Ganesh Utsav 2025 (गणेश उत्सव 2025) का चौथा दिन (Day 4) भक्तों के लिए बेहद खास है। ढोल-ताशों की गूंज, फूलों की सजावट और दीपों की रोशनी के बीच गणपति बप्पा की आराधना पूरे देश में धूमधाम से की जा रही है। भक्तों के दिलों में केवल एक ही जयकार गूंज रही है –
“गणपति बप्पा मोरया!”
चौथे दिन का महत्व (Significance of Day 4)
हिंदू शास्त्रों के अनुसार चौथे दिन गणेशजी की पूजा करने से:
घर-परिवार में सुख-शांति आती है।
जीवन से संकट और रुकावटें दूर होती हैं।
परिवार में समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है।
इस दिन गणपति को लाल फूल, दूर्वा (तीन पत्तों वाली घास), मोदक और लड्डू अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है।
पूजा विधि (Ganesh Puja Vidhi Day 4)
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
गणपति प्रतिमा पर गंगाजल और चंदन लगाएं।
“ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
बप्पा को मोदक, नारियल, फल और दूर्वा अर्पित करें।
दीपक, धूप और फूलों से आरती कर परिवार संग प्रसाद ग्रहण करें।
उत्सव का रंग (Festival Vibes)
- महाराष्ट्र, मुंबई और पुणे के पंडालों में चौथे दिन भव्य सजावट और झांकियां देखने को मिलती हैं।
- कहीं बप्पा को राजा के रूप में सजाया जाता है तो कहीं बाल रूप में।
- ढोल-ताशे, लेज़ीम और भजनों की गूंज से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठता है।
- बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी उत्साह और उमंग से भक्ति में डूब जाते हैं।
ज्योतिषीय लाभ
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस दिन की पूजा से:
ग्रह दोष शांति मिलती है
संकल्प पूरे होते हैं
जीवन में नए अवसर और सफलता मिलती है।
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