दिल्ली हाईकोर्ट के जज Justice Yashwant Varma के खिलाफ चल रहे Cash-at-Home केस में संसद ने बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा अध्यक्ष Om Birla ने मंगलवार को महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दी और मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय समिति का गठन किया।
Case Background: Cash-at-Home Row कैसे शुरू हुआ?
मार्च 2025 में Justice Yashwant Varma के सरकारी आवास में आग लगने के बाद दमकलकर्मी और पुलिस जब पहुंचे, तो उन्हें स्टोर रूम से ₹500 के जली और आधी-जली नोटों की भारी मात्रा मिली। यह बरामदगी इतनी चौंकाने वाली थी कि मामला तुरंत राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया।
Supreme Court की In-House Inquiry
- तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने 3 जजों की इन-हाउस जांच समिति गठित की।
- रिपोर्ट में पाया गया कि जस्टिस वर्मा का स्टोर रूम पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नियंत्रण था।
- समिति ने उनके आचरण को “गंभीर कदाचार” मानते हुए महाभियोग की सिफारिश की।
जस्टिस वर्मा की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
Justice Yashwant Varma ने इस रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और दलील दी कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिला। जुलाई 2025 में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उनके आचरण पर सवाल उठाते हुए कहा—
“Your conduct does not inspire confidence.”
7 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
संसद में महाभियोग प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, मानसून सत्र में 200+ सांसदों ने महाभियोग नोटिस दिया। आज लोकसभा अध्यक्ष ने इसे मंजूर करते हुए 3-member Investigation Committee बनाई है, जो मामले की विस्तृत जांच करेगी।
आगे क्या होगा?
महाभियोग प्रक्रिया पूरी होने के लिए:
- लोकसभा और राज्यसभा दोनों में प्रस्ताव 2/3 बहुमत से पास होना चाहिए।
- कुल सदस्य संख्या के आधे से अधिक का समर्थन भी जरूरी है।
- इसके बाद राष्ट्रपति अंतिम आदेश जारी करेंगे।
क्यों खास है यह मामला?
- यह न्यायपालिका में जवाबदेही और पारदर्शिता का बड़ा टेस्ट है।
- भारत में महाभियोग की प्रक्रिया बेहद दुर्लभ है।
- इस केस के नतीजे आने वाले समय में न्यायिक मानकों को प्रभावित कर सकते हैं।
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