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केंद्र का दावा: सात वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़े भारत लाए गए, ₹17,874 करोड़ की संपत्ति अटैच

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि पिछले सात वर्षों में 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। सरकार के अनुसार, यह आंकड़ा वर्ष 2004 से 2013 के दौरान हुए प्रत्यर्पण की तुलना में करीब 10 गुना अधिक है। सरकार ने यह भी बताया कि इस अवधि में भगोड़ों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति भी अटैच की गई है। कई तरह के गंभीर मामलों में थे वांछित सरकार के मुताबिक, 2019 से जुलाई 2026 के बीच भारत लाए गए 274 भगोड़ों में विभिन्न गंभीर अपराधों के आरोपी शामिल हैं। इनमें 9 आर्थिक अपराध, 17 आतंकवाद, 42 संगठित अपराध, 62 हत्या, लूट और अन्य हिंसक अपराध, 53 यौन अपराध और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध, 16 मादक पदार्थों की तस्करी, 12 नकली मुद्रा तस्करी, 18 मानव तस्करी और 45 अन्य मामलों में वांछित आरोपी शामिल थे। इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस में भी बढ़ोतरी केंद्र सरकार ने बताया कि हाल के वर्षों में इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112 और 2026 में अब तक 182 रेड नोटिस जारी किए जा चुके हैं। पिछले तीन वर्षों में कुल 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ रेड नोटिस जारी किए गए। प्रत्यर्पण प्रक्रिया को बनाया गया अधिक प्रभावी गृह मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री के मार्गदर्शन में प्रत्यर्पण संबंधी अनुरोधों को अब अधिक पेशेवर तरीके से तैयार किया जा रहा है। संबंधित देशों की कानूनी आवश्यकताओं के अनुरूप दस्तावेज, साक्ष्य और आवश्यक लिखित आश्वासन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे प्रत्यर्पण प्रक्रिया को मजबूती मिली है। पुराने ढांचे पर भी सरकार का बयान सरकार ने दावा किया कि 2004-13 के दौरान भारत का प्रत्यर्पण तंत्र अपेक्षाकृत कमजोर था। उस समय केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियां थीं और आर्थिक भगोड़ों से निपटने के लिए अलग कानून भी उपलब्ध नहीं था। सरकार के अनुसार, जटिल कागजी प्रक्रिया के कारण कई मामलों में विदेशी अदालतों ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध स्वीकार नहीं किए थे। केंद्र ने यह भी कहा कि वर्ष 2018 में Fugitive Economic Offenders Act लागू किया गया, जबकि 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) में संशोधन कर कार्रवाई के दायरे को और मजबूत किया गया। देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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राहुल गांधी बोले- छात्रों को माफी नहीं, सरकार के कामों का जवाब चाहिए; RSS पर भी साधा निशाना

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को छात्रों के मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देश के छात्र कठिन दौर से गुजर रहे हैं और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माफी नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों और कामकाज पर जवाब चाहिए। राहुल गांधी ने यह बातें पूर्व कांग्रेस सांसद वाइको की पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम के दौरान कहीं। “छात्र रोजगार और निष्पक्ष परीक्षा चाहते हैं” राहुल गांधी ने कहा कि देशभर के छात्र रोजगार, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और बेहतर शिक्षा प्रणाली की मांग को लेकर सड़कों पर हैं। उनके अनुसार, युवाओं की प्रमुख चिंता रोजगार के अवसर और निष्पक्ष प्रतियोगी परीक्षाएं हैं। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि प्रधानमंत्री छात्रों को माफ करने जैसी बात क्यों कर रहे हैं, जबकि छात्र अपनी समस्याओं के समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं। RSS पर इतिहास बदलने का आरोप कांग्रेस नेता ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि संगठन देश के इतिहास को बदलने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के लोग अपने इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं करेंगे। राज्यों के सम्मान की भी उठाई बात राहुल गांधी ने कहा कि संविधान भारत को राज्यों का एक संघ मानता है और प्रत्येक राज्य देश की विविधता तथा पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि हर राज्य, उसकी भाषा और संस्कृति के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग भारत की विभिन्न भाषाओं और सांस्कृतिक परंपराओं के महत्व को कम करके आंकने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि देश की ताकत उसकी विविधता में निहित है। देश और राजनीति से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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बेन स्टोक्स ने इंग्लैंड टीम के ‘ड्रिंकिंग कल्चर’ के आरोपों को किया खारिज, बोले- ऐसी कोई समस्या नहीं

लंदन। इंग्लैंड के पूर्व टेस्ट कप्तान बेन स्टोक्स ने इंग्लैंड क्रिकेट टीम में कथित ‘ड्रिंकिंग कल्चर’ की धारणा को खारिज करते हुए कहा है कि सीनियर टीम में शराब से जुड़ी किसी तरह की संस्कृति या समस्या नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह जरूर माना कि यूनाइटेड किंगडम में क्रिकेट और शराब का ऐतिहासिक संबंध रहा है। 35 वर्षीय स्टोक्स ने पूर्व क्रिकेटरों स्टुअर्ट ब्रॉड और जोस बटलर के पॉडकास्ट ‘For The Love of Cricket’ में यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इंग्लैंड की सीनियर टीम को शराब की समस्या से जोड़ना सही नहीं है। एशेज सीरीज के दौरान उठा था विवाद इंग्लैंड क्रिकेट में शराब को लेकर बहस उस समय तेज हुई थी, जब एशेज सीरीज के दौरान कुछ खिलाड़ियों के शराब पीने की खबरें सामने आई थीं। विवाद तब और बढ़ गया था, जब सलामी बल्लेबाज बेन डकेट टीम के मिड-सीरीज ब्रेक के दौरान ऑस्ट्रेलिया के नूसा में कथित तौर पर नशे की हालत में नजर आए थे। इसके अलावा, न्यूजीलैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में जीत के बाद बेन स्टोक्स तेज गेंदबाज गस एटकिंसन के साथ बाहर गए थे। इस दौरान एक नाइटक्लब में हुई घटना के बाद उन्हें अगले टेस्ट मैच से बाहर बैठना पड़ा था। कोचिंग में बनाना चाहते हैं करियर बेन स्टोक्स ने बताया कि वह इस समय लेवल-3 कोचिंग क्वालिफिकेशन पूरा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सक्रिय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी वह खेल से जुड़े रहना चाहते हैं और भविष्य में कोचिंग की भूमिका निभाने की इच्छा रखते हैं। स्टोक्स ने कहा कि उनका लक्ष्य है कि क्रिकेट छोड़ने से पहले कोचिंग की सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर लें, ताकि वह भविष्य में टीमों के साथ प्रभावी भूमिका निभा सकें। जो रूट की कप्तानी को लेकर जताई चिंता स्टोक्स ने इंग्लैंड के नए टेस्ट कप्तान जो रूट को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि रूट हमेशा टीम को खुद से पहले रखते हैं और यही बात उन्हें परेशान करती है। उन्होंने बताया कि कप्तान के रूप में रूट पहले भी खुद पर काफी दबाव लेते थे और वह नहीं चाहते कि दोबारा उन्हें उसी मानसिक दबाव का सामना करना पड़े। बेन स्टोक्स ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में इंग्लैंड के लिए 122 टेस्ट, 114 वनडे और 43 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने आक्रामक ‘बैजबॉल’ शैली से टेस्ट क्रिकेट में नई पहचान बनाई। खेल जगत की ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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जालोर में तेज रफ्तार डंपर की चपेट में आया ढाई साल का मासूम, मौके पर मौत; चालक हिरासत में

जालोर। राजस्थान के जालोर जिले में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में ढाई साल के मासूम की जान चली गई। बागोड़ा थाना क्षेत्र के छाजाला गांव में घर के बाहर खेल रहे बच्चे को तेज रफ्तार डंपर ने कुचल दिया। हादसे के बाद चालक मौके से भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन ग्रामीणों ने उसका पीछा कर पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। घर के बाहर खेल रहा था मासूम जानकारी के अनुसार, यह हादसा मंगलवार सुबह करीब 9:30 बजे हुआ। मासूम मोहम्मद, पिता बिलाल खान, अपने घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान तेज गति से आए डंपर ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना गंभीर था कि बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। ग्रामीणों ने पीछा कर चालक को पकड़ा प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों ने डंपर चालक को रुकने का इशारा किया, लेकिन वह वाहन लेकर भागने लगा। इस पर ग्रामीणों ने उसका पीछा किया और कुछ दूरी पर पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। इकलौता बेटा था मासूम छाजाला गांव के पूर्व सरपंच शरीफ खान ने बताया कि मृतक उनका भांजा था। उन्होंने बताया कि मासूम परिवार का इकलौता बेटा था और उसकी तीन बड़ी बहनें हैं। बच्चे के पिता बिलाल खान मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने डंपर जब्त कर शुरू की जांच बागोड़ा थाना प्रभारी बलदेव राम ने बताया कि परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। डंपर को जब्त कर लिया गया है और चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। राजस्थान और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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IRAN में सेना का बढ़ा दबदबा! सुप्रीम लीडर खामेनेई ने राष्ट्रपति पजशकियान को दी सख्त चेतावनी

IRAN की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को साफ संदेश दिया है कि देश की सरकार को सुरक्षा और सैन्य मामलों में सेना के फैसलों के अनुसार काम करना होगा। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े किसी भी बड़े फैसले का अंतिम अधिकार अब वरिष्ठ सैन्य कमांडर अहमद वाहिदी के पास रहेगा। यानी सुरक्षा से जुड़े मामलों में सरकार का फैसला तभी लागू होगा, जब सेना की मंजूरी होगी। सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के महीनों में ईरान के सामने बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों और क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए सेना की भूमिका और मजबूत की जा रही है। ऐसे समय में सरकार और सैन्य नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। राष्ट्रपति के अधिकारों पर उठे सवाल इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या राष्ट्रपति के अधिकार सीमित किए जा रहे हैं। हालांकि, ईरानी सरकार की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। मध्य पूर्व की राजनीति पर पड़ेगा असर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सुरक्षा मामलों में सेना की भूमिका इसी तरह बढ़ती रही, तो इसका असर केवल ईरान की आंतरिक राजनीति ही नहीं बल्कि पूरे मध्य पूर्व की रणनीतिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दुनिया की नजर बनी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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दिल्ली: नजफगढ़ ड्रेन पर बनेगा नया फुटब्रिज, 2 करोड़ की परियोजना का प्रवेश वर्मा ने किया शुभारंभ

नई दिल्ली। बाहरी दिल्ली के लोगों को बेहतर और सुरक्षित आवागमन की सुविधा देने के उद्देश्य से लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री प्रवेश वर्मा ने सोमवार को उत्तर दिल्ली स्थित नजफगढ़ ड्रेन पर नए पैदल पुल (फुटब्रिज) के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया। करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह फुटब्रिज अगले सात महीनों में तैयार होने की संभावना है। कई इलाकों को मिलेगा सीधा संपर्क नया फुटब्रिज बनने के बाद गुड़ मंडी, राजपुरा, रूप नगर, मुखर्जी नगर और यमुना मार्ग के बीच आवागमन आसान हो जाएगा। इससे विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों, नौकरीपेशा लोगों और स्थानीय निवासियों को ड्रेन पार करने के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक रास्ता मिलेगा। लंबे समय से क्षेत्र के लोग इस पुल की मांग कर रहे थे। नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता दे रही सरकार शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि यह परियोजना दिल्ली सरकार की सुरक्षित और आधुनिक सार्वजनिक आधारभूत ढांचे के विकास की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सरकार नागरिकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए वर्षों से लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने की दिशा में काम कर रही है। राजधानी के पुलों का कराया जा रहा सुरक्षा ऑडिट प्रवेश वर्मा ने कहा कि कुछ महीने पहले हुई एक पुल दुर्घटना के बाद राजधानी में पुलों की नियमित स्ट्रक्चरल ऑडिट की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में पुलों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट नहीं कराया गया, जिसके कारण कई महत्वपूर्ण संरचनाओं की समय पर जांच नहीं हो सकी। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार दिल्ली के सभी पुलों, फ्लाईओवरों और फुटओवर ब्रिजों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट करा रही है। उनका कहना है कि सरकार संभावित जोखिमों को पहले से पहचानकर समय रहते आवश्यक कदम उठा रही है, ताकि राजधानी में सुरक्षित, टिकाऊ और जनहितैषी आधारभूत ढांचा विकसित किया जा सके। दिल्ली और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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तीन राज्यों के उपचुनाव परिणाम: बिहार में प्रशांत किशोर की बड़ी जीत, दतिया कांग्रेस के खाते में, गुजरात में भाजपा ने बरकरार रखी सीट

नई दिल्ली। बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजे घोषित हो गए हैं। बिहार के बांकीपुर में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शानदार जीत दर्ज की है। वहीं, मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया, जबकि गुजरात की मांजलपुर सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जीत हासिल की। तीनों विधानसभा सीटों पर 30 जुलाई को मतदान हुआ था, जिसके बाद सोमवार को मतगणना पूरी हुई। बांकीपुर में प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत बिहार की बांकीपुर सीट पर जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने 19,324 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें 64,151 वोट (49.23%) मिले, जबकि भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 44,827 वोट (34.40%) प्राप्त हुए। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की रेखा कुमारी 14,273 वोट (10.95%) के साथ तीसरे स्थान पर रहीं। दिलचस्प बात यह रही कि भाजपा और राजद को मिले कुल वोट 59,100 रहे, जो अकेले प्रशांत किशोर के वोटों से 5,051 कम हैं। बांकीपुर सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पारंपरिक सीट रही है। उनके राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यहां उपचुनाव कराया गया। मतगणना के दौरान वेबसाइट पर दिखी तकनीकी गड़बड़ी मतगणना के दौरान चुनाव आयोग की वेबसाइट पर राउंड की संख्या को लेकर तकनीकी गड़बड़ी भी देखने को मिली। पहले 31 राउंड की गणना दिखाई गई, फिर संख्या बढ़कर 32 और 36 राउंड तक पहुंच गई। बाद में वेबसाइट पर दोबारा 32 राउंड की जानकारी प्रदर्शित की गई। दतिया में कांग्रेस ने भाजपा से छीनी सीट मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने 66,757 वोट (42.39%) हासिल कर जीत दर्ज की। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को 60,741 वोट (38.57%) मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 6,016 वोट रहा। इस सीट पर भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा था। चुनाव में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दामोदर यादव ‘मंडल’ ने भी 22,527 वोट (14.30%) हासिल कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया। मांजलपुर में भाजपा की बड़ी जीत गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार सतेन्द्रभाई (सतीश) पटेल ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को 30,630 वोटों के बड़े अंतर से हराकर जीत दर्ज की। इस जीत के साथ भाजपा ने सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। तीनों राज्यों के उपचुनाव परिणामों ने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय राजनीति में नए संकेत दिए हैं। खासकर बिहार में प्रशांत किशोर की जीत को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। देश और राजनीति की हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत पर खंडवा में जश्न, कार्यकर्ताओं ने निकाली रैली और की आतिशबाजी

खंडवा। दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद सोमवार को खंडवा में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उत्साह के साथ जीत का जश्न मनाया। कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य किया, एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी और आतिशबाजी कर खुशी का इजहार किया। जश्न की शुरुआत गांधी भवन से हुई, जहां से कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विजय रैली निकाली। यह रैली केवलराम पेट्रोल पंप चौराहे से होते हुए घंटाघर पहुंची। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने “कांग्रेस जिंदाबाद”, “लोकतंत्र की जीत” और “जनता की जीत” जैसे नारे लगाए। भगवान गणेश का लिया आशीर्वाद रैली के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता सराफा स्थित भगवान श्री गणेश मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और कांग्रेस की निरंतर सफलता की कामना की। मंदिर में दर्शन के बाद कार्यकर्ता दोबारा चौराहे पर पहुंचे, जहां देर तक ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न और आतिशबाजी का सिलसिला चलता रहा। कांग्रेस ने जीत को बताया लोकतंत्र की विजय कांग्रेस शहर अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी ने कहा कि दतिया उपचुनाव का परिणाम प्रदेश की जनता के कांग्रेस की नीतियों, जनहित के मुद्दों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास को दर्शाता है। उनके अनुसार, यह केवल एक विधानसभा सीट की जीत नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता की भावनाओं की जीत है। उन्होंने कहा कि इस सफलता से आगामी चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं में नया उत्साह और ऊर्जा का संचार हुआ है। सिंगोट गांव में कई लोगों ने थामा कांग्रेस का दामन दतिया उपचुनाव के नतीजों का असर खंडवा जिले के पंधाना विधानसभा क्षेत्र में भी देखने को मिला। ग्राम सिंगोट में करीब 20 से 25 लोगों ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। जिला कांग्रेस अध्यक्ष (ग्रामीण) उत्तमपाल सिंह पुरनी ने नए सदस्यों को कांग्रेस का गमछा पहनाकर पार्टी में शामिल कराया। कांग्रेस नेताओं ने इसे संगठन के विस्तार और पार्टी के प्रति बढ़ते जनसमर्थन का संकेत बताया। मध्य प्रदेश और देश की ताजा राजनीतिक खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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कॉकरोच जनता पार्टी की 5 अगस्त से दो दिवसीय रणनीति बैठक, देशभर में निकाला जाएगा ‘लिसनिंग टूर’

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) 5 अगस्त से छत्रपति संभाजीनगर में दो दिवसीय रणनीति बैठक आयोजित करेगी। पार्टी के अनुसार, इस बैठक में संस्थापक, प्रवक्ता और संगठन से जुड़े प्रमुख सदस्य हिस्सा लेंगे। बैठक में संगठन की आगामी रणनीति और देशभर में युवाओं से संवाद बढ़ाने की योजना पर चर्चा होगी। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि उसका फिलहाल किसी राजनीतिक दल के रूप में चुनावी राजनीति में उतरने का इरादा नहीं है। बैठक के बाद CJP देशभर में युवाओं की समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने के लिए ‘लिसनिंग टूर’ शुरू करेगी। अभिजीत दीपके ने छात्र आंदोलन पर लगाए आरोप CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुए शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन में बाहरी लोगों की घुसपैठ कराई गई थी, जिसके कारण 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हिंसा हुई। उनका आरोप है कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए बाहर से लोगों को भेजा गया और इसमें दिल्ली पुलिस की मिलीभगत थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित एजेंसियों की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। छात्रवृत्ति और शिक्षा को लेकर दी सफाई अभिजीत दीपके ने अपनी उच्च शिक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें बोस्टन यूनिवर्सिटी से छात्रवृत्ति मिली थी, जबकि शेष खर्च के लिए उन्होंने शिक्षा ऋण लिया था, जिसकी अदायगी अभी जारी है। गौरतलब है कि हाल ही में एक आरटीआई कार्यकर्ता ने उनके परिवार की संपत्ति और विदेश में पढ़ाई के लिए जुटाए गए धन की जांच की मांग की थी। दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय पर उठाए सवाल दीपके ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान हिंसा और पत्थरबाजी हुई, तो सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी। उन्होंने दिल्ली पुलिस के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में संदिग्ध लोगों की मौजूदगी की बात कही गई थी। उनके अनुसार, यह कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। छात्रों की कानूनी सहायता के लिए बनाया गया फंड इससे पहले 27 जुलाई को CJP ने पेपर लीक आंदोलन के बाद विभिन्न मामलों का सामना कर रहे छात्रों की कानूनी सहायता के लिए लीगल डिफेंस फंड बनाने की घोषणा की थी। पार्टी के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस फंड में 1 करोड़ रुपये देने की घोषणा की थी और देशभर के वकीलों से भी इसमें सहयोग की अपील की थी। CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा था कि केंद्र सरकार के आश्वासन के बावजूद कई छात्रों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने बताया कि संगठन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के संपर्क में है। देश और राजनीति से जुड़ी हर बड़ी खबर के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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सरकार ने पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर बढ़ाया विंडफॉल टैक्स, 3 अगस्त से नई दरें लागू

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नई दरें 3 अगस्त से लागू हो गई हैं। सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू परिस्थितियों को देखते हुए हर 15 दिन में इन टैक्स दरों की समीक्षा करती है। डीजल और ATF पर सबसे ज्यादा बढ़ी ड्यूटी नई अधिसूचना के अनुसार, डीजल के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को 15.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 25.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। वहीं, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट ईंधन के निर्यात पर ड्यूटी 14.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इसके अलावा पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला विंडफॉल टैक्स भी 2.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 3.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। घरेलू उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा असर वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी केवल निर्यात पर लागू होगी। देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली मौजूदा एक्साइज ड्यूटी में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। यानी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए ईंधन पर लागू कर व्यवस्था पहले जैसी ही रहेगी। क्यों बढ़ाया गया विंडफॉल टैक्स? सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि तेल कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए घरेलू जरूरतों की अनदेखी कर निर्यात को प्राथमिकता न दें। गौरतलब है कि सरकार ने 27 मार्च से डीजल और ATF के निर्यात पर विंडफॉल टैक्स लागू किया था। इसके बाद 16 मई से पेट्रोल के निर्यात को भी इस दायरे में शामिल कर लिया गया था। देश-दुनिया, बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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Supreme Court on CJP Protest: प्रदर्शन पर रोक से इनकार, ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर का दावा

दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों की रोजी-रोटी का मुद्दा चर्चा में रहा। अदालत ने फिलहाल प्रदर्शन रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया। वहीं, व्यापारियों की ओर से दावा किया गया कि प्रदर्शन और उससे जुड़ी पाबंदियों के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने यह मामला रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क और आसपास के बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई। उनका कहना था कि बाजारों में लोगों की आवाजाही बाधित होने से छोटे दुकानदारों और दूसरे कारोबारियों को परेशानी हो सकती है। CJI की टिप्पणी: किसी के लिए प्रदर्शन, किसी के लिए मूंगफली बेचना जरूरी सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति के लिए प्रदर्शन करना जरूरी हो सकता है, जबकि किसी दूसरे के लिए मूंगफली बेचकर अपना परिवार चलाना महत्वपूर्ण है। CJI सूर्यकांत ने भी छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति का जिक्र किया। त्योहारों के समय दुकानदारों की कमाई बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में यदि बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर उनकी रोजाना की आमदनी पर पड़ सकता है। अदालत की टिप्पणियों से साफ है कि इस मामले में केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि आम लोगों की आजीविका और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। Delhi Business Loss: रोजाना ₹200 करोड़ के नुकसान का दावा व्यापारियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कनॉट प्लेस और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में प्रदर्शन के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव बड़े कारोबारियों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ सकता है। बाजार में ग्राहकों की संख्या कम होने या आवाजाही प्रभावित होने से उनकी कमाई पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि, ₹200 करोड़ का आंकड़ा व्यापारियों की ओर से पेश किया गया दावा है। इसे वास्तविक नुकसान का प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। Central Park को बंद करने का मुद्दा भी उठा सुनवाई के दौरान कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने से जुड़े प्रशासनिक फैसले का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि इस कदम से आसपास के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि किसी प्रतिबंध के कारण कारोबार या लोगों की आजीविका को अनुचित नुकसान पहुंचता है, तो उचित राहत देने के सवाल पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, तत्काल सुनवाई में प्रदर्शन पर रोक लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। CJP Protest: क्यों किया गया प्रदर्शन का ऐलान? CJP ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च और प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह कदम उठाने की बात कही थी। प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था, बाजारों में आवाजाही और कारोबार पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार किया था, जबकि दिल्ली पुलिस ने कानून के अनुसार जरूरी कदम उठाने की बात कही थी। Supreme Court Hearing: अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तत्काल आदेश के जरिए निपटाने के बजाय दशहरा अवकाश के बाद 26 या 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध किए जाने का संकेत दिया। फिलहाल, प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया गया है। आगे की सुनवाई में प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और व्यापारियों की आजीविका से जुड़े पहलुओं पर चर्चा महत्वपूर्ण रहेगी। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि विरोध दर्ज कराने के अधिकार और आम लोगों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अदालत की अगली सुनवाई से इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi Canada Tour दिसंबर में होगी अहम बातचीत, Trade Deal से दोनों देशों को उम्मीद

PM Modi 11 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर जा सकते हैं। इस यात्रा को भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील यानी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत होने की संभावना है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के बीच कनाडा भी अपने कारोबार के लिए नए बाजार तलाश रहा है। कनाडा लंबे समय से अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर रहा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार के साथ व्यापार बढ़ाना उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। दूसरी ओर, भारत की भी कोशिश है कि दूसरे देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़े और भारतीय कारोबारियों को नए अवसर मिलें। India-Canada Trade Deal पर क्यों है सबकी नजर? भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को लेकर काफी उम्मीदें हैं। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाना, निवेश के अवसर खोलना और कारोबार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है। अगर ट्रेड डील पर सहमति बनती है, तो दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार में कारोबार बढ़ाने का मौका मिल सकता है। इससे कृषि, ऊर्जा, तकनीक, शिक्षा और कई दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में प्रस्तावित समझौता इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। Trump के Tariff दबाव के बीच कनाडा क्यों खोज रहा नए बाजार? डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। इसका असर उन देशों पर भी पड़ता है, जिनका कारोबार अमेरिकी बाजार पर ज्यादा निर्भर है। कनाडा भी अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत इस लिहाज से कनाडा के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। भारत की बड़ी आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था और अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ती मांग कनाडाई कंपनियों को आकर्षित करती है। हालांकि, भारत के साथ व्यापार बढ़ाना केवल अमेरिका पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच निवेश और कारोबारी सहयोग बढ़ने से लंबे समय में आर्थिक रिश्तों को भी मजबूती मिल सकती है। Energy और Technology सेक्टर में भी बढ़ सकते हैं मौके भारत और कनाडा के बीच कारोबार की संभावनाएं केवल ट्रेड डील तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है। कनाडा के पास प्राकृतिक संसाधन और ऊर्जा क्षेत्र में अनुभव है, जबकि भारत तेजी से बढ़ता हुआ बड़ा बाजार है। दोनों देश अपनी जरूरतों और क्षमताओं के आधार पर साझेदारी को आगे बढ़ा सकते हैं। व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ने से कंपनियों और निवेशकों को भी सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक फायदा समझौते की शर्तों और उसके लागू होने पर निर्भर करेगा। पुराने तनाव के बाद रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कूटनीतिक तनाव भी देखने को मिला। इस वजह से दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को लेकर कई सवाल उठे थे। अब व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे साझा हितों पर बातचीत बढ़ाना दोनों देशों के लिए अहम हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। फिर भी, व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी। इसलिए इस दौरे के दौरान होने वाली बातचीत और आधिकारिक घोषणाओं पर सबकी नजर रहेगी। भारत और कनाडा के लिए क्या होंगे इसके मायने? भारत-कनाडा ट्रेड डील आगे बढ़ती है, तो इससे दोनों देशों के कारोबारियों को नए बाजार मिल सकते हैं। निवेश बढ़ने, व्यापारिक अवसर पैदा होने और अलग-अलग क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत होने की संभावना भी रहेगी। कनाडा के लिए भारत के साथ व्यापार बढ़ाना अपने आर्थिक रिश्तों में विविधता लाने का अवसर है। वहीं, भारत के लिए यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अपनी पहुंच मजबूत करने का एक और रास्ता हो सकता है। अब नजर 11 दिसंबर की प्रस्तावित यात्रा पर है। क्या प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के नेतृत्व के बीच ट्रेड डील को लेकर कोई ठोस सहमति बन पाएगी? इसका जवाब दोनों देशों की बातचीत और आगे होने वाली आधिकारिक घोषणाओं से ही साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Starlink

Reliance-Starlink Controversy: मस्क के आरोपों पर अंबानी की कंपनी का जवाब, कहा- Competition से नहीं डरते

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर रिलायंस (Reliance) इंडस्ट्रीज और एलन मस्क की कंपनी Starlink के बीच चर्चा तेज हो गई है। स्टारलिंक की भारत में एंट्री में देरी को लेकर मस्क ने सवाल उठाए थे। अब मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह प्रतिस्पर्धा से कभी नहीं डरी और भारत में स्टारलिंक का स्वागत करती है। Reliance के इस बयान के बाद देश के टेलीकॉम और सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में मुकाबले को लेकर चर्चा बढ़ गई है। एक तरफ एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ जियो भी सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। Reliance ने Starlink को लेकर क्या कहा? Reliance इंडस्ट्रीज ने अपने बयान में कहा कि कंपनी ने हमेशा प्रतिस्पर्धा का सामना किया है और वह नई कंपनियों के बाजार में आने से नहीं घबराती। कंपनी के मुताबिक, भारत में कारोबार करने वाली सभी कंपनियों को देश के नियमों का पालन करना चाहिए। रिलायंस ने स्टारलिंक का स्वागत करते हुए यह भी संकेत दिया कि सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में मुकाबला ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है। कंपनी का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवाओं की गुणवत्ता और ग्राहकों के अनुभव में सुधार की गुंजाइश बनती है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर कई कंपनियां तैयारी कर रही हैं। Elon Musk ने Mukesh Ambani पर क्यों उठाए सवाल? एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित कंपनी की भारतीय बाजार में एंट्री को मुश्किल बना रहे हैं। इस विवाद में रिलायंस और मुकेश अंबानी का नाम भी सामने आया। मस्क का कहना है कि स्टारलिंक जैसी कंपनियों को भारतीय बाजार में काम करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि ग्राहकों के पास इंटरनेट सेवा चुनने के अधिक विकल्प हों। हालांकि, इन आरोपों से यह साबित नहीं होता कि स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी के पीछे रिलायंस की भूमिका है। इसके लिए किसी ठोस प्रमाण की जरूरत होगी। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनियों को लाइसेंस के साथ-साथ दूसरी जरूरी मंजूरियां भी हासिल करनी होती हैं। Jio भी Satellite Internet Market में उतरने को तैयार Reliance जियो ने साल 2016 में भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा था। सस्ते डेटा और किफायती सेवाओं के कारण कंपनी ने तेजी से ग्राहक जोड़े और देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में अपनी जगह बनाई। अब जियो की नजर सैटेलाइट इंटरनेट बाजार पर भी है। इस तकनीक के जरिए उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराना मुश्किल है। दूसरी तरफ, स्टारलिंक अपने सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए भारत में इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। Starlink की India Launch में देरी की वजह क्या है? भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना केवल लाइसेंस मिलने तक सीमित नहीं है। कंपनियों को सुरक्षा मानकों, तकनीकी आवश्यकताओं और सरकारी नियमों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होती हैं। स्टारलिंक के अलावा जियो और भारती समूह से जुड़ी Eutelsat OneWeb भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन कंपनियों की सेवाओं की शुरुआत जरूरी मंजूरियों और नियामकीय शर्तों पर निर्भर करती है। इसलिए स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी को किसी एक कंपनी से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति समझने के लिए सरकारी मंजूरियों और संबंधित कंपनियों की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है। आम लोगों को क्या होगा फायदा? अगर भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू होती हैं, तो इसका फायदा खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिल सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों और उन जगहों पर, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है, यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल इंटरनेट की कीमत, स्पीड और उपलब्धता का होगा। स्टारलिंक और जियो की सेवाएं कितनी किफायती होंगी, यह उनकी व्यावसायिक योजनाओं और लॉन्च के समय घोषित किए जाने वाले प्लान पर निर्भर करेगा। अब आगे क्या? रिलायंस के बयान से साफ है कि कंपनी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। वहीं, एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करने का इंतजार कर रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जरूरी सरकारी प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और कंपनियां ग्राहकों के लिए अपनी सेवाएं कब पेश करती हैं। अगर बाजार में कई कंपनियां उतरती हैं, तो भारतीय ग्राहकों को इंटरनेट के नए विकल्प मिल सकते हैं। फिलहाल, रिलायंस और स्टारलिंक के बीच जारी यह बहस भारत के तेजी से बदलते डिजिटल और टेलीकॉम बाजार की एक अहम तस्वीर पेश करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Weather

Weather Update राजस्थान में बारिश के साथ गिरे ओले, Kedarnath-Badrinath में बर्फबारी

देश के कई हिस्सों में मौसम (Weather) का मिजाज बदल गया है। राजस्थान में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है, जबकि उत्तराखंड के केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी देखने को मिली है। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बारिश को लेकर अलर्ट की खबर है। मौसम में आए इस बदलाव से कहीं गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है, तो कहीं किसानों और यात्रियों की चिंता बढ़ सकती है। Rajasthan Weather: बारिश के साथ ओलावृष्टि राजस्थान के कई इलाकों में बारिश के साथ ओले गिरने से मौसम सुहावना होने के साथ ठंडा भी हो गया है। अचानक बदले मौसम का असर आम जनजीवन पर पड़ सकता है। जिन इलाकों में ओलावृष्टि हुई है, वहां खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका भी रहती है। ऐसे में किसानों को स्थानीय मौसम विभाग की सलाह पर ध्यान देना चाहिए। बारिश और तेज हवाओं के दौरान लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। Kedarnath-Badrinath में बर्फबारी, पहाड़ों पर बढ़ी ठंड उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम ने अलग ही रंग दिखाया है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी के बाद ठंड बढ़ गई है। पहाड़ों पर मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए यहां जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यात्रा की तैयारी सावधानी से करनी चाहिए। खासतौर पर धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले लोगों को सड़क की स्थिति, मौसम का पूर्वानुमान और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए। UP-Bihar Rain Alert: इन राज्यों में भी बदल सकता है मौसम राजस्थान और उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना को लेकर अलर्ट की खबर सामने आई है। बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि, बारिश का असर हर जिले में एक जैसा नहीं होगा। इसलिए अपने इलाके के लिए मौसम विभाग की ताजा चेतावनी जरूर देखें। किसानों और आम लोगों के लिए जरूरी सलाह बदलते मौसम को देखते हुए कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है। आंधी या बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों में रुकने से बचें। किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें। वहीं, पहाड़ी इलाकों में जाने वाले यात्री मौसम और रास्तों की स्थिति की जानकारी पहले ही हासिल कर लें। Weather Update Today: आगे कैसा रहेगा मौसम? अक्टूबर के मध्य में बारिश और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी ने मौसम का रुख बदल दिया है। राजस्थान में ओलावृष्टि और उत्तराखंड में बर्फ गिरने के बीच दूसरे राज्यों के लोगों की नजर भी बारिश के पूर्वानुमान पर है। मौसम से जुड़ी योजनाएं बनाने से पहले अपने शहर का ताजा अपडेट देखना बेहतर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Parliament

Parliament Special Session: इसी महीने बुलाया जा सकता है संसद का सत्र, लोकसभा सीटें बढ़ाने पर नजर

संसद (Parliament) के गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज होने की चर्चा है। केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इस सत्र में लोकसभा की सीटें बढ़ाने, परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों पर आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक विशेष सत्र की तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार इस बार जरूरी समर्थन जुटा पाएगी? अप्रैल 2026 में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला था। ऐसे में सरकार के सामने अब राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की चुनौती है। लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की चर्चा फिलहाल लोकसभा में 543 निर्वाचित सीटें हैं। प्रस्तावित योजना के तहत इनकी संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने की बात सामने आई है। इस बदलाव का संबंध महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया से भी जोड़ा जा रहा है। अगर लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी होती है, तो संसदीय क्षेत्रों और राज्यों के प्रतिनिधित्व में बदलाव हो सकता है। हालांकि, सीटों की अंतिम संख्या और उनके बंटवारे को लेकर स्थिति विधेयक के प्रावधानों तथा संवैधानिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। Delimitation Bill क्या है और इससे क्या बदलेगा? परिसीमन यानी Delimitation का मतलब लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का दोबारा निर्धारण करना है। इसके जरिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया जा सकता है। यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि परिसीमन का असर संसद में अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक भागीदारी पर पड़ सकता है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने चिंता जताई है कि आबादी के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होने से उनका मौजूदा प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, सरकार की प्रस्तावित योजना में लोकसभा की सीटें बढ़ाने का मुद्दा शामिल है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए प्रस्ताव में राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़ी चिंताओं का किस तरह समाधान किया जाता है। महिला आरक्षण 2029 से लागू करने की तैयारी? महिला आरक्षण भी इस पूरे मामले का एक अहम हिस्सा है। संसद ने 2023 में महिला आरक्षण से जुड़ा कानून पारित किया था। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि, इस कानून के क्रियान्वयन को जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। इसी वजह से परिसीमन और संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है। अप्रैल में क्यों पास नहीं हो पाया था बिल? अप्रैल 2026 में लोकसभा में संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। इसके बावजूद जरूरी विशेष बहुमत नहीं मिल सका और विधेयक पारित नहीं हुआ। संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई मतों की जरूरत होती है। कुछ संविधान संशोधनों के लिए कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से मंजूरी लेना भी जरूरी होता है। यानी सरकार के लिए केवल सांसदों की साधारण बहुमत संख्या पर्याप्त नहीं होगी। उसे संवैधानिक नियमों के मुताबिक जरूरी समर्थन हासिल करना होगा। DMK समेत दूसरे दलों से संपर्क की चर्चा मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सरकार विधेयकों के समर्थन में राजनीतिक दलों से बातचीत कर रही है। इसमें डीएमके (DMK) और कुछ छोटे दलों से संपर्क किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन दलों के अंतिम रुख को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है। विपक्षी दलों की प्रमुख चिंताओं में परिसीमन की प्रक्रिया, राज्यों का प्रतिनिधित्व और प्रस्तावित बदलावों पर व्यापक चर्चा शामिल है। ऐसे में विशेष सत्र बुलाए जाने पर संसद में इस मुद्दे पर बहस तेज हो सकती है। कब हो सकता है संसद का Special Session? मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है। 26 और 27 अक्टूबर को प्रस्तावित BRICS Parliamentary Forum के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए सत्र की तारीखें तय किए जाने की संभावना भी जताई गई है। लेकिन अभी तक विशेष सत्र का आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है। इसलिए तारीखों और विधेयकों को लेकर सामने आ रही जानकारियों को संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अब सरकार के सामने क्या चुनौती है? सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं—पहली, विधेयकों के लिए जरूरी संवैधानिक समर्थन जुटाना और दूसरी, परिसीमन को लेकर राज्यों की चिंताओं पर सहमति बनाना। अगर विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी, महिला आरक्षण और राज्यों के प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे फिर से चर्चा के केंद्र में आ सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा और राजनीतिक दलों के रुख पर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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