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1 अप्रैल से बदल गए कई नियम: टैक्स छूट, सिलेंडर सस्ता, कारें महंगी, यूनिफाइड पेंशन स्कीम शुरू

1 अप्रैल से बदल गए कई नियम: टैक्स छूट, सिलेंडर सस्ता, कारें महंगी, यूनिफाइड पेंशन स्कीम शुरू

नया महीना यानी अप्रैल 2025 कई बड़े बदलाव लेकर आया है। इन बदलावों का असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। इनकम टैक्स में छूट से लेकर सिलेंडर की कीमतों में गिरावट और कारों के दाम बढ़ने तक, यहां जानिए 1 अप्रैल से लागू हुए 10 बड़े बदलाव: 1. कॉमर्शियल सिलेंडर हुआ सस्ता अगर आप होटल या रेस्तरां चलाते हैं, तो यह आपके लिए राहत की खबर है। 19 किलो वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में ₹44.50 तक की गिरावट आई है। हालांकि, घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 किलो) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में यह अभी भी ₹803 और मुंबई में ₹802.50 पर मिल रहा है। 2. 12 लाख तक की इनकम टैक्स फ्री अब नई टैक्स व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा। नौकरीपेशा लोगों को 75 हजार रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा मिलेगा, जिससे यह छूट 12.75 लाख रुपये तक हो जाएगी। 3. महिला सम्मान सेविंग्स सर्टिफिकेट स्कीम बंद महिलाओं के लिए खास महिला सम्मान सेविंग्स सर्टिफिकेट स्कीम (MSSC) को सरकार ने बंद कर दिया है। इसमें 7.5% का सालाना ब्याज मिलता था और 2 लाख रुपये तक निवेश की सीमा थी। 4. गाड़ियों की कीमतों में इजाफा अगर आप नई कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो अब ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, किआ इंडिया, हुंडई और होंडा ने अपने वाहनों की कीमतें बढ़ा दी हैं। 5. इनएक्टिव मोबाइल नंबरों पर UPI बंद अगर आपका बैंक से लिंक किया हुआ मोबाइल नंबर लंबे समय से इनएक्टिव है, तो अब उस नंबर से UPI पेमेंट नहीं कर पाएंगे। ऐसे नंबर UPI सिस्टम से हटा दिए जाएंगे। 6. सीनियर सिटीजन को ब्याज पर दोगुनी टैक्स छूट अब वरिष्ठ नागरिकों को बैंक और पोस्ट ऑफिस में जमा राशि के ब्याज पर टैक्स छूट 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है। इससे उन्हें ज्यादा बचत करने का मौका मिलेगा। 7. केंद्रीय कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) अब नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) के तहत आने वाले केंद्रीय कर्मचारी यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का लाभ उठा सकेंगे। 8. ULIP पर कैपिटल गेन टैक्स अगर आपका यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (ULIP) का सालाना प्रीमियम ₹2.5 लाख से ज्यादा है, तो अब उस पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा। 9. बैंक में मिनिमम बैलेंस से जुड़े नियम बदले SBI, PNB और केनरा बैंक समेत कई बैंकों ने मिनिमम बैलेंस रखने के नियमों में बदलाव किया है। अब यह बैलेंस इस बात पर निर्भर करेगा कि खाता शहरी, अर्ध-शहरी या ग्रामीण इलाके में है। न्यूनतम बैलेंस न रखने पर जुर्माना भी लग सकता है। 10. हवाई सफर हो सकता है सस्ता एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें ₹6,064.1 तक घटाई गई हैं। इससे हवाई टिकटों के दाम कम होने की संभावना है। निष्कर्ष 1 अप्रैल से लागू इन बदलावों का असर हर किसी पर पड़ेगा। कुछ मामलों में राहत मिलेगी, तो कुछ चीजें महंगी हो जाएंगी। इनकम टैक्स की छूट और पेंशन स्कीम जैसी सुविधाएं फायदेमंद साबित हो सकती हैं, जबकि कारों की कीमत बढ़ने और बैंक नियमों के बदलाव से लोगों की जेब पर असर पड़ेगा। अगर आप इन परिवर्तनों के बारे में अपडेट रहना चाहते हैं, तो देश हरपाल न्यूज के साथ जुड़े रहें!
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1 अप्रैल 2025 से बदल जाएंगे ये 6 बड़े नियम: नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग को मिलेगा बड़ा फायदा

1 अप्रैल 2025 से बदल जाएंगे ये 6 बड़े नियम: नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग को मिलेगा बड़ा फायदा

1 अप्रैल 2025 से नया बजट लागू हो रहा है। 1 फरवरी को पेश किए गए बजट में कई बड़े बदलाव किए गए थे, जो अब लागू होंगे। इनमें टैक्स में राहत, रेंटल इनकम पर छूट और विदेश में पढ़ाई के लिए फंड ट्रांसफर पर टैक्स में बदलाव शामिल हैं। आइए जानते हैं कि इस बार के बजट में क्या-क्या बदलेगा और इसका आप पर क्या असर पड़ेगा। 1. टैक्स स्लैब में बदलाव: नौकरीपेशा लोगों को 75 हजार की अतिरिक्त राहत बदलाव: असर: 2. TDS छूट बढ़ी: रेंटल इनकम और सीनियर सिटीजन्स को राहत बदलाव: असर: 3. विदेश में पढ़ाई के लिए टैक्स छूट: अब 10 लाख तक बिना TCS कटे भेज सकेंगे पैसा बदलाव: असर: 4. अपडेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए अब 48 महीने तक का समय बदलाव: असर: 5. यूलिप पर कैपिटल गेन टैक्स: हाई-इनकम ग्रुप के लिए नया नियम बदलाव: असर: 6. कस्टम ड्यूटी में बदलाव: 150-200 प्रोडक्ट होंगे सस्ते या महंगे बदलाव: सस्ते होंगे: महंगे होंगे: असर: सरकारी योजनाओं का फायदा कब से मिलेगा?
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ लागू होने से पहले वैश्विक शेयर बाजारों में हड़कंप

नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ (Reciprocal Tariff) अगले महीने 2 अप्रैल से लागू होने जा रहा है। इससे पहले ही दुनियाभर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखी जा रही है। जापान का निक्केई (Nikkei), दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) और अन्य एशियाई शेयर बाजार लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी बाजारों पर भी इसका असर दिख रहा है। क्या है रेसिप्रोकल टैरिफ? रेसिप्रोकल टैरिफ अमेरिकी व्यापार नीति का हिस्सा है, जिसके तहत अमेरिका उन देशों पर समान शुल्क लगाएगा जो अमेरिकी उत्पादों पर ऊंचा आयात शुल्क लगाते हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि यह नीति अमेरिकी कंपनियों और निर्यातकों के हितों की रक्षा करेगी। वैश्विक बाजारों पर असर भारतीय बाजारों पर असर भारतीय शेयर बाजार भी वैश्विक गिरावट की चपेट में आ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका अपने टैरिफ नीति को सख्ती से लागू करता है, तो भारतीय कंपनियों को भी नुकसान हो सकता है, खासतौर पर आईटी, फार्मा और ऑटोमोबाइल सेक्टर को। आगे क्या? विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिका अपनी इस नीति को पूरी तरह लागू करता है तो यह कई देशों के लिए चुनौती बन सकता है। कई सरकारें अमेरिका के इस फैसले का विरोध कर सकती हैं, जिससे आने वाले दिनों में व्यापार युद्ध (Trade War) की स्थिति भी बन सकती है। (देश हरपल के लिए विशेष रिपोर्ट)
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1 अप्रैल से लागू होगा नया बजट: जानिए 6 बड़े बदलाव, नौकरीपेशा को मिलेगा ₹75,000 तक का फायदा

नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2025 की शुरुआत के साथ ही 1 अप्रैल से नया बजट लागू होने जा रहा है। इस बजट में खासतौर पर नौकरीपेशा, करदाताओं और छोटे व्यापारियों के लिए कई अहम बदलाव किए गए हैं। केंद्र सरकार ने आम आदमी को राहत देने के उद्देश्य से कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जिनका असर हर करदाता और वेतनभोगी वर्ग पर पड़ेगा। आइए जानते हैं 1 अप्रैल 2025 से लागू होने वाले 6 बड़े बदलाव और इनका आप पर क्या असर पड़ेगा। 1. इनकम टैक्स स्लैब में राहत, ₹75,000 तक का फायदा वेतनभोगी वर्ग के लिए इनकम टैक्स में बड़ा बदलाव किया गया है। नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) के तहत स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी। अब वेतनभोगी करदाता को अधिक टैक्स सेविंग का मौका मिलेगा, जिससे उसकी नेट इनकम बढ़ जाएगी। 2. सैलरीड क्लास के लिए HRA और 80C में राहत घर किराए पर रहने वाले लोगों को बजट 2025 में HRA (House Rent Allowance) में अतिरिक्त छूट दी गई है। साथ ही, सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचाने के लिए निवेश की सीमा भी बढ़ाई गई है, जिससे मिडिल क्लास फैमिली को अधिक बचत करने का अवसर मिलेगा। 3. EPF और PPF पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर ब्याज दरों में वृद्धि की घोषणा की है। EPF पर नई ब्याज दर 8.25% कर दी गई है, जबकि PPF पर अब 7.8% ब्याज मिलेगा। इससे नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग को लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न मिलेगा। 4. MSME और छोटे व्यापारियों के लिए टैक्स में राहत माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) को सरकार ने टैक्स में छूट दी है। सरकार ने जीएसटी रजिस्ट्रेशन की सीमा को बढ़ाने के साथ ही छोटे व्यापारियों को कंप्लायंस में राहत दी है, जिससे उन्हें व्यापार करने में आसानी होगी। 5. डिजिटल पेमेंट्स पर नए प्रोत्साहन डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने UPI और ऑनलाइन पेमेंट्स पर कुछ नए इंसेंटिव देने का ऐलान किया है। छोटे कारोबारियों और दुकानदारों के लिए UPI ट्रांजेक्शन पर ट्रांजेक्शन फीस को कम किया गया है। 6. एलपीजी और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स पर सब्सिडी महिलाओं और गरीब परिवारों को राहत देते हुए सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी सिलेंडर पर सब्सिडी जारी रखने का फैसला किया है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए EV खरीदने पर टैक्स छूट और सब्सिडी दी जाएगी। कैसे होगा असर? 1 अप्रैल से लागू होने वाले इन बदलावों से देश के करोड़ों करदाताओं, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों को सीधा फायदा मिलेगा। टैक्स बचत से आम लोगों की इनकम बढ़ेगी, EPF-PFF की बढ़ी हुई ब्याज दरों से निवेशकों को अधिक रिटर्न मिलेगा, और MSME सेक्टर को राहत मिलेगी जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। निष्कर्ष वित्त वर्ष 2025 के बजट में सरकार ने आम जनता और खासतौर पर नौकरीपेशा लोगों को राहत देने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। इनकम टैक्स में छूट, HRA और 80C की राहत, PF की ब्याज दरों में बढ़ोतरी, छोटे व्यापारियों को राहत, डिजिटल पेमेंट्स पर प्रोत्साहन और EV सब्सिडी जैसे बदलावों का असर लंबे समय तक देखने को मिलेगा। (देश हरपल न्यूज के लिए रिपोर्टिंग: निखिल
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HDFC बैंक टॉप गेनर, मार्केट कैप 44,934 करोड़ बढ़ा, इंफोसिस और रिलायंस की वैल्यू घटी

HDFC बैंक टॉप गेनर, मार्केट कैप 44,934 करोड़ बढ़ा, इंफोसिस और रिलायंस की वैल्यू घटी

पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में हलचल देखने को मिली। देश की टॉप-10 कंपनियों में से 8 की मार्केट वैल्यू में जबरदस्त उछाल आया, जिससे कुल वैल्यू 88,086 करोड़ रुपये बढ़ गई। इस हफ्ते HDFC बैंक टॉप गेनर के रूप में उभरा, जबकि इंफोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज को नुकसान झेलना पड़ा। HDFC बैंक की बड़ी छलांग HDFC बैंक का मार्केट कैप 44,934 करोड़ रुपये बढ़कर 13.99 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसके अलावा, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की मार्केट वैल्यू 16,600 करोड़ रुपये बढ़कर 6.89 लाख करोड़ रुपये हो गई। अन्य कंपनियों में भी तेजी दिखी: इंफोसिस और रिलायंस को झटका हालांकि, कुछ कंपनियों को नुकसान भी हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज की मार्केट वैल्यू 9,136 करोड़ रुपये घटकर 6.52 लाख करोड़ रुपये पर आ गई। इंफोसिस को भी नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि, रिलायंस का कुल मार्केट कैप 1,962 करोड़ रुपये बढ़कर 17.25 लाख करोड़ रुपये हो गया। सेंसेक्स और निफ्टी का हाल सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन (शुक्रवार, 28 मार्च) को सेंसेक्स 198 अंक गिरकर 77,414 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में 72 अंकों की गिरावट आई और यह 23,519 पर बंद हुआ। हालांकि, पूरे हफ्ते में सेंसेक्स 280 अंक चढ़ा। NSE के 50 शेयरों में से 19 शेयरों में तेजी रही, जबकि 31 में गिरावट आई। निफ्टी मीडिया इंडेक्स 2.29% गिरा, निफ्टी IT में 1.76% और निफ्टी रियल्टी में 1.42% की गिरावट रही।
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सोना-चांदी ने बनाया ऑल टाइम हाई, कीमतों में जबरदस्त उछाल

हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार (28 मार्च) को सोना-चांदी ने ऑल टाइम हाई बनाया। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 747 रुपए बढ़कर 89,164 रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया। इससे पहले 20 मार्च को सोने ने 88,761 रुपए का ऑल टाइम हाई बनाया था। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 1,117 रुपए बढ़कर 1,00,892 रुपए प्रति किलो हो गई। यह इसका नया ऑल टाईम हाई भी है। इससे पहले मंगलवार, 18 मार्च को चांदी का भाव ₹1,00,400 प्रति किलो के ऑल टाइम हाई पर था। कल यानी गुरुवार (27 मार्च) इसका दाम 99,775 रुपए था। सोने की कीमतें (28 मार्च 2025) प्योरिटी 27 मार्च 28 मार्च 24 कैरेट ₹88,417 ₹89,164 22 कैरेट ₹80,990 ₹81,674 18 कैरेट ₹66,313 ₹66,873 महानगरों में सोने की कीमतें (10 ग्राम) शहर 22 कैरेट (₹) 24 कैरेट (₹) दिल्ली 83,550 91,130 मुंबई 83,400 90,980 कोलकाता 83,400 90,980 चेन्नई 83,400 90,980 2025 में अब तक सोने-चांदी की कीमतों में वृद्धि तारीख सोने की कीमत (₹) चांदी की कीमत (₹) 1 जनवरी 76,162 86,017 28 मार्च 89,164 1,00,892 परिवर्तन +₹13,002 +₹14,875 कीमतों में उछाल का कारण: सोने और चांदी की कीमतों में यह बढ़ोतरी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, डॉलर की कमजोरी और बढ़ती मांग के कारण हुई है। निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश साधनों की ओर बढ़ा है, जिससे कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं।
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सर्विस चार्ज नहीं लगेगा

अब रेस्टोरेंट में सर्विस चार्ज नहीं लगेगा! दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

क्या है मामला? अगर आप किसी होटल या रेस्टोरेंट में खाने जाते हैं, तो अकसर आपने बिल में सर्विस चार्ज जुड़ा हुआ देखा होगा। यह चार्ज 5% या उससे ज्यादा हो सकता है, जो ग्राहकों को बिना पूछे उनके बिल में जोड़ दिया जाता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अब इस पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कहा कि कोई भी होटल या रेस्टोरेंट फूड बिल में अनिवार्य सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकते। यह फैसला 28 मार्च 2025 को सुनाया गया, जिसमें हाईकोर्ट ने सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) के 2022 में जारी किए गए नियमों को सही ठहराया। रेस्टोरेंट एसोसिएशन को झटका, लगा ₹1 लाख का जुर्माना इस मामले में नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) और फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FHRAI) ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। इन संगठनों का कहना था कि कोई कानून ऐसा नहीं है जो सर्विस चार्ज को गैरकानूनी ठहराता हो। इसलिए, वे अपने ग्राहकों से यह चार्ज ले सकते हैं। लेकिन, कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और इन संगठनों पर ₹1 लाख का जुर्माना भी लगा दिया। क्या था CCPA का नियम? CCPA (सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी) ने जुलाई 2022 में एक गाइडलाइन जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि:कोई होटल या रेस्टोरेंट सर्विस चार्ज को ऑटोमेटिक रूप से बिल में नहीं जोड़ सकता।ग्राहक से सर्विस चार्ज लेना अनैतिक व्यापारिक तरीका है।अगर कोई रेस्टोरेंट जबरदस्ती सर्विस चार्ज वसूलता है, तो ग्राहक इसकी शिकायत कर सकते हैं। लेकिन, 20 जुलाई 2022 को हाईकोर्ट ने इस गाइडलाइन पर अस्थायी रोक लगा दी थी। अब, 28 मार्च 2025 को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस रोक को हटा दिया है और CCPA के फैसले को सही बताया। सर्विस चार्ज क्या होता है? जब आप किसी होटल या रेस्टोरेंट में जाते हैं, तो वे खाने के साथ-साथ सर्विस देने के लिए एक अतिरिक्त चार्ज वसूलते हैं। इसे ही सर्विस चार्ज कहा जाता है। ये बिल का 5% या ज्यादा हो सकता है। यह टैक्स से अलग होता है, यानी यह सरकार को नहीं जाता, बल्कि रेस्टोरेंट रख लेते हैं। ग्राहकों को इस चार्ज का भुगतान करना अनिवार्य नहीं होना चाहिए। अब ग्राहकों के लिए राहत! अब ग्राहक बिना किसी डर के अपने बिल को ध्यान से देख सकते हैं। अगर बिल में सर्विस चार्ज जुड़ा है, तो आप इसे हटाने की मांग कर सकते हैं। अगर कोई होटल या रेस्टोरेंट जबरदस्ती सर्विस चार्ज लेता है, तो आप इसकी शिकायत कर सकते हैं:📞 कंज्यूमर हेल्पलाइन नंबर: 1800-11-4000💻 ईमेल: consumerhelpline.gov.in📲 CPGRAMS पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। निष्कर्ष दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला ग्राहकों के पक्ष में आया है। अब कोई भी होटल या रेस्टोरेंट आपसे जबरदस्ती सर्विस चार्ज नहीं ले सकता। यह पूरी तरह से स्वैच्छिक होगा, यानी ग्राहक अपनी मर्जी से दे सकते हैं या नहीं।
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बाजार में कौन आगे? F&O में FIIs, DIIs या रिटेल निवेशक

बाजार में कौन आगे? F&O में FIIs, DIIs या रिटेल निवेशक

भारतीय शेयर बाजार में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। खासकर फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में विदेशी निवेशकों (FIIs), घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और रिटेल निवेशकों की रणनीतियों पर सबकी नजर है। मार्च सीरीज के आखिरी दिन निफ्टी 1,047 अंकों की उछाल के साथ 23,592 पर बंद हुआ। बैंक निफ्टी और मिडकैप निफ्टी में भी क्रमश: 5.8% और 5.1% की तेजी रही। FIIs की बढ़ती खरीदारी – बाजार में तेजी का संकेत F&O डेटा के अनुसार, FIIs ने बीते 9 ट्रेडिंग सेशंस में ₹17,433.78 करोड़ की नेट खरीदारी की है। इसके अलावा, उन्होंने अपनी शॉर्ट पोजीशन में कटौती की है, जिससे बाजार में तेजी का संकेत मिल रहा है। DIIs और रिटेल निवेशकों की स्थिति कैसी? घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का भरोसा भी बाजार में मजबूत बना हुआ है। तकनीकी विश्लेषण – बाजार का अगला कदम क्या? तकनीकी चार्ट्स के अनुसार, निफ्टी को 200-दिनों की मूविंग एवरेज (EMA) से मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। किन शेयरों में जोरदार मूवमेंट? तेजी वाले शेयर: बिकवाली दबाव वाले शेयर: निष्कर्ष – आगे क्या करें? बाजार में मजबूती बनी हुई है, खासकर FIIs और DIIs की बढ़ती खरीदारी इसे सपोर्ट दे रही है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में 24,000 के आस-पास रेजिस्टेंस दिख सकता है। निवेशकों को समझदारी से ट्रेडिंग करनी चाहिए और 23,500 के स्तर को खरीदारी का अच्छा मौका मानना चाहिए। बाजार की हर हलचल पर नजर रखने के लिए जुड़े रहें Deshharpal के साथ!
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मुकेश अंबानी भारत के सबसे अमीर व्यक्ति अडानी दुसरे नम्बर पर

हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट 2025 के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भारत के सबसे अमीर व्यक्ति का खिताब बरकरार रखा है। वह विश्व स्तर पर 10वें स्थान पर हैं, उनकी संपत्ति में 40% की वृद्धि हुई है, जिससे उनकी कुल संपत्ति 11.5 अरब डॉलर हो गई है अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी 15वें स्थान पर हैं, जिनकी शुद्ध संपत्ति 86 अरब डॉलर है। उनकी संपत्ति में 33 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है, जिसमें 2023 में उनकी कंपनियों के शेयरों में तेज सुधार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है。 एचसीएल की रोशनी नाडार तीसरे स्थान पर हैं और भारत के शीर्ष 10 सबसे अमीर व्यक्तियों में इकलौती महिला हैं।​ हुरुन लिस्ट 2025 से जुड़ी प्रमुख बातें: इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भारत में आर्थिक विकास के साथ-साथ अरबपतियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है, जो देश की बढ़ती आर्थिक प्रमुखता को दर्शाता है।
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टैक्स घोटाला

₹250 करोड़ टैक्स घोटाला: WhatsApp- Google Maps से खुलासा, सीतारमण के बड़े खुलासे!

नई इनकम टैक्स बिल 2025: डिजिटल एविडेंस से नहीं बच पाएंगे टैक्स चोर देश में एक बड़ा टैक्स घोटाला सामने आया है, जिसमें ₹250 करोड़ की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है। इस घोटाले को पकड़ने में WhatsApp चैट, Google Maps और Instagram जैसी डिजिटल तकनीकों ने अहम भूमिका निभाई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में Income Tax Bill 2025 पर चर्चा करते हुए बताया कि अब डिजिटल रिकॉर्ड को भी टैक्स जांच के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इससे टैक्स चोरी करने वालों पर शिकंजा कसना और आसान होगा। WhatsApp और Google Maps से कैसे पकड़ा ₹250 करोड़ का काला धन? निर्मला सीतारमण ने बताया कि जांच एजेंसियों ने डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर टैक्स चोरों को बेनकाब किया। कुछ बड़े खुलासे: WhatsApp Chats – क्रिप्टो करेंसी से जुड़े लेन-देन की गुप्त चैट से ₹250 करोड़ की टैक्स चोरी का खुलासा हुआ।Google Maps Location – अधिकारियों ने लोकेशन हिस्ट्री से संदिग्ध जगहों की पहचान की और वहां छिपे कैश को जब्त किया।Instagram Activity – सोशल मीडिया पर लक्जरी लाइफस्टाइल दिखाने वाले कई लोगों की बेनामी संपत्तियां जांच में पकड़ी गईं। Income Tax Bill 2025: टैक्स चोरी रोकने के लिए नया कानून 13 फरवरी 2025 को लोकसभा में पेश किया गया Income Tax Bill 2025 पुराने 1961 के कानून को हटाकर नए डिजिटल युग के अनुसार बनाया गया है। डिजिटल डेटा की जांच संभव होगी – अब टैक्स अधिकारी WhatsApp, Telegram, Emails, और बिजनेस सॉफ्टवेयर का डेटा भी देख सकेंगे। क्रिप्टोकरेंसी होगी कड़ी निगरानी में – अब Bitcoin, डिजिटल टोकन और क्रिप्टो संपत्तियां अघोषित आय मानी जाएंगी। टैक्स कानून होगा सरल और छोटा – पुराने 5.12 लाख शब्दों वाले कानून की जगह, नया बिल 2.6 लाख शब्दों का होगा। नया ‘टैक्स ईयर’ सिस्टम क्या है? इस बिल में नया टैक्स ईयर सिस्टम लाया गया है, जो ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘पिछला वित्त वर्ष’ जैसी जटिलताओं को खत्म कर देगा। उदाहरण के लिए, अगर आपने अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच कमाई की है, तो इसे सीधे टैक्स ईयर 2024-25 कहा जाएगा। यह बिल मानसून सत्र में चर्चा के बाद पास हो सकता है। अगर यह लागू हुआ, तो टैक्स चोरी के खिलाफ डिजिटल एविडेंस का इस्तेमाल और आसान हो जाएगा। अब टैक्स चोरों के लिए काले धन को छिपाना मुश्किल होगा! Deshharpal पर पढ़ते रहें देश-विदेश की ताज़ा खबरें!
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Commonwealth Games 2026

Team India at Commonwealth Games 2026: तिरंगे के साथ Mirabai Chanu और Lovlina Borgohain की दमदार एंट्री

कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) 2026 का आगाज शानदार उद्घाटन समारोह के साथ हुआ। रोशनी, संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और हजारों दर्शकों की मौजूदगी में हुए इस आयोजन ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। भारत के लिए सबसे खास पल वह रहा, जब ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) ने हाथों में तिरंगा लेकर भारतीय दल की अगुआई की। दोनों खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और गर्व पूरे देश के लिए यादगार क्षण बन गया। Mirabai Chanu और Lovlina Borgohain बनीं भारत की Flag Bearer भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने इस बार महिला खिलाड़ियों पर भरोसा जताते हुए मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन को ध्वजवाहक चुना। जैसे ही भारतीय दल स्टेडियम में पहुंचा, वहां मौजूद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से खिलाड़ियों का स्वागत किया। तिरंगे के साथ दोनों खिलाड़ियों की तस्वीरें कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। यह सम्मान इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दोनों खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को कई बड़े मंचों पर गौरवान्वित कर चुकी हैं। King Charles ने किया Commonwealth Games 2026 का उद्घाटन उद्घाटन समारोह में King Charles ने आधिकारिक रूप से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत की घोषणा की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे विभिन्न देशों और संस्कृतियों को जोड़ने का सबसे मजबूत जरिया भी हैं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए खेल भावना को सर्वोपरि रखने की अपील की। Opening Ceremony में दिखी संस्कृति और तकनीक की शानदार झलक ओपनिंग सेरेमनी में मेजबान देश ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ पेश किया। पारंपरिक नृत्य, लाइव म्यूजिक, लेजर शो, ड्रोन डिस्प्ले और आतिशबाजी ने समारोह को यादगार बना दिया। दुनिया के अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों ने परेड ऑफ नेशंस में हिस्सा लिया और अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वज के साथ स्टेडियम में प्रवेश किया। भारत को इन खेलों में पदकों की बड़ी उम्मीद कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का दल कई खेलों में मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती, टेबल टेनिस और एथलेटिक्स जैसी स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभवी खिलाड़ियों के साथ-साथ युवा प्रतिभाएं भी इस बार भारत की पदक तालिका को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। देशवासियों की उम्मीदों के साथ शुरू हुआ सफर उद्घाटन समारोह के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की आधिकारिक शुरुआत हो चुकी है। भारतीय खिलाड़ियों के सामने अब देश की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती होगी। मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन द्वारा तिरंगा लेकर स्टेडियम में प्रवेश करना पूरे देश के लिए गर्व का क्षण रहा। अब खेल प्रेमियों की नजरें आने वाले मुकाबलों पर हैं, जहां भारत अधिक से अधिक पदक जीतकर अपना दम दिखाने की कोशिश करेगा. हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Tariff

US Trade Policy: भारत के Export पर असर? अमेरिका ने लगाया 10% Extra Tariff, 60 देश भी निशाने पर

अमेरिका ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने वाला बड़ा फैसला लेते हुए भारत समेत 60 देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। भारत पर 10% Extra Tariff लगाया गया है, जबकि कुछ अन्य देशों पर यह शुल्क 12.5% तक रखा गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन उत्पादों की सप्लाई चेन में Forced Labour (जबरन मजदूरी) से जुड़े जोखिमों को देखते हुए उठाया गया है। इस फैसले के बाद भारतीय निर्यातकों और कारोबारियों की नजर अब भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर टिक गई है। क्या है अमेरिका का नया टैरिफ फैसला? अमेरिका ने ट्रेड एक्ट की Section 301 के तहत यह कार्रवाई की है। व्हाइट हाउस का कहना है कि कई देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। ऐसे में इन देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत भारत, ब्रिटेन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय संघ समेत कुल 60 देशों को इस दायरे में रखा गया है। भारत पर सिर्फ 10% Extra Tariff क्यों? अमेरिकी प्रशासन के अनुसार जिन देशों ने Forced Labour को रोकने के लिए कुछ ठोस नीतियां लागू की हैं, उन्हें अपेक्षाकृत कम टैरिफ श्रेणी में रखा गया है। भारत पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जबकि जिन देशों के प्रयास कमजोर माने गए हैं, उनके लिए यह दर 12.5% तक तय की गई है। हालांकि अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि यदि संबंधित देश अपनी नीतियों में सुधार करते हैं तो भविष्य में इन टैरिफ की समीक्षा की जा सकती है। किन उत्पादों पर नहीं लगेगा असर? नई टैरिफ नीति में कुछ आवश्यक वस्तुओं को राहत दी गई है। इनमें कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक, कुछ खाद्य उत्पाद और अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा (USMCA) समझौते के तहत आने वाले सामान शामिल हैं। इसके अलावा अधिकांश आयातित वस्तुओं पर नया शुल्क लागू होगा। भारतीय कारोबार पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है। टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, मैन्युफैक्चरिंग और कुछ अन्य निर्यात आधारित उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। यदि अतिरिक्त शुल्क लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। हालांकि कई जानकारों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के दौरान इस मुद्दे पर समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है। कई देशों ने जताई नाराजगी अमेरिका के इस फैसले पर कई देशों ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि एकतरफा टैरिफ वैश्विक व्यापार व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। दूसरी ओर अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह कदम केवल मानवाधिकारों की रक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। भारत के लिए आगे की राह भारत के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती अपने निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना और अमेरिका के साथ व्यापारिक संवाद को मजबूत करना होगी। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती है, तो भविष्य में इस अतिरिक्त टैरिफ पर राहत मिलने की संभावना भी बन सकती है। फिलहाल इतना तय है कि अमेरिका का यह फैसला सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार जगत के लिए भी एक बड़ा संकेत है। आने वाले दिनों में इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार, निर्यात और व्यापारिक संबंधों पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Layoffs

Tech Layoffs 2026: Amazon और Meta ने 40 हजार कर्मचारियों को निकाला, AI बना सबसे बड़ी वजह?

Amazon Layoffs और Meta Layoffs ने एक बार फिर दुनिया भर के टेक कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब 10 महीनों में दोनों कंपनियां मिलकर लगभग 40 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं। इन फैसलों के पीछे सबसे बड़ा कारण Artificial Intelligence (AI) पर बढ़ता निवेश, लागत में कटौती और कंपनियों का तेजी से बदलता बिजनेस मॉडल माना जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ शुरुआत है या आने वाले समय में टेक सेक्टर में नौकरी जाने का सिलसिला और तेज हो सकता है? Amazon ने क्यों घटाई अपनी Workforce? ई-कॉमर्स और क्लाउड सर्विस की दिग्गज कंपनी Amazon ने इस साल कई विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम की है। जनवरी 2026 में कंपनी ने करीब 16 हजार कॉर्पोरेट कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया। इसके बाद हाल ही में Artificial General Intelligence (AGI) से जुड़े कुछ प्रोजेक्ट्स में भी टीमों का पुनर्गठन किया गया। कंपनी का कहना है कि वह AI तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में ऑटोमेशन संभव है, वहां संसाधनों का नए तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। Amazon का फोकस अब भविष्य की टेक्नोलॉजी तैयार करने पर है। Meta भी AI Strategy पर कर रही बड़ा दांव Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta ने भी अपने वैश्विक कर्मचारियों का लगभग 10 प्रतिशत, यानी करीब 8 हजार लोगों की छंटनी की है। इसके साथ ही कई नई भर्तियों को भी फिलहाल रोक दिया गया है। Meta का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI ही कंपनी की सबसे बड़ी ताकत बनने वाला है। इसी वजह से कंपनी अपने खर्चों को कम कर AI इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट टूल्स और नई तकनीकों पर ज्यादा निवेश कर रही है। आखिर क्यों बढ़ रही हैं Tech Layoffs? पिछले कुछ वर्षों में टेक कंपनियों ने बड़े पैमाने पर भर्ती की थी। अब बाजार की बदलती परिस्थितियों और AI के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कंपनियां अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव कर रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं— क्या आगे भी बढ़ सकता है Layoffs का आंकड़ा? टेक इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि फिलहाल छंटनी पूरी तरह रुकने वाली नहीं है। आने वाले महीनों में भी कुछ कंपनियां अपने बिजनेस और AI रणनीति के अनुसार कर्मचारियों की संख्या में बदलाव कर सकती हैं। हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है। AI के कारण कुछ पारंपरिक नौकरियां जरूर प्रभावित हो रही हैं, लेकिन दूसरी ओर AI Engineer, Machine Learning Specialist, Data Scientist, Cloud Engineer, Cyber Security Expert और Prompt Engineer जैसी नई भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। यानी नौकरी के अवसर खत्म नहीं हो रहे, बल्कि उनका स्वरूप बदल रहा है। कर्मचारियों के लिए क्या है सबसे बड़ी सीख? विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में केवल अनुभव ही नहीं, बल्कि नई तकनीकों की समझ भी उतनी ही जरूरी हो गई है। जो प्रोफेशनल समय के साथ खुद को अपडेट करेंगे और AI से जुड़ी नई स्किल्स सीखेंगे, उनके लिए भविष्य में बेहतर अवसर बने रहेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Lok Sabha

Lok Sabha Rajya Sabha Kharge बोले- PM सदन में आकर दें जवाब, हंगामे के बीच कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित

संसद के मानसून सत्र में शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म रहा। लोकसभा (Lok Sabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha) की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने कई अहम मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में आकर बयान देने की मांग की। उनका कहना था कि देश से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर प्रधानमंत्री को संसद के भीतर जवाब देना चाहिए। लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। आखिरकार पीठासीन अधिकारियों ने लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। Kharge ने PM Modi से क्या कहा? मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां उठाए गए सवालों का जवाब भी यहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री स्वयं सदन में आकर बयान देंगे, तभी उनकी बातों को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जा सकेगा। खड़गे ने सरकार से विपक्ष के सवालों का सीधे जवाब देने की अपील भी की। विपक्ष ने सरकार को किन मुद्दों पर घेरा? सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने कई राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप था कि सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बच रही है और संसद में स्पष्ट जवाब नहीं दे रही। विपक्ष ने मांग की कि सभी अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए और प्रधानमंत्री स्वयं सदन में अपना पक्ष रखें। हंगामे के कारण नहीं चल सकी कार्यवाही विपक्ष के लगातार विरोध और शोर-शराबे के चलते लोकसभा और राज्यसभा में सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ। कई बार सदन को व्यवस्थित करने की कोशिश की गई, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्ष जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह संसद में चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, लगातार हो रहे हंगामे के कारण कई महत्वपूर्ण विधायी और संसदीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अब आगे क्या होगा? अब सभी की नजर दोपहर 12 बजे के बाद शुरू होने वाली संसद की कार्यवाही पर रहेगी। यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है तो सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकती है। वहीं, यदि गतिरोध जारी रहा तो संसद में एक बार फिर हंगामा देखने को मिल सकता है।
Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk सरकार से समझौते के बाद खत्म हुई भूख हड़ताल, Written Assurance मिलने का दावा

पिछले 27 दिनों से जारी सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की भूख हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई। केंद्र सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बाद बनी सहमति के चलते केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। अनशन खत्म होने के बाद वांगचुक ने कहा कि सरकार ने उनकी तीन प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधान के इस्तीफे की मांग इस समझौते का हिस्सा नहीं बनी है। यह घटनाक्रम पिछले कई दिनों से चल रहे आंदोलन का अहम पड़ाव माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि सरकार अपने वादों को तय समय में किस तरह लागू करती है। 27 दिनों तक चला आंदोलन, बातचीत से निकला समाधान सोनम वांगचुक अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार 27 दिनों से भूख हड़ताल पर थे। इस दौरान आंदोलन को देश के कई हिस्सों से समर्थन मिला। छात्रों, सामाजिक संगठनों और कई जनप्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई चरणों में बातचीत हुई। शुरुआती दौर में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका, लेकिन लगातार संवाद के बाद दोनों पक्ष एक साझा सहमति तक पहुंचे। इसके बाद सरकार की ओर से लिखित आश्वासन दिए जाने पर वांगचुक ने अनशन समाप्त करने का फैसला लिया। किन मांगों पर बनी सहमति? अनशन खत्म करने के बाद मीडिया से बातचीत में सोनम वांगचुक ने बताया कि सरकार ने उनकी तीन अहम मांगों को स्वीकार करते हुए लिखित आश्वासन दिया है। हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि आंदोलन के दौरान उठाई गई प्रधान के इस्तीफे की मांग को सरकार ने स्वीकार नहीं किया और यह समझौते का हिस्सा नहीं है। वांगचुक ने कहा कि आंदोलन का मकसद किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि लोगों से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान निकालना था। नड्डा ने पिलाया जूस, खत्म हुआ 27 दिनों का अनशन समझौते के बाद केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा स्वयं पहुंचे और उन्होंने सोनम वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। इस दौरान सरकार के प्रतिनिधियों के साथ आंदोलन से जुड़े कई लोग भी मौजूद रहे। अनशन खत्म होने के साथ ही लंबे समय से जारी गतिरोध भी समाप्त हो गया। अब वादों को पूरा करने की चुनौती सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्होंने सरकार के लिखित आश्वासन पर भरोसा करते हुए अपना अनशन समाप्त किया है। अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकार की है कि जिन बिंदुओं पर सहमति बनी है, उन पर समयबद्ध तरीके से अमल किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि यदि तय वादों को लागू नहीं किया गया, तो आगे की रणनीति पर आंदोलन से जुड़े लोगों के साथ मिलकर फैसला लिया जाएगा। आंदोलन का संदेश करीब चार सप्ताह तक चला यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति की भूख हड़ताल नहीं, बल्कि कई सामाजिक और जनहित के मुद्दों को लेकर चल रही आवाज का प्रतीक बन गया। सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सहमति बनने से फिलहाल विवाद का समाधान निकलता दिखाई दे रहा है, लेकिन असली परीक्षा अब उन आश्वासनों को जमीन पर उतारने की होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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