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PM Modi

PM Modi Statement: Global War में भी भारत ने कैसे टाला Energy Crisis

Global War के बीच भारत की मजबूत Energy Strategy वैश्विक युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के बीच जब दुनिया के कई देश ऊर्जा संकट से जूझ रहे थे, उसी समय भारत ने अपनी रणनीतिक कूटनीति और समझदारी भरी ऊर्जा नीति के दम पर स्थिति को संभाल लिया। PM Modi ने बताया कि भारत को इस कठिन दौर में भी करीब 40 देशों से लगातार तेल (Crude Oil) की सप्लाई मिलती रही, जिससे देश में ईंधन संकट नहीं पैदा हुआ। 🇮🇳 PM Modi का बड़ा बयान: India ने अपनाई “Diversification” नीति Narendra Modi ने कहा कि भारत ने समय रहते यह समझ लिया था कि केवल एक या दो देशों पर निर्भर रहना भविष्य में बड़ा जोखिम बन सकता है। इसी वजह से देश ने अपनी तेल आपूर्ति को कई देशों में बांटकर “डायवर्सिफिकेशन” की नीति अपनाई। LPG कीमतों में बड़ा खतरा टला प्रधानमंत्री के अनुसार, अगर यह रणनीति नहीं अपनाई जाती तो हालात काफी गंभीर हो सकते थे और घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें 2000 रुपये तक पहुंच सकती थीं। लेकिन सरकार की सक्रिय कूटनीति और ऊर्जा नीति ने आम लोगों को महंगाई के बड़े झटके से बचा लिया। कई देशों से मजबूत हुई सप्लाई चेन इस दौरान भारत ने न सिर्फ अपने पारंपरिक सप्लाई पार्टनर्स पर भरोसा बनाए रखा, बल्कि नए देशों से भी ऊर्जा समझौते किए। इससे सप्लाई चेन मजबूत रही और अंतरराष्ट्रीय संकट का असर भारतीय बाजार पर सीमित रहा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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चंद्रिमा भट्टाचार्य

West Bengal Political Crisis: TMC नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य ने दिया इस्तीफा, बढ़ी अंदरूनी हलचल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है, जिसने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर हलचल बढ़ा दी है। ममता बनर्जी को उस समय तगड़ा झटका लगा जब उनकी पार्टी की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य (Chandrima Bhattacharya) ने TMC के सभी महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले के बाद राज्य की राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और पार्टी संगठन में अंदरूनी तनाव की अटकलें और मजबूत हो गई हैं। लंबे समय से अहम भूमिका में थीं चंद्रिमा भट्टाचार्य चंद्रिमा भट्टाचार्य TMC की अनुभवी और भरोसेमंद नेताओं में गिनी जाती हैं। वे राज्य सरकार में मंत्री रह चुकी हैं और संगठन से लेकर प्रशासन तक कई अहम जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं। पार्टी के भीतर उनकी पकड़ और सक्रिय भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। इस्तीफे के पीछे क्या वजह? हालांकि उनके इस्तीफे को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेद और निर्णय प्रक्रिया को लेकर असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से संगठनात्मक स्तर पर भूमिका और कार्यशैली को लेकर असहमति की स्थिति बनी हुई थी, जो अब इस बड़े फैसले के रूप में सामने आई है। TMC के लिए क्यों है यह बड़ा झटका? चंद्रिमा भट्टाचार्य को ममता बनर्जी के बेहद करीबी नेताओं में माना जाता है। ऐसे में उनका सभी पदों से हटना पार्टी संगठन के लिए एक गंभीर संकेत माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल में पहले से ही राजनीतिक माहौल काफी गर्म है और ऐसे समय में यह इस्तीफा TMC के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है। बंगाल की सियासत में बढ़ी हलचल इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी दलों को भी सरकार और TMC पर सवाल उठाने का नया मौका मिल सकता है। वहीं पार्टी के भीतर इस फैसले को लेकर मंथन शुरू होने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में TMC को अपने संगठन को फिर से मजबूत करने और अंदरूनी मतभेदों को संभालने की जरूरत होगी। आगे क्या हो सकता है? फिलहाल सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चंद्रिमा भट्टाचार्य आगे क्या कदम उठाती हैं—क्या वे पार्टी में किसी नई भूमिका में नजर आएंगी या पूरी तरह से दूरी बनाएंगी। TMC नेतृत्व की ओर से भी इस पूरे मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Punjab Congress

Punjab Congress टूट की अटकलों के बीच Channi पर High Command का ब्रेक

पंजाब कांग्रेस (Punjab Congress) में अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आती दिख रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती बयानबाजी और नेताओं के अलग-अलग रुख ने कांग्रेस हाईकमान की चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि दिल्ली में बैठे शीर्ष नेतृत्व ने हालात पर नजर रखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) को फिलहाल कोई बड़ा राजनीतिक कदम उठाने से रोकने का फैसला किया है। दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा (Sukhjinder Singh Randhawa) का बयान भी चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने पार्टी की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर संगठन इस मोड़ पर पहुंच गया है तो आखिर “ये किसका फेलियर है?” उनके इस सवाल को पार्टी नेतृत्व और प्रदेश संगठन पर सीधी टिप्पणी माना जा रहा है। Delhi तक पहुंचा Punjab Congress का विवाद सूत्रों के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही गुटबाजी और नेताओं के बीच मतभेद अब केंद्रीय नेतृत्व के लिए भी चिंता का कारण बन चुके हैं। इसी वजह से दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर जारी है और वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि हाईकमान चाहता है कि पंजाब में कोई भी नेता ऐसा कदम न उठाए, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष और बढ़े या चुनाव से पहले गलत राजनीतिक संदेश जाए। Channi को क्यों दी गई सलाह? जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी कुछ अहम राजनीतिक फैसलों पर आगे बढ़ने की तैयारी में थे। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने उन्हें फिलहाल इंतजार करने और सभी निर्णय केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा के बाद ही लेने की सलाह दी है। कांग्रेस का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी तरह का जल्दबाजी में लिया गया फैसला पार्टी की एकजुटता को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। Randhawa के बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पंजाब कांग्रेस की स्थिति को लेकर खुलकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी के भीतर ऐसी नौबत आ गई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उनका “ये किसका फेलियर है?” वाला बयान अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रंधावा का यह बयान केवल व्यक्तिगत नाराजगी नहीं, बल्कि संगठन के कामकाज पर भी सवाल खड़ा करता है। चुनाव से पहले Congress के सामने बड़ी चुनौती पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस किसी भी तरह की अंदरूनी टूट या सार्वजनिक विवाद से बचना चाहती है। पार्टी नेतृत्व का पूरा फोकस नेताओं को एक मंच पर लाने और संगठन को मजबूत बनाए रखने पर है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि गुटबाजी समय रहते खत्म नहीं हुई तो इसका सीधा असर चुनावी तैयारियों और पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। आगे क्या? फिलहाल पंजाब कांग्रेस की सियासत पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में हाईकमान की बैठकें, वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और संगठनात्मक फैसले यह तय करेंगे कि पार्टी इस संकट से कितनी जल्दी बाहर निकल पाती है। चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए एकजुटता बनाए रखना सबसे बड़ी परीक्षा मानी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Nitin Navin

Nitin Navin in Lucknow: 2027 विधानसभा चुनाव से पहले BJP ने तेज की तैयारी, कई अहम बैठकों का दौर

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन (Nitin Navin) पहली बार उत्तर प्रदेश पहुंचे हैं। उनका यह दौरा राजनीतिक लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि अगले सालों में होने वाले UP Assembly Election 2027 की तैयारियों का रोडमैप यहीं से तय होता नजर आ रहा है। भाजपा ने चुनावी मोर्चे पर अभी से कमर कसनी शुरू कर दी है और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने पर पूरा जोर दिया जा रहा है। लखनऊ पहुंचने पर Nitin Navin का पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। एयरपोर्ट से लेकर भाजपा प्रदेश कार्यालय तक कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों और संगठन से जुड़े पदाधिकारी भी इस मौके पर मौजूद रहे। 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर होगा मंथन दो दिवसीय दौरे के दौरान Nitin Navin प्रदेश पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों, जिला अध्यक्षों और संगठन के प्रमुख नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें करेंगे। इन बैठकों में विधानसभा चुनाव 2027 की रणनीति, बूथ मैनेजमेंट, संगठन विस्तार, जनसंपर्क अभियान और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। भाजपा का मानना है कि मजबूत संगठन किसी भी चुनाव में सबसे बड़ी ताकत होता है। यही वजह है कि पार्टी चुनावी साल से काफी पहले संगठन को नई ऊर्जा देने की कोशिश में जुट गई है। बूथ से लेकर गांव तक मजबूत होगी पकड़ सूत्रों के मुताबिक भाजपा हर बूथ पर अपनी मौजूदगी और मजबूत करना चाहती है। शक्ति केंद्रों को सक्रिय करने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने और सरकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की जा रही है। इसी क्रम में नितिन नवीन अवध क्षेत्र के शक्ति केंद्र संयोजकों के सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। यहां वे कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों, सेवा कार्यों और जनसंपर्क अभियान को लेकर दिशा-निर्देश देंगे। जिलों से मिलेगा सीधा फीडबैक दौरे का एक अहम उद्देश्य संगठन की जमीनी स्थिति का आकलन करना भी है। बताया जा रहा है कि अलग-अलग जिलों से आए पदाधिकारियों से सीधा फीडबैक लिया जाएगा। संगठन की मजबूती, स्थानीय चुनौतियों और क्षेत्रवार राजनीतिक समीकरणों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि चुनावी अभियान शुरू होने से पहले ही हर जिले और हर मंडल में संगठन पूरी तरह सक्रिय नजर आए। विपक्ष की रणनीति पर भी रहेगी नजर भाजपा केवल अपने संगठन को मजबूत करने तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी विपक्ष की गतिविधियों और बदलते राजनीतिक समीकरणों पर भी लगातार नजर बनाए हुए है। ऐसे में बैठकों के दौरान सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है, ताकि समय रहते चुनावी रणनीति को धार दी जा सके। क्यों खास है नितिन नवीन का यह दौरा? राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उत्तर प्रदेश का यह पहला दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए सबसे अहम राज्यों में शामिल है और 2027 का विधानसभा चुनाव पार्टी के भविष्य की राजनीति तय करने वाला माना जा रहा है। ऐसे में नितिन नवीन की यह यात्रा सिर्फ संगठनात्मक बैठक तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे भाजपा के आगामी चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है। BJP की आगे की रणनीति क्या होगी? पार्टी का फोकस आने वाले महीनों में बूथ सशक्तिकरण, संगठन विस्तार, नए मतदाताओं तक पहुंच, सोशल मीडिया की सक्रियता और जनसंपर्क कार्यक्रमों को तेज करने पर रहेगा। भाजपा चाहती है कि चुनावी माहौल बनने से पहले ही उसका संगठन हर विधानसभा क्षेत्र में पूरी मजबूती के साथ सक्रिय दिखाई दे। Highlights उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह दौरा आने वाले समय की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि बैठकों के बाद भाजपा संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर कौन-कौन से बड़े फैसले सामने आते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UAPA

Modi Government UAPA Action: पाकिस्तान के 23 आतंकियों पर कसा शिकंजा, Jaish-LeT नेटवर्क को बड़ा झटका

आतंकवाद के खिलाफ लगातार सख्त रुख अपनाने वाली केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उनके सहयोगी नेटवर्क से जुड़े 23 लोगों को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी (Individual Terrorist) घोषित कर दिया है। सरकार का कहना है कि ये सभी व्यक्ति लंबे समय से भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इन पर जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने, युवाओं की भर्ती करने, हथियारों और विस्फोटकों की सप्लाई कराने, घुसपैठ की साजिश रचने और आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने जैसे गंभीर आरोप हैं। आतंकवाद पर सरकार का बड़ा संदेश हाल के वर्षों में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को और अधिक आक्रामक बनाया है। इसी कड़ी में गृह मंत्रालय ने यह कार्रवाई की है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकियों को UAPA के तहत सूचीबद्ध करने से उनके आर्थिक नेटवर्क, संपत्तियों और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर कानूनी शिकंजा कसना आसान हो जाएगा। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को रोकने और आतंकवाद की फंडिंग पर लगाम लगाने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। क्यों हुई यह कार्रवाई? गृह मंत्रालय के अनुसार, सूची में शामिल अधिकांश लोग पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठनों के सक्रिय सदस्य या सहयोगी हैं। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में सामने आया कि ये लोग आतंकियों की भर्ती, ट्रेनिंग, फंडिंग, सीमा पार से घुसपैठ कराने और ड्रोन के जरिए हथियार व विस्फोटक पहुंचाने जैसे कामों में शामिल रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करने में भी इनकी भूमिका सामने आई है। इन आतंकी संगठनों से जुड़े हैं आरोपी सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, घोषित किए गए आतंकियों का संबंध मुख्य रूप से इन संगठनों से है— देखें 23 घोषित आतंकवादियों की पूरी List UAPA के तहत आतंकवादी घोषित होने का क्या मतलब है? किसी व्यक्ति को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद सरकार को उसके खिलाफ व्यापक कानूनी कार्रवाई का अधिकार मिल जाता है। ऐसे व्यक्ति की संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन पर नजर रखी जा सकती है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ जानकारी साझा कर उसके खिलाफ कार्रवाई का रास्ता भी मजबूत होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आतंकवादी संगठनों की फंडिंग और उनके सहयोगी नेटवर्क पर भी असर पड़ता है। आगे क्या होगा? सुरक्षा एजेंसियां अब इन घोषित आतंकवादियों से जुड़े नेटवर्क, फंडिंग चैनल और सहयोगियों की गतिविधियों पर और अधिक नजर रखेंगी। सरकार का उद्देश्य केवल व्यक्तियों को सूचीबद्ध करना नहीं, बल्कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को कमजोर करना है। केंद्र सरकार पहले भी कई संगठनों और व्यक्तियों को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित कर चुकी है। ताजा फैसला उसी नीति की अगली कड़ी माना जा रहा है, जिसके जरिए भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई को लगातार मजबूत कर रहा है।
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Heavy Rain

Heavy Rain Alert: महाराष्ट्र से गुजरात तक बारिश का कहर, 19 लोगों का Rescue; भिवंडी में दुकानें बंद

देश के कई राज्यों में मानसून ने रफ्तार पकड़ ली है और इसके साथ ही बारिश (Heavy Rain) का कहर भी देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कहीं सड़कों पर तीन फीट तक पानी भर गया है, तो कहीं बाढ़ और भूस्खलन ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राहत और बचाव एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। भिवंडी में तीन फीट पानी, बाजार और दुकानें बंद महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी शहर में मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में करीब तीन फीट तक पानी भर गया। मुख्य सड़कें, बाजार और रिहायशी कॉलोनियां जलमग्न हो गईं। जलभराव की वजह से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई और कई व्यापारियों ने सुरक्षा के मद्देनजर अपनी दुकानें बंद रखीं। स्थानीय प्रशासन ने जल निकासी के लिए मशीनें लगाई हैं और नागरिकों से अपील की है कि बेहद जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलें। गुजरात में बाढ़ जैसे हालात, 19 लोगों का रेस्क्यू गुजरात के कई जिलों में लगातार बारिश से नदियां उफान पर हैं। निचले इलाकों में पानी भरने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। कई गांवों का संपर्क आसपास के क्षेत्रों से टूट गया। राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त अभियान चलाकर अब तक 19 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। प्रशासन लगातार संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। उज्जैन में तेज बहाव में बहा युवक मध्य प्रदेश के उज्जैन में भारी बारिश के बीच एक युवक नदी के तेज बहाव में बह गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे और युवक की तलाश शुरू कर दी गई। लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बारिश के दौरान नदी, नाले और पुलों के आसपास जाने से बचें। जम्मू-कश्मीर में Landslide से सड़कें बंद जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के चलते कई जगह भूस्खलन हुआ। पहाड़ों से मलबा और बड़े पत्थर गिरने के कारण कई अहम सड़कें बंद करनी पड़ीं। इससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन और सड़क निर्माण एजेंसियां मलबा हटाकर रास्ते खोलने में जुटी हैं। मौसम सामान्य होने तक लोगों को पहाड़ी मार्गों पर यात्रा टालने की सलाह दी गई है। कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों तक महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग ने लोगों से नदी-नालों से दूर रहने, जलभराव वाले इलाकों में सावधानी बरतने और स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। राहत कार्य लगातार जारी बारिश से प्रभावित इलाकों में प्रशासन, SDRF और अन्य बचाव एजेंसियां लगातार राहत कार्य चला रही हैं। जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने, फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और बंद सड़कों को दोबारा चालू करने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। फिलहाल मौसम का मिजाज जल्द बदलने के संकेत नहीं हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की जरूरत है। छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Mandir चढ़ावा चोरी विवाद: फ्लाइट में गोपाल राव को देखकर भड़के यात्री

Ram Mandir चढ़ावा चोरी विवाद: फ्लाइट में गोपाल राव को देखकर भड़के यात्री

Ram Mandir में चढ़ावे से जुड़े कथित गबन के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य गोपाल राव को एक फ्लाइट में देखकर कुछ यात्रियों ने विरोध जताया। यात्रियों ने उनके सामने “चढ़ावा चोर” के नारे लगाए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब राम मंदिर ट्रस्ट ने 6 जुलाई को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक का एजेंडा भी जारी कर दिया है। माना जा रहा है कि बैठक में मंदिर के प्रशासन और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। फ्लाइट में हुआ विरोध जानकारी के अनुसार, गोपाल राव जैसे ही फ्लाइट में अपनी सीट पर पहुंचे, कुछ यात्रियों ने उन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते विरोध बढ़ गया और लोगों ने “चढ़ावा चोर” के नारे लगाने शुरू कर दिए। हालांकि इस दौरान किसी तरह की हाथापाई या हिंसा की सूचना नहीं है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी ठहराने को गलत बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग मामले में जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। क्या है पूरा मामला? राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे के कथित गबन को लेकर विवाद लगातार चर्चा में है। आरोपों के बाद मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी तूल पकड़ लिया है। हालांकि संबंधित पक्ष की ओर से आरोपों को लेकर अपनी सफाई भी दी गई है और जांच की प्रक्रिया जारी है। फिलहाल इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। 6 जुलाई को होगी ट्रस्ट की अहम बैठक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 6 जुलाई को होने वाली बैठक का एजेंडा जारी कर दिया है। इस बैठक में मंदिर से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक और विकास कार्यों के साथ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विवाद के बीच होने वाली इस बैठक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस फ्लाइट का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति को दोषी मान लेना उचित नहीं है। फिलहाल, पूरे मामले पर सभी की नजर आगामी ट्रस्ट बैठक और जांच की प्रगति पर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Murder

Bathroom Murder Mystery: पति को मारकर बाथरूम में दफनाया, 45 दिन बाद ऐसे खुला पूरा राज

घरेलू विवाद कभी-कभी इतना भयावह रूप ले लेते हैं कि उनका अंजाम पूरे समाज को हैरान कर देता है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला पर अपने पति की हत्या (Murder) करने और शव को घर के बाथरूम में दफनाने का आरोप है। सबसे हैरानी की बात यह रही कि शव को छिपाने के लिए बाथरूम का नया फर्श बनवाया गया और करीब 45 दिनों तक उसी बाथरूम का इस्तेमाल किया जाता रहा। पुलिस ने जब फर्श की खुदाई करवाई तो पूरा मामला उजागर हो गया। 45 दिनों तक पति के गायब होने की कहानी सुनाती रही पुलिस के मुताबिक, महिला का पति करीब डेढ़ महीने से लापता था। इस दौरान उसने रिश्तेदारों और पड़ोसियों को अलग-अलग वजह बताकर मामले को टालने की कोशिश की। कभी कहा कि पति कहीं काम के सिलसिले में गया है तो कभी दूसरी बातें बताईं। लगातार बदलते बयानों ने परिजनों के मन में शक पैदा कर दिया, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। बाथरूम के नए फर्श ने बढ़ाया पुलिस का शक जांच के दौरान पुलिस टीम जब घर पहुंची तो बाथरूम का फर्श हाल ही में बना हुआ दिखाई दिया। अधिकारियों को यह बात संदिग्ध लगी। इसके बाद फोरेंसिक टीम की मौजूदगी में फर्श की खुदाई कराई गई। खुदाई के दौरान जमीन के नीचे से शव बरामद हुआ, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। शव मिलने के बाद पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पूछताछ में हत्या की बात स्वीकार प्रारंभिक पूछताछ में महिला ने पति की हत्या करने की बात स्वीकार की। उसका कहना है कि पति अक्सर उसके साथ मारपीट करता था और दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। उसने दावा किया कि इसी तनाव के चलते उसने यह कदम उठाया। हालांकि पुलिस केवल आरोपी के बयान पर भरोसा नहीं कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि घरेलू हिंसा के आरोपों सहित हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही हत्या के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। शव छिपाने के लिए बनाई गई पूरी योजना पुलिस जांच में सामने आया कि हत्या के बाद महिला ने शव को ठिकाने लगाने के लिए बाथरूम में गड्ढा खोदा और वहीं दफना दिया। इसके बाद ऊपर से सीमेंट डालकर नया फर्श तैयार कराया, ताकि किसी को शक न हो। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि फर्श बनवाने या शव छिपाने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। बताया जा रहा है कि करीब 45 दिनों तक घर में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को इस बात का अंदाजा नहीं हुआ कि बाथरूम के फर्श के नीचे शव दफन है। फोरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम का इंतजार पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटनास्थल से कई अहम साक्ष्य भी एकत्र किए गए हैं। अब फोरेंसिक रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तकनीकी जांच के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने क्या कहा? पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। आरोपी महिला से लगातार पूछताछ की जा रही है और सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी के आधार पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की आधिकारिक तस्वीर सामने आएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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RSS

Ram Mandir Donation Theft: RSS ने जताई चिंता, मंदिर प्रबंधन से पारदर्शिता बढ़ाने की अपील

अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान पात्रों से धनराशि चोरी होने का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। इस घटना ने देशभर के करोड़ों रामभक्तों की भावनाओं को आहत किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी आधिकारिक बयान जारी कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और मंदिर की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है राम मंदिर RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि अयोध्या में बना श्री राम जन्मभूमि मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, करोड़ों रामभक्तों के समर्पण, त्याग और बलिदान का प्रतीक है। ऐसे पवित्र स्थान पर दान पात्रों में जमा श्रद्धालुओं की राशि की चोरी होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने पूरे हिंदू समाज को दुखी किया है और करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। इसलिए इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है। SIT जांच शुरू, दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अनुरोध के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है। RSS ने स्पष्ट कहा है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। इससे न केवल दोषियों को सजा मिलेगी, बल्कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर भी रोक लगेगी। मंदिर प्रबंधन से व्यवस्था मजबूत करने की अपेक्षा अपने बयान में दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि इस घटना को सामान्य चोरी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मंदिर की सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन और संचालन व्यवस्था की गंभीर समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दान व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी हो, सुरक्षा प्रणाली आधुनिक तकनीक से लैस हो और मंदिर प्रशासन ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करे, जिससे श्रद्धालुओं का विश्वास पहले से अधिक मजबूत हो। वर्तमान में जो भ्रम और असमंजस का माहौल बना है, उसे भी जल्द समाप्त किया जाना चाहिए। पारदर्शिता से और मजबूत होगा श्रद्धालुओं का भरोसा RSS ने भरोसा जताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास, उत्तर प्रदेश सरकार और SIT मिलकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे। साथ ही वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार लागू किए जाएंगे। संघ का मानना है कि पारदर्शी व्यवस्था और जवाबदेह प्रबंधन से मंदिर की गरिमा बनी रहेगी और करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास पहले से अधिक मजबूत होगा। हिंदू समाज से धैर्य और संयम रखने की अपील राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देशभर के रामभक्तों और हिंदू समाज से अपील की है कि वे इस संवेदनशील समय में धैर्य और संयम बनाए रखें। जांच पूरी होने से पहले किसी भी अफवाह या अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें। संघ ने यह भी कहा कि कुछ तत्व इस घटना का फायदा उठाकर हिंदू समाज और सनातन परंपरा की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे समय में समाज को एकजुट रहकर केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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EPF

EPF में बड़ा बदलाव: ₹1,800 तक ही Mandatory PF, सैलरी पर पड़ेगा सीधा असर

कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को लेकर सरकार ने एक बड़ा बदलाव किया है, जिसका असर देशभर के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों पर पड़ने वाला है। नए नियमों के तहत अब EPF में 12% योगदान केवल एक तय सीमा तक ही अनिवार्य होगा, जबकि उससे ऊपर का योगदान पूरी तरह स्वैच्छिक रहेगा। यह बदलाव न सिर्फ कंपनियों की सैलरी स्ट्रक्चर को प्रभावित करेगा, बल्कि कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी और भविष्य की बचत पर भी सीधा असर डालेगा। क्या है नया EPF नियम? नए प्रावधान के मुताबिक: यह नियम कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees’ Provident Fund Organisation) के तहत लागू किया गया है। पहले और अब में क्या फर्क है? पहले कंपनियां कई बार कर्मचारी की पूरी बेसिक सैलरी पर 12% PF काटती थीं, जिससे हाई सैलरी वालों की इन-हैंड सैलरी कम हो जाती थी। लेकिन अब स्थिति बदल गई है: पहले: अब: कर्मचारियों पर असर – फायदा या चिंता? इस नए नियम के बाद स्थिति दो तरह से देखी जा रही है: फायदे: क्या करना सही रहेगा? अगर आपकी सैलरी ज्यादा है, तो सिर्फ अनिवार्य PF पर निर्भर रहना सही नहीं माना जा रहा है।आप चाहें तो Voluntary Provident Fund (VPF) के जरिए अपनी बचत को पहले की तरह जारी रख सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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