America और India के बीच रिश्ते एक बार फिर सुर्खियों में हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेड एडवाइज़र पीटर नवरो (Peter Navarro) ने भारत पर रूस से कच्चा तेल (Russian Crude Oil) खरीदकर उसे रिफाइन कर अन्य देशों को बेचने का आरोप लगाया। उन्होंने भारत को “Oil Laundromat of Kremlin” (क्रेमलिन का तेल धुलाईघर) तक कह डाला।
नवरो ने कहा कि भारत को रूसी तेल की जरूरत नहीं है, बल्कि यह सिर्फ Refining Profit Scheme है। उन्होंने भारत को “Maharaja of Tariffs” भी करार दिया और चेतावनी दी कि अगर भारत ने रूस से तेल आयात बंद नहीं किया, तो अमेरिका भारतीय निर्यात पर 50% Tariff (शुल्क) लगा सकता है।
🇮🇳 India का जवाब: “Energy security हमारी प्राथमिकता”
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने अमेरिका के आरोपों को “अनुचित” बताया। उन्होंने कहा कि भारत, रूस से तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा ग्राहक नहीं है, बल्कि China कहीं ज्यादा खरीद करता है। जयशंकर ने साफ कहा –
“India अपनी Energy Security और Strategic Autonomy को किसी दबाव में छोड़ नहीं सकता।”
Russia का समर्थन: “India के साथ Energy Projects बढ़ेंगे”
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergey Lavrov) ने भारत को आश्वासन दिया कि तेल सप्लाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि रूस और भारत मिलकर आने वाले समय में और भी Joint Energy Projects पर काम करेंगे।
Trade War का खतरा
अमेरिका पहले ही भारत के निर्यात पर 25% Reciprocal Tariff लगा चुका है और 27 अगस्त 2025 से इसे बढ़ाकर 50% करने जा रहा है। यह विवाद दोनों देशों के बीच बढ़ते Diplomatic & Trade Crisis को और गहरा सकता है।
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