छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी पति दीपनारायण रजक को उम्रकैद की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए कहा कि मामले में हत्या के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
यह मामला बिलासपुर जिले के महमंद निवासी मनहरणलाल निर्मलकर की बेटी ममता की मौत से जुड़ा है। ममता की शादी चकरभाठा थाना क्षेत्र के ग्राम परसदा निवासी दीपनारायण रजक से हुई थी। शादी के दो साल के भीतर ही उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी।
पहले आत्महत्या माना गया मामला
घटना के समय पुलिस और तहसीलदार मौके पर पहुंचे तो कमरा अंदर से बंद मिला। ममता का शव साड़ी के सहारे पंखे से लटका हुआ था। शुरुआत में मामला आत्महत्या का माना गया, लेकिन घर में उस समय केवल पति-पत्नी ही मौजूद थे, इसलिए शक पति पर गया।
जांच में खुली साजिश
तत्कालीन तहसीलदार एमआर गायकवाड़ ने मौके की जांच के दौरान पाया कि कमरे का दरवाजा बाहर से भी आसानी से बंद किया जा सकता था। इससे साफ हुआ कि घटना को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि ममता की मौत फांसी से नहीं, बल्कि गला घोंटने और दम घुटने से हुई थी। शरीर पर कई चोटों के निशान भी मिले, जो संघर्ष और मारपीट की ओर इशारा कर रहे थे।
पति की चुप्पी बनी सबसे बड़ा सबूत
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि घटना के समय घर में केवल पति और पत्नी मौजूद थे। ऐसे में पत्नी की मौत कैसे हुई, इसका संतोषजनक जवाब आरोपी पति नहीं दे सका।
दहेज प्रताड़ना के भी आरोप
ममता के पिता ने कोर्ट को बताया कि शादी के कुछ समय बाद से ही आरोपी पति उनकी बेटी को प्रताड़ित करने लगा था। वह वॉशिंग मशीन, हर महीने नकद पैसे और पढ़ाई के खर्च के नाम पर लगातार मांग करता था।
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