चर्चित SONAM-RAJA मर्डर केस में पुलिस ने तकनीक की ताकत से सच तक पहुंचने का रास्ता ढूंढ निकाला। कई मोबाइल नंबरों की गहराई से जांच की गई, कॉल डिटेल्स खंगाली गईं और आखिरकार पुलिस सोनम तक पहुंचने में सफल रही।
पुलिस ने MP सर्कल के हजारों मोबाइल नंबरों में से एक खास सीरीज को छांटा। इसमें से संदिग्ध नंबरों की कॉल डिटेल्स निकाली गईं।
मोबाइल की लोकेशन हिस्ट्री से यह पता चला कि कौन कहां गया था और कब गया। सोनम के लोकेशन डेटा ने मामले की दिशा बदल दी।
इस तकनीक से पुलिस ने नकली टावर बनाकर कॉल और मैसेज को इंटरसेप्ट किया। इससे कई राज सामने आए।
मोबाइल में ऑन GPS से सटीक लोकेशन मिली और यह पता चला कि कौन सा आरोपी कहां-कहां गया था।
जिन इलाकों में मोबाइल एक्टिव था, वहां के CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई, जिससे सोनम की गतिविधियों की पुष्टि हुई।
सोनम और राज के सोशल मीडिया अकाउंट्स की जांच से दोनों के रिश्ते और विवादों की जानकारी मिली।
मोबाइल से डिलीट किए गए डाटा को रिकवर किया गया। इससे केस के कई अहम सबूत मिले।
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