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जबलपुर में बड़ा घोड़ा कांड: 57 में से 19 घोड़ों की मौत, 14 घोड़े गायब — हाईकोर्ट में मामला पेंडिंग, कलेक्टर ने जांच और FIR के संकेत दिए

हैदराबाद से जबलपुर लाए गए 57 घोड़ों के मामले में नया खुलासा सामने आया है। इनमें से 19 घोड़ों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 घोड़े रहस्यमयी तरीके से गायब हैं। पशुपालन विभाग की गिनती में गुरुवार को यह बड़ा अंतर सामने आया। यह पूरा मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में भी पेंडिंग है। कैसे शुरू हुआ मामला? मई 2025 में रायपुर निवासी सचिन तिवारी 57 घोड़ों को ट्रकों से हैदराबाद से जबलपुर लेकर आए। इन्हें पनागर के रैपुरा स्थित फॉर्म हाउस में रखा गया।धीरे-धीरे 19 घोड़ों की मौत हो गई। उस समय कलेक्टर रहे दीपक सक्सेना ने जांच करवाई, लेकिन यह साफ नहीं हो पाया कि इतने घोड़े क्यों लाए गए और किस उद्देश्य से रखे गए। 14 घोड़े कहां गए? विभाग भी परेशान पशु चिकित्सा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. प्रफुल्ल मून ने बताया कि: डॉ. मून के अनुसार, सचिन तिवारी घोड़ों को किसी दूसरे स्थान पर ले गया है, लेकिन वह इसकी जानकारी देने से बच रहा है। कलेक्टर ने कहा — “FIR भी होगी” कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।उन्होंने कहा: घातक बीमारी ने भी बढ़ाया संकट सूत्रों के अनुसार, एक घोड़े में गैलेंडर नामक घातक बीमारी की पुष्टि हुई थी।यह बीमारी: उच्च नस्ल के, लाखों रुपये कीमत वाले घोड़े लाए गए घोड़ों में शामिल थे: कुल: 41 फीमेल और 16 मेल घोड़ेये नस्लें रेस में उपयोग होती हैं और इनकी कीमत लाखों तक होती है। PETA का गंभीर आरोप — मामला ऑनलाइन सट्टे से जुड़ा PETA की कार्यकर्ता सिमरन ईशर ने बड़ा दावा किया है: फिलीपींस सरकार के अलर्ट के बाद तेलंगाना सरकार ने यह रेस बंद करवा दी।गिरफ्तारी से बचने के लिए सुरेश पलादुगू ने 154 घोड़ों को देशभर में इधर-उधर भेज दिया, जिनमें से 57 घोड़े जबलपुर पहुंचे। यह मामला लगातार गहराता जा रहा है और अब प्रशासन, हाईकोर्ट और पशुपालन विभाग तीनों की नजरें इस पर हैं। आने वाले दिनों में घोड़ों के गायब होने की सच्चाई सामने आ सकती है। For more info visit: www.deshharpal.com
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भोपाल मेट्रो की बड़ी खबर: CMRS टीम ट्रैक पर उतरी, 4 बजे तक चलेगा निरीक्षण — नवंबर में शुरू हो सकता है कॉमर्शियल रन

भोपाल मेट्रो को शुरू करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ गया है। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम अब सीधे मेट्रो ट्रैक पर निरीक्षण कर रही है। शुक्रवार सुबह 10 बजे से टीम का निरीक्षण शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक चलेगा। इस दौरान टीम खुद मेट्रो में सफर कर सारे तकनीकी और सुरक्षा मानकों की जांच कर रही है तीन दिन के भोपाल दौरे पर CMRS टीम नई दिल्ली से आई टीम ने गुरुवार को डिपो, एम्स स्टेशन तक के ट्रैक, सिग्नलिंग सिस्टम और सुरक्षा उपायों की जांच की। आरकेएमपी स्टेशन पर रेल ट्रैक की ढाल और पानी निकासी की जांच के लिए ट्रैक पर पानी छोड़ा गया। पहले दिन टीम लगभग 8 घंटे मेट्रो प्रोजेक्ट की हर डिटेल जांचती रही। सुभाषनगर डिपो में पूरे प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन भी देखा गया। दूसरे दिन भी भारी निरीक्षण, मेट्रो में सफर कर होगी जांच शुक्रवार को फिर सुबह 10 बजे से निरीक्षण शुरू हुआ। टीम मेट्रो में बैठकर ट्रैक पर जा रही है ताकि मेट्रो के अंदर से ही हर तकनीकी बिंदु की सटीक जांच की जा सके। CMRS क्या करता है? किसी भी मेट्रो को यात्रियों के लिए शुरू करने से पहले अंतिम सुरक्षा स्वीकृति CMRS ही देता है।टीम इन बिंदुओं पर जांच कर रही है: अगर कोई कमी मिलती है तो उसे ठीक किए बिना मेट्रो को चलाने की अनुमति नहीं मिलती। पिछले दौरे में जो खामियां मिली थीं, उन्हें अब तक ठीक किया जा चुका है। इसलिए इस बार टीम से “ओके रिपोर्ट” मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पहली बार भोपाल पहुंचे मेट्रो कमिश्नर नए मेट्रो कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता पहली बार भोपाल आए हैं। टीम वही पुरानी है, इसलिए कॉमर्शियल रन में रुकावट की संभावना कम मानी जा रही है। अक्टूबर में नहीं मिली अनुमति, अब नवंबर में दौड़ने की उम्मीद सरकार ने पहले अक्टूबर में मेट्रो चलाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बिहार चुनाव की वजह से निरीक्षण में देरी हुई।अब माना जा रहा है कि नवंबर में भोपाल मेट्रो यात्रियों के लिए ट्रैक पर दौड़ सकती है। सीएमआरएस की रिपोर्ट सीधे राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, और मंजूरी मिलते ही कॉमर्शियल रन की फाइनल डेट घोषित होगी।संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल मेट्रो के पहले यात्री बनें। पहले ही मिल चुकी है RDSO की ओके रिपोर्ट रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) पहले ही मेट्रो की टेस्टिंग कर अपनी ओके रिपोर्ट दे चुका है। वहीं से दस्तावेज CMRS को भेजे गए, जिसके बाद निरीक्षण तय हुआ। 2018 में शुरू हुआ था मेट्रो प्रोजेक्ट 3 अक्टूबर 2023 को पहला ट्रायल हुआ था, जब तब के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मेट्रो में सफर किया था। अब CMRS की रिपोर्ट का इंतजार है — और उसके बाद भोपाल मेट्रो आम लोगों के लिए कभी भी शुरू हो सकती है। For more info visit: deshharpal.com भोपाल मेट्रो को शुरू करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ गया है। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम अब सीधे मेट्रो ट्रैक पर निरीक्षण कर रही है। शुक्रवार सुबह 10 बजे से टीम का निरीक्षण शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक चलेगा। इस दौरान टीम खुद मेट्रो में सफर कर सारे तकनीकी और सुरक्षा मानकों की जांच कर रही है। तीन दिन के भोपाल दौरे पर CMRS टीम नई दिल्ली से आई टीम ने गुरुवार को डिपो, एम्स स्टेशन तक के ट्रैक, सिग्नलिंग सिस्टम और सुरक्षा उपायों की जांच की। आरकेएमपी स्टेशन पर रेल ट्रैक की ढाल और पानी निकासी की जांच के लिए ट्रैक पर पानी छोड़ा गया। पहले दिन टीम लगभग 8 घंटे मेट्रो प्रोजेक्ट की हर डिटेल जांचती रही। सुभाषनगर डिपो में पूरे प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन भी देखा गया। दूसरे दिन भी भारी निरीक्षण, मेट्रो में सफर कर होगी जांच शुक्रवार को फिर सुबह 10 बजे से निरीक्षण शुरू हुआ। टीम मेट्रो में बैठकर ट्रैक पर जा रही है ताकि मेट्रो के अंदर से ही हर तकनीकी बिंदु की सटीक जांच की जा सके। CMRS क्या करता है? किसी भी मेट्रो को यात्रियों के लिए शुरू करने से पहले अंतिम सुरक्षा स्वीकृति CMRS ही देता है।टीम इन बिंदुओं पर जांच कर रही है: अगर कोई कमी मिलती है तो उसे ठीक किए बिना मेट्रो को चलाने की अनुमति नहीं मिलती। पिछले दौरे में जो खामियां मिली थीं, उन्हें अब तक ठीक किया जा चुका है। इसलिए इस बार टीम से “ओके रिपोर्ट” मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पहली बार भोपाल पहुंचे मेट्रो कमिश्नर नए मेट्रो कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता पहली बार भोपाल आए हैं। टीम वही पुरानी है, इसलिए कॉमर्शियल रन में रुकावट की संभावना कम मानी जा रही है। अक्टूबर में नहीं मिली अनुमति, अब नवंबर में दौड़ने की उम्मीद सरकार ने पहले अक्टूबर में मेट्रो चलाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बिहार चुनाव की वजह से निरीक्षण में देरी हुई।अब माना जा रहा है कि नवंबर में भोपाल मेट्रो यात्रियों के लिए ट्रैक पर दौड़ सकती है। सीएमआरएस की रिपोर्ट सीधे राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, और मंजूरी मिलते ही कॉमर्शियल रन की फाइनल डेट घोषित होगी।संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल मेट्रो के पहले यात्री बनें। पहले ही मिल चुकी है RDSO की ओके रिपोर्ट रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) पहले ही मेट्रो की टेस्टिंग कर अपनी ओके रिपोर्ट दे चुका है। वहीं से दस्तावेज CMRS को भेजे गए, जिसके बाद निरीक्षण तय हुआ। 2018 में शुरू हुआ था मेट्रो प्रोजेक्ट 3 अक्टूबर 2023 को पहला ट्रायल हुआ था, जब तब के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मेट्रो में सफर किया था। अब CMRS की रिपोर्ट का इंतजार है — और उसके बाद भोपाल मेट्रो आम लोगों के लिए कभी भी शुरू हो सकती है। For more info visit: www.deshharpal.com
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अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट की जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर हंगामा, आत्मदाह और सुसाइड की धमकी देकर रोका कार्रवाई

इंदौर के अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट की जमीन पर चल रहा कब्जे का विवाद शुक्रवार को उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब कलेक्टर के निर्देश पर पुलिस, नगर निगम और प्रशासन की संयुक्त टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची। टीम के पहुंचते ही वहां मौजूद कई परिवारों ने जमकर विरोध शुरू कर दिया। परिवारों का हंगामा, खुद को आग लगाने की कोशिश जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, एक महिला सहित दो युवकों ने खुद पर घासलेट उड़ेलकर आग लगाने की कोशिश की। पुलिस ने तत्‍काल पानी डालकर उन्हें काबू में किया और हिरासत में ले लिया। इसी दौरान एक युवती घर की चद्दर पर चढ़कर सुसाइड की धमकी देने लगी। महिला पुलिसकर्मी ने जोखिम उठाकर उसे नीचे उतारा, इस दौरान युवती घायल भी हो गई। चार परिवार कर रहे थे कब्जा पुलिस के अनुसार, कुल चार परिवारों ने अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट की जमीन पर अवैध कब्जा किया हुआ था। ट्रस्ट ने इस संबंध में लंबे समय से शिकायतें दी थीं। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर एसडीएम और तहसीलदार ने जांच की, जिसमें जमीन मंदिर की ही पाई गई। इसके बाद गुरुवार को कब्जा हटाने का आदेश जारी किया गया। बिजली पोल पर चढ़कर धमकी हंगामे के दौरान एक युवक मंदिर परिसर की दीवार और फिर बिजली के पोल पर चढ़ गया। उसने तार पकड़कर आत्महत्या की धमकी दी, ताकि कार्रवाई रुक सके। हालांकि प्रशासन पहले ही एहतियातन बिजली सप्लाई बंद करवा चुका था। पुलिस ने काफी प्रयास के बाद युवक को नीचे उतारा। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी तनाव और विरोध के बावजूद नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटाने में जुटी रही। पूरे मामले में प्रशासन ने स्थिति पर नियंत्रण पा लिया है और आगे की कार्रवाई जारी है। For more info visit: www.deshharpal.com
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इंदौर में चूहों का कहर: एमवाय अस्पताल के बाद अब शास्त्री ब्रिज और गांधी प्रतिमा के नीचे हजारों बिल, निगम ने शुरू की कार्रवाई

इंदौर में चूहों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सितंबर में एमवाय अस्पताल में दो मासूमों की उंगलियां चूहों ने कुतर दी थीं, और अब शहर के शास्त्री ब्रिज व रीगल तिराहा स्थित गांधी प्रतिमा के नीचे चूहों के बिलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। शास्त्री ब्रिज की सड़क चूहों के कारण धंसी 2 नवंबर को शास्त्री मार्केट की तरफ जाने वाले शास्त्री ब्रिज की सड़क अचानक धंस गई, जिससे लगभग 5 फीट गहरा और 6 फीट लंबा गड्ढा बन गया था।जांच में पाया गया कि सड़क के नीचे चूहों के बिल होने से मिट्टी कमजोर हो गई थी। निगम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर रोड बंद कराई और ट्रैफिक डायवर्ट किया। नगर निगम के जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर ने बताया कि गड्ढे के अंदर अब चूहों के लिए ट्रीटमेंट कराया जाएगा, ताकि वे दोबारा वहां बिल न बना सकें।उन्होंने कहा, “गड्ढे के अंदर दीवार बनाकर उसे प्लास्टर किया जा रहा है। ट्रीटमेंट के बाद ब्लॉक लगाकर सड़क को पूरी तरह दुरुस्त किया जाएगा।” गांधी प्रतिमा परिसर में भी हजारों चूहे मिले इसी बीच, रीगल तिराहा स्थित गांधी प्रतिमा परिसर में भी चूहों की भरमार देखने को मिली है।राठौर ने बताया कि प्रतिमा के नीचे और आसपास हजारों चूहों के बिल बने हुए हैं। उन्होंने कहा, “हमें कई शिकायतें मिली थीं कि यहां पक्षियों को दाना डालने से चूहों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हमने स्थल का निरीक्षण किया है और विशेषज्ञों की टीम से परीक्षण कराया जाएगा।” बड़ा हादसा होने की आशंका राठौर ने चेतावनी दी कि अगर चूहों की समस्या को समय रहते नहीं सुलझाया गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।नगर निगम जल्द ही एक एक्शन प्लान तैयार कर इन दोनों स्थलों पर स्थायी समाधान की दिशा में काम करेगा। 👉 ऐसी ही स्थानीय और सटीक खबरों के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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खेत से लौट रहे किसान को बाइक सवार ने मारी टक्कर, मौके पर मौत — गांव में छाया मातम

खंडवा जिले के पंधाना क्षेत्र के ग्राम निहालवाड़ी में बुधवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। हादसे में 48 वर्षीय किसान लक्ष्मीनारायण पिता हीरालाल पटेल की मौके पर ही मौत हो गई। वह रात में अपने खेत से पैदल घर लौट रहे थे, तभी पीछे से आ रहे एक बाइक सवार ने जोरदार टक्कर मार दी। आरोपी भी उसी गांव का, हादसे के बाद बेहोश हुआ हादसे में बाइक सवार युवक भी गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि वह भी निहालवाड़ी गांव का ही रहने वाला है। टक्कर के बाद वह सड़क पर गिरकर बेहोश हो गया था। ग्रामीणों की मदद से उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ लक्ष्मीनारायण की मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके पीछे एक बेटा और दो बेटियां हैं। पिता की मौत की खबर मिलते ही परिवार और पूरे गांव में मातम छा गया। ग्रामीणों ने बताया कि लक्ष्मीनारायण मेहनती और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे, जो रोज की तरह उस दिन भी खेत से घर लौट रहे थे। पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा। गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।गांव के संगमेश्वर मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। 👉 ऐसी ही और खबरों के लिए पढ़ें: www.deshharpal.com
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भोपाल में आलमी तब्लीगी इज्तिमा के दौरान ट्रैफिक में बदलाव, पुलिस ने जारी किया विशेष प्लान

भोपाल के घासीपुरा ईंटखेड़ी में 14 से 17 नवंबर तक आयोजित होने वाले आलमी तब्लीगी इज्तिमा के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा। लाखों धर्मावलंबियों के आने की संभावना को देखते हुए भोपाल ट्रैफिक पुलिस ने विशेष ट्रैफिक प्लान जारी किया है। 17 नवंबर को सबसे अधिक दबाव रहेगा आयोजन के अंतिम दिन 17 नवंबर की सुबह दुआ की नमाज के दौरान पुराने शहर से इज्तिमा स्थल की ओर जाने वाले रास्तों पर भारी भीड़ और जाम की स्थिति रहेगी।सुबह 6 बजे से ही मुबारकपुर, पटेल नगर नया बायपास, गांधी नगर, अयोध्या नगर बायपास, रत्नागिरी, लांबाखेड़ा, करोंद, भोपाल टॉकीज, पीरगेट, मोती मस्जिद, रॉयल मार्केट, लालघाटी, नादरा बस स्टैंड और भारत टॉकीज इलाकों में ट्रैफिक का दबाव रहेगा।पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें और अनावश्यक यात्रा से बचें। एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वालों के लिए वैकल्पिक मार्ग भारी वाहनों पर रोक और डायवर्जन 15 नवंबर की सुबह 7 बजे से बैरसिया रोड से करोंद चौक तक भारी वाहनों, डंपर और मिक्सर पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। वहीं, 17 नवंबर की सुबह 4 बजे से भोपाल की सीमाओं में सभी भारी मालवाहक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा। पार्किंग व्यवस्था 120 एकड़ में पंडाल, 300 एकड़ में पार्किंग आयोजन समिति के मीडिया कोऑर्डिनेटर डॉ. उमर हफीज ने बताया कि इस बार पंडाल का क्षेत्रफल 100 एकड़ से बढ़ाकर 120 एकड़ कर दिया गया है, जबकि पार्किंग एरिया को 300 एकड़ तक फैला दिया गया है।कुल 70 पार्किंग जोन बनाए जा रहे हैं ताकि ट्रैफिक मैनेजमेंट सुचारू रहे। ट्रैफिक हेल्पलाइन अगर किसी नागरिक को असुविधा होती है, तो वे संपर्क कर सकते हैं: पुलिस ने अपील की है कि सभी लोग यातायात नियमों का पालन करें और प्रशासन का सहयोग करें, ताकि आयोजन के दौरान व्यवस्था बनी रहे। 👉 और अधिक जानकारी के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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Bhopal

Bhopal Metro CMRS Inspection के बाद जल्द मिलेगी Green Signal

भोपाल की जनता का इंतज़ार अब खत्म होने वाला है। राजधानी की पहली Bhopal Metro अब लॉन्च के एक कदम पहले है।Commissioner of Metro Rail Safety (CMRS) की टीम फिलहाल शहर में है और Subhash Nagar Depot से AIIMS Bhopal तक के 7 किलोमीटर लंबे Priority Corridor का निरीक्षण कर रही है। 98% Construction Complete – अब सिर्फ Final Approval बाकी मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) के अधिकारियों ने बताया कि इस रूट का करीब 98% काम पूरा हो चुका है।इस रूट में कुल 8 स्टेशन हैं — Subhash Nagar Depot, DB Mall, Board Office, MP Nagar, Habibganj, DRM Office और AIIMS Bhopal जैसे महत्वपूर्ण पॉइंट शामिल हैं। इससे पहले RDSO (Research Designs & Standards Organisation) ने मेट्रो के ट्रैक और टेक्निकल सिस्टम को मंजूरी दे दी थी। अब CMRS द्वारा सुरक्षा और संचालन मानकों की जांच की जा रही है। CMRS Report के बाद मिलेगी ‘OK’ Signal – Launch Possible Soon सूत्रों के अनुसार, CMRS Inspection Report अगर पॉजिटिव आती है तो भोपाल मेट्रो को जल्द ही संचालन की मंजूरी मिल जाएगी। Bhopal Metro Route & Benefits पहले चरण में यह रूट राजधानी के उत्तर और दक्षिण हिस्सों को जोड़ेगा। आने वाले चरणों में पूरे शहर को नेटवर्क से कवर किया जाएगा।मेट्रो शुरू होने के बाद — अभी बाकी हैं ये काम भले ही Trial Runs सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं, लेकिन अभी कुछ स्टेशन पर फिनिशिंग टच, साइनबोर्ड, सुरक्षा और सिग्नलिंग सिस्टम का अंतिम निरीक्षण जारी है।अगर सब कुछ ठीक रहा, तो भोपाल मेट्रो नवंबर के अंत तक जनता के लिए शुरू हो सकती है। Modern Features of Bhopal Metro हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बिलासपुर रेल हादसा: एक और छात्रा की मौत, अब तक 12 लोगों की जान गई

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे में घायल कॉलेज छात्रा महविश परवीन (19) ने एक सप्ताह तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद दम तोड़ दिया। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में मृतकों की संख्या 12 पहुंच गई है। हादसे में गंभीर रूप से घायल थी छात्रा महविश बिलासपुर के डीपी विप्र कॉलेज में बीएससी गणित की नियमित छात्रा थी। वह जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा की रहने वाली थी और बिलासपुर में रहकर पढ़ाई करती थी।4 नवंबर को वह रिश्तेदार की शादी में शामिल होकर घर से कोरबा-बिलासपुर मेमू ट्रेन से लौट रही थी। लालखदान स्टेशन के पास यह ट्रेन मालगाड़ी से टकरा गई। महविश ट्रेन के महिला कोच में सवार थी। टक्कर इतनी तेज थी कि उसके दोनों पैर लोहे के एंगल के नीचे दब गए और कई जगह फ्रैक्चर हो गए। झटके के कारण उसकी कॉलर बोन और पसलियों की चार हड्डियां भी टूट गईं। घटना के तुरंत बाद उसे सिम्स लाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर अपोलो अस्पताल रेफर किया गया। एक सप्ताह तक जिंदगी से लड़ती रही, फिर मौत ने छीन ली जिंदगी अपोलो अस्पताल में डॉक्टर लगातार उसका इलाज कर रहे थे, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती गई।मंगलवार रात इलाज के दौरान महविश ने अंतिम सांस ली। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जो उसे लेकर अकलतरा रवाना हो गए। दिल की मरीज रह चुकी थी महविश, भाई की शादी में गई थी घर महविश के चाचा मोहम्मद रहमान ने बताया कि बचपन में उसे हृदय संबंधी बीमारी थी और रायपुर के एस्कॉर्ट अस्पताल में उसकी ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी। इलाज के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी थी।12वीं के बाद उसे बिलासपुर के डीपी विप्र कॉलेज में दाखिला दिलाया गया था।वह अपने चचेरे भाई की शादी के लिए घर गई थी — शादी 2 नवंबर को हुई थी और 4 नवंबर को वह बिलासपुर लौट रही थी, तभी यह हादसा हो गया। मुआवजे के लिए फर्जी दावा करने की कोशिश का खुलासा इस बीच, सोमवार को एक अन्य व्यक्ति पवन गढ़ेवाल को मृत अवस्था में सिम्स लाया गया।साथ आए लोगों ने दावा किया कि वह भी इसी रेल हादसे में घायल था। लेकिन पुलिस जांच में पता चला कि पवन की कोई मेडिकल हिस्ट्री या इलाज का रिकॉर्ड नहीं मिला।सीएसपी गगन कुमार ने बताया कि मुआवजे के लिए उसकी मौत को रेल हादसे से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। रेल हादसे की जांच अब भी जारी है, जबकि मृतकों के परिजनों को मुआवजा और घायलों के इलाज की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन ने ली है। 🔗 अधिक जानकारी और अपडेट के लिए देखें: www.deshharpal.com — सच्ची खबरें, संवेदनशील अंदाज में
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शादी के 9 साल बाद महिला ने की आत्महत्या, मायके वालों का आरोप — “ससुराल वालों ने किया प्रताड़ित

सागर जिले के सिविल लाइन थाना क्षेत्र के पथरिया जाट गांव में मंगलवार को एक महिला ने अपने ही घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। जब परिजन घर पहुंचे तो महिला का शव फंदे पर झूलता मिला। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, पंचनामा तैयार कर पोस्टमॉर्टम कराया गया और फिर शव परिजनों को सौंप दिया गया। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मायके वालों का आरोप — ससुराल वालों ने किया अत्याचार घटना की खबर मिलते ही मृतका के मायके पक्ष के लोग पथरिया पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला को लंबे समय से ससुराल पक्ष द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था।परिजनों ने कंट्रोल रूम पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। 9 साल पहले हुई थी शादी मृतका के पिता ने बताया कि उनकी बेटी की शादी करीब 9 साल पहले हुई थी और उसके दो बच्चे हैं।उन्होंने कहा कि दामाद आए दिन बेटी से मारपीट करता था और बुलेट गाड़ी मायके से लाने की मांग करता था।दहेज और अत्याचार से परेशान होकर बेटी कुछ महीने पहले मायके आ गई थी। पिता ने बताया कि बाद में दामाद के बड़े भाई आए और भरोसा दिलाया कि अब ऐसा कुछ नहीं होगा। इस भरोसे के बाद बेटी को वापस ससुराल भेज दिया गया।लेकिन मंगलवार को पुलिस से सूचना मिली कि बेटी ने फांसी लगाकर जान दे दी है। परिजनों का दावा — “मारपीट कर हत्या की गई” परिजनों ने कहा कि यह आत्महत्या नहीं, हत्या का मामला है।उनका कहना है कि बेटी को मारपीट कर फंदे पर लटकाया गया।ससुराल पक्ष के लोग लगातार उसे प्रताड़ित करते थे। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और कहा है कि सभी पहलुओं पर जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। 🔗 अधिक जानकारी और अपडेट के लिए देखें: www.deshharpal.com— सच्ची खबरें, संवेदनशील अंदाज में
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हॉस्टल से 15 वर्षीय छात्रा की मौत — परिजन कहते हैं — “हादसा नहीं, हत्या”

हत्या जूर गांव के माता शबरी कन्या शिक्षा परिसर में 15 साल की छात्रा पूजा किरेड़े की मौत ने परिवार और इलाके में गहरा सदमा पैदा कर दिया है। परिजनों का आरोप है कि पूजा हॉस्टल की चौथी मंजिल से धक्का देकर गिराई गई थी, जबकि हॉस्टल वार्डन और उसकी बेटी पर पहले से ही प्रताड़ना के आरोप लगे हुए हैं। क्या हुआ: पूजा का एग्जाम था और एक दिन पहले ही उसे हॉस्टल से घर छोड़ा गया था। अगले दिन खबर मिली कि वह हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरी मिली। इलाज के दौरान जब पूजा होश में आई तो उसने परिजनों को बताया — “मुझे किसी ने धक्का दिया है।”आठ दिन इंदौर के इंडेक्स अस्पताल में इलाज के बाद 9 नवंबर को पूजा की मौत हो गई। परिजनों की मांग — हत्या का केस दर्ज किया जाए परिजन कलेक्टर, एसपी और सहायक आयुक्त आदिम जाति कल्याण को ज्ञापन देकर मांग कर चुके हैं कि घटना की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कर हत्या का मामला दर्ज किया जाए।पिता सुंदर सिंह और रिश्तेदारों का कहना है कि पूजा के शरीर पर चोट के भी निशान मिले हैं और वह खुद नहीं मर सकती थी। उनका पूरा संदेह हॉस्टल वार्डन और उसकी बेटी प्राची पर है — जिन्होंने कथित रूप से पूजा को लगातार प्रताड़ित किया था। वार्डन की दलील और जांच वार्डन कोकिला बौरासी का कहना है कि पूजा पर “भूत-प्रेत” का साया था और वह अक्सर बीमार रहती थी। परिजन इस दावे को खारिज करते हैं।कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है।कमेटी का नेतृत्व संयुक्त कलेक्टर निकिता मंडलोई कर रही हैं; उसमें मिट्टी परीक्षण अधिकारी कविता गवली और पिछड़ा वर्ग व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की इंस्पेक्टर सुनीता मुवेल शामिल हैं।जांच टीम ने हॉस्टल का निरीक्षण किया, स्टाफ व छात्राओं के बयान लिए और परिजनों से भी तफ्तीश की। चौंकाने वाले तथ्य जांच में यह भी पता चला कि वार्डन कोकिला के पास 60% दिव्यांगता का प्रमाण-पत्र है, बावजूद इसके उन्हें वार्डन का पद दिया गया था — जो नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।और सबसे बड़ी बात यह कि वार्डन का अधिकांश काम उसकी बेटी प्राची ही संभालती थी, जिसे पीटीआई (स्पोर्ट्स टीचर) के रूप में नियोजित किया गया था।परिजन और छात्राएं बताती हैं कि प्राची अक्सर छात्राओं से मारपीट और मानसिक प्रताड़ना करती थी, और पूजा तथा प्राची के बीच कई बार विवाद हो चुका था। निलंबन और स्थानीय प्रतिक्रिया जनजातीय कार्य आयुक्त ने जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद वार्डन को निलंबित कर इंदौर संभागीय कार्यालय में अटैच कर दिया है।आदिवासी संगठनों ने आरोप लगाया है कि आदिवासी हॉस्टलों में बच्चों के साथ प्रताड़ना की घटनाएं सामान्य हैं और संदिग्ध मौतों को अक्सर हादसा बताकर दबा दिया जाता है।टंट्या मामा आदिवासी संगठन की महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष ममता मोरे ने भी इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। परिजन अब न्याय की उम्मीद में हैं — वे चाहते हैं कि निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और भविष्य में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय किए जाएं। अधिकारिक जांच रिपोर्ट और आगे के कदमों पर हम नजर बनाए रखेंगे। 🔗 अधिक जानकारी और अपडेट के लिए देखें: deshharpal.com— सच्ची खबरें, संवेदनशील अंदाज में
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सागर में बड़ा अनाज घोटाला? वेयरहाउस में पहुंचा 90% मिट्टी मिला गेहूं, जांच के आदेश

सागर के गंभीरिया स्थित श्री देव प्रभा वेयर हाउस में मिट्टी मिला अमानक गेहूं पहुंचने का मामला सामने आया है। ट्रक में करीब 600 बोरियां भरकर गेहूं लाया गया था, लेकिन जांच में बोरियों में लगभग 10 प्रतिशत गेहूं और 90 प्रतिशत मिट्टी होने का दावा किया गया है। मामला सामने आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। कर्मचारी को हुआ शक, खुली मिलावट की पोल जानकारी के अनुसार, लक्ष्मी नगर स्थित श्री देव प्रभा वेयर हाउस को वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन की सांईखेड़ा ब्रांच ने करीब एक माह पहले अधिग्रहित किया था। यहां विभिन्न उपार्जन केंद्रों से गेहूं लाकर संग्रहित किया जा रहा है। इसी दौरान ट्रक क्रमांक MP 15 ZR 9190 करीब 600 बोरियां लेकर वेयर हाउस पहुंचा। मजदूर जब बोरियां उतार रहे थे, तभी वेयर हाउस की निगरानी कर रहे कर्मचारी को गेहूं की गुणवत्ता पर संदेह हुआ। जांच करने पर बोरियों में बड़ी मात्रा में मिट्टी भरी मिली। सुपरवाइजर ने तुरंत लौटाई खेप वेयरहाउस सुपरवाइजर ने बोरियों में मिलावटी और अमानक गेहूं पाए जाने के बाद पूरी खेप वापस लौटा दी। इसके बाद मामले की जानकारी प्रशासन को दी गई। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने दिए जांच के आदेश मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतिभा पाल ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। सोमवार को प्रशासन और खाद्य विभाग की टीम वेयर हाउस पहुंची और गेहूं की गुणवत्ता, खरीद प्रक्रिया, परिवहन और उसके स्रोत की जांच शुरू की। गेहूं कहां से आया, कौन जिम्मेदार? जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि गेहूं कहां से लाया गया, किसके द्वारा खरीदा गया और इसमें इतनी बड़ी मिलावट कैसे हुई। स्थानीय स्टाफ से भी पूछताछ की जा रही है। दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com

मध्य प्रदेश के संविदा कर्मचारियों को बड़ी राहत: बढ़ेगा वेतन, वित्त विभाग ने जारी किए आदेश

मध्य प्रदेश के एक लाख से अधिक संविदा अधिकारी और कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने उनके पारिश्रमिक में 4.46 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि लागू करने का फैसला किया है। वित्त विभाग ने सोमवार को इसके आदेश जारी कर दिए हैं। यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। पिछले साल से ज्यादा बढ़ा पारिश्रमिक इस बार संविदा कर्मचारियों को मिलने वाली वृद्धि दर पिछले साल की तुलना में अधिक है। वर्ष 2025 में संविदा कर्मचारियों के पारिश्रमिक में 3.87 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि इस बार यह बढ़कर 4.46 प्रतिशत हो गई है। CPI के आधार पर तय होती है बढ़ोतरी वित्त विभाग ने यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग की 22 जुलाई 2023 की संविदा नीति के आधार पर जारी किया है। इस नीति के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर हर साल संविदा कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की जाती है। डेढ़ लाख में से सिर्फ एक लाख कर्मचारियों को फायदा प्रदेश में करीब डेढ़ लाख संविदा अधिकारी-कर्मचारी विभिन्न विभागों में कार्यरत हैं, लेकिन नई बढ़ोतरी का लाभ सभी को नहीं मिलेगा। जिन विभागों में अभी तक 2023 की संविदा नीति लागू नहीं हुई है, वहां के कर्मचारियों को इस बढ़ोतरी का फायदा नहीं दिया जाएगा। ऐसे में करीब एक लाख कर्मचारियों को ही इसका लाभ मिल पाएगा। संघ ने उठाई सभी विभागों में लागू करने की मांग संविदा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने सरकार से मांग की है कि जिन विभागों में अभी तक नई संविदा नीति लागू नहीं हुई है, वहां भी कर्मचारियों को CPI आधारित पारिश्रमिक वृद्धि का लाभ दिया जाए। संघ का कहना है कि सभी संविदा कर्मचारियों को समान रूप से फायदा मिलना चाहिए। कर्मचारियों में खुशी का माहौल सरकार के इस फैसले के बाद संविदा कर्मचारियों में खुशी का माहौल है। महंगाई के दौर में वेतन वृद्धि को कर्मचारियों ने राहत देने वाला कदम बताया है। अधिक खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
NEET

Education System Crisis: NEET-CBSE Controversy और Voter List Row ने बढ़ाई टेंशन

देश में शिक्षा व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने CBSE और NEET परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और SIR वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। खड़गे ने साफ कहा है कि लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और इसके लिए शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना चाहिए। NEET और CBSE Controversy: छात्रों के भविष्य पर सवाल NEET और CBSE परीक्षा प्रणाली को लेकर विपक्ष ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं: इन घटनाओं के चलते देशभर में छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी देखी जा रही है। SIR Voter List Issue: करोड़ों नाम हटाने का आरोप विपक्ष का आरोप है कि SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के दौरान: इस मुद्दे को लेकर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला बता रहा है, जबकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। INDIA Bloc का अगला कदम: CJI को Letter की तैयारी इस पूरे विवाद को गंभीर बताते हुए INDIA ब्लॉक ने कहा है कि वे जल्द ही देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखेंगे। उनका कहना है कि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है ताकि पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो सके और सच्चाई सामने आए। Political Heat Rising in India इस पूरे विवाद ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बता रहा है। छात्रों से लेकर मतदाताओं तक, दोनों मुद्दों ने आम लोगों के बीच भी चिंता बढ़ा दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

हाथियों की मौत अब मानी जाएगी संभावित क्राइम सीन: छत्तीसगढ़ वन विभाग की नई पहल

छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए वन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब जंगल में किसी हाथी की मौत होने पर उसे सिर्फ सामान्य घटना नहीं माना जाएगा, बल्कि संभावित अपराध स्थल मानकर उसकी वैज्ञानिक जांच की जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य हाथियों की संदिग्ध मौतों के पीछे की असली वजह सामने लाना है। रायगढ़ में हुआ विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी उद्देश्य से रायगढ़ में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्रदेशभर से 78 वन अधिकारी और पशु चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हुए। प्रशिक्षण कार्यक्रम वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में आयोजित किया गया। वैज्ञानिक जांच पर दिया गया जोर प्रशिक्षण में हाथियों की मौत के कारणों की वैज्ञानिक जांच, वन्यजीव अपराधों की पहचान और संरक्षण उपायों पर विशेष फोकस किया गया। अधिकारियों को बताया गया कि किसी मृत हाथी के मिलने पर घटनास्थल को सुरक्षित रखना, सबूत जुटाना और विषप्रयोग, शिकार या अन्य संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना बेहद जरूरी है। प्रदेश में बढ़ रही हाथियों की चुनौती वन विभाग के अनुसार छत्तीसगढ़ में फिलहाल करीब 450 हाथी विचरण कर रहे हैं। रायगढ़, जशपुर, कोरबा और सूरजपुर जिलों में हाथियों की बढ़ती गतिविधियों और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए यह प्रशिक्षण बेहद अहम माना जा रहा है। पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच की ट्रेनिंग वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को हाथियों की शारीरिक संरचना, स्वास्थ्य प्रबंधन और वैज्ञानिक पोस्टमार्टम प्रक्रिया की जानकारी दी गई। साथ ही जैविक नमूनों के संग्रहण, संरक्षण और लैब परीक्षण की आधुनिक तकनीकों पर भी प्रशिक्षण दिया गया। फील्ड में कराया गया प्रैक्टिकल प्रशिक्षण के दूसरे दिन अधिकारियों को मैदानी स्तर पर शव परीक्षण, रक्त और ऊतक नमूने लेने, रोग और विष विज्ञान जांच करने और दुर्गम इलाकों में सुरक्षित जांच प्रक्रिया अपनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने साझा किया अनुभव कार्यक्रम में भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान और वन्यजीव फोरेंसिक एवं स्वास्थ्य अध्ययन संस्थान के विशेषज्ञों ने आधुनिक जांच तकनीकों की जानकारी साझा की। इस दौरान वरिष्ठ वन अधिकारी प्रियंका पांडे सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। वन मंत्री बोले- संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान के जरिए हाथियों समेत सभी वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। देश और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com

बिलासपुर में बायोगैस संयंत्रों पर प्रशासन का फोकस, स्वच्छ ऊर्जा और जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा

बिलासपुर जिले में स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रशासन अब बायोगैस संयंत्रों के प्रभावी संचालन पर जोर दे रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर Sanjay Agrawal और जिला पंचायत सीईओ Sandeep Agrawal ने तखतपुर जनपद पंचायत के ग्राम गनियारी स्थित बायोगैस (गोबर गैस) संयंत्र का निरीक्षण किया। गैस उत्पादन और जैविक खाद पर हुई चर्चा निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने संयंत्र की कार्यप्रणाली, गैस उत्पादन क्षमता, गोबर की उपलब्धता और जैविक खाद निर्माण को लेकर चर्चा की। कलेक्टर ने कहा कि बायोगैस परियोजनाएं सिर्फ स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने का भी प्रभावी माध्यम हैं। गोबर की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश कलेक्टर ने गौठानों और पशुपालकों के माध्यम से गोबर की नियमित और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संयंत्र को पूरी क्षमता से चलाने के लिए कच्चे माल की लगातार आपूर्ति जरूरी है। इससे ग्रामीणों को भी अधिक लाभ मिल सकेगा। घरेलू ईंधन की जरूरत होगी पूरी अधिकारियों ने बताया कि बायोगैस संयंत्र से बनने वाली गैस का उपयोग घरेलू ईंधन के रूप में किया जा सकता है। इससे ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ और सस्ता ईंधन उपलब्ध होगा। संयंत्र से निकलने वाली स्लरी उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद के रूप में किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। जैविक खाद से किसानों को फायदा इससे खेती की लागत कम होगी और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी घटेगी। प्रशासन का मानना है कि इससे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। तकनीकी व्यवस्थाओं की समीक्षा निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पाइप लाइन, वाल्व, डाइजेस्टर और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने आवश्यक सुधार कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। वहीं जिला पंचायत सीईओ ने अधिकारियों को नियमित निगरानी और दैनिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल प्रशासन का मानना है कि बायोगैस संयंत्रों के बेहतर संचालन से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन और जैविक खेती को नई दिशा मिलेगी। इससे आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का लक्ष्य भी मजबूत होगा। देश और प्रदेश की ताजा खबरों के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com

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