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Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sawan

Sawan Somwar: उज्जैन से Devghar तक गूंजा हर-हर महादेव, Kanwar Yatra को लेकर खास इंतजाम

सावन (Sawan) के पहले सोमवार पर सोमवार की सुबह से ही देशभर के शिवालयों में हर-हर महादेव के जयकारे गूंज रहे हैं। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों का रुख कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी को लेकर खास उत्साह है, तो झारखंड के देवघर में कांवड़ियों की लंबी कतार ने शहर की तस्वीर ही बदल दी है। वहीं उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में Kanwar Yatra को देखते हुए स्कूल-कॉलेज बंद रखने का फैसला लिया गया है। उज्जैन में Mahakal की सवारी को लेकर उत्साह सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन का माहौल पूरी तरह शिवमय नजर आ रहा है। Mahakaleshwar Temple में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही बनी हुई है। सोमवार को बाबा महाकाल की पारंपरिक सवारी निकाली जाएगी। इसे लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की तैयारियां की हैं। सवारी के रास्ते में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। बाबा महाकाल की सवारी उज्जैन की धार्मिक परंपरा का अहम हिस्सा है। सावन में इसे देखने और बाबा के दर्शन के लिए दूर-दूर से लोग शहर पहुंचते हैं। Devghar में 5 KM तक पहुंची Kanwariyon की लाइन झारखंड के देवघर में सावन के पहले सोमवार पर भक्तों की भीड़ अपने चरम पर पहुंचती दिखाई दे रही है। Baba Baidyanath Dham में जल चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में कांवड़िए पहुंच रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कांवड़ियों की कतार करीब 5 किलोमीटर तक लंबी हो गई है। कई श्रद्धालु घंटों इंतजार करने के बाद बाबा बैद्यनाथ के दर्शन कर रहे हैं। सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर पहुंचने वाले कांवड़ियों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। कतार में खड़े श्रद्धालुओं के बीच थकान के बावजूद उत्साह नजर आ रहा है। हर तरफ बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। Muzaffarnagar में School-College बंद उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में Kanwar Yatra को देखते हुए स्कूल और कॉलेज बंद रखने का निर्णय लिया गया है। कांवड़ मार्ग पर श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह कदम उठाया है। कांवड़ यात्रा के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़कों पर श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है। ऐसे में कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव भी बढ़ जाता है। स्कूल-कॉलेज बंद रखने का उद्देश्य विद्यार्थियों की आवाजाही कम करना और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना है। शिव मंदिरों में सुबह से लंबी कतारें सावन के पहले सोमवार का असर सिर्फ उज्जैन, देवघर और मुजफ्फरनगर तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में शिव मंदिरों के बाहर सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें नजर आ रही हैं। श्रद्धालु बेलपत्र, फूल और जल लेकर भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। कई मंदिरों में विशेष पूजा और अभिषेक का आयोजन किया गया है। सावन के सोमवार को लेकर भक्तों में खास आस्था रहती है, इसलिए सुबह से ही मंदिरों में रौनक देखने को मिल रही है। आस्था के साथ प्रशासन की भी परीक्षा सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए प्रशासन के सामने भीड़ संभालने, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रहती है। उज्जैन और देवघर जैसे प्रमुख धार्मिक शहरों में श्रद्धालुओं की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। फिलहाल सावन के पहले सोमवार पर देश के कई हिस्सों में एक ही तस्वीर दिखाई दे रही है—हाथों में कांवड़, जुबां पर भोलेनाथ का नाम और मंदिरों में दर्शन के लिए लंबी कतारें। आस्था के इस माहौल में महाकाल की सवारी और देवघर की कांवड़ यात्रा श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rath Yatra 2026

Rath Yatra 2026: अहमदाबाद में बदले सुरक्षा इंतजाम, हाथियों के पैर बांधकर निकाली यात्रा; Puri में निभेगी सदियों पुरानी रस्म

Rath Yatra 2026: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा देशभर में आस्था और उत्साह के साथ मनाई जा रही है। गुजरात के अहमदाबाद और ओडिशा के पुरी में इस बार भी लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए उमड़े। हालांकि अहमदाबाद की रथयात्रा इस बार एक खास वजह से rerचर्चा में रही। पिछले साल हाथियों के बेकाबू होने की घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यात्रा में शामिल हाथियों के पैरों को हल्के बंधन में रखा। दूसरी ओर पुरी में सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार गजपति महाराज सोने की झाड़ू से भगवान के रथों की सफाई करेंगे। पिछले साल की घटना के बाद बदली तैयारी अहमदाबाद की जगन्नाथ रथयात्रा देश की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक रथयात्राओं में से एक मानी जाती है। लेकिन वर्ष 2025 की यात्रा के दौरान तीन हाथी अचानक बेकाबू हो गए थे। भीड़ में अफरा-तफरी मच गई थी और कई श्रद्धालु घायल हुए थे। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठे थे। इसी अनुभव से सीख लेते हुए इस बार प्रशासन, वन विभाग और पशु चिकित्सकों ने मिलकर विस्तृत सुरक्षा योजना तैयार की। हाथियों के आगे और पीछे के पैरों को हल्की रस्सियों से नियंत्रित रखा गया ताकि वे भीड़ में अचानक तेज़ी से न दौड़ सकें। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल एहतियात के तौर पर उठाया गया है और इसमें पशुओं की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया। सुरक्षा व्यवस्था रही हाई अलर्ट पर रथयात्रा के पूरे मार्ग पर हजारों पुलिसकर्मी तैनात किए गए। ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी, कंट्रोल रूम और क्विक रिस्पॉन्स टीम के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी गई। हाथियों के साथ अनुभवी महावत, वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सक भी लगातार मौजूद रहे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह मेडिकल कैंप, एम्बुलेंस, पेयजल केंद्र और हेल्प डेस्क बनाए गए। ट्रैफिक को भी पहले से तय डायवर्जन प्लान के अनुसार संचालित किया गया ताकि यात्रा बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके। Puri में निभेगी ‘छेरा पहंरा’ की अनोखी परंपरा ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सदियों पुरानी संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। यहां रथयात्रा के दौरान गजपति महाराज ‘छेरा पहंरा’ नामक विशेष अनुष्ठान करते हैं। इस रस्म में वे सोने की झाड़ू से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों की सफाई करते हैं और चंदन मिश्रित पवित्र जल का छिड़काव करते हैं। यह परंपरा इस बात का संदेश देती है कि भगवान के सामने हर व्यक्ति समान है। चाहे वह राजा हो या आम भक्त, सभी भगवान के सेवक हैं। लाखों श्रद्धालुओं ने लगाए जयकारे अहमदाबाद और पुरी दोनों शहरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भगवान जगन्नाथ के जयघोष के बीच भक्तों ने रथों को खींचकर अपनी आस्था व्यक्त की। पूरे वातावरण में भक्ति, उत्साह और पारंपरिक संस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। आस्था के साथ सुरक्षा का भी संदेश इस बार की रथयात्रा ने दो महत्वपूर्ण संदेश दिए। पहला, धार्मिक परंपराओं का सम्मान और दूसरा, श्रद्धालुओं की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं। अहमदाबाद में पिछले साल की घटना से सीख लेकर किए गए इंतजाम और पुरी में सदियों से चली आ रही परंपराओं का निर्वहन, दोनों ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। यही वजह है कि जगन्नाथ रथयात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का भी प्रतीक मानी जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jagannath Rath Yatra

Jagannath Rath Yatra 2026: Tradition बनाम अलग आयोजन, ISKCON को लेकर पुरी राजा ने उठाई आवाज

भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक Jagannath Puri Rath Yatra को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है। पुरी के राजा ने ISKCON (International Society for Krishna Consciousness) की ओर से अलग समय पर रथयात्रा आयोजित किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस मामले में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भगवान जगन्नाथ की सदियों पुरानी परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं की रक्षा करने की अपील की है। पुरी राजा का कहना है कि Jagannath Rath Yatra सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। इसलिए इससे जुड़े नियमों और परंपराओं का पालन बेहद जरूरी है। ISKCON की अलग रथयात्रा पर क्यों उठा विवाद? ISKCON दुनिया के कई देशों में भगवान कृष्ण और भगवान जगन्नाथ से जुड़े धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करता है। संस्था की ओर से कई जगहों पर Rath Yatra का आयोजन भी किया जाता है। हालांकि, पुरी की मुख्य रथयात्रा की अपनी अलग धार्मिक मान्यता और परंपरागत व्यवस्था है। पुरी राजा ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अलग-अलग समय पर रथयात्रा आयोजित होने से भगवान जगन्नाथ की परंपरा को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि इस विषय पर ध्यान दिया जाए और सदियों से चली आ रही धार्मिक व्यवस्था को सुरक्षित रखा जाए। President और PM को लिखा पत्र, परंपरा बचाने की अपील पुरी राजा की ओर से लिखे गए पत्र में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़ी परंपराओं की गरिमा बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि पुरी की रथयात्रा केवल ओडिशा की पहचान नहीं है, बल्कि देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों भक्तों की भावनाओं से जुड़ी हुई है। ऐसे में इससे जुड़े किसी भी बदलाव को संवेदनशीलता के साथ देखा जाना चाहिए। Jagannath Rath Yatra का है ऐतिहासिक महत्व पुरी की जगन्नाथ रथयात्रा भारत के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक आयोजनों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए पुरी पहुंचते हैं। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर की ओर जाते हैं। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाई जाती है। आस्था और Tradition के बीच बढ़ी बहस Jagannath Puri Rath Yatra से जुड़ा यह विवाद एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि धार्मिक परंपराओं और आधुनिक आयोजनों के बीच संतुलन कितना जरूरी है। जहां ISKCON दुनिया भर में भगवान जगन्नाथ और कृष्ण भक्ति का प्रचार करता है, वहीं पुरी की पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े लोग मूल परंपराओं और धार्मिक नियमों को बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि सरकार और संबंधित पक्ष इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल, Jagannath Puri Rath Yatra Controversy ने धार्मिक और सामाजिक स्तर पर नई चर्चा शुरू कर दी है।
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Yogini Ekadashi

Yogini Ekadashi 2026: दीपदान के ये 5 आसान उपाय, घर में सुख-समृद्धि आने की है मान्यता

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने वाली प्रमुख एकादशियों में गिना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं तथा सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी की शाम घर के कुछ खास स्थानों पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आर्थिक परेशानियां दूर होने की प्रार्थना की जाती है। अगर आप भी इस शुभ अवसर पर पूजा-पाठ कर रहे हैं, तो जानिए वे पांच स्थान जहां दीपक जलाना शुभ माना जाता है। Yogini Ekadashi 2026 पर इन 5 जगहों पर जरूर जलाएं दीपक 1. मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं घर का मुख्य द्वार सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि योगिनी एकादशी की शाम यहां घी या तिल के तेल का दीपक जलाने से घर में शुभता का आगमन होता है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। 2. तुलसी के पौधे के सामने तुलसी का पौधा भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना गया है। योगिनी एकादशी के दिन शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाकर पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आने की मान्यता है। कई परिवार इस दिन तुलसी की परिक्रमा भी करते हैं। 3. पूजा घर में भगवान विष्णु के समक्ष पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। 4. रसोईघर में वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोईघर माता अन्नपूर्णा का स्थान माना जाता है। यहां दीपक जलाने की परंपरा को अन्न और धन की वृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इससे घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। 5. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) घर का उत्तर-पूर्व भाग यानी ईशान कोण सबसे पवित्र दिशा मानी जाती है। इस स्थान पर दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के लिए सुख, शांति एवं आर्थिक उन्नति की कामना की जाती है। योगिनी एकादशी पर पूजा करते समय रखें इन बातों का ध्यान दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी के दिन अन्न, वस्त्र, फल, जल और दक्षिणा का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए दान और सेवा का विशेष फल प्राप्त होता है तथा जीवन की कई बाधाएं दूर होने की कामना की जाती है। क्या सच में दूर होती है आर्थिक तंगी? धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में योगिनी एकादशी पर दीपदान, व्रत और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि, इन मान्यताओं का आधार आस्था है। इसे धार्मिक विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए। नियमित पूजा, सकारात्मक सोच, मेहनत और सही आर्थिक योजना के साथ जीवन में सफलता के अवसर और भी मजबूत हो सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Adhik Maas

Adhik Maas 2026: भक्ति का महीना शुरू, जानें शुभ मंत्र और धार्मिक महत्व

आज से हिंदू पंचांग का सबसे पवित्र और खास समय Adhik Maas 2026 (Purushottam Maas) शुरू हो गया है। इसे सामान्य भाषा में मलमास भी कहा जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कोई अशुभ समय नहीं, बल्कि भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत शुभ महीना माना जाता है। इस महीने को “पुरुषोत्तम मास” इसलिए कहा जाता है क्योंकि स्वयं भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम देकर सम्मानित किया था। Adhik Maas 2026 क्या है और क्यों खास माना जाता है? अधिकमास हर 2–3 साल में आता है, जब चंद्र और सौर कैलेंडर के बीच अंतर को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब किसी देवता ने इस अतिरिक्त महीने को स्वीकार नहीं किया, तब भगवान विष्णु ने इसे अपनाकर इसे भक्ति और साधना का सर्वोच्च समय बना दिया। यही कारण है कि इस महीने में भौतिक कार्यों से ज्यादा आध्यात्मिक गतिविधियों को महत्व दिया जाता है। Purushottam Maas में क्या करना चाहिए (Do’s) इस पूरे महीने में किए गए अच्छे कर्म कई गुना फल देने वाले माने जाते हैं: अधिकमास में क्या नहीं करना चाहिए (Don’ts) इस पवित्र अवधि में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है: Adhik Maas 2026 के शक्तिशाली मंत्र इस महीने में मंत्र जप का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इससे मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। 1. विष्णु मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”रोज 108 बार जप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। 2. महामंत्र हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरेहरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे 3. शांति मंत्र “शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्…” Adhik Maas 2026 का महत्व (Human Touch) आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में यह महीना एक तरह से “pause” लेने का मौका देता है। भागदौड़ के बीच कुछ समय अपने मन, विचार और आध्यात्म से जुड़ने का अवसर मिलता है। कई लोग इस महीने में व्रत रखते हैं, पूजा-पाठ बढ़ाते हैं और अपने जीवन में सरलता लाने की कोशिश करते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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वट सावित्री

वट सावित्री 2026: सुहागिन महिलाओं में दिखी आस्था, मंदिरों में उमड़ी भीड़

ज्येष्ठ अमावस्या के मौके पर शनिवार को देशभर में वट सावित्री व्रत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिरों और बरगद के पेड़ों के पास सुहागिन महिलाओं की भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखकर वट वृक्ष की पूजा की। इस दौरान महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना की, बरगद के पेड़ के चारों ओर धागा बांधा और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी। कई जगहों पर सामूहिक पूजा का आयोजन भी किया गया, जहां महिलाओं ने पूरे विधि-विधान से व्रत किया। क्यों खास माना जाता है Vat Savitri Vrat? हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत को सुहाग और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, प्रेम और दृढ़ निश्चय से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि बरगद का पेड़ त्रिदेवों का स्वरूप होता है। इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में भगवान विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास माना जाता है। यही कारण है कि इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व होता है। परिक्रमा के समय बोलें ये शुभ मंत्र बरगद के पेड़ की परिक्रमा करते समय महिलाएं इस मंत्र का जाप करती हैं— “वट वृक्ष त्वं देववृक्षः त्वं च विष्णुस्वरूपधृक्।पति आयुः प्रदेहि त्वं नमस्ते वटवृक्षाय॥” मान्यता है कि श्रद्धा से इस मंत्र का जाप करने पर वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। ऐसे की जाती है वट सावित्री की पूजा बाजारों में भी दिखी रौनक वट सावित्री व्रत को लेकर पूजा सामग्री, फल, मिठाई और सजावटी सामान की दुकानों पर भी अच्छी भीड़ देखने को मिली। महिलाओं ने पूजा के लिए विशेष रूप से लाल और पीले रंग की सामग्री खरीदी। कई जगहों पर बरगद के पेड़ों को फूलों और रंगोली से सजाया गया। परिवार और रिश्तों से जुड़ा त्योहार वट सावित्री व्रत सिर्फ धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास, प्रेम और समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। बदलते दौर में भी यह पर्व भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को मजबूती से जोड़कर रखे हुए है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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अक्षय तृतीया

अक्षय तृतीया 2026 Gold नहीं, ये 1 दान दिलाएगा सुख-समृद्धि और Good Luck

अक्षय तृतीया का दिन हिंदू धर्म में बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन किया गया हर अच्छा काम—चाहे वो पूजा हो, दान हो या नई शुरुआत—उसका फल कभी खत्म नहीं होता। यही वजह है कि लोग इस दिन को अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के मौके के रूप में देखते हैं। इस साल भी अक्षय तृतीया को लेकर लोगों में खास उत्साह है। जहां एक तरफ बाजारों में सोना-चांदी खरीदने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान-पुण्य करने का महत्व भी काफी बढ़ जाता है। क्यों खास है “Ann Daan”? प्रसिद्ध संत Premanand Maharaj का कहना है कि अगर आप अक्षय तृतीया पर सिर्फ एक काम करना चाहते हैं, तो वो है अन्न दान। उनके अनुसार, जरूरतमंद को भोजन या अनाज देना सबसे बड़ा पुण्य है। उनका मानना है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से गेहूं, चावल या दाल का दान करता है, उसके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती। ये सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि इंसानियत का सबसे सरल और असरदार तरीका भी है। कैसे करें ये आसान उपाय? अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी की पूजा करें। इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार अन्न का दान करें। आप चाहें तो किसी गरीब परिवार को राशन दे सकते हैं या किसी भूखे व्यक्ति को भोजन करा सकते हैं। ध्यान रखने वाली बात ये है कि दान दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे मन से किया जाए—तभी उसका सही फल मिलता है। सिर्फ सोना खरीदना ही नहीं, ये भी करें अक्सर लोग अक्षय तृतीया को सिर्फ गोल्ड खरीदने से जोड़कर देखते हैं, लेकिन इसका असली महत्व दान और अच्छे कर्मों में छिपा है। इस दिन: दिल से किया छोटा काम, बड़ा असर अक्षय तृतीया हमें ये सिखाती है कि छोटे-छोटे अच्छे काम भी जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अगर आप इस दिन किसी की मदद करते हैं, तो उसका असर सिर्फ सामने वाले पर ही नहीं, बल्कि आपके जीवन पर भी पड़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Ram Navami

Ram Navami 2026 सही Date,शुभ मुहूर्त और Puja Samagri पूरी जानकारी

राम नवमी (Ram Navami) हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह दिन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और भक्त इस दिन व्रत, पूजा और आरती करके भगवान की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। साल 2026 में राम नवमी की तारीख को लेकर लोगों के बीच थोड़ी कन्फ्यूजन है कि यह 26 मार्च को है या 27 मार्च को। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं। Ram Navami 2026 Date: 26 या 27 मार्च? वर्ष 2026 में राम नवमी 26 मार्च, गुरुवार को पड़ रही है। कई लोग सोचते हैं कि 27 मार्च को मनाना चाहिए, लेकिन हिंदू पंचांग के अनुसार जिस दिन मध्याह्न (दोपहर) में नवमी तिथि आती है, उसी दिन राम नवमी मनाई जाती है, क्योंकि भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर में हुआ था। इस कारण 26 मार्च ही मुख्य और शुभ दिन माना जाता है। Shubh Muhurat for Ram Navami 2026 राम नवमी पूजा का सबसे महत्वपूर्ण समय मध्याह्न होता है। इस समय भगवान श्रीराम की पूजा और अभिषेक करना सबसे शुभ माना जाता है। Ram Navami Puja Samagri List राम नवमी की पूजा में निम्न सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इन्हें पहले से तैयार करना शुभ माना जाता है: मुख्य सामग्री Ram Navami Puja Vidhi (संक्षेप में) हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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शैलपुत्री

चैत्र नवरात्रि 2026 Day 1 शैलपुत्री माता की आराधना, व्रत और शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि 2026 का पहला दिन 12 मार्च को मनाया जाएगा। यह नवरात्रि वसंत ऋतु के आगमन और माँ दुर्गा के नौ रूपों की आराधना का शुभ समय है। हर दिन माँ के अलग रूप की पूजा की जाती है, और पहले दिन शैलपुत्री माता की उपासना होती है। शैलपुत्री माता – पहला दिन का महत्व ‘शैलपुत्री’ का अर्थ है “पर्वत की कन्या”। माता शैलपुत्री भगवान शिव और पार्वती की पुत्री हैं। उनके वाहन बैल हैं और हाथ में त्रिशूल और कमल धारण है। शैलपुत्री माता धैर्य, साहस और मानसिक स्थिरता का प्रतीक हैं। उनके आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है। शैलपुत्री माता का पूजन और मंत्र व्रत और अनुष्ठान शैलपुत्री माता के दिन विशेष सुझाव हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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गांधीनगर में बड़ा हादसा: निर्माणाधीन इमारत पर गिरी क्रेन, 10-15 मजदूरों के दबे होने की आशंका

गांधीनगर। गुजरात के गांधीनगर के पास कुडासन इलाके में बुधवार को एक बड़ा हादसा हो गया। निर्माणाधीन इमारत पर अचानक भारी क्रेन गिर गई। हादसे के समय नीचे काम कर रहे करीब 10 से 15 मजदूरों के मलबे और क्रेन के भारी हिस्सों के नीचे दबे होने की आशंका है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंच गईं। मलबे में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। मलबा हटाने के लिए दूसरी क्रेन बुलाई गई क्रेन और निर्माण सामग्री के भारी मलबे को हटाने के लिए मौके पर एक और क्रेन बुलाई गई है। बचाव दल मलबे के नीचे दबे मजदूरों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दमकल की चार से ज्यादा गाड़ियां मौके पर पहुंचकर राहत कार्य में जुटी हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस भी घटनास्थल पर तैनात की गई हैं। फिलहाल हादसे में कितने लोग घायल हुए हैं या किसी की मौत हुई है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। नगर आयुक्त और डिप्टी CM मौके पर पहुंचे हादसे की गंभीरता को देखते हुए गांधीनगर नगर आयुक्त और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों की निगरानी में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे मजदूरों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है। फिलहाल बचाव अभियान जारी है और हादसे से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

Apple iPhone 18 Pro और Pro Max लॉन्च, A20 Pro चिप और 45 घंटे तक की बैटरी; पहली बार फोल्डेबल iPhone भी

कैलिफोर्निया। Apple ने अपने नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने दोनों प्रीमियम मॉडल्स में नए डिजाइन, A20 Pro चिप, बेहतर AI फीचर्स और लंबी बैटरी लाइफ पर खास जोर दिया है। लॉन्च इवेंट नए CEO जॉन टर्नस के नेतृत्व में Apple का पहला बड़ा प्रोडक्ट प्रेजेंटेशन भी रहा। दोनों मॉडल चार कलर ऑप्शन में पेश किए गए हैं—डीप ब्लैक, सिल्वर, ग्लेशियर और बरगंडी। iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत 1,199 डॉलर और iPhone 18 Pro Max की 1,299 डॉलर रखी गई है। दोनों के बेस मॉडल में 256GB स्टोरेज दी गई है। A20 Pro चिप से मिलेगा तेज परफॉर्मेंस iPhone 18 Pro सीरीज में नया A20 Pro प्रोसेसर दिया गया है। Apple के मुताबिक यह 2nm टेक्नोलॉजी पर आधारित नई आर्किटेक्चर वाली चिप है। इसमें 6-कोर CPU और नया GPU दिया गया है, जबकि कंपनी ने GPU परफॉर्मेंस में करीब 40 फीसदी तक सुधार का दावा किया है। Apple Intelligence और Siri को भी नए हार्डवेयर के साथ ज्यादा सक्षम बनाया गया है। Siri में AI क्षमताओं और अधिक नैचुरल वॉइस अनुभव पर जोर दिया गया है। कंपनी का कहना है कि डिवाइस पर AI प्रोसेसिंग के साथ प्राइवेसी को भी प्राथमिकता दी गई है। बैटरी लाइफ में बड़ा अपग्रेड iPhone 18 Pro और Pro Max में अब तक की सबसे लंबी iPhone बैटरी लाइफ में से एक मिलने का दावा किया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक iPhone 18 Pro करीब 24 घंटे और Pro Max करीब 30 घंटे तक सामान्य उपयोग में चल सकता है। वहीं वीडियो प्लेबैक में Pro मॉडल करीब 36 घंटे और Pro Max करीब 45 घंटे तक का बैकअप दे सकता है। Pro Max का 45 घंटे का वीडियो प्लेबैक इस सीरीज की सबसे बड़ी बैटरी उपलब्धियों में से एक है। नई फास्ट चार्जिंग तकनीक भी दी गई है। कंपनी के अनुसार फोन करीब 15 मिनट की चार्जिंग में 50 फीसदी तक चार्ज हो सकता है। कैमरा सिस्टम में भी बड़ा बदलाव iPhone 18 Pro सीरीज में कैमरा सिस्टम को भी अपग्रेड किया गया है। मुख्य कैमरे में 48MP सेंसर के साथ डायनेमिक/वेरिएबल अपर्चर दिया गया है, जिससे अलग-अलग रोशनी की परिस्थितियों में फोटो क्वालिटी और लो-लाइट परफॉर्मेंस बेहतर करने में मदद मिलेगी। वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए भी नए प्रो कंट्रोल और 4K Dolby Vision HDR टाइम-लैप्स जैसे फीचर्स जोड़े गए हैं। Apple का पहला फोल्डेबल iPhone भी लॉन्च Apple के इस इवेंट की सबसे बड़ी खासियत कंपनी का पहला फोल्डेबल iPhone भी रहा। यह Apple के स्मार्टफोन डिजाइन में लंबे समय बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। Reuters के मुताबिक फोल्डेबल iPhone की कीमत 2,000 डॉलर से ज्यादा हो सकती है और कंपनी ने इसे लंबे समय तक इंजीनियरिंग चुनौतियों पर काम करने के बाद पेश किया है। इस साल Apple का फोकस प्रीमियम iPhone मॉडल्स और फोल्डेबल डिवाइस पर ज्यादा रहा है। बेस iPhone मॉडल के लॉन्च शेड्यूल में भी बदलाव किया गया है। नए CEO जॉन टर्नस का पहला बड़ा प्रेजेंटेशन 1 सितंबर को Tim Cook के बाद Apple के CEO बने John Ternus के लिए यह पहला बड़ा प्रोडक्ट लॉन्च प्रेजेंटेशन रहा। Ternus इससे पहले Apple के हार्डवेयर प्रमुख के तौर पर काम कर चुके हैं। Apple के इस इवेंट में iPhone के अलावा नए वियरेबल्स और अन्य प्रोडक्ट्स की घोषणाएं भी की गईं। कंपनी के लिए यह लॉन्च नए CEO के नेतृत्व में उसकी अगली प्रोडक्ट रणनीति की शुरुआत के तौर पर भी अहम माना जा रहा है।

दक्षिण अफ्रीका ने नामीबिया को 99 रन से हराया, डेब्यू में जॉर्डन हरमन ने जड़ा 150 रन का तूफानी शतक

विंडहोक। दक्षिण अफ्रीका ने नामीबिया के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज का पहला मुकाबला 99 रन से जीत लिया। दक्षिण अफ्रीका ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 348/6 रन बनाए। जवाब में बारिश से दो बार प्रभावित नामीबिया की टीम 38 ओवर में 162/8 रन ही बना सकी। मुकाबले का फैसला DLS मेथड से हुआ। दक्षिण अफ्रीका की जीत के हीरो डेब्यू कर रहे जॉर्डन हरमन रहे, जिन्होंने शानदार 150 रन की पारी खेली। वहीं प्रेनेलन सब्रायेन ने करियर की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी करते हुए चार विकेट झटके। सीरीज का दूसरा वनडे 11 सितंबर को विंडहोक में खेला जाएगा। डेब्यू पर 150 रन, हरमन ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड जॉर्डन हरमन वनडे डेब्यू पर 150 रन बनाने वाले संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा स्कोर करने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। इससे पहले मैथ्यू ब्रीट्जके ने भी अपने वनडे डेब्यू पर 150 रन की पारी खेली थी। हरमन दक्षिण अफ्रीका की ओर से वनडे डेब्यू पर शतक लगाने वाले पांचवें बल्लेबाज भी बन गए। उनसे पहले कॉलिन इंग्राम, टेम्बा बावुमा, रीजा हेंड्रिक्स और मैथ्यू ब्रीट्जके यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। हरमन ने टोनी डी जॉर्जी के साथ दूसरे विकेट के लिए 190 रन की साझेदारी की। डी जॉर्जी ने 84 गेंदों पर 72 रन बनाए और वनडे करियर का तीसरा अर्धशतक पूरा किया। शुरुआती 20 ओवर में 100 रन, इसके बाद बढ़ी रफ्तार दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत बहुत तेज नहीं रही। नामीबिया के गेंदबाजों को शुरुआती ओवरों में पिच से कुछ मूवमेंट मिली। रूबेन ट्रम्पेलमैन ने हरमन के बल्ले का बाहरी किनारा भी छुआ और टॉप-एज का मौका बनाया, लेकिन विकेट नहीं मिल सका। सातवें ओवर में कॉनर एस्टरहुइजन ने शॉर्ट गेंद को पुल करने की कोशिश की, लेकिन फाइन लेग पर जैक ब्रासेल ने कैच पकड़ लिया। इससे शुरुआती साझेदारी 27 रन पर टूट गई। दूसरी ओर डी जॉर्जी को भी कई बार जीवनदान मिला। उन्होंने स्लिप के बाहर एज किया और विकेटकीपर के पास भी कैच का मौका बना, लेकिन नामीबिया उसे भुना नहीं सका। एक रनआउट का मौका भी टीम ने गंवा दिया। दक्षिण अफ्रीका ने 20 ओवर में 100/1 रन बनाए। इसके बाद अगले सात ओवर में 50 रन जोड़कर टीम ने रन गति बढ़ाई। इसी दौरान हरमन ने अपना अर्धशतक पूरा किया, जबकि डी जॉर्जी ने 64 गेंदों में फिफ्टी लगाई। शतक के बाद हरमन ने बदला अंदाज हरमन ने 93 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। शतक के बाद उन्होंने आक्रामक अंदाज अपनाया और तेजी से रन बनाए। सेंचुरी के बाद उन्होंने पांच चौके और दो छक्के लगाए। हरमन ने मैदान के दोनों हिस्सों में शानदार शॉट खेले। कवर और मिडऑफ के बीच उन्होंने 59 रन बटोरे। उनके बाद क्रीज पर आए डेवाल्ड ब्रेविस ने महज दो गेंद बाद नो-लुक सिक्स लगाकर पारी को और रोमांचक बना दिया। आखिरी 10 ओवर में गिरे चार विकेट दक्षिण अफ्रीका ने आखिरी 10 ओवर की शुरुआत 266/2 के स्कोर से की थी। उस समय टीम के 350 रन के पार जाने की उम्मीद थी, लेकिन नामीबिया के गेंदबाजों ने वापसी की। हरमन ने बैक-ऑफ-द-हैंड स्लोअर गेंद को बैकवर्ड पॉइंट के ऊपर से खेलने की कोशिश की, लेकिन कैच लॉरेन स्टीनकैंप के हाथों में चला गया। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका ने केवल 58 रन के अंदर चार विकेट गंवा दिए। ट्रम्पेलमैन ने इनमें से तीन विकेट लिए। डेवाल्ड ब्रेविस डीप स्क्वायर लेग पर कैच हुए, रुबिन हरमन LBW आउट हुए और जेसन स्मिथ भी बड़ा शॉट लगाने के प्रयास में आउट हो गए। आखिर में कॉर्बिन बॉश ने 24 गेंदों पर नाबाद 39 रन बनाकर दक्षिण अफ्रीका को 348/6 तक पहुंचाया। नामीबिया की शुरुआत रही बेहद धीमी 349 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी नामीबिया की शुरुआत बेहद धीमी रही। टीम ने शुरुआती 10 ओवर में सिर्फ 24 रन बनाए। दूसरे से 12वें ओवर के बीच लगातार 10 ओवर तक कोई बाउंड्री नहीं आई। एलेक्स बुसिंग-वोल्शेंक 12 रन बनाकर फोर्टुइन की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने गए। लॉन्गऑफ पर जेसन स्मिथ के पास कैच आया, लेकिन गेंद उनके हाथ से निकल गई। हालांकि अगली ही गेंद पर बुसिंग-वोल्शेंक ने क्वेना मफाका की गेंद पर गलत लाइन में शॉट खेला और विकेटकीपर के हाथों कैच आउट हो गए। जन फ्रायलिंक भी इस मुकाबले में प्रभाव नहीं छोड़ सके। उन्होंने 16 गेंदों पर सात रन बनाए और मफाका की गेंद पर बोल्ड हो गए। 73/3 के स्कोर पर बारिश ने रोका खेल दूसरे ओपनर मालन क्रुगर का संघर्ष 19वें ओवर में खत्म हुआ। वह सब्रायेन की गेंद पर फ्लिक करने से चूक गए और LBW आउट हो गए। 22वें ओवर में नामीबिया का स्कोर 73/3 था, तभी विंडहोक में बारिश शुरू हो गई और मैच रोकना पड़ा। करीब 1 घंटे 18 मिनट बाद खेल दोबारा शुरू हुआ। बारिश के कारण नामीबिया का लक्ष्य घटाकर 38 ओवर में 301 रन कर दिया गया। टीम को बचे हुए 16.3 ओवर में 225 रन बनाने थे। दूसरी बारिश के बाद 7 ओवर में चाहिए थे 167 रन खेल दोबारा शुरू होने के कुछ ही समय बाद लॉरेन स्टीनकैंप ने बॉश की गेंद को हवा में खेल दिया। शॉर्ट कवर पर सब्रायेन ने कैच पकड़ लिया और इसके बाद नामीबिया के विकेट तेजी से गिरने लगे। गेरहार्ड इरास्मस ने कुछ अच्छे शॉट लगाते हुए दो चौके लगाए, लेकिन बारिश ने एक बार फिर मैच रोक दिया। करीब आधे घंटे बाद खेल दोबारा शुरू हुआ। उस समय नामीबिया को केवल 7 ओवर में 167 रन बनाने थे। यह लक्ष्य लगभग असंभव था। नामीबिया ने इस दौरान 67 रन के अंदर चार और विकेट गंवा दिए और 38 ओवर में 162/8 रन ही बना सकी। इस तरह दक्षिण अफ्रीका ने मुकाबला 99 रन से अपने नाम कर सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली।

छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले: स्टार्टअप-NIPUN मिशन के लिए 500 करोड़, कर्मचारियों की उम्र सीमा 45 साल

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई कैबिनेट बैठक में युवाओं, कर्मचारियों, निर्यात और न्यायिक अधोसंरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। सरकार ने अगले पांच वर्षों के लिए मुख्यमंत्री स्टार्टअप और NIPUN मिशन के तहत 500 करोड़ रुपए खर्च करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा सरकारी और संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को दूसरी शासकीय सेवाओं और उच्च पदों के लिए आवेदन करने में बड़ी राहत दी गई है। अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। वहीं, छत्तीसगढ़ को प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को भी मंजूरी दी गई है। स्टार्टअप और NIPUN मिशन के लिए 500 करोड़ कैबिनेट ने युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता और नवाचार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री स्टार्टअप और NIPUN मिशन को मंजूरी दी है। इसके लिए अगले पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। मिशन के तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र, 100 इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब और 5 इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही NIPUN JOB Engine के माध्यम से उद्योगों की जरूरत के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें औपचारिक रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को मंजूरी राज्य को देश के प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को मंजूरी दी है। नीति के तहत मजबूत निर्यात इकोसिस्टम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। प्रदेश के उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों के मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना भी नीति का प्रमुख लक्ष्य होगा। नवा रायपुर में 200 करोड़ की लागत से बनेगा NSTI कैबिनेट ने नवा रायपुर अटल नगर के ग्राम तेंदुवा में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) की स्थापना के लिए 10 एकड़ शासकीय भूमि केंद्र सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को मुफ्त उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक और हॉस्टल सुविधाएं विकसित की जाएंगी। NSTI में हर साल दीर्घकालीन पाठ्यक्रमों के तहत करीब 1,000 प्रशिक्षुओं और अल्पकालीन कार्यक्रमों में 3,000 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण देने की क्षमता होगी। सरकारी कर्मचारियों की अधिकतम आयु सीमा 45 साल कैबिनेट ने राज्य शासन के स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों के साथ निगम-मंडल, स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारियों, संविदाकर्मियों और नगर सैनिकों के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने को मंजूरी दी है। अब दूसरी शासकीय सेवाओं और उच्च पदों के लिए आवेदन करने की अधिकतम आयु सीमा 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष किए जाने का फैसला लिया गया है। सरकार के इस फैसले से संबंधित कर्मचारियों को दूसरी सरकारी सेवाओं और उच्च पदों पर आवेदन करने के लिए अतिरिक्त अवसर मिल सकेंगे। इसके लिए राज्य शासन की ओर से एकीकृत स्थायी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। दुर्ग में बनेगा नया जिला न्यायालय भवन दुर्ग जिला न्यायालय के नए भवन के निर्माण का रास्ता भी कैबिनेट के फैसले से साफ हो गया है। सरकार ने ग्राम तितुरडीह में बीआईटी कॉलेज के पास 4 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके बदले ग्राम पाहंदा, तहसील पाटन में 5.024 हेक्टेयर शासकीय भूमि भिलाई इस्पात संयंत्र को दी जाएगी। दोनों जमीनों का वर्तमान मूल्य लगभग समान बताया गया है। इस फैसले के बाद दुर्ग में आधुनिक सुविधाओं से लैस और सुव्यवस्थित जिला न्यायालय परिसर के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

हर्षित राणा अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज से हो सकते हैं बाहर, हैमस्ट्रिंग चोट से पूरी तरह नहीं उबरे

भारत के तेज गेंदबाज हर्षित राणा अफगानिस्तान के खिलाफ 13 सितंबर से शुरू होने वाली तीन मैचों की टी-20 सीरीज से बाहर हो सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, राणा अभी अपनी हैमस्ट्रिंग चोट से पूरी तरह फिट नहीं हुए हैं और उन्हें मैदान पर वापसी के लिए थोड़ा और समय लग सकता है। हर्षित राणा को अफगानिस्तान के खिलाफ तीनों टी-20 मैचों के लिए फिटनेस के आधार पर भारतीय टीम में शामिल किया गया है। उन्हें आगामी एशियन गेम्स के लिए चुनी गई भारतीय टीम में भी जगह मिली है। BCCI के एक सूत्र के मुताबिक, राणा अभी चोट से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं और उन्हें फिट होने में और समय लगेगा। इंग्लैंड दौरे पर खेला था आखिरी मुकाबला हर्षित राणा ने भारत के लिए अपना आखिरी मुकाबला इंग्लैंड दौरे के दौरान खेला था। इसके बाद हैमस्ट्रिंग चोट के कारण वह टीम से बाहर चल रहे हैं। राणा को भी वॉशिंगटन सुंदर जैसी हैमस्ट्रिंग चोट से जूझना पड़ा है। हालांकि, सुंदर अब पूरी तरह फिट हो चुके हैं और उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए फिट घोषित किया गया है। बुमराह और नितीश भी फिटनेस के आधार पर टीम में अफगानिस्तान के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह और ऑलराउंडर नितीश रेड्डी को भी फिटनेस के आधार पर टीम में शामिल किया गया है। बुमराह बाएं घुटने की चोट से उबर रहे हैं। वह जुलाई में इंग्लैंड दौरे के बाद से क्रिकेट से दूर हैं। वहीं, नितीश रेड्डी क्वाड्रिसेप्स की चोट से रिकवरी कर रहे हैं। BCCI सूत्र के अनुसार, बुमराह और नितीश दोनों की फिटनेस में सुधार हो रहा है और उनकी वापसी सही दिशा में है। अफगानिस्तान सीरीज के बाद एशियन गेम्स भारत और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की टी-20 सीरीज के मुकाबले 13 सितंबर से दिल्ली में खेले जाने हैं। इसके बाद भारतीय टीम 22 सितंबर को टोक्यो में जापान के खिलाफ एकमात्र मैच खेलेगी। भारतीय टीम इसके बाद 28 सितंबर से एशियन गेम्स में अपना अभियान शुरू करेगी। हर्षित राणा को एशियन गेम्स की टीम में भी शामिल किया गया है। ऐसे में उनकी फिटनेस भारतीय टीम के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अफगानिस्तान सीरीज से पहले राणा की फिटनेस पर अंतिम फैसला उनकी रिकवरी और फिटनेस टेस्ट के आधार पर लिया जा सकता है।

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