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इंदौर में 12वीं के छात्र ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, मोबाइल चैट की जांच में जुटी पुलिस

इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में 12वीं कक्षा के एक छात्र ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना छोटा बांगड़दा के सुविधा नगर की है। मृतक की पहचान यशपाल (17), पिता बलीराम के रूप में हुई है। वह मूल रूप से विदिशा जिले का रहने वाला था और इंदौर में अपनी बड़ी बहन और जीजा के साथ रहकर पढ़ाई कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, यशपाल एक कॉन्वेंट स्कूल में 12वीं कक्षा का छात्र था। उसके पिता किसान हैं। परिवार में दो बहनें और एक भाई हैं। उसकी बड़ी बहन और जीजा भी इंदौर में उसके साथ रहते थे। जीजा फाइनेंस का काम करते हैं। घटना के वक्त घर में अकेला था छात्र पुलिस के अनुसार, घटना के समय यशपाल घर में अकेला था। बाद में परिजनों ने उसे फंदे पर लटका देखा और तत्काल पुलिस को सूचना दी। जानकारी मिलते ही एरोड्रम पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मोबाइल और चैट की जांच कर रही पुलिस पुलिस ने घटनास्थल से यशपाल का मोबाइल फोन जब्त किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह मोबाइल पर किसी से चैटिंग करता था। अब पुलिस उसके कॉल डिटेल, चैट और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि छात्र ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया। फिलहाल आत्महत्या की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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बिलासपुर में स्मार्ट मीटर से बढ़ी बिजली उपभोक्ताओं की परेशानी, कहीं 6 महीने से बिल नहीं तो कहीं 5 हजार तक पहुंचा

बिलासपुर में स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ती नजर आ रही है। कई उपभोक्ता बिलिंग में गड़बड़ी और मीटर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं की शिकायत लेकर बिजली विभाग के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। विभाग के अधिकारी इन तकनीकी दिक्कतों के लिए मीटर लगाने वाली जीनस कंपनी की व्यवस्था को जिम्मेदार बता रहे हैं। नेहरू नगर स्थित सीएसईबी के सिटी डिविजन कार्यालय में लगातार ऐसे उपभोक्ता पहुंच रहे हैं, जिनकी शिकायत स्मार्ट मीटर, बिल नहीं आने या अचानक ज्यादा बिल आने से जुड़ी है। थ्री-फेज कनेक्शन लिया, लेकिन नहीं लगा स्मार्ट मीटर कई उपभोक्ताओं ने गर्मियों में बिजली की बढ़ी खपत को देखते हुए थ्री-फेज कनेक्शन लिया था। इसके लिए जांच प्रक्रिया पूरी करने और शुल्क जमा करने के बाद भी उनके यहां नया स्मार्ट मीटर नहीं लगाया गया। ऐसे में कुछ घरों में अभी भी पुराने मीटर से ही बिजली सप्लाई जारी है। विभाग के मुताबिक, फिलहाल ऐसे करीब 20 मामले सामने आए हैं, हालांकि वास्तविक संख्या इससे ज्यादा होने की संभावना जताई जा रही है। नए स्मार्ट मीटर नहीं लग पाने के कारण इन उपभोक्ताओं को बिलिंग में परेशानी हो रही है। कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें छह महीने से ज्यादा समय से बिजली का बिल ही नहीं मिला। किसी का बिल 5 हजार, किसी का महीनों से नहीं आया स्मार्ट मीटर और बिलिंग से जुड़ी शिकायतों को लेकर शशिलता श्रीवास निवासी चड्डा बाड़ी, नेहरू नगर और एसके चतुर्वेदी निवासी कुदुदंड सहित कई उपभोक्ता नेहरू नगर कार्यालय पहुंचे। वहीं प्रकाश यादव और भरत कश्यप ने बिजली की खपत के मुकाबले ज्यादा बिल आने की शिकायत की है। ‘प्लंबर हूं, पूरी कमाई बिजली बिल में जा रही’ कस्तूरबा नगर निवासी प्रकाश यादव ने बताया कि वह प्लंबर का काम करते हैं। सामान्य मीटर के समय उनका बिजली बिल करीब 300 से 400 रुपए प्रतिमाह आता था। अब यह बढ़कर 4 से 5 हजार रुपए तक पहुंच रहा है। उनका कहना है कि आसपास रहने वाले कई लोगों की भी इसी तरह की शिकायत है। प्रकाश यादव के मुताबिक, इतनी अधिक राशि का बिल आने से उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा बिजली बिल चुकाने में चला जा रहा है। ‘गर्मियों में 2-2.5 हजार, अब 5-6 हजार का बिल’ नगर निगम में विपक्ष के नेता भरत कश्यप ने बताया कि नेहरू नगर स्थित उनके घर में सामान्य मीटर के दौरान गर्मियों में भी बिजली का बिल 2 से 2.5 हजार रुपए से ज्यादा नहीं आया। उनका कहना है कि अब बारिश के मौसम में बिजली की खपत कम होने के बावजूद बिल 5 से 6 हजार रुपए महीने तक पहुंच गया है। विभाग ने माना तकनीकी दिक्कत से हो रही परेशानी सीएसईबी नेहरू नगर के एई गिरीश श्रीवास्तव ने बताया कि नेहरू नगर जोन में करीब 15 हजार स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। उन्होंने माना कि मीटर से जुड़ी तकनीकी समस्याएं सामने आती रहती हैं। उनके मुताबिक, डेटा अपडेट करने का अथॉराइजेशन जीनस कंपनी के पास है और तकनीकी समस्या होने पर कंपनी से इसे क्लियर कराया जाता है। उन्होंने यह भी माना कि कभी-कभी इस प्रक्रिया में देरी हो जाती है। अधिकारी के अनुसार, किसी शिकायत के समाधान में छह महीने का समय नहीं लगना चाहिए और अगर इतना समय लग रहा है तो इसे विभाग की चूक माना जाएगा। खपत कम होने के बावजूद ज्यादा बिल पर सवाल सीएसपीडीसीएल के ईडी अम्बष्ट से बिजली खपत और बिलिंग को लेकर सवाल किया गया। उन्होंने बताया कि जून की तुलना में वर्तमान समय में बिजली की खपत करीब 50 प्रतिशत कम हो चुकी है। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि यदि खपत कम हो गई है तो कुछ उपभोक्ताओं के बिल पहले की तुलना में ज्यादा क्यों आ रहे हैं, तो उन्होंने स्पष्ट जवाब नहीं दिया और फोन काट दिया। दोबारा संपर्क करने पर भी कॉल रिसीव नहीं किया गया। फिलहाल स्मार्ट मीटर की तकनीकी गड़बड़ी, डेटा अपडेट और बिलिंग में अंतर को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानी बनी हुई है। विभाग का कहना है कि शिकायतों का जल्द निराकरण करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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रायपुर में करंट लगने से मां-बेटे की मौत, बचाने पहुंचा बेटा भी चपेट में आया

रायपुर में एक दर्दनाक हादसे में मां और बेटे की करंट लगने से मौत हो गई। हादसा उस समय हुआ, जब मां बालकनी में सूख रहे कपड़े लेने गई थीं। कपड़े उतारते समय उन्होंने जैसे ही जीआई पाइप को छुआ, वह करंट की चपेट में आ गईं। मां को करंट से चिपका देखकर उनका बेटा उन्हें बचाने के लिए पहुंचा, लेकिन वह भी बिजली की चपेट में आ गया। हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना टिकरापारा थाना क्षेत्र की है। बेटी से मिलने रायपुर आए थे मां-बेटे जानकारी के मुताबिक, महिला अपने बेटे के साथ रायपुर में रहने वाली अपनी बेटी से मिलने आई थीं। बेटी किराए के मकान में रहती है। इसी मकान की बालकनी में यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि बालकनी में कपड़े सूख रहे थे। महिला कपड़े उतारने पहुंचीं और जीआई पाइप को छूते ही करंट की चपेट में आ गईं। मां को बचाने पहुंचा बेटा भी झुलसा महिला को करंट से चिपका देखकर उनका बेटा मदद के लिए दौड़ा। उसने मां को बचाने की कोशिश की, लेकिन जीआई पाइप में फैले करंट की चपेट में वह भी आ गया। हादसा इतना गंभीर था कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। कूलर से पाइप में फैला था करंट शुरुआती जांच में सामने आया है कि मकान में लगे कूलर से करंट जीआई पाइप में फैल गया था। पाइप में करंट आने की वजह से महिला जैसे ही उसे छूने पहुंचीं, हादसा हो गया। सूचना मिलने के बाद टिकरापारा पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस हादसे के कारणों और बिजली कनेक्शन की स्थिति की भी जांच कर रही है।
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गुना में किसान सम्मान निधि का झांसा देकर 4.85 लाख का फर्जी KCC लोन, भाई-बहन से जालसाजी

गुना जिले की चांचौड़ा तहसील के ग्राम तेलीगांव से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के नाम पर कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि गांव के ही एक युवक ने बैंक दलाल के साथ मिलकर बुजुर्ग भाई-बहन को किसान सम्मान निधि के 2-2 हजार रुपए दिलाने का झांसा दिया और उनके नाम पर करीब 4.85 लाख रुपए का KCC लोन स्वीकृत कराकर रकम निकाल ली। पीड़ित गंगाराम अहिरवार और उनकी बहन भमरी बाई, निवासी तेलीगांव, ने शनिवार को पुलिस को शिकायत देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। सम्मान निधि का झांसा देकर करवाए दस्तखत शिकायत में पीड़ितों ने बताया कि उनकी जमीनों के दस्तावेजों के आधार पर आरआरबी बैंक की बीनागंज शाखा से दो अलग-अलग KCC लोन स्वीकृत कराए गए। इनमें करीब 1.32 लाख और 3.53 लाख रुपए, यानी कुल 4.85 लाख रुपए की राशि शामिल है। पीड़ितों का आरोप है कि दशरथ सिंह अहिरवार ने उन्हें किसान सम्मान निधि की राशि दिलाने की बात कही और इसी बहाने बैंक से जुड़े कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान करवा लिए। बाद में आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उनके नाम पर KCC लोन कराया गया और लोन की राशि खुद निकाल ली गई। बैंक पहुंचने पर सामने आई लाखों की देनदारी पीड़ित परिवार को मामले की जानकारी तब हुई, जब वे बैंक पहुंचे। वहां उन्हें अपने नाम पर लाखों रुपए के KCC लोन की जानकारी मिली। यह सुनकर उनके होश उड़ गए। परिवार का आरोप है कि उन्हें लोन लेने की जानकारी नहीं थी और न ही उन्होंने किसी तरह की इतनी बड़ी रकम के लिए सहमति दी थी। दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाने का वीडियो भी सामने आया मामले से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें आरोपी द्वारा कथित तौर पर पीड़ित से दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाते और उसे समझाते हुए दिखाई देने की बात कही जा रही है। पीड़ित परिवार के मुताबिक, उन्होंने इससे पहले कलेक्टर कार्यालय में भी शिकायत की थी। अब उन्होंने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। फर्जी लोन से मुक्ति और कार्रवाई की मांग पीड़ित भाई-बहन ने पुलिस से आरोपी और मामले में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने अपने नाम पर हुए कथित फर्जी KCC लोन की राशि की जिम्मेदारी से मुक्त कराने की मांग की है। फिलहाल पुलिस शिकायत और सामने आए दस्तावेजों व वीडियो के आधार पर मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लोन स्वीकृति और राशि निकासी की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।
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खंडवा में आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए 21 लाख का टेंडर, 5 सितंबर तक आवेदन

खंडवा शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट की घटनाओं के बीच नगर निगम ने एक बार फिर नसबंदी और टीकाकरण अभियान शुरू करने की तैयारी की है। निगम ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब 21 लाख रुपए का टेंडर जारी किया है। इस टेंडर के तहत आवारा कुत्तों की नसबंदी के साथ उनका इम्यूनाइजेशन यानी टीकाकरण भी किया जाएगा। यह काम Animal Birth Control Program के तहत कराया जाएगा और टेंडर की अवधि एक साल रखी गई है। 5 सितंबर तक जमा होंगे आवेदन नगर निगम की ओर से शनिवार को जारी निविदा विज्ञप्ति के अनुसार, इच्छुक संस्थान और एजेंसियां 5 सितंबर 2026 शाम 5:30 बजे तक ऑनलाइन टेंडर जमा कर सकेंगी। निविदाएं 7 सितंबर सुबह 10:30 बजे खोली जाएंगी। टेंडर के लिए धरोहर राशि 21 हजार रुपए और निविदा प्रपत्र शुल्क 5 हजार रुपए निर्धारित किया गया है। नसबंदी के साथ कुत्तों का टीकाकरण भी नगर निगम के इस अभियान का उद्देश्य केवल आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करना नहीं है। अभियान के दौरान पकड़े जाने वाले कुत्तों की नसबंदी के साथ उनका टीकाकरण भी किया जाएगा। Animal Birth Control Program के तहत नसबंदी और इम्यूनाइजेशन का उद्देश्य आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के साथ डॉग बाइट और अन्य संबंधित जोखिमों को कम करना है। पिछले अभियान को लेकर उठ चुके हैं सवाल खंडवा में आवारा कुत्तों की समस्या और नसबंदी अभियान को लेकर हाल ही में नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। जनसुनवाई के दौरान नगर निगम नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर ने नसबंदी अभियान पर खर्च और शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर विरोध जताया था। विरोध प्रदर्शन के दौरान एक युवक के कुत्ते की वेशभूषा में पहुंचने का मामला भी चर्चा में रहा था। इसके बाद मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया। कलेक्टर ऋषव गुप्ता और निगम कमिश्नर प्रियंका राजावत को भी मीडिया के सामने स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी थी। चार साल में खर्च हो चुके हैं 98 लाख रुपए जानकारी के मुताबिक, खंडवा में पिछले चार साल के दौरान आवारा कुत्तों की नसबंदी पर करीब 98 लाख रुपए खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट को लेकर सवाल बने हुए हैं। अब 21 लाख रुपए के नए टेंडर से नगर निगम को उम्मीद है कि नसबंदी और टीकाकरण अभियान को दोबारा गति मिलेगी। वहीं शहरवासियों की नजर इस बात पर रहेगी कि नए अभियान से आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट की समस्या पर कितना असर पड़ता है।
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रायपुर में चोरी की एक्टिवा से मोबाइल स्नेचिंग, युवक और नाबालिग गिरफ्तार; 5 मोबाइल बरामद

रायपुर में चोरी की एक्टिवा से मोबाइल छीनने वाले एक युवक और नाबालिग को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों पर सरस्वती नगर इलाके में मोबाइल स्नेचिंग की दो वारदातों के साथ मोबाइल चोरी की तीन अन्य घटनाओं में शामिल होने का आरोप है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 5 मोबाइल फोन और चोरी की एक्टिवा बरामद की है। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 1.50 लाख रुपए बताई गई है। मॉर्निंग वॉक पर निकली महिला से मोबाइल छीना पुलिस के मुताबिक, 19 अगस्त की सुबह कोटा निवासी उन्नति ठाकुर मॉर्निंग वॉक के लिए निकली थीं। दिशा कॉलेज रोड पर रेयांश किचन के सामने ग्रे रंग की एक्टिवा पर सवार दो युवकों ने उनका मोबाइल झपट लिया और फरार हो गए। इसी सुबह चौबे कॉलोनी निवासी युवराज मेहर कॉलेज जा रहे थे। उसी इलाके में बाइक सवार युवकों ने उनका मोबाइल भी इसी तरह छीन लिया। दोनों घटनाओं की शिकायत सरस्वती नगर थाने में दर्ज कराई गई थी। मेडिकल कॉलेज की पार्किंग से चोरी हुई थी एक्टिवा पुलिस जांच में सामने आया कि मोबाइल स्नेचिंग में इस्तेमाल की गई एक्टिवा CG 04 KS 6757 भी चोरी की थी। पुलिस के अनुसार, यह एक्टिवा 21 जुलाई को मेडिकल कॉलेज की पार्किंग से चोरी हुई थी। इस संबंध में मौदहापारा थाने में मामला दर्ज था। पुलिस ने स्नेचिंग की घटनाओं के CCTV फुटेज खंगाले तो दोनों वारदातों में इसी चोरी की एक्टिवा का इस्तेमाल दिखाई दिया। इसके बाद तकनीकी जांच और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की गई। एमजी रोड पर घेराबंदी कर पकड़ा पुलिस टीम को सूचना मिली कि चोरी की एक्टिवा पर दो युवक एमजी रोड इलाके में घूम रहे हैं। इसके बाद टीम ने घेराबंदी कर दोनों को पकड़ लिया। पूछताछ में एक आरोपी ने अपना नाम वरुण साहू (23), निवासी राम नगर, गुढ़ियारी बताया। दूसरा आरोपी नाबालिग है। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने एक्टिवा चोरी करने के साथ इसी वाहन से मोबाइल स्नेचिंग की दो वारदात और तीन अन्य मोबाइल चोरी की घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकार की है। आरोपियों के पास से 5 मोबाइल बरामद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर 5 मोबाइल फोन और चोरी की एक्टिवा बरामद की है। पुलिस अब उन तीन अन्य मोबाइल चोरी की घटनाओं के संबंध में भी जांच कर रही है, जिन्हें आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया है। यह कार्रवाई डीसीपी वेस्ट जोन रॉबिंसन गुड़िया के निर्देशन, एडीसीपी राहुल देव शर्मा के मार्गदर्शन और एसीपी आजाद चौक ईशू अग्रवाल के नेतृत्व में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट और सरस्वती नगर पुलिस की संयुक्त टीम ने की।
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सीहोर के अस्पताल में घड़ी के अंदर मिला संदिग्ध कैमरा, महिला स्वास्थ्यकर्मियों में हड़कंप; मंत्री को सौंपा ज्ञापन

सीहोर जिले के बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दीवार पर लगी घड़ी के अंदर संदिग्ध कैमरा और मेमोरी कार्ड मिलने से हड़कंप मच गया। घटना 13 अगस्त की बताई जा रही है। अस्पताल में काम करने वाली महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने इसे निजता और कार्यस्थल की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। कर्मचारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। विभागीय स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए महिला स्वास्थ्यकर्मियों और नर्सिंग स्टाफ ने सीहोर से गुजर रहे राजस्व मंत्री एवं इछावर विधायक करण सिंह वर्मा का काफिला रोककर उन्हें ज्ञापन सौंपा। घड़ी के अंदर मिला कैमरा और मेमोरी कार्ड अस्पताल कर्मचारियों के मुताबिक, एक कमरे में दीवार पर लगी घड़ी के अंदर संदिग्ध कैमरा और मेमोरी कार्ड मिला। अस्पताल में बड़ी संख्या में महिला स्वास्थ्यकर्मी काम करती हैं। ऐसे में किसी उपकरण का इस तरह लगाया जाना कर्मचारियों की निजता और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाला है। कर्मचारियों ने मांग की है कि जांच के जरिए यह पता लगाया जाए कि कैमरा किसने, कब और किस उद्देश्य से लगाया था। इसके साथ ही अस्पताल के अन्य कमरों और स्थानों की भी जांच कराने की मांग की गई है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कहीं और भी ऐसे उपकरण तो नहीं लगाए गए। मंत्री का काफिला रोककर सौंपा ज्ञापन मामले को लेकर नाराज महिला स्वास्थ्यकर्मी और नर्सिंग स्टाफ ने मंत्री करण सिंह वर्मा का काफिला रोककर अपनी शिकायत रखी। कर्मचारियों ने ज्ञापन सौंपते हुए मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की। मंत्री ने कर्मचारियों की बात सुनी और मामले में जांच व आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। कार्रवाई में देरी का लगाया आरोप महिला कर्मचारियों का आरोप है कि संदिग्ध कैमरा मिलने के बाद भी विभागीय स्तर पर मामले को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया गया। इसी वजह से उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधि के सामने अपनी शिकायत रखने के लिए आगे आना पड़ा। कर्मचारियों ने कहा कि वे किसी व्यक्ति विशेष पर सीधे आरोप नहीं लगा रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि निष्पक्ष जांच हो और कैमरा लगाने वाले व्यक्ति की पहचान के साथ पूरे मामले की सच्चाई सामने आए। कर्मचारियों के अनुसार, मिला हुआ संदिग्ध उपकरण संबंधित अधिकारियों को सुरक्षित सौंप दिया गया है। BMO बोले- नियमों के तहत कार्रवाई जारी बिलकिसगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के BMO डॉ. नवीन मेहर ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने कहा कि नियमों के तहत निष्पक्ष कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घड़ी में मिला उपकरण वास्तव में कैमरा था, उसे किसने लगाया और इसके पीछे क्या उद्देश्य था।
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इंदौर में PM आवास योजना के फ्लैटों पर निगम की बड़ी कार्रवाई, 15 आवासीय इकाइयां सील

इंदौर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अमलतास परिसर में आवंटित आवासीय इकाइयों में नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नगर निगम ने कार्रवाई की है। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर शुक्रवार को जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम ने अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान 15 आवासीय इकाइयों को सील किया गया। वहीं, फ्लैटों में नियमों के विपरीत संचालित दुकानों का सामान भी जब्त किया गया। कहीं मवेशी पाले जा रहे थे, कहीं दुकानें मिलीं निरीक्षण के दौरान टीम को कई आवासीय इकाइयों में नियमों के विपरीत गतिविधियां मिलीं। कुछ फ्लैटों में मवेशी पाले जा रहे थे, जबकि कुछ हितग्राहियों ने अपने आवास किराये पर देकर वहां दूसरी गतिविधियां संचालित कर रखी थीं। कई आवासीय इकाइयों में रहने के बजाय दुकानें संचालित होती मिलीं। निगम ने इन मामलों को आवास आवंटन की शर्तों का उल्लंघन माना और कार्रवाई की। 20 हजार जमा कर बाकी 1.80 लाख नहीं चुकाए जांच के दौरान कुछ हितग्राहियों के आवास आवंटन से जुड़ी राशि भी बकाया मिली। बताया गया कि कुछ हितग्राहियों ने शुरुआती 20 हजार रुपए जमा किए थे, लेकिन शेष 1.80 लाख रुपए की राशि अब तक जमा नहीं की। निगम ने ऐसे हितग्राहियों को बकाया राशि जमा करने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करने के लिए 15 दिन की मोहलत दी है। राशि जमा नहीं की तो आवंटन होगा निरस्त नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा में बकाया राशि जमा नहीं करने पर आवास खाली कराया जाएगा और आवंटन निरस्त किया जा सकता है। इसके बाद आवास किसी अन्य पात्र हितग्राही को आवंटित करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। मुनादी के जरिए बकायादार हितग्राहियों को भी चेतावनी दी गई है कि समय पर राशि जमा नहीं करने पर पहले जमा की गई राशि राजसात करने के साथ आवंटन निरस्त करने की कार्रवाई की जा सकती है। प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम रही मौजूद कार्रवाई के दौरान तेजाजी नगर थाना प्रभारी, क्षेत्रीय तहसीलदार, कार्यपालन यंत्री मितेश सिंगोड, सीएलटीसी संतोषी गुप्ता सहित नगर निगम की रिमूवल टीम और पुलिस बल मौजूद रहा। निगम अधिकारियों के मुताबिक, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवंटित मकानों का उपयोग तय नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रह सकती है।
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बिलासपुर में मकान के बेसमेंट से टनों कृषि दवाइयां जब्त, बिना लाइसेंस भंडारण का आरोप

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कृषि विभाग ने एक मकान के बेसमेंट से बड़ी मात्रा में कीटनाशक और कृषि में इस्तेमाल होने वाली दवाइयां जब्त की हैं। विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो कृषि दवाओं और खाद के भंडारण से जुड़े जरूरी लाइसेंस और दस्तावेज नहीं मिले। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद सामग्री की मात्रा काफी ज्यादा है और इसकी तौल व लिस्टिंग का काम किया जा रहा है। आशंका है कि कृषि दवाइयां उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से मंगाई गई थीं और बिलासपुर में बिक्री के लिए रखी गई थीं। लोखंडी के मकान में मिला स्टॉक कृषि विभाग को सूचना मिली थी कि लोखंडी इलाके में एक मकान के बेसमेंट में बड़ी मात्रा में कीटनाशक और कृषि दवाइयां रखी गई हैं। सूचना के बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और बेसमेंट की जांच शुरू की। जांच के दौरान बड़ी संख्या में कृषि दवाइयां और अन्य सामग्री मिली। विभाग अब बरामद स्टॉक से जुड़े दस्तावेज और लाइसेंस की जांच कर रहा है। एक्सपायर या नकली दवाओं की भी आशंका कार्रवाई के दौरान मिली कुछ कृषि दवाओं के एक्सपायर या नकली होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, दवाओं के सैंपल की जांच और रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इनमें से कोई दवा नकली या निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं है। अगर ऐसा पाया जाता है तो मामले में आगे कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। बिना लाइसेंस भंडारण की जांच कृषि दवाओं और कीटनाशकों के भंडारण और बिक्री के लिए निर्धारित नियम और लाइसेंस जरूरी होते हैं। बेसमेंट में इतनी बड़ी मात्रा में कृषि सामग्री मिलने के बाद विभाग ने संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि दवाइयां कहां से लाई गईं, किसके नाम पर थीं और इन्हें रखने या बेचने के लिए जरूरी अनुमति ली गई थी या नहीं। कार्रवाई के दौरान मकान मालिक नहीं मिला जिस मकान के बेसमेंट से कृषि दवाइयां बरामद हुई हैं, वह गाजियाबाद निवासी आशु सिंह पाल का बताया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान वह मौके पर मौजूद नहीं था। फिलहाल कृषि विभाग ने बरामद सामग्री को जब्त कर लिया है। स्टॉक की गिनती और तौल के बाद पूरी सूची तैयार की जा रही है। दस्तावेजों और दवाओं की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। एसएसपी ने पुलिस टीम को भेजा मामले की जानकारी मिलने के बाद बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने भी इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने सकरी थाना पुलिस की टीम को मौके पर भेजा। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बरामद सामग्री की मात्रा टनों में है। फिलहाल उसकी गिनती, तौल और लिस्टिंग की प्रक्रिया चल रही है। कार्रवाई के दौरान संयुक्त संचालक कृषि राजेश राठौर, सहायक संचालक कृषि अनिल शुक्ला, सहायक संचालक शशांक शिंदे समेत कृषि विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
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गुना में 3.74 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी का मामला, DPM भोपाल अटैच

गुना में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन में सामने आई 3.74 करोड़ रुपए की वित्तीय गड़बड़ी के मामले में अब जिला परियोजना प्रबंधक (DPM) पर भी कार्रवाई हुई है। राज्य आजीविका मिशन के CEO ने DPM सोनू सुशीला यादव को भोपाल अटैच कर दिया है। जारी आदेश के मुताबिक, गुना में चल रही जांच पूरी होने तक DPM को जिला मुख्यालय से हटाया गया है। मामले में वित्तीय रिकॉर्ड, पोर्टल पर दर्ज जानकारी और बैंक खातों की जांच की जा रही है। LOKOS पोर्टल के आंकड़ों से सामने आई गड़बड़ी मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले में स्व-सहायता समूह और उनके सामुदायिक संगठन बनाए गए हैं। इन समूहों से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी भारत सरकार के LOKOS पोर्टल पर दर्ज की जाती है। पोर्टल पर समूहों को मिली राशि, भुगतान की तारीख और अन्य वित्तीय जानकारी का रिकॉर्ड रहता है। इसी रिकॉर्ड का मिशन की वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (FDM) से मिलान किया गया था। 90.25 लाख रुपए की राशि पर उठे सवाल मई में FDM और LOKOS पोर्टल के आंकड़ों के मिलान के दौरान प्रतिज्ञा सीएलएफ, विकासखंड गुना से संबंधित करीब 90.25 लाख रुपए की राशि में अंतर सामने आया। FDM पोर्टल पर यह राशि दिखाई दे रही थी, लेकिन बैंक रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट की जांच में इतनी राशि की वास्तविक प्राप्ति नहीं मिली। इसके बाद विभागीय स्तर पर मामले की जांच शुरू की गई। जिला और राज्य स्तर पर जांच जारी मामला सामने आने के बाद जिला पंचायत CEO ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की। टीम को वित्तीय गड़बड़ी की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए। इसके बाद मामले की शिकायत राज्य स्तर पर भी की गई, जिसके आधार पर राज्य की टीम ने भी जांच शुरू कर दी है। फिलहाल वित्तीय अभिलेखों, पोर्टल पर की गई प्रविष्टियों और संबंधित बैंक खातों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने तक DPM भोपाल अटैच मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य आजीविका मिशन के CEO ने DPM सोनू सुशीला यादव को जांच पूरी होने तक भोपाल अटैच कर दिया है। अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि पोर्टल पर दर्ज राशि और बैंक खातों में वास्तविक लेन-देन के बीच अंतर कैसे आया और इसमें किस स्तर पर लापरवाही या वित्तीय अनियमितता हुई। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
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Vishwas Sarang

Vishwas Sarang को बहनों का बेशुमार प्यार, Narela Rakshabandhan Mahotsav में बना नया उत्साह

नरेला विधानसभा क्षेत्र में चल रहे Rakshabandhan Mahotsav 2026 में रविवार को भाई-बहन के रिश्ते की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। वार्ड नंबर 36, 37 और 70 में आयोजित कार्यक्रम के पांचवें दिन 24 हजार 604 बहनों ने मंत्री Vishwas Sarang को रक्षासूत्र बांधा। बहनों ने राखी बांधकर उनके प्रति स्नेह और आशीर्वाद जताया। कार्यक्रम में पहुंचते ही मंत्री विश्वास सारंग का स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। ढोल-ताशों और DJ की गूंज के बीच उन्हें बग्गी से मुख्य कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान आतिशबाजी भी हुई। मंच पर पहुंचने के बाद सारंग ने बहनों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। बहनों के प्यार को बताया अपनी ताकत रक्षाबंधन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वास सारंग ने कहा कि रक्षाबंधन केवल राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच विश्वास, स्नेह और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हर साल बड़ी संख्या में बहनों का प्यार और आशीर्वाद मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में पहुंचीं बहनों से उन्होंने राखी बंधवाई और उनका आशीर्वाद लिया। सारंग ने कहा कि लाखों बहनों का स्नेह और विश्वास ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। चौथे दिन भी उमड़ा था बहनों का सैलाब नरेला रक्षाबंधन महोत्सव के चौथे दिन भी बड़ी संख्या में बहनें कार्यक्रम में पहुंची थीं। उस दिन 31,117 बहनों ने मंत्री विश्वास सारंग को रक्षासूत्र बांधा था। आयोजकों के अनुसार, पिछले साल के महोत्सव में कुल 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने रक्षासूत्र बांधा था। इस बार भी लगातार बढ़ रही भागीदारी को देखते हुए पिछले साल का आंकड़ा पार होने की उम्मीद जताई जा रही है। 7 सितंबर को इन दो वार्डों में होगा आयोजन नरेला रक्षाबंधन महोत्सव का अगला चरण 7 सितंबर 2026 को होगा। इस दिन दो वार्डों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भी बड़ी संख्या में बहनों के शामिल होने की उम्मीद है। महोत्सव के जरिए रक्षाबंधन के पारंपरिक रिश्ते को सामाजिक जुड़ाव और भाईचारे के भाव से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। नरेला क्षेत्र में लगातार कई दिनों से चल रहे इस आयोजन में बहनों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। पांचवें दिन 24,604 रक्षासूत्र बांधे जाने के साथ महोत्सव का उत्साह और बढ़ गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM रेखा गुप्ता

Satya Niketan हादसे पर CM रेखा गुप्ता का बड़ा फैसला, Deputy Commissioner समेत 5 Suspend

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। पांच मंजिला इमारत के अचानक गिरने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे के बाद CM रेखा गुप्ता ने जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। MCD के साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अधिकारियों को Suspend कर दिया गया है। सरकार के इस एक्शन के बाद नगर निगम के कामकाज और इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हादसे के बाद MCD में बड़ा Action सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद MCD ने पांच अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इनमें साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर सहित इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि इमारत की हालत को लेकर पहले कोई शिकायत या नोटिस जारी हुआ था या नहीं और निर्माण या मरम्मत के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं। PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी इमारत बताया जा रहा है कि जिस बिल्डिंग का हिस्सा ढहा, उसका इस्तेमाल PG accommodation के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय वहां कई लोग मौजूद थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। धूल का गुबार उठ गया और लोग मदद के लिए मौके पर पहुंचने लगे। इसके बाद दिल्ली फायर सर्विस, NDRF और अन्य बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। 7 लोगों की मौत, कई घायल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि घायलों को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद आसपास के लोगों में भी डर का माहौल है। स्थानीय स्तर पर दूसरी पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। Building Owner भी पुलिस की गिरफ्त में मामले में पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई थीं। बाद में उसे भिवाड़ी से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस अब हादसे से जुड़े दस्तावेज, बिल्डिंग की स्थिति और निर्माण या मरम्मत से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के आधार पर आगे और लोगों पर कार्रवाई हो सकती है। आसपास की इमारतों की भी जांच सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने आसपास की इमारतों की स्थिति को लेकर भी जांच शुरू की है। अधिकारियों की नजर खास तौर पर उन भवनों पर है जो पुराने हैं या जिनमें निर्माण और मरम्मत का काम चल रहा है। इस घटना ने दिल्ली में old buildings, PG और construction safety को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इमारत में पहले से कोई खामी थी, तो उसे समय रहते क्यों नहीं रोका गया? सरकार के Action से उठे कई सवाल MCD के पांच अधिकारियों का निलंबन सरकार की ओर से उठाया गया बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, असली तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। सत्य निकेतन की इस घटना ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में हादसे की असली वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CM House

CM House March पर Police का पहरा, Hamidia में Intern Doctors से धक्का-मुक्की

अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टर सोमवार को मुख्यमंत्री आवास (CM House) की ओर बढ़ रहे थे। लेकिन हमीदिया अस्पताल के पास पुलिस ने उनका रास्ता रोक दिया। डॉक्टरों को आगे जाने से रोकने के लिए पुलिस ने आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी। इस दौरान डॉक्टरों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी बनी। प्रदर्शन को देखते हुए हमीदिया अस्पताल परिसर और आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। हालात बिगड़ने की आशंका को देखते हुए मौके पर Water Cannon भी तैयार रखा गया। CM House की तरफ मार्च करना चाहते थे डॉक्टर इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। इसी सिलसिले में डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला किया। डॉक्टरों का समूह हमीदिया अस्पताल से आगे बढ़ने लगा तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। पुलिस की Barricading के बाद डॉक्टरों ने मौके पर नारेबाजी शुरू कर दी। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थान से आगे नहीं जाने के लिए समझाती रही। चारों तरफ से रास्ते किए गए बंद प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हमीदिया के आसपास कई रास्तों को बंद कर दिया। बैरिकेड लगाकर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। मौके पर अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई, ताकि भीड़ को संभाला जा सके। Water Cannon की मौजूदगी से साफ था कि प्रशासन किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी में था। हालांकि, डॉक्टरों का प्रदर्शन अपनी मांगों को लेकर जारी रहा। मांगों पर सरकार से जवाब चाहते हैं Intern Doctors प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। CM House तक मार्च के जरिए उनका उद्देश्य सीधे सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर खींचना था। फिलहाल पुलिस ने डॉक्टरों को मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने से रोक दिया है। हमीदिया अस्पताल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है और स्थिति पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा डॉक्टरों की मांगों और सरकार की ओर से संभावित बातचीत को लेकर है। अब देखना होगा कि प्रदर्शन के बाद प्रशासन और इंटर्न डॉक्टरों के बीच क्या समाधान निकलता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold

Gold Rate Today: सोने की कीमत ₹2409 गिरी, चांदी भी ₹3967 सस्ती

सोना खरीदने वालों के लिए सोमवार को बाजार से थोड़ी राहत की खबर आई। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोने (Gold) और चांदी (Silver) दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। आपके दिए बाजार आंकड़ों के मुताबिक सोना करीब ₹2,409 और चांदी करीब ₹3,967 सस्ती हुई है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख, जबकि एक किलो चांदी करीब ₹2.35 लाख के आसपास पहुंच गई। हालांकि, अलग-अलग बाजार, शुद्धता और कारोबार के समय के हिसाब से रेट में अंतर हो सकता है। सोमवार को एक अन्य बाजार रिपोर्ट में 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,52,590 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,36,240 प्रति किलो बताया गया। सोने के भाव में फिर आई नरमी पिछले कुछ समय से रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रहा Gold सोमवार को दबाव में नजर आया। घरेलू बाजार में भी इसकी कीमत में कमजोरी देखने को मिली। MCX पर अक्टूबर गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव करीब ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बना हुआ है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत इससे कम है। अगर आप ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं तो ध्यान रखें कि दुकान पर मिलने वाला अंतिम रेट बाजार भाव से अलग हो सकता है। Silver Price Today: चांदी भी हुई सस्ती सोने के साथ चांदी में भी कमजोरी रही। चांदी करीब ₹3,967 प्रति किलो सस्ती होने के बाद लगभग ₹2.35 लाख प्रति किलो के स्तर पर आ गई है। हालांकि, सोमवार के अलग-अलग बाजार अपडेट में चांदी का भाव करीब ₹2.36 लाख प्रति किलो भी बताया गया है। इससे साफ है कि कारोबार के समय के साथ कीमतों में बदलाव हो रहा है। आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना और चांदी? कीमती धातुओं में इस गिरावट का कनेक्शन सीधे ग्लोबल मार्केट से जुड़ा है। अमेरिका के रोजगार आंकड़े उम्मीद से मजबूत रहने के बाद वहां Federal Reserve की ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें बदली हैं। मजबूत अमेरिकी जॉब डेटा के बाद सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लेकर दांव बढ़े हैं। इसका असर सोने पर पड़ा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Spot Gold करीब 0.7% नीचे आया। वहीं Silver में भी लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई। अब आगे क्या होगा? अब बाजार की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है। इस सप्ताह PPI और CPI जैसे महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होने हैं। इनसे Federal Reserve की अगली ब्याज दर नीति को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में Gold और Silver में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। निवेशकों के साथ-साथ शादी या त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले लोगों की भी बाजार पर नजर बनी हुई है। Gold खरीदते समय सिर्फ भाव न देखें अगर आप आज सोना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो सिर्फ 10 ग्राम का बाजार भाव देखकर फैसला न लें। 22K या 24K purity, GST, making charges और ज्वेलर के अन्य शुल्क अंतिम कीमत को बदल सकते हैं। अलग-अलग शहरों और ज्वेलर्स के बीच भी रेट में अंतर हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने स्थानीय ज्वेलर से उसी समय का ताजा रेट जरूर पता करें। बाजार में तेजी से बदलाव होने के कारण सुबह और शाम के भाव में भी अंतर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sagar

Sagar में जहरीली शराब का कहर: 19 मौत, 112 मरीज भर्ती; Liquor Network पर पुलिस का शिकंजा

मध्य प्रदेश के सागर (Sagar) जिले में जहरीली शराब ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने का सिलसिला शुरू हुआ और देखते ही देखते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। अब तक 19 लोगों की मौत की बात सामने आई है, जबकि 112 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती बताए जा रहे हैं। मृतकों में पिता-पुत्र के शामिल होने की जानकारी ने इस घटना को और दर्दनाक बना दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। पुलिस ने लाइसेंसी शराब ठेकेदारों समेत 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें से 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। अधिकारियों की नजर अब उस पूरे नेटवर्क पर है, जिसके जरिए कथित तौर पर मिलावटी या जहरीली शराब लोगों तक पहुंची। शराब पीने के बाद बिगड़ी लोगों की तबीयत जानकारी के मुताबिक, सागर जिले के बंडा क्षेत्र में कई लोगों ने शराब का सेवन किया था। इसके बाद एक के बाद एक लोगों की तबीयत खराब होने लगी। कुछ लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। स्थानीय स्तर पर इलाज के बाद गंभीर मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर किया गया। अस्पतालों में अचानक मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया। प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों को भेजकर लोगों की जांच की जा रही है। प्रशासन यह भी पता लगाने में जुटा है कि कितने लोगों ने संदिग्ध शराब का सेवन किया था। 112 मरीजों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज जहरीली शराब की आशंका के बाद अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या लगातार चिंता बढ़ा रही है। 112 लोगों के इलाज की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में पहुंचकर स्थिति पर नजर रख रही हैं। अधिकारियों का फोकस इस बात पर है कि संदिग्ध शराब पीने वाले किसी व्यक्ति की हालत बिगड़ने पर उसे समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सके। पिता-पुत्र की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ इस हादसे में पिता-पुत्र की मौत की खबर ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। एक ही परिवार के दो सदस्यों की जान जाने से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के बाद प्रभावित इलाकों में मातम का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि शराब की एक बोतल इतनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। अब लोगों में अवैध और संदिग्ध शराब की बिक्री को लेकर डर भी है और गुस्सा भी। 30 नामजद आरोपियों पर FIR, 10 गिरफ्तार पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 30 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें लाइसेंसी शराब कारोबार से जुड़े लोगों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शराब की सप्लाई कहां से हुई और इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया। अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी है। जांच में जिस किसी की भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई है। लाइसेंसी ठेकेदारों की भूमिका भी जांच के घेरे में मामले में लाइसेंसी शराब ठेकेदारों के नाम सामने आने के बाद आबकारी विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता कर रही हैं कि यदि शराब की बिक्री वैध दुकानों से हुई थी, तो उसमें मिलावट कैसे पहुंची। अधिकारियों की जिम्मेदारी और संभावित लापरवाही की भी जांच की जा रही है। प्रशासन की कोशिश है कि शराब के स्रोत से लेकर इसकी बिक्री तक पूरी चेन का पता लगाया जाए। जहरीली शराब की सप्लाई का नेटवर्क खंगाल रही पुलिस पुलिस को शक है कि इस मामले के पीछे सिर्फ कुछ स्थानीय लोगों का हाथ नहीं, बल्कि शराब की सप्लाई से जुड़ा बड़ा नेटवर्क भी हो सकता है। जांच एजेंसियां शराब की बोतल, लेबल और सप्लाई चैन से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जहरीली शराब लोगों तक कैसे पहुंची और इस लापरवाही के पीछे कौन जिम्मेदार है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है। प्रशासन की नजर अब हर कड़ी पर सागर की इस घटना ने अवैध और मिलावटी शराब के कारोबार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग भी प्रभावित लोगों की निगरानी कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल परिवार अपनों को खोने के दर्द में हैं और अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन उनके जल्द ठीक होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस जहरीली शराब की असली सप्लाई कहां से हुई और इस पूरे मामले में किसकी कितनी भूमिका थी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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