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MP Board 10th Result 2026: ग्रामीण और साधारण परिवारों के बच्चों ने किया कमाल, 90% से 99% तक अंक

मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों से सामने आए 10वीं बोर्ड के परिणाम इस बार एक खास कहानी बता रहे हैं—मेहनत, संघर्ष और सपनों की। इस साल ग्रामीण इलाकों और सामान्य परिवारों के बच्चों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 90% से 99% तक अंक हासिल किए हैं। संघर्ष के बीच सफलता की कहानी इस बार के रिजल्ट में बड़ी संख्या में ऐसे छात्र सामने आए हैं, जिनके माता-पिता किसान, मजदूर, ड्राइवर, दुकानदार या छोटे व्यवसायी हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद इन बच्चों ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। कई जिलों के छात्रों ने बढ़ाया मान रीवा, ग्वालियर, भोपाल, इंदौर, सागर, भिंड, मुरैना, शाजापुर, सीधी, खंडवा, मंदसौर, उज्जैन और छतरपुर समेत कई जिलों के छात्रों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। गांव के बच्चों का दमदार प्रदर्शन गांवों से आने वाले छात्रों ने इस बार खास पहचान बनाई है। खेतों में काम करने और घर की जिम्मेदारियों के बीच पढ़ाई करने वाले इन छात्रों ने यह साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी सफलता की राह में रुकावट नहीं बनती। कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने सीमित मोबाइल और ऑनलाइन संसाधनों के बावजूद नियमित पढ़ाई और अनुशासन से यह सफलता हासिल की। प्रतिभाओं को मिल रहा मंच रिजल्ट जारी होने के बाद अब मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्लेटफॉर्म पर उनकी उपलब्धियों को साझा किया जा रहा है, ताकि अन्य छात्र भी उनसे प्रेरणा ले सकें। 👉 ऐसी ही प्रेरणादायक खबरों और ताज़ा अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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MP Board Result 2026: 10वीं-12वीं के नतीजे घोषित, सरकारी स्कूलों ने मारी बाज़ी

मध्यप्रदेश में एमपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणाम बुधवार को घोषित कर दिए गए। सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास से रिजल्ट जारी किया। इस साल करीब 16 लाख छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे। इंदौर के छात्रों का शानदार प्रदर्शन इंदौर की तन्वी कुमावत ने 12वीं बायोलॉजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 500 में से 492 अंक हासिल किए और शहर में टॉप किया।कॉमर्स स्ट्रीम में याशी घनरिया ने 485 अंक हासिल कर प्रदेश में छठा स्थान पाया।वहीं पीसीएम विषय में अथर्व देशमुख ने प्रदेश में सातवीं रैंक हासिल की। 10वीं में कृष्णा खाजेकर का कमाल कक्षा 10वीं में शासकीय कन्या उमावि, राजेंद्र नगर की छात्रा कृष्णा खाजेकर ने 491 अंक हासिल किए। उन्होंने प्रदेश मेरिट में 9वां स्थान और जिला स्तर पर पहला स्थान प्राप्त किया। सरकारी स्कूलों का बेहतर रिजल्ट इंदौर जिले में इस बार सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन निजी स्कूलों से बेहतर रहा। यह आंकड़े बताते हैं कि सरकारी स्कूलों के छात्र इस साल बेहतर प्रदर्शन करने में आगे रहे। ऐसे चेक करें रिजल्ट छात्र घर बैठे अपना रिजल्ट ऑनलाइन देख सकते हैं। इसके लिए वे आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रोल नंबर डालकर परिणाम देख सकते हैं: 👉 ताज़ा अपडेट और पूरी खबर पढ़ने के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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खंडवा बीजेपी में संगठन विस्तार तेज, अनूप पटेल बने ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में भाजपा संगठन ने मोर्चा स्तर पर नई नियुक्तियों का दौर शुरू कर दिया है। एससी और एसटी मोर्चा के बाद अब ओबीसी मोर्चा की कमान अनूप पटेल को सौंपी गई है। अनूप पटेल को मंत्री विजय शाह का करीबी माना जाता है और वे फिलहाल पुरानी कार्यकारिणी के अनुसार युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। कुनबी पटेल समाज को साधने की रणनीति भाजपा का यह फैसला राजनीतिक नजरिए से भी अहम माना जा रहा है। पार्टी ने ओबीसी मोर्चा की जिम्मेदारी देकर कुनबी पटेल समाज को साधने की कोशिश की है। दरअसल, कांग्रेस भी इस समाज पर फोकस कर रही है और जिला कांग्रेस कमेटी ने अपने दो ब्लॉक अध्यक्ष इसी समाज से बनाए हैं। इसी के जवाब में भाजपा ने भी संतुलन साधते हुए अनूप पटेल को यह अहम जिम्मेदारी दी है। अन्य दावेदारों पर असर अनूप पटेल के ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष बनने के बाद अब पटेल समाज से जुड़े अन्य युवा नेताओं की दावेदारी कमजोर पड़ सकती है। खासकर मोर्चा संगठनों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे कार्यकर्ताओं के लिए यह फैसला झटका माना जा रहा है। युवा मोर्चा में भी मुकाबला दिलचस्प इधर, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष पद को लेकर भी खींचतान जारी है। सांसद समर्थक सागर आरतानी के सामने पटेल समाज के ही शुभम पटेल मजबूत दावेदार के रूप में उभरे हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े शुभम पटेल का युवाओं के बीच अच्छा नेटवर्क और जमीनी पकड़ मानी जाती है। छात्र राजनीति के जरिए उन्होंने मजबूत पहचान बनाई है। संगठन में बदलता ट्रेंड भाजपा संगठन में इन दिनों पेशेवर और प्रभावशाली चेहरों को प्राथमिकता दी जा रही है। ऐसे में कई जगहों पर पुराने और जमीनी कार्यकर्ताओं के उपेक्षित होने की चर्चा भी तेज हो गई है। खंडवा में ये नई नियुक्तियां आने वाले समय में संगठन और राजनीतिक समीकरणों को किस तरह प्रभावित करेंगी, इस पर सबकी नजर बनी हुई है। 👉 राजनीति और प्रदेश की हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें —www.deshharpal.com
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ग्वालियर केंद्रीय जेल में अवैध गतिविधियों का वीडियो वायरल, न्यायिक जांच के आदेश

मध्य प्रदेश के ग्वालियर केंद्रीय जेल से जुड़ा एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने जेल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो वायरल होने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पूरे मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। क्या है वीडियो में? बताया जा रहा है कि यह वीडियो एक जेल प्रहरी और एक बंदी द्वारा साझा किया गया है। इसमें जेल के अंदर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, कैदियों की प्रताड़ना, नशे की सप्लाई, पैसे लेकर बैरक बदलने और यहां तक कि वेश्यावृत्ति जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। खाने-पीने की चीजों में भी वसूली वीडियो में दावा किया गया है कि कैदियों से खाने-पीने की चीजों के लिए तय दरों से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं।आरोपों के मुताबिक— नशा और अन्य अवैध सुविधाओं के आरोप वीडियो में यह भी आरोप लगाया गया है कि जेल के अंदर पैसे देकर नशा उपलब्ध कराया जाता है। यहां तक कि ज्यादा पैसे देने पर वेश्यावृत्ति जैसी सुविधाएं मिलने की बात भी सामने आई है। नए कैदियों से प्रताड़ना के आरोप वीडियो में कहा गया है कि नए कैदियों को पैसे के लिए प्रताड़ित किया जाता है। जब तक उनके घर से पैसे नहीं आते, तब तक उन्हें मारपीट और जबरन काम कराया जाता है। कुछ कैदियों द्वारा आत्महत्या करने के आरोप भी सामने आए हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। बैरक बदलने के लिए लाखों की मांग आरोप है कि हवालात से दूसरी बैरक में शिफ्ट होने के लिए 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की मांग की जाती है।एक कैदी ने दावा किया कि उसने 50 हजार रुपये देकर अपनी बैरक बदलवाई। प्रशासन की कार्रवाई और जांच वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने संबंधित प्रहरी को निलंबित कर दिया है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि उसकी बयानबाजी से जेल की छवि खराब हुई है। वहीं, जिला एवं सत्र न्यायालय के रजिस्ट्रार भूपेंद्र कुशवाह ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं। अब सभी आरोपों की जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी। 👉 ऐसी ही सटीक और भरोसेमंद खबरों के लिए विजिट करें — मध्य प्रदेश के ग्वालियर केंद्रीय जेल से जुड़ा एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने जेल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो वायरल होने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पूरे मामले में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं और विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। क्या है वीडियो में? बताया जा रहा है कि यह वीडियो एक जेल प्रहरी और एक बंदी द्वारा साझा किया गया है। इसमें जेल के अंदर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, कैदियों की प्रताड़ना, नशे की सप्लाई, पैसे लेकर बैरक बदलने और यहां तक कि वेश्यावृत्ति जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। खाने-पीने की चीजों में भी वसूली वीडियो में दावा किया गया है कि कैदियों से खाने-पीने की चीजों के लिए तय दरों से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं।आरोपों के मुताबिक— नशा और अन्य अवैध सुविधाओं के आरोप वीडियो में यह भी आरोप लगाया गया है कि जेल के अंदर पैसे देकर नशा उपलब्ध कराया जाता है। यहां तक कि ज्यादा पैसे देने पर वेश्यावृत्ति जैसी सुविधाएं मिलने की बात भी सामने आई है। नए कैदियों से प्रताड़ना के आरोप वीडियो में कहा गया है कि नए कैदियों को पैसे के लिए प्रताड़ित किया जाता है। जब तक उनके घर से पैसे नहीं आते, तब तक उन्हें मारपीट और जबरन काम कराया जाता है। कुछ कैदियों द्वारा आत्महत्या करने के आरोप भी सामने आए हैं, जिससे मामला और गंभीर हो गया है। बैरक बदलने के लिए लाखों की मांग आरोप है कि हवालात से दूसरी बैरक में शिफ्ट होने के लिए 50 हजार से 1 लाख रुपये तक की मांग की जाती है।एक कैदी ने दावा किया कि उसने 50 हजार रुपये देकर अपनी बैरक बदलवाई। प्रशासन की कार्रवाई और जांच वीडियो सामने आने के बाद जेल प्रशासन ने संबंधित प्रहरी को निलंबित कर दिया है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि उसकी बयानबाजी से जेल की छवि खराब हुई है। वहीं, जिला एवं सत्र न्यायालय के रजिस्ट्रार भूपेंद्र कुशवाह ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को संज्ञान में लेकर न्यायिक जांच के आदेश दिए गए हैं। अब सभी आरोपों की जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी। 👉 ऐसी ही सटीक और भरोसेमंद खबरों के लिए विजिट करें —www.deshharpal.com
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सागर में विधायक की बेटी का विवादित वीडियो वायरल, युवक की जूतों से पिटाई; दोनों पक्षों के अलग-अलग आरोप

मध्य प्रदेश के सागर जिले की देवरी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक बृजबिहारी पटेरिया की बेटी प्रियंका पटेरिया एक बार फिर चर्चा में हैं। उनका एक विवादित सीसीटीवी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में प्रियंका एक युवक की जूतों से पिटाई करती नजर आ रही हैं। बताया जा रहा है कि यह घटना सोमवार की है, जबकि वीडियो मंगलवार को सामने आया। क्या है पूरा मामला? पीड़ित युवक राजेश शर्मा, जो मढ़ी जमुनिया का रहने वाला है, के अनुसार वह सोमवार को गौरझामर स्थित एक बैंक में काम से गया था। इसी दौरान उसे मैसेज मिला कि प्रियंका पटेरिया उसे बाहर बुला रही हैं। राजेश का कहना है कि जैसे ही वह उनकी कार के पास पहुंचा, प्रियंका कार से उतरीं और बिना कुछ कहे उस पर जूतों से हमला कर दिया। घटना के बाद युवक ने गौरझामर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। प्रियंका पटेरिया ने क्या कहा? दूसरी ओर, प्रियंका पटेरिया ने मारपीट की बात स्वीकार की है, लेकिन इसे अपनी मजबूरी बताया है। उनका आरोप है कि राजेश शर्मा काफी समय से उनका पीछा कर रहा था। प्रियंका के मुताबिक, युवक उनकी कार का पीछा करता था और कई बार खतरनाक तरीके से ओवरटेक करने की कोशिश भी कर चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि एक साल पहले दर्ज एक एफआईआर में भी राजेश का नाम सामने आया था, लेकिन इसके बावजूद उसकी हरकतें नहीं रुकीं। प्रियंका ने कहा, “मैंने उसे सिर्फ यह पूछने के लिए बुलाया था कि वह ऐसा क्यों कर रहा है, लेकिन बात बढ़ गई।” पुलिस जांच जारी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस फिलहाल खुलकर कुछ भी कहने से बच रही है। हालांकि, शिकायत दर्ज कर ली गई है और वायरल सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच जारी है। यह मामला अब इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। 👉 ऐसी ही ताज़ा और भरोसेमंद खबरों के लिए विजिट करें — www.deshharpal.com
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रायसेन कृषि मेले का आज समापन: गडकरी होंगे शामिल, जीतू पटवारी को पुलिस ने रास्ते में रोका

मध्य प्रदेश के रायसेन में केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan के नेतृत्व में चल रहे तीन दिवसीय कृषि मेले का आज समापन हो रहा है। इस मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री Nitin Gadkari भी शामिल होंगे। मेले में जाने से पहले ही रोके गए जीतू पटवारी इधर, एमपी कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने भी मेले में पहुंचकर किसानों की समस्याएं उठाने का ऐलान किया था। लेकिन पुलिस की सख्ती के चलते वे रायसेन नहीं पहुंच सके। आनंद नगर इलाके में पुलिस ने बैरिकेडिंग कर उनका रास्ता रोक लिया। काफी देर तक बहस के बाद भी उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं मिली, जिसके बाद वे अपने काफिले के साथ वापस लौट गए। “संवाद करना चाहता था, टकराव नहीं” जीतू पटवारी ने कहा कि उनका मकसद किसी तरह का विवाद खड़ा करना नहीं था, बल्कि वे संवाद करना चाहते थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले ही अनुमति के लिए पत्र लिखा था और कहा था कि इजाजत मिलने पर ही मेले में जाएंगे। पटवारी के मुताबिक, सुबह उन्हें पुलिस अधिकारियों का फोन आया, जिसमें कहा गया कि सरकार नहीं चाहती कि वे मेले में आएं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें रोकने के लिए रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। किसानों की हालत पर उठाए सवाल कृषि मेले के बीच पटवारी ने किसानों की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंडियों में किसानों को गेहूं का सही दाम नहीं मिल रहा है। उनका दावा है कि किसान 2 हजार रुपए से कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ बड़े-बड़े आयोजन हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ किसान परेशान हैं। दिग्विजय सिंह से मुलाकात, राज्यसभा पर बड़ा दावा इस घटनाक्रम के बीच पटवारी ने पूर्व मुख्यमंत्री Digvijaya Singh से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पार्टी की रणनीति और संगठन को मजबूत करने पर चर्चा हुई। राज्यसभा चुनाव को लेकर पटवारी ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा—“5 लाख परसेंट हमारा उम्मीदवार राज्यसभा जाएगा।” समापन में गडकरी की मौजूदगी, सुरक्षा कड़ी मेले के अंतिम दिन Nitin Gadkari के आगमन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। देशभर से आए कृषि विशेषज्ञ और कंपनियां मेले में नई तकनीकों का प्रदर्शन कर रही हैं। Shivraj Singh Chouhan इस आयोजन के जरिए किसानों को केंद्र की योजनाओं और आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, विपक्ष के विरोध और जीतू पटवारी को रोके जाने की घटना ने मेले को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। 👉 अधिक जानकारी और ताज़ा अपडेट के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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ग्वालियर में आधी रात भीषण आग: मकान और वाहन जले, लोगों ने घर छोड़कर बचाई जान

मध्य प्रदेश के ग्वालियर के मुरार इलाके में रविवार और सोमवार की दरमियानी रात एक भीषण आग की घटना ने इलाके में दहशत फैला दी। रात करीब 2:30 बजे एक मकान में अचानक आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। तेजी से फैली आग, आसपास के घर भी चपेट में यह घटना संकल्प हॉस्पिटल के पास प्रेमशंकर नारायण के बाड़े की है। आग इतनी तेजी से फैली कि इसकी लपटें आसपास के घरों तक पहुंच गईं। करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। मकान मालिक बल्ली कांदिल ने बताया कि घर के सामने निर्माण कार्य चल रहा था, जबकि पीछे परिवार रह रहा था। रात में पड़ोसियों ने आग लगने की सूचना दी, जिसके बाद वे मौके पर पहुंचे। लोगों ने बच्चों के साथ घर छोड़ा आग और धुएं से घबराकर आसपास के लोगों ने अपने बच्चों के साथ घर खाली कर सड़क पर शरण ली। कई घरों की दीवारें भी आग की गर्मी से झुलस गईं। ट्रैक्टर-स्कॉर्पियो समेत कई वाहन जलकर खाक इस आग में एक ट्रैक्टर, एक स्कॉर्पियो कार, तीन बाइक और एक स्कूटी पूरी तरह जल गए। घटना में लाखों रुपए के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों ने खुद बुझाई आग फायर ब्रिगेड के समय पर नहीं पहुंचने के आरोप के बीच, मकान मालिक और स्थानीय लोगों ने मिलकर बोरिंग पंप और पाइप से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की। आसपास के घरों से भी लोगों ने मदद की, जिसके बाद आग पर काबू पाया जा सका। फायर ब्रिगेड पर लापरवाही का आरोप मकान मालिक का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद दमकल टीम समय पर नहीं पहुंची और सुबह तक इंतजार करना पड़ा। आग लगने की वजह क्या? मकान मालिक के अनुसार, जहां आग लगी वहां बिजली कनेक्शन नहीं था, इसलिए शॉर्ट सर्किट की संभावना कम है। आशंका जताई जा रही है कि वाहनों में स्पार्किंग और पेट्रोल-डीजल की वजह से आग भड़क गई। सिथौली फैक्ट्री में भी लगी आग, टला बड़ा हादसा इसी रात ग्वालियर-झांसी हाईवे स्थित सिथौली रेलवे स्प्रिंग फैक्ट्री में भी कोयले के ढेर में आग लग गई। हालांकि कर्मचारियों की सतर्कता से 10-15 मिनट में ही आग पर काबू पा लिया गया। दमकल टीम भी मौके पर पहुंची और कोयले को ठंडा करने के लिए पानी डाला गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
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कन्फर्म टिकट के बावजूद नहीं मिला कोच, बुजुर्गों को टॉयलेट के पास बैठकर करना पड़ा सफर; आयोग ने रेलवे को ठहराया दोषी

रेलवे की लापरवाही का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें कन्फर्म टिकट और सीट नंबर होने के बावजूद यात्रियों को तय कोच ही नहीं मिला। यह घटना 30 नवंबर 2024 की है, लेकिन अब इस पर फैसला आया है। क्या है पूरा मामला? नागपुर से भोपाल जा रहे चार वरिष्ठ यात्रियों ने अमृतसर एक्सप्रेस (22125) में DL-1 कोच की सीटें पहले से बुक कराई थीं। लेकिन जब ट्रेन स्टेशन पर पहुंची, तो वह कोच ट्रेन में लगा ही नहीं था। यात्रियों ने रेलवे स्टाफ से मदद मांगी, लेकिन उन्हें साफ कह दिया गया—“जाना है तो जनरल डिब्बे में बैठो।” मजबूरी में बुजुर्ग यात्रियों को भीड़भाड़ वाले जनरल कोच में चढ़ना पड़ा, जहां सीट न मिलने पर उन्हें टॉयलेट के पास बैठकर सफर करना पड़ा। सफर बना परेशानी का सबब ठंड का मौसम, भीड़भाड़ और टॉयलेट के पास बैठने की मजबूरी—इन सबके कारण यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खासकर अस्थमा जैसी बीमारी से पीड़ित यात्रियों की तबीयत भी बिगड़ गई। शिकायत के बाद भी नहीं मिली मदद यात्रियों ने सफर के दौरान ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्हें सिर्फ सीट नंबर की जानकारी दी गई, कोच के बारे में कुछ स्पष्ट नहीं बताया गया। पूरे सफर में न टीटीई ने मदद की और न ही किसी अन्य स्टाफ ने। रेलवे का दावा, लेकिन सबूत नहीं मामला जब उपभोक्ता आयोग पहुंचा, तो रेलवे ने कहा कि उस दिन कोच लगाया गया था और सीट नंबर भी आवंटित थे। रेलवे का तर्क था कि एसएमएस के जरिए जानकारी दे दी गई थी, इसलिए सेवा में कोई कमी नहीं है। लेकिन आयोग ने पाया कि रेलवे के पास इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं था कि DL-1 कोच वास्तव में ट्रेन में लगाया गया था। यात्री के पक्ष में आया फैसला फरियादी मंगलेश कुमार जोशी की ओर से पेश किए गए फोटो, एफिडेविट और अन्य दस्तावेजों से यह साफ हो गया कि कोच मौजूद नहीं था। इसके बाद भोपाल उपभोक्ता आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए रेलवे के खिलाफ फैसला सुनाया। आयोग ने रेलवे को यात्रियों को मुआवजा देने का आदेश दिया। अधिक जानकारी और ताज़ा अपडेट के लिए विजिट करें: www.deshharpal.com
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खंडवा में दर्दनाक सड़क हादसा: शादी से लौट रहे लोगों की आयशर पलटी, 1 की मौत, 28 घायल

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में शुक्रवार को एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। मूंदी-सनावद हाईवे पर शादी समारोह से लौट रहे लोगों से भरी आयशर वाहन अनियंत्रित होकर पलट गई। इस हादसे में 60 वर्षीय बाबूलाल की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 28 लोग घायल हो गए। शादी की खुशी मातम में बदली जानकारी के अनुसार, वाहन में करीब 40 लोग सवार थे, जो गुर्जर समाज से जुड़े थे। सभी लोग ग्राम तलवड़िया (अत्तर) से मामेरा लेकर ग्राम ठुकरा देवला गए थे। परंपरागत कार्यक्रम के बाद जब सभी अपने गांव लौट रहे थे, तब रास्ते में यह हादसा हो गया। कुछ देर पहले तक जहां खुशियां थीं, वहीं अचानक चीख-पुकार मच गई। ओवरटेक करते समय पलटी गाड़ी हादसा डूडगांव के पास मूंदी-सनावद हाईवे पर हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, चालक ने ओवरटेक करने की कोशिश की, तभी वाहन का संतुलन बिगड़ गया और सड़क किनारे उतरते ही आयशर पलट गई। बताया जा रहा है कि वाहन में क्षमता से अधिक लोग बैठे थे, जिससे हादसे का खतरा और बढ़ गया। घटना के बाद मचा हड़कंप हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। कई लोग वाहन के नीचे दब गए और मदद के लिए चीखते-चिल्लाते रहे। आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया। घायलों को बाहर निकालकर एंबुलेंस और निजी वाहनों से सनावद अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर घायलों को खंडवा रेफर प्राथमिक इलाज के बाद कई गंभीर घायलों को जिला अस्पताल खंडवा रेफर किया गया है। वहीं मृतक बाबूलाल के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में शोक का माहौल बना हुआ है। पुलिस जांच में जुटी पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में ओवरलोडिंग, ओवरटेक और लापरवाही हादसे की मुख्य वजह मानी जा रही है। हालांकि, वाहन की तकनीकी स्थिति और चालक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। 👉 ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट और लोकल खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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ग्वालियर में दर्दनाक सड़क हादसा: RTO सब-इंस्पेक्टर की मौके पर मौत, जीजा गंभीर घायल

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में गुरुवार रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में RTO सब-इंस्पेक्टर देवेंद्र मिश्रा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके जीजा बॉबी उर्फ आशीष गंभीर रूप से घायल हो गए। ड्यूटी से लौटते समय हुआ हादसा जानकारी के मुताबिक, 37 वर्षीय देवेंद्र मिश्रा अपने जीजा के साथ बाइक से ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहे थे। तभी पनिहार थाना क्षेत्र में पीछे से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि देवेंद्र ट्रक के पहिए के नीचे आ गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घायल का अस्पताल में इलाज जारी हादसे में घायल बॉबी उर्फ आशीष को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि वे भी पनिहार RTO कार्यालय में पदस्थ हैं। ट्रक चालक फरार, पुलिस जांच में जुटी हादसे के बाद आरोपी ट्रक चालक वाहन लेकर फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पनिहार थाना पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और हाईवे के ढाबों व होटलों के CCTV फुटेज खंगालकर उसकी तलाश की जा रही है। इकलौते बेटे की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ देवेंद्र मिश्रा अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनके परिवार में पत्नी, 10 साल का बेटा और 13 साल की बेटी है। घटना के बाद पोस्टमार्टम हाउस में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। होमगार्ड से RTO तक का सफर देवेंद्र मिश्रा पहले होमगार्ड में कार्यरत थे और साल 2025 में उनकी RTO में नौकरी लगी थी। इसी साल उनका ट्रांसफर पनिहार कार्यालय में हुआ था। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों के खतरे को उजागर करता है। 👉 ऐसी ही ग्राउंड रिपोर्ट और लोकल खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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