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US-Iran Conflict: केश्म द्वीप पर गूंजे धमाके, अमेरिका के हमले के बाद ईरान का बड़ा दावा

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अमेरिका और ईरान (US-Iran) के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान शुरू होने से कुछ घंटे पहले ईरान के केश्म (Qeshm) द्वीप पर पांच धमाकों की खबर सामने आई। अमेरिकी अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सीमित सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है। वहीं, ईरान ने दावा किया है कि उसकी सेना ने तीन अमेरिकी जासूसी ड्रोन को निशाना बनाया है।

इस घटनाक्रम ने पूरी दुनिया का ध्यान एक बार फिर पश्चिम एशिया की ओर खींच लिया है। खास बात यह है कि एक तरफ अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर रहा है, तो दूसरी ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ बातचीत के जरिए तनाव खत्म करने की उम्मीद भी जता रहे हैं।

केश्म द्वीप पर 5 धमाकों से बढ़ी चिंता

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, देश के दक्षिणी हिस्से में स्थित केश्म द्वीप पर पांच धमाकों की आवाज सुनी गई। इसके अलावा बंदर लेंगेह इलाके में भी धमाकों की खबर सामने आई।

केश्म द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई होती है। ऐसे में इस इलाके में किसी भी सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है।

अमेरिका ने हमले की पुष्टि की, बताई कार्रवाई की वजह

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों पर सीमित हमले किए। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई उसकी सैन्य संपत्तियों को संभावित खतरों से बचाने के लिए की गई थी।

अमेरिकी पक्ष ने इसे रक्षात्मक ऑपरेशन बताया है। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य बड़े पैमाने पर युद्ध शुरू करना नहीं था। हालांकि, हमले के बाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ गया है।

ईरान का दावा- तीन अमेरिकी Drone मार गिराए

अमेरिकी कार्रवाई के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने तीन अमेरिकी ड्रोन को निशाना बनाया।

ईरानी मीडिया के मुताबिक, इनमें दो MQM-170 टोही ड्रोन और एक MQ-9 ड्रोन शामिल हैं। ईरान का दावा है कि इन ड्रोन को होर्मुज जलडमरूमध्य और केश्म द्वीप के आसपास निशाना बनाया गया।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी पक्ष ने भी ईरान के सभी दावों को स्वीकार नहीं किया है। इसलिए ड्रोन गिराए जाने की खबर को फिलहाल ईरान के दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।

Trump ने समझौते की जताई उम्मीद

सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की संभावना को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकल सकता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि तेल की कीमतों में गिरावट इस बात का संकेत है कि बाजार को संघर्ष खत्म होने की उम्मीद है।

ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अमेरिकी प्रशासन एक तरफ अपनी सैन्य स्थिति बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक बातचीत के रास्ते भी खुले रखना चाहता है।

JD Vance ने भी बातचीत को लेकर दी जानकारी

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान के साथ बातचीत में प्रगति होने की बात कही है। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच समझौते की संभावनाएं अभी बनी हुई हैं।

वेंस ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप इस मुद्दे पर लगातार जानकारी ले रहे हैं। हालांकि, बातचीत के दौरान किन शर्तों पर चर्चा हो रही है, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

Qatar की मध्यस्थता से निकल सकता है रास्ता

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कतर भी मध्यस्थता कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर के जरिए दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते पर बातचीत हुई है।

इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को लेकर चर्चा शामिल है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी कहा है कि तेहरान की शर्तें अमेरिका तक पहुंचा दी गई हैं। अब अमेरिका को इस पर अपना रुख स्पष्ट करना है।

Netanyahu ने ट्रंप प्रशासन पर बनाया दबाव

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी ईरान के मुद्दे पर लगातार सक्रिय हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू ने अमेरिकी प्रशासन से ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई को लेकर चर्चा की है।

हालांकि, अमेरिका की ओर से किसी नए बड़े सैन्य अभियान को लेकर अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस बीच क्षेत्र के कई देशों को आशंका है कि अगर संघर्ष दोबारा बढ़ा तो पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता पैदा हो सकती है।

US Midterm Election से पहले क्यों अहम है हमला?

अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। ऐसे समय में ईरान पर सैन्य कार्रवाई की खबर सामने आना अमेरिकी राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

ईरान के साथ संघर्ष, तेल की कीमतें और विदेश नीति अमेरिकी चुनाव में चर्चा के बड़े मुद्दे बने हुए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के सामने एक तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है, तो दूसरी तरफ आम लोगों पर बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों का असर भी चुनौती बना हुआ है।

हालांकि, हमले के चुनावी असर को लेकर अभी कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

भारत पर भी पड़ सकता है असर

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदता है।

अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो तेल की सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन खर्च और महंगाई पर देखने को मिल सकता है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों के साथ बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। केश्म द्वीप पर धमाकों और ड्रोन गिराने के दावों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या ट्रंप प्रशासन और ईरान किसी समझौते तक पहुंच पाएंगे या दोनों देशों के बीच टकराव का नया दौर शुरू होगा। आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

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Daler Mehndi

Daler Mehndi विवाद: मंत्री सुबोध उनियाल ने फिर ठुकराई माफी की मांग, दिया बड़ा बयान

उत्तराखंड में पंजाबी सिंगर दलेर मेहंदी (Daler Mehndi) और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच शुरू हुआ विवाद अभी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कुंजापुरी मेले में हुए घटनाक्रम के बाद यह मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब मंत्री सुबोध उनियाल ने एक बार फिर अपने बयान से साफ कर दिया है कि वह इस मामले में माफी मांगने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर माफी मांगने की नौबत आई तो वह मंत्री पद छोड़ देंगे, लेकिन अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करेंगे। मंत्री के इस बयान के बाद उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। वहीं, दलेर मेहंदी के समर्थन में मनोरंजन जगत की कई हस्तियां भी अपनी बात रख चुकी हैं। सुबोध उनियाल बोले- माफी से बेहतर इस्तीफा देना मंत्री सुबोध उनियाल ने अपने ताजा बयान में कहा कि वह किसी भी दबाव में आकर माफी नहीं मांगेंगे। उन्होंने साफ कहा कि जरूरत पड़ी तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे, लेकिन अपनी बात से पीछे नहीं हटेंगे। उनके इस रुख से साफ है कि फिलहाल विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती नजर नहीं आ रही है। विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। कुंजापुरी मेले में शुरू हुआ था Daler Mehndi Controversy इस पूरे विवाद की शुरुआत 18 अक्टूबर 2026 को टिहरी गढ़वाल के नरेंद्रनगर में आयोजित कुंजापुरी मेले के दौरान हुई थी। मेले की सांस्कृतिक संध्या में पंजाबी गायक दलेर मेहंदी को परफॉर्मेंस के लिए बुलाया गया था। कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे। इसी दौरान उन्होंने दलेर मेहंदी की प्रस्तुति को लेकर सवाल उठाए। मंत्री ने पूछा कि गायक लाइव गा रहे हैं या रिकॉर्डेड ट्रैक पर प्रस्तुति दे रहे हैं। मंच पर हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इसके बाद लोगों ने मंत्री के व्यवहार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए और देखते ही देखते मामला बड़ा विवाद बन गया। 35 लाख रुपये की फीस को लेकर भी मंत्री ने उठाए सवाल विवाद बढ़ने के बाद सुबोध उनियाल ने अपनी सफाई में कार्यक्रम के आयोजन और खर्च का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि दलेर मेहंदी को बुलाने के लिए करीब 35 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। इसके अलावा होटल और दूसरी व्यवस्थाओं पर भी खर्च हुआ था। मंत्री का कहना था कि जब किसी कलाकार को बड़े कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए बुलाया जाता है, तो दर्शकों की भी कुछ उम्मीदें होती हैं। उन्होंने अपनी टिप्पणी को इसी संदर्भ में सही ठहराने की कोशिश की। हालांकि, उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। Mika Singh ने किया दलेर मेहंदी का समर्थन इस विवाद में मशहूर सिंगर मीका सिंह भी खुलकर सामने आए। उन्होंने अपने बड़े भाई दलेर मेहंदी का समर्थन करते हुए मंत्री के व्यवहार पर नाराजगी जताई और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की। मीका सिंह ने दलेर मेहंदी की तबीयत का हवाला देते हुए कहा कि उनकी सेहत ठीक नहीं थी और हाल ही में उनकी सर्जरी भी हुई थी। ऐसे में उनके साथ मंच पर इस तरह का व्यवहार उचित नहीं था। इसके बाद मनोरंजन जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कपिल शर्मा, अनुपम खेर, राजपाल यादव और बादशाह समेत कई कलाकारों के नाम इस विवाद से जुड़ी चर्चाओं में सामने आए। CM पुष्कर सिंह धामी ने संभालने की कोशिश की थी स्थिति मामले को बढ़ता देख उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी हस्तक्षेप किया था। उन्होंने मीका सिंह से फोन पर बातचीत कर विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने की अपील की थी। मुख्यमंत्री ने कलाकारों के सम्मान और उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपराओं का जिक्र करते हुए सौहार्द बनाए रखने की बात कही थी। दलेर मेहंदी से भी बातचीत की गई थी। इस बीच मीका सिंह की टीम की ओर से मंत्री द्वारा फोन पर माफी मांगने की बात सामने आई थी। हालांकि, सुबोध उनियाल ने बाद में ऐसी खबरों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने माफी नहीं मांगी है। विपक्ष ने भी उठाए सवाल, इस्तीफे की मांग तेज दलेर मेहंदी (Daler Mehndi) विवाद अब सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। इसने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। विपक्षी नेताओं ने मंत्री के बयान और व्यवहार पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है। दूसरी ओर, सुबोध उनियाल अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि वह अपनी बात को लेकर स्पष्ट हैं और माफी मांगने के बजाय पद छोड़ना पसंद करेंगे। Daler Mehndi Controversy: अब आगे क्या होगा? कुंजापुरी मेले से शुरू हुआ यह विवाद अब कलाकारों के सम्मान और राजनीतिक जिम्मेदारी से जुड़े सवालों तक पहुंच गया है। एक तरफ सुबोध उनियाल अपनी टिप्पणी को सही ठहरा रहे हैं, तो दूसरी तरफ दलेर मेहंदी के समर्थक इसे एक वरिष्ठ कलाकार के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल मंत्री ने माफी मांगने से इनकार कर दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री इस मामले में आगे क्या कदम उठाते हैं और क्या दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति बन पाती है। उत्तराखंड का यह विवाद आने वाले दिनों में भी राजनीतिक और मनोरंजन जगत की चर्चाओं में बना रह सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
US-Iran

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Nepal

Nepal Helicopter Crash: एवरेस्ट के पास टकराए 2 हेलिकॉप्टर, भारतीय पर्यटक की मौत; 3 घायल

Nepal के माउंट एवरेस्ट क्षेत्र से मंगलवार सुबह एक बेहद दुखद खबर सामने आई। यहां लैंडिंग के दौरान दो हेलिकॉप्टर आपस में टकरा गए। इस हादसे में चेन्नई के रहने वाले 47 वर्षीय भारतीय पर्यटक वसंत कुमार बालारामारामाडु की जान चली गई। वहीं, न्यूजीलैंड में रहने वाले भारतीय मूल के एक पर्यटक और दोनों हेलिकॉप्टर के पायलट घायल हो गए। यह हादसा नेपाल के सोलुखुम्बु जिले के फेरेचे (Pheriche) हेलिपैड पर सुबह करीब 8:11 बजे हुआ। दुर्घटना में Fishtail Air और Air Dynasty की हेलिकॉप्टर शामिल थे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, लैंडिंग के दौरान दोनों हेलिकॉप्टरों के रोटर ब्लेड आपस में टकरा गए, जिससे दोनों विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गए। इस घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। सोशल मीडिया पर हादसे का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें टक्कर के बाद हेलिपैड पर मौजूद लोग सुरक्षित जगह की ओर भागते दिखाई दे रहे हैं। Nepal Helicopter Crash: हादसे में किसकी मौत और कौन घायल? नेपाल पुलिस की जानकारी के मुताबिक, हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय नागरिक की पहचान 47 वर्षीय वसंत कुमार बालारामारामाडु के रूप में हुई है। वह तमिलनाडु के चेन्नई के रहने वाले थे। हादसे में घायल यात्री की पहचान 49 वर्षीय शैलेश कृष्णा पटेल के रूप में हुई है। वह न्यूजीलैंड के निवासी और भारतीय मूल के नागरिक बताए गए हैं। इसके अलावा दोनों हेलिकॉप्टर के पायलट रवींद्र प्रजापति और प्रज्वल केसी भी घायल हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए काठमांडू के नेपाल मेडिसिटी अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं, मृतक का शव लुकला अस्पताल ले जाया गया। कैसे टकराए Fishtail Air और Air Dynasty के हेलिकॉप्टर? नेपाल के सोलुखुम्बु जिले में स्थित फेरेचे हेलिपैड समुद्र तल से करीब 4,200 मीटर की ऊंचाई पर है। यह माउंट एवरेस्ट बेस कैंप जाने वाले रास्ते का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Fishtail Air का हेलिकॉप्टर एवरेस्ट क्षेत्र से यात्रियों को लेकर लौट रहा था। वहीं, Air Dynasty का हेलिकॉप्टर सामान लेकर इस क्षेत्र में पहुंचा था। दोनों हेलिकॉप्टर जब लैंडिंग की प्रक्रिया में थे, तभी उनके रोटर ब्लेड आपस में टकरा गए। इसके बाद दोनों हेलिकॉप्टर जमीन पर दुर्घटनाग्रस्त हो गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Air Dynasty का हेलिकॉप्टर सामान लेकर आया था, जबकि Fishtail Air के हेलिकॉप्टर में पर्यटक सवार थे। हादसे के बाद बचाव अभियान चलाया गया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। हादसे का Video सोशल मीडिया पर वायरल हेलिकॉप्टर दुर्घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। इसमें दोनों हेलिकॉप्टर लैंडिंग के दौरान एक-दूसरे के बेहद करीब आते दिखाई देते हैं। कुछ ही पलों में उनके रोटर आपस में टकराते हैं और दोनों हेलिकॉप्टर नीचे गिर जाते हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की प्रामाणिकता को लेकर सावधानी जरूरी है। हर वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। क्या बर्फबारी बनी हादसे की वजह? फेरेचे और आसपास के हिमालयी क्षेत्र में हाल के दिनों में भारी बर्फबारी हुई थी। इससे पहाड़ी रास्तों और हेलिकॉप्टर संचालन पर असर पड़ा था। हालांकि, केवल बर्फबारी को इस दुर्घटना की वजह मानना अभी सही नहीं होगा। शुरुआती जानकारी में दोनों हेलिकॉप्टरों के रोटर ब्लेड टकराने की बात सामने आई है, लेकिन वे एक ही समय पर लैंडिंग की स्थिति में कैसे पहुंचे और उनके बीच पर्याप्त दूरी क्यों नहीं रही, इसकी जांच की जानी बाकी है। नेपाल के नागरिक उड्डयन अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही दुर्घटना की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। नेपाल में Helicopter Accident का खतरा क्यों रहता है? हिमालयी क्षेत्र अपनी खूबसूरती के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है, लेकिन यहां हेलिकॉप्टर उड़ाना आसान नहीं होता। ऊंचे पहाड़, बदलता मौसम और कम घनत्व वाली हवा पायलटों के सामने कई चुनौतियां खड़ी करती हैं। विमान और हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं के पीछे आमतौर पर ये 6 प्रमुख कारण हो सकते हैं: 1. खराब मौसम (Bad Weather) तेज हवाएं, बर्फबारी, बारिश और कोहरा उड़ान को प्रभावित कर सकते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम अचानक बदलने से लैंडिंग और उड़ान दोनों मुश्किल हो सकती हैं। 2. तकनीकी खराबी (Technical Failure) इंजन, रोटर या कंट्रोल सिस्टम में खराबी आने से हेलिकॉप्टर का संचालन प्रभावित हो सकता है। नियमित तकनीकी जांच इसलिए बेहद जरूरी है। 3. मानवीय चूक (Human Error) गलत आकलन, संचार में कमी या उड़ान के दौरान गलत निर्णय भी दुर्घटनाओं की वजह बन सकते हैं। 4. एयर ट्रैफिक कंट्रोल में तालमेल की कमी एक ही क्षेत्र में कई हेलिकॉप्टरों की आवाजाही के दौरान सही समन्वय जरूरी होता है। संचार या तालमेल में कमी से टक्कर का खतरा बढ़ सकता है। 5. रखरखाव में लापरवाही (Poor Maintenance) हेलिकॉप्टर के जरूरी उपकरणों की समय पर जांच और मरम्मत नहीं होने पर तकनीकी जोखिम बढ़ सकता है। 6. पहाड़ी इलाकों की भौगोलिक स्थिति ऊंचे पहाड़, संकरी घाटियां, सीमित हेलिपैड और कम वायुदाब उड़ान को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। अधिक ऊंचाई पर हवा का घनत्व कम होने से हेलिकॉप्टर की लिफ्ट क्षमता भी प्रभावित होती है। एवरेस्ट क्षेत्र में हेलिकॉप्टर क्यों हैं जरूरी? नेपाल में माउंट एवरेस्ट और आसपास के पहाड़ी इलाकों में हर साल हजारों पर्यटक और पर्वतारोही पहुंचते हैं। यहां कई ऐसे स्थान हैं जहां सड़क से पहुंचना संभव नहीं है। ऐसे में हेलिकॉप्टर पर्यटकों को लाने-ले जाने, जरूरी सामान पहुंचाने और आपातकालीन रेस्क्यू में अहम भूमिका निभाते हैं। खासकर ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, थकान या अचानक तबीयत बिगड़ने की स्थिति में हेलिकॉप्टर के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जाता है। नेपाल में इस समय ट्रेकिंग का व्यस्त सीजन चल रहा है। ऐसे में फेरेचे का यह हादसा पहाड़ी क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर संचालन की सुरक्षा और बेहतर समन्वय की जरूरत को फिर सामने लाता है। फिलहाल एक भारतीय पर्यटक की मौत से इस हादसे ने कई परिवारों को दुख में डाल दिया है। दुर्घटना की असली वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
मुरासु

Cyclone Alert: मुरासु तूफान से आंध्र प्रदेश में बिगड़े हालात, तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का अलर्ट

आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में मंगलवार, 3 नवंबर को चक्रवाती तूफान मुरासु (Cyclone Murasu) ने दस्तक दी। तूफान के साथ आई तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश ने कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। कहीं पेड़ उखड़ गए तो कहीं बिजली के पोल गिरने से सप्लाई प्रभावित हुई। निचले इलाकों में पानी भरने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। तूफान के लैंडफॉल के दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक रही, जबकि तेज झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच गई। खराब मौसम का असर हवाई सेवाओं पर भी पड़ा। आंध्र प्रदेश के अलग-अलग एयरपोर्ट से कई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। प्रशासन ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ओंगोल के पास तट से टकराया Cyclone Murasu मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवाती तूफान मुरासु ने 3 नवंबर की सुबह दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट को पार किया। इसका असर ओंगोल और आसपास के तटीय इलाकों में ज्यादा देखने को मिला। इस दौरान तेज हवाओं के साथ लगातार बारिश हुई। प्रकाशम जिले के कोठापटनम में सुबह तक 164.3 मिमी बारिश दर्ज की गई। भारी बारिश के कारण कई निचले इलाकों में पानी भर गया। मौसम विभाग ने पहले ही तटीय जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी। तेज हवाओं ने बढ़ाई परेशानी, कई जगह पेड़ और बिजली के पोल गिरे तूफान का सबसे ज्यादा असर दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में देखने को मिला। तेज हवाओं के कारण कई जगह पेड़ गिर गए और बिजली के पोल क्षतिग्रस्त हो गए। इससे कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। प्रकाशम, नेल्लोर, बापटला, गुंटूर और कृष्णा जिले में प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया। सड़कों पर पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। बिजली विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें व्यवस्था को सामान्य करने में जुटी हैं। Cyclone Murasu के कारण Flights रद्द, यात्रियों को परेशानी खराब मौसम का असर हवाई यात्रियों पर भी पड़ा। तेज हवाओं और बारिश के कारण विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम और तिरुपति एयरपोर्ट से संचालित होने वाली उड़ानें प्रभावित हुईं। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इन तीन एयरपोर्ट पर कम से कम 19 उड़ानें रद्द की गईं। चेन्नई एयरपोर्ट से आने-जाने वाली कुछ उड़ानों पर भी मौसम का असर पड़ा। ऐसे में यात्रियों को सलाह दी गई है कि एयरपोर्ट के लिए निकलने से पहले अपनी एयरलाइन से फ्लाइट का ताजा स्टेटस जरूर जांच लें। 30 हजार लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने की तैयारी तूफान की गंभीरता को देखते हुए आंध्र प्रदेश प्रशासन ने पहले से ही राहत और बचाव की तैयारियां शुरू कर दी थीं। तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 30 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की योजना बनाई गई थी। राहत शिविर तैयार किए गए और आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात की गईं। मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने भी अधिकारियों के साथ तूफान से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। प्रशासन को राहत कार्यों में तेजी लाने और जरूरी सेवाएं चालू रखने के निर्देश दिए गए। तमिलनाडु और ओडिशा में भी Weather Alert Cyclone Murasu का असर आंध्र प्रदेश के अलावा आसपास के राज्यों में भी देखने को मिला। तमिलनाडु के चेन्नई, तिरुवल्लूर और आसपास के इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई। खराब मौसम के कारण कुछ जगहों पर स्कूल बंद रखने का फैसला लिया गया। ओडिशा के गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में भी प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए। तेलंगाना के कुछ हिस्सों में भी बारिश की संभावना जताई गई। मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह समुद्र में तेज हवाओं और ऊंची लहरों को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में जाने से बचने की सलाह दी है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों से भी अपील की गई है कि वे प्रशासन के निर्देशों को गंभीरता से लें और मौसम सामान्य होने तक सुरक्षित स्थानों पर रहें। एक सप्ताह में दूसरा चक्रवाती तूफान, बढ़ी चिंता आंध्र प्रदेश के लिए यह एक सप्ताह के भीतर दूसरा चक्रवाती तूफान बताया जा रहा है। इससे पहले Cyclone Arnab ने 27-28 अक्टूबर के दौरान आंध्र प्रदेश और ओडिशा के कुछ हिस्सों को प्रभावित किया था। उस दौरान भी कई इलाकों में नुकसान और जनजीवन प्रभावित होने की खबरें सामने आई थीं। लगातार दो तूफानों के कारण तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित इलाकों में बिजली, सड़क और यातायात व्यवस्था को दोबारा सामान्य करना है। Cyclone Murasu Latest Update: आगे कैसा रहेगा मौसम? तूफान के तट पार करने के बाद इसके धीरे-धीरे कमजोर होने का अनुमान है। हालांकि, इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश और आसपास के राज्यों में भारी बारिश का खतरा बना रह सकता है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखने और बिना जरूरत घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है। फिलहाल राहत और बचाव टीमें प्रभावित इलाकों में काम कर रही हैं। आने वाले घंटों में मौसम की स्थिति और नुकसान को लेकर नई जानकारी सामने आने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

दुर्ग-हजरत निजामुद्दीन पूजा स्पेशल ट्रेन की तारीख और नंबर बदले, अब 5 और 6 नवंबर को चलेगी

दुर्ग से हजरत निजामुद्दीन के बीच चलने वाली पूजा स्पेशल ट्रेन के दूसरे फेरे की तारीख और ट्रेन नंबर में बदलाव किया गया है। पहले दुर्ग से यह ट्रेन 8 नवंबर को रवाना होने वाली थी, लेकिन अब 5 नवंबर को चलेगी। इसी तरह हजरत निजामुद्दीन से दुर्ग आने वाली ट्रेन भी 9 नवंबर की जगह 6 नवंबर को रवाना होगी। रेलवे ने दोनों दिशाओं की ट्रेनों के नंबर भी बदल दिए हैं। दुर्ग से निजामुद्दीन जाने वाली ट्रेन अब 5 नवंबर को चलेगी रेलवे के अनुसार, दुर्ग से हजरत निजामुद्दीन जाने वाली ट्रेन नंबर 08751 अब 5 नवंबर को ट्रेन नंबर 08753 के रूप में संचालित होगी। पहले यह ट्रेन 8 नवंबर को रवाना होने वाली थी। निजामुद्दीन से दुर्ग आने वाली ट्रेन का शेड्यूल भी बदला इसी तरह हजरत निजामुद्दीन से दुर्ग आने वाली ट्रेन नंबर 08752 अब 6 नवंबर को ट्रेन नंबर 08754 के साथ चलेगी। पहले इसके 9 नवंबर को रवाना होने का कार्यक्रम था। दोनों तरफ की ट्रेनों का बदला शेड्यूल रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा की योजना बनाने से पहले बदली हुई तारीख और ट्रेन नंबर की जानकारी जरूर जांच लें, ताकि उन्हें किसी तरह की असुविधा न हो।

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