/ Apr 28, 2026
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अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया 2026 Gold नहीं, ये 1 दान दिलाएगा सुख-समृद्धि और Good Luck

अक्षय तृतीया का दिन हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया हर अच्छा काम—चाहे वो पूजा हो, दान हो या नई शुरुआत—उसका फल कभी खत्म नहीं होता। यही वजह है कि लोग इस दिन को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के मौके के रूप में देखते हैं। इस साल भी अक्षय तृतीया को लेकर लोगों में खास उत्साह है। जहां एक तरफ बाजारों में सोना-चांदी खरीदने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान-पुण्य करने का महत्व भी काफी बढ़ जाता है। क्यों खास है “Ann Daan”? प्रसिद्ध संत Premanand Maharaj का कहना है कि अगर आप अक्षय तृतीया पर सिर्फ एक काम करना चाहते हैं, तो वो है अन्न दान। उनके अनुसार, जरूरतमंद को भोजन या अनाज देना सबसे बड़ा पुण्य है। उनका मानना है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से गेहूं, चावल या दाल का दान करता है, उसके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। ये सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि इंसानियत का सबसे सरल और असरदार तरीका भी है। कैसे करें ये आसान उपाय? अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न का दान करें। आप चाहें तो किसी गरीब परिवार को राशन दे सकते हैं या किसी भूखे व्यक्ति को भोजन करा सकते हैं। ध्यान रखने वाली बात ये है कि दान दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे मन से किया जाए—तभी उसका सही फल मिलता है। सिर्फ सोना खरीदना ही नहीं, ये भी करें अक्सर लोग अक्षय तृतीया को सिर्फ गोल्ड खरीदने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका असली महत्व दान और अच्छे कर्मों में छिपा है। इस दिन: दिल से किया छोटा काम, बड़ा असर अक्षय तृतीया हमें ये सिखाती है कि छोटे-छोटे अच्छे काम भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर आप इस दिन किसी की मदद करते हैं, तो उसका असर सिर्फ सामने वाले पर ही नहीं, बल्कि आपके जीवन पर भी पड़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Navami

Ram Navami 2026 सही Date,शुभ मुहूर्त और Puja Samagri पूरी जानकारी

राम नवमी (Ram Navami) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और भक्त इस दिन व्रत, पूजा और आरती करके भगवान की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। साल 2026 में राम नवमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ी कन्फ्यूजन है कि यह 26 मार्च को है या 27 मार्च को। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं। Ram Navami 2026 Date: 26 या 27 मार्च? वर्ष 2026 में राम नवमी 26 मार्च, गुरुवार को पड़ रही है। कई लोग सोचते हैं कि 27 मार्च को मनाना चाहिए, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार जिस दिन मध्याह्न (दोपहर) में नवमी तिथि आती है, उसी दिन राम नवमी मनाई जाती है, क्योंकि भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर में हुआ था। इस कारण 26 मार्च ही मुख्य और शुभ दिन माना जाता है। Shubh Muhurat for Ram Navami 2026 राम नवमी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय मध्याह्न होता है। इस समय भगवान श्रीराम की पूजा और अभिषेक करना सबसे शुभ माना जाता है। Ram Navami Puja Samagri List राम नवमी की पूजा में निम्न सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इन्हें पहले से तैयार करना शुभ माना जाता है: मुख्य सामग्री Ram Navami Puja Vidhi (संक्षेप में) हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शैलपुत्री

चैत्र नवरात्रि 2026 Day 1 शैलपुत्री माता की आराधना, व्रत और शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि 2026 का पहला दिन 12 मार्च को मनाया जाएगा। यह नवरात्रि वसंत ऋतु के आगमन और माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का शुभ समय है। हर दिन माँ के अलग रूप की पूजा की जाती है, और पहले दिन शैलपुत्री माता की उपासना होती है। शैलपुत्री माता – पहला दिन का महत्व ‘शैलपुत्री’ का अर्थ है “पर्वत की कन्या”। माता शैलपुत्री भगवान शिव और पार्वती की पुत्री हैं। उनके वाहन बैल हैं और हाथ में त्रिशूल और कमल धारण है। शैलपुत्री माता धैर्य, साहस और मानसिक स्थिरता का प्रतीक हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है। शैलपुत्री माता का पूजन और मंत्र व्रत और अनुष्ठान शैलपुत्री माता के दिन विशेष सुझाव हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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चैत्र नवरात्रि 2026

चैत्र नवरात्रि 2026 माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा और व्रत नियम

जानें चैत्र नवरात्रि 2026 की तिथियाँ, महत्व, व्रत नियम और पूजा विधियाँ। यह पर्व सिर्फ भक्ति और श्रद्धा का समय नहीं है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समर्पण और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है। चैत्र नवरात्रि 2026 की तारीखें और महत्त्व चैत्र नवरात्रि को वसंत ऋतु में मनाया जाता है और यह नया हिंदू संवत्सर शुरू करने का प्रतीक है। नवरात्रि के अंतिम दिन राम नवमी भी मनाई जाती है, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का शुभ अवसर है। माँ दुर्गा के नौ रूप और उनके लाभ हर दिन नवरात्रि में माँ दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है, जिनसे विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। दिन देवी का रूप प्रमुख गुण 1 शैलपुत्री शक्ति और मूल तत्व 2 ब्रह्मचारिणी तप और समर्पण 3 चंद्रघंटा साहस और धैर्य 4 कुश्मांडा आनंद और सृजन शक्ति 5 स्कंदमाता मातृत्व और प्रेम 6 कात्यायनी वीरता और साहस 7 कालरात्रि भय नाश 8 महागौरी पवित्रता और शांति 9 सिद्धिदात्री सिद्धि और सफलता घट स्थापना और पूजा विधि नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। घर या मंदिर में कलश स्थापित कर माँ दुर्गा के स्वागत के लिए मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभता आती है। व्रत नियम और पूजा के टिप्स इन नियमों का पालन करने से न केवल धार्मिक पुण्य मिलता है, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। समाज में नवरात्रि का महत्व नवरात्रि के अवसर पर धार्मिक स्थलों पर विशेष सुरक्षा और भीड़-प्रबंधन की तैयारी की जाती है। श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन अतिरिक्त कदम उठाता है। नवरात्रि का संदेश नवरात्रि केवल पूजा और उत्सव नहीं है, बल्कि यह शक्ति, समर्पण और आत्म-नवीनीकरण का पर्व है। माँ दुर्गा के आदर्शों — धैर्य, करुणा, वीरता और शक्ति — को अपनाकर जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Holika Dahan आज, मुहूर्त रात 12 बजे तक: जानिए पूजा विधि और होली की पौराणिक कहानी

Holika Dahan आज, मुहूर्त रात 12 बजे तक: जानिए पूजा विधि और होली की पौराणिक कहानी

आज देशभर में Holika Dahan मनाया जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुभ मुहूर्त रात 12 बजे तक है। इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने और अग्नि की परिक्रमा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसी के साथ रंगों के त्योहार होली की शुरुआत होती है। क्या है होलिका दहन की कहानी? पौराणिक कथा के अनुसार असुर राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने की कई कोशिशें कीं। जब वह सफल नहीं हुआ तो उसने अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन बुराई के अंत और सच्चाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन की पूजा विधि मान्यता है कि होलिका की अग्नि में पुरानी नकारात्मक ऊर्जा जलकर खत्म हो जाती है और घर में सकारात्मकता आती है। डिजिटल दौर में होली की खास झलक अब होली का जश्न सिर्फ मोहल्लों तक सीमित नहीं रहा। लोग सोशल मीडिया पर डिजिटल इफेक्ट्स, एआर फिल्टर्स और खास फोटो एडिटिंग के जरिए होली की रंगीन यादें साझा कर रहे हैं। कई लोग होलिका दहन की लाइव स्ट्रीमिंग भी कर रहे हैं, ताकि दूर बैठे रिश्तेदार भी इस परंपरा से जुड़ सकें। सामाजिक संदेश भी देता है त्योहार होलिका दहन हमें यह सीख देता है कि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है। साथ ही यह पर्व हमें एकजुटता, भाईचारे और प्रेम का संदेश देता है। इस बार होली पर प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, पानी की बचत करें और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मकर संक्रांति

मकर संक्रांति 2026 सूर्य की नई चाल से भारत में नई उम्मीदों की शुरुआत

भारत में मनाया जाने वाला मकर संक्रांति पर्व केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं बल्कि प्राकृतिक परिवर्तन, कृषि चक्र और सामाजिक एकता का प्रतीक है। मकर संक्रांति 2026 के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। यह समय ऊर्जा, स्वास्थ्य और सकारात्मक बदलाव का संकेत माना जाता है। मकर संक्रांति 2026 का खगोलीय महत्व मकर संक्रांति एकमात्र हिंदू पर्व है जो सूर्य की स्थिति पर आधारित होता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह पृथ्वी के झुकाव और सूर्य की किरणों की दिशा में बदलाव को दर्शाता है। इस दिन से दिन बड़े होने लगते हैं और सर्दी धीरे-धीरे विदा लेने लगती है, जिससे जीवन में नई सक्रियता आती है। किसानों के लिए खुशहाली का पर्व भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मकर संक्रांति बेहद महत्वपूर्ण है। यह नई फसल के आगमन का समय होता है। गेहूं, धान, गन्ना और तिलहन की फसल किसानों की मेहनत का प्रतिफल होती है।इसलिए मकर संक्रांति को कृषि उत्सव भी कहा जाता है। देशभर में अलग-अलग रूप मकर संक्रांति भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। हर क्षेत्र की परंपरा अलग है, लेकिन भावना एक—सूर्य और अन्नदाता का सम्मान। पतंगों से सजा भारत का आकाश मकर संक्रांति की सबसे सुंदर पहचान है पतंगबाजी। हजारों रंग-बिरंगी पतंगें आसमान में उड़कर उम्मीद, स्वतंत्रता और नई ऊँचाइयों का प्रतीक बन जाती हैं। गुजरात, राजस्थान और मध्य भारत में पतंग उत्सव सामाजिक मेल-मिलाप का बड़ा माध्यम बनता है। तिल-गुड़ और सामाजिक सौहार्द इस दिन तिल और गुड़ से बनी मिठाइयाँ बाँटने की परंपरा है। इसका अर्थ है—“कठिन समय में भी रिश्तों में मिठास बनाए रखना।” यह पर्व समाज को जोड़ने और प्रेम व भाईचारे को मजबूत करने का संदेश देता है। मकर संक्रांति 2026 का संदेश जब देश डिजिटल युग और वैश्विक बदलावों की ओर बढ़ रहा है, तब मकर संक्रांति 2026 हमें अपनी जड़ों, प्रकृति और परिश्रम को न भूलने की सीख देता है। यह त्योहार सिखाता है कि असली विकास तभी संभव है जब हम परंपरा और प्रगति दोनों को साथ लेकर चलें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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देवउठनी एकादशी

देवउठनी एकादशी 2025 भगवान विष्णु जागेंगे नींद से, शुरू होंगे सभी शुभ काम

देवउठनी एकादशी 2025 (Dev Uthani Ekadashi 2025) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और इसी के साथ मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है। इसे प्रबोधिनी एकादशी या देव उठावनी एकादशी भी कहा जाता है। आइए जानते हैं इस दिन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और तुलसी विवाह की पूरी जानकारी। देवउठनी एकादशी 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त इस वर्ष देवउठनी एकादशी 1 नवंबर 2025 (शनिवार) को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त भगवान विष्णु की विशेष पूजा करते हैं और उनसे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। देवउठनी एकादशी का धार्मिक महत्व हिंदू मान्यता के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इस चार माह की अवधि को चातुर्मास कहा जाता है, जिसमें कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।देवउठनी एकादशी के दिन जब भगवान विष्णु नींद से जागते हैं, तब से विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।यह दिन आध्यात्मिक जागृति, नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। तुलसी विवाह 2025: तिथि और महत्व देवउठनी एकादशी के अगले दिन यानी 2 नवंबर 2025 (रविवार) को तुलसी विवाह मनाया जाएगा।इस दिन भगवान विष्णु का विवाह तुलसी माता से कराया जाता है। यह शुभ कार्य घर-घर में मनाया जाता है। माना जाता है कि तुलसी विवाह करवाने से जीवन में शांति, प्रेम और समृद्धि आती है तथा विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। देवउठनी एकादशी 2025 पूजा विधि इस दिन से शुरू होते हैं मांगलिक कार्य देवउठनी एकादशी के बाद विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे सभी शुभ कार्यों की शुरुआत मानी जाती है।यह दिन शुभता, सौभाग्य और नए आरंभ का प्रतीक है। जो लोग भगवान विष्णु और तुलसी माता की भक्ति से पूजा करते हैं, उनके जीवन में धन, यश और वैवाहिक सुख की प्राप्ति होती है। महत्वपूर्ण बातें देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi 2025) का दिन धर्म, आस्था और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु के जागरण के साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। श्रद्धा और भक्ति के साथ इस व्रत को करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और शांति का संचार होता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Chhath Puja

Chhath Puja 2025 Special सूर्य देव की आराधना और आस्था का सबसे पवित्र पर्व

Chhath Puja 2025 आने वाली है, और पूरे भारत में श्रद्धा, आस्था और उत्साह का माहौल बन चुका है। यह पर्व सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति, सूर्य देव और जल के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई इलाकों में शुरू हुई यह परंपरा अब पूरे देश और विदेशों में मनाई जाती है। Chhath Puja 2025 चार दिन तक चलने वाला यह पर्व – नहाय खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य – शुद्धता और तपस्या का प्रतीक माना जाता है। छठ पूजा का महत्व (Chhath Puja Significance) छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की आराधना का पर्व है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य की उपासना करने से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है।यह पर्व हमें प्रकृति और मानव के बीच सामंजस्य की याद दिलाता है। छठी मैया (ऊषा देवी) को संतान, स्वास्थ्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और समाज की भलाई के लिए कठोर व्रत रखती हैं। Chhath Puja Vidhi (छठ पूजा की विधि) इन चार दिनों में व्रती पूर्ण संयम, पवित्रता और श्रद्धा से सभी विधियां निभाते हैं। Eco-Friendly Message of Chhath Puja (प्रकृति संग आस्था का मेल) छठ पूजा का एक बड़ा संदेश है प्रकृति और पर्यावरण का सम्मान।इस दिन घाटों, नदियों और तालाबों की सफाई की जाती है। पूजा में केवल प्राकृतिक सामग्रियों जैसे बांस की टोकरी, केला, नारियल, और दीपक का प्रयोग होता है — जिससे यह पर्व सस्टेनेबल लिविंग का उदाहरण बनता है। भक्ति गीत और छठ घाटों की रौनक (Chhath Puja Songs & Celebration) छठ के दौरान गली-गली में गूंजते हैं पारंपरिक गीत —“केलवा जे केरवा, लहराए हो… छठी मईया आइलें अंगना हो…”दीपों की रोशनी और भक्ति गीतों से सजा माहौल हर किसी के दिल को छू जाता है।लोग अपने पूरे परिवार के साथ घाटों पर जाकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और एकता का संदेश फैलाते हैं। छठ पूजा का संदेश (Spiritual Message of Chhath Puja) छठ पूजा सिखाती है कि सच्ची आस्था और तपस्या से कोई भी मनोकामना पूरी हो सकती है।यह पर्व नारी शक्ति, त्याग और सादगी का प्रतीक है।सूर्य देव से प्रार्थना की जाती है कि सभी के जीवन में उज्ज्वलता, समृद्धि और सुख-शांति बनी रहे। Chhath Puja 2025 सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की आत्मा है — जहाँ सूर्य, जल, वायु और मनुष्य के बीच अटूट संबंध झलकता है।इस छठ पर्व पर आइए हम सब छठी मैया और सूर्य देव से प्रार्थना करें कि हमारे घरों में हमेशा उजाला और खुशियाँ बनी रहें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhai Dooj

Bhai Dooj 2025 शुभ मुहूर्त भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का त्योहार

Bhai Dooj भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। यह त्योहार भाई और बहन के रिश्ते को मजबूत करने और परिवार में खुशियों का माहौल बनाने का अवसर है। इस साल भाई दूज 23 अक्टूबर 2025 को मनाया जाएगा, जो दीपावली के दूसरे दिन पड़ता है। भाई दूज का महत्व Bhai Dooj का मुख्य महत्व भाई-बहन के रिश्ते में विश्वास, सुरक्षा और प्यार को दर्शाना है। इस दिन बहन अपने भाई के लिए टिका, आरती, और मीठा भोजन तैयार करती है, जबकि भाई उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करता है। यह त्योहार बताता है कि चाहे भाई दूर ही क्यों न हो, बहन का प्यार और आशीर्वाद हमेशा उसके साथ रहता है। भाई दूज 2025 की परंपराएं Bhai Dooj शुभ मुहूर्त 2025 इस समय बहन अपने भाई को टिका करके उसका आशीर्वाद ले सकती है। Bhai Dooj की खास बातें भाई दूज 2025 का पर्व आपके रिश्तों को मजबूत करने और परिवार में खुशियों की लहर लाने का सबसे अच्छा मौका है।
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Govardhan Puja

Govardhan Puja 2025 दिवाली के बाद का खास पर्व और पूजा का महत्व

Govardhan Puja 2025, दिवाली के अगले दिन मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिन्दू त्योहार है। इसे अन्नकूट पूजा या इंदिरा पूजा भी कहा जाता है। यह पर्व भगवान कृष्ण और उनकी लीला, विशेषकर गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा, के लिए प्रसिद्ध है। गोवर्धन पूजा की कहानी (Govardhan Puja Story in Hindi) पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान कृष्ण ने गोकुलवासियों को समझाया कि केवल प्रकृति और गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, न कि केवल इन्द्रदेव की, तब इन्द्रदेव क्रोधित होकर भारी वर्षा करने लगे। तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अपने छोटे अंगूठे पर उठाकर गोकुलवासियों और उनके पशुओं की रक्षा की। इस घटना के बाद से हर साल Govardhan Puja मनाई जाती है, जो भक्ति, प्रेम और प्रकृति संरक्षण का संदेश देती है। Govardhan Puja कब और कैसे मनाई जाती है? गोवर्धन पूजा का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व Govardhan Puja केवल भगवान कृष्ण की भक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह प्रकृति संरक्षण और सामाजिक समरसता का संदेश भी देती है। अन्नकूट बनाकर गांव और शहर के लोग मिलकर भोजन करते हैं और जरूरतमंदों में दान वितरित करते हैं। Govardhan Puja 2025 प्रेम, भक्ति और प्राकृतिक संतुलन का पर्व है। मिट्टी के गोवर्धन पर्वत का निर्माण कर, अन्नकूट चढ़ाकर और गायों की सेवा करके हम अपने जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mumbai

Mumbai Crime News: कलमा पढ़ने को कहा, मना करने पर हमला; ‘Pahalgam Style’ Attack से हड़कंप

Mumbai से आई यह खबर सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा और सामाजिक माहौल को लेकर कई सवाल खड़े कर रही है। शहर में दो सिक्योरिटी गार्ड्स पर जिस तरह से हमला हुआ, उसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्या हुआ उस रात? जानकारी के मुताबिक, दोनों सिक्योरिटी गार्ड्स अपनी ड्यूटी पर मौजूद थे। तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और बातचीत के दौरान अचानक उनका धर्म पूछने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इसके बाद हमलावरों ने गार्ड्स पर दबाव बनाया कि वे कलमा पढ़ें। जब दोनों ने इससे इनकार किया, तो माहौल अचानक हिंसक हो गया और हमलावरों ने चाकू से हमला कर दिया। घटना इतनी तेजी से हुई कि आसपास मौजूद लोग भी कुछ पल के लिए समझ नहीं पाए। घायल गार्ड्स को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। ATS ने संभाली जांच, Terror Angle की पुष्टि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच अब एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) के पास है। शुरुआती जांच में ATS ने इस हमले को Terror Angle से जोड़कर देखा है। जांच एजेंसियां अब हर पहलू को खंगाल रही हैं— ‘Pahalgam Pattern’ क्यों कहा जा रहा? इस हमले को पहलगाम जैसे मामलों से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां पहले भी पहचान पूछकर लोगों को निशाना बनाया गया था। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की घटनाएं सिर्फ हिंसा नहीं होतीं, बल्कि इनके पीछे डर और अविश्वास का माहौल बनाने की कोशिश भी हो सकती है। बढ़ी सुरक्षा, इलाके में सख्ती घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं। स्थानीय लोगों में भी इस घटना के बाद चिंता का माहौल है, लेकिन साथ ही पुलिस की बढ़ी हुई मौजूदगी से कुछ राहत भी महसूस हो रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Putin

Putin Meets Araghchi: Iran के लिए Russia का बड़ा बयान, Global Politics में हलचल

रूस और ईरान के रिश्तों में एक बार फिर गर्माहट देखने को मिल रही है। हाल ही में व्लादिमीर पुतिन (Putin) और अब्बास अराघची के बीच हुई अहम मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। इस बैठक के बाद तेहरान में उत्साह साफ महसूस किया जा रहा है, वहीं रूस के बयान ने इस रिश्ते को और सुर्खियों में ला दिया है। Russia–Iran Relations: क्यों अहम है यह मुलाकात? जानकारों के मुताबिक, यह बैठक सिर्फ एक औपचारिक बातचीत नहीं थी, बल्कि इसके पीछे बड़े रणनीतिक संकेत छिपे हैं। रूस और ईरान पहले से ही रक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर साथ काम कर रहे हैं। लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों का एक-दूसरे के और करीब आना यह दिखाता है कि वे पश्चिमी दबाव के बीच अपनी स्थिति मजबूत करना चाहते हैं। “Iran के लिए करेंगे सबकुछ” – Russia का बड़ा संदेश इस मुलाकात के बाद रूस की तरफ से आया बयान सबसे ज्यादा चर्चा में है। रूस ने साफ कहा कि वह ईरान के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा। यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए एक कड़ा संकेत माना जा रहा है, जो लंबे समय से ईरान पर प्रतिबंध और दबाव बनाए हुए हैं। Tehran में क्यों बढ़ा जोश? इस मुलाकात के बाद तेहरान में राजनीतिक माहौल काफी सकारात्मक नजर आ रहा है। ईरानी नेताओं को उम्मीद है कि रूस के साथ मजबूत होते रिश्ते उन्हें वैश्विक मंच पर नई ताकत देंगे। आम लोगों के बीच भी यह चर्चा है कि इस साझेदारी से देश की आर्थिक और सुरक्षा स्थिति में सुधार आ सकता है। Global Impact: दुनिया पर क्या पड़ेगा असर? रूस और ईरान की बढ़ती नजदीकियां सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं हैं। इसका असर पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गठजोड़ पश्चिमी देशों के लिए चुनौती बन सकता है और आने वाले समय में नए geopolitical समीकरण देखने को मिल सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

बिलासपुर हाईवे पर चलती स्कूटी में रोमांस का वीडियो वायरल

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नेशनल हाईवे पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में कुछ युवक-युवतियां चलती स्कूटी पर खतरनाक तरीके से रोमांस करते नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो रतनपुर नेशनल हाईवे का है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि स्कूटी पर तीन लोग सवार हैं। स्कूटी चला रहा युवक बिना हेलमेट के है, जबकि पीछे बैठे युवक और युवती चलती गाड़ी में रोमांस करते दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान सड़क पर अन्य वाहन भी चल रहे हैं, जिससे हादसे का खतरा साफ नजर आता है। ट्रैफिक पुलिस ने शुरू की जांच इस मामले में ट्रैफिक ASP रामगोपाल करियारे ने कहा कि वीडियो की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। चलती स्कूटी पर इस तरह का व्यवहार न सिर्फ गलत है, बल्कि खतरनाक भी है। पुलिस नंबर प्लेट के जरिए वाहन मालिक की पहचान करने में जुटी है। पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बिलासपुर में ऐसे वीडियो सामने आ चुके हैं, जिसमें कपल चलती स्कूटी पर एक-दूसरे को गले लगाकर घूमते नजर आए थे। उस मामले में पुलिस ने युवक को पकड़कर 8,800 रुपये का चालान काटा था। हाईवे पर इस तरह की लापरवाही कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए ट्रैफिक नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com

खंडवा में दर्दनाक हादसा: कन्वेयर बेल्ट में फंसकर 21 साल के युवक की मौत

खंडवा जिले की संत सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना में सोमवार देर रात एक दर्दनाक हादसा हो गया। यहां काम कर रहे 21 वर्षीय युवक रविंद्र चौहान की कन्वेयर बेल्ट में फंसने से मौके पर ही मौत हो गई। रविंद्र ग्राम आंवलिया का रहने वाला था और विनायक इलेक्ट्रिकल कंपनी के जरिए परियोजना में काम करता था। बताया जा रहा है कि रात करीब 8 बजे रविंद्र अपनी ड्यूटी पर था। इसी दौरान अचानक वह कन्वेयर बेल्ट की चपेट में आ गया। हादसा इतना गंभीर था कि उसे संभलने का मौका तक नहीं मिला। घटना के बाद प्लांट में हड़कंप मच गया और कुछ समय के लिए काम भी रुक गया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्लांट के अधिकारी मौके पर पहुंचे। मंगलवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद रविंद्र का शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। मृतक के भाई अरविंद चौहान ने आरोप लगाया है कि मशीन को बिना सूचना चालू किया गया था, जिससे यह हादसा हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि रविंद्र लगातार ओवरटाइम कर रहा था, जिससे वह काफी थका हुआ रहता था। मूंदी थाना प्रभारी राजेंद्र नरवरिया के मुताबिक, मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। वहीं परियोजना के मुख्य अभियंता जेसी जुनेवाल ने भी आंतरिक जांच शुरू होने की बात कही है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है, खासकर उन मजदूरों के लिए जो रोज जोखिम भरे माहौल में काम करते हैं। 👉 ऐसी ही खबरों के लिए पढ़ते रहें: www.deshharpal.com
Gujarat Election

Gujarat Election 2026 Results: BJP ने मारी बाज़ी, नगर निगमों में रिकॉर्ड प्रदर्शन

Gujarat Election 2026 के नतीजों ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि राज्य की शहरी राजनीति में BJP Wave अभी भी बरकरार है। शुरुआती रुझानों से लेकर अब तक आए परिणामों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई नगर निगमों में जीत दर्ज की है और बाकी में बहुमत की ओर बढ़ रही है। BJP का दबदबा, 9 निगमों में जीत राज्य के 15 नगर निगमों में हुए चुनावों मेंBharatiya Janata Partyने अब तक 9 नगर निगमों में जीत हासिल कर ली है। वहीं, 6 अन्य निगमों में पार्टी बहुमत के बेहद करीब है। गांधीनगर, वडोदरा और जामनगर जैसे बड़े शहरों में भाजपा को साफ बढ़त मिली है। यह नतीजे दिखाते हैं कि शहरी इलाकों में पार्टी की पकड़ पहले की तरह मजबूत बनी हुई है। विपक्ष पिछड़ा, Congress और AAP को झटका Gujarat Election मेंIndian National CongressऔरAam Aadmi Partyदोनों को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिली। कांग्रेस कई जगहों पर मुकाबले में नहीं दिखी, जबकि आम आदमी पार्टी, जिसने पिछली बार कुछ शहरों में अच्छा प्रदर्शन किया था, इस बार वैसा असर नहीं छोड़ पाई। सूरत जैसे महत्वपूर्ण शहर में भी AAP पिछड़ती नजर आई। वहीं,All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen(AIMIM) ने कुछ सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी मौजूदगी का अहसास जरूर कराया है। क्यों अहम हैं ये चुनाव? गुजरात के निकाय चुनावों को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले का “सेमीफाइनल” माना जा रहा है। इन नतीजों से यह संकेत मिलता है कि फिलहाल राज्य में भाजपा की पकड़ मजबूत बनी हुई है, खासकर शहरी वोटर्स के बीच। इन चुनावों में नगर निगमों के अलावा नगर पालिकाओं और पंचायतों में भी मतदान हुआ, जिससे राज्य की राजनीति की व्यापक तस्वीर सामने आई है। जनता का मूड: स्थिरता और विकास पर भरोसा अगर इन नतीजों को ध्यान से देखें तो साफ लगता है कि मतदाताओं ने स्थिर सरकार और विकास के मुद्दों पर भरोसा जताया है। भाजपा को इसका सीधा फायदा मिला है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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