उत्तराखंड में पंजाबी सिंगर दलेर मेहंदी (Daler Mehndi) और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच शुरू हुआ विवाद अभी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कुंजापुरी मेले में हुए घटनाक्रम के बाद यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब मंत्री सुबोध उनियाल ने एक बार फिर अपने बयान से साफ कर दिया है कि वह इस मामले में माफी मांगने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर माफी मांगने की नौबत आई तो वह मंत्री पद छोड़ देंगे, लेकिन अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करेंगे।
मंत्री के इस बयान के बाद उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। वहीं, दलेर मेहंदी के समर्थन में मनोरंजन जगत की कई हस्तियां भी अपनी बात रख चुकी हैं।
सुबोध उनियाल बोले- माफी से बेहतर इस्तीफा देना
मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने ताजा बयान में कहा कि वह किसी भी दबाव में आकर माफी नहीं मांगेंगे। उन्होंने साफ कहा कि जरूरत पड़ी तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे, लेकिन अपनी बात से पीछे नहीं हटेंगे।
उनके इस रुख से साफ है कि फिलहाल विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती नजर नहीं आ रही है। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है।
कुंजापुरी मेले में शुरू हुआ था Daler Mehndi Controversy
इस पूरे विवाद की शुरुआत 18 अक्टूबर 2026 को टिहरी गढ़वाल के नरेंद्रनगर में आयोजित कुंजापुरी मेले के दौरान हुई थी। मेले की सांस्कृतिक संध्या में पंजाबी गायक दलेर मेहंदी को परफॉर्मेंस के लिए बुलाया गया था।
कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे। इसी दौरान उन्होंने दलेर मेहंदी की प्रस्तुति को लेकर सवाल उठाए। मंत्री ने पूछा कि गायक लाइव गा रहे हैं या रिकॉर्डेड ट्रैक पर प्रस्तुति दे रहे हैं।
मंच पर हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद लोगों ने मंत्री के व्यवहार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए और देखते ही देखते मामला बड़ा विवाद बन गया।
35 लाख रुपये की फीस को लेकर भी मंत्री ने उठाए सवाल
विवाद बढ़ने के बाद सुबोध उनियाल ने अपनी सफाई में कार्यक्रम के आयोजन और खर्च का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दलेर मेहंदी को बुलाने के लिए करीब 35 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। इसके अलावा होटल और दूसरी व्यवस्थाओं पर भी खर्च हुआ था।
मंत्री का कहना था कि जब किसी कलाकार को बड़े कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए बुलाया जाता है, तो दर्शकों की भी कुछ उम्मीदें होती हैं। उन्होंने अपनी टिप्पणी को इसी संदर्भ में सही ठहराने की कोशिश की।
हालांकि, उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
Mika Singh ने किया दलेर मेहंदी का समर्थन
इस विवाद में मशहूर सिंगर मीका सिंह भी खुलकर सामने आए। उन्होंने अपने बड़े भाई दलेर मेहंदी का समर्थन करते हुए मंत्री के व्यवहार पर नाराजगी जताई और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
मीका सिंह ने दलेर मेहंदी की तबीयत का हवाला देते हुए कहा कि उनकी सेहत ठीक नहीं थी और हाल ही में उनकी सर्जरी भी हुई थी। ऐसे में उनके साथ मंच पर इस तरह का व्यवहार उचित नहीं था।
इसके बाद मनोरंजन जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कपिल शर्मा, अनुपम खेर, राजपाल यादव और बादशाह समेत कई कलाकारों के नाम इस विवाद से जुड़ी चर्चाओं में सामने आए।
CM पुष्कर सिंह धामी ने संभालने की कोशिश की थी स्थिति
मामले को बढ़ता देख उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी हस्तक्षेप किया था। उन्होंने मीका सिंह से फोन पर बातचीत कर विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने की अपील की थी।
मुख्यमंत्री ने कलाकारों के सम्मान और उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं का जिक्र करते हुए सौहार्द बनाए रखने की बात कही थी। दलेर मेहंदी से भी बातचीत की गई थी।
इस बीच मीका सिंह की टीम की ओर से मंत्री द्वारा फोन पर माफी मांगने की बात सामने आई थी। हालांकि, सुबोध उनियाल ने बाद में ऐसी खबरों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने माफी नहीं मांगी है।
विपक्ष ने भी उठाए सवाल, इस्तीफे की मांग तेज
दलेर मेहंदी (Daler Mehndi) विवाद अब सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। इसने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। विपक्षी नेताओं ने मंत्री के बयान और व्यवहार पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है।
दूसरी ओर, सुबोध उनियाल अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि वह अपनी बात को लेकर स्पष्ट हैं और माफी मांगने के बजाय पद छोड़ना पसंद करेंगे।
Daler Mehndi Controversy: अब आगे क्या होगा?
कुंजापुरी मेले से शुरू हुआ यह विवाद अब कलाकारों के सम्मान और राजनीतिक जिम्मेदारी से जुड़े सवालों तक पहुंच गया है। एक तरफ सुबोध उनियाल अपनी टिप्पणी को सही ठहरा रहे हैं, तो दूसरी तरफ दलेर मेहंदी के समर्थक इसे एक वरिष्ठ कलाकार के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं।
फिलहाल मंत्री ने माफी मांगने से इनकार कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं और क्या दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति बन पाती है।
उत्तराखंड का यह विवाद आने वाले दिनों में भी राजनीतिक और मनोरंजन जगत की चर्चाओं में बना रह सकता है।
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