नई दिल्ली में सितंबर में होने वाला BRICS Summit 2026 इस बार सिर्फ आर्थिक सहयोग की बैठकों तक सीमित नहीं रहने वाला है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian) भी भारत पहुंचेंगे और शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है, ऐसे में पेजेशकियान की मौजूदगी को India-Iran Relations के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
पेजेशकियान का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब पश्चिम एशिया की स्थिति लगातार अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। यही वजह है कि नई दिल्ली में होने वाली BRICS बैठक के दौरान आर्थिक मुद्दों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात और वैश्विक कूटनीति पर भी नजर रहेगी।
BRICS Summit में शामिल होंगे ईरानी राष्ट्रपति
ईरान 2024 में BRICS का पूर्ण सदस्य बना था। संगठन में शामिल होने के बाद यह पहली बार है जब राष्ट्रपति पेजेशकियान भारत में BRICS के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। उनकी मौजूदगी से संगठन में ईरान की भूमिका और भारत के साथ उसके संबंधों पर चर्चा को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारत की अध्यक्षता में इस साल BRICS का फोकस Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability जैसे मुद्दों पर है। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, विकास और बदलती वैश्विक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर बातचीत हो सकती है।
PM Modi से मुलाकात पर भी रहेंगी निगाहें
पेजेशकियान के भारत दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी संभावित मुलाकात भी अहम मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से व्यापार, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग जैसे मुद्दे बातचीत का हिस्सा रहे हैं।
ऐसे में BRICS Summit के दौरान दोनों नेताओं की बैठक होती है तो India-Iran Relations को लेकर कुछ महत्वपूर्ण संकेत सामने आ सकते हैं। खासकर ऐसे वक्त में जब पश्चिम एशिया की राजनीति तेजी से बदल रही है।
Chabahar Port और Connectivity भी अहम मुद्दे
भारत और ईरान के रिश्तों में Chabahar Port की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक संपर्क बढ़ाने का एक अहम रास्ता माना जाता है।
पेजेशकियान की यात्रा के दौरान कनेक्टिविटी, व्यापार और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत की उम्मीद है। दोनों देशों के लिए यह दौरा पुराने संबंधों को नई दिशा देने का अवसर बन सकता है।
West Asia Crisis के बीच क्यों खास है दौरा?
पेजेशकियान ऐसे समय भारत आ रहे हैं जब West Asia में तनाव का असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। भारत लगातार बातचीत और कूटनीतिक समाधान के जरिए क्षेत्र में स्थिरता की जरूरत पर जोर देता रहा है।
BRICS में बढ़ रहा ईरान का प्रभाव
BRICS में ईरान की एंट्री के बाद संगठन का दायरा और व्यापक हुआ है। ईरान अब आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी भूमिका मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन भारत और ईरान दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। भारत जहां BRICS के जरिए वैश्विक मंच पर अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखेगा, वहीं ईरान के लिए यह अपने आर्थिक और कूटनीतिक संपर्क बढ़ाने का अवसर होगा।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है पेजेशकियान का दौरा?
- ईरान के राष्ट्रपति BRICS Summit में शामिल होंगे।
- भारत 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है।
- India-Iran Relations पर उच्चस्तरीय बातचीत की संभावना है।
- Chabahar Port और Connectivity अहम मुद्दे रह सकते हैं।
- West Asia Crisis के बीच क्षेत्रीय कूटनीति पर चर्चा हो सकती है।
- BRICS में ईरान की भूमिका और सक्रियता पर दुनिया की नजर रहेगी।
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