भारत और अमेरिका के बीच चली आ रही ट्रेड वार्ताओं में एक बार फिर नई उम्मीदें जाग रही हैं। वैश्विक वित्तीय संस्था Nomura का कहना है कि दोनों देशों के बीच Trade Deal जल्द सामने आ सकती है। सबसे बड़ी राहत यह हो सकती है कि अमेरिका द्वारा भारत के कई उत्पादों पर लगाया गया 50% टैरिफ घटकर लगभग 20% तक आ जाए।
क्यों बढ़ी उम्मीद? Nomura का बड़ा अनुमान
Nomura की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल में हुई द्विपक्षीय बातचीत ने सकारात्मक मोड़ लिया है। कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर दोनों देशों की टीमों में प्रगति हुई है।
अगर सब कुछ ठीक रहा, तो:
- 50% का कठोर टैरिफ काफी हद तक कम हो सकता है
- भारतीय उत्पादों की अमेरिका में प्रतिस्पर्धा फिर से बढ़ जाएगी
- निर्यात-आधारित उद्योगों को नई सांस मिल सकती है
50% टैरिफ से उद्योगों पर पड़ा असर
पिछले महीनों में अमेरिकी टैरिफ ने भारत के कई सेक्टरों पर भारी दबाव डाला था, जैसे—
- टेक्सटाइल
- जेम्स व ज्वेलरी
- फुटवियर
- लेदर
- मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स
ये सभी सेक्टर अमेरिका जैसे बड़े बाज़ार पर काफी निर्भर हैं। 50% टैरिफ के चलते उनके उत्पाद महंगे हो गए थे, जिससे ऑर्डर में गिरावट और मुनाफे में कमी देखी गई।
टैरिफ 20% होने से क्या बदलेगा?
अगर अमेरिका टैरिफ को लगभग 20% तक ले आता है, तो इसके कई सकारात्मक असर होंगे—
- भारतीय कंपनियों की cost competitiveness वापस आएगी
- ऑर्डर और एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी की संभावना
- छोटे व मध्यम निर्यातकों को बड़ी राहत
- रोजगार वाले सेक्टरों में स्थिरता
यह कदम भारत की GDP, निवेश और विदेशी ट्रेड के लिए भी सकारात्मक माना जा रहा है।
ट्रेड डील अभी अटकी क्यों है?
हालांकि प्रगति तेज़ हुई है, लेकिन कुछ मुद्दे अभी भी “संवेदनशील” हैं:
- कृषि
- डेयरी
- कुछ बाज़ार-एक्सेस संबंधित शर्तें
इन सेक्टरों को लेकर दोनों देशों की नीति और प्राथमिकताएँ अलग-अलग हैं। यही वजह है कि डील पर अंतिम हस्ताक्षर अभी बाकी हैं।
ट्रेड डील का बड़ा महत्व: सिर्फ टैरिफ की बात नहीं
India–US Trade Deal बनने से सिर्फ टैरिफ कम नहीं होंगे, बल्कि—
- दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे
- सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ेगा
- टेक्नोलॉजी और इन्वेस्टमेंट पार्टनरशिप गहरी होगी
- निर्यात-उद्योगों को लंबी अवधि की स्थिरता मिलेगी
यह कदम भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेड के बड़े खिलाड़ियों में और ऊपर ले जा सकता है।
आगे क्या? 2025 के अंत तक बड़ी तस्वीर साफ
अभी सारी निगाहें इस बात पर हैं कि दोनों देश अंतिम सहमति कब बनाते हैं। अगर टैरिफ में कटौती होती है, तो यह भारत के उद्योगों के लिए साल के अंत की बड़ी राहत होगी।
लेकिन अगर बातचीत में देरी हुई, तो मौजूदा टैरिफ दबाव बना रहेगा।
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