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कर्नाटक

कर्नाटक में Congress को झटका? मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी मांग से बढ़ी टेंशन

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार और पार्टी संगठन के भीतर इन दिनों राजनीतिक माहौल थोड़ा गर्म होता दिख रहा है। एक तरफ सरकार अपने कामकाज और संगठनात्मक बदलावों में जुटी है, तो दूसरी तरफ मुस्लिम संगठनों की सत्ता में हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व (representation) को लेकर उठी मांग ने नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। क्या है पूरा पूरा मामला? कर्नाटक में हाल ही में कई मुस्लिम संगठनों और कुछ समुदाय से जुड़े नेताओं ने यह सवाल उठाया है कि राज्य की राजनीति और सरकारी ढांचे में उनकी भागीदारी अपेक्षाकृत कम है। इन संगठनों का कहना है कि: इसी मांग को लेकर अब कांग्रेस पर एक तरह का पॉलिटिकल प्रेशर बनता दिख रहा है। मुस्लिम संगठनों की मुख्य मांगें रिपोर्ट्स और बैठकों के आधार पर समुदाय की तरफ से कुछ प्रमुख मांगें सामने आई हैं: कुछ संगठनों ने तो इसे आगे बढ़ाते हुए बजट और अलग कोटा जैसी मांगें भी उठाई हैं, जिससे बहस और तेज हो गई है। कांग्रेस के लिए क्यों बढ़ा दबाव? कर्नाटक कांग्रेस पहले से ही कई राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही है: ऐसे में जब अलग-अलग समुदायों से प्रतिनिधित्व की मांगें सामने आती हैं, तो पार्टी के लिए सभी पक्षों को साथ लेकर चलना और मुश्किल हो जाता है। राजनीतिक असर क्या हो सकता है? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर यह मुद्दा और बढ़ता है तो: हालांकि अभी इसे किसी बड़े राजनीतिक संकट की बजाय आंतरिक दबाव और बातचीत का हिस्सा माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Venezuela

Hormuz Crisis के बीच India-Venezuela Oil Deal की चर्चा तेज, PM Modi से अहम मुलाकात

वैश्विक ऊर्जा बाजार इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बढ़ते तनाव से प्रभावित है। इसी बीच Venezuela की राष्ट्रपति का भारत दौरा और प्रधानमंत्री Narendra Modi से हुई मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। यह बैठक भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कच्चे तेल की आपूर्ति रणनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। होर्मुज संकट से बढ़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक ऐसा समुद्री रास्ता है, जिससे बड़ी मात्रा में कच्चा तेल दुनिया भर में सप्लाई होता है। यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे तेल की कीमतों और सप्लाई चेन को प्रभावित करता है। ऐसे हालात में भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए वैकल्पिक स्रोत तलाशना जरूरी हो गया है। भारत-वेनेजुएला बातचीत में क्या हुआ खास? Venezuela राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई बातचीत को ऊर्जा सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है। चर्चा के मुख्य बिंदु रहे: वेनेजुएला, जिसके पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है, भारत के लिए एक मजबूत और वैकल्पिक ऊर्जा साझेदार बन सकता है। भारत की बदलती Energy Strategy भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर रहा है, लेकिन बदलते भू-राजनीतिक हालात ने सरकार को नई रणनीति अपनाने पर मजबूर किया है। अब फोकस है कि तेल आयात के स्रोतों को ज्यादा देशों तक फैलाया जाए ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो। Venezuela के साथ संभावित समझौता इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। क्या हो सकता है आगे? इस उच्च स्तरीय मुलाकात के बाद कई संभावनाएं चर्चा में हैं: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Khan Sir

Khan Sir Coaching Controversy: दो गार्ड हिरासत में, सस्पेंस बढ़ा

पटना में फेमस शिक्षक Khan Sir की कोचिंग से जुड़ा फायरिंग केस अब और गंभीर होता जा रहा है। ताजा अपडेट में पुलिस ने कोचिंग परिसर में तैनात दो सुरक्षा गार्ड्स को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले में नया ट्विस्ट आ गया है और जांच तेज कर दी गई है। क्या है पूरा मामला? कुछ दिनों पहले कोचिंग के आसपास फायरिंग की घटना हुई थी, जिसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। छात्रों और स्थानीय लोगों में डर का माहौल बन गया था। घटना के बाद पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और कई एंगल से मामले को समझने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने क्यों उठाए गार्ड्स? सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान पुलिस को कुछ ऐसे संकेत मिले, जिनके आधार पर कोचिंग में मौजूद दो गार्ड्स को हिरासत में लिया गया है। इनसे पूछताछ कर यह जानने की कोशिश की जा रही है कि क्या घटना के समय उनकी कोई भूमिका थी या वे किसी जानकारी से जुड़े हो सकते हैं। कोचिंग में बढ़ी सुरक्षा, छात्रों में चिंता इस घटना के बाद कोचिंग परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। छात्रों के बीच भी हल्की बेचैनी देखने को मिल रही है, क्योंकि मामला सीधे उनके रोजमर्रा के माहौल से जुड़ा हुआ है। कई लोग इसे गंभीर सुरक्षा चूक के रूप में देख रहे हैं। पुलिस जांच में तेजी, जल्द खुल सकते हैं राज पुलिस ने साफ किया है कि मामले की जांच हर पहलू से की जा रही है। फिलहाल दोनों गार्ड्स से लगातार पूछताछ चल रही है और उनके बयान रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस केस में बड़े खुलासे हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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कॉकरोच जनता पार्टी

Education Politics: CBSE ट्रांसफर को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का बड़ा हमला

CBSE (Central Board of Secondary Education) चेयरमैन के ट्रांसफर को लेकर सियासी विवाद गहराता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे “सिर्फ दिखावा” करार दिया है और दावा किया है कि इस फैसले से शिक्षा व्यवस्था में कोई वास्तविक सुधार नहीं होगा। पार्टी का कहना है कि सरकार केवल पदों में बदलाव करके जनता और छात्रों को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर शिक्षा प्रणाली की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है और लगातार बहस तेज हो रही है। पहली Press Conference में तीखे सवाल दिल्ली में आयोजित अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने सरकार से कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन शर्त यह है कि शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और ठोस सुधार के कदम दिखाई देने चाहिए। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि CBSE जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में सिर्फ प्रशासनिक बदलाव करके जनता को संतुष्ट करने की कोशिश हो रही है, जबकि असली समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। 6 जून को Delhi में बड़ा Protest कॉकरोच जनता पार्टी ने घोषणा की है कि वह 6 जून को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन (Delhi Protest) करेगी। इस प्रदर्शन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और सरकारी फैसलों पर सवाल उठाना बताया गया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि अगर सरकार गंभीर बातचीत के लिए आगे आती है तो वे चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन सिर्फ “कॉस्मेटिक बदलाव” स्वीकार नहीं किए जाएंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Lalit Modi

Lalit Modi Controversy: सरकार पर टिप्पणी, फिर चर्चा में आए

पूर्व IPL कमिश्नर ललित मोदी (Lalit Modi) एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। इस बार उन्होंने खुद को “भगोड़ा” कहे जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि वे भगोड़े नहीं हैं, बल्कि दुनिया घूम रहे हैं। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक नई चर्चा छेड़ दी है। Lalit Modi ने अपने बयान में सरकार और जांच एजेंसियों पर भी इशारों-इशारों में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “सरकार के हाथ बहुत लंबे होते हैं, उनसे बेवजह टकराना सही नहीं है।” इस बयान के बाद एक बार फिर उनके पुराने केस और स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ललित मोदी ने क्या कहा? बयान में कई अहम बातें सामने आईं: IPL से लेकर विवाद तक की कहानी ललित मोदी का नाम इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के शुरुआती दौर से जुड़ा रहा है। वे IPL के पहले चेयरमैन थे और लीग को ग्लोबल पहचान दिलाने में उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। लेकिन बाद में उन पर वित्तीय अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे। इसके बाद वे भारत से बाहर चले गए और तभी से वे विदेश में रह रहे हैं। समय-समय पर वे अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के कारण चर्चा में आते रहते हैं। यह बयान क्यों बना चर्चा का विषय? ललित मोदी के इस बयान के बाद कई वजहों से हलचल बढ़ी है: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC का अस्तित्व बचाने के लिए ममता के पास अब क्या विकल्प?

TMC का अस्तित्व बचाने के लिए ममता के पास अब क्या विकल्प?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में कभी अजेय मानी जाने वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) आज अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजरती दिखाई दे रही है। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी, नेताओं की बगावत और लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि अब सवाल उठने लगा है कि आखिर TMC का भविष्य क्या होगा और ममता बनर्जी के पास पार्टी को बचाने के लिए कौन-कौन से विकल्प बचे हैं। अपने ही बन रहे सबसे बड़ी चुनौती एक समय था जब ममता बनर्जी के एक इशारे पर पूरी पार्टी एकजुट नजर आती थी। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। कई पुराने नेता या तो पार्टी छोड़ चुके हैं या फिर अंदरखाने नाराज बताए जा रहे हैं। लगातार सामने आ रही बयानबाजी यह साफ संकेत दे रही है कि पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण TMC में गुटबाजी बढ़ी है। कई नेताओं को लगने लगा है कि पार्टी में उनकी अहमियत कम हो रही है। यही वजह है कि कुछ नेता दूसरी पार्टियों का रुख कर रहे हैं, जबकि कुछ खुलकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। बीजेपी लगातार बढ़ा रही दबाव पश्चिम बंगाल में बीजेपी लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पिछले कुछ चुनावों में बीजेपी ने जिस तरह प्रदर्शन किया, उसने TMC की चिंता बढ़ा दी है। बीजेपी अब सिर्फ विपक्षी पार्टी नहीं रही, बल्कि सीधे सत्ता की दावेदार बनकर उभरी है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी वोटरों तक बीजेपी अपनी पहुंच बढ़ा रही है। ऐसे में TMC के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पारंपरिक वोट बैंक को बचाए रखने की है। ममता बनर्जी के सामने क्या विकल्प? ममता बनर्जी के सामने अब सबसे बड़ा सवाल पार्टी को एकजुट रखने का है। इसके लिए उन्हें कई बड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। 1. नाराज नेताओं को मनाना पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को खत्म करना ममता की पहली प्राथमिकता हो सकती है। पुराने नेताओं को फिर से भरोसे में लेना जरूरी होगा। 2. संगठन में बड़े बदलाव TMC संगठन में फेरबदल कर नई टीम तैयार कर सकती है। युवाओं और जमीनी कार्यकर्ताओं को ज्यादा मौका देकर पार्टी नई ऊर्जा लाने की कोशिश कर सकती है। 3. भ्रष्टाचार के आरोपों से दूरी पिछले कुछ समय में TMC के कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। विपक्ष लगातार इन्हीं मुद्दों को लेकर हमला कर रहा है। ऐसे में पार्टी को अपनी छवि सुधारने के लिए सख्त कदम उठाने पड़ सकते हैं। 4. जनता से सीधा संवाद ममता बनर्जी हमेशा अपनी आक्रामक राजनीति और जनता से सीधे जुड़ाव के लिए जानी जाती रही हैं। आने वाले समय में वह फिर से जनसभाओं और यात्राओं के जरिए लोगों के बीच जाकर माहौल बदलने की कोशिश कर सकती हैं। आगे की राह आसान नहीं राजनीति में वक्त हमेशा एक जैसा नहीं रहता। ममता बनर्जी ने संघर्ष से अपनी पहचान बनाई है और कई बार मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकलकर खुद को साबित किया है। लेकिन इस बार चुनौती सिर्फ विपक्ष नहीं, बल्कि अपनों की नाराजगी भी है। अब देखने वाली बात होगी कि ममता बनर्जी पार्टी को फिर से मजबूती दे पाती हैं या पश्चिम बंगाल की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Wipro

IT Sector Controversy: Wipro की पूर्व कर्मचारी ने लगाए गंभीर आरोप

देश की बड़ी आईटी कंपनियों में एक बार फिर कार्यस्थल के माहौल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। Wipro की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने कंपनी के भीतर धार्मिक दबाव और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि उसके साथ काम करने वाले एक कर्मचारी ने उस पर इस्लाम अपनाने और मुस्लिम युवक के साथ संबंध बनाने का दबाव बनाया। पीड़िता ने कहा कि जब उसने इस पूरे मामले की शिकायत कंपनी के HR विभाग से की, तब उसे न्याय मिलने के बजाय नौकरी छोड़ने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा। अब यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। महिला कर्मचारी ने लगाए गंभीर आरोप कर्मचारी के मुताबिक, शुरुआत में सहकर्मी सामान्य बातचीत के दौरान धार्मिक बातें करता था। धीरे-धीरे उसने इस्लाम धर्म अपनाने की सलाह देना शुरू कर दिया। आरोप है कि कर्मचारी बार-बार उसे मुस्लिम समुदाय के लोगों के करीब आने और रिश्ता बनाने के लिए कहता था। कर्मचारी का कहना है कि पहले उसने इन बातों को नजरअंदाज किया, लेकिन जब मामला लगातार बढ़ने लगा तो उसने इसकी शिकायत कंपनी प्रबंधन से की। शिकायत के बाद बदला ऑफिस का माहौल पीड़िता का आरोप है कि शिकायत करने के बाद आरोपी कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा, उसके लिए ऑफिस का माहौल असहज बना दिया गया। उसने दावा किया कि उसे मानसिक रूप से परेशान किया गया और धीरे-धीरे उस पर इस्तीफा देने का दबाव बनाया गया। महिला ने आखिरकार नौकरी छोड़ दी। हालांकि, अभी तक कंपनी की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। TCS विवाद के बाद फिर उठे सवाल इससे पहले Tata Consultancy Services यानी TCS से जुड़े कथित धर्मांतरण विवाद ने भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं। अब Wipro का मामला सामने आने के बाद आईटी सेक्टर में कर्मचारियों की धार्मिक स्वतंत्रता और कार्यस्थल की सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर बंटी राय मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ यूजर्स महिला के समर्थन में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि कई लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की बात कह रहे हैं। कॉर्पोरेट सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी कर्मचारी पर धार्मिक या व्यक्तिगत दबाव बनाना गंभीर मामला है। कंपनियों को ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। कंपनी के जवाब का इंतजार फिलहाल सभी की नजर कंपनी की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। अगर मामले की औपचारिक जांच शुरू होती है, तो आने वाले दिनों में इससे जुड़े और भी तथ्य सामने आ सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sonbhadra में युवक की बेरहमी से हत्या, झाड़ियों में मिला शव

Sonbhadra में युवक की बेरहमी से हत्या, झाड़ियों में मिला शव

उत्तर प्रदेश के Sonbhadra जिले में एक युवक की बेरहमी से हत्या का मामला सामने आया है। युवक का शव झाड़ियों में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। शव की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि हत्या काफी दर्दनाक तरीके से की गई है। युवक की गर्दन पर धारदार हथियार से हमला किया गया था। जानकारी के मुताबिक, सुबह स्थानीय लोगों ने झाड़ियों में एक शव पड़ा देखा। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। मृतक की पहचान होने के बाद परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार वालों ने हत्या की आशंका जताते हुए आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि युवक की गर्दन पर धारदार हथियार से वार किया गया है। शुरुआती जांच में मामला हत्या का लग रहा है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कर रही है और कई लोगों से पूछताछ भी की जा रही है। फिलहाल शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में डर और तनाव का माहौल बना हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tax

Indian Market को मिलेगा बड़ा Boost! विदेशी निवेशकों के लिए सरकार ला सकती है Tax Relief

भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर विदेशी निवेशकों की वापसी की उम्मीद बढ़ गई है। केंद्र सरकार अब ऐसा बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है, जिससे Foreign Portfolio Investors (FPI) का भरोसा भारतीय बाजार पर फिर मजबूत हो सकता है। खबरें हैं कि सरकार सरकारी बॉन्ड्स में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों के लिए Capital Gains Tax हटाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो भारत का बॉन्ड मार्केट विदेशी निवेशकों के लिए पहले से ज्यादा आकर्षक बन जाएगा। पिछले कुछ महीनों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में पैसा निकाला था, जिसका असर शेयर बाजार और रुपये दोनों पर देखने को मिला। ऐसे में सरकार का यह कदम बाजार को नई मजबूती दे सकता है। क्या है सरकार की नई तैयारी? सूत्रों के मुताबिक, सरकार सिर्फ Capital Gains Tax हटाने पर ही नहीं बल्कि विदेशी निवेशकों को मिलने वाले ब्याज पर लगने वाले withholding tax में भी राहत देने की योजना बना रही है। अभी सरकारी बॉन्ड्स पर मिलने वाले ब्याज पर करीब 20% टैक्स देना पड़ता है, जिसे कम किया जा सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि टैक्स में राहत मिलने के बाद विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय बॉन्ड मार्केट की तरफ तेजी से बढ़ सकता है। इससे भारत में डॉलर का फ्लो बढ़ेगा और बाजार में स्थिरता आने की संभावना भी मजबूत होगी। क्यों जरूरी बन गया यह फैसला? हाल के समय में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिका की ब्याज दरों और अंतरराष्ट्रीय तनावों की वजह से विदेशी निवेशकों ने कई उभरते बाजारों से दूरी बनाई थी। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। लगातार बिकवाली के कारण शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा और निवेशकों की चिंता भी बढ़ी। इसी बीच भारत को J.P. Morgan और Bloomberg जैसे बड़े ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में शामिल किए जाने से विदेशी निवेश की नई संभावनाएं खुली हैं। ऐसे में सरकार चाहती है कि टैक्स बोझ कम करके ज्यादा से ज्यादा विदेशी पूंजी भारत में लाई जाए। पहले भी निवेशकों को मिल चुकी है राहत सरकार इससे पहले भी निवेश बढ़ाने के लिए कई अहम फैसले ले चुकी है। Budget 2024 में Angel Tax खत्म करने का फैसला इसी दिशा में बड़ा कदम माना गया था। इसका फायदा स्टार्टअप सेक्टर और विदेशी निवेशकों दोनों को मिला। अब माना जा रहा है कि अगर बॉन्ड मार्केट से जुड़े टैक्स नियमों में ढील दी जाती है, तो भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी तेज हो सकती है। इसका सीधा असर शेयर बाजार, रुपये और देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक रूप से देखने को मिल सकता है। Market Experts क्या मानते हैं? मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार जल्द इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो आने वाले महीनों में भारतीय बाजार में विदेशी निवेश बढ़ सकता है। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और बाजार में नई तेजी देखने को मिल सकती है। फिलहाल निवेशकों की नजर सरकार के अगले आधिकारिक ऐलान पर टिकी हुई है। अगर टैक्स में राहत का फैसला आता है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Malviya Nagar

Malviya Nagar Hotel Fire: बिना Fire NOC चल रहा था होटल, हादसे के बाद कई बड़े खुलासे

दिल्ली के मालवीय नगर (Malviya Nagar) में हुआ होटल अग्निकांड सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी लापरवाही की दर्दनाक तस्वीर बनकर सामने आया है। बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने कुछ ही मिनटों में कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि मरने वालों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे, जो इलाज के लिए दिल्ली आए थे और उसी होटल में ठहरे हुए थे। हादसे के बाद पूरे इलाके में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। कैसे लगी आग? जानकारी के मुताबिक मालवीय नगर के हौज रानी इलाके में स्थित एक होटल और रेस्टोरेंट वाली बिल्डिंग में अचानक आग लग गई। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि आग बेसमेंट या रेस्टोरेंट एरिया से शुरू हुई और तेजी से ऊपर की मंजिलों तक फैल गई। होटल के अंदर धुआं इतनी तेजी से भर गया कि लोगों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला। कई लोग खिड़कियों और बालकनी से मदद के लिए चिल्लाते नजर आए। आसपास मौजूद लोगों ने नीचे गद्दे डालकर कुछ लोगों की जान बचाने की कोशिश भी की। एक Exit Gate बना मौत का रास्ता जांच में सामने आया कि होटल में सुरक्षा के नाम पर बेहद खराब इंतजाम थे। पूरी बिल्डिंग में सिर्फ एक एंट्री और एग्जिट पॉइंट था। आग लगने के बाद वही रास्ता धुएं और लपटों से भर गया, जिससे लोग अंदर फंस गए। फायर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बिल्डिंग में Emergency Exit, Smoke Ventilation और Fire Alarm जैसी जरूरी सुविधाएं या तो मौजूद नहीं थीं या सही तरीके से काम नहीं कर रही थीं। License और Fire NOC में बड़ा खेल हादसे के बाद जांच एजेंसियों को कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। बताया जा रहा है कि होटल को सिर्फ 6 कमरों का Bed & Breakfast License मिला था, लेकिन वहां करीब 25 कमरे बनाए गए थे। इतना ही नहीं, होटल के पास वैध Fire NOC भी नहीं थी। इसके बावजूद लंबे समय से होटल का संचालन किया जा रहा था। जांच टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर बिना जरूरी सुरक्षा मंजूरी के होटल कैसे चल रहा था। होटल मालिक और मैनेजर पर शिकंजा हादसे के बाद होटल मालिक और मैनेजर दोनों जांच के घेरे में आ गए। पुलिस ने होटल मालिक लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मैनेजर की तलाश लगातार जारी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक हादसे के वक्त होटल स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई थी और कई कर्मचारी लोगों की मदद करने के बजाय मौके से भाग निकले। अब CCTV फुटेज और कॉल रिकॉर्ड के जरिए पूरे मामले की जांच की जा रही है। विदेशी मेहमानों की मौत से बढ़ी चिंता इस हादसे में बांग्लादेश, अफगानिस्तान, नाइजीरिया और अफ्रीकी देशों के कई नागरिकों की मौत हुई है। इनमें से कई लोग दिल्ली के बड़े अस्पतालों में इलाज कराने आए थे। अस्पतालों के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल दिखाई दिया। कुछ परिवार ऐसे भी थे जिन्होंने एक साथ अपने कई सदस्यों को खो दिया। प्रशासन पर उठे सवाल दिल्ली हाईकोर्ट पहले भी राजधानी में फायर सेफ्टी को लेकर सख्त टिप्पणी कर चुका है। इसके बावजूद कई होटल, गेस्ट हाउस और कमर्शियल बिल्डिंग बिना सुरक्षा मानकों के चल रही हैं। अब इस हादसे के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में कई इमारतें नियमों के खिलाफ बनाई गई हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। दिल्ली सरकार का बड़ा Action हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने राजधानी में बड़े स्तर पर Fire Safety Drive शुरू करने का फैसला लिया है। होटल, हॉस्टल, रेस्टोरेंट, अस्पताल और कोचिंग सेंटरों की जांच की जाएगी। सरकार का कहना है कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। वहीं पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे मामले में किन अधिकारियों की लापरवाही रही। लोगों के दिलों में छोड़ गया डर मालवीय नगर होटल अग्निकांड ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर शहरों में सुरक्षा नियमों को लेकर इतनी लापरवाही क्यों बरती जाती है। जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया, उनके लिए यह हादसा जिंदगीभर का दर्द बन गया है। स्थानीय लोग अब मांग कर रहे हैं कि दोषियों पर सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि ऐसा सिस्टम बनाया जाए जिससे भविष्य में कोई और परिवार इस तरह बर्बाद न हो। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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