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FlyDubai Flight Case

FlyDubai Flight Case Co-Pilot ने बताई पूरी कहानी, Israel जाने से पहले बनाया था Plan

FlyDubai Flight Case दुबई से इजरायल जा रही FlyDubai की फ्लाइट में हुई घटना की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। मामले में आरोपी ओमानी को-पायलट से पूछताछ के दौरान उसके कथित मकसद और पहले से बनाई गई योजना को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपी ने जांच अधिकारियों के सामने दावा किया कि वह गाजा में इजरायली सैन्य कार्रवाई से नाराज था और बदला लेना चाहता था। उसने कथित तौर पर यह भी कहा कि वह ‘शहीद होकर मरना’ चाहता था। हालांकि, जांच एजेंसियां उसके बयानों की अलग-अलग पहलुओं से पुष्टि कर रही हैं। नौकरी मिलने से पहले ही बना लिया था Plan जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने FlyDubai में नौकरी मिलने से पहले ही इजरायल जाने वाली फ्लाइट को निशाना बनाने की योजना तैयार कर ली थी। बताया गया है कि वह पहले भी इजरायल की यात्रा कर चुका था। जांच एजेंसियां अब उसके पुराने यात्रा रिकॉर्ड और गतिविधियों को खंगाल रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसकी योजना कब बनी और क्या इस दौरान किसी अन्य व्यक्ति या संगठन से उसका संपर्क था। Flight में कैसे बिगड़ी स्थिति? रिपोर्टों के अनुसार, 30 सितंबर को FlyDubai की FZ1073 फ्लाइट दुबई से इजरायल के लिए रवाना हुई थी। उड़ान के दौरान को-पायलट और कैप्टन के बीच हुई घटना के बाद विमान में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालात को देखते हुए विमान का रुख सऊदी अरब के तबुक की ओर किया गया, जहां उसे सुरक्षित उतारा गया। घटना के बाद यात्रियों और क्रू की मदद से स्थिति को नियंत्रित किया गया। पुराने Training Record की भी जांच मामले की जांच अब आरोपी की पुरानी गतिविधियों तक पहुंच गई है। न्यूजीलैंड पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 2018-19 के दौरान वहां Flight Training का एक हिस्सा पूरा किया था। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की एजेंसियां उसके पुराने रिकॉर्ड, वहां रहने के दौरान की गतिविधियों और प्रशिक्षण से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही हैं। अकेले बनाई थी योजना या किसी का था साथ? जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आरोपी ने यह कदम अकेले उठाया या उसे किसी व्यक्ति अथवा संगठन से मदद मिली थी। इसी वजह से उसके संपर्कों, यात्रा इतिहास और दूसरी गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपी के कई दावों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि FlyDubai Flight में हुई इस घटना के पीछे पूरा मकसद क्या था और कथित योजना कितने समय पहले तैयार की गई थी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR

SIR पर बढ़ा विवाद: Form 6 को लेकर BJP और Rahul Gandhi आमने-सामने, Election Commission ने दी सफाई

बिहार में Special Intensive Revision (SIR) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब Form 6 तक पहुंच गया है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में बदलाव के आरोपों पर BJP और कांग्रेस आमने-सामने हैं। राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए हैं, वहीं BJP ने उनके दावों को गलत और भ्रामक बताया है। विवाद उस समय और बढ़ गया जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत ने Form 6 के किसी बदले हुए प्रारूप को मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद यह स्पष्ट करने की बात कही कि फॉर्म में कोई बदलाव हुआ है या नहीं। BJP ने क्या कहा? BJP का कहना है कि Form 6 के मूल फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया है। पार्टी के मुताबिक बिहार में SIR की प्रक्रिया के दौरान Form 6 के साथ एक अतिरिक्त Declaration यानी घोषणा-पत्र लगाया गया था। नेता संबित पात्रा ने राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने Form 6 को गैरकानूनी नहीं बताया है। उनका कहना है कि अदालत ने रिकॉर्ड मंगाकर पूरे मामले को समझने की प्रक्रिया शुरू की है। Election Commission ने भी दी सफाई चुनाव आयोग ने भी Form 6 को लेकर अपना पक्ष रखा है। आयोग के मुताबिक मूल Form 6 में कॉमा या फुल स्टॉप तक कोई बदलाव नहीं किया गया। SIR के दौरान इसके साथ एक अतिरिक्त Declaration जोड़ा गया था। आयोग का कहना है कि यह Declaration बिहार में SIR की विशेष प्रक्रिया से जुड़ा था। सामान्य परिस्थितियों में मतदाता के नाम को जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाला Form 6 अपने निर्धारित प्रारूप में ही लागू है। Supreme Court में क्या हुआ? 5 अक्टूबर को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत ने कहा कि Form 6 के किसी modified version को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि वह चुनाव आयोग के रिकॉर्ड देखकर यह समझना चाहता है कि Form 6 में कथित बदलाव क्या था और अगर कोई बदलाव हुआ तो उसे किस प्रक्रिया के तहत किया गया। यही टिप्पणी अब राजनीतिक विवाद का बड़ा आधार बन गई है। Rahul Gandhi ने लगाए गंभीर आरोप सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने Form 6 में कथित तौर पर गैरकानूनी बदलाव किया और इससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं। राहुल गांधी के इन आरोपों को BJP और चुनाव आयोग ने खारिज किया है। चुनाव आयोग ने उनके दावे को भ्रामक बताते हुए कहा कि Form 6 में बदलाव किए जाने की बात सही नहीं है। विवाद की जड़ में क्या है Form 6 का Declaration? दरअसल, पूरा विवाद Form 6 और उसके साथ लगाए गए अतिरिक्त Declaration को लेकर है। SIR के दौरान मतदाताओं से अतिरिक्त जानकारी मांगी गई थी। इसी वजह से विपक्ष ने सवाल उठाया कि क्या Form 6 में नियमों के मुताबिक बदलाव किया गया था। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि यह Form 6 में संशोधन नहीं था, बल्कि SIR की प्रक्रिया के लिए उसके साथ लगाया गया अतिरिक्त Declaration था। अब आगे क्या होगा? फिलहाल इस मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। एक तरफ BJP और Election Commission Form 6 में किसी बदलाव से इनकार कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ राहुल गांधी और विपक्ष इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। Supreme Court के सामने अब रिकॉर्ड आने के बाद तस्वीर और साफ हो सकती है। फिलहाल विवाद का सबसे अहम सवाल यही है कि क्या Form 6 के मूल प्रारूप में बदलाव हुआ था या सिर्फ SIR के लिए अतिरिक्त Declaration जोड़ा गया था। मतदाता सूची से जुड़े इस मुद्दे पर आगे होने वाली सुनवाई और चुनाव आयोग के रिकॉर्ड पर सभी की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lucknow Airport

Lucknow Airport के पास बड़ा हादसा: लेबर कैंप में आग, 33 Plastic Rooms जले

लखनऊ एयरपोर्ट (Lucknow Airport) के पास बने लेबर कैंप में आग लगने से मंगलवार को अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते आग ने कैंप के प्लास्टिक से बने करीब 33 कमरों को अपनी चपेट में ले लिया। आग फैलने के बाद वहां रह रहे मजदूरों के बीच भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हादसे के दौरान अपनी जान बचाने के लिए एक मजदूर ने दूसरी मंजिल से नीचे छलांग लगा दी। बताया जा रहा है कि इस घटना में मजदूर घायल हुआ है। आग की लपटें देखकर कैंप में मौजूद दूसरे लोग भी किसी तरह बाहर निकलने की कोशिश करने लगे। Plastic के कमरों में तेजी से फैली आग लेबर कैंप में कई कमरे प्लास्टिक और दूसरे ज्वलनशील सामान से बने हुए थे। यही वजह रही कि आग ने थोड़े ही समय में कई कमरों को अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही देर में कैंप का बड़ा हिस्सा धुएं और आग की लपटों से घिर गया। घटना की सूचना मिलते ही Fire Brigade की टीमें मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग बुझाने के दौरान आसपास के इलाके में भी लोगों की भीड़ जमा हो गई। आग लगने की वजह अभी साफ नहीं फिलहाल आग किस वजह से लगी, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दमकल विभाग और प्रशासन की टीम मामले की जांच कर रही है। शुरुआती तौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि आग की शुरुआत कैंप के किस हिस्से से हुई और देखते ही देखते यह इतने बड़े इलाके तक कैसे फैल गई। हादसे के बाद कैंप में रहने वाले मजदूरों के सामान को भी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन की ओर से नुकसान और घायलों से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल लखनऊ एयरपोर्ट के पास लेबर कैंप में हुए इस हादसे ने वहां मौजूद Fire Safety इंतजामों पर भी सवाल खड़े किए हैं। प्लास्टिक से बने कमरों में बड़ी संख्या में मजदूरों का रहना आग की स्थिति में जोखिम बढ़ा सकता है। फिलहाल प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही आग की असली वजह और कैंप में सुरक्षा इंतजामों की स्थिति को लेकर तस्वीर साफ होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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West Bengal

West Bengal Election: Nandigram में Congress का बड़ा आरोप, Rejinagar में Humayun Kabir हिरासत में

West Bengal Bypoll 2026 पश्चिम बंगाल समेत देश के कई हिस्सों में मंगलवार को उपचुनाव के लिए मतदान जारी है। बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर वोटिंग के दौरान राजनीतिक हलचल भी देखने को मिली। रेजीनगर में आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर को पुलिस ने हिरासत में लिया, जबकि नंदीग्राम में कांग्रेस ने अपने पोलिंग एजेंट्स को जबरन हटाए जाने का आरोप लगाया है। इन घटनाओं के बीच चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी में मतदान प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। पश्चिम बंगाल के अलावा तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में भी उपचुनाव के लिए वोट डाले जा रहे हैं। रेजीनगर में हुमायूं कबीर हिरासत में पश्चिम बंगाल की रेजीनगर सीट पर मतदान के दौरान हुमायूं कबीर को पुलिस ने हिरासत में लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, मतदान करने के बाद वह अपने पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस उन्हें रेजीनगर थाने ले गई। हुमायूं कबीर ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर कुछ शिकायतें भी उठाई थीं। उनका आरोप था कि उनके समर्थकों और चुनाव से जुड़े लोगों को परेशान किया जा रहा है। हालांकि, उनकी हिरासत के पीछे पुलिस की ओर से बताए गए कारण को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। रेजीनगर सीट इस उपचुनाव में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जिसके चलते यहां दोबारा मतदान कराया जा रहा है। Nandigram में Congress ने लगाए आरोप नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान ने मतदान के दौरान गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि पार्टी के पोलिंग एजेंट्स को मतदान केंद्रों से जबरन हटाया गया। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि कुछ इलाकों में मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, एक मतदान केंद्र के पीठासीन अधिकारी ने मतदान को शांतिपूर्ण बताया। अधिकारी के मुताबिक बूथ पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं और वेबकास्टिंग के जरिए भी निगरानी की जा रही है। इस तरह नंदीग्राम में राजनीतिक दलों के आरोपों और मतदान अधिकारियों के बयानों में अंतर दिखाई दे रहा है। अंतिम स्थिति प्रशासन और चुनाव आयोग की रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगी। Nandigram और Rejinagar में कितने Voters? नंदीग्राम में करीब 2.67 लाख मतदाता हैं और यहां 323 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। वहीं रेजीनगर में करीब 2.57 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां 315 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में मतदान केंद्रों की निगरानी के लिए वेबकास्टिंग की व्यवस्था भी की गई है। सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन की ओर से इंतजाम किए गए हैं। Tamil Nadu, Assam और Puducherry में भी Voting उपचुनाव सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर भी वोटिंग हो रही है। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए राज्य पुलिस के साथ केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है। वहीं असम की नगांव लोकसभा सीट पर भी उपचुनाव हो रहा है। यहां कई प्रमुख उम्मीदवारों ने सुबह मतदान किया। इसके अलावा पुडुचेरी की थट्टानचावडी विधानसभा सीट पर भी मतदाता अपने वोट डाल रहे हैं। 9 अक्टूबर को आएगा Result इन सभी सीटों पर मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद 9 अक्टूबर 2026 को वोटों की गिनती होगी। इसी दिन साफ होगा कि अलग-अलग सीटों पर मतदाताओं ने किस उम्मीदवार के पक्ष में फैसला दिया है। फिलहाल पश्चिम बंगाल में हुमायूं कबीर की हिरासत और नंदीग्राम में कांग्रेस के लगाए आरोपों ने उपचुनाव के बीच राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा दी हैं। प्रशासन और चुनाव आयोग की निगरानी में मतदान जारी है और अब सभी की नजरें मतदान प्रतिशत के साथ 9 अक्टूबर को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR

SIR पर Opposition का बड़ा Protest: Save Democracy March रोका गया, जमीन पर बैठे सांसद

Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच चल रहा विवाद अब सड़क तक पहुंच गया है। मंगलवार को INDIA ब्लॉक के कई विपक्षी सांसदों ने ‘Save Democracy March’ निकाला। सांसद संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन रास्ते में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर मार्च को रोक दिया। इसके बाद कई सांसद सड़क पर ही बैठ गए और विरोध जताने लगे। विपक्षी सांसदों का कहना है कि वे चुनाव आयोग तक जाकर मतदाता सूची में बदलाव और SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराना चाहते हैं। मार्च के मद्देनजर संसद से लेकर चुनाव आयोग कार्यालय तक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। जमीन पर बैठे विपक्षी सांसद मार्च के दौरान जैसे ही सांसद आगे बढ़े, सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया। रास्ता बंद किए जाने के बाद विपक्षी नेता और सांसद वहीं सड़क पर बैठ गए। इस दौरान SIR के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के Special Intensive Revision में बड़ी संख्या में लोगों के नाम प्रभावित हुए हैं। विपक्षी दल इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। SIR में 13 करोड़ नाम हटने का दावा इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा मतदाता सूची से जुड़े करीब 13 करोड़ नामों का है। विपक्ष इस आंकड़े को लेकर चुनाव आयोग से सवाल पूछ रहा है और जानना चाहता है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं को सूची से बाहर करने का आधार क्या रहा। हालांकि, Election Commission ने 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सीधे तौर पर डिलीट किए जाने के दावे को भ्रामक बताया है। आयोग के अनुसार, यह आंकड़ा ऐसे मतदाताओं से जुड़ा है जिन्हें मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में रखा गया है। आयोग ने यह भी कहा है कि पात्र मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया है। CEC के इस्तीफे की भी मांग SIR को लेकर विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग को इस प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए। कुछ विपक्षी दल CEC के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग लगातार SIR प्रक्रिया का बचाव कर रहा है और उसका कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट करना और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है। Form 6 को लेकर भी विवाद SIR विवाद के बीच Form 6 में कथित बदलाव का मुद्दा भी सामने आया है। विपक्ष की ओर से इस पर सवाल उठाए गए हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है और कोर्ट ने Form 6 से जुड़े रिकॉर्ड को देखने की बात कही है। इस मुद्दे ने विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच पहले से चल रही तनातनी को और बढ़ा दिया है। आगे भी जारी रह सकता है विरोध ‘Save Democracy March’ को विपक्ष के SIR विरोधी अभियान की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने आने वाले दिनों में अलग-अलग राज्यों और जिलों में भी पदयात्रा, बैठक और प्रदर्शन करने की बात कही है। फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। एक तरफ विपक्ष मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं चुनाव आयोग प्रक्रिया को नियमों के तहत होने वाला revision बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR और voter list का मुद्दा राजनीति के साथ-साथ चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा के केंद्र में बना रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nobel Medicine Prize 2026

Nobel Medicine Prize 2026 GLP-1 से Sleep Research तक, इन 5 Scientific Discoveries पर नजर

दुनिया भर की नजर आज 5 अक्टूबर को होने वाले Nobel Medicine Prize 2026 के ऐलान पर है। हर साल की तरह इस बार भी यह देखना दिलचस्प होगा कि मेडिकल साइंस की कौन-सी खोज को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सम्मानों में से एक के लिए चुना जाता है। Stockholm के Karolinska Institutet से होने वाली घोषणा का इंतजार वैज्ञानिकों के साथ आम लोगों को भी है। इस बार Nobel Medicine Prize को लेकर कई ऐसी रिसर्च चर्चा में हैं, जिनका सीधा असर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देता है। Weight Loss Drugs, Sleep Research, Gene Editing, Cancer Treatment और Medical Imaging जैसे क्षेत्रों ने इस साल खास ध्यान खींचा है। हालांकि, अंतिम फैसला Nobel Committee ही करेगी और आधिकारिक घोषणा होने तक किसी भी नाम को विजेता नहीं माना जा सकता। Weight Loss Drugs से जुड़ी Research पर सबसे ज्यादा चर्चा इस साल की संभावित Nobel चर्चा में GLP-1 Research सबसे प्रमुख नामों में है। GLP-1 शरीर में भूख और Blood Sugar को नियंत्रित करने वाले सिस्टम से जुड़ा हार्मोन है। इसी रिसर्च ने आगे चलकर Diabetes और Obesity के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नई पीढ़ी की दवाओं का रास्ता तैयार किया। इस क्षेत्र में Daniel Drucker, Jens Juul Holst और Svetlana Mojsov के नाम चर्चा में हैं। इन वैज्ञानिकों के काम ने GLP-1 की भूमिका को समझने में अहम योगदान दिया। आज जिन दवाओं को वजन कम करने और ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए जाना जाता है, उनके पीछे इसी तरह की लंबी वैज्ञानिक रिसर्च रही है। Sleep Research ने भी बढ़ाई उम्मीद Nobel Medicine की संभावित चर्चाओं में Sleep-Wake System भी शामिल है। इस क्षेत्र में Emmanuel Mignot और Masashi Yanagisawa के नाम सामने आते हैं। Orexin से जुड़ी उनकी रिसर्च ने यह समझने में मदद की कि हमारे शरीर में नींद और जागने का सिस्टम किस तरह काम करता है। खासकर Narcolepsy जैसे Sleep Disorder को समझने में इस खोज का महत्व रहा है। Gene Editing में David Liu का नाम Medical Science की दुनिया में Gene Editing पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। इस क्षेत्र में वैज्ञानिक David Liu का नाम भी संभावित दावेदारों की चर्चा में है। David Liu और उनकी टीम ने Base Editing और Prime Editing जैसी तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन तकनीकों का मकसद DNA में ज्यादा सटीक तरीके से बदलाव करना है। भविष्य में Genetic Diseases के इलाज के लिहाज से ऐसी तकनीकों को काफी अहम माना जाता है। Cancer Treatment में CAR-T Therapy Cancer के इलाज में हुई प्रगति भी इस साल Nobel Medicine की चर्चा का हिस्सा है। खास तौर पर CAR-T Cell Therapy ने Blood Cancer के कुछ मामलों में इलाज की नई उम्मीद पैदा की है। इस तकनीक में मरीज की अपनी Immune Cells यानी T-Cells को तैयार किया जाता है, ताकि वे Cancer Cells को पहचानकर उनसे लड़ सकें। इस क्षेत्र में अमेरिकी वैज्ञानिक Carl June का नाम भी चर्चा में है। CAR-T Therapy को Cellular Immunotherapy की दिशा में बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है और इसकी वजह से गंभीर बीमारियों के इलाज को लेकर वैज्ञानिकों की उम्मीदें बढ़ी हैं। Medical Imaging की OCT Technology भी दौड़ में Optical Coherence Tomography यानी OCT भी उन रिसर्च में शामिल है, जिन पर Nobel watchers की नजर है। यह एक ऐसी Imaging Technology है, जिसमें Light Waves की मदद से शरीर के अंदर मौजूद tissues की बेहद बारीक तस्वीरें हासिल की जा सकती हैं। खासकर आंखों और Retina से जुड़ी बीमारियों की पहचान में OCT ने Medical Science को काफी मदद दी है। इस क्षेत्र से James Fujimoto, David Huang और Eric Swanson के नाम जुड़े हैं। Nobel Committee के फैसले पर सबकी नजर इन सभी नामों और रिसर्च को लेकर फिलहाल सिर्फ चर्चा है। Nobel Committee ने पुरस्कार की आधिकारिक घोषणा से पहले संभावित विजेताओं की कोई सूची जारी नहीं की है। इसलिए असली तस्वीर सामने आने में अभी घोषणा का इंतजार करना होगा। 2026 Nobel Prize announcements की शुरुआत Medicine Prize से हो रही है। इसके बाद Physics, Chemistry, Literature और Peace Prize का ऐलान किया जाएगा। Economics Prize की घोषणा बाद में होगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस साल Nobel Medicine Prize किस वैज्ञानिक या वैज्ञानिकों को मिलता है। Weight Loss Drugs से लेकर Gene Editing और Cancer Treatment तक, कई ऐसी खोजें चर्चा में हैं, जिनका असर आने वाले वर्षों में मेडिकल साइंस और आम जिंदगी दोनों पर दिखाई दे सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ज्ञानेश कुमार

Supreme Court on CEC: ज्ञानेश कुमार को Suspend करने से इनकार, SIR के 14 फैसलों पर EC को Notice

चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने फिलहाल CEC को पद से हटाने या सस्पेंड करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। हालांकि, Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े विवादित फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय बेंच ने की। याचिकाकर्ताओं की ओर से CEC के खिलाफ कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा यह है कि क्या चुनाव आयोग के कुछ फैसले तय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सामूहिक रूप से लिए गए थे या नहीं। SIR के 14 फैसलों पर क्यों उठे सवाल? याचिकाओं में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच SIR से जुड़े कम से कम 14 मामलों में चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद सामने आए। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कुछ मामलों में अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद फैसले आगे बढ़ाए गए। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से इन दावों पर अलग पक्ष रखा गया है। आयोग का कहना है कि जिन पत्रों और आपत्तियों का हवाला दिया जा रहा है, उनका संदर्भ अलग प्रशासनिक मामलों से था और उन्हें SIR की नीति या IT से जुड़े फैसलों से जोड़ना सही नहीं है। Supreme Court ने CEC को Suspend क्यों नहीं किया? सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल CEC ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने का आदेश नहीं दिया। कोर्ट ने पहले चुनाव आयोग का जवाब और संबंधित दस्तावेज देखने की जरूरत बताई। अदालत यह भी जानना चाहती है कि जिन फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं, वे unanimity यानी सर्वसम्मति से, majority यानी बहुमत से या केवल CEC के स्तर पर लिए गए थे। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगर रिकॉर्ड की जांच में यह सामने आता है कि किसी फैसले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो उस फैसले को वापस लेने पर विचार किया जा सकता है। Form-6 और Election Software का मुद्दा भी उठा इस मामले में सिर्फ SIR ही नहीं, बल्कि चुनावी डेटा और सिस्टम से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं। याचिकाओं में Form-6, ECINet और ERONet जैसे चुनावी सिस्टम से जुड़े कथित बदलावों और फैसलों पर भी सवाल किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि इन मामलों से जुड़े रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग और तकनीकी जानकारी की जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फैसले निर्धारित नियमों के मुताबिक लिए गए थे या नहीं। CEC के खिलाफ क्या मांग की गई? याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा SIR से जुड़े विवादित फैसलों की वैधता की जांच और कथित तौर पर एकतरफा लिए गए निर्णयों पर भी सवाल उठाए गए हैं। कुछ याचिकाओं में पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। हालांकि, इन सभी आरोपों और मांगों पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। अब Election Commission को देना होगा जवाब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब चुनाव आयोग को अपना पक्ष और संबंधित रिकॉर्ड अदालत के सामने रखना होगा। इसके बाद कोर्ट यह देखेगा कि विवादित फैसलों को लेने में संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं। फिलहाल CEC ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। इसलिए इस मामले में अगली सुनवाई और चुनाव आयोग का जवाब काफी महत्वपूर्ण होगा। SIR से जुड़ा यह विवाद इसलिए भी अहम है क्योंकि इसका सीधा संबंध मतदाता सूची, चुनावी प्रक्रिया और Election Commission की decision-making process से है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह साफ हो सकता है कि जिन फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें नियमों का पालन हुआ था या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR

SIR Protest: CJP नेताओं का Arrest का दावा, 10 अक्टूबर को Jantar Mantar पर बड़ा प्रदर्शन

मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विरोध अब और तेज होता नजर आ रहा है। CJP नेताओं ने दावा किया है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन से पहले सरकार उन्हें गिरफ्तार करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, गिरफ्तारी की इस कथित तैयारी को लेकर सरकार या संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। CJP की ओर से 10 अक्टूबर को Jantar Mantar पर Protest का ऐलान किया गया है। संगठन SIR को लेकर अपनी आपत्तियां उठा रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है। अभिजीत दीपके बोले- गिरफ्तारी से नहीं डरेंगे CJP नेता अभिजीत दीपके ने गिरफ्तारी की आशंका के बीच कहा है कि वे डरने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें रोकने या गिरफ्तार करने की कोशिश की जाती है, तब भी SIR के खिलाफ उनका विरोध जारी रहेगा। दीपके ने लोगों से 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें दिल्ली जाने से रास्ते में ही रोक दिया गया, तो जहां रोका जाएगा, वहीं से विरोध दर्ज कराया जाएगा। CJP नेताओं ने क्या दावा किया? CJP के नेताओं की ओर से दावा किया गया है कि अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और संगठन से जुड़े कुछ अन्य लोगों को प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिया जा सकता है। नेताओं का आरोप है कि उन्हें गिरफ्तार करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि संभावित गिरफ्तारी का यह दावा CJP नेताओं की ओर से किया गया है। अभी तक सरकार या पुलिस की तरफ से ऐसी किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। SIR को लेकर क्यों हो रहा विरोध? Special Intensive Revision यानी SIR के तहत मतदाता सूचियों के सत्यापन और संशोधन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस चल रही है। CJP का कहना है कि इस प्रक्रिया को लेकर कई सवाल हैं और इन्हीं मुद्दों को लेकर संगठन सड़क पर उतर रहा है। CJP ने SIR के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ भी अपनी आपत्तियां जाहिर की हैं। संगठन की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। 10 अक्टूबर को Jantar Mantar पर जुटने की तैयारी CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के Jantar Mantar पर प्रदर्शन की तैयारी की है। संगठन का कहना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग इस Protest में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचेंगे। नेताओं का कहना है कि संभावित गिरफ्तारी या किसी तरह की रोक के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में अब सभी की नजर 10 अक्टूबर के प्रदर्शन और उससे पहले होने वाली किसी प्रशासनिक कार्रवाई पर है। फिलहाल, CJP नेताओं के Arrest के दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस मामले में आगे पुलिस और सरकार की ओर से आने वाले बयान अहम होंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Supreme Court

Supreme Court की सख्त टिप्पणी: Crime रोकने के लिए सिर्फ Action नहीं, अपराधियों में Fear of Law भी जरूरी

दिल्ली-NCR में महिलाओं के खिलाफ सामने आईं दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ अपराध होने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि अपराध करने वालों के मन में कानून का डर हो, ताकि ऐसी घटनाओं को पहले ही रोका जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में सामने आईं रेप की तीन घटनाओं का Suo Motu Cognizance लिया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से महिलाओं की सुरक्षा और अपराधों की रोकथाम को लेकर कई सवाल पूछे। अपराधियों में कानून का डर होना जरूरी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपराध रोकने के लिए प्रभावी Deterrence जरूरी है। यानी अपराध करने वाले व्यक्ति को यह पता होना चाहिए कि कानून तोड़ने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। कोर्ट की चिंता सिर्फ आरोपियों को पकड़ने तक सीमित नहीं रही। सवाल यह भी है कि पुलिस ऐसी व्यवस्था कैसे बनाए कि अपराध की संभावना को पहले ही कम किया जा सके। CCTV लगाने से ही नहीं रुकेगा Crime कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर लगे CCTV कैमरों और उनकी निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए। अदालत ने जानना चाहा कि अगर किसी इलाके में कैमरे लगे हैं, तो क्या उनकी लगातार निगरानी भी की जाती है? दरअसल, CCTV किसी घटना के बाद आरोपी की पहचान करने में मदद कर सकता है, लेकिन अपराध को होने से पहले रोकने के लिए Active Police Monitoring और तेज Response System जरूरी है। महिलाओं को हर जगह महसूस होनी चाहिए Safety सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली में महिलाओं को दिन हो या रात, सड़क पर चलने से लेकर मेट्रो और दूसरे सार्वजनिक स्थानों तक सुरक्षित महसूस होना चाहिए। अदालत ने माना कि सिर्फ घटना के बाद जांच और गिरफ्तारी से समस्या का पूरा समाधान नहीं होगा। पुलिस की मौजूदगी, संवेदनशील इलाकों में निगरानी और समय पर कार्रवाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। 3 रेप मामलों पर Supreme Court की नजर सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2026 को दिल्ली-NCR में हाल में सामने आईं रेप की घटनाओं से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स का स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद अदालत ने दिल्ली पुलिस और संबंधित प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा। कोर्ट की सुनवाई में मुख्य सवाल यही रहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों को रोकने के लिए जमीन पर किस तरह की व्यवस्था काम कर रही है और उसमें कहां सुधार की जरूरत है। Prevention पर Court का फोकस सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का सबसे अहम पहलू अपराध होने के बाद की कार्रवाई के बजाय Crime Prevention पर जोर देना है। अदालत का कहना है कि कानून का डर तभी प्रभावी होगा, जब पुलिस की निगरानी मजबूत हो और अपराध की आशंका वाले स्थानों पर समय रहते कार्रवाई हो। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोर्ट की यह सुनवाई एक बार फिर यह सवाल सामने लाती है कि सार्वजनिक जगहों को सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस, प्रशासन और स्थानीय व्यवस्था के स्तर पर कितनी प्रभावी तैयारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Weather

Weather Update: लखनऊ में 40 हजार घरों में पानी, बिहार के 466 गांव बाढ़ में; MP में 7 अक्टूबर से Rain Alert

देश के कई हिस्सों में अक्टूबर की शुरुआत के साथ मौसम (Weather) का मिजाज तेजी से बदल रहा है। उत्तर प्रदेश और बिहार में बाढ़ ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है, वहीं मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर बारिश के आसार बन रहे हैं। दूसरी ओर राजस्थान में गर्मी ने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है और कई जगह तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। लखनऊ में बाढ़ से हजारों घर प्रभावित उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में पानी भर गया है। कई रिहायशी इलाकों में घरों और सड़कों तक पानी पहुंचने से लोगों को रोजमर्रा के काम में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फैजुल्लागंज, दौदनगर और गोमती नगर एक्सटेंशन समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। प्रभावित परिवारों के सामने साफ पानी, दवाइयों और जरूरी सामान की समस्या भी खड़ी हो गई है। प्रशासन और राहत टीमों की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में मदद पहुंचाने का काम जारी है। बाढ़ का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। कई जगह सड़कें जलमग्न होने से आवाजाही भी प्रभावित हुई है। ऐसे में लोगों को नदी और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। बिहार के 466 गांवों में बाढ़ का असर बिहार में भी बाढ़ की स्थिति लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। राज्य के कई जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद 466 गांवों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ के कारण ग्रामीण इलाकों में आवागमन और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। राहत और बचाव टीमों की मदद से प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बिहार के कुछ हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना भी जताई है। ऐसे में पहले से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। MP Weather: 7 अक्टूबर से फिर बदल सकता है मौसम मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद मौसम फिलहाल गर्म बना हुआ है। दिन में तेज धूप के कारण कई शहरों में तापमान बढ़ा है। हालांकि प्रदेश के लोगों को जल्द ही गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 7 अक्टूबर से पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है। पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर सहित कई इलाकों में हल्की बारिश और गरज-चमक के आसार हैं। यानी एक तरफ प्रदेश के कई हिस्सों में दिन के समय गर्मी परेशान कर रही है, तो दूसरी तरफ पूर्वी MP में बारिश की दस्तक से मौसम फिर करवट ले सकता है। Rajasthan में 41°C तक पहुंचा पारा राजस्थान में मानसून की विदाई के बाद गर्मी ने फिर अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य के कई हिस्सों में दिन का तापमान तेजी से बढ़ा है। पिलानी में अधिकतम तापमान 41°C तक पहुंच गया, जिससे अक्टूबर की शुरुआत में ही गर्मी का असर साफ नजर आ रहा है। जैसलमेर, चूरू, बीकानेर, बाड़मेर और श्रीगंगानगर जैसे इलाकों में भी तापमान सामान्य से ऊपर रहने की स्थिति बनी हुई है। दिन में तेज गर्मी के कारण लोगों को परेशानी हो रही है, जबकि सुबह और रात के समय मौसम अपेक्षाकृत राहत देने वाला बना हुआ है। कहीं बाढ़ तो कहीं गर्मी, मौसम ने बदला रंग देश में इस समय मौसम का मिजाज अलग-अलग नजर आ रहा है। लखनऊ और बिहार में जहां बाढ़ और जलभराव लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है, वहीं मध्य प्रदेश में बारिश की वापसी के संकेत मिल रहे हैं। राजस्थान में इसके उलट गर्मी का असर बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में बारिश, तापमान और नदियों के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर सभी की नजर रहेगी। खासकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की Advisory को गंभीरता से लेने की जरूरत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Premanand Maharaj

Premanand Maharaj Viral Video: ‘मेरा जन्म ही नहीं हुआ…’ बयान ने खींचा लोगों का ध्यान

वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) अपने प्रवचनों और आध्यात्मिक विचारों को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर चर्चा में रहते हैं। इन दिनों उनके एक वीडियो को लेकर लोगों के बीच काफी दिलचस्पी देखी जा रही है। ‘मेरा जन्म ही नहीं हुआ…’ जैसे शब्दों से चर्चा में आए इस वीडियो को लोग आध्यात्मिक नजरिए से समझने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, इस कथन का पूरा संदर्भ समझना जरूरी है, ताकि किसी अधूरी क्लिप के आधार पर गलत मतलब न निकाला जाए। प्रेमानंद महाराज का वीडियो क्यों हो रहा वायरल? Premanand Maharaj के प्रवचनों में अक्सर जीवन, मृत्यु, आत्मा, भगवान की भक्ति और मन की शांति जैसे विषयों पर चर्चा होती है। उनके विचारों को बड़ी संख्या में लोग सुनते और सोशल मीडिया पर साझा करते हैं। इसी वजह से उनके प्रवचनों के छोटे-छोटे वीडियो भी लोगों का ध्यान खींचते हैं। ‘मेरा जन्म ही नहीं हुआ…’ जैसे कथन को आध्यात्मिक संदर्भ में समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि महाराज किस सवाल का जवाब दे रहे थे और उससे पहले तथा बाद में उन्होंने क्या कहा था। केवल एक वाक्य के आधार पर उनके विचारों का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। जीवन और आत्मा को लेकर क्या है आध्यात्मिक नजरिया? भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं में आत्मा, शरीर और जन्म-मृत्यु को लेकर अलग-अलग दार्शनिक व्याख्याएं मिलती हैं। भगवद्गीता में भी आत्मा को शरीर से अलग और अविनाशी बताया गया है। इसी तरह संतों के प्रवचनों में व्यक्ति की वास्तविक पहचान, अहंकार और ईश्वर से जुड़ाव जैसे विषयों पर चर्चा होती रहती है। ऐसे विचारों को समझने के लिए उनके मूल संदर्भ को देखना जरूरी है। किसी आध्यात्मिक कथन का अर्थ सामान्य बोलचाल के अर्थ से अलग भी हो सकता है। प्रेमानंद महाराज का पुराना भावुक वीडियो भी हुआ था वायरल हाल ही में Premanand Maharaj का एक भावुक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। कुछ पोस्ट में दावा किया गया कि यह वीडियो उनके शिष्य रसिक दुलारी की मौत के बाद का है। हालांकि, आजतक की फैक्ट चेक रिपोर्ट के मुताबिक, यह वीडियो नया नहीं था। इसका लंबा संस्करण प्रेमानंद महाराज के आधिकारिक YouTube चैनल ‘भजन मार्ग’ पर 1 मार्च 2026 को अपलोड किया गया था। वायरल हिस्सा उसी प्रवचन में लगभग 7 मिनट 10 सेकंड पर मौजूद था। इसलिए इसे सितंबर में सामने आई घटना के बाद का वीडियो बताना भ्रामक था। इस मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो की तारीख और संदर्भ की जांच करना जरूरी है। <escape><Cite refs={[“turn157990search0″,”turn157990search1”]}/></escape> आश्रम से जुड़ी घटनाओं के बीच भी चर्चा में हैं महाराज वृंदावन स्थित राधा केली कुंज आश्रम से जुड़े मामले और शिष्य रसिक दुलारी की मौत के बाद प्रेमानंद महाराज को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं सामने आईं। इस बीच आश्रम से जुड़ी घटनाओं के बारे में अलग-अलग दावे भी किए गए। ऐसे मामलों में पुलिस जांच और आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता देना जरूरी है। 9 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रेमानंद महाराज का एक अन्य वीडियो भी चर्चा में आया, जिसमें उन्होंने भक्ति के मार्ग पर बने रहने की कठिनाई पर बात की। <escape><Cite refs={[“turn157990search2″,”turn585743search3”]}/></escape> वायरल वीडियो को पूरा देखना क्यों जरूरी है? सोशल मीडिया पर किसी संत या सार्वजनिक व्यक्ति के बयान का छोटा हिस्सा तेजी से वायरल हो सकता है। लेकिन कई बार वीडियो का शुरुआती या अंतिम हिस्सा न होने से उसका वास्तविक अर्थ स्पष्ट नहीं हो पाता। इसलिए किसी कथन पर राय बनाने से पहले उसका पूरा वीडियो, तारीख और मूल स्रोत देखना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Pakistan

Imran Khan की PTI को झटका! Pakistan के खैबर पख्तूनख्वा में इमरजेंसी लागू

Pakistan की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लागू करने और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की प्रांतीय सरकार के अधिकार सीमित किए जाने की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान की संघीय सरकार और PTI के बीच पहले से जारी टकराव को और बढ़ा दिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संघीय कैबिनेट की सिफारिश पर इस फैसले को मंजूरी दी। सरकार ने इसके पीछे आतंकवाद और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को प्रमुख वजह बताया है। वहीं, PTI इस कदम का विरोध कर रही है। हालांकि, प्रांतीय प्रशासन में हुए बदलाव और उसके कानूनी प्रभावों से जुड़ी सभी जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। Khyber Pakhtunkhwa में Emergency लगाने की वजह क्या है? पाकिस्तान की संघीय सरकार का कहना है कि खैबर पख्तूनख्वा में सुरक्षा की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। अफगानिस्तान की सीमा से लगे इस प्रांत में आतंकवादी घटनाओं और सुरक्षा चुनौतियों के कारण लंबे समय से तनाव है। सरकार का आरोप है कि PTI के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रही थी। इसी आधार पर संघीय कैबिनेट ने इमरजेंसी लागू करने की सिफारिश की। दूसरी ओर, PTI का कहना है कि सुरक्षा संबंधी समस्याओं का समाधान राजनीतिक अधिकारों को सीमित करके नहीं किया जा सकता। इस मामले में केंद्र सरकार और विपक्ष के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है। Imran Khan की PTI सरकार पर क्या पड़ेगा असर? खैबर पख्तूनख्वा को इमरान खान की पार्टी का मजबूत राजनीतिक आधार माना जाता है। ऐसे में यहां प्रशासनिक अधिकारों में बदलाव PTI के लिए अहम राजनीतिक घटनाक्रम है। यदि प्रांतीय सरकार की शक्तियां निलंबित करके प्रशासन राज्यपाल या संघीय सरकार के नियंत्रण में दिया जाता है, तो इससे शासन व्यवस्था और केंद्र-प्रांत के संबंधों पर सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि, इमरजेंसी लागू होने और निर्वाचित सरकार के अधिकार समाप्त होने के बीच कानूनी अंतर होता है। इसलिए अंतिम स्थिति समझने के लिए राष्ट्रपति के आदेश, संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और आधिकारिक अधिसूचना की पुष्टि आवश्यक है। इमरान खान की रिहाई को लेकर PTI का प्रदर्शन इमरान खान की रिहाई की मांग PTI के प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल है। अगस्त 2023 से जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री के समर्थन में पार्टी लगातार सरकार पर दबाव बना रही है। PTI समर्थकों के इस्लामाबाद की ओर मार्च और संभावित प्रदर्शन को लेकर भी राजनीतिक माहौल गर्म है। पार्टी चाहती है कि इमरान खान से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए और उनकी रिहाई की मांग पर ध्यान दिया जाए। वहीं, संघीय सरकार के सामने राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है। प्रदर्शन, सुरक्षा इंतजाम और केंद्र-विपक्ष के बीच बातचीत का परिणाम आने वाले दिनों में पाकिस्तान की राजनीति की दिशा को प्रभावित कर सकता है। PTI ने फैसले पर उठाए सवाल PTI ने केंद्र सरकार के कदम का विरोध करते हुए इसे प्रांतीय अधिकारों और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बताया है। पार्टी का तर्क है कि आतंकवाद से निपटने के लिए केंद्र और प्रांत के बीच सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए। दूसरी तरफ, संघीय सरकार सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अपने फैसले को जरूरी बता रही है। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के कारण राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJP

Delhi Protest: CJP नेताओं का आरोप- फ्लाइट से किया Kidnap, दिल्ली में दूसरे दिन भी प्रदर्शन

दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासी माहौल गरम है। 10 अक्टूबर को शुरू हुआ विरोध 11 अक्टूबर को भी जारी रहा। इस बीच CJP के नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें मुंबई से दिल्ली पहुंचने के बाद विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया गया। पार्टी के नेता सौरव दास ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार अपने ही लोगों से जंग लड़ रही है। वहीं, दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है। यह मामला अब केवल प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। हिरासत की कार्रवाई, चुनाव आयोग की भूमिका और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। CJP नेताओं ने क्यों लगाया Kidnap करने का आरोप? अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका 10 अक्टूबर को मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे। उन्हें जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होना था। नेताओं के मुताबिक, विमान के दिल्ली पहुंचने के बाद पुलिसकर्मी अंदर आए और उन्हें हिरासत में ले लिया। CJP नेताओं ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए आरोप लगाया कि उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए हिरासत में लिया गया। सौरव दास ने इसे फ्लाइट से किडनैप किए जाने जैसा बताया और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। हालांकि, पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत का हवाला दिया गया। ऐसे में इस मामले में प्रदर्शनकारियों के आरोप और पुलिस का पक्ष अलग-अलग हैं। Delhi Protest: लगातार दूसरे दिन सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी दिल्ली में 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। कई इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई, जबकि कुछ स्थानों पर बैरिकेडिंग भी की गई। प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें राजनीतिक कार्यकर्ता और विरोध प्रदर्शन में शामिल अन्य लोग भी थे। 11 अक्टूबर को भी प्रदर्शन जारी रहने के बीच पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठते रहे। CJP समर्थकों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना चाहते हैं। उनका आरोप है कि हिरासत में लेकर प्रदर्शन को रोकने की कोशिश की गई। दूसरी ओर, पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने की बात कही। हिरासत के बाद CJP नेताओं को मिली राहत रिपोर्टों के मुताबिक, अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद उन्हें शांति बनाए रखने से जुड़ी शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। CJP नेताओं ने हिरासत की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सरकार और संवैधानिक संस्थाओं के फैसलों पर सवाल उठाना नागरिकों का अधिकार है। इस मामले में हिरासत की परिस्थितियों और संबंधित कानूनी प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है। आखिर क्यों हो रहा है Election Commission के खिलाफ प्रदर्शन? CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी और उसके समर्थक मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। वे इस मामले की जांच और चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग कर रहे हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया का बचाव किया है। भाजपा ने भी मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज किया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। Democracy में Protest के अधिकार पर फिर छिड़ी बहस दिल्ली में हुई इस कार्रवाई के बाद शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अपनी बात रखने और संस्थाओं से जवाब मांगने का अधिकार लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूसरी ओर, प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखे और किसी भी आयोजन के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करे। ऐसे में जरूरी है कि पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के आरोपों की जांच तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर हो। फिलहाल, CJP नेताओं की हिरासत और दिल्ली में लगातार दूसरे दिन हुए प्रदर्शन ने चुनाव आयोग तथा SIR को लेकर चल रही बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर राजनीतिक दलों और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण रहेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gautam Gambhir

Gautam Gambhir in Ujjain: महाकाल मंदिर में टेका माथा, Team India के लिए मांगा आशीर्वाद

भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीसरे T20 मुकाबले से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के हेड कोच गौतम गंभीर (Gautam Gambhir ) उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भारतीय टीम के बैटिंग कोच सितांशु कोटक के साथ बाबा महाकाल के दर्शन किए। गंभीर ने देश की खुशहाली और टीम इंडिया की सफलता के लिए प्रार्थना की। क्रिकेट के मैदान पर रणनीति बनाने वाले गंभीर का यह धार्मिक दौरा आस्था और खेल के जुड़ाव को दिखाता है। Gautam Gambhir ने बाबा महाकाल से क्या मांगा? उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में गौतम गंभीर ने विधि-विधान से दर्शन किए और बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनके साथ सितांशु कोटक भी मौजूद रहे। गंभीर ने कामना की कि बाबा महाकाल की कृपा देश और भारतीय क्रिकेट टीम पर बनी रहे। उनका यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब टीम इंडिया भारत-वेस्टइंडीज T20 सीरीज के अहम मुकाबले की तैयारी कर रही है। महाकाल मंदिर में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। क्रिकेट जगत की हस्तियों का यहां आना भी अक्सर प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बन जाता है। Mahakal Temple पहुंचे बैटिंग कोच सितांशु कोटक गौतम गंभीर के साथ भारतीय टीम के बैटिंग कोच सितांशु कोटक ने भी बाबा महाकाल के दर्शन किए। दोनों का उज्जैन दौरा भारत-वेस्टइंडीज मुकाबले से पहले हुआ। क्रिकेट में खिलाड़ियों की मेहनत, सही रणनीति और दबाव में प्रदर्शन की अहम भूमिका होती है। ऐसे में कई खिलाड़ी और खेल से जुड़े लोग बड़े मुकाबलों से पहले मंदिरों में जाकर प्रार्थना करते हैं। गंभीर का महाकाल दर्शन भी इसी वजह से चर्चा में है। India vs West Indies 3rd T20: इंदौर में होगी भिड़ंत भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीसरा T20 इंटरनेशनल मुकाबला इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेला जाना है। इस मैच को लेकर क्रिकेट फैंस के बीच काफी उत्साह है। सीरीज के दूसरे मुकाबले में भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ा था। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बड़ा स्कोर बनाया, लेकिन वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने लक्ष्य हासिल कर मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस नतीजे के बाद तीसरे मैच में भारतीय टीम की वापसी पर सबकी नजरें रहेंगी। बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी में भी बेहतर प्रदर्शन करना टीम इंडिया के लिए अहम होगा। Team India की सफलता के लिए की प्रार्थना गौतम गंभीर के लिए यह दौरा केवल मंदिर में दर्शन करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने देश और टीम इंडिया के लिए भी शुभकामनाएं दीं। भारतीय क्रिकेट टीम के प्रशंसक भी उम्मीद कर रहे हैं कि खिलाड़ी मैदान पर अच्छा प्रदर्शन करेंगे और मुकाबले में जीत हासिल करने की पूरी कोशिश करेंगे। अब सभी की नजरें इंदौर के मैदान पर होने वाले भारत-वेस्टइंडीज मुकाबले पर हैं। बाबा महाकाल के दरबार में दर्शन के बाद टीम इंडिया के कोच गौतम गंभीर की यह यात्रा खेल और आस्था के खूबसूरत मेल के रूप में देखी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Shivraj Singh Chouhan

Shivraj Singh Chouhan की अपील: नवरात्रि पर महिलाओं के सम्मान का लें संकल्प

नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के साथ महिलाओं के सम्मान की बात भी उतनी ही जरूरी है। इसी संदेश के साथ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह (Shivraj Singh Chouhan) चौहान ने सोशल मीडिया पर एक Reel शेयर की और लोगों से बेटियों, बहनों और माताओं का आदर करने की अपील की। उनके संदेश का सार है कि अगर हम मां दुर्गा की पूजा करते हैं, तो हमें अपने जीवन में भी महिलाओं को सम्मान देना चाहिए। शिवराज सिंह चौहान की यह अपील ऐसे समय में सामने आई है, जब नवरात्रि के दौरान देशभर में देवी आराधना और कन्या पूजन की तैयारियां चल रही हैं। उनका संदेश लोगों को यह सोचने का मौका देता है कि पूजा-पाठ के साथ हमारा व्यवहार भी उतना ही महत्वपूर्ण है। Shivraj Singh Chouhan ने Reel शेयर कर क्या संदेश दिया? शिवराज सिंह चौहान ने नवरात्रि के अवसर पर Reel के जरिए महिलाओं के सम्मान का मुद्दा उठाया। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी बेटियों और बहनों के प्रति आदर का भाव रखें और महिलाओं को सम्मानजनक माहौल देने का संकल्प लें। उनके संदेश का मुख्य भाव है कि मां दुर्गा की आराधना केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। महिलाओं के साथ घर, समाज और सार्वजनिक स्थानों पर कैसा व्यवहार किया जाता है, यह भी हमारी सोच और संस्कार को दर्शाता है। ‘बेटी-बहन का सम्मान नहीं, तो मां की पूजा बेकार’ यह संदेश सीधे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ता है। नवरात्रि में हम मां दुर्गा को शक्ति का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं। ऐसे में अपने आसपास की महिलाओं के साथ सम्मान और समानता का व्यवहार करना भी जरूरी है। महिलाओं का सम्मान सिर्फ अच्छी बातें कहने तक सीमित नहीं है। उनकी राय सुनना, उनकी पसंद और फैसलों का आदर करना, भेदभाव से बचना और उन्हें सुरक्षित माहौल देना भी इसका हिस्सा है। शिवराज सिंह चौहान की अपील इसी बात पर जोर देती है कि धार्मिक आस्था और सामाजिक जिम्मेदारी एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। Women Respect और Safety क्यों है जरूरी? महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने में परिवार, समाज और प्रशासन सभी की भूमिका होती है। बेटियों को आगे बढ़ने के अवसर देना, उनके साथ भेदभाव न करना और गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है। अक्सर त्योहारों के दौरान हम अच्छे विचारों और संकल्पों की बात करते हैं, लेकिन असली बदलाव तब आता है, जब इन विचारों को रोजमर्रा के जीवन में अपनाया जाए। घर में बेटियों को बराबरी का अधिकार देना और महिलाओं की स्वतंत्रता का सम्मान करना इसी बदलाव की शुरुआत हो सकती है। नवरात्रि पर लें महिलाओं के सम्मान का संकल्प नवरात्रि आस्था, शक्ति और सकारात्मक बदलाव का पर्व है। इस दौरान मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। यह अवसर अपने व्यवहार और सोच पर विचार करने का भी है। शिवराज सिंह चौहान की अपील का संदेश यही है कि मां दुर्गा की पूजा के साथ बेटियों, बहनों और माताओं को सम्मान देना भी हमारी जिम्मेदारी है। महिलाओं के प्रति आदर केवल नवरात्रि के नौ दिनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। क्योंकि पूजा का भाव तभी सार्थक होता है, जब हम अपने व्यवहार में भी सम्मान, समानता और संवेदनशीलता को जगह दें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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