नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित एनुअल लीगल कॉन्क्लेव 2025 के दौरान एक बड़ा दावा करते हुए राजनीतिक हलचल मचा दी है। राहुल ने कहा कि जब वे कृषि कानूनों का विरोध कर रहे थे, तब दिवंगत पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली को उन्हें धमकाने के लिए भेजा गया था।
राहुल ने अपने बयान में कहा –
“मुझे वो दिन आज भी याद है जब मैं कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ रहा था। उस समय अरुण जेटली जी को मुझे धमकाने के लिए भेजा गया था। उन्होंने मुझसे कहा, ‘अगर आप विरोध जारी रखेंगे तो हमें आपके खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे।’ मैंने उनकी ओर देखा और कहा – ‘शायद आपको नहीं पता कि आप किससे बात कर रहे हैं।'”
BJP और जेटली परिवार का पलटवार – ‘सच का गला घोंटा गया है’
राहुल गांधी के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दी दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने। सिरसा ने कहा कि राहुल गांधी का बयान बेहद शर्मनाक है क्योंकि अरुण जेटली का देहांत अगस्त 2019 में हुआ था, जबकि कृषि कानून 2020 में लाए गए थे।
उन्होंने ट्वीट किया –
“राहुल गांधी की राजनीति अब बेहद निम्न स्तर पर पहुंच चुकी है। एक दिवंगत सम्मानित नेता के नाम को झूठे बयान से जोड़ना न केवल झूठ है, बल्कि देश का अपमान भी है।”
रोहन जेटली का तीखा जवाब – ‘राजनीति के लिए झूठ मत बोलिए’
अरुण जेटली के बेटे और दिल्ली हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील रोहन जेटली ने भी सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने राहुल के बयान को “फर्जी और अमानवीय” बताया।
उन्होंने लिखा –
“मेरे पिता का देहांत 2019 में हुआ था और कृषि कानून 2020 में पेश किए गए थे। इसके बावजूद राहुल गांधी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने मेरे पिता से धमकी सुनी। यह सरासर झूठ है।” “मेरे पिता एक लोकतांत्रिक व्यक्ति थे, उन्होंने कभी किसी को धमकाया नहीं। जो अब हमारे साथ नहीं हैं, उनके बारे में बोलते समय कम से कम तथ्यों का सम्मान करना चाहिए।” “राहुल गांधी इससे पहले भी मनोहर पर्रिकर जी के आखिरी दिनों का राजनीतिकरण कर चुके हैं। यह आदत बनती जा रही है।”
Rahul Gandhi now claims my late father, Arun Jaitley, threatened him over the farm laws. Let me remind him, my father passed away in 2019. The farm laws were introduced in 2020. More importantly, it was not in my father's nature to threaten anyone over an opposing view. He was a…
राहुल गांधी के इस बयान ने राजनीति में एक बार फिर गरमाहट ला दी है। भाजपा और जेटली परिवार इसे एक ‘सुनियोजित राजनीतिक झूठ’ बता रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने अभी तक कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी है। सवाल यह है कि जब रिकॉर्ड्स और तारीखें स्पष्ट हैं, तब ऐसा बयान देने के पीछे उद्देश्य क्या था?
मध्यप्रदेश के सागर जिले में गढ़ाकोटा थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली नंबर की कार से अवैध शराब बरामद की है। खास बात यह है कि यह पूरा मामला एक सड़क हादसे के बाद सामने आया। पुलिस के अनुसार, मंगलवार रात सूचना मिली थी कि चनौआ खुर्द के पास बरखेड़ा गौतम मार्ग पर एक क्षतिग्रस्त कार सड़क किनारे खड़ी है और उसका चालक अंदर फंसा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और चालक को सुरक्षित बाहर निकाला। तलाशी में मिली 9 पेटी देशी शराब जब पुलिस ने कार की तलाशी ली, तो अंदर से 9 पेटी देशी शराब बरामद हुई। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कार और शराब को जब्त कर लिया। पकड़े गए चालक ने अपना नाम जोगेंद्र पिता वीरसिंह राजपूत बताया है। हादसे ने खोल दी तस्करी की पोल पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह अपने तीन साथियों के साथ सागर से गढ़ाकोटा की ओर शराब लेकर जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिससे पूरी साजिश सामने आ गई। एक गिरफ्तार, 3 आरोपी फरार गढ़ाकोटा थाना प्रभारी शुभम दुबे ने बताया कि आरोपी जोगेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं, उसके तीन साथी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है। 👉 ऐसी ही ताजा और सटीक खबरों के लिए विजिट करें www.deshharpal.com
मध्यप्रदेश के जबलपुर से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक नौकरानी के साथ न सिर्फ बेरहमी से मारपीट की गई, बल्कि साजिश रचकर उसके बैंक खाते से लाखों रुपये भी निकाल लिए गए। घटना आधारताल थाना क्षेत्र की है। पीड़िता पूनम बर्मन ने एएसपी सूर्यकांत शर्मा को शिकायत के साथ CCTV फुटेज भी सौंपे हैं। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मालकिन अंजू पांडे उसे थप्पड़ मार रही है और बाल पकड़कर जमीन पर घसीट रही है। नशा देकर चेक पर साइन करवाए, खाते से निकाले पैसे जानकारी के मुताबिक पूनम, अंजू पांडे के घर काम करती थी। आरोप है कि उसे नशे की गोलियां खिलाकर जबरन चेक पर साइन करवाए गए। इसके बाद उसे कार में बैठाकर बैंक ले जाया गया और खाते से पैसे निकलवा लिए गए। जब पूनम को होश आया और उसने विरोध किया, तो उसके साथ मारपीट की गई। खाते में थे 6.30 लाख रुपए, सब निकाल लिए पीड़िता की बहन हीरा बाई ने बताया कि पूनम के बैंक खाते में करीब 6 लाख 30 हजार रुपए थे, जिन्हें आरोपी ने निकलवा लिया। इतना ही नहीं, उसकी पूरी कमाई और बैंक से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी अपने पास रख लिए गए। “पैसे देने से मना किया तो पीटा” पूनम ने बताया कि वह कई महीनों से काम कर रही थी। अचानक उसकी मालकिन ने पैसों की मांग शुरू कर दी। जब उसने मना किया, तो उसके साथ मारपीट की गई और पूरी साजिश के तहत उसके खाते से पैसे निकलवा लिए गए। पुलिस को सौंपी शिकायत, जांच जारी बुधवार को पूनम अपनी बहनों के साथ एसपी कार्यालय पहुंची और पूरे मामले की शिकायत की। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि CCTV फुटेज और शिकायत के आधार पर जल्द कार्रवाई की जाएगी। शिवपुरी में भी शर्मनाक घटना इसी तरह का एक और मामला शिवपुरी से सामने आया है, जहां एक बस कंडक्टर ने महिला यात्री को सड़क पर फेंक दिया। महिला का कसूर सिर्फ इतना था कि उसने ज्यादा किराया देने से इनकार किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कंडक्टर ने महिला के साथ मारपीट की और गालियां दीं। इस दौरान पास खड़ा उसका मासूम बच्चा अपनी मां को छोड़ने की गुहार लगाता रहा, लेकिन कंडक्टर का दिल नहीं पसीजा। 👉 ऐसी ही सच्ची और जमीनी खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ईरान ने समुद्री क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो जहाजों को जब्त कर लिया है। इनमें से एक जहाज दुबई से होते हुए भारत की ओर आ रहा था। इस घटना ने न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। जहाजों की जब्ती से मचा हड़कंप जानकारी के अनुसार, ईरानी सुरक्षा बलों ने खाड़ी क्षेत्र में निगरानी के दौरान दो जहाजों को रोका और अपने कब्जे में ले लिया। बताया जा रहा है कि दोनों जहाजों को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर रोका गया, हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि उनमें क्या माल लदा था और क्रू मेंबर कौन थे। सबसे अहम बात यह है कि जिन जहाजों में से एक भारत की ओर आ रहा था, उसका रास्ता दुबई से होकर गुजर रहा था, जिससे इस मामले में भारत की भी अप्रत्यक्ष एंट्री हो गई है। India Alert: भारत की नजर स्थिति पर भारत इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। भारतीय एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस जहाज का कोई सीधा संबंध भारत से जुड़ा है या नहीं। फिलहाल स्थिति को लेकर सावधानी बरती जा रही है। Gulf Region में बढ़ता तनाव यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब खाड़ी क्षेत्र पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव से गुजर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समुद्री व्यापार और शिपिंग रूट्स पर सीधा असर डाल सकती हैं। खासकर तेल और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। International Reaction भी शुरू इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया आने लगी है। कई देशों ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की मांग की है ताकि इस तरह की घटनाओं से वैश्विक व्यापार प्रभावित न हो। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
22 अप्रैल 2025… यह वो तारीख है, जिसे इंदौर का नथानियल परिवार शायद कभी नहीं भूल पाएगा। कश्मीर की खूबसूरत वादियों में सुकून तलाशने निकले इस परिवार की जिंदगी उसी दिन बिखर गई थी। पहलगाम में हुए आतंकी हमले को आज एक साल पूरा हो गया है, लेकिन उस दिन की चीखें आज भी इस परिवार के दिलों में गूंजती हैं। घाटी में बहा खून वक्त के साथ भले ही मिट गया हो, लेकिन इंदौर के सुशील नथानियल के घर में आज भी उस दर्द की गूंज सुनाई देती है। यह हमला सिर्फ एक घटना नहीं था, बल्कि एक बेटे के सपनों और एक पत्नी की पूरी दुनिया को खत्म कर देने वाला हादसा था। “अगर मैंने घुड़सवारी की जिद न की होती…” सुशील के बेटे ऑस्टिन आज भी उस दिन को याद कर कांप उठते हैं। वे बताते हैं,“पापा का सपना था कि वे इंदौर आकर मुझे विदेश पढ़ने भेजेंगे। सब कुछ तय था… लेकिन उस दिन अगर मैंने घुड़सवारी की जिद न की होती, तो शायद मैं पापा के साथ होता… और शायद कहानी कुछ और होती।” ऑस्टिन की आंखों में आज भी उस दिन की तस्वीरें किसी डरावने सपने की तरह घूमती हैं। दूसरों की जान बचाते हुए खुद शहीद हो गए परिवार और चश्मदीदों के मुताबिक, जब हमला हुआ तो सुशील खुद बचने के बजाय वहां फंसे लोगों को निकालने में जुट गए। यही उनका स्वभाव था—दूसरों की मदद करना। ऑस्टिन बताते हैं कि पापा उन्हें फोन करने वाले थे, लेकिन पास खड़े एक व्यक्ति ने मना किया कि फोन की आवाज आतंकियों को आकर्षित कर सकती है।सुशील ने कई लोगों को सुरक्षित निकाल दिया, लेकिन जब उनकी बारी आई, तो आतंकियों की गोली ने उनके सपनों को खत्म कर दिया। एक साल बाद भी नहीं भरे जख्म सुशील की पत्नी जेनिफर आज भी उस सदमे से बाहर नहीं आ पाई हैं। उनकी आंखों के आंसू अब तक नहीं सूखे हैं।घर का माहौल आज भी खामोश है, और हर छोटी आवाज उन्हें उस दिन की गोलियों की याद दिला देती है। अब बेटे ऑस्टिन के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने करियर से ज्यादा अपनी मां को संभालने की है। अधूरे रह गए सपने परिवार के मुताबिक, सुशील हमेशा कहते थे कि इंदौर में सुकून से रहेंगे और बेटे को अच्छी पढ़ाई दिलाएंगे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।जिस कश्मीर को वे सुकून की तलाश में गए थे, वहीं से उनकी लाश वापस लौटी। आज एक साल बाद भी यह परिवार सिर्फ इंसाफ का इंतजार कर रहा है। परिवार के बारे में ऐसे बना था कश्मीर ट्रिप का प्लान ऑस्टिन ने बताया कि पहले कहीं और जाने का प्लान था, लेकिन पापा के काम के चलते तारीखें नहीं मिल पा रही थीं।फिर तय हुआ कि ईस्टर सूरत में मनाया जाएगा और वहीं से घूमने जाएंगे। इंदौर से सूरत पहुंचकर परिवार ने दो दिन साथ बिताए और फिर कश्मीर जाने का प्लान बना।सूरत से वे चंडीगढ़ पहुंचे, शॉपिंग की और फिर कश्मीर के लिए रवाना हुए। पूरा परिवार इस ट्रिप को लेकर बेहद उत्साहित था।ऑस्टिन ने इस यात्रा के हर पल को फोटो और वीडियो में कैद किया था—लेकिन उन्हें क्या पता था कि ये यादें जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन जाएंगी। 👉 देश-विदेश की ऐसी ही संवेदनशील और सच्ची खबरों के लिए विजिट करें: deshharpal.com
आईवियर कंपनी Lenskart को लेकर “तिलक और कलावा” विवाद अब कई राज्यों में फैल चुका है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ यह मामला महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ तक पहुंच गया, जहां अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन देखने को मिले। क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ जगहों पर आरोप लगे कि Lenskart के स्टोर्स में कर्मचारियों को तिलक लगाने या कलावा पहनने से रोका गया। इस बात के सामने आते ही कई संगठनों और स्थानीय लोगों ने विरोध जताना शुरू कर दिया। स्टोर्स पर पहुंचे प्रदर्शनकारी विरोध के दौरान प्रदर्शनकारी सीधे कंपनी के स्टोर्स तक पहुंचे। वहां उन्होंने कर्मचारियों को तिलक लगाया और कलावा पहनाया। कई जगहों पर नारेबाजी भी हुई, हालांकि प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में रखा। कई राज्यों में बढ़ा असर यह विवाद तेजी से फैलते हुए मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा ट्रेंड कर रहा है और लोग अलग-अलग पक्षों में अपनी राय रख रहे हैं। धीरेंद्र शास्त्री का बयान बागेश्वर धाम के प्रमुख Dhirendra Krishna Shastri ने इस विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर भारतीय परंपराओं का सम्मान नहीं किया जा सकता, तो कंपनी के मालिक “लाहौर में जाकर कंपनी खोल लें।” उनके इस बयान के बाद मामला और ज्यादा गरमा गया है। कंपनी की प्रतिक्रिया का इंतजार फिलहाल Lenskart की ओर से इस विवाद पर कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में कंपनी की पॉलिसी और इस मामले की सच्चाई को लेकर सवाल बने हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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