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Moji Riba

Moji Riba Arunachal Pradesh का अनकहा वीर नायक और भूला हुआ स्वतंत्रता सेनानी

मोजी रिबा (Moji Riba) अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के इतिहास के उन वीर नेताओं में से एक हैं, जिनका नाम आज भी कई लोगों के लिए अज्ञात है। उन्होंने अपने साहस, नेतृत्व और अदम्य हिम्मत से ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ाई लड़ी और अपने लोगों की आज़ादी के लिए अनवरत संघर्ष किया। प्रारंभिक जीवन Moji Riba का जन्म अरुणाचल प्रदेश के लुहित जिले में हुआ था। बचपन से ही उनमें नेतृत्व और साहस के गुण दिखाई देते थे। स्थानीय समुदाय में उनका व्यक्तित्व अत्यंत सम्मानित था। उनके आसपास के लोग उन्हें साहसी, न्यायप्रिय और दूरदर्शी नेता के रूप में देखते थे। ब्रिटिश शासन के समय स्थानीय लोगों पर अत्याचार और अन्याय बढ़ते जा रहे थे। इन परिस्थितियों ने मोजी रिबा को अपने समुदाय को संगठित करने और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया। ब्रिटिश राज के खिलाफ संघर्ष Moji Riba ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (British East India Company) के खिलाफ कई रणनीतिक अभियानों का नेतृत्व किया। उन्होंने अपने साहस और बुद्धिमत्ता के कारण ब्रिटिश अधिकारियों को लगातार चकमा दिया। उनकी रणनीतियाँ केवल युद्ध कौशल तक सीमित नहीं थीं। मोजी रिबा ने स्थानीय लोगों में स्वतंत्रता की भावना जगाई और उन्हें ब्रिटिश दमन के खिलाफ एकजुट किया। उन्होंने यह सिद्ध किया कि नेतृत्व और वीरता का असली अर्थ केवल युद्ध में नहीं, बल्कि लोगों की सोच और सामूहिक शक्ति को वीरता और नेतृत्व Moji Riba की सबसे बड़ी ताकत उनका नेतृत्व और साहस था। उन्होंने न केवल हथियारों के माध्यम से, बल्कि अपनी सोच और संगठन क्षमता से लोगों को स्वतंत्रता की लड़ाई में सक्रिय किया। उनके नेतृत्व में स्थानीय समुदाय ने ब्रिटिश दमन के खिलाफ साहसिक कदम उठाए। उनकी कहानी यह भी दिखाती है कि स्वतंत्रता संग्राम में योगदान केवल बड़े नेताओं या शहरों तक सीमित नहीं था। छोटे-छोटे गांवों और पहाड़ी इलाकों के लोग भी अपने साहस, निष्ठा और दृढ़ निश्चय से स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते थे।प्रेरित करने में है। आज Moji Riba की याद में अरुणाचल प्रदेश में स्मारक और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उनकी कहानी आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मोजी रिबा की वीरता और देशभक्ति को याद करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें यह सिखाती है कि स्वतंत्रता की लड़ाई में हर योगदान की कीमत है। मोजी रिबा की कहानी अरुणाचल प्रदेश और भारत के इतिहास में “अनकहा वीर नायक और भूला हुआ स्वतंत्रता सेनानी” के रूप में अमर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ashutosh Kuila

कम उम्र में अमर नाम Ashutosh Kuila की शहादत की कहानी

Ashutosh Kuila का परिचय भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में कई ऐसे युवा वीर हुए जिन्होंने अपनी कम उम्र में ही अद्भुत साहस और बलिदान का परिचय दिया। Ashutosh Kuila उन्हीं महान शहीदों में से एक थे, जिन्होंने मात्र 18 साल की उम्र में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। झारखंड (तत्कालीन बिहार) के इस युवा योद्धा की कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्चा देशप्रेम उम्र का मोहताज नहीं होता। जन्म और प्रारंभिक जीवन स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका गिरफ्तारी और यातना 18 साल में शहादत Ashutosh Kuila की विरासत हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bishni Devi Shah

Bishni Devi Shah उत्तराखंड की First Woman Freedom Fighter और आज़ादी की वीरांगना

भारत की आज़ादी की लड़ाई में जहां महात्मा गांधी, भगत सिंह और रानी लक्ष्मीबाई जैसे बड़े नाम चर्चित रहे, वहीं कई ऐसे वीर-वीरांगनाएं भी थीं जिनका योगदान इतिहास के पन्नों में कम लिखा गया। Bishni Devi Shah इन्हीं में से एक हैं, जिन्हें Uttarakhand की पहली महिला स्वतंत्रता सेनानी (First Woman Freedom Fighter) के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपने साहस, त्याग और अदम्य इच्छाशक्ति से पहाड़ के कोने-कोने में आज़ादी की अलख जगाई। प्रारंभिक जीवन और संघर्ष की शुरुआत Bishni Devi Shah का जन्म उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में हुआ। बचपन से ही उनमें न्याय और देशभक्ति की भावना थी। पहाड़ी गांव में पली-बढ़ी होने के बावजूद उन्होंने समाज की रूढ़ियों को चुनौती दी और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का संकल्प लिया। स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका महिलाओं को आंदोलन में शामिल करने की प्रेरणा उस दौर में महिलाओं की स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी बेहद कम थी, लेकिन Bishni Devi Shah ने गांव-गांव जाकर उन्हें आंदोलन में जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह साबित किया कि आज़ादी की लड़ाई में महिला और पुरुष का योगदान समान है। त्याग और बलिदान विरासत और सम्मान आज Bishni Devi Shah को Uttarakhand की First Woman Freedom Fighter के रूप में सम्मानित किया जाता है। हालांकि उनका नाम मुख्यधारा के इतिहास में कम दर्ज है, लेकिन स्थानीय इतिहासकार और समाजसेवी उनके योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के प्रयास कर रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Tara Rani Srivastava

Tara Rani Srivastava तिरंगे के लिए गोली भी झेली भारतीय स्वतंत्रता सेनानी की अमर गाथा

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में कई ऐसे वीरांगनाएँ और योद्धा हुए हैं, जिनका नाम इतिहास की किताबों में कम लिखा गया, पर उनकी बहादुरी और त्याग अमर है। ऐसी ही एक शूरवीर नारी थीं Tara Rani Srivastava, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए तिरंगे के सम्मान में गोली तक झेली। आइए जानते हैं उनके जीवन और संघर्ष की कहानी। Tara Rani Srivastava कौन थीं? Tara Rani Srivastava एक स्वतंत्रता सेनानी थीं, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ देश की आज़ादी के लिए बहादुरी से लड़ाई लड़ी। वह एक साधारण परिवार से थीं, लेकिन देशभक्ति उनके रक्त में बसी थी। उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर आज़ादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई। तिरंगे के लिए उनकी बहादुरी Tara Rani Srivastava की बहादुरी का सबसे बड़ा उदाहरण तब सामने आया जब वे ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ तिरंगा झंडा फहराने निकलीं। उस समय ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपने देश के तिरंगे की शान को बचाने के लिए उन्होंने गोली झेली, फिर भी झंडा नहीं छोड़ा। उनकी इस वीरता ने हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की आग जगा दी। स्वतंत्रता संग्राम में योगदान Tara Rani Srivastava की विरासत तारा रानी की कहानी आज भी हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी बहादुरी और त्याग को याद करते हुए हमें अपने देश के लिए कुछ करने की प्रेरणा मिलती है। आज हम स्वतंत्रता का आनंद उनके जैसे वीरों के कारण ही ले पा रहे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Gangu Baba

Gangu Baba की वीर गाथा: 1857 के क्रांतिकारी गंगादिन मेहतर का इतिहास

1857 की क्रांति में कानपुर के गंगादिन मेहतर उर्फ Gangu Baba ने अदम्य साहस दिखा कर लगभग 200 अंग्रेज सैनिकों को अकेले ही हराया। उनकी प्रेरक और भावनात्मक कहानी, जो आज भी हमें देशभक्ति का संदेश देती है। परिचय: निर्धन से वीर योद्धा तक गंगादिन मेहतर, जिन्हें प्यार से Gangu Baba कहा जाता था, का जन्म कानपुर के समीप वाल्मीकि (भंगी) समुदाय में हुआ था। समाज में व्याप्त ठगी और छुआछूत के कारण उनका परिवार ‘अकबरपुरा’ से ‘चुन्नीगंज’ आकर बस गया। बचपन से ही पहलवानी का शौक रहा और एक मुस्लिम गुरु से कुश्ती की कला सीखी। सामाजिक विषमताओं ने उन्हें कमजोर नहीं किया, बल्कि उन्हें दृढ़ता और आत्म-सम्मान सिखाया। क्रांतिकारी बनने की शुरुआत और Nana Saheb के साथ संबंध कहा जाता है कि एक बार वे जंगल से एक मृत बाघ कंधे पर लेकर लौटा करते थे, तभी नाना साहेब पेशवा ने उनका यह अद्भुत रण-वीर्य देखा। प्रभावित होकर उन्होंने गंगू बाबा को अपनी सेना में शामिल कर लिया। वहां वे सिर्फ नगारित नहीं बल्कि सूबेदार का पद प्राप्त कर गए—कुशल और वीर सैनिक के रूप में उनका नाम फैल गया। 1857 की क्रांति में अद्वितीय वीरता क्रांतिकारी संघर्ष में, गंगू बाबा ने अदम्य साहस का परिचय दिया। उनके हाथों तकरीबन 200 ब्रिटिश सैनिकों की मौत हुई, एक-एक करके उन्होंने अंग्रेजों में भय का संचार कर दिया। उनकी बहादुरी ने इलाके में विद्रोहियों का हौसला कई गुना बढ़ा दिया। अंतिम संघर्ष और बलिदान अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए आदेश भेजा और अंततः उसे बंदी बना लिया। निर्मम तरीके से—घोड़े से लटकाकर पूरे शहर में घसीटते हुए—उनका बदनाम किया गया। 8 सितंबर 1859 को कानपुर के चुन्नीगंज क्षेत्र में एक नीम के पेड़ से फांसी पर चढ़ा दिया गया। अपनी अंतिम सांस में उन्होंने कहा:“भारत की माटी में हमारे पूर्वजों का खून व कुर्बानी की गंध है, एक दिन यह मुल्क आज़ाद होगा।”घटना ने इतिहास में शहीद-मार्गदर्शक को अमर बना दिया। इतिहास में क्यों रहा कहीं छुपा? गंगू बाबा जैसे वीर योद्धा अक्सर मुख्यधारा के इतिहास से अनदेखे रह जाते हैं। लेकिन लोक-कथाओं, स्मरणशक्ति और मौखिक परंपराओं में वे आज भी जीवित हैं। उनके वंशज कानपुर में आज भी रहते हैं, और उनकी कहानी बुजुर्गों की जुबानी पीढ़ी दर पीढ़ी चल रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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The Kerala Story’ को मिला बेस्ट डायरेक्टर अवॉर्ड, केरल सरकार ने बताया “लोकतंत्र का अपमान”

‘The Kerala Story’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में बेस्ट डायरेक्टर और सिनेमैटोग्राफी का अवॉर्ड मिलने पर केरल सरकार भड़की। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने फैसले को बताया “भारतीय सिनेमा की परंपरा का अपमान”। The Kerala Story को लेकर विवाद एक बार फिर गरमा गया है। 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में निर्देशक सुदीप्तो सेन को बेस्ट डायरेक्टर और उनकी फिल्म को बेस्ट सिनेमैटोग्राफी का अवॉर्ड मिलने के बाद, केरल सरकार ने कड़ी आलोचना की है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस फैसले को “भारतीय सिनेमा की महान परंपरा का अपमान” करार दिया। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक एक्स (X) अकाउंट पर एक पोस्ट में कहा: उन्होंने आगे लिखा कि केरल हमेशा शांति, सौहार्द और एकता के लिए जाना जाता है, और इस तरह की कहानी को सम्मान देना न केवल मलयाली समाज, बल्कि हर उस व्यक्ति का अपमान है जो लोकतंत्र और संविधान के मूल्यों में आस्था रखता है। विजयन ने जनता से इस फैसले के खिलाफ आवाज़ उठाने की अपील की। शिक्षा मंत्री ने भी जताई नाराज़गी केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा: “’The Kerala Story’ जैसी फिल्म, जो नफरत और बेबुनियाद आरोपों पर आधारित है, उसे सम्मानित करना बाक़ी सभी विजेताओं की मेहनत और पुरस्कारों की गरिमा को ठेस पहुंचाता है।” उन्होंने फिल्म से इतर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता उर्वशी, क्रिस्टो टॉमी और विजयराघवन को बधाई भी दी The Kerala Story – विवादों से भरी फिल्म 2023 में रिलीज हुई ‘The Kerala Story’ एक ऐसी फिल्म है जिसे लेकर पहले भी काफी विवाद हुआ था। फिल्म में दावा किया गया कि केरल की कई लड़कियों को ISIS में शामिल किया गया जो तथ्यों के आधार पर जांच में विवादास्पद पाया गया। फिल्म पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर दिखाने और केरल को साम्प्रदायिक रंग में प्रस्तुत करने के आरोप लगे। फिल्म को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा था और कई राज्यों में प्रदर्शन भी हुए थे। लेकिन इसके बावजूद फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉन्स मिला और इसे राजनीतिक समर्थन भी मिला। ‘The Kerala Story’ को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने से शुरू हुआ विवाद, अब एक राष्ट्रीय बहस का रूप लेता जा रहा है। एक ओर इसे भारतीय सिनेमा में नई दिशा कहा जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर राज्य सरकारें इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बता रही हैं।
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Apache Helicopter Joins Indian Army

अब भारत के दुश्मनों पर कहर बनकर टूटेगा ‘ब्लैक डेथ’

Apache Helicopter Joins Indian Army: अब दुश्मनों पर कहर बनकर टूटेगा ‘ब्लैक डेथ’ देश हरपल डेस्क | 22 जुलाई 202515 महीने की देरी के बाद आखिरकार इंडियन आर्मी को उसका पहला Apache AH-64E Attack Helicopter मिल गया है। 22 जुलाई को इसकी पहली खेप में तीन एडवांस्ड अटैक हेलीकॉप्टर आर्मी एविएशन कोर (AAC) को सौंपे गए। इंडियन आर्मी ने इसकी जानकारी अपने X (Twitter) हैंडल पर दी। मार्च 2024 में ही AAC ने एक स्क्वाड्रन गठित कर दी थी, और पायलट्स की ट्रेनिंग भी पूरी हो चुकी थी। अब अपाचे की तैनाती के साथ भारतीय सेना को युद्धक्षेत्र में एक नई धार मिलने जा रही है। पहले वायुसेना, अब थलसेना में एंट्री पहली बार 1984 में अमेरिका की सेना में शामिल हुआ Apache अब दुनिया के 17 से ज़्यादा देशों की सैन्य ताकत का हिस्सा है, जिनमें भारत भी शामिल है। इंडियन एयरफोर्स में 2015 से 22 अपाचे पहले से सेवा में हैं। उनकी शानदार ऑपरेशनल परफॉर्मेंस को देखते हुए 2020 में थलसेना के लिए 6 अपाचे की डील की गई थी। इस डील की कुल कीमत 600 मिलियन डॉलर (लगभग 5000 करोड़ रुपये) थी। अपाचे की ताकत: घातक हथियारों से लैस Apache AH-64E Guardian को दुनिया का सबसे खतरनाक अटैक हेलीकॉप्टर माना जाता है। इसमें अत्याधुनिक हथियारों और तकनीकों का संगम देखने को मिलता है। Hellfire Missiles 11 किलोमीटर की रेंज वाली ये मिसाइल टैंक, बंकर और हेलीकॉप्टर्स को पलभर में तबाह कर सकती है। ये laser-guided और radar-guided दोनों मोड में काम करती है। Hydra Rockets हर साइड में 19-19 रॉकेट्स वाले लॉन्चर लगे होते हैं। इनके फोल्डिंग फिन्स इन्हें अपने लक्ष्य पर सटीक वार करने में सक्षम बनाते हैं। Chain Gun नीचे की ओर लगी 30 mm की M230 Chain Gun एक मिनट में 600–650 राउंड तक फायर कर सकती है। इसकी मैगजीन में 1200 राउंड्स होते हैं। Ultra-Advanced Sensors इसके रोटर के ऊपर लगा Longbow Radar, सामने Night Vision Sensors और Laser Target Designator इसे रात में भी अचूक बनाते हैं। Radar & IR Jammer दुश्मन की मिसाइल को कंफ्यूज करने के लिए इसमें Radar Jammer और Infrared Jammer भी मौजूद हैं। टेक्निकल फीचर्स: एक नज़र में फीचर डिटेल क्रू 2 (पायलट + गनर) लंबाई 48.16 फीट ऊंचाई 15.49 फीट रोटर डायमीटर 48 फीट वजन (अधिकतम) 10,432 किलोग्राम अधिकतम स्पीड 280 किमी/घंटा क्लाइंब रेट 2,800 फीट/सेकंड ऑपरेशनल ऊंचाई 20,000 फीट शानदार इतिहास: ‘ब्लैक डेथ’ का कहर ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म (1991) में जब इराक की सेना पर अमेरिका ने धावा बोला, तो अपाचे ने अकेले ही 500 से ज्यादा टैंकों और सैकड़ों वाहनों को तबाह किया। इराकी सैनिकों ने इसे ‘Black Death’ नाम दिया था। उसके बाद पानामा (Operation Just Cause), गल्फ वॉर (2003) और अफगानिस्तान में भी अपाचे ने अपने जलवे दिखाए। भारत के लिए क्यों है खास? सबसे अहम बात ये है कि अपाचे का Fuselage भारत में बनता है, वह भी Tata Advanced Systems द्वारा। इससे इसकी मेंटेनेंस सस्ती और आसान हो जाती है। अब आर्मी को अगले तीन हेलीकॉप्टर की डिलीवरी का इंतजार है, जिससे पूरी स्क्वाड्रन ऑपरेशनल हो सकेगी।
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Vice President Resigns: स्वास्थ्य कारणों से जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा

BREAKING NEWS: स्वास्थ्य कारणों से जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया इस्तीफा

नई दिल्ली:भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके अचानक उठाए गए इस कदम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। धनखड़ ने राष्ट्रपति कोविंद के कार्यकाल के दौरान 6 अगस्त 2022 को हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया था। उन्हें कुल 725 में से 528 वोट मिले थे, जबकि अल्वा को मात्र 182 वोट। झुंझुनू से उपराष्ट्रपति भवन तक का सफर 18 मई 1951 को राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक साधारण किसान परिवार में जन्मे जगदीप धनखड़ की शिक्षा एकदम साधारण पृष्ठभूमि में हुई। इसके बाद उन्होंने राजस्थान यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और LLB की पढ़ाई पूरी की। जयपुर में वकालत की शुरुआत की और जल्द ही राजनीति में सक्रिय हो गए। राजनीतिक सफर और उपलब्धियाँ स्वास्थ्य बना वजह या कोई और संकेत? धनखड़ के इस्तीफे की आधिकारिक वजह भले ही स्वास्थ्य बताई गई हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि कहीं इसके पीछे कोई आंतरिक मतभेद या रणनीतिक बदलाव तो नहीं? आने वाले दिनों में इस पर और स्पष्टता आ सकती है। क्या कहते हैं जानकार? वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि धनखड़ का कार्यकाल अपेक्षाकृत शांत और गरिमामय रहा, लेकिन बंगाल से जुड़े उनके बयान हमेशा चर्चा में रहे। निष्कर्ष: जगदीप धनखड़ का इस्तीफा एक संवेदनशील समय पर आया है जब देश 2026 के आम चुनाव की तैयारियों में जुटा है। अब सबकी निगाहें इस पर होंगी कि उनकी जगह अगला उपराष्ट्रपति कौन बनता है, और क्या इससे सत्ता समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव आता है।
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India US Trade Deal 2025

क्या अब भारत में नॉन-वेजिटेरियन गाय का दूध भी मिलेगा …??

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में गायों को दिए जाने वाले नॉन-वेज चारे को लेकर बड़ा विवाद। भारत ने ऐसे दूध के आयात को धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। जानें क्या है पूरा मामला। By Desh Harpal |15 July 2025 भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते (Trade Deal) की राह में एक अद्भुत लेकिन संवेदनशील मुद्दा अड़चन बनकर उभरा है — और वो है: “क्या जिस गाय ने मांस या मछली वाला चारा खाया हो, उसका दूध भारत में पवित्र माना जा सकता है?” 🇮🇳 भारत की चिंता: दूध सिर्फ पोषण नहीं, एक श्रद्धा है! भारत सरकार ने साफ कहा है कि वह ऐसे किसी डेयरी उत्पाद (दूध, घी, मक्खन, पनीर आदि) का आयात नहीं करना चाहती जिसकी उत्पत्ति उन गायों से हो जिन्होंने मांस या मछली आधारित चारा खाया हो। 🔸 भारत की यह मांग सिर्फ व्यापार नहीं, संवेदनशील धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़ी है।🔸 गाय और उसका दूध हिन्दू समाज में पूजनीय माने जाते हैं। अगर ऐसी गाय को non-vegetarian feed दिया गया हो, तो उसका दूध “अशुद्ध” माना जाता है। 🇺🇸 अमेरिका की प्रैक्टिस: डेयरी गायों को दिया जाता है मांसयुक्त चारा अमेरिका में डेयरी फार्म्स आमतौर पर अपनी गायों को ज़्यादा प्रोटीन और एनर्जी के लिए मांस, रक्त, मछली या हड्डी आधारित आहार देते हैं। ➡️ अमेरिका के लिए यह सामान्य कृषि तकनीक है,➡️ लेकिन भारत के लिए यह अवांछनीय, अनैतिक और धर्मविरोधी है। क्या कहती है भारत की नीति? भारत अमेरिका से डेयरी आयात की इजाज़त तभी देगा जब: भारत का कहना है कि ये मांग World Trade Organization (WTO) के GATT आर्टिकल 20 के तहत पूरी तरह वैध है, क्योंकि यह “सार्वजनिक नैतिकता” (Public Morality) से जुड़ी है। क्या कहता है अमेरिका? अमेरिकी अधिकारी इसे “Non-Tariff Barrier” मानते हैं।उनका कहना है: “भारत की यह मांग वैज्ञानिक रूप से अनावश्यक है। दूध की पौष्टिकता इस बात से नहीं बदलती कि गाय ने क्या खाया।” अमेरिका WTO में भी इस मुद्दे को उठा चुका है और उसे व्यापार में भेदभाव के रूप में देखता है। कितना बड़ा है असर? SBI की एक रिपोर्ट के अनुसार: 🔸 अमेरिका की दूध कंपनियां भारतीय बाज़ार में सस्ती दरों पर उत्पाद ला सकती हैं,🔸 जिससे भारत का पूरा डेयरी इकोसिस्टम डगमगा सकता है। आर्थिक असर: 1 लाख करोड़ का नुकसान टाल रहा है भारत? एसबीआई की एक रिपोर्ट बताती है कि अगर अमेरिका को भारत में खुलकर दूध और डेयरी उत्पाद बेचने की छूट मिलती है, तो इससे भारतीय किसानों को ₹1.03 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है। अमेरिकी उत्पाद ज़्यादा सस्ते हो सकते हैं, जिससे भारत की देसी डेयरी इंडस्ट्री पर बड़ा खतरा मंडरा सकता है। क्यों बन गई यह “रेड लाइन”? भारत के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया: “हम डेयरी को धार्मिक मान्यताओं और किसानों की आजीविका के नज़रिए से देखते हैं। यह हमारे लिए Red Line है।” RSS से जुड़े संगठन और कई धार्मिक संस्थाएँ भी सरकार पर इस बिंदु को लेकर दबाव बना रही हैं। निष्कर्ष: दूध अब सिर्फ दूध नहीं रहा भारत-अमेरिका ट्रेड डील में जहां टेक्नोलॉजी, टैरिफ, और डेटा सुरक्षा जैसे मुद्दे हैं, वहीं “गाय का चारा” एक ऐसा मुद्दा बन गया है जिसने समझौते की संभावनाओं को जटिल बना दिया है। यह विवाद बताता है कि व्यापार केवल पैसा और वस्तुओं का नहीं होता, वह भावनाओं, संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्य व्यवस्था से भी टकराता है। Quick Facts: बिंदु विवरण समस्या अमेरिका की गायें नॉन-वेज चारा खाती हैं भारत की मांग डेयरी उत्पाद “शुद्ध शाकाहारी” स्रोत से हों अमेरिकी प्रतिक्रिया यह अनावश्यक बाधा है संभावित नुकसान भारतीय किसानों को ₹1 लाख करोड़ का घाटा धार्मिक पहलू हिन्दू धर्म में गाय और उसका दूध पवित्र माने जाते हैं जब बात “भारत-अमेरिका व्यापार डील” की होती है, तो यह सिर्फ टैक्स और टैरिफ की बातचीत नहीं होती। इसमें आस्था, पहचान, और स्थानीय अर्थव्यवस्था की गूंज भी शामिल होती है। गाय के चारे से शुरू हुआ यह विवाद, आज दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा नैतिक और सांस्कृतिक बहस बन चुका है। भारत ने साफ कर दिया है — “दूध वही, जो शुद्ध हो — और शुद्ध वही, जो शाकाहारी हो।”
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Trapit Bansal

Meta रूमिंग पैंग को देगा 1670 करोड़ और भारत के त्रपित बंसल को 800 करोड़ का पैकेज

Meta Superintelligence Labs: Zuckerberg की नई चाल से OpenAI और Google में मची हलचल! देश हरपल डिजिटल डेस्क | टेक डेस्कसिलिकॉन वैली में इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में टैलेंट वॉर चरम पर है। Meta के CEO मार्क ज़करबर्ग अब OpenAI, Google और Anthropic जैसी दिग्गज AI कंपनियों को सीधी चुनौती देने के लिए एक नई ‘सुपर चाल’ चल चुके हैं — Meta Superintelligence Labs (MSL) की शुरुआत के साथ। Meta अब तेजी से AI की सबसे तेज़ और होशियार ब्रेनपावर को अपने पाले में कर रहा है। खास बात है कि , यह जिन प्रतिभाओं को नियुक्त कर रहा है, उन्हें मिलने वाले पैकेज की रकम सुनकर कंपनियों के HR हिल गए हैं — 20 करोड़ डॉलर (1600 करोड़ रुपये तक) के पैकेज दिए जा रहे हैं! Top AI Talent की Meta में एंट्री! इस ‘AI Talent Hunt’ में कई चर्चित नाम शामिल हो चुके हैं: Huiwen Chang: GPT-4o की को-क्रिएटर और Google की मशहूर रिसर्चर, अब की टीम में शामिल हैं। Alexander Wang: पूर्व Scale AI के CEO को ने Superintelligence Labs का Chief AI Officer बनाया है। Nate Friedman: GitHub के पूर्व CEO और VC फर्म NFDG के को-फाउंडर अब AI Products और Applied Research संभालेंगे। Daniel Gross: Safe Superintelligence के पूर्व CEO, अब AI Product Division की कमान। Ruoming Pang: Apple की Foundation Models टीम के हेड रहे Pang को ₹1600 करोड़ के पैकेज पर नियुक्त किया। Trapit Bansal: OpenAI में ‘O-Series’ के डेवलपर, जिन्हें ₹800 करोड़ के ऑफर पर शामिल किया। Shuchao Bi: YouTube Shorts के को-फाउंडर और Google Ads में AI विशेषज्ञ रहे Bi ने भी जॉइन किया। पैकेज में क्या-क्या शामिल है? Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, Meta द्वारा दी जा रही compensation में शामिल है: Base SalarySigning BonusMeta Stock (Equity) – जिसमें performance metrics और loyalty-based clauses होते हैं।Extended Contracts – कुछ नियुक्तियाँ चार साल से भी लंबे अनुबंधों पर आधारित हैं। इसमें वो लोग भी हैं जिन्होंने अपने मौजूदा स्टार्टअप्स में बड़ी equity छोड़ Meta जॉइन किया। उन्हें हुए नुकसान की भरपाई के लिए Signing Bonus को बढ़ाया गया है। Meta का लक्ष्य क्या है? Meta की Superintelligence Labs का लक्ष्य सिर्फ Language Models बनाना नहीं, बल्कि Artificial General Intelligence (AGI) और Superintelligence Systems का निर्माण करना है, जिससे वह OpenAI, Google DeepMind और Anthropic जैसी कंपनियों को सीधे टक्कर दे सके। मार्क ज़करबर्ग ने साफ़ किया है कि AGI पर नियंत्रण रखने के लिए टेक्नोलॉजी की दुनिया के सर्वश्रेष्ठ दिमागों को एक साथ लाना जरूरी है – और अब उसी मिशन पर है। क्या यह टैलेंट वॉर और तेज़ होगी? AI सेक्टर में यह प्रतिस्पर्धा अब केवल इनोवेशन की नहीं रही, बल्कि ‘किसके पास बेहतर ब्रेन है’ इस रेस की भी बन गई है। पहले Apple, फिर OpenAI और अब Meta — हर कंपनी अब AI के अगले अध्याय को लिखने में जुटी है। यह रणनीति न केवल एआई इंडस्ट्री को पुनर्परिभाषित कर रही है, बल्कि एक नया AI साम्राज्य भी बना रही है, जहाँ टैलेंट, टेक्नोलॉजी और ट्रिलियन-डॉलर वैल्यू का मिलन हो रहा है। भारत से Trapit Bansal और Shuchao Bi जैसे नामों की मौजूदगी भारतीयों के लिए भी गर्व का विषय है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

Teachers Day 2026: PM Modi ने Award-Winning Teachers से की बात, Public Speaking पर भी हुई चर्चा

शिक्षक सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि बच्चों के अंदर आत्मविश्वास और बेहतर सोच भी पैदा करते हैं। Teachers’ Day से पहले PM Modi ने National Teachers’ Award 2026 के लिए चुने गए शिक्षकों और educators से मुलाकात की। इस दौरान पढ़ाई के तरीकों से लेकर बच्चों की बदलती आदतों तक कई मुद्दों पर बातचीत हुई। मुलाकात के दौरान माहौल काफी सहज नजर आया। प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से उनके अनुभव जानने के साथ यह भी समझने की कोशिश की कि वे बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए किस तरह के नए तरीके अपना रहे हैं। PM Modi ने पूछा- Public से कैसे करें बात? बातचीत के दौरान Public Speaking और लोगों के सामने अपनी बात रखने का मुद्दा भी सामने आया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बारे में सवाल किया तो एक महिला Teacher ने सीधा जवाब दिया कि लोगों के सामने प्रभावी तरीके से बात करने के लिए सबसे जरूरी चीज Confidence यानी आत्मविश्वास है। उनकी यह बात छोटी जरूर थी, लेकिन Public Speaking को लेकर एक बड़ा संदेश देती है। किसी भी मंच पर अपनी बात रखने के लिए केवल जानकारी होना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे भरोसे और स्पष्टता के साथ सामने रखना भी जरूरी है। Teachers ने PM Modi को बताए अपने Innovative Ideas प्रधानमंत्री मोदी ने Award-winning Teachers से उनके Teaching Experience और Classroom में अपनाए जा रहे नए प्रयोगों के बारे में भी जाना। शिक्षकों ने बताया कि वे बच्चों के लिए पढ़ाई को आसान और दिलचस्प बनाने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आज के समय में सिर्फ किताब और ब्लैकबोर्ड तक सीमित पढ़ाई बच्चों को हमेशा आकर्षित नहीं करती। ऐसे में कई शिक्षक Technology, Practical Activities और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े उदाहरणों की मदद से विषयों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं। बच्चों में Screen Addiction को लेकर भी चर्चा PM Modi ने बच्चों में बढ़ते Screen Time और Digital Addiction को लेकर भी शिक्षकों से चर्चा की। उन्होंने बच्चों को खेल, Physical Activities और रचनात्मक कामों से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही युवा छात्रों में नशे की समस्या को लेकर शिक्षकों को सतर्क रहने की बात भी कही गई। प्रधानमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को केवल Classroom तक सीमित नहीं माना। बच्चों के व्यवहार, उनकी आदतों और मानसिक-सामाजिक विकास में भी शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 5 सितंबर को 48 Teachers को National Award Teachers’ Day के मौके पर 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 48 स्कूल शिक्षकों को National Teachers’ Awards प्रदान करेंगी। इन शिक्षकों का चयन देशभर से एक निर्धारित और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए किया गया है। National Teachers’ Awards का मकसद ऐसे शिक्षकों को पहचान और सम्मान देना है, जिन्होंने पढ़ाई को बेहतर बनाने के साथ विद्यार्थियों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। यह पुरस्कार हर साल Teachers’ Day पर शिक्षकों के योगदान को सम्मानित करने के लिए दिए जाते हैं। PM Modi की Teachers से मुलाकात का संदेश प्रधानमंत्री और शिक्षकों की इस मुलाकात में एक बात साफ तौर पर सामने आई—एक अच्छा Teacher सिर्फ पाठ नहीं पढ़ाता, बल्कि बच्चों को जीवन के लिए तैयार करता है। चाहे Public Speaking में Confidence की बात हो या Classroom में नए Teaching Methods अपनाने की, बदलते समय के साथ शिक्षकों की भूमिका भी लगातार व्यापक हो रही है। Teachers’ Day से पहले हुई यह मुलाकात इसी बदलाव और शिक्षकों के योगदान को रेखांकित करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Ujjain

Ujjain में बनेगी Malakhamb Academy, 111 करोड़ के Project से खिलाड़ियों को मिलेंगी World-Class सुविधाएं

मध्यप्रदेश के मलखंब खिलाड़ियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रदेश सरकार Ujjain में एक ऐसी Malakhamb और Gymnastics Academy विकसित करने की तैयारी में है, जहां खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण के साथ आधुनिक सुविधाएं भी मिलेंगी। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के प्रयासों से तैयार किए गए प्रस्ताव के मुताबिक, करीब 20 एकड़ जमीन पर इस अकादमी को विकसित किया जाएगा। अकादमी में खिलाड़ियों के लिए खेल अधोसंरचना, हॉस्टल, आधुनिक उपकरण, फिटनेस सेंटर, फिजियोथेरेपी और खेल विज्ञान से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका मकसद प्रदेश की युवा मलखंब प्रतिभाओं को कम उम्र से ही बेहतर ट्रेनिंग देकर उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करना है। 111 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रस्ताव प्रस्तावित मलखंब एवं जिम्नास्टिक अकादमी के निर्माण पर करीब 86 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। वहीं वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक अकादमी के संचालन के लिए लगभग 25.33 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। इस तरह निर्माण और संचालन को मिलाकर परियोजना की कुल प्रस्तावित लागत करीब 111.33 करोड़ रुपये बताई गई है। खिलाड़ियों को सिर्फ Training नहीं, पूरी सुविधा मिलेगी इस अकादमी की खास बात यह होगी कि खिलाड़ियों को केवल मलखंब की ट्रेनिंग तक सीमित सुविधाएं नहीं मिलेंगी। यहां हॉस्टल, आधुनिक खेल उपकरण, फिटनेस, फिजियोथेरेपी और Sports Science आधारित प्रशिक्षण की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। सरकार का जोर ऐसे Training Environment पर है, जहां खिलाड़ियों की तकनीक के साथ उनकी फिटनेस और खेल प्रदर्शन पर भी लगातार काम किया जा सके। 70 खिलाड़ियों को मिलेगा मौका प्रस्ताव के अनुसार अकादमी में कुल 70 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें: शामिल होंगे। यानी कुल 50 खिलाड़ी बोर्डिंग और 20 खिलाड़ी डे-बोर्डिंग व्यवस्था में रहेंगे। खिलाड़ियों का चयन Talent Search के माध्यम से किए जाने का प्रस्ताव है। Academy शुरू होने से पहले उज्जैन में शुरू होगी Training स्थायी अकादमी की इमारत तैयार होने में समय लगने के दौरान भी खिलाड़ियों की ट्रेनिंग को रोका नहीं जाएगा। वर्ष 2026-27 और 2027-28 में अकादमी को राजमाता खेल परिसर, तानाखेड़ा, उज्जैन में डे-बोर्डिंग मॉडल पर संचालित करने का प्रस्ताव है। इस शुरुआती चरण में कुल 40 खिलाड़ियों को प्रवेश देने की योजना है। इनमें 30 बालक और 10 बालिकाएं शामिल होंगी। उज्जैन से बाहर के चयनित खिलाड़ियों के लिए विभाग की ओर से आवास की व्यवस्था करने का भी प्रस्ताव है। Expert Coaches के साथ Sports Science पर रहेगा फोकस नई अकादमी में खिलाड़ियों को आधुनिक और उच्च तकनीकी प्रशिक्षण देने की तैयारी है। इसके लिए उच्च तकनीकी सलाहकार और विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की सेवाएं अनुबंध के आधार पर लेने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। डे-बोर्डिंग व्यवस्था में खिलाड़ियों को प्रशिक्षकों के साथ फिजियोथेरेपिस्ट और मसाजर की सुविधा भी उपलब्ध कराने की योजना है। इसमें एक महिला फिजियोथेरेपिस्ट और दो मसाजर—एक महिला तथा एक पुरुष—का प्रावधान प्रस्तावित है। मंत्री विश्वास सारंग बोले- प्रतिभाओं को मिलेगा बड़ा मंच खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के मुताबिक मध्यप्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि इन खिलाड़ियों को सही समय पर आधुनिक सुविधाएं, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और बेहतर अवसर मिलें। उन्होंने कहा कि मलखंब मध्यप्रदेश की गौरवशाली खेल परंपरा का हिस्सा है और प्रदेश के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा साबित की है। प्रस्तावित अकादमी के जरिए खिलाड़ियों को शुरुआती उम्र से वैज्ञानिक और तकनीकी प्रशिक्षण देने पर जोर रहेगा। मंत्री के अनुसार लक्ष्य यह है कि मध्यप्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। Khelo India में MP के Malakhamb खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन मलखंब अकादमी की जरूरत इसलिए भी महसूस की गई क्योंकि मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने हाल के वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया है। Khelo India Youth Games 2025, बिहार में मध्यप्रदेश के मलखंब खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 10 पदक जीते। इनमें 7 Gold, 2 Silver और 1 Bronze Medal शामिल रहे। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया कि प्रदेश में मलखंब की प्रतिभाओं की मजबूत नींव मौजूद है। अब नई अकादमी के जरिए इन खिलाड़ियों को लगातार और बेहतर प्रशिक्षण देने की दिशा में काम किया जा रहा है। उज्जैन बन सकता है Malakhamb Talent Hub अकादमी के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी, उज्जैन को देने का प्रस्ताव है। शुरुआत में विभाग में उपलब्ध स्टाफ के जरिए अकादमी की दैनिक गतिविधियां संचालित की जाएंगी। उज्जैन जिले के लिए कुल 12 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें संभागीय खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी, जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी, लेखापाल, सहायक ग्रेड-2, सहायक ग्रेड-3 और भृत्य के पद शामिल हैं। खिलाड़ियों के लिए नई उम्मीद उज्जैन में प्रस्तावित Malakhamb Academy सिर्फ एक नई खेल सुविधा नहीं, बल्कि प्रदेश की युवा प्रतिभाओं के लिए आगे बढ़ने का बड़ा रास्ता बन सकती है। अभी जहां खिलाड़ी अलग-अलग स्थानों पर प्रशिक्षण लेते हैं, वहीं भविष्य में उन्हें एक ही जगह पर ट्रेनिंग, फिटनेस, आवास और Sports Science जैसी सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। अगर प्रस्तावित योजना अपने स्वरूप में आगे बढ़ती है, तो उज्जैन आने वाले समय में मध्यप्रदेश की मलखंब प्रतिभाओं की नई नर्सरी और प्रमुख Training Hub के रूप में अपनी पहचान बना सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
India-Belgium

India-Belgium Partnership: जोरावर Tank बना नई दोस्ती की पहचान, कई अहम MoU पर सहमति

India-Belgium के रिश्तों में गुरुवार को एक अहम पड़ाव जुड़ गया। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर भारत दौरे पर पहुंचे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। बातचीत के बाद दोनों देशों ने Defence, Clean Energy, Critical Minerals, Semiconductor, Maritime Cooperation और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक के बाद कहा कि भारत और बेल्जियम के संबंध अब केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश अब Defence और Clean Energy जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भी तेजी से साथ आ रहे हैं। इसी दौरान पीएम मोदी ने जोरावर Tank का भी जिक्र किया। जोरावर Tank ने बढ़ाया Defence Cooperation भारत के लिए पहाड़ी और कठिन इलाकों में इस्तेमाल होने वाला हल्का जोरावर टैंक Defence Sector का अहम प्रोजेक्ट है। पीएम मोदी ने भारत-बेल्जियम सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देश आधुनिक रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में साथ काम कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच Military Exchanges और Training Cooperation बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। इससे भारतीय और बेल्जियम की सेनाओं के बीच संपर्क और अनुभव साझा करने के अवसर बढ़ेंगे। हालांकि, जोरावर टैंक को लेकर इसे सीधे तौर पर कोई अलग Tank Purchase Deal कहना सही नहीं होगा। इस प्रोजेक्ट का उल्लेख दोनों देशों के बढ़ते Defence और Technology Cooperation के उदाहरण के तौर पर किया गया है। Clean Energy में भी नई Partnership Defence के साथ-साथ Green Energy भारत-बेल्जियम सहयोग का एक और बड़ा क्षेत्र बनकर सामने आया है। दोनों देशों ने Renewable Energy के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता किया है। पीएम मोदी ने आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में विकसित हो रहे Green Ammonia Project का भी जिक्र किया। भारत की बढ़ती Clean Energy जरूरतों और बेल्जियम की तकनीकी क्षमता को देखते हुए यह Partnership आने वाले समय में काफी अहम हो सकती है। Critical Minerals और Semiconductor पर नजर आज की Technology Economy में Critical Minerals और Semiconductor की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत और बेल्जियम ने इन क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। दोनों देश Critical Minerals की Processing और Recycling में मिलकर काम करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। वहीं Semiconductor Sector में बेल्जियम की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत के बड़े Manufacturing Ecosystem को जोड़ने पर जोर दिया गया है। खास तौर पर बेल्जियम के प्रसिद्ध Research Institute IMEC और भारत के Semiconductor Ecosystem के बीच सहयोग बढ़ाने की संभावना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 5 साल में Double हो सकता है Bilateral Trade बैठक में आर्थिक रिश्तों को लेकर भी बड़ा लक्ष्य सामने आया। भारत और बेल्जियम अगले पांच वर्षों में Bilateral Trade को दोगुना करने की दिशा में काम करेंगे। भारत और बेल्जियम के बीच व्यापार में Diamond Industry की लंबे समय से बड़ी भूमिका रही है। बेल्जियम का एंटवर्प शहर दुनिया के प्रमुख Diamond Trading Hubs में शामिल है और यहां भारतीय कारोबारियों की भी मजबूत मौजूदगी है। अब दोनों देश इस पुराने व्यापारिक रिश्ते को Defence, Technology, Energy और Critical Minerals जैसे नए क्षेत्रों से जोड़ना चाहते हैं। Maritime और Startup Sector में भी बढ़ेगा सहयोग भारत और बेल्जियम के बीच सहयोग का दायरा केवल Defence और Trade तक नहीं रहेगा। दोनों देशों ने Maritime Sector में Capacity Building और Startups के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। इसके अलावा Cybercrime से मुकाबला, Diplomatic Training और अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग को मजबूत करने के लिए समझौते किए गए हैं। दोनों देश Migration and Mobility Partnership Agreement को जल्द पूरा करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच छात्रों, Professionals और लोगों के आवागमन से जुड़े अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है। Terrorism पर भारत-बेल्जियम का एक सुर बैठक में आतंकवाद और दुनिया में चल रहे विभिन्न संघर्षों पर भी चर्चा हुई। भारत और बेल्जियम ने आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश Dialogue और Diplomacy के जरिए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास रखते हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता के बीच भारत और बेल्जियम के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। भारत-बेल्जियम रिश्तों की पुरानी कहानी पीएम मोदी ने दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों का भी जिक्र किया। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बेल्जियम में भारतीय सैनिकों के योगदान और बलिदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और बेल्जियम के संबंध काफी पुराने हैं। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। एंटवर्प के मेयर के तौर पर उनका भारत और भारतीय समुदाय से पहले भी संपर्क रहा है। अब Diamond Trade से आगे बढ़ रही दोस्ती भारत और बेल्जियम की दोस्ती की पहचान लंबे समय तक Diamond Trade से जुड़ी रही है। लेकिन बदलती दुनिया में दोनों देशों के रिश्ते अब एक बड़े दायरे में फैल रहे हैं। जोरावर Tank से Defence Cooperation, Green Energy से Critical Minerals और Semiconductor से Bilateral Trade तक, भारत और बेल्जियम कई नए क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। पीएम मोदी और बार्ट डी वेवर की बैठक को इसी बदलती Partnership की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में अगर इन समझौतों और सहयोग योजनाओं को जमीन पर तेजी से उतारा जाता है, तो भारत-बेल्जियम संबंध आर्थिक रिश्तों से आगे बढ़कर एक मजबूत Strategic Partnership का रूप ले सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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