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SIR पर Opposition का बड़ा Protest: Save Democracy March रोका गया, जमीन पर बैठे सांसद

Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच चल रहा विवाद अब सड़क तक पहुंच गया है। मंगलवार को INDIA ब्लॉक के कई विपक्षी सांसदों ने ‘Save Democracy March’ निकाला। सांसद संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन रास्ते में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर मार्च को रोक दिया। इसके बाद कई सांसद सड़क पर ही बैठ गए और विरोध जताने लगे। विपक्षी सांसदों का कहना है कि वे चुनाव आयोग तक जाकर मतदाता सूची में बदलाव और SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराना चाहते हैं। मार्च के मद्देनजर संसद से लेकर चुनाव आयोग कार्यालय तक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई। जमीन पर बैठे विपक्षी सांसद मार्च के दौरान जैसे ही सांसद आगे बढ़े, सुरक्षा बलों ने उन्हें रोक दिया। रास्ता बंद किए जाने के बाद विपक्षी नेता और सांसद वहीं सड़क पर बैठ गए। इस दौरान SIR के खिलाफ नारेबाजी भी हुई। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के Special Intensive Revision में बड़ी संख्या में लोगों के नाम प्रभावित हुए हैं। विपक्षी दल इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। SIR में 13 करोड़ नाम हटने का दावा इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा मतदाता सूची से जुड़े करीब 13 करोड़ नामों का है। विपक्ष इस आंकड़े को लेकर चुनाव आयोग से सवाल पूछ रहा है और जानना चाहता है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं को सूची से बाहर करने का आधार क्या रहा। हालांकि, Election Commission ने 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सीधे तौर पर डिलीट किए जाने के दावे को भ्रामक बताया है। आयोग के अनुसार, यह आंकड़ा ऐसे मतदाताओं से जुड़ा है जिन्हें मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या डुप्लीकेट जैसी श्रेणियों में रखा गया है। आयोग ने यह भी कहा है कि पात्र मतदाताओं को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया है। CEC के इस्तीफे की भी मांग SIR को लेकर विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग को इस प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए। कुछ विपक्षी दल CEC के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग लगातार SIR प्रक्रिया का बचाव कर रहा है और उसका कहना है कि मतदाता सूची को अपडेट करना और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है। Form 6 को लेकर भी विवाद SIR विवाद के बीच Form 6 में कथित बदलाव का मुद्दा भी सामने आया है। विपक्ष की ओर से इस पर सवाल उठाए गए हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है और कोर्ट ने Form 6 से जुड़े रिकॉर्ड को देखने की बात कही है। इस मुद्दे ने विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच पहले से चल रही तनातनी को और बढ़ा दिया है। आगे भी जारी रह सकता है विरोध ‘Save Democracy March’ को विपक्ष के SIR विरोधी अभियान की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने आने वाले दिनों में अलग-अलग राज्यों और जिलों में भी पदयात्रा, बैठक और प्रदर्शन करने की बात कही है। फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। एक तरफ विपक्ष मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं चुनाव आयोग प्रक्रिया को नियमों के तहत होने वाला revision बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR और voter list का मुद्दा राजनीति के साथ-साथ चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा के केंद्र में बना रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nobel Medicine Prize 2026

Nobel Medicine Prize 2026 GLP-1 से Sleep Research तक, इन 5 Scientific Discoveries पर नजर

दुनिया भर की नजर आज 5 अक्टूबर को होने वाले Nobel Medicine Prize 2026 के ऐलान पर है। हर साल की तरह इस बार भी यह देखना दिलचस्प होगा कि मेडिकल साइंस की कौन-सी खोज को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक सम्मानों में से एक के लिए चुना जाता है। Stockholm के Karolinska Institutet से होने वाली घोषणा का इंतजार वैज्ञानिकों के साथ आम लोगों को भी है। इस बार Nobel Medicine Prize को लेकर कई ऐसी रिसर्च चर्चा में हैं, जिनका सीधा असर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई देता है। Weight Loss Drugs, Sleep Research, Gene Editing, Cancer Treatment और Medical Imaging जैसे क्षेत्रों ने इस साल खास ध्यान खींचा है। हालांकि, अंतिम फैसला Nobel Committee ही करेगी और आधिकारिक घोषणा होने तक किसी भी नाम को विजेता नहीं माना जा सकता। Weight Loss Drugs से जुड़ी Research पर सबसे ज्यादा चर्चा इस साल की संभावित Nobel चर्चा में GLP-1 Research सबसे प्रमुख नामों में है। GLP-1 शरीर में भूख और Blood Sugar को नियंत्रित करने वाले सिस्टम से जुड़ा हार्मोन है। इसी रिसर्च ने आगे चलकर Diabetes और Obesity के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नई पीढ़ी की दवाओं का रास्ता तैयार किया। इस क्षेत्र में Daniel Drucker, Jens Juul Holst और Svetlana Mojsov के नाम चर्चा में हैं। इन वैज्ञानिकों के काम ने GLP-1 की भूमिका को समझने में अहम योगदान दिया। आज जिन दवाओं को वजन कम करने और ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए जाना जाता है, उनके पीछे इसी तरह की लंबी वैज्ञानिक रिसर्च रही है। Sleep Research ने भी बढ़ाई उम्मीद Nobel Medicine की संभावित चर्चाओं में Sleep-Wake System भी शामिल है। इस क्षेत्र में Emmanuel Mignot और Masashi Yanagisawa के नाम सामने आते हैं। Orexin से जुड़ी उनकी रिसर्च ने यह समझने में मदद की कि हमारे शरीर में नींद और जागने का सिस्टम किस तरह काम करता है। खासकर Narcolepsy जैसे Sleep Disorder को समझने में इस खोज का महत्व रहा है। Gene Editing में David Liu का नाम Medical Science की दुनिया में Gene Editing पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। इस क्षेत्र में वैज्ञानिक David Liu का नाम भी संभावित दावेदारों की चर्चा में है। David Liu और उनकी टीम ने Base Editing और Prime Editing जैसी तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन तकनीकों का मकसद DNA में ज्यादा सटीक तरीके से बदलाव करना है। भविष्य में Genetic Diseases के इलाज के लिहाज से ऐसी तकनीकों को काफी अहम माना जाता है। Cancer Treatment में CAR-T Therapy Cancer के इलाज में हुई प्रगति भी इस साल Nobel Medicine की चर्चा का हिस्सा है। खास तौर पर CAR-T Cell Therapy ने Blood Cancer के कुछ मामलों में इलाज की नई उम्मीद पैदा की है। इस तकनीक में मरीज की अपनी Immune Cells यानी T-Cells को तैयार किया जाता है, ताकि वे Cancer Cells को पहचानकर उनसे लड़ सकें। इस क्षेत्र में अमेरिकी वैज्ञानिक Carl June का नाम भी चर्चा में है। CAR-T Therapy को Cellular Immunotherapy की दिशा में बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है और इसकी वजह से गंभीर बीमारियों के इलाज को लेकर वैज्ञानिकों की उम्मीदें बढ़ी हैं। Medical Imaging की OCT Technology भी दौड़ में Optical Coherence Tomography यानी OCT भी उन रिसर्च में शामिल है, जिन पर Nobel watchers की नजर है। यह एक ऐसी Imaging Technology है, जिसमें Light Waves की मदद से शरीर के अंदर मौजूद tissues की बेहद बारीक तस्वीरें हासिल की जा सकती हैं। खासकर आंखों और Retina से जुड़ी बीमारियों की पहचान में OCT ने Medical Science को काफी मदद दी है। इस क्षेत्र से James Fujimoto, David Huang और Eric Swanson के नाम जुड़े हैं। Nobel Committee के फैसले पर सबकी नजर इन सभी नामों और रिसर्च को लेकर फिलहाल सिर्फ चर्चा है। Nobel Committee ने पुरस्कार की आधिकारिक घोषणा से पहले संभावित विजेताओं की कोई सूची जारी नहीं की है। इसलिए असली तस्वीर सामने आने में अभी घोषणा का इंतजार करना होगा। 2026 Nobel Prize announcements की शुरुआत Medicine Prize से हो रही है। इसके बाद Physics, Chemistry, Literature और Peace Prize का ऐलान किया जाएगा। Economics Prize की घोषणा बाद में होगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस साल Nobel Medicine Prize किस वैज्ञानिक या वैज्ञानिकों को मिलता है। Weight Loss Drugs से लेकर Gene Editing और Cancer Treatment तक, कई ऐसी खोजें चर्चा में हैं, जिनका असर आने वाले वर्षों में मेडिकल साइंस और आम जिंदगी दोनों पर दिखाई दे सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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ज्ञानेश कुमार

Supreme Court on CEC: ज्ञानेश कुमार को Suspend करने से इनकार, SIR के 14 फैसलों पर EC को Notice

चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने फिलहाल CEC को पद से हटाने या सस्पेंड करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। हालांकि, Special Intensive Revision (SIR) से जुड़े विवादित फैसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय बेंच ने की। याचिकाकर्ताओं की ओर से CEC के खिलाफ कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा यह है कि क्या चुनाव आयोग के कुछ फैसले तय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सामूहिक रूप से लिए गए थे या नहीं। SIR के 14 फैसलों पर क्यों उठे सवाल? याचिकाओं में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच SIR से जुड़े कम से कम 14 मामलों में चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद सामने आए। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि कुछ मामलों में अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद फैसले आगे बढ़ाए गए। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से इन दावों पर अलग पक्ष रखा गया है। आयोग का कहना है कि जिन पत्रों और आपत्तियों का हवाला दिया जा रहा है, उनका संदर्भ अलग प्रशासनिक मामलों से था और उन्हें SIR की नीति या IT से जुड़े फैसलों से जोड़ना सही नहीं है। Supreme Court ने CEC को Suspend क्यों नहीं किया? सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल CEC ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने का आदेश नहीं दिया। कोर्ट ने पहले चुनाव आयोग का जवाब और संबंधित दस्तावेज देखने की जरूरत बताई। अदालत यह भी जानना चाहती है कि जिन फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं, वे unanimity यानी सर्वसम्मति से, majority यानी बहुमत से या केवल CEC के स्तर पर लिए गए थे। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगर रिकॉर्ड की जांच में यह सामने आता है कि किसी फैसले में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो उस फैसले को वापस लेने पर विचार किया जा सकता है। Form-6 और Election Software का मुद्दा भी उठा इस मामले में सिर्फ SIR ही नहीं, बल्कि चुनावी डेटा और सिस्टम से जुड़े मुद्दे भी उठाए गए हैं। याचिकाओं में Form-6, ECINet और ERONet जैसे चुनावी सिस्टम से जुड़े कथित बदलावों और फैसलों पर भी सवाल किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि इन मामलों से जुड़े रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग और तकनीकी जानकारी की जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फैसले निर्धारित नियमों के मुताबिक लिए गए थे या नहीं। CEC के खिलाफ क्या मांग की गई? याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इसके अलावा SIR से जुड़े विवादित फैसलों की वैधता की जांच और कथित तौर पर एकतरफा लिए गए निर्णयों पर भी सवाल उठाए गए हैं। कुछ याचिकाओं में पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग भी की गई है। हालांकि, इन सभी आरोपों और मांगों पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। अब Election Commission को देना होगा जवाब सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब चुनाव आयोग को अपना पक्ष और संबंधित रिकॉर्ड अदालत के सामने रखना होगा। इसके बाद कोर्ट यह देखेगा कि विवादित फैसलों को लेने में संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं। फिलहाल CEC ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। इसलिए इस मामले में अगली सुनवाई और चुनाव आयोग का जवाब काफी महत्वपूर्ण होगा। SIR से जुड़ा यह विवाद इसलिए भी अहम है क्योंकि इसका सीधा संबंध मतदाता सूची, चुनावी प्रक्रिया और Election Commission की decision-making process से है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह साफ हो सकता है कि जिन फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं, उनमें नियमों का पालन हुआ था या नहीं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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SIR

SIR Protest: CJP नेताओं का Arrest का दावा, 10 अक्टूबर को Jantar Mantar पर बड़ा प्रदर्शन

मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विरोध अब और तेज होता नजर आ रहा है। CJP नेताओं ने दावा किया है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन से पहले सरकार उन्हें गिरफ्तार करने की तैयारी कर रही है। हालांकि, गिरफ्तारी की इस कथित तैयारी को लेकर सरकार या संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। CJP की ओर से 10 अक्टूबर को Jantar Mantar पर Protest का ऐलान किया गया है। संगठन SIR को लेकर अपनी आपत्तियां उठा रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहा है। अभिजीत दीपके बोले- गिरफ्तारी से नहीं डरेंगे CJP नेता अभिजीत दीपके ने गिरफ्तारी की आशंका के बीच कहा है कि वे डरने वाले नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर उन्हें रोकने या गिरफ्तार करने की कोशिश की जाती है, तब भी SIR के खिलाफ उनका विरोध जारी रहेगा। दीपके ने लोगों से 10 अक्टूबर को दिल्ली पहुंचने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें दिल्ली जाने से रास्ते में ही रोक दिया गया, तो जहां रोका जाएगा, वहीं से विरोध दर्ज कराया जाएगा। CJP नेताओं ने क्या दावा किया? CJP के नेताओं की ओर से दावा किया गया है कि अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, सौरव दास और संगठन से जुड़े कुछ अन्य लोगों को प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिया जा सकता है। नेताओं का आरोप है कि उन्हें गिरफ्तार करने की तैयारी की जा रही है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि संभावित गिरफ्तारी का यह दावा CJP नेताओं की ओर से किया गया है। अभी तक सरकार या पुलिस की तरफ से ऐसी किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। SIR को लेकर क्यों हो रहा विरोध? Special Intensive Revision यानी SIR के तहत मतदाता सूचियों के सत्यापन और संशोधन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस चल रही है। CJP का कहना है कि इस प्रक्रिया को लेकर कई सवाल हैं और इन्हीं मुद्दों को लेकर संगठन सड़क पर उतर रहा है। CJP ने SIR के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ भी अपनी आपत्तियां जाहिर की हैं। संगठन की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। 10 अक्टूबर को Jantar Mantar पर जुटने की तैयारी CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के Jantar Mantar पर प्रदर्शन की तैयारी की है। संगठन का कहना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग इस Protest में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचेंगे। नेताओं का कहना है कि संभावित गिरफ्तारी या किसी तरह की रोक के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में अब सभी की नजर 10 अक्टूबर के प्रदर्शन और उससे पहले होने वाली किसी प्रशासनिक कार्रवाई पर है। फिलहाल, CJP नेताओं के Arrest के दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस मामले में आगे पुलिस और सरकार की ओर से आने वाले बयान अहम होंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Supreme Court

Supreme Court की सख्त टिप्पणी: Crime रोकने के लिए सिर्फ Action नहीं, अपराधियों में Fear of Law भी जरूरी

दिल्ली-NCR में महिलाओं के खिलाफ सामने आईं दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ अपराध होने के बाद कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि अपराध करने वालों के मन में कानून का डर हो, ताकि ऐसी घटनाओं को पहले ही रोका जा सके। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में सामने आईं रेप की तीन घटनाओं का Suo Motu Cognizance लिया है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से महिलाओं की सुरक्षा और अपराधों की रोकथाम को लेकर कई सवाल पूछे। अपराधियों में कानून का डर होना जरूरी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपराध रोकने के लिए प्रभावी Deterrence जरूरी है। यानी अपराध करने वाले व्यक्ति को यह पता होना चाहिए कि कानून तोड़ने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। कोर्ट की चिंता सिर्फ आरोपियों को पकड़ने तक सीमित नहीं रही। सवाल यह भी है कि पुलिस ऐसी व्यवस्था कैसे बनाए कि अपराध की संभावना को पहले ही कम किया जा सके। CCTV लगाने से ही नहीं रुकेगा Crime कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर लगे CCTV कैमरों और उनकी निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए। अदालत ने जानना चाहा कि अगर किसी इलाके में कैमरे लगे हैं, तो क्या उनकी लगातार निगरानी भी की जाती है? दरअसल, CCTV किसी घटना के बाद आरोपी की पहचान करने में मदद कर सकता है, लेकिन अपराध को होने से पहले रोकने के लिए Active Police Monitoring और तेज Response System जरूरी है। महिलाओं को हर जगह महसूस होनी चाहिए Safety सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली में महिलाओं को दिन हो या रात, सड़क पर चलने से लेकर मेट्रो और दूसरे सार्वजनिक स्थानों तक सुरक्षित महसूस होना चाहिए। अदालत ने माना कि सिर्फ घटना के बाद जांच और गिरफ्तारी से समस्या का पूरा समाधान नहीं होगा। पुलिस की मौजूदगी, संवेदनशील इलाकों में निगरानी और समय पर कार्रवाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। 3 रेप मामलों पर Supreme Court की नजर सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2026 को दिल्ली-NCR में हाल में सामने आईं रेप की घटनाओं से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स का स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद अदालत ने दिल्ली पुलिस और संबंधित प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा। कोर्ट की सुनवाई में मुख्य सवाल यही रहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों को रोकने के लिए जमीन पर किस तरह की व्यवस्था काम कर रही है और उसमें कहां सुधार की जरूरत है। Prevention पर Court का फोकस सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का सबसे अहम पहलू अपराध होने के बाद की कार्रवाई के बजाय Crime Prevention पर जोर देना है। अदालत का कहना है कि कानून का डर तभी प्रभावी होगा, जब पुलिस की निगरानी मजबूत हो और अपराध की आशंका वाले स्थानों पर समय रहते कार्रवाई हो। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोर्ट की यह सुनवाई एक बार फिर यह सवाल सामने लाती है कि सार्वजनिक जगहों को सुरक्षित बनाने के लिए पुलिस, प्रशासन और स्थानीय व्यवस्था के स्तर पर कितनी प्रभावी तैयारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Weather

Weather Update: लखनऊ में 40 हजार घरों में पानी, बिहार के 466 गांव बाढ़ में; MP में 7 अक्टूबर से Rain Alert

देश के कई हिस्सों में अक्टूबर की शुरुआत के साथ मौसम (Weather) का मिजाज तेजी से बदल रहा है। उत्तर प्रदेश और बिहार में बाढ़ ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है, वहीं मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर बारिश के आसार बन रहे हैं। दूसरी ओर राजस्थान में गर्मी ने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है और कई जगह तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया है। लखनऊ में बाढ़ से हजारों घर प्रभावित उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में पानी भर गया है। कई रिहायशी इलाकों में घरों और सड़कों तक पानी पहुंचने से लोगों को रोजमर्रा के काम में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फैजुल्लागंज, दौदनगर और गोमती नगर एक्सटेंशन समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। प्रभावित परिवारों के सामने साफ पानी, दवाइयों और जरूरी सामान की समस्या भी खड़ी हो गई है। प्रशासन और राहत टीमों की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में मदद पहुंचाने का काम जारी है। बाढ़ का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। कई जगह सड़कें जलमग्न होने से आवाजाही भी प्रभावित हुई है। ऐसे में लोगों को नदी और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। बिहार के 466 गांवों में बाढ़ का असर बिहार में भी बाढ़ की स्थिति लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। राज्य के कई जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद 466 गांवों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ के कारण ग्रामीण इलाकों में आवागमन और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। राहत और बचाव टीमों की मदद से प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बिहार के कुछ हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना भी जताई है। ऐसे में पहले से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। MP Weather: 7 अक्टूबर से फिर बदल सकता है मौसम मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद मौसम फिलहाल गर्म बना हुआ है। दिन में तेज धूप के कारण कई शहरों में तापमान बढ़ा है। हालांकि प्रदेश के लोगों को जल्द ही गर्मी से थोड़ी राहत मिल सकती है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 7 अक्टूबर से पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है। पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर सहित कई इलाकों में हल्की बारिश और गरज-चमक के आसार हैं। यानी एक तरफ प्रदेश के कई हिस्सों में दिन के समय गर्मी परेशान कर रही है, तो दूसरी तरफ पूर्वी MP में बारिश की दस्तक से मौसम फिर करवट ले सकता है। Rajasthan में 41°C तक पहुंचा पारा राजस्थान में मानसून की विदाई के बाद गर्मी ने फिर अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य के कई हिस्सों में दिन का तापमान तेजी से बढ़ा है। पिलानी में अधिकतम तापमान 41°C तक पहुंच गया, जिससे अक्टूबर की शुरुआत में ही गर्मी का असर साफ नजर आ रहा है। जैसलमेर, चूरू, बीकानेर, बाड़मेर और श्रीगंगानगर जैसे इलाकों में भी तापमान सामान्य से ऊपर रहने की स्थिति बनी हुई है। दिन में तेज गर्मी के कारण लोगों को परेशानी हो रही है, जबकि सुबह और रात के समय मौसम अपेक्षाकृत राहत देने वाला बना हुआ है। कहीं बाढ़ तो कहीं गर्मी, मौसम ने बदला रंग देश में इस समय मौसम का मिजाज अलग-अलग नजर आ रहा है। लखनऊ और बिहार में जहां बाढ़ और जलभराव लोगों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है, वहीं मध्य प्रदेश में बारिश की वापसी के संकेत मिल रहे हैं। राजस्थान में इसके उलट गर्मी का असर बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में बारिश, तापमान और नदियों के जलस्तर में होने वाले बदलाव पर सभी की नजर रहेगी। खासकर बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की Advisory को गंभीरता से लेने की जरूरत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UP Assembly Election 2027

UP Assembly Election 2027: ओवैसी का बड़ा बयान, ‘अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा, अपना Political Haq लेगा’

UP Assembly Election 2027 को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी हलचल धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। नेताओं के दौरे और बयानबाजी के बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिम राजनीतिक भागीदारी को लेकर बड़ा बयान दिया है। बहराइच और श्रावस्ती के दौरे पर पहुंचे ओवैसी ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि अब ‘अब्दुल’ सिर्फ दरी बिछाने और नारे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अपना राजनीतिक हक मांगेगा। ओवैसी के इस बयान ने यूपी की चुनावी राजनीति में एक बार फिर Political Representation और मुस्लिम वोटर्स की हिस्सेदारी के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। ‘अब्दुल अब सिर्फ दरी नहीं बिछाएगा’ ओवैसी ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय मुस्लिम समाज से वोट की उम्मीद की जाती है, लेकिन राजनीतिक हिस्सेदारी देने की बात आने पर उसे पीछे कर दिया जाता है। उन्होंने इसी संदर्भ में ‘अब्दुल’ का उदाहरण दिया। AIMIM प्रमुख का कहना है कि मुस्लिम समाज को केवल चुनावी समर्थन देने वाले वर्ग के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उसे राजनीति और सत्ता में अपनी हिस्सेदारी के लिए भी आवाज उठानी चाहिए। ओवैसी ने अपने भाषण में कहा कि अब ‘अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा’, बल्कि अपने Political Rights और हिस्सेदारी की बात करेगा। सपा और विपक्ष पर ओवैसी का निशाना ओवैसी ने समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि यूपी में मुस्लिमों की अलग राजनीतिक ताकत को मजबूत होते देख कई दल असहज हैं। AIMIM प्रमुख लगातार यह कहते रहे हैं कि मुस्लिम समाज को किसी एक पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनकी राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा राजनीतिक प्रतिनिधित्व रहा है। हालांकि, ओवैसी के इन आरोपों पर संबंधित विपक्षी दलों का पक्ष अलग हो सकता है। इसलिए उनके बयानों को राजनीतिक दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। भिनगा सीट से उम्मीदवार का ऐलान श्रावस्ती दौरे के दौरान ओवैसी ने भिनगा विधानसभा सीट से हाजी दद्दन खान को AIMIM का उम्मीदवार घोषित किया। दद्दन खान हाल में बसपा छोड़कर AIMIM में शामिल हुए हैं। उम्मीदवार की घोषणा के साथ ही AIMIM ने यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी सक्रियता का संकेत दिया है। पार्टी आने वाले समय में दूसरे क्षेत्रों में भी संगठन और उम्मीदवारों को लेकर अपनी रणनीति सामने रख सकती है। गठबंधन पर भी AIMIM का रुख यूपी चुनाव को लेकर ओवैसी पहले ही कह चुके हैं कि बीजेपी को सत्ता में आने से रोकने के लिए उनकी पार्टी विपक्षी दलों के साथ गठबंधन पर विचार कर सकती है। हालांकि, अभी तक किसी बड़े गठबंधन को लेकर अंतिम तस्वीर सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि चुनाव नजदीक आने पर AIMIM किन सीटों पर उम्मीदवार उतारती है और दूसरे राजनीतिक दलों के साथ उसका समीकरण किस दिशा में जाता है। SIR के मुद्दे का भी किया जिक्र ओवैसी ने Special Intensive Revision (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि AIMIM इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गई थी। SIR को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक बहस चल रही है। यूपी चुनाव की तैयारियों के बीच मतदाता सूची और वोटर अधिकार से जुड़े मुद्दे भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनते जा रहे हैं। UP Election 2027 में AIMIM की क्या रणनीति? असदुद्दीन ओवैसी के लगातार यूपी दौरे और उम्मीदवारों की शुरुआती घोषणाओं से AIMIM की चुनावी सक्रियता दिखाई दे रही है। पार्टी मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व के साथ-साथ अपने संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर दे रही है। फिलहाल यूपी चुनाव में अभी काफी समय है और राजनीतिक समीकरण बदलने की गुंजाइश बनी हुई है। ऐसे में ओवैसी का ‘अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा’ वाला बयान आने वाले चुनाव में Muslim Political Representation के मुद्दे को कितना बड़ा बनाता है, यह आगे की राजनीतिक गतिविधियों से साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Hamam Al-Hammami

Indian Pilot Attack: Hamam Al-Hammami की पुरानी नौकरी से जुड़े चौंकाने वाले दावे, जांच जारी

फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हुए हमले के मामले में आरोपी सह-पायलट की पहचान हमाम अल-हमामी (Hamam Al-Hammami) के तौर पर हुई है। घटना के बाद से आरोपी की पुरानी नौकरी, उसकी गतिविधियों और कथित कट्टरपंथी विचारों को लेकर जांच तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमाम अल-हमामी पहले Oman Air में काम कर चुका था। उसके पुराने रिकॉर्ड को खंगालने पर यह बात सामने आई है कि कंपनी में रहते हुए उसके व्यवहार और कथित चरमपंथी विचारों को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं उठी थीं। कॉकपिट में भारतीय कैप्टन पर किया हमला यह मामला उस समय सामने आया जब फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, उड़ान के दौरान सह-पायलट हमाम अल-हमामी ने कॉकपिट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया। घटना के बीच विमान की स्थिति भी कुछ समय के लिए गंभीर हो गई और विमान तेजी से नीचे जाने लगा। हालांकि, कैप्टन ने हालात संभालने की कोशिश की। बाद में विमान को सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट की ओर डायवर्ट किया गया, जहां उसकी सुरक्षित लैंडिंग कराई गई। घटना के बाद कैप्टन स्मित मच्छार और आरोपी सह-पायलट को संयुक्त अरब अमीरात ले जाया गया। मामले की जांच अब कई स्तरों पर की जा रही है। Oman Air में भी उठे थे सवाल हमाम अल-हमामी के पुराने करियर को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। बताया गया है कि वह करीब सात साल तक Oman Air से जुड़ा रहा था। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कंपनी में रहते हुए उसके कथित चरमपंथी विचारों को लेकर सुरक्षा अधिकारियों ने चिंता जताई थी। इसके बाद उसे उड़ान से जुड़ी जिम्मेदारियों से हटाकर दूसरी भूमिका में भेजे जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस पूरे मामले में अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में घटनाओं की परिस्थितियों और समय को लेकर अंतर दिखाई देता है। इसलिए इन दावों की आधिकारिक जांच का इंतजार किया जा रहा है। Al-Qaeda से प्रभावित होने का भी दावा हमाम अल-हमामी को लेकर कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि वह Al-Qaeda की विचारधारा से प्रभावित था। जांच एजेंसियां उसके पुराने सोशल मीडिया अकाउंट्स और ऑनलाइन गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही हैं। रिपोर्टों में कथित तौर पर चरमपंथी सामग्री से जुड़े उसके संपर्क और गतिविधियों का जिक्र किया गया है। हालांकि, अभी तक अल-कायदा के साथ उसके सीधे संबंध की स्वतंत्र और अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। यही वजह है कि जांच पूरी होने तक इन दावों को आरोप या जांच के एंगल के तौर पर ही देखा जा रहा है। कैसे बचा बड़ा हादसा? फ्लाइट के कॉकपिट में हुई इस घटना के बाद विमान में मौजूद यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल बन गई थी। स्थिति बिगड़ने के बावजूद विमान को संभाला गया और उसे ताबुक में सुरक्षित उतारा गया। कैप्टन स्मित मच्छार की भूमिका को लेकर भी घटना के बाद काफी चर्चा हुई है। हमले के बावजूद विमान को सुरक्षित दिशा में ले जाना और यात्रियों को बचाना इस पूरे घटनाक्रम का अहम हिस्सा रहा। अब जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे? जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमाम अल-हमामी ने विमान के अंदर हमला क्यों किया और क्या इसके पीछे कोई पूर्व योजना थी। इसके साथ ही उसके पुराने रोजगार रिकॉर्ड, कथित कट्टरपंथी गतिविधियों और सुरक्षा जांच से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि अगर उसके पुराने रिकॉर्ड में सुरक्षा संबंधी चिंताएं थीं, तो वह बाद में दूसरी एयरलाइन में पायलट की जिम्मेदारी तक कैसे पहुंचा। फिलहाल मामले की जांच जारी है। Hamam Al-Hammami के कथित कट्टरपंथी संबंधों और Al-Qaeda से जुड़े दावों पर अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tirupati

Tirupati Pharma Factory में Boiler Blast, 5 कर्मचारियों की मौत; 10 की हालत गंभीर

आंध्र प्रदेश के तिरुपति (Tirupati) जिले से शनिवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। श्री सिटी के SEZ स्थित TIL Healthcare की फार्मा यूनिट में अचानक बॉयलर फट गया। धमाका इतना तेज था कि फैक्ट्री में काम कर रहे कर्मचारियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। हादसे में अब तक 5 कर्मचारियों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 10 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। अचानक हुआ जोरदार Boiler Blast जानकारी के मुताबिक, यह हादसा शनिवार सुबह फैक्ट्री में हुआ। उस समय कर्मचारी अपनी शिफ्ट में काम कर रहे थे। इसी दौरान बॉयलर में अचानक जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट के बाद फैक्ट्री परिसर में आग और धुएं का माहौल बन गया। धमाके की आवाज काफी दूर तक सुनाई दी। हादसे के बाद कर्मचारियों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कई लोगों ने तुरंत बाहर निकलकर अपनी जान बचाई, जबकि कुछ कर्मचारी हादसे की चपेट में आ गए। Rescue Team ने संभाला मोर्चा घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं। राहत और बचाव दल ने फैक्ट्री के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। घायलों को तत्काल आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। बताया जा रहा है कि करीब 10 घायल कर्मचारियों की हालत गंभीर है। डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है और जरूरत के अनुसार कुछ घायलों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हादसे की वजह अभी सामने नहीं आई फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि बॉयलर में विस्फोट आखिर किस वजह से हुआ। क्या यह तकनीकी खराबी थी या फिर किसी दूसरे कारण से यह हादसा हुआ, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस और संबंधित विभाग की टीमें घटनास्थल से जानकारी जुटा रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही Boiler Blast की असली वजह सामने आने की उम्मीद है। परिवारों में पसरा मातम हादसे में कर्मचारियों की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवारों में मातम पसर गया। फैक्ट्री में काम करने वाले अन्य कर्मचारियों और उनके परिजनों में भी चिंता का माहौल है। आंध्र प्रदेश के मंत्री नारा लोकेश ने हादसे पर दुख जताया है। उन्होंने अधिकारियों को राहत-बचाव कार्य में तेजी लाने और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। तिरुपति सांसद मद्दिला गुरुमूर्ति ने भी घटना पर शोक व्यक्त किया है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घायलों का इलाज और राहत कार्य है। वहीं, इस गंभीर औद्योगिक हादसे की जांच जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Guwahati Nightclub

Guwahati Nightclub में हंगामा महिला से मारपीट और बदसलूकी का आरोप, Manager हिरासत में

असम के गुवाहाटी से एक नाइटक्लब (Guwahati Nightclub) में महिला के साथ कथित बदसलूकी और मारपीट का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया। वीडियो में दो महिलाएं एक महिला के साथ मारपीट करती दिखाई दे रही हैं। वहीं, क्लब के बाउंसरों पर भी घटना के दौरान उचित कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। Nightclub में महिला के साथ मारपीट का आरोप मिली जानकारी के मुताबिक, गुवाहाटी के एक नाइटक्लब में किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने के बाद एक महिला के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। आरोप है कि उसके कपड़े भी उतारे गए और उसके साथ बदसलूकी की गई। वायरल वीडियो में दो महिलाएं कथित तौर पर महिला को लात मारती नजर आ रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं। बाउंसरों की भूमिका पर भी सवाल इस मामले में नाइटक्लब के बाउंसरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। आरोप है कि जब महिला के साथ मारपीट हो रही थी, तब उसे रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। हालांकि, घटना के पूरे क्रम और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर पुलिस की जांच अभी जारी है। वायरल वीडियो के अलावा मौके पर मौजूद लोगों और क्लब स्टाफ से मिली जानकारी भी जांच में अहम हो सकती है। Club Manager हिरासत में घटना के बाद पुलिस ने नाइटक्लब के मैनेजर को हिरासत में लिया है। उससे घटना को लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवाद की शुरुआत किस बात से हुई और मारपीट में कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच के दौरान पुलिस वायरल वीडियो और क्लब में लगे CCTV फुटेज की भी जांच कर सकती है। इससे घटना का पूरा क्रम समझने और आरोपों की पुष्टि करने में मदद मिल सकती है। Viral Video के बाद सामने आया मामला बताया जा रहा है कि घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से लोगों के बीच पहुंचा। वीडियो में महिला के साथ मारपीट का दृश्य दिखाई दे रहा है, जिसके बाद नाइटक्लब में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि घटना में किसकी क्या भूमिका थी और लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मां चंद्रघंटा

Navratri 2026: तीसरे दिन करें मां चंद्रघंटा की पूजा, जानें महत्त्व, कथा और मंत्र

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है। उनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होता है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनका स्वरूप साहस, शक्ति और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का प्रतीक माना जाता है। मां चंद्रघंटा की कथा पौराणिक मान्यताओं में मां चंद्रघंटा को देवी दुर्गा का युद्ध के लिए तत्पर स्वरूप बताया गया है। मान्यता है कि वे अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और दुष्ट शक्तियों का सामना करती हैं। उनका स्वरूप यह संदेश देता है कि शक्ति के साथ विवेक और साहस भी जरूरी हैं। मां का स्वरूप और महत्त्व पूजा विधि मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः। भोग: मां को दूध से बनी मिठाई या खीर अर्पित करने की परंपरा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Jantar Mantar

Jantar Mantar Ban: 1993 से विरोध की आवाज बना जंतर-मंतर, अब प्रदर्शन के नियमों में बदलाव

दिल्ली का जंतर-मंतर (Jantar Mantar) सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि देशभर के लोगों की आवाज उठाने का एक बड़ा मंच रहा है। जब भी किसी मुद्दे पर सरकार का ध्यान खींचना होता था, लोग यहां धरना देने पहुंच जाते थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे का आंदोलन हो या भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन, जंतर-मंतर ने कई बड़े आंदोलनों को करीब से देखा है। लेकिन अब यहां धरना-प्रदर्शन को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। दिल्ली पुलिस के ताजा फैसले के बाद जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची में शामिल नहीं है। इसकी जगह दिल्ली में रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए तय किया गया है। इस फैसले के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर जिस जगह पर पिछले करीब 33 साल से लोग अपनी मांगें उठाते रहे, वहां प्रदर्शन की व्यवस्था क्यों बदली गई? Jantar Mantar Protest Ban: क्या है पूरा मामला? Jantar Mantar पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव को लेकर 12 अक्टूबर 2026 को चर्चा तेज हुई। दिल्ली पुलिस के आदेश के अनुसार, गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों में बदलाव किया गया है। अब प्रदर्शन के लिए तीन जगहों को तय किया गया है। इनमें सेंट्रल दिल्ली का रामलीला मैदान, नॉर्थ दिल्ली का बुराड़ी मैदान और ईस्ट दिल्ली का CBD ग्राउंड शामिल हैं। इस फैसले से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और दूसरे समूहों के लिए अपनी रणनीति बदलने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार खत्म हो गया है। प्रदर्शन के लिए तय नियमों और अनुमति की प्रक्रिया का पालन करना जरूरी रहेगा। 1993 से विरोध-प्रदर्शन का प्रमुख केंद्र रहा जंतर-मंतर जंतर-मंतर को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की प्रमुख जगह के रूप में पहचान 1993 के आसपास मिली। इससे पहले दिल्ली के बोट क्लब इलाके में बड़े धरने और सभाएं हुआ करती थीं। अक्टूबर 1988 में किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान बोट क्लब पर जुटे थे। इसके बाद वहां प्रदर्शनों पर पाबंदियां लगने लगीं और दूसरे स्थान की जरूरत महसूस हुई। धीरे-धीरे जंतर-मंतर प्रदर्शनकारियों के लिए एक प्रमुख ठिकाना बन गया। संसद के नजदीक होने के कारण यहां होने वाले प्रदर्शनों पर मीडिया और राजनीतिक दलों का ध्यान भी आसानी से जाता था। यही वजह रही कि अगले कई दशकों तक यह जगह अलग-अलग आंदोलनों का गवाह बनी। Anna Hazare Movement: अन्ना आंदोलन से देशभर में चर्चा साल 2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने जंतर-मंतर को देशभर में सुर्खियों में ला दिया था। 5 अप्रैल 2011 को अन्ना हजारे ने लोकपाल कानून की मांग को लेकर अनशन शुरू किया। इस आंदोलन को बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिला। अरविंद केजरीवाल समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता भी इससे जुड़े थे। भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी इस आवाज ने राष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस शुरू कर दी और आगे चलकर आम आदमी पार्टी के गठन का रास्ता भी बना। उस दौर में जंतर-मंतर पर जुटने वाली भीड़ ने दिखाया कि किसी मुद्दे को लेकर लोगों का शांतिपूर्ण विरोध किस तरह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है। Farmers Protest: तमिलनाडु के किसानों ने भी उठाई आवाज 2017 में तमिलनाडु के किसानों ने कर्ज, सूखे और आर्थिक परेशानियों को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन किया था। किसानों की मांगों में कर्ज राहत, सूखा राहत पैकेज और कावेरी जल विवाद से जुड़े मुद्दे शामिल थे। किसानों का यह प्रदर्शन लंबे समय तक चर्चा में रहा। जंतर-मंतर पर जुटे किसानों ने अपनी समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश की। इस आंदोलन ने खेती-किसानी से जुड़े संकट और किसानों की मांगों पर एक बार फिर ध्यान खींचा। Wrestlers Protest: पहलवानों के धरने ने खींचा देश का ध्यान साल 2023 में जंतर-मंतर पर भारतीय कुश्ती जगत से जुड़े पहलवानों का प्रदर्शन भी काफी चर्चा में रहा। विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया समेत कई पहलवानों ने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की थी। पहलवानों के इस धरने ने खेल जगत के साथ-साथ राजनीति में भी बहस छेड़ दी। प्रदर्शन के दौरान खिलाड़ियों ने अपनी शिकायतों की जांच और जवाबदेही की मांग उठाई। इस आंदोलन ने एक बार फिर जंतर-मंतर को राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन भी चर्चा में अक्टूबर 2026 में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी विवाद सामने आया। संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को प्रदर्शन करने की घोषणा की थी। दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार, संगठन ने 7 अक्टूबर को अनुमति के लिए आवेदन किया था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत सामान्य तौर पर कम से कम 10 दिन पहले आवेदन करना होता है। इसके बाद जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने का फैसला भी चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, किसी भी प्रदर्शन की अनुमति उसके आवेदन, सुरक्षा व्यवस्था और लागू नियमों के आधार पर तय की जाती है। Jantar Mantar पर पहले भी लग चुकी हैं पाबंदियां जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन को लेकर विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। साल 2017 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने स्थानीय निवासियों की शिकायतों के बाद यहां प्रदर्शनों को लेकर प्रतिबंधात्मक निर्देश दिए थे। शिकायतों में शोर, गंदगी और आसपास के लोगों को होने वाली परेशानी जैसे मुद्दे शामिल थे। बाद में 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर और बोट क्लब क्षेत्र में प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध के मामले पर सुनवाई की। अदालत ने शांतिपूर्ण विरोध को नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा माना, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित नियम लागू किए जा सकते हैं। इससे साफ है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर बहस केवल किसी एक आंदोलन तक सीमित नहीं रही है। इसमें नागरिकों के अधिकार, स्थानीय लोगों की परेशानी और सुरक्षा व्यवस्था जैसे कई पहलू शामिल रहे हैं। अब कहां कर सकेंगे लोग धरना-प्रदर्शन? दिल्ली पुलिस के ताजा आदेश के...
Rahul Gandhi

Rahul Gandhi on CEC: राहुल गांधी बोले- ज्ञानेश कुमार के मैसेज आते हैं, इस्तीफा देकर हटें

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर एक बार फिर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के मैसेज उन्हें आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह ज्ञानेश कुमार को अपराधी नहीं मानते, बल्कि उनके मुताबिक उनसे गड़बड़ी कराई जा रही है। राहुल ने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा देकर रास्ते से हटने की मांग की है। राहुल गांधी का यह बयान चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर चल रहे विवाद के बीच आया है। विपक्ष लगातार चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहा है। CEC Gyanesh Kumar पर राहुल गांधी ने क्या कहा? राहुल गांधी के मुताबिक, ज्ञानेश कुमार के साथ उनके मैसेज के जरिए संपर्क होता है। उन्होंने कहा कि वह उन्हें अपराधी नहीं मानते, लेकिन आरोप लगाया कि उनसे गलत काम कराया जा रहा है। राहुल ने यह भी मांग की कि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा दें और इस पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट हो। हालांकि, राहुल गांधी के इन आरोपों को लेकर सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि होना जरूरी है। उनके बयान और आरोपों को चुनाव आयोग की ओर से दिए गए आधिकारिक जवाब से अलग समझना चाहिए। SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद? मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया SIR को लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कुछ मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। वहीं, चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया के लिए निर्धारित नियमों के तहत काम करता है। इस मुद्दे पर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच मतभेद ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। Supreme Court जाने की तैयारी में INDIA Bloc राहुल गांधी और विपक्षी दलों ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को कानूनी स्तर पर उठाने की बात कही है। INDIA Bloc का रुख है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर स्पष्टता मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने पर संबंधित पक्षों की दलीलें और उपलब्ध दस्तावेज इस विवाद के कानूनी पहलुओं को समझने में अहम होंगे। चुनाव आयोग पर बढ़ा राजनीतिक दबाव ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी का बयान ऐसे समय आया है, जब चुनाव आयोग की भूमिका विपक्ष के निशाने पर है। कांग्रेस इस मुद्दे को लोकतांत्रिक प्रक्रिया और निष्पक्ष चुनाव से जोड़कर उठा रही है। फिलहाल, इस विवाद में राहुल गांधी के आरोप, चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े तथ्य अलग-अलग देखना जरूरी है। आगे इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और संबंधित पक्ष क्या प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold Price

Gold Price Today: सोना ₹1,005 सस्ता, 10 ग्राम Gold ₹1.48 लाख पर

Gold Price की कीमतों में आज गिरावट दर्ज की गई है। सोना ₹1,005 सस्ता हो गया, जिसके बाद 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.48 लाख पर आ गया। सोने की कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को कुछ राहत मिल सकती है, जो शादी-ब्याह या त्योहारों के लिए गहने खरीदने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, सोने के भाव में रोजाना बदलाव होता है। ऐसे में खरीदारी करने से पहले अपने शहर में ताजा रेट की जानकारी लेना जरूरी है। Gold Rate Today: आज कितना सस्ता हुआ सोना? आज सोने की कीमत में ₹1,005 की गिरावट आई है। इसके बाद 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.48 लाख बताया जा रहा है। सोने की कीमतों पर नजर रखने वाले खरीदारों के लिए यह बदलाव अहम है, क्योंकि भाव में थोड़ी सी कमी भी बड़ी खरीदारी के दौरान कीमत पर असर डाल सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि 24 कैरेट सोना मुख्य रूप से निवेश के लिए खरीदा जाता है, जबकि गहने बनाने में आमतौर पर 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल होता है। इसलिए ज्वेलरी खरीदते समय 22 कैरेट का भाव भी जरूर चेक करें। सितंबर में भी ₹8,000 तक गिरा था सोने का भाव सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव पिछले महीने भी देखने को मिला था। सितंबर में सोना करीब ₹8,000 तक सस्ता हुआ था। अब एक बार फिर कीमतों में गिरावट आने से बाजार में सोने के अगले रुख को लेकर चर्चा बढ़ गई है। सोने के भाव पर केवल घरेलू मांग का असर नहीं पड़ता। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की चाल, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई कारण गोल्ड रेट को प्रभावित करते हैं। इसी वजह से कभी सोने की कीमत तेजी से बढ़ती है, तो कभी इसमें गिरावट देखने को मिलती है। क्या अभी Gold खरीदना सही रहेगा? अगर आप लंबे समय से सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा भाव पर नजर रख सकते हैं। हालांकि, सिर्फ एक दिन की गिरावट देखकर जल्दबाजी में फैसला लेना जरूरी नहीं है। आने वाले दिनों में कीमतें किस दिशा में जाएंगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना मुश्किल है। खरीदारी से पहले अपने बजट और जरूरत को ध्यान में रखें। अगर गहने खरीद रहे हैं, तो सोने की कीमत के अलावा मेकिंग चार्ज और लागू GST को भी जोड़ें। साथ ही, हॉलमार्क वाला सोना खरीदना बेहतर रहता है। 22 और 24 कैरेट Gold Rate में क्या है अंतर? 24 कैरेट सोना अधिक शुद्ध होता है, जबकि 22 कैरेट सोने में अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं, जिससे गहने बनाना आसान होता है। इसी कारण दोनों की कीमतों में अंतर रहता है। यह भी ध्यान रखें कि ₹1.48 लाख का भाव 10 ग्राम 24 कैरेट सोने के लिए बताया गया है। आपके शहर में वास्तविक कीमत अलग हो सकती है। खरीदारी से पहले स्थानीय ज्वेलर से ताजा रेट जरूर पता करें। Gold Price Today: आगे क्या रहेगा सोने का रुख? सोने की कीमत में आई आज की गिरावट ने खरीदारों का ध्यान खींचा है। सितंबर में भी करीब ₹8,000 की कमी दर्ज होने के बाद अब ₹1,005 की ताजा गिरावट बाजार के लिए चर्चा का विषय है। फिलहाल सोने की कीमतों में आगे तेजी आएगी या गिरावट जारी रहेगी, यह बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। इसलिए निवेश या खरीदारी का फैसला करने से पहले ताजा भाव और बाजार के रुझान को समझना जरूरी है। नोट: यह खबर उपलब्ध कराए गए सोने के भाव के आंकड़ों पर आधारित है। प्रकाशन से पहले ताजा रेट और सितंबर में हुई गिरावट की पुष्टि जरूर करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 500 अंक टूटा, Nifty में 150 अंकों की गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में सोमवार, 12 अक्टूबर को कारोबार के दौरान गिरावट देखने को मिली। एक समय बाजार में तेजी की उम्मीद नजर आ रही थी, लेकिन कुछ ही देर में बिकवाली बढ़ गई। सेंसेक्स करीब 500 अंक टूटकर 71,900 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 150 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। खासतौर पर IT और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में दबाव देखने को मिला। बाजार में अचानक आई इस कमजोरी से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार संभलता है या गिरावट का सिलसिला आगे भी जारी रहता है। Sensex Today: 71,900 के आसपास पहुंचा बाजार सोमवार को शेयर बाजार की शुरुआत सकारात्मक रुख के साथ हुई थी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में तेजी दिखाई दी, लेकिन बाद में बिकवाली हावी हो गई। सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा गिरकर करीब 71,900 के स्तर पर कारोबार करने लगा। वहीं, निफ्टी भी लगभग 150 अंक नीचे आ गया। बाजार में इस उतार-चढ़ाव के बीच निवेशक सावधानी बरतते नजर आए। जिन निवेशकों को सुबह बाजार में तेजी की उम्मीद थी, उनके लिए अचानक आई गिरावट ने चिंता बढ़ा दी। IT और Banking Stocks में सबसे ज्यादा बिकवाली सोमवार के कारोबार में IT और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों पर दबाव देखने को मिला। टेक महिंद्रा समेत कुछ आईटी शेयरों में कमजोरी रही। वहीं, SBI, ICICI Bank और Axis Bank जैसे प्रमुख बैंकिंग शेयरों में भी बिकवाली का असर दिखाई दिया। इन सेक्टरों के बड़े शेयरों में गिरावट आने से प्रमुख बाजार सूचकांकों पर दबाव बढ़ा। हालांकि, सभी शेयरों में एक जैसी कमजोरी नहीं रही। ऑटो सेक्टर के कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन भी अलग-अलग रहा। Stock Market में गिरावट की क्या है वजह? Stock Market में गिरावट के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण हो सकते हैं। निवेशक इस समय वैश्विक आर्थिक हालात, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर खास नजर रख रहे हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली होने पर बाजार के प्रमुख शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे सेंसेक्स और निफ्टी की चाल भी प्रभावित होती है। कच्चे तेल की कीमतें: भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चा तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने और महंगाई पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। वैश्विक बाजारों का असर: अमेरिका में बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और पश्चिम एशिया में जारी तनाव जैसे कारक निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। बाजार में मुनाफावसूली: तेजी के बाद निवेशकों की ओर से शेयर बेचकर मुनाफा निकालना भी गिरावट की एक वजह हो सकता है। हालांकि, किसी एक कारोबारी सत्र की गिरावट को केवल एक कारण से जोड़ना सही नहीं होगा। रुपये और कच्चे तेल पर भी निवेशकों की नजर शेयर बाजार के साथ-साथ रुपये की चाल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण हैं। रुपये में कमजोरी आने से आयात महंगा हो सकता है, जिसका असर कंपनियों की लागत पर पड़ता है। वहीं, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ सकती है। इसी वजह से निवेशक केवल शेयरों की कीमतों पर ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया से जुड़े आर्थिक संकेतों पर भी नजर बनाए हुए हैं। निवेशकों को अब क्या करना चाहिए? सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के बीच निवेशकों के लिए धैर्य रखना जरूरी है। बाजार में हर गिरावट का मतलब यह नहीं होता कि सभी शेयरों में लंबे समय तक कमजोरी बनी रहेगी। इसी तरह, थोड़ी तेजी आने पर यह मान लेना भी ठीक नहीं कि बाजार पूरी तरह संभल गया है। निवेश का फैसला लेते समय कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, शेयर की कीमत, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। केवल बाजार की गिरावट देखकर जल्दबाजी में शेयर खरीदने या बेचने से बचना बेहतर है। आगे कैसी रहेगी शेयर बाजार की चाल? आने वाले दिनों में बाजार की दिशा विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक संकेतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों से प्रभावित हो सकती है। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि सेंसेक्स 71,900 के आसपास खुद को संभाल पाता है या बाजार में दबाव बना रहता है। कुल मिलाकर, सोमवार को सेंसेक्स में करीब 500 अंकों और निफ्टी में लगभग 150 अंकों की गिरावट ने बाजार के माहौल को कमजोर किया। IT और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली इसका प्रमुख हिस्सा रही। फिलहाल निवेशकों के लिए बाजार की चाल पर नजर रखना और सोच-समझकर फैसले लेना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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