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CBSE

Cyber Attack से हिला CBSE Portal, फिर भी नहीं रुका सिस्टम — हजारों छात्रों ने किया आवेदन

CBSE (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) के रिवैल्यूएशन पोर्टल को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। बोर्ड ने बताया है कि हाल ही में पोर्टल पर साइबर हमलों की कई कोशिशें हुईं, लेकिन मजबूत सुरक्षा सिस्टम की वजह से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और पूरा प्लेटफॉर्म सामान्य रूप से चलता रहा। इस बीच छात्रों की तरफ से रिवैल्यूएशन प्रक्रिया को लेकर काफी एक्टिविटी देखने को मिली और अब तक हजारों आवेदन जमा हो चुके हैं। 16,000 से ज्यादा छात्रों ने किया आवेदन CBSE के अनुसार, अब तक 16,000+ छात्र अपने अंकों की वेरिफिकेशन और रिवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर चुके हैं।पोर्टल पर भारी ट्रैफिक के बावजूद सिस्टम ने बिना रुके काम किया और आवेदन प्रक्रिया जारी रही। Cyber Attack की कोशिश क्या थी? बोर्ड के मुताबिक पोर्टल पर अचानक: लेकिन CBSE की सिक्योरिटी टीम ने समय रहते स्थिति को संभाल लिया। CBSE का आधिकारिक बयान CBSE ने साफ किया है कि: क्यों जरूरी है यह मामला? आज के समय में CBSE जैसे बड़े एजुकेशन सिस्टम पूरी तरह डिजिटल हो चुके हैं।ऐसे में लाखों छात्रों का डेटा और रिजल्ट सिस्टम पर निर्भर करता है। इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर साइबर सिक्योरिटी कितनी जरूरी है, खासकर जब परीक्षा और रिजल्ट जैसे संवेदनशील डेटा शामिल हों। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Twisha

Court Drama in Twisha Case: सास का भावुक बयान, जांच में आया नया ट्विस्ट

देश-हरपल Twisha Case एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। कोर्ट में हुई हालिया सुनवाई के दौरान ट्विशा की सास गिरिबाला (Giribala) का बयान सामने आया, जिसने पूरे मामले को और उलझा दिया है। उन्होंने कोर्ट में साफ कहा कि उन्हें इस केस से जुड़ी किसी भी तरह की जानकारी नहीं है। उनके इस बयान के बाद केस की जांच एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। कोर्ट में क्या हुआ था? सुनवाई के दौरान जब जज और वकीलों की ओर से सवाल पूछे गए, तो सास गिरिबाला भावुक हो गईं। उन्होंने कहा—“मुझे कुछ भी पता नहीं है।” यह सुनते ही कोर्ट रूम में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया। उनका यह बयान केस की दिशा को प्रभावित करने वाला माना जा रहा है, क्योंकि इससे कई पुराने सवाल फिर से खड़े हो गए हैं। जांच में क्या नया है? जांच एजेंसियां पहले से ही इस पूरे मामले की कई एंगल्स पर जांच कर रही हैं। पुलिस सभी संबंधित लोगों के बयान रिकॉर्ड कर रही है और सबूतों को जोड़ने की कोशिश में लगी हुई है। अब गिरिबाला के इस बयान के बाद जांच टीम को कुछ बिंदुओं की दोबारा पुष्टि करनी पड़ सकती है। इससे केस की प्रक्रिया और लंबी होने की संभावना भी जताई जा रही है। क्यों चर्चा में है Twisha Case? Twisha Case सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि एक ऐसा केस बन गया है जिसमें पारिवारिक रिश्तों, भावनाओं और विरोधाभासी बयानों की परतें खुल रही हैं। हर सुनवाई के साथ नया एंगल सामने आ रहा है, जिससे मामला और भी पेचीदा होता जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Virat Kohli

Virat Kohli Vrindavan Visit: IPL Champion बनने के बाद प्रेमानंद महाराज से मिले विराट, तस्वीरें वायरल

आईपीएल का खिताब जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार विराट कोहली (Virat Kohli)एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह क्रिकेट नहीं बल्कि उनकी आध्यात्मिक यात्रा है। पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ विराट वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान दोनों का सादगी भरा अंदाज सोशल Media पर खूब वायरल हो रहा है। IPL जीत के बाद वृंदावन पहुंचे विराट-अनुष्का आईपीएल ट्रॉफी जीतने की खुशी के बीच विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने वृंदावन पहुंचकर प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए। आश्रम से सामने आए वीडियो और तस्वीरों में विराट माथे पर तिलक लगाए बेहद शांत और संतुलित नजर आए। वहीं अनुष्का भी बेहद साधारण भारतीय परिधान में दिखाई दीं। क्रिकेट मैदान पर अपने जोशीले अंदाज के लिए मशहूर विराट का यह शांत और भक्तिमय रूप फैंस को काफी पसंद आ रहा है। सोशल मीडिया पर लोग उनकी आध्यात्मिक सोच और संस्कारों की सराहना कर रहे हैं। प्रेमानंद महाराज से लिया आशीर्वाद वृंदावन स्थित आश्रम में दोनों ने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। बताया जा रहा है कि इस दौरान जीवन, आध्यात्म और मानसिक शांति जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। गौरतलब है कि विराट और अनुष्का पहले भी कई बार प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए वृंदावन आ चुके हैं। दोनों अक्सर अपनी व्यस्त जिंदगी से समय निकालकर धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों पर जाते रहे हैं। अनुष्का शर्मा की सादगी बनी चर्चा का विषय इस मुलाकात के दौरान जहां विराट के माथे का तिलक और चेहरे की मुस्कान लोगों का ध्यान खींच रही थी, वहीं अनुष्का शर्मा की सादगी ने भी सभी का दिल जीत लिया। बिना किसी दिखावे के साधारण लुक में नजर आईं अनुष्का की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। फैंस का कहना है कि स्टारडम और सफलता के बावजूद इस कपल का जमीन से जुड़ा रहना उन्हें खास बनाता है। सोशल मीडिया पर फैंस ने लुटाया प्यार विराट और अनुष्का की तस्वीरें सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। किसी ने उन्हें “सफलता और संस्कारों का प्रतीक” बताया तो किसी ने लिखा कि “यही वजह है कि लोग विराट को सिर्फ क्रिकेटर नहीं बल्कि प्रेरणा मानते हैं।” कई यूजर्स ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने के बाद भी दोनों का विनम्र और आध्यात्मिक बने रहना युवाओं के लिए एक सकारात्मक संदेश है। सफलता के साथ आध्यात्म का संतुलन आईपीएल चैंपियन बनने के बाद विराट कोहली की यह वृंदावन यात्रा बताती है कि जीवन में सफलता के साथ मानसिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन भी जरूरी है। करोड़ों फैंस के दिलों पर राज करने वाले विराट और अनुष्का ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सादगी और संस्कार ही व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान होते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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थरूर का बयान: ‘हर कार्यक्रम में वंदे मातरम गाना लोगों के लिए बोझिल’, बोले- सहमति से निकले समाधान

Shashi Tharoor का बयान: ‘हर कार्यक्रम में वंदे मातरम गाना लोगों के लिए बोझिल’

कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि हर कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ गाना कई लोगों के लिए बोझिल और मुश्किल हो सकता है। इस मुद्दे का समाधान आपसी सहमति और समझदारी से निकाला जाना चाहिए। थरूर ने कहा कि देशभक्ति किसी एक तरीके तक सीमित नहीं होती। हर व्यक्ति अपने तरीके से देश के प्रति सम्मान और प्रेम दिखाता है। ऐसे में किसी पर किसी खास गीत को गाने का दबाव बनाना सही नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक विविधताओं वाला देश है, जहां अलग-अलग धर्म, भाषाएं और संस्कृतियां हैं। ऐसे में किसी भी राष्ट्रीय मुद्दे पर संवेदनशीलता और आपसी सम्मान जरूरी है। थरूर के मुताबिक, इस विषय पर राजनीति करने के बजाय सभी पक्षों को मिलकर ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे किसी की भावनाएं आहत न हों। थरूर के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ इसे राष्ट्रगीत का अपमान बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ‘वंदे मातरम’ लंबे समय से देशभक्ति और स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक रहा है। ऐसे में इस पर होने वाली हर बहस लोगों की भावनाओं से जुड़ जाती है। अब देखना होगा कि इस बयान पर राजनीतिक दल आगे क्या रुख अपनाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IMD

IMD Weather Forecast: देशभर में आंधी-बारिश का दौर, आगरा में नुकसान; Monsoon की दस्तक करीब

देश के कई हिस्सों में जून की शुरुआत राहत भरी खबर लेकर आई है। पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी और लू से परेशान लोगों को अब बारिश और ठंडी हवाओं ने राहत पहुंचाई है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत देश के 23 राज्यों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है। कहीं तेज बारिश हो रही है तो कहीं आंधी और बादलों ने तापमान में गिरावट ला दी है। हालांकि, मौसम का यह बदलाव हर जगह राहत ही नहीं ला रहा। कुछ शहरों में भारी बारिश के कारण जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। आगरा में बारिश के बाद सड़कें धंसने और एक मकान गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। वहीं मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया है। आगरा में बारिश के बाद बिगड़े हालात उत्तर प्रदेश के आगरा में हुई तेज बारिश ने नगर निगम और प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी। कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई, जबकि कुछ सड़कों के धंसने से लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। एक मकान के ढहने की घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। राहत की बात यह रही कि प्रशासन ने समय रहते मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। यूपी, MP समेत 23 राज्यों में बदला मौसम उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत तक मौसम का असर साफ दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और दिल्ली-एनसीआर के कई हिस्सों में बादल छाए हुए हैं। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। तेज हवाओं के चलते लोगों को गर्मी से राहत मिली है और तापमान में भी गिरावट देखने को मिली है। Heatwave से मिली राहत, लोगों ने ली राहत की सांस मई के अंतिम सप्ताह में कई राज्यों का तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था। दिन के समय सड़कों पर सन्नाटा और अस्पतालों में गर्मी से परेशान मरीजों की संख्या बढ़ रही थी। लेकिन अब बारिश और बादलों ने मौसम को काफी हद तक सुहावना बना दिया है। लोग सुबह और शाम के समय खुली हवा का आनंद लेते नजर आ रहे हैं। मौसम विभाग ने जारी किया Alert भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई राज्यों में गरज-चमक, तेज हवाओं और बिजली गिरने की संभावना जताई है। विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी है। किसानों को भी मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखने और खेतों में काम करते समय सतर्क रहने को कहा गया है। Kerala में Monsoon की एंट्री अब बस कुछ दिन दूर देशभर की निगाहें अब मानसून पर टिकी हुई हैं। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और अगले 2 से 3 दिनों में केरल तट पर पहुंच सकता है। मानसून के आगमन के साथ ही देश के कई हिस्सों में बारिश का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून समय पर और सामान्य रहता है तो इसका सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिलेगा। खरीफ सीजन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और अच्छी बारिश खेती के लिए बेहद अहम मानी जाती है। किसानों और आम लोगों के लिए राहत की खबर गर्मी से राहत और मानसून की दस्तक की खबर ने किसानों के साथ-साथ आम लोगों के चेहरों पर भी मुस्कान ला दी है। हालांकि मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बारिश और तेज हवाओं के दौरान सतर्कता जरूरी है। आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में मौसम और अधिक सक्रिय रहने की संभावना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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TMC

West Bengal Politics: TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, नाराज विधायक बना सकते हैं अलग पार्टी

पश्चिम बंगाल की सियासत में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ते असंतोष की चर्चा जोरों पर है। पार्टी से दो विधायकों को बाहर किए जाने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में नई पार्टी या अलग गुट के गठन की अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा यहां तक पहुंच गई है कि कुछ नाराज नेता “असली तृणमूल” (Asli Trinamool) के नाम से नया राजनीतिक मंच तैयार कर सकते हैं। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। दो विधायकों के निष्कासन से बढ़ी हलचल TMC ने हाल ही में अपने विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया। पार्टी का कहना है कि दोनों नेता संगठनात्मक अनुशासन का पालन नहीं कर रहे थे और लगातार ऐसे कदम उठा रहे थे जिससे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंच रहा था। वहीं निष्कासित नेताओं का आरोप है कि पार्टी के भीतर अपनी बात रखने की गुंजाइश लगातार कम होती जा रही है। उनका कहना है कि कुछ मुद्दों पर सवाल उठाने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। Signature Forgery Case बना विवाद की जड़ पूरे मामले की शुरुआत कथित सिग्नेचर फोर्जरी (Signature Forgery) विवाद से मानी जा रही है। विधानसभा से जुड़े कुछ दस्तावेजों में हस्ताक्षरों की कथित गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाए गए थे। इस मामले ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक कर दिया। जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की जांच कर रही हैं और राजनीतिक हलकों में इसे TMC के अंदरूनी संघर्ष का बड़ा कारण माना जा रहा है। ‘Asli Trinamool’ की चर्चा ने बढ़ाई बेचैनी राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से नाराज कुछ नेता और कार्यकर्ता एक नए मंच के गठन पर विचार कर रहे हैं। इसी वजह से “असली तृणमूल” नाम चर्चा में आया है। हालांकि किसी भी नेता ने सार्वजनिक रूप से नई पार्टी बनाने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन लगातार हो रही बैठकों और बयानबाजी ने अटकलों को और मजबूत कर दिया है। यदि ऐसा होता है तो यह ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। ममता बनर्जी ने दिया स्पष्ट संदेश बढ़ती अटकलों के बीच ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि पार्टी अनुशासन से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि TMC की असली ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता हैं और संगठन किसी भी व्यक्ति से बड़ा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि कुछ नेताओं की नाराजगी से संगठन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा और TMC पहले की तरह मजबूती से काम करती रहेगी। 2026 चुनाव से पहले बढ़ी चुनौती राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के भीतर कई स्तरों पर असंतोष सामने आया है। ऐसे में यदि यह नाराजगी बढ़ती है तो आने वाले चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल TMC में औपचारिक टूट की स्थिति नहीं है, लेकिन जिस तरह से घटनाक्रम आगे बढ़ रहे हैं, उसने पश्चिम बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Pahalgam

Pahalgam Attack Mystery: हमले से पहले हुई थी पूरी Planning, NIA को मिले Pakistan से जुड़े सुराग

जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम (Pahalgam) में हुए आतंकी हमले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को अब ऐसे डिजिटल सबूत मिले हैं, जो इस हमले के तार पाकिस्तान से जुड़ने की ओर इशारा कर रहे हैं। जांच में सामने आया है कि आतंकियों के पास मिले मोबाइल फोन पहले पाकिस्तान भेजे गए थे और उनमें हमले की जगह बायसरन घाटी से जुड़ी अहम जानकारियां भी मौजूद थीं। हमले से पहले की गई थी पूरी रेकी NIA अधिकारियों के मुताबिक, आतंकियों के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। फोन में मौजूद लोकेशन डेटा, स्क्रीनशॉट और तस्वीरों से पता चलता है कि हमले से पहले बायसरन इलाके की बारीकी से रेकी की गई थी। जांच एजेंसियों को मिले रिकॉर्ड बताते हैं कि आतंकियों ने हमले से करीब एक सप्ताह पहले इलाके के रास्तों, भीड़भाड़ वाले स्थानों और संभावित टारगेट्स की जानकारी जुटाई थी। इससे साफ है कि हमला अचानक नहीं बल्कि पूरी योजना के तहत अंजाम दिया गया। पाकिस्तान से जुड़े मिले मोबाइल फोन जांच के दौरान बरामद दो स्मार्टफोन एजेंसियों के लिए अहम सुराग बने हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि ये मोबाइल फोन चीन में बने थे और बाद में पाकिस्तान भेजी गई खेप का हिस्सा थे। इनमें से एक डिवाइस कराची और दूसरा लाहौर पहुंचा था। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन डिवाइसों का इस्तेमाल आतंकियों के बीच संपर्क और हमले की तैयारी के लिए किया गया। लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के बाद इन्हें हमले से पहले सक्रिय किया गया था। डिजिटल सबूतों ने खोले कई राज फोन से मिले डेटा में बायसरन घाटी की लोकेशन, मैप्स और कई तस्वीरें शामिल हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि इन जानकारियों ने यह साबित करने में मदद की है कि आतंकियों ने पहले से इलाके का अध्ययन किया था और हमले की रणनीति तैयार की थी। विशेषज्ञों के अनुसार, आज के दौर में डिजिटल फॉरेंसिक जांच आतंकवाद के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण हथियार बन चुकी है। मोबाइल डेटा, चैट रिकॉर्ड और लोकेशन हिस्ट्री कई बार ऐसे राज खोल देते हैं जो पारंपरिक जांच में सामने नहीं आते। NIA की नजर पूरे नेटवर्क पर एजेंसी अब केवल हमले में शामिल आतंकियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों और नेटवर्क की भी जांच कर रही है जिन्होंने किसी भी रूप में मदद पहुंचाई हो। जांच का फोकस इस बात पर भी है कि पाकिस्तान से जुड़े उपकरण आतंकियों तक कैसे पहुंचे और स्थानीय स्तर पर किसने उनकी सहायता की। घाटी में बढ़ाई गई सुरक्षा हमले के बाद पूरे पहलगाम और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और संवेदनशील इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Surya Chauhan

Surya Chauhan Murder Case: बकरीद पर हत्या, आरोपी असद का Encounter

गाजियाबाद के खोड़ा इलाके में हुए Surya Chauhan हत्याकांड ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है। बकरीद के दिन हुई इस वारदात ने न सिर्फ एक परिवार से उसका बेटा छीन लिया, बल्कि पूरे इलाके में डर और बेचैनी का माहौल भी पैदा कर दिया। हत्या के मुख्य आरोपी असद के पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने और उसके घर पर बुलडोजर कार्रवाई की तैयारी के बाद मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। बकरीद के दिन हुई सनसनीखेज हत्या बकरीद के मौके पर जब लोग त्योहार की खुशियां मना रहे थे, उसी दौरान खोड़ा में गोलियों की आवाज गूंज उठी। सूर्या चौहान की हत्या ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घटना इतनी अचानक हुई कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। हत्या के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का कहना है कि उन्हें इंसाफ चाहिए और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। पुलिस की कार्रवाई और असद का Encounter घटना के बाद गाजियाबाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश में कई टीमों को लगाया। जांच के दौरान मुख्य आरोपी असद की लोकेशन मिलने पर पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई। पुलिस के अनुसार, असद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए फायरिंग की, जिसके जवाब में हुई कार्रवाई में वह घायल हो गया। बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इस एनकाउंटर के बाद इलाके में चर्चा का माहौल और तेज हो गया। अब Bulldozer Action की तैयारी असद के एनकाउंटर के बाद प्रशासन ने उसके घर और अन्य संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में कुछ निर्माण नियमों के उल्लंघन की जानकारी सामने आई है। इसी के चलते संबंधित विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया है। यदि नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया जा सकता है। इस कार्रवाई की खबर के बाद आसपास के लोगों में भी हलचल बढ़ गई है। खोड़ा में पसरा सन्नाटा जिस इलाके में कभी रोजमर्रा की चहल-पहल दिखाई देती थी, वहां अब एक अजीब सी खामोशी महसूस की जा रही है। लोग घटना को लेकर खुलकर बात करने से बच रहे हैं। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस लगातार गश्त कर रही है और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि हत्या और उसके बाद हुई घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। लोग चाहते हैं कि जल्द से जल्द मामले की पूरी सच्चाई सामने आए। जांच अभी जारी, कई सवाल बाकी हालांकि मुख्य आरोपी असद की मौत हो चुकी है, लेकिन पुलिस अब भी इस हत्याकांड के हर पहलू की जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हत्या की साजिश में और कौन-कौन शामिल था और इसके पीछे असली वजह क्या थी। सूर्या चौहान हत्याकांड अब सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था, पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक सख्ती की बड़ी कहानी बन चुका है। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए खुलासे इस मामले को और महत्वपूर्ण बना सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mukundpur

Mukundpur Blast जोरदार धमाके के बाद ढहा भवन, मलबे में फंसे शख्स की तलाश जारी

राजधानी दिल्ली के मुकुंदपुर (Mukundpur) इलाके में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक इमारत में अचानक जोरदार धमाका हुआ और देखते ही देखते भवन का एक हिस्सा ढह गया। हादसे के बाद पूरे इलाके में धूल का गुबार छा गया और लोगों की चीख-पुकार सुनाई देने लगी। स्थानीय लोगों ने तुरंत मदद के लिए दौड़ लगाई, जबकि पुलिस, दमकल विभाग और राहत-बचाव टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे की वजह गैस सिलेंडर में विस्फोट (Cylinder Blast) बताई जा रही है। हालांकि प्रशासन ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद ही विस्फोट के सही कारणों की पुष्टि की जाएगी। धमाके के बाद ढही इमारत, लोगों में मचा हड़कंप प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुबह अचानक तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। आसपास के लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही इमारत का एक हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया। घटना के बाद इलाके में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और स्थानीय निवासी अपने घरों से बाहर निकल आए। कई लोगों ने बताया कि धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास की इमारतें भी हिल गईं। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने मलबे में दबे लोगों को निकालने का प्रयास शुरू कर दिया। रेस्क्यू टीम ने तीन लोगों को सुरक्षित निकाला सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस और अन्य राहत एजेंसियों की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। घंटों की मशक्कत के बाद बचावकर्मियों ने मलबे में दबे तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घायलों को तत्काल अस्पताल भेजा गया, जहां उनका उपचार जारी है। डॉक्टरों के अनुसार सभी की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। एक व्यक्ति के फंसे होने की आशंका राहत एजेंसियों को आशंका है कि अभी भी एक व्यक्ति मलबे के नीचे फंसा हो सकता है। इसी वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है। भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरे मलबे की जांच नहीं हो जाती, तब तक अभियान जारी रहेगा। जांच के दायरे में निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था हादसे के बाद प्रशासन ने इमारत की निर्माण गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों और गैस सिलेंडर के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों की टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या भवन निर्माण में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या फिर तकनीकी कारणों से यह दुर्घटना हुई। स्थानीय लोगों ने दिखाई इंसानियत हादसे के बाद कई स्थानीय निवासी बचाव कार्य में जुट गए। कुछ लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की तो कई लोग राहत टीमों के साथ मलबा हटाने में सहयोग करते नजर आए। इस मुश्किल घड़ी में स्थानीय लोगों की तत्परता ने इंसानियत की एक मिसाल पेश की। लगातार बढ़ रही भवन सुरक्षा को लेकर चिंता दिल्ली और एनसीआर में पिछले कुछ वर्षों में इमारत गिरने और गैस रिसाव जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली है। ऐसे में मुकुंदपुर की यह घटना एक बार फिर भवन सुरक्षा और गैस सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Trump Netanyahu Phone Call

Trump vs Netanyahu: फोन कॉल में भड़के ट्रंप, इजरायल PM को बताया ‘पागल’, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

Trump-Netanyahu Phone Call: दोस्ती में दरार या कूटनीतिक दबाव? अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के बीच हुई एक फोन कॉल ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायली सैन्य कार्रवाई को लेकर ट्रंप बेहद नाराज नजर आए। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू को “क्रेजी” (पागल) तक कह दिया और इजरायल की सैन्य रणनीति पर कड़ी नाराजगी जताई। आखिर क्यों भड़के ट्रंप? रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल ने बेरूत के दक्षिणी हिस्सों और हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए थे। इन हमलों से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई थी। अमेरिकी प्रशासन को डर था कि यह सैन्य कार्रवाई अमेरिका और ईरान के बीच चल रही संवेदनशील वार्ताओं को प्रभावित कर सकती है। इसी मुद्दे पर ट्रंप ने नेतन्याहू से नाराजगी जताई। रिपोर्ट्स में क्या कहा गया? Axios और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने फोन पर नेतन्याहू से कहा कि उनकी कार्रवाई इजरायल को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग कर सकती है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रंप ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया और इजरायली हमलों को “अनुपात से ज्यादा” प्रतिक्रिया बताया। क्या रुक सकते हैं हमले? बातचीत के बाद ऐसी खबरें सामने आईं कि इजरायल ने बेरूत पर कुछ संभावित हमलों की योजना रोक दी है। वहीं ट्रंप ने दावा किया कि दोनों पक्ष तनाव कम करने की दिशा में कदम बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। हालांकि नेतन्याहू ने साफ किया कि यदि हिजबुल्लाह की ओर से हमले जारी रहे तो इजरायल जवाबी कार्रवाई करता रहेगा। मिडिल ईस्ट में बढ़ सकती है नई चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र पर पड़ सकता है। इससे अमेरिका-ईरान वार्ता, लेबनान की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। यह भी पढ़े –Iran ने अमेरिका के साथ सीजफायर वार्ता रोकी | होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की तैयारी, लेबनान हमलों पर विरोध Desh Harpal Analysis ट्रंप और नेतन्याहू के रिश्ते लंबे समय से मजबूत माने जाते रहे हैं, लेकिन हालिया घटनाक्रम यह संकेत दे रहा है कि मिडिल ईस्ट संकट को लेकर दोनों नेताओं के बीच रणनीतिक मतभेद उभर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद केवल कूटनीतिक दबाव है या अमेरिका-इजरायल संबंधों में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।
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Imran Khan

Imran Khan भारत छोड़ने के नोटिस पर विवाद, Akshay Kumar और Adnan Sami की Citizenship भी चर्चा में

बॉलीवुड में किसी अभिनेता की फिल्म हिट हो या फ्लॉप, उससे जुड़ी खबरें अक्सर चर्चा में रहती हैं। लेकिन जब बात नागरिकता की आती है, तो मामला थोड़ा अलग हो जाता है। अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस मिलने के बाद एक बार फिर अक्षय कुमार, अदनान सामी, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ की नागरिकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। किसी कलाकार का भारत में जन्म लेना, यहां रहना या हिंदी फिल्मों में काम करना उसे अपने आप भारतीय नागरिक नहीं बना देता। वहीं, विदेशी नागरिकता रखने वाले व्यक्ति के भारत में रहने और काम करने के भी कुछ नियम हैं। ऐसे में समझना जरूरी है कि इमरान खान के मामले में क्या सामने आया है और भारत में Citizenship Rules आखिर क्या कहते हैं। Imran Khan को क्यों मिला भारत छोड़ने का नोटिस? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेता इमरान खान (Imran Khan) को मुंबई पुलिस ने 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने का नोटिस दिया है। इमरान खान अमेरिकी नागरिक हैं और उनकी नागरिकता को लेकर यह मामला चर्चा में आया है। यह विवाद 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए गए थे। इस आंदोलन में इमरान खान की भागीदारी के बाद भाजपा नेता किरीट सोमैया ने उनकी विदेशी नागरिकता का हवाला देते हुए अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद इमरान खान को नोटिस जारी किए जाने की खबर सामने आई। हालांकि, किसी व्यक्ति को नोटिस मिलना और उसके खिलाफ किसी आरोप का अंतिम रूप से साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। इस मामले में नोटिस के आधार और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रखना जरूरी होगा। भारत में Citizenship Rules क्या कहते हैं? नागरिकता मुख्य रूप से Citizenship Act, 1955 के तहत तय होती है। कानून में जन्म, वंश, पंजीकरण और देशीयकरण यानी Naturalisation के जरिए नागरिकता प्राप्त करने के प्रावधान हैं। हर रास्ते के लिए अलग-अलग शर्तें निर्धारित हैं। भारत की नागरिकता से जुड़े 5 जरूरी नियम: नागरिकता से जुड़े नियमों की आधिकारिक जानकारी भारत सरकार के Indian Citizenship Online Portal पर उपलब्ध है। OCI Card क्या है और इसके धारकों को कौन-से अधिकार मिलते हैं? OCI का पूरा नाम Overseas Citizen of India है। कई लोग इसे दोहरी नागरिकता समझ लेते हैं, लेकिन यह भारतीय नागरिकता नहीं है। OCI कार्डधारक विदेशी नागरिक ही रहते हैं और उनके पास किसी दूसरे देश का पासपोर्ट होता है। कार्ड के जरिए पात्र लोगों को भारत आने-जाने और रहने सहित कई सुविधाएं मिलती हैं। हालांकि, वे भारतीय नागरिकों की तरह चुनाव में मतदान नहीं कर सकते और न ही संसद या राज्य विधानसभाओं का चुनाव लड़ सकते हैं। कार्डधारकों पर विदेशी नागरिकों और इमिग्रेशन से जुड़े लागू नियम भी प्रभाव डालते हैं। किसी व्यक्ति के मामले में कार्रवाई की वैधता संबंधित कानून और परिस्थितियों के आधार पर तय होती है। क्या विदेशी नागरिक भारत में Protest कर सकते हैं? इमरान खान के मामले के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या विदेशी नागरिक या OCI कार्डधारक भारत में राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने जैसे अधिकार भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं, जो कानून के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन हैं। विदेशी नागरिकों को ये अधिकार उसी रूप में प्राप्त नहीं हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी प्रदर्शन में विदेशी नागरिक की मौजूदगी अपने आप गैरकानूनी हो जाती है। मामले की परिस्थितियां, लागू इमिग्रेशन नियम, संबंधित गतिविधि और प्रशासन की कार्रवाई के आधार को समझना जरूरी है। इमरान खान के मामले में भी नोटिस जारी करने का आधार और आगे की कानूनी प्रक्रिया अहम होगी। Citizenship Controversy: इन मामलों से क्या समझें? इमरान खान, अक्षय कुमार, अदनान सामी, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ की नागरिकता से जुड़े मामले अलग-अलग हैं। इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस मिलने की खबर सामने आई है, अक्षय कुमार को 2023 में भारतीय नागरिकता मिली, जबकि अदनान सामी ने 2016 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। दूसरी ओर, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ के पास ब्रिटिश नागरिकता है। इन सभी मामलों में एक बात समान है—किसी व्यक्ति की लोकप्रियता, जन्मस्थान या भारत में काम करने से उसकी नागरिकता अपने आप तय नहीं होती। इसके लिए कानूनी प्रावधान और आधिकारिक दस्तावेज मायने रखते हैं। इसलिए नागरिकता से जुड़े किसी भी विवाद को समझते समय सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बजाय तथ्यों, आधिकारिक जानकारी और लागू कानूनों पर भरोसा करना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 1400 अंक उछला, 74 हजार के पार; Nifty में भी तूफानी तेजी

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में आज 15 अक्टूबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 1,400 अंक उछलकर 74,000 के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 400 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों के बीच उत्साह देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और IT व Auto सेक्टर के शेयरों में खरीदारी को इस उछाल की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। पिछले कारोबारी सत्रों में बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच आई इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। हालांकि, बाजार की यह बढ़त आगे कितनी टिकती है, इस पर घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों का असर बना रहेगा। Sensex Today: 74 हजार के पार पहुंचा सेंसेक्स शेयर बाजार में खरीदारी बढ़ने से सेंसेक्स में करीब 1,400 अंकों की तेजी आई और यह 74,000 के स्तर के पार निकल गया। प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से बाजार को मजबूती मिली। वहीं, निफ्टी भी लगभग 400 अंक चढ़ गया। शेयर बाजार में इस तरह की तेजी निवेशकों की धारणा में सुधार का संकेत दे सकती है। हालांकि, बाजार की वास्तविक स्थिति समझने के लिए यह देखना भी जरूरी है कि तेजी कितने शेयरों में रही और कारोबार के अंत तक बाजार अपनी बढ़त बनाए रखता है या नहीं। Crude Oil Price: कच्चा तेल सस्ता होने से क्यों मिली राहत? कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने से देश के आयात खर्च पर दबाव कम हो सकता है। इसका फायदा परिवहन, विमानन और तेल पर निर्भर दूसरे कारोबारों को भी मिल सकता है। साथ ही, तेल की कीमतों में लंबे समय तक नरमी रहने पर महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर तुरंत सभी कंपनियों या आम लोगों तक पहुंचे, यह जरूरी नहीं है। इसका प्रभाव रुपये की विनिमय दर, सरकारी करों और घरेलू कीमतों जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। IT और Auto Stocks में खरीदारी से बाजार को सपोर्ट आज की तेजी में IT और Auto सेक्टर के शेयरों में खरीदारी अहम रही। इन सेक्टरों की बड़ी कंपनियों के शेयरों में बढ़त का असर सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों पर पड़ सकता है। आईटी सेक्टर पर निवेशकों की नजर वैश्विक मांग, अमेरिकी बाजारों और कंपनियों के वित्तीय नतीजों के कारण रहती है। वहीं, ऑटो सेक्टर में बिक्री, त्योहारी मांग, कच्चे माल की लागत और ब्याज दरें कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं। इन सेक्टरों में आई खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया, लेकिन निवेशकों को किसी भी कंपनी का शेयर चुनने से पहले उसके कारोबार और वित्तीय स्थिति का आकलन करना चाहिए। Share Market में तेजी के बाद निवेशक क्या करें? सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी तेजी देखकर निवेशकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या बाजार में निवेश करने का सही समय आ गया है। लेकिन केवल एक दिन की तेजी के आधार पर फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले इन बातों पर ध्यान देना उपयोगी रहेगा: आगे कैसी रहेगी Stock Market की चाल? आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा कई कारकों से प्रभावित हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बाजारों का प्रदर्शन, विदेशी निवेशकों की खरीदारी या बिकवाली और कंपनियों के तिमाही नतीजे इसमें अहम भूमिका निभाएंगे। अगर सकारात्मक संकेत बने रहते हैं, तो बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर किसी प्रतिकूल घटनाक्रम या निवेशकों की मुनाफावसूली से बाजार में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, 15 अक्टूबर को सेंसेक्स में करीब 1,400 अंकों और निफ्टी में लगभग 400 अंकों की तेजी शेयर बाजार के लिए बड़ा उछाल है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और IT व Auto शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि यह तेजी आगे भी जारी रहती है या बाजार में फिर उतार-चढ़ाव शुरू होता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJI Surya Kant

CJI Surya Kant राहुल गांधी के मार्च पर बोले- कोर्ट के बाहर क्या हो रहा, सब पता है

राहुल गांधी के मार्च और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अदालत को बाहर दिए जा रहे बयानों और अंदर चल रही कार्यवाही, दोनों की जानकारी है। न्यायपालिका किसी दबाव में काम नहीं करती। राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की ओर से 12 अक्टूबर को निकाले गए मार्च के बाद यह मामला चर्चा में है। दूसरी ओर, SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष चुनाव आयोग से लगातार सवाल पूछ रहा है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों से वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। अब इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर सबकी नजर है। CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान क्या कहा? सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को किसी तरह के दबाव या धमकी से प्रभावित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अदालत को पता है कि बाहर क्या कहा जा रहा है और कोर्ट के भीतर क्या हो रहा है। उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब सुप्रीम कोर्ट के बाहर हुए राजनीतिक मार्च और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विवाद जारी है। अदालत ने इस मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। हालांकि, नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि किसी नेता के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं। अंतिम निर्णय सुनवाई और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगा। Rahul Gandhi March: 12 अक्टूबर को क्या हुआ था? 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के कई नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। इस दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विरोध जताया गया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से नहीं हटना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी अपनी मांगें रखीं। विपक्ष इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहा है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया को चुनाव व्यवस्था का जरूरी हिस्सा बताया जाता है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की CJI से मुलाकात क्यों नहीं हुई? मार्च से पहले राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CJI सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था। वे SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रखना चाहते थे। हालांकि, CJI ने मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने संकेत दिया कि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उचित कानूनी माध्यम से अदालत के सामने रखा जाना चाहिए। इसका मतलब यह है कि यदि किसी पक्ष को चुनाव प्रक्रिया या मतदाता सूची को लेकर शिकायत है, तो वह संबंधित नियमों के तहत याचिका दाखिल कर सकता है। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है। SIR Controversy: मतदाता सूची से नाम हटाने पर क्यों है विवाद? SIR को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदाता सूची को अपडेट करते समय वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। विपक्ष का आरोप है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं को परेशानी हो सकती है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित और अन्य कारणों से अपात्र हो चुके मतदाताओं के रिकॉर्ड को अपडेट करना है। ऐसे में पारदर्शिता, उचित सत्यापन और शिकायतों के समय पर समाधान की भूमिका अहम हो जाती है। किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं होने पर उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है, इसलिए इस प्रक्रिया में सावधानी बरतना जरूरी है। Supreme Court Hearing: अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट में SIR से संबंधित याचिकाओं पर आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले पर विचार करेगी। राहुल गांधी के मार्च से जुड़े विवाद में भी अदालत की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। फिलहाल, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, अदालत की गरिमा और मतदाता सूची की पारदर्शिता इस पूरे मामले के प्रमुख पहलू बने हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में कमजोर मानसून से जल संकट का खतरा, महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज

इंदौर। मध्य प्रदेश में कमजोर मानसून के कारण आने वाले महीनों में जल संकट की आशंका बढ़ गई है। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है, लेकिन इस बार अब तक केवल 23 इंच वर्षा दर्ज की गई है। हालात को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देने की मांग की है। जल संकट से निपटने की रणनीति तैयार करने के लिए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और इंदौर नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की जा रही है। 40 लाख आबादी, रोजाना 750 से 800 एमएलडी पानी की मांग इंदौर की आबादी करीब 40 लाख है। शहर में घरेलू जरूरतों के लिए प्रतिदिन लगभग 620 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है। औद्योगिक, व्यावसायिक, संस्थागत और अन्य उपयोगों को शामिल करने पर कुल मांग बढ़कर 750 से 800 एमएलडी तक पहुंच जाती है। वर्ष 2008 में भी शहर में करीब 20 इंच बारिश हुई थी, जिसके कारण जल संकट की स्थिति बनी थी। अब 18 साल बाद कम बारिश ने एक बार फिर गर्मियों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। डीमार्ट के पास नर्मदा की पाइपलाइन फूटी, अंडरपास बंद कम बारिश के बीच पानी की बर्बादी से जुड़ी समस्या भी सामने आई है। गुरुवार सुबह बंगाली चौराहे से बायपास के बीच डीमार्ट के पास नर्मदा जलापूर्ति की पाइपलाइन फूट गई। पाइपलाइन से तेज दबाव के साथ पानी निकलने लगा, जिससे सड़क पर जाम लग गया। पानी भरने के कारण अंडरपास भी बंद करना पड़ा। भूजल दोहन 90 प्रतिशत के करीब विशेषज्ञों के मुताबिक, इंदौर की बड़ी आबादी नर्मदा जलापूर्ति पर निर्भर है। इसके जरिए शहर को प्रतिदिन करीब 440 एमएलडी पानी मिलता है। हालांकि, लीकेज और अन्य कारणों से लगभग 22 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। शहर में एक लाख से अधिक निजी बोरवेल हैं। इसके अलावा नगर निगम के करीब 6,500 बोरवेल और हाइड्रेंट भी हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को क्रिटिकल जोन में रखे जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, भूजल दोहन का स्तर करीब 90 प्रतिशत है। इसमें और वृद्धि होने पर जल संकट की स्थिति गंभीर हो सकती है। पिछली गर्मियों में 700 टैंकरों से पहुंचाना पड़ा था पानी पिछली गर्मियों में बोरवेल पर निर्भर आबादी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ा था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगभग 700 टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति करनी पड़ी थी। इस बार तालाबों में कम जलभराव, भूजल का लगातार दोहन और जलापूर्ति नेटवर्क में पानी की बर्बादी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौतियां बन सकती हैं। ऐसे में शहर की जल जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहतर जल प्रबंधन, लीकेज पर नियंत्रण और उपलब्ध जल स्रोतों का प्रभावी उपयोग अहम होगा।
Punjab

Punjab Protest: झोटा हत्याकांड पर सड़कों पर उतरे लोग, SHO सस्पेंड; DSP पर कार्रवाई की मांग

Punjab में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद लोगों में गुस्सा है। इसी के विरोध में गुरुवार, 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया गया। राज्य के कई शहरों में बाजार बंद रहे और कुछ जगहों पर स्कूल-कॉलेज भी नहीं खुले। बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे पर प्रदर्शनकारियों ने जाम लगाया। वहीं, झोटा का परिवार न्याय की मांग पर अड़ा है और उसने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। दूसरी ओर, संबंधित SHO को सस्पेंड किए जाने की खबर सामने आई है। परिवार और प्रदर्शनकारी अब मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और नशे के अवैध कारोबार पर सख्ती की मांग कर रहे हैं। Punjab Bandh Today: बाजार बंद, सड़कों पर उतरे लोग परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने 15 अक्टूबर को सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक पंजाब बंद का आह्वान किया था। इस बंद को विभिन्न राजनीतिक दलों, किसान संगठनों और कर्मचारी संगठनों का समर्थन मिला। मानसा, बठिंडा, लुधियाना, जालंधर और अमृतसर समेत कई शहरों में बंद का असर देखने को मिला। कई बाजारों में दुकानें नहीं खुलीं, जबकि कुछ इलाकों में निजी स्कूल और कॉलेज भी बंद रहे। बंद के दौरान आवश्यक सेवाओं को चालू रखने की अपील की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने सरकार से इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई करने और जांच में पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की। बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे पर जाम, यातायात प्रभावित पंजाब बंद के दौरान बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे पर प्रदर्शन के कारण यातायात प्रभावित हुआ। कई जगहों पर लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया। कुछ अन्य मार्गों पर भी जाम की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक परिवार को न्याय का भरोसा नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रह सकता है। बंद के कारण आम लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार करने से किया इनकार परविंदर सिंह झोटा का शव मानसा के सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है। परिवार ने मांग की है कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए। इसके साथ ही पोस्टमॉर्टम PGIMER चंडीगढ़ में कराने की मांग भी उठाई गई है। झोटा के पिता भीम सिंह का कहना है कि परिवार को न्याय चाहिए और हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिवार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के DGP गौरव यादव के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। परिवार का विरोध केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। वह यह जानना चाहता है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी थी। फिलहाल अंतिम संस्कार को लेकर परिवार का रुख सख्त बना हुआ है। Parvinder Singh Jhota Murder Case: मुख्य आरोपी गिरफ्तार परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह नशे के खिलाफ अभियान चलाते थे और कथित तौर पर मेडिकल स्टोरों पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के मुद्दे उठाते थे। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, घटना से पहले झोटा का मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार के साथ विवाद हुआ था। इसी दौरान गोली चलने से झोटा की मौत हो गई। घटना के समय वह कथित तौर पर फेसबुक लाइव भी कर रहे थे। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया। अब पुलिस हत्या के पीछे की परिस्थितियों और विवाद के कारणों की जांच कर रही है। मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका होने या साजिश से जुड़े पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। SHO सस्पेंड, DSP पर कार्रवाई की मांग हत्या के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले में मानसा की संबंधित SHO बिएंत कौर को सस्पेंड किए जाने की खबर सामने आई है। वहीं, DSP और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। परिवार और प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच हो और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। DSP के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश और अन्य विभागीय कदमों की अंतिम स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। फिलहाल इस मामले में पुलिस की जवाबदेही भी विरोध का एक प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। आरोपी की दुकान में तोड़फोड़, घर के हिस्से पर बुलडोजर कार्रवाई झोटा की हत्या के बाद मानसा में आक्रोशित लोगों ने आरोपी की मेडिकल दुकान में तोड़फोड़ की। इसके बाद दुकान को नुकसान पहुंचने और आग लगाए जाने की खबरें सामने आईं। प्रशासन ने आरोपी के घर के एक हिस्से को भी गिराया। इन घटनाओं के बीच इलाके में तनाव बढ़ गया और पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी पड़ी। प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देने की चुनौती है। CM भगवंत मान ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं को देखा जाएगा और जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, विपक्षी दलों ने राज्य में कानून-व्यवस्था और नशे के अवैध कारोबार को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। झोटा हत्याकांड ने पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा का मुद्दा भी फिर चर्चा में ला दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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