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बिलासपुर सहित पूरे प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल, दफ्तरों में सन्नाटा, कामकाज पूरी तरह ठप

बिलासपुर समेत छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में सरकारी विभागों के कर्मचारियों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। हड़ताल के पहले ही दिन कलेक्ट्रेट सहित अधिकांश सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा, जिससे सरकारी कामकाज पूरी तरह प्रभावित हुआ। जरूरी कार्यों के लिए कार्यालय पहुंचे आम नागरिक भटकते नजर आए। वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों ने नेहरू चौक पर एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन किया और शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारी नेताओं ने साफ कहा कि यह आंदोलन लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर किया जा रहा है, जिसे सरकार लगातार नजरअंदाज करती रही है। कर्मचारी नेताओं का आरोप: सरकार के रवैए से बढ़ा आक्रोश कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वे काफी समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखते आ रहे थे, लेकिन शासन की ओर से केवल आश्वासन ही मिले। धरातल पर कोई ठोस फैसला नहीं होने के कारण कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता गया और अब उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। यह हड़ताल सोमवार से बुधवार तक चलेगी। पहले ही दिन दिखा हड़ताल का असर सोमवार को कलेक्ट्रेट समेत सभी प्रमुख सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी नदारद रहे। इसके चलते फाइलों का निपटारा नहीं हो सका और आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग जरूरी काम के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटते नजर आए। नेहरू चौक पर प्रदर्शन, बेमियादी हड़ताल की चेतावनी हड़ताल के पहले दिन कर्मचारियों ने नेहरू चौक पर प्रदर्शन किया। इस दौरान नेताओं ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना कर्मचारियों के बुढ़ापे का सहारा थी, जिसे सरकार ने बंद कर दिया। अन्य मांगों को लेकर भी लगातार संवाद की कोशिश की गई, लेकिन सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो वे बेमियादी हड़ताल पर जाएंगे। ये हैं अधिकारी-कर्मचारियों की 11 सूत्रीय मांगें 👉 छत्तीसगढ़ की हर बड़ी खबर और अपडेट के लिए पढ़ते रहें: deshharpal.com
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भारत माला प्रोजेक्ट घोटाला: छत्तीसगढ़ में ED की बड़ी कार्रवाई, 9 ठिकानों पर रेड, जमीन मुआवजा गड़बड़ी की जांच तेज

भारत माला परियोजना से जुड़े बहुचर्चित भूमि अधिग्रहण घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छत्तीसगढ़ में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी की टीम ने रायपुर और महासमुंद सहित कुल 9 ठिकानों पर छापेमारी की। रायपुर में हरमीत सिंह खनूजा और महासमुंद के मेघ बसंत इलाके में स्थित व्यवसायी जसबीर सिंह बग्गा के निवास पर ईडी ने रेड की है। इसके अलावा हरमीत खनूजा के ससुर ट्रांसपोर्टर हरमीत सिंह चावला और उनके एक करीबी के घर पर भी कार्रवाई जारी है। सूत्रों के मुताबिक, CRPF जवानों की सुरक्षा में ईडी की 10 सदस्यीय टीम चार गाड़ियों में सुबह पहुंची। टीम ने पंजाबीपारा स्थित हरमीत सिंह चावला के घर में प्रवेश कर दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू की। हरमीत सिंह चावला, मुख्य आरोपी हरमीत खनूजा के ससुर बताए जा रहे हैं। वहीं, महासमुंद में आर्यन होंडा एजेंसी के संचालक जसबीर सिंह बग्गा के मेघ बसंत कॉलोनी स्थित घर पर भी छापेमारी की गई। ED का दावा: मुआवजा भुगतान में बड़ी गड़बड़ी ईडी के अनुसार, भारत माला परियोजना के तहत रायपुर–विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में मुआवजा भुगतान को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। फिलहाल आरोपियों के ठिकानों के बाहर सुरक्षा बल तैनात हैं और किसी भी व्यक्ति को घर के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। ईडी की टीमें डिजिटल सबूतों, बैंक लेनदेन और दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं। क्या है पूरा मामला? जांच में सामने आया है कि हरमीत सिंह खनूजा इस घोटाले के मुख्य आरोपी और जमीन दलाल हैं। आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज, नकली बंटवारे और म्यूटेशन के जरिए भूमि मुआवजा हासिल किया और रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई। ईडी की जांच में उनके ससुर हरमीत सिंह चावला के पास भी घोटाले से जुड़े अहम लेनदेन और जानकारियां मिलने की बात कही जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सरकारी अधिकारी भी जांच के घेरे में ईडी के मुताबिक, भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा राशि के निर्धारण और भुगतान में नियमों का उल्लंघन हुआ है। इस मामले में निजी व्यक्तियों के साथ-साथ कुछ सरकारी अधिकारी और जमीन मालिक भी जांच के दायरे में हैं। आरोप है कि बैकडेट में दस्तावेज तैयार कर जमीन को टुकड़ों में बांटा गया और मुआवजा राशि को कई गुना बढ़ा दिया गया। बताया जा रहा है कि भारत माला प्रोजेक्ट में करीब 43 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। जमीन को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर NHAI को 78 करोड़ रुपये के भुगतान का दावा किया गया। इस केस में पहले भी कार्रवाई हो चुकी है, जिसमें कोरबा के डिप्टी कलेक्टर शशिकांत कुर्रे और जगदलपुर निगम कमिश्नर निर्भय साहू को सस्पेंड किया गया था। अभनपुर क्षेत्र में 9.38 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 324 करोड़ रुपये का मुआवजा तय किया गया था, जिसमें से 246 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है, जबकि 78 करोड़ रुपये का भुगतान फिलहाल रोक दिया गया है। 👉 भारत माला प्रोजेक्ट घोटाले समेत छत्तीसगढ़ की हर बड़ी और ताज़ा खबर के लिए पढ़ते रहें: deshharpal.com
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बिलासपुर: ध्वनि प्रदूषण, रास्ता बंद और कचरा जलाने पर हाईकोर्ट सख्त, अफसरों से शपथपत्र तलब

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ध्वनि प्रदूषण, रास्ता बंद करने और खुले में कचरा जलाने जैसी नागरिक समस्याओं पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। जनहित याचिका के रूप में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण वातावरण में जीने और सोने का मौलिक अधिकार देता है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने मामले में कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त से व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी। प्रकाशित खबरों पर HC का संज्ञान मीडिया रिपोर्ट्स में शहर और जिले से जुड़ी जनसमस्याएं सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने तीन मामलों को जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई शुरू की। कोर्ट ने माना कि इन समस्याओं से आम नागरिकों के मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। गर्डर लगाकर रास्ता बंद, स्कूली बच्चों को परेशानी सरकंडा क्षेत्र के शर्मा विहार और गीतांजलि सिटी कॉलोनी को जोड़ने वाली सड़क पर बिल्डर द्वारा गर्डर लगाकर रास्ता बंद करने का मामला सामने आया। इससे चारपहिया वाहनों की आवाजाही रुक गई और स्कूली बच्चों को लंबा वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है।हाईकोर्ट ने इसे गंभीर विषय बताते हुए नगर निगम आयुक्त को व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ जवाब देने के निर्देश दिए हैं। धार्मिक आयोजनों के नाम पर देर रात तक लाउडस्पीकर सरकंडा के ओम विहार इलाके में देर रात से सुबह तक तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजने से लोग परेशान हैं। शिकायतों के बावजूद राहत न मिलने पर कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अनुच्छेद 21 नागरिकों को शांत वातावरण में रहने और सोने का अधिकार देता है। इस मामले में कलेक्टर से शपथपत्र मांगा गया है। खुले में कचरा जलाने से बढ़ रहा प्रदूषण वार्ड नंबर 7, कालिका नगर में रोजाना कचरा जलाने से फैलने वाले धुएं से बच्चों और बुजुर्गों को परेशानी हो रही है। लोगों का कहना है कि समय पर कचरा न उठने के कारण यह स्थिति बन रही है। इस पर भी हाईकोर्ट ने कलेक्टर और निगम आयुक्त से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि नागरिक सुविधाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। 👉 ऐसी ही छत्तीसगढ़ और देशभर की ताज़ा, भरोसेमंद खबरों के लिए पढ़ते रहें — deshharpal.com
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Bilaspur Dhan Khareedi Scam: नियमों के खिलाफ वसूली, बिचौलियों का धान खपाने का आरोप, 3 लाख का अवैध धान जब्त

बिलासपुर जिले के धान खरीदी केंद्रों पर किसानों से नियमों के विपरीत वसूली और मनमानी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आरोप है कि व्यापारी और बिचौलियों का धान खरीदी केंद्रों में खपाया जा रहा है, जबकि जरूरतमंद किसान टोकन मिलने के बाद भी धान बेचने के लिए भटकने को मजबूर हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को प्रशासन ने अवैध धान भंडारण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए राइस मिल और किराना दुकान से करीब 3 लाख रुपए का धान जब्त किया है। समर्थन मूल्य की व्यवस्था पर सवाल राज्य सरकार ने किसानों को उनकी उपज का समर्थन मूल्य (MSP) दिलाने के लिए धान खरीदी की व्यवस्था की है, लेकिन जमीनी स्तर पर अफसरों और खरीदी केंद्र प्रभारियों की मिलीभगत से व्यवस्था प्रभावित होने का आरोप है। किसानों का कहना है कि उनका धान पीछे किया जा रहा है, जबकि बिचौलियों का धान आसानी से खरीदा जा रहा है। प्रति बोरी 1 किलो तक ज्यादा धान लेने का आरोप शासन के नियमों के अनुसार एक बोरी में 40 किलो 700 ग्राम धान लिया जाना चाहिए, लेकिन कई केंद्रों पर किसानों से 41 किलो 500 ग्राम से 41 किलो 700 ग्राम तक धान लिया जा रहा है। यानी प्रति बोरी करीब 1 किलो अतिरिक्त। किसानों ने इसकी शिकायतें भी कीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। टोकन के बाद भी नहीं हो रही तौल किसानों का कहना है कि टोकन कटवाने के बाद भी उनकी तौल नहीं हो रही। शुक्रवार को पहुंचे किसानों की तौल नहीं हुई और शनिवार-रविवार केंद्र बंद रहने के कारण उन्हें सोमवार तक इंतजार करना पड़ेगा। किसानों को डर है कि सोमवार को भी नंबर आएगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं। प्रशासन की कार्रवाई, 3 लाख का धान जब्त जिला प्रशासन का दावा है कि अवैध धान भंडारण पर लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन केस दर्ज किया गया। यह कार्रवाई बेलगहना नायब तहसीलदार समर्थ थवाईत, कोटा मंडी उप निरीक्षक सीजी गोस्वामी और नीतिश नायक की टीम ने की। कुल मिलाकर करीब 3 लाख रुपए का धान जब्त किया गया और मंडी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। 👉 इस मुद्दे से जुड़ी हर अपडेट, ग्राउंड रिपोर्ट और ब्रेकिंग न्यूज के लिए Deshharpal साइट विज़िट करें deshharpal.com
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बिलासपुर नगर निगम में स्टाफ की भारी कमी, विकास कार्य ठप—6 साल से नए सेटअप की मांग अधर में

बिलासपुर नगर निगम पिछले 6 साल से नए सेटअप की मांग कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हाल ही में महापौर पूजा विधानी ने उपमुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव से मुलाकात कर बताया कि लगातार रिटायर हो रहे कर्मचारियों के कारण स्टाफ बेहद कम हो गया है। इसका सीधा असर शहर के विकास कार्यों की गति पर पड़ रहा है। 2019 में वार्ड बढ़े, इलाके बढ़े… लेकिन स्टाफ वही का वही साल 2019 में बिलासपुर नगर निगम का क्षेत्र 30 से बढ़कर 133 वर्ग किलोमीटर हो गया।वार्डों की संख्या भी 56 से बढ़कर 70 हो गई। लेकिन इतने बड़े विस्तार के बावजूद— इसका नतीजा है कि आज निगम के कई दफ्तर स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे हैं। जोन-1: छह वार्ड, पर सब इंजीनियर सिर्फ एक! जोन-1 की सहायक जोन कमिश्नर रंजना अग्रवाल ने बताया कि उनके जोन में 6 वार्ड हैं, लेकिन काम संभालने के लिए उन्होंने माना कि इंजीनियरों की कमी से विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है। जोन-3: एक ही अधिकारी कई जिम्मेदारियों में उलझा जोन-3 के ईई प्रवीण शुक्ला पर एक साथ कई प्रभार हैं।वे— यह स्थिति साफ दिखाती है कि नगर निगम के लगभग हर जोन में इंजीनियरों की भारी कमी है। आने वाले महीनों में और खाली होंगे कई बड़े पद जोन क्रमांक 5 के जोन कमिश्नर प्रवेश कश्यप ने बताया— यानी आने वाले महीनों में इंजीनियरों की और कमी होने वाली है। निगम में इंजीनियरों के 50 से ज्यादा पद पहले से खाली बिलासपुर नगर निगम में अभी— निगम की मांग है कि बढ़े हुए वार्ड और एरिया के हिसाब से नया सेटअप तुरंत मंजूर किया जाए, ताकि पानी, सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सेवाएं सुचारू रूप से चल सकें। जानिए—कितने पद खाली हैं? For more information, visit: www.deshharpal.com
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बिलासपुर: 10वीं का छात्र 12 दिनों से लापता, रेलवे स्टेशन में मिली स्कूटी—परिजन बेहाल, पुलिस पर लापरवाही का आरोप

बिलासपुर में कक्षा 10वीं का छात्र विनय नायक (17) पिछले 12 दिनों से लापता है। 15 नवंबर को वह सुबह घर से स्कूल जाने के लिए निकला था, लेकिन उसके बाद वह कभी घर नहीं लौटा। उसका मोबाइल भी उसी दिन से बंद है, जबकि उसकी स्कूटी रेलवे स्टेशन पार्किंग में खड़ी मिली। यह मामला तोरवा थाना क्षेत्र का है। बेटे के गायब होने से घबराए परिजन लगातार उसकी तलाश में भटक रहे हैं। कई दिनों तक इंतज़ार के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला, तो वे SP ऑफिस पहुंचे और एसएसपी रजनेश सिंह से गुहार लगाई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस खोजबीन में लापरवाही कर रही है। स्कूल में उसी दिन पैरेंट्स-टीचर मीटिंग थी विनय के पिता महेश नायक, जो बारदाना खरीदी-बिक्री का काम करते हैं, बताते हैं कि 15 नवंबर को स्कूल में पैरेंट्स-टीचर मीटिंग थी। वे मीटिंग के लिए स्कूल गए थे, जबकि उनका बेटा सुबह 9 बजे स्कूल के लिए निकला था—लेकिन वह स्कूल पहुंचा ही नहीं। आखिरी बार पिता से हुई थी बात सुबह 9:45 बजे महेश ने विनय को फोन किया था, और उसी समय आखिरी बार उससे बात हुई। इसके बाद मोबाइल बंद हो गया और तब से विनय का कोई पता नहीं चला। परिवार खुद ही खोजबीन करता रहा, लेकिन कुछ सुराग हाथ नहीं लगा। रेलवे स्टेशन की पार्किंग में मिली स्कूटी तलाश करते हुए जब परिवार रेलवे स्टेशन पहुंचा, तो वहाँ विनय की स्कूटी पार्किंग में मिली। इससे आशंका है कि वह कहीं ट्रेन से गया हो, या उसे कोई बहला-फुसला कर अपने साथ ले गया हो। लेकिन उसका कोई निशान नहीं मिल पाया। परिजन बोले—पुलिस गंभीर नहीं है परिवार ने 16 नवंबर को ही घटना की सूचना पुलिस को दे दी थी, लेकिन उनका कहना है कि पुलिस पूरी गंभीरता से खोजबीन नहीं कर रही। इसी वजह से 12 दिन बीत जाने के बाद भी विनय का कोई पता नहीं चल सका। पोस्टर, सोशल मीडिया—हर जगह ढूंढ रहे हैं बेटा बेटे को खोजने के लिए परिजन पोस्टर बांट रहे हैं, सोशल मीडिया पर लगातार पोस्ट कर रहे हैं। 12 दिनों की बेचैनी के बाद अब परिवार को अनहोनी का डर सताने लगा है। परिजनों ने आखिरकार एसएसपी से शिकायत की है। एसएसपी रजनेश सिंह ने आश्वासन दिया है कि छात्र की तलाश के लिए हरसंभव कोशिश की जाएगी। For more information, visit: www.deshharpal.com
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वन मंत्री केदार कश्यप का कांग्रेस पर प्रहार: “दीपक बैज की लड़ाई अपनी ही पार्टी से”

छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज की असली लड़ाई पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और टी.एस. सिंहदेव से है, क्योंकि कांग्रेस के नेता अपने ही अध्यक्ष को लीडर नहीं मान रहे हैं। कश्यप ने तंज कसा कि इसी वजह से दीपक बैज को अपना कद बढ़ाने के लिए बाइक रैली निकालनी पड़ रही है। “कांग्रेस में फूट साफ दिखाई दे रही है” – कश्यप बिलासपुर में 20 नवंबर को आयोजित स्वदेशी मेले के समापन समारोह में पहुंचे मंत्री केदार कश्यप ने मीडिया से बातचीत में कहा: कश्यप ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को यह पसंद नहीं कि देश का नेतृत्व एक “चाय बेचने वाले नरेंद्र मोदी” के हाथ में है। इसलिए वे अराजकता फैलाने की कोशिश में लगे हैं। धान खरीदी को लेकर बड़ा दावा धान खरीदी में अव्यवस्था के कांग्रेस के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कश्यप ने कहा— 200 यूनिट बिजली रियायत और ‘सूर्य घर योजना’ से राहत मंत्री कश्यप ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 200 यूनिट तक बिजली बिल में रियायत की घोषणा की है।इसके साथ ही प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत लोग: स्वदेशी मेले में अपील – “देश को मजबूत बनाना है, तो स्वदेशी अपनाएँ” साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित 7 दिवसीय स्वदेशी मेले के समापन पर केदार कश्यप ने कहा कि: बृजमोहन अग्रवाल बोले— “गांव के उत्पाद अपनाओ, देश को ताकतवर बनाओ” सांसद व पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ी में कहा— बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने भी “स्व” के भाव के साथ आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। अचार, पापड़ से लेकर गौशाला की धूपबत्ती— स्वदेशी मेले में खूब बिकीं घरेलू चीजें सात दिन चले मेले में लोगों ने भारी उत्साह दिखाया।खास लोकप्रिय चीजें रहीं: 20 नवंबर को समापन पर भारी भीड़ और जाम ने साबित किया कि लोगों का भरोसा स्वदेशी पर लगातार बढ़ रहा है। केश सज्जा प्रतियोगिता में बच्चों और महिलाओं ने दिखाई प्रतिभा स्वदेशी मेले में गुरुवार को केश सज्जा प्रतियोगिता हुई।महिलाओं, युवतियों और मूक-बधिर बच्चों ने विभिन्न हेयर स्टाइल बनाकर अपनी प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया। सभी स्टाइल को फूलों, पिन, मोतियों और रंग-बिरंगे फीते से खूबसूरती से सजाया गया। इस कार्यक्रम में रुपसाय सलाम, लखन लाल साहू, आशीष जायसवाल, बबलू खंडेलवाल, मनोज भंडारी, गुलशन ऋषि, डॉ. देवेंद्र कौशिक सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। For More Info:www.deshharpal.com
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बिलासपुर: धान खरीदी तेज, लक्ष्य से अधिक आवक की संभावना; कस्टम मिलिंग की तैयारियाँ शुरू

बिलासपुर जिले में इस बार धान खरीदी में तेजी देखने को मिल रही है। किसानों द्वारा लगातार धान लाए जाने से अनुमान है कि लक्ष्य से अधिक धान खरीदी हो सकती है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने कस्टम मिलिंग की तैयारियाँ भी शुरू कर दी हैं। मंगलवार को कलेक्टर संजय अग्रवाल ने राइस मिलर्स की बैठक ली और जरूरी दिशा–निर्देश दिए। कलेक्टर ने पात्र राइस मिलर्स को निर्देश दिया कि वे अगले तीन दिनों के अंदर कस्टम मिलिंग के लिए पंजीयन कराएं। जिले में कुल 170 राइस मिलें हैं, जिनमें से 121 मिलें कस्टम मिलिंग के लिए पात्र हैं। राज्य शासन के अनुसार वही मिलें पंजीयन करा सकती हैं, जिन्होंने पिछले वर्ष की 70% या उससे अधिक चावल जमा कर दिया है। पिछले साल का बकाया चावल जल्द जमा करने के निर्देश बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिया कि पिछले वर्ष का करीब 13 हजार मीट्रिक टन बकाया चावल इस महीने के अंत तक जमा किया जाए।इसके अलावा एफसीआई से मिले स्टेक को भी 15 दिनों के भीतर पूरा करने की बात कही गई। खरीदी केंद्रों में धान जमा, मिलर्स को जल्द उठाव करने के निर्देश कलेक्टर ने बताया कि जिले में धान खरीदी शुरू हो चुकी है और फड़ों में धान तेजी से जमा हो रहा है। इसलिए मिलर्स को निर्देश दिए गए कि वे इस धान को जल्द से जल्द उठाकर कस्टम मिलिंग प्रक्रिया आगे बढ़ाएं। उन्होंने राइस मिलर्स को धान खरीदी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। समस्याओं के समाधान का आश्वासन कलेक्टर ने मिलर्स से कहा कि वे शासन के नियमों के अनुसार समय सीमा में अपना काम पूरा करें। बैठक में मिलर्स की समस्याएँ भी सुनी गईं और उनके समाधान का आश्वासन दिया गया।इस बैठक में खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर, डीएमओ अमित चंद्राकर, राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित अग्रवाल सहित कई राइस मिलर्स उपस्थित रहे। More updates and latest agriculture news on:www.deshharpal.com
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गृहमंत्री अमित शाह ने दी थी Hidma को खत्म करने की डेडलाइन, 12 दिन पहले ही ढेर

गृहमंत्री अमित शाह ने दी थी Hidma को खत्म करने की डेडलाइन, 12 दिन पहले ही ढेर

भारत सरकार की कड़ी कार्रवाई और मजबूत इंटेलिजेंस ऑपरेशन के बाद देश के सबसे खतरनाक नक्सली कमांडर Hidma को आखिरकार सुरक्षा बलों ने मार गिराया। कहा जाता है कि गृहमंत्री अमित शाह ने हिड़मा को खत्म करने की एक समयसीमा (Deadline) तय की थी, और उससे 12 दिन पहले ही यह बड़ी सफलता मिल गई। हिड़मा वही नाम है, जिसके नाम से जंगल का बच्चा-बच्चा डरता था। वह 2010 में दांतेवाड़ा में हुए हमले का मुख्य आरोपी था, जिसमें 76 CRPF जवान शहीद हो गए थे। इस हमले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था और सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हुए थे। यही वजह थी कि हिड़मा नक्सली दुनिया का सबसे वांछित चेहरा बन गया। सरकार, सुरक्षा एजेंसियां और स्पेशल फोर्सेज लगातार हिड़मा का पीछा कर रही थीं। कई सालों तक वह घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और स्थानीय नेटवर्क की मदद से बचता रहा। लेकिन इस बार केंद्रीय एजेंसियों ने सटीक जानकारी जुटाई और संयुक्त ऑपरेशन में उसे ढेर कर दिया। इस सफलता के बाद सुरक्षा बलों का मनोबल और भी मजबूत हुआ है और नक्सल समस्या पर एक ऐतिहासिक प्रहार माना जा रहा है। अब सरकार का लक्ष्य बचे हुए नेटवर्क को भी पूरी तरह खत्म करना है ताकि बस्तर, छत्तीसगढ़ और आस-पास के इलाकों में शांति और विकास का रास्ता तेज हो सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

छत्तीसगढ़ में पहली बार देशभर के डीजीपी-आईजीपी का सबसे बड़ा सम्मेलन, नवा रायपुर में होगी रणनीति तय

छत्तीसगढ़ में पहली बार देशभर के पुलिस महानिदेशक (DGP) और महानिरीक्षक (IGP) का सबसे बड़ा मंच आयोजित होने जा रहा है। 28 से 30 नवंबर तक नवा रायपुर स्थित IIM परिसर में 60वां अखिल भारतीय DGP-IGP सम्मेलन होगा। यह राज्य के लिए बेहद गर्व का मौका माना जा रहा है। तीन दिन चलेगा मंथन, शाह और मोदी रहेंगे मौजूद सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हिस्सा लेंगे, जबकि समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहेंगे। छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय मिश्रा ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। इन अहम मुद्दों पर होगी चर्चा इस राष्ट्रीय स्तर की बैठक में आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी— इस बार खास फोकस नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर बस्तर पर रहेगा। हाल के महीनों में राज्य पुलिस और केंद्रीय बलों की संयुक्त कार्रवाई ने कई बड़ी सफलताएं दी हैं। इसी “बस्तर मॉडल” को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने पर भी बात होगी। बस्तर मॉडल को और मजबूत करने पर जोर अधिकारियों के अनुसार, हाल ही के ऑपरेशनों में सफल होने के पीछे बेहतर ग्राउंड इंटेलिजेंस, आधुनिक हथियार और संयुक्त ऑपरेशन मुख्य वजह रहे हैं। सम्मेलन में आगे की रणनीति का ब्लूप्रिंट तैयार किए जाने की संभावना है। भुवनेश्वर के बाद अब छत्तीसगढ़ को मिली मेजबानी साल 2024 में यह सम्मेलन भुवनेश्वर में हुआ था। इस बार पहली बार इसकी मेजबानी छत्तीसगढ़ कर रहा है, जो राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। एक महीने में पीएम का दूसरा दौरा प्रधानमंत्री मोदी नवंबर में दूसरी बार छत्तीसगढ़ आएंगे। इससे पहले 1 नवंबर को वे राज्य स्थापना दिवस के कार्यक्रमों में शामिल हुए थे। अब वे 28-30 नवंबर को होने वाले इस बड़े सुरक्षा सम्मेलन का हिस्सा बनेंगे नवा रायपुर में बनेगा अस्थायी पीएमओ सम्मेलन के दौरान नवा रायपुर में बंगला M-01 को अस्थायी मिनी PMO में बदल दिया जाएगा। यह बंगला विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का आवास है। 500 से ज्यादा शीर्ष अधिकारी होंगे शामिल इस बड़े आयोजन में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, NSA अजित डोभाल, 70 DG, पैरामिलिट्री चीफ और कुल 500 शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे। सुरक्षा के लिए NSG कमांडो तैनात किए जाएंगे और VVVIP मूवमेंट के लिए 400 वाहनों का बेड़ा तैयार रहेगा। छत्तीसगढ़ में होने वाला यह सम्मेलन न सिर्फ सुरक्षा रणनीतियों को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान भी देगा। और खबरों के लिए विजिट करें –www.deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ में 11 डॉक्टरों के तबादले, डॉ. संजय कुमार बने रायपुर जिला अस्पताल के प्रभारी सिविल सर्जन

छत्तीसगढ़ सरकार के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 11 डॉक्टरों का तबादला किया है। प्रशासनिक आधार पर चिकित्सा अधिकारियों और विशेषज्ञों की नई पदस्थापना के आदेश जारी किए गए हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जगह पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। मंत्रालय महानदी भवन से अवर सचिव दिव्या वैष्णव की ओर से जारी आदेश के तहत यह फेरबदल किया गया है। डॉ. संजय कुमार को मिली रायपुर जिला अस्पताल की जिम्मेदारी तबादला आदेश के अनुसार, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संजय कुमार को जिला चिकित्सालय रायपुर (पंडरी) में प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक नियुक्त किया गया है। वहीं, जिला चिकित्सालय रायपुर में अब तक प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. भेनुज कुमार सिन्हा को स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में प्रभारी उप संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए प्रशासनिक फेरबदल विभाग के अनुसार, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशासनिक बदलाव किया गया है। इसके तहत दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। तबादला आदेश में सभी संबंधित डॉक्टरों को बिना देरी किए अपने नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

भोपाल में पहले बिक चुका प्लॉट दोबारा बेचा, 3 लाख रुपए की धोखाधड़ी का केस दर्ज

भोपाल के नीलबड़ स्थित गोरा गांव में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि कमलेश राजपूत ने पहले ही बिक चुके 800 वर्गफीट के प्लॉट का दोबारा सौदा कर धर्मेंद्र कुमार शर्मा से 3 लाख रुपए एडवांस ले लिए। रजिस्ट्री कराने की तय तारीख पर आरोपी रजिस्ट्रार ऑफिस नहीं पहुंचा, जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर टीटी नगर पुलिस ने आरोपी कमलेश राजपूत के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में नाम देखकर किया सौदा पुलिस के अनुसार, आरोपी ने प्लॉट के ऑनलाइन रिकॉर्ड में अपना नाम दिखाकर धर्मेंद्र कुमार शर्मा से सौदा किया था। 800 वर्गफीट के प्लॉट की कीमत 3.30 लाख रुपए तय हुई थी। इसके बाद धर्मेंद्र ने किस्तों में आरोपी को 3 लाख रुपए एडवांस दे दिए। हालांकि, जांच में सामने आया कि आरोपी करीब दो महीने पहले ही यह प्लॉट शुभम यादव को बेच चुका था। शुभम के नाम पर प्लॉट की रजिस्ट्री भी हो चुकी थी, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण नहीं हुआ था। रजिस्ट्री कराने नहीं पहुंचा आरोपी पुलिस के मुताबिक, रिकॉर्ड में नामांतरण नहीं होने का फायदा उठाकर आरोपी ने कथित तौर पर प्लॉट का दोबारा सौदा कर रकम ले ली। जब रजिस्ट्री कराने की तय तारीख पर आरोपी रजिस्ट्रार ऑफिस नहीं पहुंचा, तो धर्मेंद्र को संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। टीटी नगर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि आरोपी ने किस तरह प्लॉट का दोबारा सौदा किया और रकम लेने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं।

इंदौर में ‘Gen Z Protest 2.0’ जारी, CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े युवा

इंदौर में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर युवाओं का आंदोलन जारी है। 5 अक्टूबर से प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने अपने आंदोलन को ‘Gen Z Protest 2.0’ नाम दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद वे अपनी मांग को लेकर पीछे नहीं हटेंगे। 19 अक्टूबर को भंवरकुआं चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं ने पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की थी। हालांकि, पुलिस ने उन्हें समय रहते हिरासत में ले लिया। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इसके बाद उन्हें करीब 24 घंटे तक नजरबंद रखा गया। रिहा होने के बाद युवाओं ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से जुटने की अपील की गई थी। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में संविधान और महात्मा गांधी की तस्वीरें थीं। इसके अलावा, उन्होंने अलग-अलग संदेश लिखी तख्तियों के जरिए अपनी मांगें भी रखीं। 50-60 पुलिसकर्मियों ने हटाया, प्रदर्शनकारी का दावा प्रदर्शनकारी योगित गुप्ता के मुताबिक, 19 अक्टूबर को वह अपने 10 साथियों के साथ भंवरकुआं चौराहे पर पहुंचे थे। उनके पास पेट्रोल से भरी बोतलें थीं और वे आत्मदाह करने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान करीब 50 से 60 पुलिसकर्मियों ने उन्हें बलपूर्वक वहां से हटा दिया। योगित ने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें आत्मदाह करने से रोकने के बाद करीब 24 घंटे तक नजरबंद रखा। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई के बावजूद उनका आंदोलन खत्म नहीं हुआ है और वे अपनी मांग को लेकर आगे भी प्रदर्शन जारी रखेंगे।
Neha Bora

Neha Bora High Court: ‘न हमने कॉल दिया, न वहां गए’, CJP प्रदर्शन से किया किनारा

दिल्ली में CJP प्रदर्शन को लेकर विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। 22 अक्टूबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा (Neha Bora) ने साफ कहा कि उन्होंने कनॉट प्लेस में हुए प्रदर्शन के लिए न तो कोई कॉल दिया और न ही वह वहां गई थीं। उनके इस बयान के बाद CJP प्रदर्शन और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। Neha Bora की ओर से अदालत में पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए। उनका कहना है कि जिस प्रदर्शन से उन्हें जोड़कर कार्रवाई की गई, उसमें उनकी भूमिका को लेकर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं। अब इस मामले में सबकी नजर हाईकोर्ट की सुनवाई और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है। Delhi High Court में नेहा बोरा ने क्या कहा? दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया था। उन्होंने यह भी कहा कि वह वहां मौजूद नहीं थीं। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष के मुताबिक, नेहा को हिरासत में लेने की प्रक्रिया और उसके बाद जारी किए गए नोटिस के लिए पर्याप्त आधार नहीं बताया गया। नेहा बोरा ने अदालत में पुलिस की ओर से जारी उस नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसमें शांति बनाए रखने के लिए 10 हजार रुपये का निजी मुचलका और एक जमानतदार देने की शर्त रखी गई थी। क्या है Neha Bora और CJP प्रदर्शन का पूरा मामला? यह पूरा विवाद 16 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से जुड़ा है। इस मार्च के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विरोध दर्ज कराने की योजना थी। नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में हिरासत में लिया गया था। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। बाद में उन्हें शांति बनाए रखने के लिए मुचलका देने से संबंधित नोटिस जारी किया गया। नेहा की ओर से अदालत में कहा गया कि मंडी हाउस में प्रस्तावित सभा और कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में होने वाले प्रदर्शन को एक ही मामला मानकर कार्रवाई करना उचित नहीं है। उन्होंने पुलिस के कदम को चुनौती देते हुए नोटिस की वैधता पर सवाल उठाए हैं। CJP Leaders Update: सौरव दास और आशुतोष रांका को भी मिली राहत CJP प्रदर्शन से जुड़े मामले में सौरव दास और आशुतोष रांका का नाम भी चर्चा में है। दोनों नेताओं को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, सात दिन की न्यायिक हिरासत के बाद 21 अक्टूबर को दोनों की रिहाई का आदेश दिया गया। इसके लिए उन्हें निजी और जमानती मुचलके भरने तथा निर्धारित शर्तों का पालन करने को कहा गया। दोनों नेताओं की हिरासत और नेहा बोरा की याचिका ने दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार को लेकर बहस तेज कर दी है। SIR Controversy: क्यों हो रहा है विरोध? मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों और कुछ संगठनों ने सवाल उठाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया में मतदाताओं के नाम प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उससे जुड़े विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी जारी है। CJP से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। इसी बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों से मुचलका भरवाने जैसे मुद्दे अदालत तक पहुंच गए हैं। अब आगे क्या होगा? दिल्ली हाईकोर्ट में नेहा बोरा की ओर से पुलिस के नोटिस और हिरासत की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। अब इस मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही अहम होगी। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह दावा नहीं किया जा सकता कि हाईकोर्ट ने नेहा बोरा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है या पुलिस का नोटिस रद्द कर दिया है। मामले में अंतिम आदेश की पुष्टि होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

न्यूजीलैंड क्रिकेट का बड़ा फैसला, MLC में नहीं करेगा निवेश; NZ20 लीग भी टली

न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने अमेरिका की मेजर लीग क्रिकेट (MLC) में निवेश नहीं करने का फैसला किया है। बोर्ड ने 2027 सीजन से पहले लीग की नई टीम शुरू करने के लिए अमेरिकी कंपनी ट्रू नॉर्थ स्पोर्ट्स (TNS) वेंचर्स के साथ साझेदारी की थी। हालांकि, अब न्यूजीलैंड क्रिकेट घरेलू क्रिकेट और अपने संसाधनों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है। मेजर लीग क्रिकेट में न्यूजीलैंड के कई प्रमुख खिलाड़ी हिस्सा लेते रहे हैं। इनमें रचिन रवींद्र, फिन एलन, डेवोन कॉनवे, टिम सेफर्ट और लॉकी फर्ग्यूसन जैसे नाम शामिल हैं। अप्रैल 2025 में हुई थी साझेदारी की घोषणा न्यूजीलैंड क्रिकेट ने अप्रैल 2025 में TNS वेंचर्स के साथ साझेदारी की घोषणा की थी। इस समझौते के तहत बोर्ड को 2027 में MLC की प्रस्तावित दो नई टीमों में से एक को शुरू करने और संचालित करने में सहयोग देना था। इसके लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट को हाई-परफॉर्मेंस और संचालन से जुड़ी सहायता उपलब्ध करानी थी। हालांकि, अब बोर्ड ने इस योजना से पीछे हटने का निर्णय लिया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने कहा- अभी सही समय नहीं न्यूजीलैंड क्रिकेट के CEO ज्योफ एलॉट ने कहा कि उन्हें इस साझेदारी के उद्देश्य और महत्वाकांक्षा पर भरोसा है। उनके मुताबिक, अमेरिकी बाजार में क्रिकेट के विस्तार की काफी संभावनाएं हैं, लेकिन विस्तृत आकलन के बाद बोर्ड को लगता है कि फिलहाल इस दिशा में आगे बढ़ने का सही समय नहीं है। एलॉट ने TNS और MLC के सह-संस्थापक समीर मेहता तथा विजय श्रीनिवासन का अवसर तलाशने में सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड क्रिकेट भविष्य में दोनों के साथ संपर्क बनाए रखेगा। न्यूजीलैंड की NZ20 टी-20 लीग भी टली न्यूजीलैंड में प्रस्तावित पुरुष और महिला टी-20 लीग NZ20 की शुरुआत भी टाल दी गई है। इस लीग की योजना मौजूदा सुपर स्मैश टूर्नामेंट की जगह एक नई प्रतियोगिता शुरू करने की थी। पहले NZ20 को जनवरी 2027 में शुरू करने की योजना थी, लेकिन अब इसकी शुरुआत दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दी गई है। इससे न्यूजीलैंड क्रिकेट की घरेलू टी-20 प्रतियोगिता की योजनाओं में भी बदलाव हुआ है।

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