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Moji Riba

Moji Riba Arunachal Pradesh का अनकहा वीर नायक और भूला हुआ स्वतंत्रता सेनानी

मोजी रिबा (Moji Riba) अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के इतिहास के उन वीर नेताओं में से एक हैं, जिनका नाम आज भी कई लोगों के लिए अज्ञात है। उन्होंने अपने साहस, नेतृत्व और अदम्य हिम्मत से ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अपने लोगों की आज़ादी के लिए अनवरत संघर्ष किया। प्रारंभिक जीवन Moji Riba का जन्म अरुणाचल प्रदेश के लुहित जिले में हुआ था। बचपन से ही उनमें नेतृत्व और साहस के गुण दिखाई देते थे। स्थानीय समुदाय में उनका व्यक्तित्व अत्यंत सम्मानित था। उनके आसपास के लोग उन्हें साहसी, न्यायप्रिय और दूरदर्शी नेता के रूप में देखते थे। ब्रिटिश शासन के समय स्थानीय लोगों पर अत्याचार और अन्याय बढ़ते जा रहे थे। इन परिस्थितियों ने मोजी रिबा को अपने समुदाय को संगठित करने और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। ब्रिटिश राज के खिलाफ संघर्ष Moji Riba ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (British East India Company) के खिलाफ कई रणनीतिक अभियानों का नेतृत्व किया। उन्होंने अपने साहस और बुद्धिमत्ता के कारण ब्रिटिश अधिकारियों को लगातार चकमा दिया। उनकी रणनीतियाँ केवल युद्ध कौशल तक सीमित नहीं थीं। मोजी रिबा ने स्थानीय लोगों में स्वतंत्रता की भावना जगाई और उन्हें ब्रिटिश दमन के खिलाफ एकजुट किया। उन्होंने यह सिद्ध किया कि नेतृत्व और वीरता का असली अर्थ केवल युद्ध में नहीं, बल्कि लोगों की सोच और सामूहिक शक्ति को वीरता और नेतृत्व Moji Riba की सबसे बड़ी ताकत उनका नेतृत्व और साहस था। उन्होंने न केवल हथियारों के माध्यम से, बल्कि अपनी सोच और संगठन क्षमता से लोगों को स्वतंत्रता की लड़ाई में सक्रिय किया। उनके नेतृत्व में स्थानीय समुदाय ने ब्रिटिश दमन के खिलाफ साहसिक कदम उठाए। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि स्वतंत्रता संग्राम में योगदान केवल बड़े नेताओं या शहरों तक सीमित नहीं था। छोटे-छोटे गांवों और पहाड़ी इलाकों के लोग भी अपने साहस, निष्ठा और दृढ़ निश्चय से स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते थे।प्रेरित करने में है। आज Moji Riba की याद में अरुणाचल प्रदेश में स्मारक और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उनकी कहानी आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मोजी रिबा की वीरता और देशभक्ति को याद करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें यह सिखाती है कि स्वतंत्रता की लड़ाई में हर योगदान की कीमत है। मोजी रिबा की कहानी अरुणाचल प्रदेश और भारत के इतिहास में “अनकहा वीर नायक और भूला हुआ स्वतंत्रता सेनानी” के रूप में अमर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ashutosh Kuila

कम उम्र में अमर नाम Ashutosh Kuila की शहादत की कहानी

Ashutosh Kuila का परिचय भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कई ऐसे युवा वीर हुए जिन्होंने अपनी कम उम्र में ही अद्भुत साहस और बलिदान का परिचय दिया। Ashutosh Kuila उन्हीं महान शहीदों में से एक थे, जिन्होंने मात्र 18 साल की उम्र में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। झारखंड (तत्कालीन बिहार) के इस युवा योद्धा की कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्चा देशप्रेम उम्र का मोहताज नहीं होता। जन्म और प्रारंभिक जीवन स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका गिरफ्तारी और यातना 18 साल में शहादत Ashutosh Kuila की विरासत हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bishni Devi Shah

Bishni Devi Shah उत्तराखंड की First Woman Freedom Fighter और आज़ादी की वीरांगना

भारत की आज़ादी की लड़ाई में जहां महात्मा गांधी, भगत सिंह और रानी लक्ष्मीबाई जैसे बड़े नाम चर्चित रहे, वहीं कई ऐसे वीर-वीरांगनाएं भी थीं जिनका योगदान इतिहास के पन्नों में कम लिखा गया। Bishni Devi Shah इन्हीं में से एक हैं, जिन्हें Uttarakhand की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी (First Woman Freedom Fighter) के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपने साहस, त्याग और अदम्य इच्छाशक्ति से पहाड़ के कोने-कोने में आज़ादी की अलख जगाई। प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की शुरुआत Bishni Devi Shah का जन्म उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में हुआ। बचपन से ही उनमें न्याय और देशभक्ति की भावना थी। पहाड़ी गांव में पली-बढ़ी होने के बावजूद उन्होंने समाज की रूढ़ियों को चुनौती दी और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लिया। स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका महिलाओं को आंदोलन में शामिल करने की प्रेरणा उस दौर में महिलाओं की स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी बेहद कम थी, लेकिन Bishni Devi Shah ने गांव-गांव जाकर उन्हें आंदोलन में जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह साबित किया कि आज़ादी की लड़ाई में महिला और पुरुष का योगदान समान है। त्याग और बलिदान विरासत और सम्मान आज Bishni Devi Shah को Uttarakhand की First Woman Freedom Fighter के रूप में सम्मानित किया जाता है। हालांकि उनका नाम मुख्यधारा के इतिहास में कम दर्ज है, लेकिन स्थानीय इतिहासकार और समाजसेवी उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tara Rani Srivastava

Tara Rani Srivastava तिरंगे के लिए गोली भी झेली भारतीय स्वतंत्रता सेनानी की अमर गाथा

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई ऐसे वीरांगनाएँ और योद्धा हुए हैं, जिनका नाम इतिहास की किताबों में कम लिखा गया, पर उनकी बहादुरी और त्याग अमर है। ऐसी ही एक शूरवीर नारी थीं Tara Rani Srivastava, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए तिरंगे के सम्मान में गोली तक झेली। आइए जानते हैं उनके जीवन और संघर्ष की कहानी। Tara Rani Srivastava कौन थीं? Tara Rani Srivastava एक स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ देश की आज़ादी के लिए बहादुरी से लड़ाई लड़ी। वह एक साधारण परिवार से थीं, लेकिन देशभक्ति उनके रक्त में बसी थी। उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर आज़ादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई। तिरंगे के लिए उनकी बहादुरी Tara Rani Srivastava की बहादुरी का सबसे बड़ा उदाहरण तब सामने आया जब वे ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ तिरंगा झंडा फहराने निकलीं। उस समय ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने देश के तिरंगे की शान को बचाने के लिए उन्होंने गोली झेली, फिर भी झंडा नहीं छोड़ा। उनकी इस वीरता ने हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की आग जगा दी। स्वतंत्रता संग्राम में योगदान Tara Rani Srivastava की विरासत तारा रानी की कहानी आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी बहादुरी और त्याग को याद करते हुए हमें अपने देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा मिलती है। आज हम स्वतंत्रता का आनंद उनके जैसे वीरों के कारण ही ले पा रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gangu Baba

Gangu Baba की वीर गाथा: 1857 के क्रांतिकारी गंगादिन मेहतर का इतिहास

1857 की क्रांति में कानपुर के गंगादिन मेहतर उर्फ Gangu Baba ने अदम्य साहस दिखा कर लगभग 200 अंग्रेज सैनिकों को अकेले ही हराया। उनकी प्रेरक और भावनात्मक कहानी, जो आज भी हमें देशभक्ति का संदेश देती है। परिचय: निर्धन से वीर योद्धा तक गंगादिन मेहतर, जिन्हें प्यार से Gangu Baba कहा जाता था, का जन्म कानपुर के समीप वाल्मीकि (भंगी) समुदाय में हुआ था। समाज में व्याप्त ठगी और छुआछूत के कारण उनका परिवार ‘अकबरपुरा’ से ‘चुन्नीगंज’ आकर बस गया। बचपन से ही पहलवानी का शौक रहा और एक मुस्लिम गुरु से कुश्ती की कला सीखी। सामाजिक विषमताओं ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि उन्हें दृढ़ता और आत्म-सम्मान सिखाया। क्रांतिकारी बनने की शुरुआत और Nana Saheb के साथ संबंध कहा जाता है कि एक बार वे जंगल से एक मृत बाघ कंधे पर लेकर लौटा करते थे, तभी नाना साहेब पेशवा ने उनका यह अद्भुत रण-वीर्य देखा। प्रभावित होकर उन्होंने गंगू बाबा को अपनी सेना में शामिल कर लिया। वहां वे सिर्फ नगारित नहीं बल्कि सूबेदार का पद प्राप्त कर गए—कुशल और वीर सैनिक के रूप में उनका नाम फैल गया। 1857 की क्रांति में अद्वितीय वीरता क्रांतिकारी संघर्ष में, गंगू बाबा ने अदम्य साहस का परिचय दिया। उनके हाथों तकरीबन 200 ब्रिटिश सैनिकों की मौत हुई, एक-एक करके उन्होंने अंग्रेजों में भय का संचार कर दिया। उनकी बहादुरी ने इलाके में विद्रोहियों का हौसला कई गुना बढ़ा दिया। अंतिम संघर्ष और बलिदान अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए आदेश भेजा और अंततः उसे बंदी बना लिया। निर्मम तरीके से—घोड़े से लटकाकर पूरे शहर में घसीटते हुए—उनका बदनाम किया गया। 8 सितंबर 1859 को कानपुर के चुन्नीगंज क्षेत्र में एक नीम के पेड़ से फांसी पर चढ़ा दिया गया। अपनी अंतिम सांस में उन्होंने कहा:“भारत की माटी में हमारे पूर्वजों का खून व कुर्बानी की गंध है, एक दिन यह मुल्क आज़ाद होगा।”घटना ने इतिहास में शहीद-मार्गदर्शक को अमर बना दिया। इतिहास में क्यों रहा कहीं छुपा? गंगू बाबा जैसे वीर योद्धा अक्सर मुख्यधारा के इतिहास से अनदेखे रह जाते हैं। लेकिन लोक-कथाओं, स्मरणशक्ति और मौखिक परंपराओं में वे आज भी जीवित हैं। उनके वंशज कानपुर में आज भी रहते हैं, और उनकी कहानी बुजुर्गों की जुबानी पीढ़ी दर पीढ़ी चल रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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The Kerala Story’ को मिला बेस्ट डायरेक्टर अवॉर्ड, केरल सरकार ने बताया “लोकतंत्र का अपमान”

‘The Kerala Story’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट डायरेक्टर और सिनेमैटोग्राफी का अवॉर्ड मिलने पर केरल सरकार भड़की। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने फैसले को बताया “भारतीय सिनेमा की परंपरा का अपमान”। The Kerala Story को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में निर्देशक सुदीप्तो सेन को बेस्ट डायरेक्टर और उनकी फिल्म को बेस्ट सिनेमैटोग्राफी का अवॉर्ड मिलने के बाद, केरल सरकार ने कड़ी आलोचना की है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस फैसले को “भारतीय सिनेमा की महान परंपरा का अपमान” करार दिया। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक एक्स (X) अकाउंट पर एक पोस्ट में कहा: उन्होंने आगे लिखा कि केरल हमेशा शांति, सौहार्द और एकता के लिए जाना जाता है, और इस तरह की कहानी को सम्मान देना न केवल मलयाली समाज, बल्कि हर उस व्यक्ति का अपमान है जो लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों में आस्था रखता है। विजयन ने जनता से इस फैसले के खिलाफ आवाज़ उठाने की अपील की। शिक्षा मंत्री ने भी जताई नाराज़गी केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा: “’The Kerala Story’ जैसी फिल्म, जो नफरत और बेबुनियाद आरोपों पर आधारित है, उसे सम्मानित करना बाक़ी सभी विजेताओं की मेहनत और पुरस्कारों की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।” उन्होंने फिल्म से इतर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता उर्वशी, क्रिस्टो टॉमी और विजयराघवन को बधाई भी दी The Kerala Story – विवादों से भरी फिल्म 2023 में रिलीज हुई ‘The Kerala Story’ एक ऐसी फिल्म है जिसे लेकर पहले भी काफी विवाद हुआ था। फिल्म में दावा किया गया कि केरल की कई लड़कियों को ISIS में शामिल किया गया जो तथ्यों के आधार पर जांच में विवादास्पद पाया गया। फिल्म पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर दिखाने और केरल को साम्प्रदायिक रंग में प्रस्तुत करने के आरोप लगे। फिल्म को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा था और कई राज्यों में प्रदर्शन भी हुए थे। लेकिन इसके बावजूद फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉन्स मिला और इसे राजनीतिक समर्थन भी मिला। ‘The Kerala Story’ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने से शुरू हुआ विवाद, अब एक राष्ट्रीय बहस का रूप लेता जा रहा है। एक ओर इसे भारतीय सिनेमा में नई दिशा कहा जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर राज्य सरकारें इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बता रही हैं।
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Apache Helicopter Joins Indian Army

अब भारत के दुश्मनों पर कहर बनकर टूटेगा ‘ब्लैक डेथ’

Apache Helicopter Joins Indian Army: अब दुश्मनों पर कहर बनकर टूटेगा ‘ब्लैक डेथ’ देश हरपल डेस्क | 22 जुलाई 202515 महीने की देरी के बाद आखिरकार इंडियन आर्मी को उसका पहला Apache AH-64E Attack Helicopter मिल गया है। 22 जुलाई को इसकी पहली खेप में तीन एडवांस्ड अटैक हेलीकॉप्टर आर्मी एविएशन कोर (AAC) को सौंपे गए। इंडियन आर्मी ने इसकी जानकारी अपने X (Twitter) हैंडल पर दी। मार्च 2024 में ही AAC ने एक स्क्वाड्रन गठित कर दी थी, और पायलट्स की ट्रेनिंग भी पूरी हो चुकी थी। अब अपाचे की तैनाती के साथ भारतीय सेना को युद्धक्षेत्र में एक नई धार मिलने जा रही है। पहले वायुसेना, अब थलसेना में एंट्री पहली बार 1984 में अमेरिका की सेना में शामिल हुआ Apache अब दुनिया के 17 से ज़्यादा देशों की सैन्य ताकत का हिस्सा है, जिनमें भारत भी शामिल है। इंडियन एयरफोर्स में 2015 से 22 अपाचे पहले से सेवा में हैं। उनकी शानदार ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को देखते हुए 2020 में थलसेना के लिए 6 अपाचे की डील की गई थी। इस डील की कुल कीमत 600 मिलियन डॉलर (लगभग 5000 करोड़ रुपये) थी। अपाचे की ताकत: घातक हथियारों से लैस Apache AH-64E Guardian को दुनिया का सबसे खतरनाक अटैक हेलीकॉप्टर माना जाता है। इसमें अत्याधुनिक हथियारों और तकनीकों का संगम देखने को मिलता है। Hellfire Missiles 11 किलोमीटर की रेंज वाली ये मिसाइल टैंक, बंकर और हेलीकॉप्टर्स को पलभर में तबाह कर सकती है। ये laser-guided और radar-guided दोनों मोड में काम करती है। Hydra Rockets हर साइड में 19-19 रॉकेट्स वाले लॉन्चर लगे होते हैं। इनके फोल्डिंग फिन्स इन्हें अपने लक्ष्य पर सटीक वार करने में सक्षम बनाते हैं। Chain Gun नीचे की ओर लगी 30 mm की M230 Chain Gun एक मिनट में 600–650 राउंड तक फायर कर सकती है। इसकी मैगजीन में 1200 राउंड्स होते हैं। Ultra-Advanced Sensors इसके रोटर के ऊपर लगा Longbow Radar, सामने Night Vision Sensors और Laser Target Designator इसे रात में भी अचूक बनाते हैं। Radar & IR Jammer दुश्मन की मिसाइल को कंफ्यूज करने के लिए इसमें Radar Jammer और Infrared Jammer भी मौजूद हैं। टेक्निकल फीचर्स: एक नज़र में फीचर डिटेल क्रू 2 (पायलट + गनर) लंबाई 48.16 फीट ऊंचाई 15.49 फीट रोटर डायमीटर 48 फीट वजन (अधिकतम) 10,432 किलोग्राम अधिकतम स्पीड 280 किमी/घंटा क्लाइंब रेट 2,800 फीट/सेकंड ऑपरेशनल ऊंचाई 20,000 फीट शानदार इतिहास: ‘ब्लैक डेथ’ का कहर ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म (1991) में जब इराक की सेना पर अमेरिका ने धावा बोला, तो अपाचे ने अकेले ही 500 से ज्यादा टैंकों और सैकड़ों वाहनों को तबाह किया। इराकी सैनिकों ने इसे ‘Black Death’ नाम दिया था। उसके बाद पानामा (Operation Just Cause), गल्फ वॉर (2003) और अफगानिस्तान में भी अपाचे ने अपने जलवे दिखाए। भारत के लिए क्यों है खास? सबसे अहम बात ये है कि अपाचे का Fuselage भारत में बनता है, वह भी Tata Advanced Systems द्वारा। इससे इसकी मेंटेनेंस सस्ती और आसान हो जाती है। अब आर्मी को अगले तीन हेलीकॉप्टर की डिलीवरी का इंतजार है, जिससे पूरी स्क्वाड्रन ऑपरेशनल हो सकेगी।
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Vice President Resigns: स्वास्थ्य कारणों से जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा

BREAKING NEWS: स्वास्थ्य कारणों से जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा

नई दिल्ली:भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके अचानक उठाए गए इस कदम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। धनखड़ ने राष्ट्रपति कोविंद के कार्यकाल के दौरान 6 अगस्त 2022 को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था। उन्हें कुल 725 में से 528 वोट मिले थे, जबकि अल्वा को मात्र 182 वोट। झुंझुनू से उपराष्ट्रपति भवन तक का सफर 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे जगदीप धनखड़ की शिक्षा एकदम साधारण पृष्ठभूमि में हुई। इसके बाद उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और LLB की पढ़ाई पूरी की। जयपुर में वकालत की शुरुआत की और जल्द ही राजनीति में सक्रिय हो गए। राजनीतिक सफर और उपलब्धियाँ स्वास्थ्य बना वजह या कोई और संकेत? धनखड़ के इस्तीफे की आधिकारिक वजह भले ही स्वास्थ्य बताई गई हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि कहीं इसके पीछे कोई आंतरिक मतभेद या रणनीतिक बदलाव तो नहीं? आने वाले दिनों में इस पर और स्पष्टता आ सकती है। क्या कहते हैं जानकार? वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि धनखड़ का कार्यकाल अपेक्षाकृत शांत और गरिमामय रहा, लेकिन बंगाल से जुड़े उनके बयान हमेशा चर्चा में रहे। निष्कर्ष: जगदीप धनखड़ का इस्तीफा एक संवेदनशील समय पर आया है जब देश 2026 के आम चुनाव की तैयारियों में जुटा है। अब सबकी निगाहें इस पर होंगी कि उनकी जगह अगला उपराष्ट्रपति कौन बनता है, और क्या इससे सत्ता समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव आता है।
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India US Trade Deal 2025

क्या अब भारत में नॉन-वेजिटेरियन गाय का दूध भी मिलेगा …??

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में गायों को दिए जाने वाले नॉन-वेज चारे को लेकर बड़ा विवाद। भारत ने ऐसे दूध के आयात को धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। जानें क्या है पूरा मामला। By Desh Harpal |15 July 2025 भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते (Trade Deal) की राह में एक अद्भुत लेकिन संवेदनशील मुद्दा अड़चन बनकर उभरा है — और वो है: “क्या जिस गाय ने मांस या मछली वाला चारा खाया हो, उसका दूध भारत में पवित्र माना जा सकता है?” 🇮🇳 भारत की चिंता: दूध सिर्फ पोषण नहीं, एक श्रद्धा है! भारत सरकार ने साफ कहा है कि वह ऐसे किसी डेयरी उत्पाद (दूध, घी, मक्खन, पनीर आदि) का आयात नहीं करना चाहती जिसकी उत्पत्ति उन गायों से हो जिन्होंने मांस या मछली आधारित चारा खाया हो। 🔸 भारत की यह मांग सिर्फ व्यापार नहीं, संवेदनशील धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़ी है।🔸 गाय और उसका दूध हिन्दू समाज में पूजनीय माने जाते हैं। अगर ऐसी गाय को non-vegetarian feed दिया गया हो, तो उसका दूध “अशुद्ध” माना जाता है। 🇺🇸 अमेरिका की प्रैक्टिस: डेयरी गायों को दिया जाता है मांसयुक्त चारा अमेरिका में डेयरी फार्म्स आमतौर पर अपनी गायों को ज़्यादा प्रोटीन और एनर्जी के लिए मांस, रक्त, मछली या हड्डी आधारित आहार देते हैं। ➡️ अमेरिका के लिए यह सामान्य कृषि तकनीक है,➡️ लेकिन भारत के लिए यह अवांछनीय, अनैतिक और धर्मविरोधी है। क्या कहती है भारत की नीति? भारत अमेरिका से डेयरी आयात की इजाज़त तभी देगा जब: भारत का कहना है कि ये मांग World Trade Organization (WTO) के GATT आर्टिकल 20 के तहत पूरी तरह वैध है, क्योंकि यह “सार्वजनिक नैतिकता” (Public Morality) से जुड़ी है। क्या कहता है अमेरिका? अमेरिकी अधिकारी इसे “Non-Tariff Barrier” मानते हैं।उनका कहना है: “भारत की यह मांग वैज्ञानिक रूप से अनावश्यक है। दूध की पौष्टिकता इस बात से नहीं बदलती कि गाय ने क्या खाया।” अमेरिका WTO में भी इस मुद्दे को उठा चुका है और उसे व्यापार में भेदभाव के रूप में देखता है। कितना बड़ा है असर? SBI की एक रिपोर्ट के अनुसार: 🔸 अमेरिका की दूध कंपनियां भारतीय बाज़ार में सस्ती दरों पर उत्पाद ला सकती हैं,🔸 जिससे भारत का पूरा डेयरी इकोसिस्टम डगमगा सकता है। आर्थिक असर: 1 लाख करोड़ का नुकसान टाल रहा है भारत? एसबीआई की एक रिपोर्ट बताती है कि अगर अमेरिका को भारत में खुलकर दूध और डेयरी उत्पाद बेचने की छूट मिलती है, तो इससे भारतीय किसानों को ₹1.03 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है। अमेरिकी उत्पाद ज़्यादा सस्ते हो सकते हैं, जिससे भारत की देसी डेयरी इंडस्ट्री पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है। क्यों बन गई यह “रेड लाइन”? भारत के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया: “हम डेयरी को धार्मिक मान्यताओं और किसानों की आजीविका के नज़रिए से देखते हैं। यह हमारे लिए Red Line है।” RSS से जुड़े संगठन और कई धार्मिक संस्थाएँ भी सरकार पर इस बिंदु को लेकर दबाव बना रही हैं। निष्कर्ष: दूध अब सिर्फ दूध नहीं रहा भारत-अमेरिका ट्रेड डील में जहां टेक्नोलॉजी, टैरिफ, और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दे हैं, वहीं “गाय का चारा” एक ऐसा मुद्दा बन गया है जिसने समझौते की संभावनाओं को जटिल बना दिया है। यह विवाद बताता है कि व्यापार केवल पैसा और वस्तुओं का नहीं होता, वह भावनाओं, संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्य व्यवस्था से भी टकराता है। Quick Facts: बिंदु विवरण समस्या अमेरिका की गायें नॉन-वेज चारा खाती हैं भारत की मांग डेयरी उत्पाद “शुद्ध शाकाहारी” स्रोत से हों अमेरिकी प्रतिक्रिया यह अनावश्यक बाधा है संभावित नुकसान भारतीय किसानों को ₹1 लाख करोड़ का घाटा धार्मिक पहलू हिन्दू धर्म में गाय और उसका दूध पवित्र माने जाते हैं जब बात “भारत-अमेरिका व्यापार डील” की होती है, तो यह सिर्फ टैक्स और टैरिफ की बातचीत नहीं होती। इसमें आस्था, पहचान, और स्थानीय अर्थव्यवस्था की गूंज भी शामिल होती है। गाय के चारे से शुरू हुआ यह विवाद, आज दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा नैतिक और सांस्कृतिक बहस बन चुका है। भारत ने साफ कर दिया है — “दूध वही, जो शुद्ध हो — और शुद्ध वही, जो शाकाहारी हो।”
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Trapit Bansal

Meta रूमिंग पैंग को देगा 1670 करोड़ और भारत के त्रपित बंसल को 800 करोड़ का पैकेज

Meta Superintelligence Labs: Zuckerberg की नई चाल से OpenAI और Google में मची हलचल! देश हरपल डिजिटल डेस्क | टेक डेस्कसिलिकॉन वैली में इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में टैलेंट वॉर चरम पर है। Meta के CEO मार्क ज़करबर्ग अब OpenAI, Google और Anthropic जैसी दिग्गज AI कंपनियों को सीधी चुनौती देने के लिए एक नई ‘सुपर चाल’ चल चुके हैं — Meta Superintelligence Labs (MSL) की शुरुआत के साथ। Meta अब तेजी से AI की सबसे तेज़ और होशियार ब्रेनपावर को अपने पाले में कर रहा है। खास बात है कि , यह जिन प्रतिभाओं को नियुक्त कर रहा है, उन्हें मिलने वाले पैकेज की रकम सुनकर कंपनियों के HR हिल गए हैं — 20 करोड़ डॉलर (1600 करोड़ रुपये तक) के पैकेज दिए जा रहे हैं! Top AI Talent की Meta में एंट्री! इस ‘AI Talent Hunt’ में कई चर्चित नाम शामिल हो चुके हैं: Huiwen Chang: GPT-4o की को-क्रिएटर और Google की मशहूर रिसर्चर, अब की टीम में शामिल हैं। Alexander Wang: पूर्व Scale AI के CEO को ने Superintelligence Labs का Chief AI Officer बनाया है। Nate Friedman: GitHub के पूर्व CEO और VC फर्म NFDG के को-फाउंडर अब AI Products और Applied Research संभालेंगे। Daniel Gross: Safe Superintelligence के पूर्व CEO, अब AI Product Division की कमान। Ruoming Pang: Apple की Foundation Models टीम के हेड रहे Pang को ₹1600 करोड़ के पैकेज पर नियुक्त किया। Trapit Bansal: OpenAI में ‘O-Series’ के डेवलपर, जिन्हें ₹800 करोड़ के ऑफर पर शामिल किया। Shuchao Bi: YouTube Shorts के को-फाउंडर और Google Ads में AI विशेषज्ञ रहे Bi ने भी जॉइन किया। पैकेज में क्या-क्या शामिल है? Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, Meta द्वारा दी जा रही compensation में शामिल है: Base SalarySigning BonusMeta Stock (Equity) – जिसमें performance metrics और loyalty-based clauses होते हैं।Extended Contracts – कुछ नियुक्तियाँ चार साल से भी लंबे अनुबंधों पर आधारित हैं। इसमें वो लोग भी हैं जिन्होंने अपने मौजूदा स्टार्टअप्स में बड़ी equity छोड़ Meta जॉइन किया। उन्हें हुए नुकसान की भरपाई के लिए Signing Bonus को बढ़ाया गया है। Meta का लक्ष्य क्या है? Meta की Superintelligence Labs का लक्ष्य सिर्फ Language Models बनाना नहीं, बल्कि Artificial General Intelligence (AGI) और Superintelligence Systems का निर्माण करना है, जिससे वह OpenAI, Google DeepMind और Anthropic जैसी कंपनियों को सीधे टक्कर दे सके। मार्क ज़करबर्ग ने साफ़ किया है कि AGI पर नियंत्रण रखने के लिए टेक्नोलॉजी की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ दिमागों को एक साथ लाना जरूरी है – और अब उसी मिशन पर है। क्या यह टैलेंट वॉर और तेज़ होगी? AI सेक्टर में यह प्रतिस्पर्धा अब केवल इनोवेशन की नहीं रही, बल्कि ‘किसके पास बेहतर ब्रेन है’ इस रेस की भी बन गई है। पहले Apple, फिर OpenAI और अब Meta — हर कंपनी अब AI के अगले अध्याय को लिखने में जुटी है। यह रणनीति न केवल एआई इंडस्ट्री को पुनर्परिभाषित कर रही है, बल्कि एक नया AI साम्राज्य भी बना रही है, जहाँ टैलेंट, टेक्नोलॉजी और ट्रिलियन-डॉलर वैल्यू का मिलन हो रहा है। भारत से Trapit Bansal और Shuchao Bi जैसे नामों की मौजूदगी भारतीयों के लिए भी गर्व का विषय है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gold

Gold Price Today: सोने के दाम में बड़ी गिरावट, 10 ग्राम का भाव ₹1.43 लाख पर

सोना (Gold) और चांदी (Silver) खरीदने का इंतजार कर रहे लोगों के लिए राहत की खबर है। पिछले तीन दिनों में दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी-खासी गिरावट आई है। सोना करीब ₹3,000 और चांदी लगभग ₹9,000 तक सस्ती हुई है। ऐसे में शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने या निवेश की योजना बना रहे लोगों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर है। 22 अक्टूबर 2026 के बाजार अपडेट के मुताबिक, 10 ग्राम सोने की कीमत करीब ₹1.43 लाख और चांदी का भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो बताया जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर हो सकता है। Gold Rate Today: ₹1.43 लाख पर पहुंचा 10 ग्राम सोना Gold Price में आई गिरावट से खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है। बीते तीन दिनों में भाव करीब ₹3,000 नीचे आने से उन लोगों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है, जो लंबे समय से कीमतें कम होने का इंतजार कर रहे थे। हालांकि, सोना खरीदने से पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर पता कर लें। 24 कैरेट सोने की कीमत और गहने बनाने में इस्तेमाल होने वाले 22 कैरेट सोने के भाव में अंतर होता है। इसके अलावा ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और GST भी देना पड़ता है। Silver Rate Today: चांदी ₹9,000 तक हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। पिछले तीन दिनों में चांदी करीब ₹9,000 तक सस्ती हुई है और इसका भाव लगभग ₹2.01 लाख प्रति किलो के स्तर पर बताया जा रहा है। चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उन ग्राहकों पर भी पड़ता है, जो त्योहारों पर चांदी के सिक्के, बर्तन या दूसरे सामान खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में चांदी का ताजा भाव और शुद्धता की जानकारी लेना जरूरी है। सोना-चांदी के दाम क्यों गिर रहे हैं? Gold or Silver की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव, डॉलर की चाल, रुपये की स्थिति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की उम्मीदें भी इनके भाव पर असर डालती हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतें कमजोर होती हैं, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा मुनाफावसूली के कारण भी कीमतों में गिरावट आ सकती है। हालांकि, बाजार में आई गिरावट की किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा। कीमतों की चाल कई आर्थिक और वैश्विक कारकों पर निर्भर करती है। क्या अभी सोना और चांदी खरीदना सही रहेगा? अगर आप शादी या त्योहार के लिए गहने खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो मौजूदा गिरावट आपके लिए राहत की बात हो सकती है। लेकिन केवल तीन दिन की गिरावट देखकर यह मान लेना ठीक नहीं है कि आगे भी भाव लगातार कम होंगे। खरीदारी से पहले अलग-अलग ज्वेलर्स के रेट की तुलना करें। सोने पर हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें तथा बिल में मेकिंग चार्ज और GST का पूरा विवरण देखें। निवेश के लिहाज से भी जल्दबाजी करने के बजाय अपने बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर है। आगे Gold-Silver Price में क्या बदलाव हो सकता है? आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख, अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों से जुड़ी खबरें और रुपये की चाल सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में भाव में फिर तेजी आने या गिरावट जारी रहने, दोनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, तीन दिनों में सोने और चांदी के दाम में आई गिरावट ने खरीदारों को थोड़ी राहत दी है। अगर आप आज खरीदारी करने जा रहे हैं, तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जांच लें, क्योंकि बाजार भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Amit Shah

Amit Shah Statement: धरने से कुछ नहीं होगा, जनता के बीच जाएं- विपक्ष को शाह की सलाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि सिर्फ धरना-प्रदर्शन करने से जनता का भरोसा नहीं जीता जा सकता। अगर विपक्ष को राजनीति में आगे बढ़ना है, तो उसे जनता के बीच जाकर काम करना होगा। शाह ने कांग्रेस को लेकर दावा किया कि पार्टी अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं लौट पाएगी। उन्होंने अपने बयान में राहुल गांधी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी राजनीति और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए। अमित शाह का यह बयान ऐसे समय आया है, जब देश में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और कथित वोट चोरी को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच सियासी टकराव जारी है। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है, जबकि भाजपा विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक हताशा से जोड़ रही है। Amit Shah Statement: कांग्रेस पर क्यों बरसे गृह मंत्री? अमित शाह ने अपने संबोधन में कांग्रेस की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव जीतने के लिए केवल विरोध प्रदर्शन करना काफी नहीं है। राजनीतिक दलों को जनता की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए काम करना चाहिए। शाह के मुताबिक, विपक्ष को अपनी चुनावी हार की वजहों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर निशाना साधते हुए दावा किया कि पार्टी की मौजूदा राजनीति उसे लंबे समय तक सत्ता से दूर रख सकती है। हालांकि, कांग्रेस के अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आने का बयान अमित शाह का राजनीतिक दावा है। इसे किसी निश्चित चुनावी नतीजे के तौर पर नहीं देखा जा सकता। Rahul Gandhi का नाम लिए बिना क्या बोले अमित शाह? अमित शाह ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना विपक्ष के धरने और प्रदर्शनों पर टिप्पणी की। उनके बयान को कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवालों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। शाह का कहना है कि विपक्ष को जनता के बीच जाकर अपना समर्थन बढ़ाना चाहिए। केवल आरोप लगाने या सड़कों पर उतरने से चुनावी राजनीति में सफलता नहीं मिलती। दूसरी तरफ, कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है। पार्टी और INDIA गठबंधन के नेता मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। Vote Chori और SIR पर भाजपा-विपक्ष में टकराव देश की राजनीति में वोट चोरी और SIR यानी Special Intensive Revision का मुद्दा लगातार चर्चा में है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इन मामलों में स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। वहीं, भाजपा इन आरोपों को खारिज करती रही है और विपक्ष पर चुनावी हार के बाद संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाती है। इस विवाद में दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोपों की सच्चाई समझने के लिए आधिकारिक आंकड़ों, चुनाव आयोग के जवाब और उपलब्ध प्रमाणों को देखना जरूरी है। चुनाव आयोग को लेकर भी जारी है सियासी लड़ाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों का विरोध पहले भी सामने आ चुका है। विपक्ष ने मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर जवाब मांगा है। वहीं, भाजपा का कहना है कि चुनावी नतीजों को लेकर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय विपक्ष को अपनी रणनीति पर ध्यान देना चाहिए। इस मुद्दे ने भाजपा और INDIA गठबंधन के बीच राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह विवाद चुनावी भाषणों और विपक्षी अभियानों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। Amit Shah ने AAP पर भी साधा निशाना अमित शाह ने अपने संबोधन में आम आदमी पार्टी (AAP) की राजनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विपक्षी दलों को सलाह दी कि वे आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनता के लिए काम करें। दिल्ली की राजनीति में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच लंबे समय से टकराव रहा है। ऐसे में शाह का बयान विपक्ष पर राजनीतिक दबाव बनाने के साथ-साथ भाजपा के चुनावी संदेश को मजबूत करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। आगे क्या होगा? कांग्रेस के सामने क्या चुनौती है? अमित शाह के बयान से साफ है कि भाजपा कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर आक्रामक रुख अपनाए हुए है। दूसरी ओर, कांग्रेस चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर जवाब मांगने की अपनी रणनीति पर कायम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विपक्ष अपने आरोपों के समर्थन में क्या तथ्य सामने रखता है और चुनाव आयोग इन सवालों पर क्या जवाब देता है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि इन मुद्दों का आने वाले चुनावों में मतदाताओं पर कितना असर पड़ता है। फिलहाल, अमित शाह का 30 साल वाला बयान राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। लेकिन आखिरकार चुनाव में किसे जनता का समर्थन मिलेगा, इसका फैसला मतदाता ही करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ranbir Kapoor

Ranbir Kapoor Controversy: सच्चाई और अच्छाई पर गलत बोल गए रणबीर, अब मांगी माफी

बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। दशहरे के मौके पर कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सच्चाई और अच्छाई को लेकर कुछ ऐसा कह दिया, जिस पर सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे। वीडियो वायरल हुआ तो लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। अब रणबीर कपूर ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है। उन्होंने सफाई दी कि बोलते समय उनकी जुबान फिसल गई थी और वह कुछ और कहना चाहते थे। दशहरे पर क्या बोल गए रणबीर कपूर? दरअसल, दशहरे के मौके पर Ranbir Kapoor कोलकाता में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस दौरान वह बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश के बारे में बात कर रहे थे। लेकिन अपनी बात रखते समय वह ‘सच्चाई और अच्छाई की जीत’ की जगह उनके अंत होने जैसी बात कह गए। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद कई यूजर्स ने उनके शब्दों पर सवाल उठाए, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रिया दी। मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि रणबीर कपूर अपनी आगामी फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं। ट्रोलिंग के बाद Ranbir Kapoor ने मांगी माफी बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद रणबीर कपूर ने चेन्नई में आयोजित ‘रामायण’ के म्यूजिकल इवेंट में इस पर सफाई दी। उन्होंने माना कि उस समय बोलते हुए उनकी जुबान फिसल गई थी। Ranbir ने बताया कि वह कहना चाहते थे कि बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो, आखिरकार जीत सच्चाई और अच्छाई की ही होती है। लेकिन शब्दों के गलत इस्तेमाल के कारण उनकी बात का अर्थ बदल गया। उन्होंने अपनी गलती के लिए माफी भी मांगी। अभिनेता ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी समझाया कि कभी-कभी वह कहना कुछ चाहते हैं, लेकिन उनके मुंह से कुछ और निकल जाता है। उनकी इस सफाई के बाद यह साफ हुआ कि उनका इरादा दशहरे के संदेश के उलट बात कहने का नहीं था। Social Media पर क्यों होने लगे Ranbir Kapoor ट्रोल? Ranbir Kapoor का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने इसे जुबान फिसलने की सामान्य गलती बताया, जबकि कुछ यूजर्स ने सार्वजनिक मंच पर बोलते समय ज्यादा सावधानी बरतने की बात कही। फिल्म ‘रामायण’ में भगवान राम का किरदार निभाने की वजह से भी यह बयान लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। हालांकि, रणबीर ने ज्यादा देर तक इस मामले पर चुप रहने के बजाय अपनी बात स्पष्ट की और गलती स्वीकार कर ली। Ranbir Kapoor की अपकमिंग फिल्म Ramayana भी चर्चा में रणबीर कपूर इन दिनों निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर भी सुर्खियों में हैं। फिल्म में साई पल्लवी माता सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म के पहले भाग की रिलीज 5 नवंबर 2026 को तय बताई गई है। ऐसे में फिल्म के प्रमोशन के दौरान रणबीर कपूर के बयान ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। Ranbir Kapoor Controversy: क्या है पूरा मामला? इस पूरे विवाद की शुरुआत दशहरे के कार्यक्रम में बोले गए गलत शब्दों से हुई। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद रणबीर कपूर को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनकी जुबान फिसल गई थी और वह अच्छाई व सच्चाई की जीत की बात कर रहे थे। फिलहाल, रणबीर कपूर की माफी के बाद इस मामले में उनकी सफाई सामने आ चुकी है। अब दर्शकों की नजर उनकी फिल्म ‘रामायण’ पर है, जिसे लेकर पहले से ही काफी उत्सुकता बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

छत्तीसगढ़ में परीक्षा में नकल और गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई के लिए 3 स्पेशल कोर्ट गठित

छत्तीसगढ़ में प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल व गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए तीन स्पेशल कोर्ट बनाई गई हैं। राज्य शासन ने रायपुर, बिलासपुर और कोरिया के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को विशेष अदालत के रूप में नामित किया है। कोरिया जिले की स्पेशल कोर्ट बैकुंठपुर में होगी। इस संबंध में कानून एवं विधायी कार्य विभाग ने अधिसूचना जारी की है। इन अदालतों में सार्वजनिक परीक्षाओं के दौरान नकल और अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाएगी। 2024 के कानून के तहत गठित हुईं विशेष अदालतें राज्य में यह व्यवस्था पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत की गई है। अधिसूचना में कानून की धारा 12-क की उपधारा (2) का उल्लेख किया गया है। इसी प्रावधान के तहत राज्य शासन ने तीन जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट को स्पेशल कोर्ट के रूप में नामित किया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध कराना है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से परामर्श के बाद जारी हुई अधिसूचना छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र से परामर्श के बाद राज्य शासन ने यह अधिसूचना जारी की है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव ने संबंधित जिलों के डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जजों को अधिसूचना की प्रतियां भेजकर आवश्यक निर्देश दिए हैं। तीनों विशेष अदालतें अपने-अपने न्यायिक क्षेत्राधिकार में आने वाले परीक्षा संबंधी गड़बड़ी के मामलों की सुनवाई करेंगी। इस व्यवस्था के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल या अनुचित तरीकों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सुना जाएगा।
Akhilesh Yadav

Akhilesh Yadav Rampur Visit: रामपुर जेल पहुंचे अखिलेश, आजम खान से करेंगे मुलाकात

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) गुरुवार, 22 अक्टूबर को रामपुर जिला जेल पहुंचे। यहां उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से मुलाकात होनी है। इस दौरे पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हैं। इसकी वजह सिर्फ दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बदलते राजनीतिक समीकरण भी हैं। Akhilesh Yadav के रामपुर पहुंचने के बाद अब सबकी नजर इस बात पर है कि आजम खान से बातचीत के बाद वह क्या कहते हैं और इस मुलाकात से पार्टी के भीतर क्या संदेश जाता है। Akhilesh Yadav कैसे रामपुर पहुंचे ? निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) लखनऊ से निजी विमान के जरिए बरेली पहुंचे। इसके बाद हेलीकॉप्टर से रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय पहुंचे और वहां से जिला जेल के लिए रवाना हुए। कार्यक्रम में आजम खान से मुलाकात के साथ उनके परिवार से मिलने की योजना भी शामिल है। आजम खान की तबीयत और उनके हालात जानने को इस दौरे की अहम वजह बताया गया है। Azam Khan से मुलाकात क्यों है खास? आजम खान समाजवादी पार्टी के पुराने और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। रामपुर और आसपास के इलाकों में उनकी राजनीतिक पहचान लंबे समय से रही है। ऐसे में अखिलेश यादव का उनसे मिलने पहुंचना पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ समय से आजम खान और सपा नेतृत्व के संबंधों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। उनकी पत्नी तजीन फातिमा की अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद रामपुर आने का कार्यक्रम भी चर्चा में रहा। अब दोनों नेताओं की मुलाकात से यह देखने की उत्सुकता है कि उनके बीच किन मुद्दों पर बात होती है और आगे पार्टी की ओर से क्या संदेश दिया जाता है। UP Politics: 2027 चुनाव से पहले बढ़ी हलचल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सभी प्रमुख दल अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे समय में आजम खान से अखिलेश यादव की मुलाकात को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुलाकात में चुनावी रणनीति या संगठन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी या नहीं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे किसी बड़े राजनीतिक फैसले से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी। Asaduddin Owaisi के दौरे के बाद चर्चा तेज रामपुर में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के दौरे और समाजवादी पार्टी पर उनकी राजनीतिक टिप्पणियों के बाद भी इस मुलाकात को लेकर चर्चा हो रही है। ओवैसी मुस्लिम राजनीति और सपा के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात पर राजनीतिक दलों की नजर होना स्वाभाविक है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच बातचीत का वास्तविक एजेंडा सामने आने के बाद ही इसके राजनीतिक मायने स्पष्ट होंगे। Om Prakash Rajbhar के बयान से भी गरमाई सियासत उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी अखिलेश यादव के रामपुर दौरे को लेकर टिप्पणी की है। इस बयानबाजी के बीच सपा प्रमुख का आजम खान से मिलना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल, इस दौरे को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लेकिन अखिलेश यादव और आजम खान की बातचीत के बाद ही यह साफ होगा कि मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद क्या होगा अगला कदम? अखिलेश यादव के रामपुर पहुंचने के बाद अब आजम खान से मुलाकात और उनके परिवार से बातचीत पर सबकी नजर है। समर्थकों को उम्मीद है कि इस मुलाकात से दोनों नेताओं के बीच संवाद को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल, किसी नई चुनावी रणनीति या बड़े फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुलाकात के बाद अखिलेश यादव का बयान और समाजवादी पार्टी की आगे की गतिविधियां इस दौरे की अहमियत को समझने में मदद करेंगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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