भारत (India) और चीन (China) के बीच रिश्तों में हाल ही में थोड़ी गर्माहट जरूर आई है, लेकिन ये रिश्ता अब भी एक जटिल “chess game” की तरह बना हुआ है। SCO (Shanghai Cooperation Organisation) बैठक के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात ने इसी शतरंज की एक और नई चाल चल दी है।
जयशंकर ने चीन के साथ बातचीत में “mutual respect, mutual interest और mutual sensitivity” यानी आपसी सम्मान, हित और संवेदनशीलता की ज़रूरत को दोहराया। ये संकेत है कि भारत अब चीनी रणनीति को लेकर सतर्क है और हर कदम सोच-समझकर उठा रहा है।
सीमा विवाद को China कर रहा है ‘compartmentalise’
हालांकि, पूर्वी लद्दाख में पिछले साल डिसएंगेजमेंट के बाद कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं – जैसे कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली – लेकिन चीन अब सीमा विवाद को अलग कर बाकी क्षेत्रों में रिश्ते बेहतर करना चाहता है। इसे ‘compartmentalisation’ कहा जा रहा है, जहां सीमा विवाद को नजरअंदाज कर व्यापार और सांस्कृतिक सहयोग बढ़ाने की कोशिश हो रही है।
भारत इस रणनीति को लेकर सतर्क है और बार-बार स्पष्ट कर चुका है कि जब तक सीमा पर स्थिरता नहीं आती, तब तक रिश्तों में ‘normalcy’ नहीं आ सकती।
2027 में Xi Jinping की स्थिति होगी अहम
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-चीन के संबंधों की असली दिशा 2027 में तय होगी, जब यह देखा जाएगा कि शी जिनपिंग फिर से सत्ता में आते हैं या नहीं। अगर वे रहते हैं, तो भारत को यह परखना होगा कि चीन सिर्फ दिखावे की बातचीत कर रहा है या वास्तव में रिश्ते सुधारना चाहता है।
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