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PM Modi Diwali 2026: बस्तर में जवानों के साथ दिवाली मनाएंगे मोदी? 12 साल से निभा रहे परंपरा

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दिवाली का त्योहार हो और घर-परिवार से दूर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे जवानों की बात न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) हर साल दिवाली का कुछ समय देश के सैनिकों के साथ बिताते हैं। इस साल भी उन्होंने जवानों के बीच दिवाली मनाने की अपनी परंपरा जारी रखने की बात कही है। इस बार छत्तीसगढ़ के बस्तर में उनके पहुंचने की चर्चा है। हालांकि, अभी तक बस्तर को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने 7 नवंबर को एक वीडियो संदेश जारी कर देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हर साल जवानों के साथ दिवाली मनाना उनके लिए एक परंपरा बन गई है और इस बार भी वह इसे जारी रखेंगे। उनके इस संदेश के बाद से ही लोगों की नजर इस बात पर है कि इस बार प्रधानमंत्री किस सैन्य ठिकाने पर पहुंचेंगे।

2014 से जवानों के साथ दिवाली मना रहे हैं PM मोदी

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में सियाचिन में जवानों के साथ दिवाली मनाई थी। इसके बाद से यह सिलसिला लगातार जारी है। हर साल वह देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात सैनिकों के बीच पहुंचकर त्योहार की खुशियां साझा करते हैं।

इस परंपरा के पीछे एक भावनात्मक संदेश भी है। त्योहारों पर जब ज्यादातर लोग अपने परिवार के साथ होते हैं, तब सेना के जवान देश की सुरक्षा के लिए अपनी ड्यूटी निभा रहे होते हैं। प्रधानमंत्री का उनके बीच पहुंचना सैनिकों के प्रति सम्मान और आभार जताने का एक तरीका माना जाता है।

जम्मू-कश्मीर से लेकर लद्दाख तक, इन जगहों पर मनाई दिवाली

पिछले वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने कई संवेदनशील और सीमावर्ती इलाकों में जवानों के साथ दिवाली मनाई है।

  • 2014: सियाचिन, लद्दाख
  • 2015: पंजाब बॉर्डर
  • 2016: सुमदो, हिमाचल प्रदेश
  • 2017: गुरेज घाटी, जम्मू-कश्मीर
  • 2018: हर्षिल, उत्तराखंड
  • 2019: राजौरी, जम्मू-कश्मीर
  • 2020: लोंगेवाला, राजस्थान
  • 2021: नौशेरा, जम्मू-कश्मीर
  • 2022: कारगिल, लद्दाख
  • 2023: लेप्चा, हिमाचल प्रदेश
  • 2024: सिर क्रीक, गुजरात
  • 2025: INS विक्रांत पर नौसेना के जवानों के साथ

इनमें जम्मू-कश्मीर के इलाकों में प्रधानमंत्री तीन बार और लद्दाख में दो बार दिवाली मना चुके हैं। उनकी यह परंपरा हर साल चर्चा में रहती है।

पिछले साल INS Vikrant पर पहुंचे थे प्रधानमंत्री

साल 2025 की दिवाली प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नौसेना के जवानों के साथ मनाई थी। वह INS विक्रांत पर पहुंचे थे, जो भारत का स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर है।

इस दौरान उन्होंने नौसेना के अधिकारियों और जवानों से मुलाकात की। उनके साथ त्योहार मनाया और देश की समुद्री सुरक्षा में नौसेना की भूमिका की सराहना की। INS विक्रांत पर प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने पिछले साल के दिवाली दौरे को खास बना दिया था।

इस बार Bastar में दिवाली मनाने की चर्चा

इस साल छत्तीसगढ़ के बस्तर में प्रधानमंत्री के पहुंचने की चर्चा है। बस्तर क्षेत्र लंबे समय तक नक्सलवाद की चुनौती से जूझता रहा है। यहां सुरक्षा बल लगातार नक्सल विरोधी अभियान चला रहे हैं।

ऐसे में अगर प्रधानमंत्री बस्तर पहुंचते हैं तो यह वहां तैनात जवानों के लिए खास मौका होगा। इससे सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति को लेकर भी एक बड़ा संदेश जा सकता है।

हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक बस्तर दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित दौरे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

PM Modi ने दिवाली पर देशवासियों को क्या संदेश दिया?

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वीडियो संदेश में दिवाली को रोशनी, सकारात्मकता और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक बताया। उन्होंने देशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

जवानों के साथ दिवाली मनाने की अपनी परंपरा का जिक्र करते हुए उन्होंने साफ किया कि इस बार भी वह सैनिकों के बीच जाकर त्योहार मनाएंगे।

अब लोगों को प्रधानमंत्री के इस साल के कार्यक्रम के आधिकारिक स्थान का इंतजार है। बस्तर को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि दिवाली 2026 पर मोदी किस सैन्य ठिकाने पर पहुंचकर जवानों के साथ खुशियां साझा करते हैं।

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Manya

manyajadoun42@gmail.com

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Sonia Gandhi

Sonia Gandhi on Babri Demolition: बाबरी विध्वंस याद कर रो पड़ी थीं सोनिया गांधी, BJP ने कांग्रेस को घेरा

बाबरी विध्वंस की घटना एक बार फिर देश की सियासत में चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी ढांचे के विध्वंस से जुड़ी यादें साझा करते हुए बताया कि जब उन्होंने टीवी पर यह घटना देखी थी, तो वह रो पड़ी थीं। सोनिया गांधी के इस बयान के सामने आने के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस के दिल में आज भी बाबर के लिए सहानुभूति है। दरअसल, सोनिया गांधी ने अपनी आने वाली किताब Belonging: A Journey of Love को लेकर ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ को इंटरव्यू दिया था। इसी बातचीत में उन्होंने बाबरी विध्वंस, इंदिरा गांधी, इमरजेंसी और भारतीय राजनीति में आए बदलावों पर अपनी बात रखी। उनके बयान के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच एक बार फिर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। Babri Demolition पर क्या बोलीं सोनिया गांधी? सोनिया गांधी ने 6 दिसंबर 1992 की घटना को याद करते हुए बताया कि बाबरी ढांचे को गिरते हुए देखकर वह भावुक हो गई थीं। उन्होंने कहा कि उस घटना ने उन्हें अंदर तक प्रभावित किया था। भारत की पहचान उसके धर्मनिरपेक्ष स्वरूप से जुड़ी है और इसे बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू की विचारधारा का जिक्र करते हुए कहा कि जिस भारत की कल्पना इन नेताओं ने की थी, उसकी रक्षा के लिए लगातार प्रयास करने होंगे। सोनिया का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनकी किताब Belonging: A Journey of Love रिलीज होने वाली है। इस किताब में उन्होंने अपने निजी जीवन और भारतीय राजनीति से जुड़े कई अनुभव साझा किए हैं। BJP का पलटवार, सुधांशु त्रिवेदी ने उठाए सवाल सोनिया गांधी के बयान पर बीजेपी सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस की विचारधारा पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस के दिल में आज भी बाबर जिंदा है। त्रिवेदी ने यह सवाल भी उठाया कि सोनिया गांधी ने 1992 में बाबरी ढांचे के विध्वंस की तस्वीरें किस टीवी चैनल पर देखी थीं? उन्होंने कहा कि उस समय दूरदर्शन पर इस घटना का लाइव प्रसारण नहीं हो रहा था। बीजेपी नेता ने कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए कश्मीर में 1990 के दशक में हिंदुओं के साथ हुई घटनाओं का भी जिक्र किया। उनके बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। बीजेपी के दूसरे नेताओं ने भी साधा निशाना सोनिया गांधी के इंटरव्यू पर बीजेपी के दूसरे नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर सवाल उठाए। वहीं, बीजेपी सांसद तरुण चुघ ने भी कांग्रेस और सोनिया गांधी पर निशाना साधा। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस को अपने पुराने राजनीतिक रुख और फैसलों पर भी जवाब देना चाहिए। हालांकि, सोनिया गांधी के बयान को लेकर कांग्रेस की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर भी राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी। BJP के बढ़ते प्रभाव पर सोनिया गांधी ने क्या माना? इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने भारतीय राजनीति में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव पर भी बात की। उन्होंने माना कि बीजेपी और हिंदुत्व की राजनीति के उभार में कांग्रेस की अपनी कमियों का भी योगदान रहा है। उनके मुताबिक, कांग्रेस कई मामलों में समय रहते राजनीतिक बदलावों को समझने में पीछे रह गई। पार्टी को अपनी रणनीति और काम करने के तरीके में बदलाव करने की जरूरत थी। यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि सोनिया गांधी ने अपनी ही पार्टी की राजनीतिक गलतियों को स्वीकार किया है। Emergency पर भी खुलकर बोलीं सोनिया गांधी सोनिया गांधी ने 1975 में लगी इमरजेंसी को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने इमरजेंसी लागू करने के फैसले को गलती बताया। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व और उस दौर की परिस्थितियों पर चर्चा की। उन्होंने संजय गांधी की भूमिका का भी जिक्र किया और कहा कि अगर उस समय उन पर नियंत्रण रखा गया होता, तो इमरजेंसी के बाद पैदा हुई परिस्थितियों को कुछ हद तक टाला जा सकता था। 1992 का Babri Demolition आज भी क्यों है चर्चा में? अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचे का विध्वंस भारतीय राजनीति के इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक रहा है। इस घटना के बाद देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव और हिंसा हुई थी। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद लंबे समय तक अदालत में चला। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन रामलला को देने और मस्जिद निर्माण के लिए अयोध्या में अलग से पांच एकड़ जमीन उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। इसके बाद जनवरी 2024 में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई। अब करीब 34 साल पुराने इस घटनाक्रम पर सोनिया गांधी की टिप्पणी ने एक बार फिर कांग्रेस और बीजेपी को आमने-सामने ला दिया है। एक तरफ सोनिया गांधी ने इसे धर्मनिरपेक्ष भारत की पहचान से जोड़कर देखा, तो दूसरी तरफ बीजेपी ने उनके बयान को लेकर कांग्रेस की विचारधारा पर सवाल खड़े किए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi Diwali 2026: बस्तर में जवानों के साथ दिवाली मनाएंगे मोदी? 12 साल से निभा रहे परंपरा

दिवाली का त्योहार हो और घर-परिवार से दूर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे जवानों की बात न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) हर साल दिवाली का कुछ समय देश के सैनिकों के साथ बिताते हैं। इस साल भी उन्होंने जवानों के बीच दिवाली मनाने की अपनी परंपरा जारी रखने की बात कही है। इस बार छत्तीसगढ़ के बस्तर में उनके पहुंचने की चर्चा है। हालांकि, अभी तक बस्तर को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रधानमंत्री मोदी ने 7 नवंबर को एक वीडियो संदेश जारी कर देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हर साल जवानों के साथ दिवाली मनाना उनके लिए एक परंपरा बन गई है और इस बार भी वह इसे जारी रखेंगे। उनके इस संदेश के बाद से ही लोगों की नजर इस बात पर है कि इस बार प्रधानमंत्री किस सैन्य ठिकाने पर पहुंचेंगे। 2014 से जवानों के साथ दिवाली मना रहे हैं PM मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में सियाचिन में जवानों के साथ दिवाली मनाई थी। इसके बाद से यह सिलसिला लगातार जारी है। हर साल वह देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात सैनिकों के बीच पहुंचकर त्योहार की खुशियां साझा करते हैं। इस परंपरा के पीछे एक भावनात्मक संदेश भी है। त्योहारों पर जब ज्यादातर लोग अपने परिवार के साथ होते हैं, तब सेना के जवान देश की सुरक्षा के लिए अपनी ड्यूटी निभा रहे होते हैं। प्रधानमंत्री का उनके बीच पहुंचना सैनिकों के प्रति सम्मान और आभार जताने का एक तरीका माना जाता है। जम्मू-कश्मीर से लेकर लद्दाख तक, इन जगहों पर मनाई दिवाली पिछले वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी ने कई संवेदनशील और सीमावर्ती इलाकों में जवानों के साथ दिवाली मनाई है। इनमें जम्मू-कश्मीर के इलाकों में प्रधानमंत्री तीन बार और लद्दाख में दो बार दिवाली मना चुके हैं। उनकी यह परंपरा हर साल चर्चा में रहती है। पिछले साल INS Vikrant पर पहुंचे थे प्रधानमंत्री साल 2025 की दिवाली प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय नौसेना के जवानों के साथ मनाई थी। वह INS विक्रांत पर पहुंचे थे, जो भारत का स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर है। इस दौरान उन्होंने नौसेना के अधिकारियों और जवानों से मुलाकात की। उनके साथ त्योहार मनाया और देश की समुद्री सुरक्षा में नौसेना की भूमिका की सराहना की। INS विक्रांत पर प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने पिछले साल के दिवाली दौरे को खास बना दिया था। इस बार Bastar में दिवाली मनाने की चर्चा इस साल छत्तीसगढ़ के बस्तर में प्रधानमंत्री के पहुंचने की चर्चा है। बस्तर क्षेत्र लंबे समय तक नक्सलवाद की चुनौती से जूझता रहा है। यहां सुरक्षा बल लगातार नक्सल विरोधी अभियान चला रहे हैं। ऐसे में अगर प्रधानमंत्री बस्तर पहुंचते हैं तो यह वहां तैनात जवानों के लिए खास मौका होगा। इससे सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति को लेकर भी एक बड़ा संदेश जा सकता है। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक बस्तर दौरे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए इसे फिलहाल संभावित दौरे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। PM Modi ने दिवाली पर देशवासियों को क्या संदेश दिया? प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वीडियो संदेश में दिवाली को रोशनी, सकारात्मकता और अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक बताया। उन्होंने देशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। जवानों के साथ दिवाली मनाने की अपनी परंपरा का जिक्र करते हुए उन्होंने साफ किया कि इस बार भी वह सैनिकों के बीच जाकर त्योहार मनाएंगे। अब लोगों को प्रधानमंत्री के इस साल के कार्यक्रम के आधिकारिक स्थान का इंतजार है। बस्तर को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि दिवाली 2026 पर मोदी किस सैन्य ठिकाने पर पहुंचकर जवानों के साथ खुशियां साझा करते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Japan

Japan Earthquake: जापान में 5.7 तीव्रता का भूकंप, 22 घायल; अगले 7 दिनों तक Aftershock Alert

Japan में रविवार की रात लोगों के लिए डरावनी साबित हुई। रात करीब 1 बजे अचानक धरती कांपने लगी और देखते ही देखते घरों, दुकानों और इमारतों में रखी चीजें हिलने लगीं। 5.7 तीव्रता के इस भूकंप ने मध्य जापान के कई इलाकों में लोगों को दहशत में डाल दिया। इस घटना में कम से कम 22 लोगों के घायल होने की खबर है। भूकंप के बाद जापान की मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। एजेंसी के मुताबिक, अगले एक सप्ताह तक दोबारा तेज झटके महसूस हो सकते हैं। ऐसे में प्रभावित इलाकों के लोगों को फिलहाल राहत की सांस लेने के बजाय सावधानी बरतने की जरूरत है। Japan Earthquake शिजुओका में था भूकंप का केंद्र जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के अनुसार, रविवार 8 नवंबर को स्थानीय समय के मुताबिक रात करीब 1:04 बजे भूकंप आया। इसका केंद्र शिजुओका प्रांत के पश्चिमी हिस्से में जमीन से लगभग 40 किलोमीटर नीचे था। इसकी तीव्रता 5.7 मापी गई, जबकि अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसे 5.5 तीव्रता का बताया। भूकंप का सबसे ज्यादा असर आइची प्रांत के चिता शहर में महसूस किया गया। इसके अलावा हमामात्सु, गिफू, नागानो, यामानाशी, क्योटो और नारा समेत कई इलाकों में भी धरती हिलने की खबर सामने आई। 22 लोग घायल, दुकानों के टूटे शीशे और सड़कों पर बिखरा सामान भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोग अचानक घरों से बाहर निकलने लगे। कई जगह दुकानों के शीशे टूट गए और इमारतों के अंदर रखा सामान जमीन पर गिर गया। एक बुकस्टोर में अलमारियों से किताबें नीचे बिखर गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान कम से कम 22 लोग घायल हुए। कुछ लोगों को भागने की कोशिश में चोटें आईं। स्थानीय प्रशासन प्रभावित इलाकों में नुकसान का जायजा ले रहा है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने अधिकारियों को दिए निर्देश भूकंप के बाद जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने सरकारी अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन करने, लोगों तक जरूरी सूचनाएं पहुंचाने और राहत व्यवस्था पर नजर रखने के निर्देश दिए। सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय में आपातकालीन निगरानी व्यवस्था भी सक्रिय की, ताकि किसी भी नई स्थिति पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। अगले 7 दिनों तक Aftershock का खतरा, लोगों को सतर्क रहने की सलाह भूकंप के बाद सबसे बड़ी चिंता आफ्टरशॉक यानी दोबारा आने वाले झटकों को लेकर है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने लोगों को अगले एक सप्ताह तक सावधान रहने को कहा है। एजेंसी के मुताबिक, आने वाले दिनों में फिर से तेज झटके महसूस हो सकते हैं। खासतौर पर अगले दो से तीन दिनों में सतर्क रहने की जरूरत है। इसके साथ ही पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों को भूस्खलन और चट्टानें गिरने जैसी घटनाओं से सावधान रहने की सलाह दी गई है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अगले सात दिनों में बड़ा भूकंप आना तय है। यह चेतावनी संभावित जोखिम को ध्यान में रखकर जारी की गई है। Bullet Train की रफ्तार कम, रेल सेवाओं पर भी असर भूकंप के बाद जापान में रेल सेवाओं पर भी असर देखने को मिला। सुरक्षा जांच के लिए प्रभावित क्षेत्रों में शिंकानसेन यानी बुलेट ट्रेन की रफ्तार कम की गई। कुछ स्थानीय रेल सेवाओं को भी अस्थायी रूप से रोका गया। रेलवे प्रशासन ने पटरियों और अन्य बुनियादी ढांचे की जांच शुरू की, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। Nankai Trough को लेकर क्यों बढ़ी चिंता? जापान में इस भूकंप के बाद नानकाई ट्रफ (Nankai Trough) का मुद्दा भी चर्चा में है। यह जापान के प्रशांत तट के पास स्थित एक ऐसा समुद्री क्षेत्र है, जहां भविष्य में बड़े भूकंप की आशंका को लेकर वैज्ञानिक लंबे समय से निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, शुरुआती विश्लेषण में इस भूकंप से नानकाई ट्रफ में किसी असामान्य बदलाव के संकेत नहीं मिले हैं। इसलिए मौजूदा भूकंप को संभावित बड़े नानकाई भूकंप का निश्चित संकेत मानना सही नहीं होगा। जापान में बार-बार क्यों आते हैं Earthquake? जापान दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। इसकी प्रमुख वजह इसका पैसिफिक रिंग ऑफ फायर (Pacific Ring of Fire) में स्थित होना है। इस क्षेत्र में कई टेक्टोनिक प्लेटें आपस में मिलती हैं और लगातार हलचल करती रहती हैं। यही कारण है कि जापान में छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं। देश में इमारतों के निर्माण, रेलवे और आपदा प्रबंधन की व्यवस्था भी इसी खतरे को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। फिलहाल जापान प्रशासन प्रभावित इलाकों पर नजर बनाए हुए है। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी नई चेतावनी के लिए आधिकारिक एजेंसियों की जानकारी पर भरोसा करें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

बीकानेर के महाजन CHC में प्रसूता की मौत, परिजनों ने डॉक्टरों पर लगाया लापरवाही का आरोप

राजस्थान के बीकानेर में सरकारी अस्पताल में प्रसूता की मौत का मामला सामने आया है। महाजन कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में शनिवार को 26 वर्षीय कोमल ओझा ने बेटे को जन्म दिया। डिलीवरी के करीब एक घंटे बाद उनकी मौत हो गई। नवजात की हालत स्वस्थ बताई जा रही है। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। एक महिला नर्स ने डिलीवरी करवाई और प्रसूता की तबीयत बिगड़ने के बाद भी समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं हुए। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने अस्पताल परिसर में धरना देकर विरोध जताया। सूचना मिलने पर सीएमएचओ डॉ. पुखराज साध मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने की कोशिश की। हालांकि, देर रात तक परिजन कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। पिता बोले- डॉक्टर और इलाज नहीं मिलने से गई बेटी की जान जानकारी के मुताबिक, कोमल ओझा (26) महाजन कस्बे के वार्ड नंबर 2 निवासी गजानंद ओझा की बेटी थीं। वह इन दिनों अपने पीहर आई हुई थीं। शनिवार दोपहर महाजन के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान उन्होंने बेटे को जन्म दिया। इसके करीब एक घंटे बाद उनकी मौत हो गई। कोमल के पिता गजानंद ओझा ने आरोप लगाया कि डिलीवरी के बाद उनकी बेटी की तबीयत बिगड़ गई, लेकिन उसे समय पर उचित इलाज नहीं मिला। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि डॉक्टरों की मौजूदगी होती तो बेटी की जान बच सकती थी। पहले भी डॉक्टरों की कमी को लेकर हुआ था प्रदर्शन परिजनों के मुताबिक, महाजन CHC में डॉक्टरों की कमी को लेकर करीब छह महीने पहले भी धरना-प्रदर्शन किया गया था। इसके बाद दो डॉक्टरों की नियुक्ति हुई थी, लेकिन आरोप है कि दोनों नियमित रूप से अस्पताल नहीं आते थे। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, प्रसव के दौरान मौजूद स्टाफ और इलाज की प्रक्रिया की पड़ताल करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही अस्पताल में डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है। सीएमएचओ बोले- संविदा डॉक्टरों को हटाने की कार्रवाई होगी सीएमएचओ डॉ. पुखराज साध ने बताया कि अस्पताल में संविदा पर डॉक्टर नियुक्त हैं, लेकिन घटना के दिन सुबह वे मौजूद नहीं थे। उन्होंने कहा कि संबंधित डॉक्टरों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है और उनकी जगह दूसरे डॉक्टरों की नियुक्ति की कोशिश की जा रही है। सीएमएचओ के मुताबिक, प्रसूता की मौत के वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे।

जगदलपुर के मोती ज्वेलर्स में बड़ी चोरी, ग्राहक बनकर आईं महिलाओं ने उड़ाए 1.74 करोड़ के जेवर

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में दीपावली के दौरान चोरी की बड़ी वारदात सामने आई है। संजय मार्केट के पास स्थित मोती ज्वेलर्स में ग्राहक बनकर पहुंचीं महिलाओं ने कथित तौर पर सोने के आभूषणों से भरा एक डिब्बा चोरी कर लिया। दुकान संचालक के मुताबिक, डिब्बे में एक किलो से अधिक सोने के जेवर थे, जिनकी कीमत करीब 1 करोड़ 74 लाख रुपए से ज्यादा बताई जा रही है। महिलाओं ने दुकानदार का ध्यान भटकाकर इस वारदात को अंजाम दिया। चोरी की पूरी घटना दुकान में लगे CCTV कैमरों में कैद हो गई है। फुटेज के आधार पर पुलिस आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। बच्चों के साथ ग्राहक बनकर पहुंचीं महिलाएं जानकारी के मुताबिक, महिलाएं बच्चों के साथ ग्राहक बनकर मोती ज्वेलर्स पहुंची थीं। उन्होंने आभूषण देखने के बहाने दुकानदार को व्यस्त रखा। इसी दौरान दुकानदार का ध्यान दूसरी ओर जाते ही एक महिला ने सोने के जेवरों से भरा डिब्बा उठाया और अपने झोले में रख लिया। इसके बाद महिलाएं दुकान से बाहर निकल गईं। दुकानदार ने बताई 1.74 करोड़ रुपए से ज्यादा कीमत दुकान संचालक के अनुसार, चोरी हुए डिब्बे में एक किलो से अधिक वजन के सोने के आभूषण रखे थे। इनकी कीमत 1 करोड़ 74 लाख रुपए से ज्यादा बताई गई है। हालांकि, चोरी हुए जेवरों की वास्तविक मात्रा और कीमत का आधिकारिक आकलन अभी नहीं हुआ है। पुलिस ने दुकान संचालक से आभूषणों के बिल मांगे हैं। बिल के आधार पर ही चोरी हुए सोने के वजन और कीमत का मिलान किया जाएगा। CCTV फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश वारदात की सूचना मिलने के बाद सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस CCTV फुटेज खंगालकर महिलाओं और उनके साथ मौजूद बच्चों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आरोपी महिलाएं कहां की रहने वाली हैं। सिटी कोतवाली थाना प्रभारी लीलाधर राठौर ने बताया कि मोती ज्वेलर्स में चोरी की सूचना मिली है। मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही वारदात से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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