अमेरिका और ईरान (US-Iran) के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान शुरू होने से कुछ घंटे पहले ईरान के केश्म (Qeshm) द्वीप पर पांच धमाकों की खबर सामने आई। अमेरिकी अधिकारियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सीमित सैन्य कार्रवाई की पुष्टि की है। वहीं, ईरान ने दावा किया है कि उसकी सेना ने तीन अमेरिकी जासूसी ड्रोन को निशाना बनाया है।
इस घटनाक्रम ने पूरी दुनिया का ध्यान एक बार फिर पश्चिम एशिया की ओर खींच लिया है। खास बात यह है कि एक तरफ अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर रहा है, तो दूसरी ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान के साथ बातचीत के जरिए तनाव खत्म करने की उम्मीद भी जता रहे हैं।
केश्म द्वीप पर 5 धमाकों से बढ़ी चिंता
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, देश के दक्षिणी हिस्से में स्थित केश्म द्वीप पर पांच धमाकों की आवाज सुनी गई। इसके अलावा बंदर लेंगेह इलाके में भी धमाकों की खबर सामने आई।
केश्म द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई होती है। ऐसे में इस इलाके में किसी भी सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है।
अमेरिका ने हमले की पुष्टि की, बताई कार्रवाई की वजह
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों पर सीमित हमले किए। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई उसकी सैन्य संपत्तियों को संभावित खतरों से बचाने के लिए की गई थी।
अमेरिकी पक्ष ने इसे रक्षात्मक ऑपरेशन बताया है। अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई का उद्देश्य बड़े पैमाने पर युद्ध शुरू करना नहीं था। हालांकि, हमले के बाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ गया है।
ईरान का दावा- तीन अमेरिकी Drone मार गिराए
अमेरिकी कार्रवाई के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने तीन अमेरिकी ड्रोन को निशाना बनाया।
ईरानी मीडिया के मुताबिक, इनमें दो MQM-170 टोही ड्रोन और एक MQ-9 ड्रोन शामिल हैं। ईरान का दावा है कि इन ड्रोन को होर्मुज जलडमरूमध्य और केश्म द्वीप के आसपास निशाना बनाया गया।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी पक्ष ने भी ईरान के सभी दावों को स्वीकार नहीं किया है। इसलिए ड्रोन गिराए जाने की खबर को फिलहाल ईरान के दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।
Trump ने समझौते की जताई उम्मीद
सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की संभावना को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकल सकता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि तेल की कीमतों में गिरावट इस बात का संकेत है कि बाजार को संघर्ष खत्म होने की उम्मीद है।
ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अमेरिकी प्रशासन एक तरफ अपनी सैन्य स्थिति बनाए रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक बातचीत के रास्ते भी खुले रखना चाहता है।
JD Vance ने भी बातचीत को लेकर दी जानकारी
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान के साथ बातचीत में प्रगति होने की बात कही है। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच समझौते की संभावनाएं अभी बनी हुई हैं।
वेंस ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति ट्रंप इस मुद्दे पर लगातार जानकारी ले रहे हैं। हालांकि, बातचीत के दौरान किन शर्तों पर चर्चा हो रही है, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
Qatar की मध्यस्थता से निकल सकता है रास्ता
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कतर भी मध्यस्थता कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर के जरिए दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते पर बातचीत हुई है।
इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने और ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को लेकर चर्चा शामिल है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी कहा है कि तेहरान की शर्तें अमेरिका तक पहुंचा दी गई हैं। अब अमेरिका को इस पर अपना रुख स्पष्ट करना है।
Netanyahu ने ट्रंप प्रशासन पर बनाया दबाव
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी ईरान के मुद्दे पर लगातार सक्रिय हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू ने अमेरिकी प्रशासन से ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई को लेकर चर्चा की है।
हालांकि, अमेरिका की ओर से किसी नए बड़े सैन्य अभियान को लेकर अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस बीच क्षेत्र के कई देशों को आशंका है कि अगर संघर्ष दोबारा बढ़ा तो पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता पैदा हो सकती है।
US Midterm Election से पहले क्यों अहम है हमला?
अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। ऐसे समय में ईरान पर सैन्य कार्रवाई की खबर सामने आना अमेरिकी राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
ईरान के साथ संघर्ष, तेल की कीमतें और विदेश नीति अमेरिकी चुनाव में चर्चा के बड़े मुद्दे बने हुए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के सामने एक तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है, तो दूसरी तरफ आम लोगों पर बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों का असर भी चुनौती बना हुआ है।
हालांकि, हमले के चुनावी असर को लेकर अभी कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदता है।
अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो तेल की सप्लाई और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन खर्च और महंगाई पर देखने को मिल सकता है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों के साथ बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। केश्म द्वीप पर धमाकों और ड्रोन गिराने के दावों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या ट्रंप प्रशासन और ईरान किसी समझौते तक पहुंच पाएंगे या दोनों देशों के बीच टकराव का नया दौर शुरू होगा। आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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