मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव ने सोमवार को दुनिया भर के वित्तीय बाजारों को हिला दिया। Iran से जुड़े युद्ध के खतरे और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी के कारण ग्लोबल स्टॉक मार्केट में घबराहट का माहौल देखने को मिला। इसका सीधा असर भारत के शेयर बाजार पर भी पड़ा, जहां Sensex करीब 2,100 अंक गिरकर लगभग 76,800 के स्तर पर आ गया।
भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय बाजार कमजोर शुरुआत के साथ खुले। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक Sensex 2,000 से ज्यादा अंक टूट गया, जबकि Nifty 50 में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में अचानक आई इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में बड़ी कमी आई। कुछ ही घंटों में भारतीय बाजार से लाखों करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू कम हो गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों ने बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण तेजी से मुनाफावसूली शुरू कर दी।
एशियाई बाजारों में भी बड़ी गिरावट
भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के कई प्रमुख बाजारों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।
- जापान का Nikkei Index लगभग 7% गिर गया
- दक्षिण कोरिया का Kospi Index भी करीब 7–8% टूट गया
- हांगकांग और ताइवान के बाजारों में भी बिकवाली देखी गई
निवेशकों को डर है कि अगर मध्य-पूर्व में संघर्ष लंबा चला, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
Oil Prices में तेजी से बढ़ी चिंता
मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने का सबसे बड़ा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर दिखा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो पिछले कई महीनों का उच्च स्तर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर संघर्ष बढ़ता है और तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। यही कारण है कि ऊर्जा बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ गई है।
भारत पर क्यों ज्यादा असर पड़ता है?
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगाता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो उसका असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
तेल की कीमतें बढ़ने से:
- महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है
- रुपये पर दबाव बढ़ सकता है
- कंपनियों की लागत बढ़ जाती है
इसी वजह से तेल में तेजी आने पर अक्सर शेयर बाजार में भी दबाव देखने को मिलता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक मध्य-पूर्व के हालात और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। अगर तनाव कम होता है तो बाजार में राहत देखने को मिल सकती है। लेकिन यदि स्थिति बिगड़ती है, तो वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
फिलहाल निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल है। कई निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं और बाजार में हल्की-फुल्की घबराहट भी दिखाई दे रही है।
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