पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों काफी गरमाई हुई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर लगातार बढ़ रही नाराजगी अब खुलकर सामने आने लगी है। राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक (Prakash Chik Baraik) के इस्तीफे ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। माना जा रहा है कि यह सिर्फ एक इस्तीफा नहीं, बल्कि TMC के अंदर चल रही बड़ी राजनीतिक खींचतान का संकेत है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कई नेता मौजूदा नेतृत्व से खुश नहीं हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों में कई बड़े नाम TMC से दूरी बनाते नजर आए हैं। प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद अब ममता बनर्जी पर विपक्ष के साथ-साथ अपनी ही पार्टी के भीतर से दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
राज्यसभा से इस्तीफा, लेकिन वजह पर सस्पेंस
प्रकाश चिक बराइक ने राज्यसभा सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से किसी बड़ी वजह का खुलासा नहीं किया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के अंदर चल रही खींचतान और असंतोष इसके पीछे बड़ी वजह हो सकती है।
सूत्रों की मानें तो TMC के कई सांसद और नेता पार्टी की रणनीति और फैसलों से नाराज बताए जा रहे हैं। यही कारण है कि बंगाल की राजनीति में बगावत की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं बागी सुर
प्रकाश चिक बराइक से पहले भी कई नेता पार्टी लाइन से अलग राय रखते दिखाई दिए थे। सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर रॉय जैसे नेताओं के नाम पहले ही चर्चाओं में आ चुके हैं। इसके अलावा कुछ सांसदों के दूसरे दलों के नेताओं से संपर्क में होने की खबरों ने TMC की चिंता बढ़ा दी है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में और नेता पार्टी छोड़ते हैं, तो इसका असर संसद से लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति तक दिखाई दे सकता है।
BJP ने साधा निशाना
बीजेपी ने इस पूरे मामले को लेकर ममता बनर्जी सरकार और TMC नेतृत्व पर हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि पार्टी के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा और लगातार हो रहे इस्तीफे उसी का परिणाम हैं।
वहीं दूसरी तरफ TMC अभी भी इस संकट को संभालने की कोशिश में लगी हुई है। पार्टी की ओर से फिलहाल आधिकारिक तौर पर ज्यादा बयान नहीं दिया गया है, लेकिन अंदरखाने बैठकों का दौर लगातार जारी बताया जा रहा है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अगर असंतुष्ट नेताओं की संख्या बढ़ती है, तो TMC के लिए यह बड़ा राजनीतिक संकट बन सकता है।
फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि ममता बनर्जी इस चुनौती से कैसे निपटती हैं और पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को किस तरह संभालती हैं।
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