आपका चैनल --
ताज़ा खबर
BREAKINGमध्य प्रदेशरानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन◆BREAKINGमध्य प्रदेशमध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव◆BREAKINGस्पोर्ट्सएशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए◆BREAKINGदेश-हरपलSBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक◆BREAKINGदेश-हरपलDelhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल◆BREAKINGबिज़नेसShare Market Update सेंसेक्स की तेजी पर लगा ब्रेक, Auto-Metal Stocks में दबाव◆BREAKINGमध्य प्रदेशमध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विवादों की लंबी फेहरिस्त, खरीदी से लेकर भर्ती तक उठे सवाल◆BREAKINGबिज़नेसGold-Silver Rate सोना लगातार दूसरे दिन हुआ सस्ता, चांदी के दाम भी गिरे◆BREAKINGमध्य प्रदेशरानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन◆BREAKINGमध्य प्रदेशमध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव◆BREAKINGस्पोर्ट्सएशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए◆BREAKINGदेश-हरपलSBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक◆BREAKINGदेश-हरपलDelhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल◆BREAKINGबिज़नेसShare Market Update सेंसेक्स की तेजी पर लगा ब्रेक, Auto-Metal Stocks में दबाव◆BREAKINGमध्य प्रदेशमध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विवादों की लंबी फेहरिस्त, खरीदी से लेकर भर्ती तक उठे सवाल◆BREAKINGबिज़नेसGold-Silver Rate सोना लगातार दूसरे दिन हुआ सस्ता, चांदी के दाम भी गिरे◆

NE

News Elementor

What's Hot

Banner

Latest Posts

खंडवा में सीसी रोड निर्माण पर सवाल, ग्रामीणों ने घटिया सामग्री इस्तेमाल करने का लगाया आरोप

खंडवा। जिले के मोहद गांव में बीड़-मूंदी हाईवे पर बन रही सीसी रोड की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में सीमेंट की मात्रा कम रखी जा रही है और बालू रेत की जगह डस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों ने रात में भी निर्माण कार्य कराए जाने की शिकायत की है। शिकायत सामने आने के बाद PWD ने ठेकेदार को नोटिस जारी करने और इंजीनियर को मौके पर जांच के लिए भेजने की बात कही है। तीन साल के संघर्ष के बाद शुरू हुआ सड़क निर्माण बीड-मूंदी हाईवे के तहत मोहद गांव में टू-लेन सीसी रोड का निर्माण होना था। ग्रामीणों के मुताबिक, बजट की कमी का हवाला देकर सड़क का काम अधूरा छोड़ दिया गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग को लेकर करीब तीन साल तक प्रयास किए। बाद में PWD ने सड़क निर्माण के लिए करीब एक करोड़ रुपए मंजूर किए, जिसके बाद काम दोबारा शुरू हुआ। सड़क निर्माण का ठेका खंडवा की एक कंपनी को मिला है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी पेटी कॉन्ट्रैक्ट के जरिए काम करा रही है। 12 बोरी की जगह 4 बोरी सीमेंट डालने का आरोप ग्रामीणों ने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सीमेंट-कांक्रीट तैयार करने के दौरान निर्धारित मात्रा में सीमेंट नहीं डाला जा रहा। ग्रामीणों के मुताबिक, विभागीय अधिकारियों ने एक मिक्सर में 12 बोरी सीमेंट डालने की जानकारी दी थी, लेकिन मौके पर कथित तौर पर सिर्फ 4 बोरी सीमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण में बालू रेत के स्थान पर डस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि निर्माण में मानकों का पालन नहीं हुआ तो सड़क की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। PWD ने कहा- गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी PWD के कार्यपालन यंत्री नरेंद्र सिंह मंडलोई ने कहा कि सड़क का निर्माण निर्धारित गुणवत्ता मापदंडों के अनुसार कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित ठेकेदार को नोटिस दिया गया है। विभागीय इंजीनियर को मौके पर जांच के लिए भेजा गया है। साइट पर टाइमकीपर और अन्य कर्मचारी भी मौजूद हैं। मंडलोई के मुताबिक, यदि रात के समय नियमों के विपरीत निर्माण कार्य कराया जा रहा है तो उसे बंद कराया जाएगा। विभाग की जांच के बाद ही निर्माण सामग्री और सीमेंट की मात्रा को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
Read more

भोपाल में 2 महीने की बच्ची की इलाज के दौरान मौत, परिजनों ने टीकाकरण के बाद तबीयत बिगड़ने का लगाया आरोप

भोपाल। छोला मंदिर थाना क्षेत्र की नवजीवन कॉलोनी में दो महीने की बच्ची की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि 14 अगस्त को आंगनवाड़ी केंद्र में टीकाकरण और पोलियो की दवा पिलाने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ गई थी। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां रविवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। मृतका की पहचान लक्ष्मी पिता हलके राम (2 माह) के रूप में हुई है। वह नवजीवन कॉलोनी, छोला में रहती थी। परिवार मूल रूप से सिरोंज का रहने वाला है। बच्ची परिवार की इकलौती बेटी थी और उसका एक बड़ा भाई है। टीकाकरण के बाद तबीयत बिगड़ने का दावा परिजनों के मुताबिक, 14 अगस्त को लक्ष्मी को आंगनवाड़ी केंद्र ले जाया गया था। वहां उसे पोलियो की दवा पिलाने के साथ टीकाकरण किया गया। बच्ची के पिता हलके राम का दावा है कि उसे पोलियो की सात बूंद दवा पिलाई गई और तीन इंजेक्शन भी लगाए गए। परिवार का कहना है कि आंगनवाड़ी से घर लौटने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया। इलाज के दौरान रविवार सुबह उसकी मौत हो गई। पिता ने लगाया ओवरडोज का आरोप बच्ची के पिता ने आरोप लगाया कि दो महीने की बच्ची को पोलियो की सात बूंद दवा देने के अलावा तीन इंजेक्शन लगाए गए। उनका दावा है कि दवा के ओवरडोज के कारण बच्ची की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हुई। हालांकि, पुलिस ने अभी मौत की वजह की पुष्टि नहीं की है। टीकाकरण और दवा से संबंधित परिजनों के आरोपों की जांच की जा रही है। पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच छोला मंदिर थाना पुलिस ने बच्ची की मौत के मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी सरस्वती तिवारी के अनुसार, परिजनों के बयान में टीका लगने के बाद बच्ची की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है। पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट होने की उम्मीद है। पीएम रिपोर्ट से सामने आएगा मौत का कारण पुलिस के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर यह पता चलेगा कि बच्ची की मौत किन परिस्थितियों में हुई। साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि टीकाकरण या दवा से मौत का कोई संबंध था या किसी अन्य कारण से बच्ची की हालत बिगड़ी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
Read more

सीहोर में अब तक 26.75 इंच बारिश, पिछले साल से 0.74 इंच कम; अगले 48 घंटे भी बारिश के आसार

सीहोर। जिले में मानसूनी गतिविधियों के चलते रुक-रुककर बारिश का दौर जारी है। कहीं रिमझिम तो कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो रही है। भू-अभिलेख विभाग की ओर से 16 अगस्त को जारी दैनिक वर्षा आंकड़ों के अनुसार, सीहोर जिले में 1 जून से अब तक औसतन 26.75 इंच बारिश दर्ज की गई है। सीहोर में सबसे ज्यादा 32.68 इंच बारिश 1 जून से 16 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक सीहोर वर्षामापी केंद्र में सबसे ज्यादा 32.68 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। इसके बाद रहटी में 29.58 इंच, भैरूंदा में 27.12 इंच और बुधनी में 26.37 इंच बारिश दर्ज की गई। अन्य क्षेत्रों में आष्टा में 26.18 इंच, इछावर में 25.82 इंच, श्यामपुर में 24.75 इंच और जावर में सबसे कम 21.45 इंच बारिश हुई है। पिछले साल के मुकाबले 0.74 इंच कम बारिश पिछले साल इसी अवधि तक सीहोर जिले में औसतन 27.49 इंच बारिश हुई थी। इस साल यह आंकड़ा 26.75 इंच है। यानी पिछले साल की तुलना में अब तक करीब 0.74 इंच कम बारिश दर्ज की गई है। जिले की सामान्य औसत वार्षिक बारिश 45.21 इंच है। ऐसे में सीहोर में अभी सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा होने में काफी बारिश बाकी है। बंगाल की खाड़ी के सिस्टम का असर मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने मानसूनी सिस्टम और सक्रिय ट्रफ लाइन के कारण मध्य प्रदेश के मध्य हिस्सों में लगातार नमी पहुंच रही है। इसके प्रभाव से सीहोर और आसपास के इलाकों में बारिश का सिलसिला बना हुआ है। अगले 48 घंटे भी बारिश की संभावना मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के दौरान सीहोर और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। जिले के कई हिस्सों में रिमझिम से लेकर हल्की और मध्यम बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बारिश होने की भी संभावना है। ऐसे में मौसम का यह दौर अगले दो दिनों तक जारी रहने की उम्मीद है।
Read more

गोपाल भार्गव बोले- भाजपा का हर कार्यकर्ता मुख्यमंत्री, ‘कुत्तों की चिंता नहीं की जाती’

सागर। रहली विधानसभा से 9 बार के विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव का एक बयान इन दिनों चर्चा में है। उन्होंने कहा कि भाजपा का हर कार्यकर्ता अपने आप को मुख्यमंत्री से कम नहीं समझता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी का हर कार्यकर्ता प्रधानमंत्री भी है। रहली में वीर दुर्गादास राठौर जयंती समारोह के दौरान मंच से संबोधित करते हुए भार्गव ने कहा कि किसी से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “लोग तो ऐसे भौंकते रहते हैं। हाथी अपनी मस्त चाल चलता है और कुत्ते उसके पीछे लगे रहते हैं। कुत्तों की चिंता नहीं की जाती।” बोले- 2-4 चीटियां मिलकर गन्ना नहीं खींच सकतीं गोपाल भार्गव ने कहा कि ऐसी कोशिश करने वालों की चिंता नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा का हर कार्यकर्ता खुद को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से कम नहीं समझता। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र है और सभी लोग बराबर हैं। कोई सेवक के रूप में काम कर रहा है तो कोई जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। भार्गव ने इसी दौरान उदाहरण देते हुए कहा कि “2-4 चीटियां मिलकर गन्ने को नहीं खींच सकतीं।” निवास बोर्ड पर चिपकाया गया था ‘स्वघोषित मुख्यमंत्री’ का पर्चा दरअसल, कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया था। इसमें एक व्यक्ति ने गढ़ाकोटा स्थित गोपाल भार्गव के निवास ‘गणनायक’ के बाहर सड़क पर लगे निवास बोर्ड पर ‘स्वघोषित मुख्यमंत्री’ लिखा हुआ पंपलेट चिपका दिया था। वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया। वीर दुर्गादास राठौर जयंती कार्यक्रम के दौरान जब एक व्यक्ति ने इसी घटना का जिक्र किया, तब गोपाल भार्गव ने मंच से यह बयान दिया। ‘सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं’ भार्गव के बयान का संदेश साफ था कि राजनीतिक पद या भूमिका को लेकर किसी बाहरी व्यक्ति से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता पार्टी में महत्वपूर्ण है और लोकतंत्र में सभी को बराबर अधिकार प्राप्त हैं।
Read more

भोपाल में राजा भोज नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप का समापन, CM बोले- हर विधानसभा में बनेगा स्टेडियम

भोपाल। राजा भोज मल्टी क्लास नेशनल सेलिंग चैंपियनशिप (रैंकिंग)-2026 के तीसरे संस्करण का रविवार को भोपाल के बोट क्लब में समापन हुआ। पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में एक-एक स्टेडियम विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। इन स्टेडियमों में अलग-अलग खेलों के लिए जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल विभाग का बजट बढ़ाना उनके लिए खुशी की बात है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के हर हिस्से की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के समान अवसर देना है। 12 क्लबों के 87 खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा चैंपियनशिप में 12 क्लबों के 87 खिलाड़ियों ने 110 रेस में हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में नेशनल सेलिंग स्कूल (NSS) भोपाल ने पहला स्थान हासिल किया। नेवी यूथ स्पोर्ट्स क्लब (NYSC) गोवा दूसरे और सिकंदराबाद तीसरे स्थान पर रहा। तीन साल में 16वें-17वें से तीसरे स्थान पर पहुंचा MP CM मोहन यादव ने कहा कि खेलों में मध्यप्रदेश की स्थिति लगातार बेहतर हुई है। तीन साल पहले तक प्रदेश देश में खेलों के मामले में 16वें-17वें स्थान के आसपास था, लेकिन अब वह तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने इसका श्रेय खिलाड़ियों की मेहनत और सरकार की खेलों के प्रति प्रतिबद्धता को दिया। CM ने कहा कि ओलंपिक और कॉमनवेल्थ जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों की उपलब्धियां दिखाई दे रही हैं। 18 खेलों की 11 अकादमियां संचालित मुख्यमंत्री के अनुसार मध्यप्रदेश में वर्तमान में 18 खेलों की 11 खेल अकादमियां संचालित हैं। सरकार खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के साथ उनकी शिक्षा और भविष्य के अवसरों पर भी ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में खेलों को शिक्षा का हिस्सा बनाने के साथ कोच के करियर को आगे बढ़ाने की संभावनाएं भी रखी गई हैं। खिलाड़ियों के साथ उनके प्रशिक्षकों के भविष्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस पर निशाना कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार लाल किले से ‘वंदे मातरम्’ को सम्मान मिलने से देश गौरवान्वित हुआ है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं के बयानों की आलोचना करते हुए उनसे देश से माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की भावना से जुड़ा है। सारंग बोले- बड़े तालाब का खेल और पर्यटन में हो रहा उपयोग खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री का खेलों के प्रति जुड़ाव लगातार दिखाई दे रहा है। उन्होंने भोपाल के बड़े तालाब को खेल और पर्यटन दोनों के लिए उपयोगी बताया। सारंग ने कहा कि प्रदेश खेलों में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है और 18 खेलों की 11 अकादमियां खिलाड़ियों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार कर रही हैं। उन्होंने भोपाल में खेल संग्रहालय बनाने की दिशा में पहल करने का आग्रह भी मुख्यमंत्री से किया। खिलाड़ियों को किया गया सम्मानित समारोह में अलग-अलग खेलों में प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। इनमें कॉमनवेल्थ गेम्स की रजत पदक विजेता जूडो खिलाड़ी यामिनी मौर्य, शॉटपुट खिलाड़ी समरदीप सिंह गिल, पोल वॉल्ट खिलाड़ी देव कुमार मीणा, कुलदीप कुमार और फेंसिंग खिलाड़ी खुशी दाबोड़े शामिल रहे। 16वीं हॉकी इंडिया जूनियर चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी की टीम के खिलाड़ियों को भी सम्मानित किया गया। NSS भोपाल चैंपियन, NYSC गोवा उपविजेता राजा भोज मल्टीक्लास नेशनल रैंकिंग सेलिंग चैंपियनशिप-2026 में NSS भोपाल विजेता रहा। टीम में वायु चंद्रवंशी, माही वर्मा, तुलसी पटले, एकलव्य वायम, वंशिका शिकारवार, आर्यन पाटीदार, प्रार्थना मोई, अंकित सिसोदिया, समर पंचेश्वर और सिद्धि टंडन शामिल रहे। NYSC गोवा की टीम उपविजेता रही। टीम में शशांक जाधव, हृदय जोशी, मोह रिजवान, शिवम वाल्मीकि और हेमंत पपौला शामिल थे। अपर लेक की लहरों पर खिलाड़ियों ने दिखाया हुनर चैंपियनशिप के दौरान खिलाड़ियों ने भोपाल के अपर लेक की लहरों पर सेलिंग का शानदार प्रदर्शन किया। विभिन्न वर्गों में खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला हुआ। खिलाड़ियों ने संतुलन, गति और तकनीक के जरिए अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। वाटर स्पोर्ट्स का बड़ा केंद्र बन रहा भोपाल भोपाल की झीलें सेलिंग, रोइंग, कयाकिंग और केनोइंग जैसे वाटर स्पोर्ट्स के लिए अनुकूल हैं। मध्यप्रदेश राज्य जल क्रीड़ा अकादमी की स्थापना 2007 में हुई थी। अकादमी में सेलिंग, रोइंग, कयाकिंग, केनोइंग और स्लालम की प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध हैं। अकादमी के खिलाड़ियों ने अब तक 28 अंतरराष्ट्रीय और 69 राष्ट्रीय पदक हासिल किए हैं। खिलाड़ी 37 अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत और मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं।
Read more

MP में कंप्यूटर ऑपरेटरों पर सरकार का बड़ा फैसला, 30 दिन में CPCT और साइबर सिक्योरिटी कोर्स जरूरी

भोपाल: मध्य प्रदेश के नगर निगम, नगरपालिका और नगर परिषद में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नए निर्देश जारी किए हैं। अब ऑपरेटरों को तकनीकी दक्षता के साथ साइबर सुरक्षा से जुड़ी अनिवार्य योग्यताएं पूरी करनी होंगी। इसके लिए 30 दिन की समय-सीमा दी गई है। तय समय में शर्तें पूरी नहीं करने वालों के मानदेय या वेतन भुगतान पर रोक लग सकती है। यह आदेश संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास की अपर आयुक्त मिशा सिंह की ओर से जारी किया गया है। आदेश सभी नगर निगम आयुक्तों, संयुक्त संचालकों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को भेजा गया है। क्यों लिया गया फैसला? विभाग के अनुसार नगरीय निकायों में कंप्यूटर ऑपरेटर कई महत्वपूर्ण ऑनलाइन पोर्टल और आईटी आधारित प्रणालियों का संचालन करते हैं। इनमें नागरिक सेवाओं, राजस्व, योजनाओं और अन्य विभागीय कार्यों से जुड़ा डेटा शामिल होता है। सरकारी डेटा की सुरक्षा और ऑनलाइन कामकाज को बेहतर बनाने के लिए ऑपरेटरों की तकनीकी दक्षता और साइबर सिक्योरिटी की जानकारी मजबूत करना जरूरी माना गया है। CPCT पास करना अनिवार्य नए निर्देशों के तहत कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए CPCT (Computer Proficiency Certification Test) परीक्षा पास होना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा उन्हें केंद्र सरकार के iGOT Karmayogi पोर्टल पर उपलब्ध साइबर सिक्योरिटी और आईटी से जुड़े कम से कम 10 सर्टिफिकेट कोर्स पूरे करने होंगे। 50 क्रेडिट पॉइंट भी जरूरी ऑपरेटरों को iGOT Karmayogi पोर्टल पर उपलब्ध पाठ्यक्रमों को पूरा करके कम से कम 50 क्रेडिट पॉइंट हासिल करने होंगे। इन कोर्स में कंप्यूटर की बेसिक जानकारी, Microsoft Word और Excel, डेटा एंट्री, रिकॉर्ड मैनेजमेंट, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल सेफ्टी जैसे विषय शामिल हैं। AI और डेटा मैनेजमेंट की भी ट्रेनिंग जारी सूची में आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कोर्स भी शामिल किए गए हैं। इनमें ‘AI Using Google Bard and ChatGPT for Beginners’ जैसे कोर्स बताए गए हैं। इसके साथ ही Data Driven Decision Making और Responsible Data Management जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण लेना होगा। 30 दिन में शर्तें पूरी नहीं कीं तो वेतन पर असर सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय में अनिवार्य योग्यताएं और प्रशिक्षण पूरा नहीं करने वाले ऑपरेटरों के संबंध में आगे नियोजन में रखने या हटाने तथा मानदेय/वेतन भुगतान की कार्रवाई नियमों के अनुसार की जाएगी। यानी 30 दिन की समय-सीमा कंप्यूटर ऑपरेटरों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि आवश्यक शर्तें पूरी नहीं करने पर उनकी नौकरी या भुगतान प्रभावित हो सकता है। नगर निकायों में कितने कंप्यूटर ऑपरेटर? किसी निकाय में कंप्यूटर ऑपरेटरों की वास्तविक संख्या स्वीकृत पदों, आउटसोर्स व्यवस्था, जनसंख्या, वार्डों और विभागों की जरूरत पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर अनुमान इस तरह बताया जाता है— बड़े नगर निगमों में अलग-अलग जोन और विभाग होने के कारण ऑपरेटरों की संख्या ज्यादा हो सकती है। इन विभागों में होता है कंप्यूटर ऑपरेटरों का काम कंप्यूटर ऑपरेटर आमतौर पर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, संपत्ति कर, जलकर, राजस्व, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्थापना, लेखा और अन्य ऑनलाइन नागरिक सेवाओं से जुड़े काम संभालते हैं। ऐसे में सरकार का फोकस तकनीकी दक्षता के साथ सरकारी डेटा और ऑनलाइन सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने पर है।
Read more

PM मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण पर विधायक आरिफ मसूद ने उठाए सवाल, मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र नहीं होने पर जताई नाराजगी

भोपाल: स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान का उल्लेख किए जाने के बाद भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का नाम नहीं लिए जाने पर सवाल उठाए हैं। मसूद ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर कहा कि देश की आजादी की लड़ाई किसी एक समुदाय की नहीं, बल्कि सभी वर्गों के लोगों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम थी। मसूद ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम की चर्चा के दौरान मुस्लिम सेनानियों का उल्लेख नहीं होना अफसोसजनक है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस मामले पर देश से माफी मांगने की मांग भी की है। ‘मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम भी मिलेंगे’ अपने ज्ञापन में आरिफ मसूद ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को लाल किले से स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान का उल्लेख किया, लेकिन मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का जिक्र नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री यदि इंडिया गेट स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल या अंडमान-निकोबार की सेलुलर जेल की दीवारों पर दर्ज नाम देखें तो उन्हें मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम भी मिलेंगे। मसूद ने दावा किया कि 1757 से 1947 तक चले आजादी के संघर्ष से जुड़े दस्तावेजों में मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान के अनेक प्रमाण मिलते हैं। मजनू शाह फकीर और 1857 के विद्रोह का दिया उदाहरण विधायक ने अपने ज्ञापन में बंकिमचंद्र चटर्जी के उपन्यास ‘आनंदमठ’ में वर्णित फकीर एवं संन्यासी विद्रोह का उल्लेख किया। उन्होंने मजनू शाह फकीर और उनके साथियों को अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाले प्रमुख नामों में बताया। मसूद के अनुसार, मजनू शाह के बाद मूसा शाह, चिराग अली और नूरुल मोहम्मद ने भी इस आंदोलन को आगे बढ़ाया। उन्होंने 1857 के विद्रोह का जिक्र करते हुए अहमदुल्ला शाह मदरासी के योगदान का भी उल्लेख किया। मसूद ने कहा कि उन्होंने दिल्ली, पटना, फैजाबाद और कलकत्ता समेत कई क्षेत्रों में अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन को मजबूत करने में भूमिका निभाई थी। अंग्रेजों की कार्रवाई का भी किया जिक्र ज्ञापन में मसूद ने 1857 के दौरान मुस्लिम उलेमा और अन्य लोगों पर अंग्रेजों की कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि विद्रोह को दबाने के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को बिना मुकदमे के फांसी दी गई थी। उन्होंने अपने दावों के समर्थन में विभिन्न ऐतिहासिक पुस्तकों और लेखकों के संदर्भ दिए हैं। ‘आजादी के योगदान को किसी एक समुदाय तक सीमित न करें’ आरिफ मसूद ने कहा कि देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को किसी एक समुदाय तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोगों ने योगदान दिया था। ऐसे में सभी स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को समान सम्मान मिलना चाहिए। मसूद ने प्रधानमंत्री के भाषण को लेकर कहा कि मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख नहीं किए जाने से उन लोगों के योगदान की तौहीन हुई है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस पर माफी मांगने की मांग की है।
Read more

शिवपुरी मेडिकल कॉलेज से ग्वालियर ले जाते समय मरीज की मौत, बेटे ने लगाए इलाज में लापरवाही के आरोप

शिवपुरी: मध्य प्रदेश के शिवपुरी मेडिकल कॉलेज से ग्वालियर रेफर किए गए 50 वर्षीय हरिराम प्रजापति की रास्ते में मौत हो गई। पिता की मौत के बाद बेटे अरुण प्रजापति ने शव के पास बैठकर वीडियो बनाया और डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ तथा एंबुलेंस व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मरीज को प्राथमिक उपचार देने के बाद रेफर किए जाने की बात कही है। मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पैरों में दर्द और मुंह खोलने में परेशानी मामला खनियाधाना तहसील के आहार बानपुर गांव का है। अरुण के मुताबिक, दोपहर में उनके पिता हरिराम की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उनके पैरों में दर्द था और मुंह भी नहीं खुल पा रहा था। परिजन उन्हें पहले खनियाधाना के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां कुछ घंटे उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें शिवपुरी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। बेटे का आरोप- डॉक्टर और स्टाफ ने ठीक से इलाज नहीं किया अरुण का आरोप है कि रात में शिवपुरी मेडिकल कॉलेज पहुंचने के बाद उनके पिता का उचित इलाज नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मरीज के उपचार पर ध्यान देने के बजाय मोबाइल में गेम खेल रहे थे। अरुण के मुताबिक, जब उन्होंने पिता का इलाज करने के लिए डॉक्टरों और स्टाफ से कहा तो उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया गया। एंबुलेंस के लिए 4:30 बजे फोन, 6 बजे पहुंची अरुण ने एंबुलेंस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, सुबह करीब 4:30 बजे एंबुलेंस के लिए फोन किया गया, लेकिन एंबुलेंस करीब 6 बजे पहुंची। इसके बाद हरिराम को ग्वालियर ले जाने की तैयारी की गई। बेटे का कहना है कि इस दौरान समय निकलता गया और पिता की हालत लगातार बिगड़ती गई। ड्राइवर से तेज चलाने को कहा, रास्ते में मौत अरुण के मुताबिक, ग्वालियर जाते समय उन्होंने एंबुलेंस चालक से वाहन तेज चलाने के लिए कहा, लेकिन चालक ने 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति से वाहन चलाने से इनकार कर दिया। ग्वालियर पहुंचने से पहले ही हरिराम की हालत और बिगड़ गई और रास्ते में उनकी मौत हो गई। अरुण के अनुसार, सुबह करीब 7:30 बजे ग्वालियर पहुंचने से पहले पिता ने दम तोड़ दिया। बेटे ने लगाए गंभीर आरोप अरुण ने वीडियो में आरोप लगाया कि उनके पिता की मौत डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और एंबुलेंस व्यवस्था की कथित लापरवाही के कारण हुई। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, फिलहाल ये आरोप बेटे के बयान पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने क्या कहा? मेडिकल कॉलेज अधीक्षक आशुतोष चौरसी ने बताया कि मरीज रात करीब 3 बजे रेफर होकर मेडिकल कॉलेज पहुंचा था। उस समय मेडिकल कॉलेज के सभी बेड फुल थे। डॉक्टरों ने मरीज को प्राथमिक उपचार दिया और इसके बाद उसे ग्वालियर रेफर कर दिया गया। जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति मामले में एक तरफ परिवार ने इलाज में लापरवाही और एंबुलेंस मिलने में देरी के आरोप लगाए हैं, वहीं मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मरीज को प्राथमिक उपचार देने और बेड उपलब्ध नहीं होने के बाद ग्वालियर रेफर किए जाने की बात कही है। अब मेडिकल रिकॉर्ड, मरीज के अस्पताल पहुंचने का समय, दिए गए उपचार, रेफर करने का चिकित्सकीय कारण और एंबुलेंस कॉल व पहुंचने के समय की जांच से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
Read more

स्वतंत्रता दिवस पर बच्चों को बांटे जा रहे लड्डुओं में मिले कीड़े, 40 किलो मिठाई जब्त; दुकान सील

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर स्कूली बच्चों को बांटने के लिए लाए गए लड्डुओं में कीड़े मिलने से हड़कंप मच गया। मामला धमनाई पंचायत के सोनगुड़ारिया गांव का है। यहां माध्यमिक स्कूल के बच्चों के लिए करीब 40 किलो लड्डू लाए गए थे। लड्डू वितरण के दौरान करीब 8 साल की एक बच्ची ने लड्डू में कीड़े होने की शिकायत की। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत वितरण रुकवा दिया और पुलिस को सूचना दी। बच्चों को लड्डू खाने से रोका ग्रामीणों के मुताबिक, शिकायत सामने आने तक लड्डुओं का वितरण शुरू हो चुका था। मामला सामने आने के बाद बच्चों को लड्डू खाने से रोक दिया गया। इस दौरान दो बच्चों के पेट में दर्द की शिकायत भी सामने आई। मामले की जानकारी तहसीलदार और एसडीएम को दी गई, जिसके बाद खाद्य विभाग की टीम को भी कार्रवाई के लिए सूचना दी गई। दुकान से लड्डू जब्त, दुकान सील शिकायत के बाद खाद्य विभाग की टीम खजराना स्थित उस दुकान पर पहुंची, जहां से पंचायत ने लड्डू खरीदे थे। टीम ने दुकान से लड्डू जब्त किए और दुकान को सील करने की कार्रवाई की। खाद्य विभाग ने लड्डुओं के सैंपल भी लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरपंच ने खरीदे थे 40 किलो लड्डू धमनाई पंचायत के सरपंच सीताराम चौहान ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में बच्चों को बांटने के लिए करीब 40 किलो लड्डू खजराना स्थित योगेश शर्मा की दुकान से खरीदे गए थे। वितरण के दौरान बच्चों ने लड्डुओं में कीड़े होने की शिकायत की, जिसके बाद तत्काल वितरण रोक दिया गया। नायब तहसीलदार योगेश मेश्राम ने बताया कि शिकायत के बाद खाद्य विभाग को सूचना दी गई थी। विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर लड्डू जब्त किए और दुकान सील कर दी। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
Read more
CM Mohan Yadav

CM Mohan Yadav का Development Vision: 2027 युवा वर्ष, रोजगार और Skill पर रहेगा Focus

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav)ने तिरंगा फहराया और प्रदेशवासियों को संबोधित किया। अपने संबोधन में CM मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के विकास को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं सामने रखीं। इस दौरान युवाओं और रोजगार को लेकर उन्होंने बड़ा ऐलान किया। 2027 को युवा वर्ष के रूप में मनाने के साथ हर साल करीब 1 लाख रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह ऐलान प्रदेश के उन युवाओं के लिए खास माना जा रहा है, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के बेहतर अवसर तलाश रहे हैं। सरकार का फोकस केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि निजी क्षेत्र, उद्योग, Skill Development और स्वरोजगार के जरिए भी अवसर बढ़ाने पर रहेगा। 2027 होगा Youth Year CM मोहन यादव ने 2027 को Youth Year यानी युवा वर्ष के रूप में मनाने की बात कही। इसका उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और उद्यमिता के ज्यादा अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार की कोशिश है कि युवाओं को बदलते Job Market के हिसाब से तैयार किया जाए। इसके लिए Skill Training, आधुनिक तकनीक और Entrepreneurship को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। हर साल 1 लाख रोजगार का Target मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रोजगार के मोर्चे पर बड़ा लक्ष्य सामने रखा है। प्रदेश में हर साल करीब 1 लाख रोजगार के अवसर तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकारी भर्तियों के साथ Private Sector में रोजगार बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। नए उद्योग और निवेश आने से स्थानीय स्तर पर Jobs के अवसर बढ़ाने की कोशिश होगी। Youth को Job Seeker नहीं, Job Creator बनाने पर जोर CM मोहन यादव के रोडमैप में युवाओं को केवल नौकरी पाने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें Job Creator बनाने पर भी जोर दिखाई दिया। Startup, छोटे कारोबार और स्वरोजगार के लिए युवाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। इसका फायदा खासतौर पर उन युवाओं को मिल सकता है, जो अपना Business या Startup शुरू करना चाहते हैं लेकिन उन्हें Training, Guidance या शुरुआती अवसरों की जरूरत होती है। MP के Development में गांव और छोटे शहर भी शामिल मुख्यमंत्री ने प्रदेश के समग्र विकास पर भी जोर दिया। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के साथ विकास का लाभ गांवों और छोटे शहरों तक पहुंचाने की दिशा में काम करने की बात कही गई। CM मोहन यादव के अनुसार, प्रदेश की Growth Story में हर क्षेत्र और हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। बेहतर Infrastructure के साथ नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी सरकार का फोकस रहेगा। अब नजर Implementation पर स्वतंत्रता दिवस पर CM मोहन यादव की ओर से रखे गए रोजगार और युवा विकास के लक्ष्य निश्चित तौर पर बड़े हैं। हालांकि इन घोषणाओं का वास्तविक असर योजनाओं के Implementation के बाद ही साफ होगा। हर साल 1 लाख रोजगार के लक्ष्य के तहत कितनी नई नौकरियां बनती हैं, कितने उद्योग निवेश करते हैं और युवाओं को Skill Training का कितना लाभ मिलता है, यह आने वाले समय में सबसे महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल मुख्यमंत्री मोहन यादव के संदेश से साफ है कि मध्य प्रदेश की आने वाली विकास यात्रा में Youth Power, रोजगार, Skill Development और Entrepreneurship को खास जगह दी जाएगी। 2027 को युवा वर्ष बनाने का फैसला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Read more
1 … 12 13 14 15 16 … 80

Trending News

Editor's Picks

रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

About Me

देशहरपल सिर्फ खबरों का मंच नहीं, बल्कि आपकी आवाज़ को सामने लाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यहां आपको ताज़ातरीन खबरों के साथ-साथ नौकरी, शिक्षा, और नए भारत की बदलती आर्थिक तस्वीर पर उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मिलेगी।

Phone: +91 9406783569, +91 755 484 8829
Email: support@deshharpal.com
Address : A-23 Sakshi Bunglow Trilanga Near Aura Mall Bhopal M.P

Recent Posts

  • All Post
  • Breaking News
  • Education
  • More News
  • Web Story
  • एंटरटेनमेंट
  • देश-हरपल
  • धर्म-कर्म
  • प्रदेश
  • बिज़नेस
  • वर्ल्ड न्यूज़
  • वीडियो
  • स्पोर्ट्स
    •   Back
    • एक्सक्लूसिव
    • Editorial
    •   Back
    • IPL 2026
    • T20 वर्ल्ड कप
    • FIFA 2026
    •   Back
    • सोच-विचार
    • हेल्थ
    • ट्रैवल
    • कल्चर
    • एनवायरनमेंट
    • Impact Feature
    •   Back
    • राशिफल
    • पंचांग
    • पर्व-त्यौहार
    • पूजा-पाठ
    • चैत्र नवरात्रि 2025
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • छत्तीसगढ़
    •   Back
    • टीवी
    • वेब-सीरीज
    • फिल्म रिव्यू
    • बॉलीवुड
    •   Back
    • लाइफस्टाइल
    •   Back
    • स्टॉक-मार्केट

© 2023 Deshharpal. All Rights Reserved.