं। युद्धपोत पर हेलीकॉप्टर संचालन की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे समुद्र में निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान और एंटी-सबमरीन ऑपरेशन अधिक प्रभावी ढंग से किए जा सकेंगे। Rajnath Singh ने गिनाईं आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धियां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत अब रक्षा जरूरतों के लिए केवल आयात पर निर्भर रहने वाला देश नहीं रहा। सरकार की नीतियों और भारतीय रक्षा उद्योग के प्रयासों से आज देश में आधुनिक युद्धपोत, मिसाइल, हथियार और रक्षा उपकरण तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वदेशी रक्षा उत्पादन बढ़ने से देश की सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। इसके अलावा भारत का रक्षा निर्यात भी लगातार बढ़ रहा है, जो देश की बढ़ती तकनीकी क्षमता का प्रमाण है। Indian Navy की ताकत में होगा बड़ा इजाफा विशेषज्ञों का मानना है कि INS Mahendragiri के शामिल होने से भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता पहले से अधिक मजबूत होगी। यह युद्धपोत हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री निगरानी, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा, समुद्री डकैती रोकने, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में अहम भूमिका निभाएगा। भारत जिस तेजी से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी मजबूत कर रहा है, उसमें ऐसे आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। Project 17A से मिल रही नई मजबूती Project 17A भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण की सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। इसके तहत तैयार किए जा रहे अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट भविष्य की समुद्री चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं। INS Mahendragiri इसी श्रृंखला का एक अहम युद्धपोत है, जो भारतीय नौसेना को नई तकनीक और बेहतर युद्ध क्षमता प्रदान करेगा। भारत बन रहा है रक्षा निर्माण का वैश्विक केंद्र पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेज़ी से प्रगति की है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों के कारण देश में स्वदेशी रक्षा उपकरणों का निर्माण लगातार बढ़ा है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक रक्षा निर्माण और निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाना है, जिसमें नौसेना के लिए तैयार किए जा रहे आधुनिक युद्धपोत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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Delhi

Red Fort Bomb Threat: ईमेल से मिली धमकी के बाद लाल किले में सघन तलाशी, Delhi Police जांच में जुटी

देश की राजधानी Delhi के ऐतिहासिक लाल किले (Red Fort) को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। शनिवार को एक धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद दिल्ली पुलिस, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वॉड और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। पूरे लाल किला परिसर की गहन तलाशी ली गई। हालांकि शुरुआती जांच में कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, लेकिन मामले को गंभीर मानते हुए जांच कई स्तरों पर जारी है। इस घटना के बाद न केवल दिल्ली बल्कि मुंबई सहित अन्य सुरक्षा एजेंसियों को भी अलर्ट कर दिया गया है। साइबर एक्सपर्ट धमकी भेजने वाले तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। ईमेल से मिली धमकी, तुरंत हरकत में आई पुलिस जानकारी के मुताबिक, लाल किले को उड़ाने की धमकी ईमेल के जरिए दी गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस कंट्रोल रूम सक्रिय हुआ और कुछ ही मिनटों में सुरक्षा बलों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड ने लाल किले के हर हिस्से की बारीकी से जांच की। कई घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन में किसी तरह का विस्फोटक या संदिग्ध सामान नहीं मिला। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती गई। मुंबई तक पहुंची जांच, Cyber Team कर रही पड़ताल धमकी भरे ईमेल की तकनीकी जांच के दौरान कुछ डिजिटल सुराग मिलने के बाद मुंबई पुलिस को भी सतर्क किया गया है। साइबर सेल ईमेल की आईपी डिटेल, सर्वर और अन्य तकनीकी जानकारियों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ईमेल किसी शरारती तत्व ने भेजा है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है। फिलहाल सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। Red Fort की सुरक्षा पहले से ज्यादा कड़ी घटना के बाद लाल किले की सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है। प्रवेश द्वारों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। आने वाले पर्यटकों की जांच पहले से अधिक सख्ती के साथ की जा रही है। वहीं आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी बढ़ा दी गई है। इसके अलावा दिल्ली के अन्य संवेदनशील स्थानों और प्रमुख सरकारी इमारतों की सुरक्षा की भी समीक्षा की जा रही है। पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी धमकियां बीते कुछ वर्षों में देश के कई एयरपोर्ट, स्कूल, अस्पताल, धार्मिक स्थलों और सरकारी संस्थानों को ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। अधिकांश मामलों में ये धमकियां फर्जी निकलीं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां हर सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करती हैं ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते टाला जा सके। पुलिस ने लोगों से की अपील दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। यदि किसी को कोई संदिग्ध वस्तु, लावारिस बैग या संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है तो उसकी जानकारी तुरंत पुलिस को देने के लिए कहा गया है। फिलहाल लाल किले पर स्थिति पूरी तरह सामान्य है। जांच एजेंसियां धमकी भरे ईमेल की असली सच्चाई सामने लाने और जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचने के लिए लगातार काम कर रही हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nripendra Mishra

Ayodhya राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर Nripendra Mishra हुए भावुक, SP के पोस्टर से तेज हुई सियासत

अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला अब धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा (Nripendra Mishra) ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे “राम मंदिर पर कलंक” बताया। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी (SP) ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार और मंदिर प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए पोस्टर जारी किया, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। नृपेंद्र मिश्रा ने जताई नाराजगी राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी इस तरह की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल धन की चोरी का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, “मुझे इस घटना से छोटापन महसूस हो रहा है। यह राम मंदिर के लिए एक कलंक है।” उनके मुताबिक, मंदिर में आने वाला हर श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान देता है। ऐसे में यदि उस दान के साथ किसी भी तरह की अनियमितता होती है, तो इससे लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। क्या है पूरा मामला? राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे को लेकर कथित गड़बड़ी की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद मंदिर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी। शुरुआती जांच में कुछ कर्मचारियों से पूछताछ की गई है और उपलब्ध रिकॉर्ड तथा अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। हालांकि, अभी जांच जारी है और किसी भी व्यक्ति को आधिकारिक तौर पर दोषी घोषित नहीं किया गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। SP ने पोस्टर जारी कर सरकार को घेरा इस मामले के सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी ने सोशल मीडिया और पोस्टर के जरिए भाजपा सरकार पर निशाना साधा। पार्टी के पोस्टर पर लिखा था— “राम नाम जपना, चढ़ाया दान अपना।” इस पोस्टर के जरिए सपा ने मंदिर में दान की सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल उठाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। पोस्टर सामने आने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया। भाजपा का जवाब भाजपा नेताओं का कहना है कि सरकार इस मामले को पूरी गंभीरता से देख रही है। उनका दावा है कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पार्टी ने विपक्ष पर धार्मिक मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप भी लगाया। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है मामला राम मंदिर देश और विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी स्वाभाविक रूप से लोगों की चिंता बढ़ाती है। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर में दान पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ दिया जाता है, इसलिए उसकी सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना मंदिर प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। जांच रिपोर्ट का इंतजार फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है। मंदिर ट्रस्ट और प्रशासन का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर जांच के नतीजों पर है। यह मामला न केवल मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास और राजनीतिक माहौल, दोनों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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FTA

India-New Zealand Relations: FTA को मिली रफ्तार, PM Modi बोले- भारत में होगा ₹1.72 लाख करोड़ का निवेश

भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यूजीलैंड दौरे के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, तकनीक और सुरक्षा जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि Free Trade Agreement (FTA) को आगे बढ़ाने की दिशा में बनी सहमति और 18 महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर मानी जा रही है। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि न्यूजीलैंड भारत में करीब ₹1.72 लाख करोड़ का निवेश करेगा। माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती मिलेगी और भारत में रोजगार व निवेश के नए अवसर भी बनेंगे। FTA पर बढ़ी रफ्तार, व्यापार को मिलेगा फायदा भारत और न्यूजीलैंड पिछले काफी समय से Free Trade Agreement (FTA) पर बातचीत कर रहे हैं। अब दोनों देशों ने इस प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। अगर यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार पहले से अधिक आसान हो जाएगा। कई उत्पादों पर आयात-निर्यात शुल्क कम होने की संभावना है, जिससे भारतीय उद्योग, कृषि उत्पाद और सेवा क्षेत्र को भी फायदा मिल सकता है। 18 बड़े फैसलों में किन क्षेत्रों पर रहा फोकस? प्रधानमंत्री मोदी और न्यूजीलैंड के नेतृत्व के बीच हुई बैठक में कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। इनमें शामिल हैं— इन समझौतों का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना भी है। ₹1.72 लाख करोड़ का Investment क्यों है खास? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि न्यूजीलैंड भारत में लगभग ₹1.72 लाख करोड़ का निवेश करेगा। यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक तकनीक, ऊर्जा, कृषि और अन्य विकास परियोजनाओं में किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे विदेशी निवेश बढ़ेगा, नए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। Auckland में भारतीय समुदाय को करेंगे संबोधित दौरे के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के Auckland में भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में करीब 40 हजार लोगों के पहुंचने की संभावना है। भारतीय समुदाय लंबे समय से इस कार्यक्रम का इंतजार कर रहा है। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी भारत-न्यूजीलैंड संबंधों, प्रवासी भारतीयों की भूमिका और भविष्य की साझेदारी पर विस्तार से बात कर सकते हैं। भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा? न्यूजीलैंड के साथ मजबूत होते रिश्ते भारत की आर्थिक और रणनीतिक नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, व्यापार का दायरा विस्तार करने और विदेशी निवेश आकर्षित करने की दिशा में यह यात्रा एक अहम कदम मानी जा रही है। यदि आने वाले समय में India-New Zealand FTA पर अंतिम मुहर लगती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी और निवेश का दायरा भी बढ़ेगा। इससे भारतीय कंपनियों, किसानों, स्टार्टअप और सेवा क्षेत्र को नए अवसर मिल सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Monsoon

India Monsoon Update: बारिश से कई राज्यों में तबाही, UP हादसे के बाद Uttarakhand-Himachal में सड़कें ठप

देशभर में मानसून (Monsoon) अब राहत से ज्यादा मुसीबत बनता नजर आ रहा है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मिजोरम समेत कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कहीं तेज बहाव में वाहन बह रहे हैं तो कहीं भूस्खलन से सड़कें बंद हो गई हैं। पिछले तीन दिनों में बारिश से जुड़े अलग-अलग हादसों में कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है। कई इलाकों में बचाव अभियान लगातार जारी है, जबकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी भारी बारिश की चेतावनी दी है। UP में उफनते पानी में बह गई कार उत्तर प्रदेश में तेज बारिश के बीच एक दर्दनाक हादसा सामने आया। उफनते नाले पर बने पुल को पार करते समय एक कार अचानक तेज बहाव की चपेट में आ गई और देखते ही देखते पानी में बह गई। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और राहत दल को सूचना दी। बचाव टीमों ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के कई जिलों में नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्रशासन ने लोगों से जलभराव वाले क्षेत्रों और तेज बहाव वाले पुलों से दूर रहने की अपील की है। Uttarakhand और Himachal में बारिश बनी बड़ी चुनौती पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने हालात बेहद कठिन बना दिए हैं। भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाओं के कारण दोनों राज्यों में कुल 438 सड़कें बंद हैं। कई गांवों का जिला मुख्यालयों से संपर्क टूट गया है और लोगों को जरूरी सामान पहुंचाने में भी परेशानी हो रही है। राज्य सरकारें युद्ध स्तर पर सड़कें खोलने का प्रयास कर रही हैं। जेसीबी मशीनों और राहत दलों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश राहत कार्यों को प्रभावित कर रही है। Mizoram में चार दिनों से फंसे पर्यटक पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में भी मौसम ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार बारिश और भूस्खलन के चलते कई प्रमुख सड़कें बंद हो गई हैं। इसके कारण बड़ी संख्या में पर्यटक पिछले चार दिनों से अलग-अलग इलाकों में फंसे हुए हैं। स्थानीय प्रशासन ने राहत अभियान तेज कर दिया है। फंसे हुए लोगों तक भोजन, पीने का पानी और अन्य जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है, जबकि सुरक्षित रास्ते तैयार करने का काम भी जारी है। तीन दिन में 15 लोगों की मौत देश के विभिन्न राज्यों में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से जुड़े हादसों में पिछले तीन दिनों के दौरान कम से कम 15 लोगों की जान जा चुकी है। कई लोग घायल हुए हैं, जबकि कुछ अब भी लापता बताए जा रहे हैं। प्रशासन और आपदा राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं। IMD का अलर्ट, अगले कुछ दिन रहेंगे भारी भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ (Flash Flood), भूस्खलन और जलभराव की स्थिति बन सकती है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए और नदी-नालों के किनारे जाने से परहेज करना चाहिए। प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना इस समय सबसे सुरक्षित विकल्प है। राहत कार्य तेज, लोगों से सतर्क रहने की अपील NDRF, SDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार राहत एवं बचाव कार्य कर रही हैं। बंद सड़कों को खोलने, फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरतमंद परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराने का काम जारी है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि मौसम की ताजा जानकारी पर नजर रखें, अफवाहों से बचें और खराब मौसम के दौरान बिना जरूरी कारण यात्रा न करें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव साबित होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

India New Zealand FTA: PM Modi के दौरे से व्यापारिक रिश्तों को नई उड़ान, Auckland Speech होगा खास

PM Modi की विदेश यात्रा इस समय सुर्खियों में है। ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद पीएम मोदी अब न्यूजीलैंड पहुंच चुके हैं, जहां उनका जोर दोनों देशों के बीच India-New Zealand Relations को और मजबूत करने पर रहेगा। इस दौरे में सबसे अहम मुद्दा Free Trade Agreement (FTA) Deal है, जिसे लेकर दोनों देशों के बीच अंतिम चरण की बातचीत होने की उम्मीद है। पीएम मोदी के न्यूजीलैंड दौरे को आर्थिक, कूटनीतिक और प्रवासी भारतीयों से जुड़ाव के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ऑकलैंड में भारतीय समुदाय के एक बड़े कार्यक्रम को भी संबोधित करेंगे, जिसमें करीब 40 हजार भारतीयों के शामिल होने की संभावना है। FTA Deal से बढ़ेंगे व्यापार के नए अवसर भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित FTA Agreement दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा दे सकता है। इस समझौते का उद्देश्य व्यापार को आसान बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और दोनों देशों के कारोबारियों के लिए नए अवसर तैयार करना है। FTA लागू होने के बाद भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले कई उत्पादों और सेवाओं के लिए बाजार में पहुंच बेहतर हो सकती है। वहीं न्यूजीलैंड की कंपनियों के लिए भी भारत के बड़े बाजार में निवेश के नए रास्ते खुल सकते हैं। PM Modi Auckland Speech पर भारतीय समुदाय की नजर प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्राओं में प्रवासी भारतीयों से मुलाकात हमेशा खास हिस्सा रही है। न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में होने वाले कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग पीएम मोदी का स्वागत करेंगे। भारतीय समुदाय के साथ यह संवाद दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर मजबूत रिश्तों को दिखाता है। विदेशों में बसे भारतीय भारत की संस्कृति, व्यापार और कूटनीति को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। India-New Zealand Partnership में नई उम्मीदें पीएम मोदी के इस दौरे में व्यापार के अलावा शिक्षा, तकनीक, रक्षा सहयोग, पर्यटन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। भारत और न्यूजीलैंड पिछले कई वर्षों से अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देश लोकतांत्रिक मूल्यों और आर्थिक सहयोग के आधार पर साझेदारी को विस्तार देने पर काम कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के बाद न्यूजीलैंड दौरे का क्या है महत्व? प्रधानमंत्री मोदी की ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत अपनी भूमिका को मजबूत करने के साथ-साथ मित्र देशों के साथ आर्थिक साझेदारी बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। न्यूजीलैंड दौरे से दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है। अब सभी की नजर FTA Deal के ऐलान और पीएम मोदी के Auckland Address पर बनी हुई है।
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Bihar

Bihar Government Action: Fake Degree वाले Teachers की बढ़ी मुश्किलें

Bihar में शिक्षक भर्ती से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा विभाग से लेकर शिक्षक समुदाय तक हलचल बढ़ा दी है। फर्जी डिग्री और संदिग्ध प्रमाणपत्रों के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने वाले करीब 3000 शिक्षकों पर अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है। शिक्षा विभाग ने ऐसे शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच तेज कर दी है। अगर जांच में प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षकों की नौकरी खत्म की जा सकती है। इतना ही नहीं, नौकरी के दौरान मिली Salary भी ब्याज सहित वापस लेने की तैयारी की जा रही है। Fake Degree Case में कैसे सामने आया मामला? बिहार में सरकारी शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। इसी दौरान कई शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों में गड़बड़ी सामने आई। कुछ डिग्रियों की मान्यता और सत्यता पर सवाल उठने के बाद विभाग ने विस्तृत जांच शुरू की। जांच में जिन शिक्षकों के दस्तावेज गलत या फर्जी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। नौकरी जाने के साथ Salary Recovery का खतरा सरकार का मानना है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाना एक गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में सिर्फ सेवा समाप्त करना ही नहीं, बल्कि सरकारी धन की वसूली भी की जा सकती है। विभाग की योजना के अनुसार, दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों से नौकरी के दौरान प्राप्त वेतन को ब्याज के साथ वापस लेने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। योग्य उम्मीदवारों के हित में बड़ा कदम शिक्षा विभाग का कहना है कि सरकारी नौकरी में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी पाने वालों की वजह से योग्य अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होते हैं। इस कार्रवाई को शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को साफ और भरोसेमंद बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद होगा अंतिम फैसला फिलहाल सभी संदिग्ध शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया जारी है। अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और नियमों के आधार पर लिया जाएगा। जिन शिक्षकों के प्रमाणपत्र सही पाए जाएंगे, उन्हें राहत मिल सकती है, लेकिन फर्जी दस्तावेज साबित होने पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। बिहार में 3000 शिक्षकों पर होने वाली इस कार्रवाई ने शिक्षा विभाग में नई चर्चा शुरू कर दी है। अब सबकी नजर जांच के अंतिम परिणाम और सरकार के अगले आदेश पर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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दवाओं

Health Update: Alcohol वाली दवाओं पर सरकार सख्त, 12% से ज्यादा Content पर बिना Prescription बिक्री बंद

दवाओं की बिक्री को लेकर सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब 12 प्रतिशत से ज्यादा Alcohol Content वाली दवाएं बिना डॉक्टर के Prescription के नहीं खरीदी जा सकेंगी। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर Cough Syrup, Tonic और अन्य Liquid Medicines पर देखने को मिलेगा, जिनमें अल्कोहल की मात्रा मौजूद होती है। नए नियमों के बाद मेडिकल स्टोर संचालकों के लिए भी जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं। अब उन्हें ऐसी दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा और जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराना होगा। Cough Syrup और Tonic पर बढ़ेगी निगरानी कई कफ सिरप और टॉनिक में अल्कोहल का इस्तेमाल दवा को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किया जाता है। हालांकि, इन दवाओं के गलत इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए सरकार ने इनकी बिक्री पर निगरानी बढ़ाने का फैसला लिया है। अब मेडिकल दुकानदारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 12% से अधिक Alcohol वाली Medicines केवल वैध डॉक्टर की पर्ची के आधार पर ही बेची जाएं। Medical Stores को रखना होगा 3 साल का Record नए नियमों के तहत मेडिकल स्टोर संचालकों को अल्कोहल युक्त दवाओं की खरीद और बिक्री से जुड़ा रिकॉर्ड कम से कम 3 साल तक सुरक्षित रखना होगा। इस रिकॉर्ड में दवा की बिक्री, ग्राहक से जुड़ी जानकारी और Prescription से संबंधित दस्तावेज शामिल हो सकते हैं। जांच के दौरान अगर संबंधित विभाग रिकॉर्ड मांगता है तो दुकानदारों को इसे उपलब्ध कराना होगा। मरीजों के लिए क्या बदलेगा? आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि सभी दवाओं की खरीद पर नया नियम लागू नहीं होगा। यह नियम केवल उन्हीं दवाओं पर लागू होगा जिनमें अल्कोहल की मात्रा तय सीमा से ज्यादा है। अगर किसी मरीज को ऐसी दवा की जरूरत होगी तो उसे डॉक्टर की सलाह और Prescription लेना जरूरी हो सकता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि दवा का इस्तेमाल सही कारण और सही मात्रा में किया जाए। सरकार ने क्यों लिया यह फैसला? सरकार का उद्देश्य दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकना और Medicine Sale System को ज्यादा सुरक्षित बनाना है। खासतौर पर अल्कोहल वाली दवाओं को लेकर समय-समय पर उठने वाली चिंताओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं की बिक्री में सख्ती से मरीजों को सुरक्षित इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और बिना जरूरत दवाओं के इस्तेमाल पर रोक लग सकेगी। Pharmacy Sector पर भी पड़ेगा असर नए नियमों के बाद Pharmacy Sector में निगरानी और बढ़ जाएगी। मेडिकल स्टोर्स को अब हर बिक्री में नियमों का पालन करना होगा। बिना Prescription के ऐसी दवाएं बेचने पर दुकानदारों को कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर, 12% से ज्यादा Alcohol Content वाली Medicines को लेकर सरकार का यह नया नियम मरीजों की सुरक्षा और दवाओं के सही इस्तेमाल की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस लाएगी अविश्वास प्रस्ताव, 14 जुलाई को सरकार को घेरेगा विपक्ष

छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस सरकार के खिलाफ बड़ा राजनीतिक कदम उठाने जा रही है। पार्टी ने तय किया है कि 14 जुलाई को विधानसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। रविवार को नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के सरकारी निवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनी। बैठक के बाद महंत ने कहा कि कांग्रेस को मौजूदा सरकार पर भरोसा नहीं है, इसलिए सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। करीब दो घंटे चली कांग्रेस विधायक दल की बैठक नेता प्रतिपक्ष के सरकारी बंगले पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक करीब दो घंटे तक चली। इससे पहले लगभग डेढ़ घंटे तक पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने विधानसभा सत्र की रणनीति पर अलग से चर्चा की। इसके बाद विधायक दल की बैठक में सरकार को घेरने की अंतिम रणनीति तय की गई। चरणदास महंत बोले- सरकार के वादे झूठे साबित हुए बैठक के बाद चरणदास महंत ने कहा कि कांग्रेस का सरकार पर से विश्वास उठ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने वादे पूरे करने में विफल रही है। प्रदेश में भ्रष्टाचार बढ़ा है और आम जनता बिजली संकट, महंगाई, किसानों की समस्याओं तथा कानून-व्यवस्था जैसे कई मुद्दों से परेशान है। इन्हीं मुद्दों को लेकर कांग्रेस सदन में सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है। नकटी गांव के मुद्दे पर भी होगा स्थगन प्रस्ताव कांग्रेस विधायक दल की बैठक में नकटी गांव का मामला भी प्रमुखता से उठा। पार्टी ने इस मुद्दे पर विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। चरणदास महंत ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को पूरी मजबूती के साथ सदन में उठाएगी। जरूरत पड़ने पर सदन के भीतर विरोध प्रदर्शन भी किया जाएगा। सदन के साथ सड़क पर भी आंदोलन नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधानसभा का मानसून सत्र भले ही केवल पांच दिनों का हो, लेकिन कांग्रेस सरकार को हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर घेरने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी केवल सदन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जनता के मुद्दों को लेकर सड़क पर भी संघर्ष जारी रखेगी। सरकार देगी 1033 सवालों के जवाब इस बार विधानसभा सचिवालय में कुल 1033 प्रश्न लगाए गए हैं। इनमें 36 विधायकों ने नियमों के तहत अधिकतम 20-20 प्रश्न लगाए हैं। दिलचस्प बात यह है कि सवाल पूछने वालों में विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायक भी शामिल हैं। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान कई अहम मुद्दों पर सरकार को जवाब देना होगा। क्या होता है अविश्वास प्रस्ताव? अविश्वास प्रस्ताव किसी एक मंत्री के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी सरकार के खिलाफ लाया जाता है। विपक्ष सरकार की नीतियों, फैसलों या जनहित के मुद्दों को आधार बनाकर यह प्रस्ताव पेश करता है। यदि प्रस्ताव स्वीकार होता है तो सदन में सरकार के कामकाज पर विस्तृत चर्चा होती है। इसके बाद मतदान कराया जाता है, जिससे यह तय होता है कि सरकार के पास सदन का बहुमत और विश्वास कायम है या नहीं। छत्तीसगढ़ और देशभर की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

भोपाल में डेढ़ साल के मासूम का अपहरण, बोरे में भरकर ले जा रहा था पड़ोसी, लोगों ने बचाई जान

राजधानी भोपाल के बागसेवनिया थाना क्षेत्र में पुरानी रंजिश के चलते एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। पड़ोसी युवक ने बदला लेने की नीयत से डेढ़ साल के मासूम बच्चे का अपहरण कर उसे बोरे में भर लिया। हालांकि, बच्चे के रोने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोगों ने समय रहते उसे बचा लिया। घटना के बाद लोगों ने आरोपी को पकड़कर उसकी पिटाई की और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। घर के बाहर खेल रहे बच्चे को उठाया पुलिस के मुताबिक, बागमुगालिया निवासी रश्मि अहिरवार (27) अपने दो बच्चों और सास-ससुर के साथ रहती हैं। उनके पति का पहले ही निधन हो चुका है। शनिवार सुबह उनका डेढ़ वर्षीय बेटा घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला अरुण वहां पहुंचा और बच्चे को उठाकर एक बोरे में भर लिया। इसके बाद वह मासूम को लेकर वहां से निकलने लगा। बच्चे के रोने से खुली साजिश रास्ते में बोरे के अंदर से बच्चे के रोने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोगों को शक हुआ। लोगों ने आरोपी को रोककर बोरा खुलवाया तो उसके अंदर मासूम सुरक्षित मिला। यह देखते ही लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया और उसकी जमकर पिटाई कर दी। बाद में पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया। पुरानी रंजिश के चलते रची थी साजिश पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी बच्चे की मां से पुरानी रंजिश थी। इसी दुश्मनी का बदला लेने के लिए उसने मासूम का अपहरण करने की योजना बनाई थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपहरण सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच जारी पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि वारदात में कोई और व्यक्ति शामिल था या नहीं। भोपाल समेत मध्य प्रदेश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

मध्यप्रदेश पुलिस में 168 अधिकारियों को मिला प्रमोशन, सूबेदार और कार्यवाहक RI बने रक्षित निरीक्षक

मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे अधिकारियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश के 168 सूबेदार और कार्यवाहक रक्षित निरीक्षकों (RI) को पदोन्नत कर नियमित रक्षित निरीक्षक (RI) बना दिया है। पुलिस महानिरीक्षक (प्रशासन) हरिनारायणाचारी मिश्र द्वारा जारी आदेश के बाद यह पदोन्नति लागू कर दी गई है। इससे प्रदेशभर के पुलिस अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है। GAD के निर्देश के बाद शुरू हुई प्रक्रिया यह पदोन्नति प्रक्रिया 30 जून 2026 को मध्यप्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) द्वारा जारी पत्र और ‘मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025’ के तहत शुरू की गई। आदेश के अनुसार, सभी पदोन्नत अधिकारियों को फिलहाल रक्षित निरीक्षक के रिक्त पदों पर अगले आदेश तक अस्थायी रूप से पदस्थ किया गया है। मिलेगा लेवल-10 का वेतनमान प्रमोशन पाने वाले अधिकारियों को मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम-2017 के तहत पे मैट्रिक्स लेवल-10 का लाभ मिलेगा। यह वेतनमान 9300-34800 रुपये + 4200 रुपये ग्रेड पे के अनुसार कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगा। इन मामलों में नहीं मिलेगी कार्यमुक्ति पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि यह सभी पदोन्नतियां सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका (SLP) क्रमांक 13954/2016 तथा भविष्य में न्यायालयों द्वारा दिए जाने वाले फैसलों के अधीन रहेंगी। साथ ही, पदोन्नत अधिकारियों को नियम-13 के तहत वेतन निर्धारण के लिए आदेश जारी होने के एक महीने के भीतर अपना विकल्प प्रस्तुत करना होगा। विभागीय जांच वाले अधिकारियों पर रोक पुलिस मुख्यालय ने सभी इकाई प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि यदि कोई अधिकारी निलंबित है, विभागीय जांच का सामना कर रहा है, किसी आपराधिक मामले में आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल हो चुका है या उसने अनिवार्य प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है, तो उसे किसी भी स्थिति में कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा। मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की रिलीविंग नियमों के अनुसार ही की जाएगी। मध्यप्रदेश और देशभर की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

बिलासपुर में मछली चोरी का वीडियो बनाना पड़ा भारी, चौकीदार की पीट-पीटकर हत्या, 3 लोग हिरासत में

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के रतनपुर थाना क्षेत्र में मछली चोरी का वीडियो बनाने और उसका विरोध करने का मामला खूनी वारदात में बदल गया। शनिवार रात आरोपियों ने पहले चौकीदार की बाइक को स्कॉर्पियो से टक्कर मारी, फिर लाठी-डंडों से हमला कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने मामले में तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। स्कॉर्पियो से बाइक को मारी टक्कर पुलिस के अनुसार, घटना शनिवार रात करीब 9 बजे नवागांव कैंप जाने वाले रास्ते पर हुई। खूंटाघाट बांध में चौकीदारी करने वाले तिरिथराम यादव अपने साथी श्याम सिंह पोर्ते के साथ बाइक से ड्यूटी पर जा रहे थे। इसी दौरान स्कॉर्पियो में सवार आरोपी वहां पहुंचे और उनकी बाइक को टक्कर मार दी, जिससे दोनों सड़क पर गिर गए। खेत तक दौड़ाकर की बेरहमी से पिटाई बाइक से गिरने के बाद आरोपियों ने दोनों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। जान बचाने के लिए तिरिथराम यादव खेत की ओर भागे, लेकिन आरोपी उनके पीछे दौड़ पड़े। आरोपियों ने उन्हें पकड़कर बेरहमी से पीटा। गंभीर चोटों के कारण तिरिथराम यादव की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, श्याम सिंह पोर्ते किसी तरह आरोपियों के चंगुल से बचकर भाग निकले और अपनी जान बचाई। मछली चोरी का विरोध बना हत्या की वजह पुलिस जांच में सामने आया है कि तिरिथराम यादव और श्याम सिंह पोर्ते खूंटाघाट बांध में चौकीदारी करते थे। आरोप है कि गोलू धीवर और अनिश धीवर लंबे समय से वहां अवैध रूप से मछली चोरी करते थे। तिरिथराम ने चोरी का विरोध किया था और आरोपियों का वीडियो भी बनाया था। इसी दौरान आरोपियों ने उनका मोबाइल फोन तोड़ दिया था। तभी से दोनों पक्षों के बीच रंजिश चली आ रही थी। पहले भी दर्ज हुई थी शिकायत रतनपुर थाना प्रभारी नीलेश पांडेय ने बताया कि मोबाइल तोड़ने की शिकायत पहले भी थाने में दर्ज कराई गई थी। उस समय आरोपियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई थी। साथी ने बताई पूरी वारदात घटना के प्रत्यक्षदर्शी श्याम सिंह पोर्ते ने पुलिस को बताया कि शनिवार रात जब वे दोनों नवागांव कैंप की ओर जा रहे थे, तभी गोलू धीवर, अनिश धीवर और उनके अन्य साथी स्कॉर्पियो से पहुंचे। आरोपियों ने जान से मारने की नीयत से बाइक को टक्कर मारी। इसके बाद अनिश ने श्याम सिंह को पकड़ लिया, जबकि गोलू ने डंडे से दोनों पर हमला कर दिया। तिरिथराम जान बचाकर भागे, लेकिन आरोपी उन्हें पकड़कर पीटते रहे, जिससे उनकी मौत हो गई। हत्या का मामला दर्ज, आरोपियों की तलाश जारी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। श्याम सिंह पोर्ते की शिकायत पर रतनपुर थाने में हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि वारदात में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। छत्तीसगढ़ और देशभर की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

भोपाल: थार हटाने के विवाद में किसान को मारी गोली, लाइसेंसी रिवॉल्वर छीनकर किया फायर, 3 आरोपी गिरफ्तार

भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र स्थित सागर रॉयल होम्स में शनिवार देर रात गेट पर खड़ी थार हटाने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। रास्ता साफ करने के लिए हॉर्न बजाने पर तीन युवक भड़क गए। बाद में उन्होंने एक किसान के साथ मारपीट की, उसकी लाइसेंसी रिवॉल्वर छीन ली और दो राउंड फायर कर दिए। फायरिंग में एक गोली किसान के बाएं पैर में घुटने के नीचे लगी, जिससे हड्डी में फ्रैक्चर हो गया। दूसरी गोली निशाने से चूक गई। पुलिस ने हत्या के प्रयास समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। हॉर्न बजाने पर शुरू हुआ विवाद मिसरोद थाना प्रभारी विमलेश राय के अनुसार, सागर रॉयल होम्स निवासी 33 वर्षीय हरीश कुमार राय खेती-किसानी का काम करते हैं। शनिवार देर रात करीब 1 से 2 बजे के बीच वह अपनी स्कॉर्पियो से घर लौट रहे थे। मुख्य गेट पर हर्षित पटेल की थार खड़ी थी, जिसमें हर्षित, अनुभव चौबे और लोकेश रघुवंशी बैठे हुए थे। कई बार हॉर्न बजाने के बाद भी जब रास्ता खाली नहीं हुआ तो हरीश दूसरे गेट से होकर पार्किंग में चले गए। पार्किंग में की मारपीट, फिर छीन ली रिवॉल्वर पुलिस के मुताबिक, तीनों युवक भी थार लेकर पार्किंग में पहुंच गए। वहां गेट पर वाहन खड़ा करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर तीनों युवकों ने गाली-गलौज करते हुए डंडों से हरीश की पिटाई कर दी। इसी दौरान हर्षित ने हरीश की लाइसेंसी रिवॉल्वर छीन ली और दो गोलियां चला दीं। एक गोली हरीश के बाएं पैर में लगी, जबकि दूसरी गोली मिस हो गई। मौके से मिले दो खाली कारतूस घटना की सूचना मिलते ही मिसरोद पुलिस मौके पर पहुंची। एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और वहां से दो खाली कारतूस बरामद किए। घायल हरीश कुमार राय को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। तीनों आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल पुलिस ने मामले में हर्षित पटेल (21), अनुभव चौबे (19) और लोकेश रघुवंशी (24) को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों आरोपी निजी कंपनियों में कार्यरत बताए जा रहे हैं। आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। भोपाल समेत मध्य प्रदेश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com

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