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Rath Yatra 2026

Rath Yatra 2026: अहमदाबाद में बदले सुरक्षा इंतजाम, हाथियों के पैर बांधकर निकाली यात्रा; Puri में निभेगी सदियों पुरानी रस्म

Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा देशभर में आस्था और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। गुजरात के अहमदाबाद और ओडिशा के पुरी में इस बार भी लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए उमड़े। हालांकि अहमदाबाद की रथयात्रा इस बार एक खास वजह से rerचर्चा में रही। पिछले साल हाथियों के बेकाबू होने की घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा में शामिल हाथियों के पैरों को हल्के बंधन में रखा। दूसरी ओर पुरी में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार गजपति महाराज सोने की झाड़ू से भगवान के रथों की सफाई करेंगे। पिछले साल की घटना के बाद बदली तैयारी अहमदाबाद की जगन्नाथ रथयात्रा देश की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक रथयात्राओं में से एक मानी जाती है। लेकिन वर्ष 2025 की यात्रा के दौरान तीन हाथी अचानक बेकाबू हो गए थे। भीड़ में अफरा-तफरी मच गई थी और कई श्रद्धालु घायल हुए थे। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठे थे। इसी अनुभव से सीख लेते हुए इस बार प्रशासन, वन विभाग और पशु चिकित्सकों ने मिलकर विस्तृत सुरक्षा योजना तैयार की। हाथियों के आगे और पीछे के पैरों को हल्की रस्सियों से नियंत्रित रखा गया ताकि वे भीड़ में अचानक तेज़ी से न दौड़ सकें। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है और इसमें पशुओं की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया। सुरक्षा व्यवस्था रही हाई अलर्ट पर रथयात्रा के पूरे मार्ग पर हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए। ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी, कंट्रोल रूम और क्विक रिस्पॉन्स टीम के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी गई। हाथियों के साथ अनुभवी महावत, वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सक भी लगातार मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप, एम्बुलेंस, पेयजल केंद्र और हेल्प डेस्क बनाए गए। ट्रैफिक को भी पहले से तय डायवर्जन प्लान के अनुसार संचालित किया गया ताकि यात्रा बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके। Puri में निभेगी ‘छेरा पहंरा’ की अनोखी परंपरा ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। यहां रथयात्रा के दौरान गजपति महाराज ‘छेरा पहंरा’ नामक विशेष अनुष्ठान करते हैं। इस रस्म में वे सोने की झाड़ू से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों की सफाई करते हैं और चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव करते हैं। यह परंपरा इस बात का संदेश देती है कि भगवान के सामने हर व्यक्ति समान है। चाहे वह राजा हो या आम भक्त, सभी भगवान के सेवक हैं। लाखों श्रद्धालुओं ने लगाए जयकारे अहमदाबाद और पुरी दोनों शहरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भगवान जगन्नाथ के जयघोष के बीच भक्तों ने रथों को खींचकर अपनी आस्था व्यक्त की। पूरे वातावरण में भक्ति, उत्साह और पारंपरिक संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। आस्था के साथ सुरक्षा का भी संदेश इस बार की रथयात्रा ने दो महत्वपूर्ण संदेश दिए। पहला, धार्मिक परंपराओं का सम्मान और दूसरा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं। अहमदाबाद में पिछले साल की घटना से सीख लेकर किए गए इंतजाम और पुरी में सदियों से चली आ रही परंपराओं का निर्वहन, दोनों ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। यही वजह है कि जगन्नाथ रथयात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक मानी जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jagannath Rath Yatra

Jagannath Rath Yatra 2026: Tradition बनाम अलग आयोजन, ISKCON को लेकर पुरी राजा ने उठाई आवाज

भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक Jagannath Puri Rath Yatra को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। पुरी के राजा ने ISKCON (International Society for Krishna Consciousness) की ओर से अलग समय पर रथयात्रा आयोजित किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस मामले में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भगवान जगन्नाथ की सदियों पुरानी परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा करने की अपील की है। पुरी राजा का कहना है कि Jagannath Rath Yatra सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसलिए इससे जुड़े नियमों और परंपराओं का पालन बेहद जरूरी है। ISKCON की अलग रथयात्रा पर क्यों उठा विवाद? ISKCON दुनिया के कई देशों में भगवान कृष्ण और भगवान जगन्नाथ से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करता है। संस्था की ओर से कई जगहों पर Rath Yatra का आयोजन भी किया जाता है। हालांकि, पुरी की मुख्य रथयात्रा की अपनी अलग धार्मिक मान्यता और परंपरागत व्यवस्था है। पुरी राजा ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अलग-अलग समय पर रथयात्रा आयोजित होने से भगवान जगन्नाथ की परंपरा को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि इस विषय पर ध्यान दिया जाए और सदियों से चली आ रही धार्मिक व्यवस्था को सुरक्षित रखा जाए। President और PM को लिखा पत्र, परंपरा बचाने की अपील पुरी राजा की ओर से लिखे गए पत्र में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़ी परंपराओं की गरिमा बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि पुरी की रथयात्रा केवल ओडिशा की पहचान नहीं है, बल्कि देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों भक्तों की भावनाओं से जुड़ी हुई है। ऐसे में इससे जुड़े किसी भी बदलाव को संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। Jagannath Rath Yatra का है ऐतिहासिक महत्व पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए पुरी पहुंचते हैं। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर की ओर जाते हैं। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है। आस्था और Tradition के बीच बढ़ी बहस Jagannath Puri Rath Yatra से जुड़ा यह विवाद एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि धार्मिक परंपराओं और आधुनिक आयोजनों के बीच संतुलन कितना जरूरी है। जहां ISKCON दुनिया भर में भगवान जगन्नाथ और कृष्ण भक्ति का प्रचार करता है, वहीं पुरी की पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े लोग मूल परंपराओं और धार्मिक नियमों को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार और संबंधित पक्ष इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, Jagannath Puri Rath Yatra Controversy ने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है।
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Yogini Ekadashi

Yogini Ekadashi 2026: दीपदान के ये 5 आसान उपाय, घर में सुख-समृद्धि आने की है मान्यता

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाली प्रमुख एकादशियों में गिना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं तथा सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी की शाम घर के कुछ खास स्थानों पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आर्थिक परेशानियां दूर होने की प्रार्थना की जाती है। अगर आप भी इस शुभ अवसर पर पूजा-पाठ कर रहे हैं, तो जानिए वे पांच स्थान जहां दीपक जलाना शुभ माना जाता है। Yogini Ekadashi 2026 पर इन 5 जगहों पर जरूर जलाएं दीपक 1. मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं घर का मुख्य द्वार सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि योगिनी एकादशी की शाम यहां घी या तिल के तेल का दीपक जलाने से घर में शुभता का आगमन होता है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। 2. तुलसी के पौधे के सामने तुलसी का पौधा भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना गया है। योगिनी एकादशी के दिन शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाकर पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। कई परिवार इस दिन तुलसी की परिक्रमा भी करते हैं। 3. पूजा घर में भगवान विष्णु के समक्ष पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। 4. रसोईघर में वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोईघर माता अन्नपूर्णा का स्थान माना जाता है। यहां दीपक जलाने की परंपरा को अन्न और धन की वृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इससे घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। 5. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) घर का उत्तर-पूर्व भाग यानी ईशान कोण सबसे पवित्र दिशा मानी जाती है। इस स्थान पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के लिए सुख, शांति एवं आर्थिक उन्नति की कामना की जाती है। योगिनी एकादशी पर पूजा करते समय रखें इन बातों का ध्यान दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी के दिन अन्न, वस्त्र, फल, जल और दक्षिणा का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए दान और सेवा का विशेष फल प्राप्त होता है तथा जीवन की कई बाधाएं दूर होने की कामना की जाती है। क्या सच में दूर होती है आर्थिक तंगी? धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में योगिनी एकादशी पर दीपदान, व्रत और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार आस्था है। इसे धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए। नियमित पूजा, सकारात्मक सोच, मेहनत और सही आर्थिक योजना के साथ जीवन में सफलता के अवसर और भी मजबूत हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Adhik Maas

Adhik Maas 2026: भक्ति का महीना शुरू, जानें शुभ मंत्र और धार्मिक महत्व

आज से हिंदू पंचांग का सबसे पवित्र और खास समय Adhik Maas 2026 (Purushottam Maas) शुरू हो गया है। इसे सामान्य भाषा में मलमास भी कहा जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कोई अशुभ समय नहीं, बल्कि भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत शुभ महीना माना जाता है। इस महीने को “पुरुषोत्तम मास” इसलिए कहा जाता है क्योंकि स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर सम्मानित किया था। Adhik Maas 2026 क्या है और क्यों खास माना जाता है? अधिकमास हर 2–3 साल में आता है, जब चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच अंतर को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब किसी देवता ने इस अतिरिक्त महीने को स्वीकार नहीं किया, तब भगवान विष्णु ने इसे अपनाकर इसे भक्ति और साधना का सर्वोच्च समय बना दिया। यही कारण है कि इस महीने में भौतिक कार्यों से ज्यादा आध्यात्मिक गतिविधियों को महत्व दिया जाता है। Purushottam Maas में क्या करना चाहिए (Do’s) इस पूरे महीने में किए गए अच्छे कर्म कई गुना फल देने वाले माने जाते हैं: अधिकमास में क्या नहीं करना चाहिए (Don’ts) इस पवित्र अवधि में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है: Adhik Maas 2026 के शक्तिशाली मंत्र इस महीने में मंत्र जप का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इससे मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। 1. विष्णु मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”रोज 108 बार जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। 2. महामंत्र हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरेहरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे 3. शांति मंत्र “शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्…” Adhik Maas 2026 का महत्व (Human Touch) आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में यह महीना एक तरह से “pause” लेने का मौका देता है। भागदौड़ के बीच कुछ समय अपने मन, विचार और आध्यात्म से जुड़ने का अवसर मिलता है। कई लोग इस महीने में व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ बढ़ाते हैं और अपने जीवन में सरलता लाने की कोशिश करते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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वट सावित्री

वट सावित्री 2026: सुहागिन महिलाओं में दिखी आस्था, मंदिरों में उमड़ी भीड़

ज्येष्ठ अमावस्या के मौके पर शनिवार को देशभर में वट सावित्री व्रत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों और बरगद के पेड़ों के पास सुहागिन महिलाओं की भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा की। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना की, बरगद के पेड़ के चारों ओर धागा बांधा और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी। कई जगहों पर सामूहिक पूजा का आयोजन भी किया गया, जहां महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से व्रत किया। क्यों खास माना जाता है Vat Savitri Vrat? हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को सुहाग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ निश्चय से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि बरगद का पेड़ त्रिदेवों का स्वरूप होता है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है। परिक्रमा के समय बोलें ये शुभ मंत्र बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते समय महिलाएं इस मंत्र का जाप करती हैं— “वट वृक्ष त्वं देववृक्षः त्वं च विष्णुस्वरूपधृक्।पति आयुः प्रदेहि त्वं नमस्ते वटवृक्षाय॥” मान्यता है कि श्रद्धा से इस मंत्र का जाप करने पर वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे की जाती है वट सावित्री की पूजा बाजारों में भी दिखी रौनक वट सावित्री व्रत को लेकर पूजा सामग्री, फल, मिठाई और सजावटी सामान की दुकानों पर भी अच्छी भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पूजा के लिए विशेष रूप से लाल और पीले रंग की सामग्री खरीदी। कई जगहों पर बरगद के पेड़ों को फूलों और रंगोली से सजाया गया। परिवार और रिश्तों से जुड़ा त्योहार वट सावित्री व्रत सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास, प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। बदलते दौर में भी यह पर्व भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को मजबूती से जोड़कर रखे हुए है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया 2026 Gold नहीं, ये 1 दान दिलाएगा सुख-समृद्धि और Good Luck

अक्षय तृतीया का दिन हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया हर अच्छा काम—चाहे वो पूजा हो, दान हो या नई शुरुआत—उसका फल कभी खत्म नहीं होता। यही वजह है कि लोग इस दिन को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के मौके के रूप में देखते हैं। इस साल भी अक्षय तृतीया को लेकर लोगों में खास उत्साह है। जहां एक तरफ बाजारों में सोना-चांदी खरीदने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान-पुण्य करने का महत्व भी काफी बढ़ जाता है। क्यों खास है “Ann Daan”? प्रसिद्ध संत Premanand Maharaj का कहना है कि अगर आप अक्षय तृतीया पर सिर्फ एक काम करना चाहते हैं, तो वो है अन्न दान। उनके अनुसार, जरूरतमंद को भोजन या अनाज देना सबसे बड़ा पुण्य है। उनका मानना है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से गेहूं, चावल या दाल का दान करता है, उसके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। ये सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि इंसानियत का सबसे सरल और असरदार तरीका भी है। कैसे करें ये आसान उपाय? अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न का दान करें। आप चाहें तो किसी गरीब परिवार को राशन दे सकते हैं या किसी भूखे व्यक्ति को भोजन करा सकते हैं। ध्यान रखने वाली बात ये है कि दान दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे मन से किया जाए—तभी उसका सही फल मिलता है। सिर्फ सोना खरीदना ही नहीं, ये भी करें अक्सर लोग अक्षय तृतीया को सिर्फ गोल्ड खरीदने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका असली महत्व दान और अच्छे कर्मों में छिपा है। इस दिन: दिल से किया छोटा काम, बड़ा असर अक्षय तृतीया हमें ये सिखाती है कि छोटे-छोटे अच्छे काम भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर आप इस दिन किसी की मदद करते हैं, तो उसका असर सिर्फ सामने वाले पर ही नहीं, बल्कि आपके जीवन पर भी पड़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Navami

Ram Navami 2026 सही Date,शुभ मुहूर्त और Puja Samagri पूरी जानकारी

राम नवमी (Ram Navami) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और भक्त इस दिन व्रत, पूजा और आरती करके भगवान की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। साल 2026 में राम नवमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ी कन्फ्यूजन है कि यह 26 मार्च को है या 27 मार्च को। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं। Ram Navami 2026 Date: 26 या 27 मार्च? वर्ष 2026 में राम नवमी 26 मार्च, गुरुवार को पड़ रही है। कई लोग सोचते हैं कि 27 मार्च को मनाना चाहिए, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार जिस दिन मध्याह्न (दोपहर) में नवमी तिथि आती है, उसी दिन राम नवमी मनाई जाती है, क्योंकि भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर में हुआ था। इस कारण 26 मार्च ही मुख्य और शुभ दिन माना जाता है। Shubh Muhurat for Ram Navami 2026 राम नवमी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय मध्याह्न होता है। इस समय भगवान श्रीराम की पूजा और अभिषेक करना सबसे शुभ माना जाता है। Ram Navami Puja Samagri List राम नवमी की पूजा में निम्न सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इन्हें पहले से तैयार करना शुभ माना जाता है: मुख्य सामग्री Ram Navami Puja Vidhi (संक्षेप में) हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शैलपुत्री

चैत्र नवरात्रि 2026 Day 1 शैलपुत्री माता की आराधना, व्रत और शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि 2026 का पहला दिन 12 मार्च को मनाया जाएगा। यह नवरात्रि वसंत ऋतु के आगमन और माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का शुभ समय है। हर दिन माँ के अलग रूप की पूजा की जाती है, और पहले दिन शैलपुत्री माता की उपासना होती है। शैलपुत्री माता – पहला दिन का महत्व ‘शैलपुत्री’ का अर्थ है “पर्वत की कन्या”। माता शैलपुत्री भगवान शिव और पार्वती की पुत्री हैं। उनके वाहन बैल हैं और हाथ में त्रिशूल और कमल धारण है। शैलपुत्री माता धैर्य, साहस और मानसिक स्थिरता का प्रतीक हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है। शैलपुत्री माता का पूजन और मंत्र व्रत और अनुष्ठान शैलपुत्री माता के दिन विशेष सुझाव हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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चैत्र नवरात्रि 2026

चैत्र नवरात्रि 2026 माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा और व्रत नियम

जानें चैत्र नवरात्रि 2026 की तिथियाँ, महत्व, व्रत नियम और पूजा विधियाँ। यह पर्व सिर्फ भक्ति और श्रद्धा का समय नहीं है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समर्पण और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक भी माना जाता है। चैत्र नवरात्रि 2026 की तारीखें और महत्त्व चैत्र नवरात्रि को वसंत ऋतु में मनाया जाता है और यह नया हिंदू संवत्सर शुरू करने का प्रतीक है। नवरात्रि के अंतिम दिन राम नवमी भी मनाई जाती है, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का शुभ अवसर है। माँ दुर्गा के नौ रूप और उनके लाभ हर दिन नवरात्रि में माँ दुर्गा के अलग-अलग रूप की पूजा की जाती है, जिनसे विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। दिन देवी का रूप प्रमुख गुण 1 शैलपुत्री शक्ति और मूल तत्व 2 ब्रह्मचारिणी तप और समर्पण 3 चंद्रघंटा साहस और धैर्य 4 कुश्मांडा आनंद और सृजन शक्ति 5 स्कंदमाता मातृत्व और प्रेम 6 कात्यायनी वीरता और साहस 7 कालरात्रि भय नाश 8 महागौरी पवित्रता और शांति 9 सिद्धिदात्री सिद्धि और सफलता घट स्थापना और पूजा विधि नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है। घर या मंदिर में कलश स्थापित कर माँ दुर्गा के स्वागत के लिए मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभता आती है। व्रत नियम और पूजा के टिप्स इन नियमों का पालन करने से न केवल धार्मिक पुण्य मिलता है, बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। समाज में नवरात्रि का महत्व नवरात्रि के अवसर पर धार्मिक स्थलों पर विशेष सुरक्षा और भीड़-प्रबंधन की तैयारी की जाती है। श्रद्धालुओं की सुविधा और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन अतिरिक्त कदम उठाता है। नवरात्रि का संदेश नवरात्रि केवल पूजा और उत्सव नहीं है, बल्कि यह शक्ति, समर्पण और आत्म-नवीनीकरण का पर्व है। माँ दुर्गा के आदर्शों — धैर्य, करुणा, वीरता और शक्ति — को अपनाकर जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Holika Dahan आज, मुहूर्त रात 12 बजे तक: जानिए पूजा विधि और होली की पौराणिक कहानी

Holika Dahan आज, मुहूर्त रात 12 बजे तक: जानिए पूजा विधि और होली की पौराणिक कहानी

आज देशभर में Holika Dahan मनाया जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुभ मुहूर्त रात 12 बजे तक है। इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने और अग्नि की परिक्रमा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और इसी के साथ रंगों के त्योहार होली की शुरुआत होती है। क्या है होलिका दहन की कहानी? पौराणिक कथा के अनुसार असुर राजा हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने की कई कोशिशें कीं। जब वह सफल नहीं हुआ तो उसने अपनी बहन होलिका की मदद ली, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई। तभी से होलिका दहन बुराई के अंत और सच्चाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। होलिका दहन की पूजा विधि मान्यता है कि होलिका की अग्नि में पुरानी नकारात्मक ऊर्जा जलकर खत्म हो जाती है और घर में सकारात्मकता आती है। डिजिटल दौर में होली की खास झलक अब होली का जश्न सिर्फ मोहल्लों तक सीमित नहीं रहा। लोग सोशल मीडिया पर डिजिटल इफेक्ट्स, एआर फिल्टर्स और खास फोटो एडिटिंग के जरिए होली की रंगीन यादें साझा कर रहे हैं। कई लोग होलिका दहन की लाइव स्ट्रीमिंग भी कर रहे हैं, ताकि दूर बैठे रिश्तेदार भी इस परंपरा से जुड़ सकें। सामाजिक संदेश भी देता है त्योहार होलिका दहन हमें यह सीख देता है कि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है। साथ ही यह पर्व हमें एकजुटता, भाईचारे और प्रेम का संदेश देता है। इस बार होली पर प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, पानी की बचत करें और सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Champat Rai

Ram Mandir Donation Case: विवादों के बीच Champat Rai ने चुना भक्ति का रास्ता, Ayodhya में 4 महीने करेंगे साधना

अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े चढ़ावा विवाद (Ram Mandir Donation Controversy) के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय (Champat Rai) ने एक बड़ा आध्यात्मिक कदम उठाया है। उन्होंने अयोध्या में चार महीने तक चलने वाली चातुर्मास साधना (Chaturmas Sadhna) शुरू कर दी है। इस दौरान वह भगवान श्रीराम की आराधना, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए अपना समय आध्यात्मिक साधना में बिताएंगे। चंपत राय का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे और दान से जुड़े मामले को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। विवाद के बीच उनका अयोध्या में रहकर साधना करने का निर्णय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। चंपत राय ने क्यों शुरू की Chaturmas Sadhna? धार्मिक परंपराओं में चातुर्मास का विशेष महत्व माना जाता है। यह अवधि भगवान की भक्ति, आत्मसंयम और आध्यात्मिक चिंतन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी परंपरा के तहत चंपत राय ने चार महीने तक साधना करने का संकल्प लिया है। बताया जा रहा है कि इस दौरान वह राम नाम का जाप, रामचरितमानस पाठ और अन्य धार्मिक गतिविधियों में समय लगाएंगे। उनका उद्देश्य आध्यात्मिक अनुशासन और आत्ममंथन पर ध्यान केंद्रित करना है। Ram Mandir Donation Case को लेकर क्यों बढ़ी चर्चा? श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान की व्यवस्था को लेकर कथित गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद विवाद शुरू हुआ। मामले की जांच को लेकर सवाल उठे और जांच एजेंसियों ने कई पहलुओं की पड़ताल शुरू की। इस विवाद के बाद मंदिर प्रशासन की व्यवस्था, दान प्रबंधन और जिम्मेदार लोगों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अयोध्या में चंपत राय की भूमिका रही है अहम चंपत राय लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद मंदिर निर्माण से लेकर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में उनकी भूमिका रही है। राम मंदिर निर्माण और निधि संग्रह अभियान के दौरान भी वह लगातार सक्रिय रहे। यही वजह है कि उनसे जुड़ा कोई भी फैसला अयोध्या और देशभर में लोगों का ध्यान आकर्षित करता है। विवाद के बीच आध्यात्मिक रास्ता चुना राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच चंपत राय का चार महीने की साधना का फैसला कई मायनों में देखा जा रहा है। उनके समर्थक इसे भक्ति, संयम और आत्मचिंतन का कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे मौजूदा विवाद के संदर्भ में भी जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल, अयोध्या में चंपत राय की चातुर्मास साधना और राम मंदिर से जुड़े विवाद की जांच दोनों ही सुर्खियों में हैं। आने वाले समय में जांच की दिशा और मंदिर प्रशासन से जुड़े फैसले इस पूरे मामले की तस्वीर साफ करेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Telangana

Telangana Assembly Special Session: 21 साल में चुनाव लड़ने का प्रस्ताव, क्या बदल जाएगा Election का नियम?

Telangana Election Reform: तेलंगाना सरकार ने देश की चुनावी व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में एक अहम पहल की है। राज्य सरकार विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष से घटाकर 21 वर्ष करने के पक्ष में प्रस्ताव लाने जा रही है। इस मुद्दे पर अगस्त के पहले सप्ताह में विधानसभा और विधान परिषद का विशेष सत्र बुलाया जाएगा। हालांकि, केवल राज्य सरकार के प्रस्ताव से नियम नहीं बदलेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार और संसद की मंजूरी अनिवार्य होगी। युवाओं को राजनीति में आगे लाने की तैयारी मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी का कहना है कि भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। ऐसे में युवाओं को केवल मतदान तक सीमित रखने के बजाय उन्हें चुनाव लड़ने और नेतृत्व करने का अवसर भी मिलना चाहिए। सरकार का मानना है कि 21 वर्ष की आयु में युवा उच्च शिक्षा पूरी कर चुके होते हैं, नौकरी और कारोबार की जिम्मेदारियां संभालते हैं। ऐसे में यदि वे देश के भविष्य को लेकर अपनी सोच रखते हैं, तो उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उम्मीदवार बनने का भी अधिकार मिलना चाहिए। विधानसभा का Special Session क्यों बुलाया जा रहा है? तेलंगाना सरकार इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप देने के लिए विधानसभा और विधान परिषद का विशेष सत्र बुला रही है। इस सत्र में चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष करने संबंधी प्रस्ताव पारित किया जाएगा। प्रस्ताव पास होने के बाद इसे केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर इस बदलाव पर विचार किया जा सके। क्या सिर्फ राज्य सरकार फैसला ले सकती है? इस सवाल का जवाब है—नहीं। लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु भारतीय संविधान और Representation of the People Act के तहत तय होती है। इसलिए किसी भी राज्य के पास इसे अपने स्तर पर बदलने का अधिकार नहीं है। यदि यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तो केंद्र सरकार को कानून में संशोधन का प्रस्ताव लाना होगा। इसके बाद संसद की मंजूरी मिलने पर ही नया नियम पूरे देश में लागू हो सकेगा। युवाओं के लिए कितना बड़ा बदलाव होगा? अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो 21 से 24 वर्ष की आयु के लाखों युवाओं को पहली बार विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने का अवसर मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे राजनीतिक दलों में युवा नेतृत्व को बढ़ावा मिल सकता है। नई पीढ़ी के लोग अपने विचार सीधे लोकतांत्रिक मंच पर रख सकेंगे और नीति निर्माण में उनकी भागीदारी बढ़ेगी। क्या इस प्रस्ताव पर सभी सहमत हैं? इस पहल को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। एक पक्ष का मानना है कि युवाओं को कम उम्र में राजनीति में आने का अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि वे नई सोच और ऊर्जा लेकर आते हैं। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जनप्रतिनिधि बनने के लिए अनुभव भी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा और सहमति जरूरी होगी। अब आगे क्या होगा? सबसे पहले तेलंगाना विधानसभा के विशेष सत्र में प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इसके बाद यह केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। यदि केंद्र इस पर सकारात्मक रुख अपनाता है, तो संसद में संबंधित कानूनों में संशोधन का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल यह प्रस्ताव देशभर में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर नई बहस छेड़ चुका है। आने वाले समय में केंद्र सरकार का फैसला तय करेगा कि क्या 21 साल की उम्र में चुनाव लड़ने का सपना देश के लाखों युवाओं के लिए हकीकत बन पाएगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Mann Ki Baat

Mann Ki Baat 2026: PM Modi ने जवानों, युवाओं और खिलाड़ियों का बढ़ाया हौसला, Har Ghar Tiranga की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’(Mann Ki Baat) के 136वें एपिसोड में देशवासियों को कई अहम संदेश दिए। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर उन्होंने देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और हर नागरिक से ‘Har Ghar Tiranga’ अभियान से जुड़ने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1, कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा ले रहे भारतीय खिलाड़ियों, युवाओं के इनोवेशन और आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धियों पर भी विस्तार से बात की। प्रधानमंत्री का पूरा संबोधन राष्ट्रभक्ति, विज्ञान, खेल और जनभागीदारी के इर्द-गिर्द केंद्रित रहा। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके नागरिक हैं और जब पूरा देश एक लक्ष्य के साथ आगे बढ़ता है, तो बड़ी से बड़ी उपलब्धि हासिल करना संभव हो जाता है। Har Ghar Tiranga अभियान से जुड़ने की अपील पीएम मोदी ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ आज केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक की भावना बन चुका है। उन्होंने लोगों से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों, दुकानों, कार्यालयों और संस्थानों पर तिरंगा फहराने की अपील की। उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आशाओं, सपनों और बलिदानों का प्रतीक है। उन्होंने नागरिकों से सोशल मीडिया पर भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया ताकि देशभक्ति का यह संदेश हर घर तक पहुंचे। कारगिल के वीरों को किया नमन कारगिल विजय दिवस का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय सेना के अदम्य साहस और शौर्य को याद किया। उन्होंने कहा कि कारगिल युद्ध में भारतीय सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में भी देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि देश हमेशा अपने वीर जवानों का ऋणी रहेगा और नई पीढ़ी को उनके त्याग, साहस और राष्ट्रप्रेम की कहानियों से प्रेरणा लेनी चाहिए। Vikram-1 की सफलता पर जताया गर्व प्रधानमंत्री ने भारत के पहले निजी ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल Vikram-1 का विशेष उल्लेख करते हुए इसे भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में स्पेस सेक्टर में किए गए सुधारों का सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहा है। निजी कंपनियां और भारतीय स्टार्टअप्स अंतरिक्ष तकनीक में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे भारत वैश्विक स्पेस इंडस्ट्री में मजबूत पहचान बना रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि यह सफलता केवल वैज्ञानिकों की नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की भी है जो नए विचारों और तकनीक के दम पर देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। Commonwealth Games में भारतीय खिलाड़ियों को दी शुभकामनाएं प्रधानमंत्री ने कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा ले रहे भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश को अपने खिलाड़ियों पर गर्व है। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ी लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और उनका संघर्ष करोड़ों युवाओं को प्रेरित करता है। उन्हें विश्वास है कि भारतीय दल इस बार भी देश का नाम रोशन करेगा। युवाओं और Innovation पर दिया विशेष जोर अपने संबोधन में पीएम मोदी ने युवाओं से विज्ञान, तकनीक, स्टार्टअप और इनोवेशन के क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज भारत का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बन रहा है। देश के स्टार्टअप्स नई तकनीक और नए विचारों के साथ दुनिया में भारत की पहचान मजबूत कर रहे हैं। यही युवा विकसित भारत के सपने को साकार करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएंगे। जनभागीदारी से बनेगा विकसित भारत प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण, आत्मनिर्भर भारत और Har Ghar Tiranga जैसे अभियान तभी सफल होते हैं, जब उनमें आम नागरिक पूरी भागीदारी निभाते हैं। उन्होंने लोगों से देशहित के हर अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने की अपील की। PM Modi के संबोधन की बड़ी बातें हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Rajnath Singh

Kargil Vijay Diwas: Rajnath Singh ने शहीदों को किया नमन, Pakistan को चेतावनी- सेना पूरी तरह तैयार

कारगिल विजय दिवस के अवसर पर लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल में देश ने अपने वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh ) ने कारगिल युद्ध के नायकों को नमन करते हुए पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत आज Innovation, आत्मनिर्भरता और आधुनिक तकनीक के सहारे भविष्य का निर्माण कर रहा है, जबकि पाकिस्तान अब भी घुसपैठ और आतंकवाद के रास्ते पर चल रहा है। रक्षामंत्री ने कहा कि भारत शांति का समर्थक है, लेकिन यदि कोई देश उसकी संप्रभुता या सुरक्षा को चुनौती देता है तो भारतीय सेनाएं हर मोर्चे पर जवाब देने के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार हैं। कारगिल की धरती से वीर जवानों को श्रद्धांजलि 26 जुलाई को मनाए जाने वाले कारगिल विजय दिवस पर राजनाथ सिंह ने द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल पहुंचकर 1999 के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने पुष्पचक्र अर्पित कर देश के उन वीर सपूतों को याद किया, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में दुश्मन को पीछे हटाकर भारत का तिरंगा बुलंद रखा। उन्होंने कहा कि कारगिल के शहीदों का साहस और बलिदान हर भारतीय के लिए प्रेरणा है और देश उनके योगदान को कभी नहीं भूल सकता। ‘भारत Innovation पर आगे बढ़ रहा, पाकिस्तान घुसपैठ में उलझा’ अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने भारत और पाकिस्तान की सोच का अंतर भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आज भारत रक्षा उत्पादन, नई तकनीक और आत्मनिर्भरता पर तेजी से काम कर रहा है। वहीं पाकिस्तान अब भी सीमा पार घुसपैठ और आतंकवाद जैसी गतिविधियों के जरिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश करता है। उन्होंने कहा कि भारत विकास और शांति की नीति पर आगे बढ़ रहा है, लेकिन यदि कोई देश देशहित के खिलाफ कदम उठाता है तो भारतीय सेना हर चुनौती का डटकर सामना करेगी। सेना की ताकत बढ़ाने पर सरकार का फोकस राजनाथ सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार भारतीय सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक हथियारों और नई तकनीकों से लैस करने के लिए लगातार काम कर रही है। रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि भारत भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का मजबूती से सामना कर सके। उन्होंने कहा कि मजबूत सेना ही सुरक्षित भारत की सबसे बड़ी ताकत है और सरकार सैनिकों की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। कारगिल विजय दिवस क्यों है खास? हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1999 में भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत कारगिल की ऊंची चोटियों पर कब्जा जमाए पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर जीत हासिल की थी। इस युद्ध में कई जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी, जिनके साहस और बलिदान की याद में यह दिन पूरे देश में सम्मान और गर्व के साथ मनाया जाता है। देशभर में शहीदों को किया गया याद कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देश के कई हिस्सों में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्कूलों, सैन्य संस्थानों और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में शहीदों को नमन किया गया। लोगों ने भारतीय सेना के साहस और समर्पण को याद करते हुए राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Monsoon

Monsoon Alert: 3 राज्यों में Red Alert जारी, Assam Flood से 66 मौतें; Himachal की 134 सड़कें बंद

देशभर में मानसून (Monsoon) एक बार फिर कहर बरपा रहा है। पश्चिम भारत से लेकर पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों तक लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा के कई जिलों में अत्यधिक बारिश की आशंका जताते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं, असम में बाढ़ की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है, जबकि हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन के कारण सैकड़ों सड़कें बंद हैं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है। Gujarat, Maharashtra और Odisha में Heavy Rain का Red Alert IMD के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले 24 से 48 घंटे गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा के लिए बेहद अहम हैं। इन राज्यों के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश होने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। राज्य सरकारों ने जिला प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील इलाकों में राहत और बचाव दलों को पहले से तैनात किया गया है, जबकि लोगों से अनावश्यक यात्रा न करने की सलाह दी गई है। Assam Flood: 7 लाख लोग प्रभावित, 66 लोगों की मौत असम में मानसून सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। लगातार बारिश के चलते कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे बड़ी आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 7 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं और अब तक 66 लोगों की मौत हो चुकी है। हजारों परिवारों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है, जबकि कई गांवों का संपर्क अब भी टूटा हुआ है। राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने में जुटी हैं। Himachal Pradesh में Landslide से 134 सड़कें बंद हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही बारिश ने पहाड़ी इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई स्थानों पर भूस्खलन होने से 134 सड़कें बंद हो गई हैं। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें मलबा हटाकर सड़कें दोबारा चालू करने की कोशिश कर रही हैं। प्रशासन ने लोगों से मौसम सामान्य होने तक पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा टालने की अपील की है। कई राज्यों में Alert Mode पर प्रशासन लगातार बिगड़ते मौसम को देखते हुए गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा, असम और हिमाचल प्रदेश में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। NDRF और SDRF की टीमें संवेदनशील इलाकों में तैनात हैं और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता अभी कुछ दिन और बनी रह सकती है। ऐसे में नागरिकों को मौसम विभाग के आधिकारिक अपडेट पर नजर रखने और अफवाहों से बचने की सलाह दी गई है। क्या करें और क्या न करें? हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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