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इंदौर में कांग्रेस नेता अनवर कादरी फर्जी आर्म्स लाइसेंस मामले में गि

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में सदर बाजार थाना पुलिस ने कांग्रेस नेता अनवर डकैत उर्फ अनवर कादरी को कथित फर्जी हथियार लाइसेंस मामले में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से इस मामले में फरार था। उसके खिलाफ पहले से 27 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज बताए गए हैं। पुलिस ने एसीपी अशोक जादौन के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए गुरुवार शाम सदर बाजार क्षेत्र से अनवर कादरी को गिरफ्तार किया। फर्जी आर्म्स लाइसेंस का आरोप पुलिस के मुताबिक, फरवरी 2025 में सदर बाजार थाना क्षेत्र में अवैध हथियार के साथ मारपीट की घटना के बाद अनवर कादरी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान यह सामने आया कि जिस बंदूक का उपयोग किया जा रहा था, उसका लाइसेंस कथित रूप से फर्जी था और उसे जम्मू-कश्मीर से बनवाया गया था। पुलिस का कहना है कि हाल ही में आरोपी एक अन्य मामले में जमानत पर जेल से बाहर आया था, जिसके बाद उसे इस प्रकरण में गिरफ्तार किया गया। कई गंभीर मामलों में दर्ज हैं केस पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अनवर कादरी के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, मारपीट, धमकी, आर्म्स एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं सहित कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। अधिकारियों के अनुसार उसके खिलाफ कुल 27 से अधिक मामले विभिन्न थानों में दर्ज हैं। पहले भी विवादों में रहा नाम अनवर कादरी का नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है। जून महीने में एक वीडियो वायरल होने के बाद उस पर कुछ युवकों ने गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं, इससे पहले वह कथित लव जिहाद फंडिंग मामले में भी जांच और कानूनी कार्रवाई का सामना कर चुका है। 2011 में जानलेवा हमले के मामले में हुई थी सजा वर्ष 2011 में एक जानलेवा हमले के मामले में अदालत ने अनवर कादरी, उसके भाई और एक अन्य आरोपी को एक-एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। यह मामला वर्ष 2009 में इंदौर के आजाद नगर क्षेत्र में हुई हमले की घटना से जुड़ा था। डकैती के मामले के बाद पड़ा ‘अनवर डकैत’ नाम पुलिस के अनुसार वर्ष 1996 में उज्जैन के महाकाल थाना क्षेत्र में दर्ज डकैती के एक मामले के बाद अनवर कादरी को “अनवर डकैत” के नाम से पहचान मिलने लगी। बाद के वर्षों में भी उसके खिलाफ मारपीट, धमकी और अन्य मामलों में कई प्रकरण दर्ज हुए। अनवर कादरी इंदौर नगर निगम में तीन बार पार्षद रह चुका है, जबकि उसकी पत्नी भी दो बार पार्षद चुनी जा चुकी हैं। वह कांग्रेस संगठन में शहर महामंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुका है। फिलहाल पुलिस फर्जी आर्म्स लाइसेंस मामले में उससे पूछताछ कर रही है और जांच आगे बढ़ाई जा रही है। मध्य प्रदेश और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करेंdeshharpal.com
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छत्तीसगढ़ की दो बेटियां जूनियर एशिया कप-2026 में दिखाएंगी दम, भारतीय हॉकी टीम में मधु सिदार और गीता यादव का चयन

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है कि खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (KISCE), बिलासपुर की दो महिला हॉकी खिलाड़ी मधु सिदार और गीता यादव का चयन जूनियर एशिया कप-2026 के लिए भारतीय टीम में हुआ है। दोनों खिलाड़ी आगामी 30 अगस्त से 13 सितंबर तक चीन के मोकी में आयोजित होने वाले टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। दोनों खिलाड़ियों के चयन पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने उन्हें शुभकामनाएं देते हुए बेहतर प्रदर्शन की कामना की है। किसान परिवार की बेटी हैं मधु सिदार जशपुर जिले के कांसाबेल विकासखंड स्थित पोंगरो गांव की रहने वाली मधु सिदार किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके माता-पिता खेती-किसानी करते हैं। मधु ने अपने खेल करियर में सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप, स्कूल नेशनल और इंटर जोन चैंपियनशिप जैसी कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। उन्होंने रायपुर में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था। अप्रैल 2026 से वह बेंगलुरु में भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा हैं। गीता यादव को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव कबीरधाम जिले के बोडला की रहने वाली गीता यादव ने हॉकी की शुरुआती ट्रेनिंग कोच शिवा चौहान से ली थी। गीता इससे पहले नीदरलैंड, बेल्जियम, अर्जेंटीना तथा इंग्लैंड-स्कॉटलैंड दौरे पर भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अब जूनियर एशिया कप-2026 के लिए टीम में चयन के साथ उन्हें एक और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है। खेल विभाग ने दी बधाई खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव यशवंत कुमार और संचालक तनुजा सलाम ने भी दोनों खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी हैं। वर्तमान में दोनों खिलाड़ी बिलासपुर स्थित प्रदेश की पहली आवासीय खेल अकादमी में वरिष्ठ प्रशिक्षक राकेश टोप्पो और हेड कोच अजीत लकड़ा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं। छत्तीसगढ़ की इन दोनों खिलाड़ियों का भारतीय टीम में चयन राज्य के खेल विकास और प्रतिभाओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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सितंबर से देशभर में ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान चलाएगी CJP, अभिजीत दीपके बोले- बेरोजगारी और महंगी शिक्षा होंगे मुख्य मुद्दे

छत्रपति संभाजीनगर। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि उनकी संस्था सितंबर से देशभर में ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान शुरू करेगी। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत गांवों और शहरों में जाकर युवाओं से संवाद किया जाएगा तथा बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। गुरुवार को संभाजीनगर में आयोजित बैठक के दौरान दीपके ने कहा कि देश में बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख मुद्दा बनाया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था मुनाफे का माध्यम बन गई है, जिसे बदलने की जरूरत है। CJP चुनाव नहीं लड़ेगी, प्रेशर ग्रुप के तौर पर करेगी काम अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि कॉकरोच जनता पार्टी चुनावी राजनीतिक दल नहीं बनेगी। उनके अनुसार, संगठन लोकतांत्रिक संस्थाओं और शासन व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक पब्लिक प्रेशर ग्रुप के रूप में काम करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन का उद्देश्य जनता की आवाज को प्रभावी तरीके से सामने लाना और जनहित से जुड़े मुद्दों पर दबाव बनाना है। अभियान के प्रमुख मुद्दे दीपके के अनुसार, ‘क्या बोलती पब्लिक’ अभियान के दौरान इन विषयों पर विशेष फोकस रहेगा— नेशनल वर्किंग कमेटी का गठन बैठक के दौरान CJP ने अपनी नेशनल वर्किंग कमेटी के सदस्यों की भी घोषणा की। संगठन ने बताया कि अगले छह महीनों में विभिन्न राज्यों में समन्वय समितियों के साथ लोकसभा और शहर स्तर पर भी संगठनात्मक इकाइयों का गठन किया जाएगा। जंतर-मंतर आंदोलन की हुई समीक्षा दीपके ने बताया कि बैठक में जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन की समीक्षा के साथ-साथ ई-20 पेट्रोल, शिक्षा व्यवस्था, संगठन विस्तार और भविष्य के आंदोलनों की रणनीति पर भी चर्चा की गई। गौरतलब है कि NEET पेपर लीक मामले को लेकर CJP ने 20 जून से 25 जुलाई तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक धरना दिया था। बाद में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद संगठन ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की थी। सोशल मीडिया अभियान से शुरू हुई थी CJP अभिजीत दीपके ने पहले भी कहा था कि देश को नए राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि एक मजबूत प्रेशर ग्रुप की जरूरत है। CJP की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में हुई थी। बाद में यह छात्र और युवा मुद्दों पर सक्रिय एक संगठित अभियान के रूप में सामने आया, जिसने शिक्षा और रोजगार जैसे विषयों पर अपनी गतिविधियां तेज कीं। देश और राजनीति से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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मोहन भागवत बोले- Gen-Z और Gen Alpha सबसे ज्यादा देशभक्त, संवाद की कमी से हुए आंदोलन

मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने गुरुवार को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में Gen-Z और Gen Alpha के युवाओं से संवाद किया। करीब एक घंटे तक चले इस संवाद में उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी की तुलना में अधिक देशभक्त और ईमानदार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं की बात सुनना जरूरी है और संवाद की कमी ही कई बार आंदोलनों की वजह बनती है। भागवत ने यह संबोधन इंडिया इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (IIMUN) की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिया। कार्यक्रम में 11 से 19 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 2,000 छात्र-छात्राएं शामिल हुए। संवाद की कमी से आंदोलन की नौबत आई मोहन भागवत ने कहा कि जब बातचीत सफल नहीं होती, तब आंदोलन का रास्ता अपनाया जाता है। उनके अनुसार यदि समय रहते संवाद हो जाए, तो कई विवाद टाले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन भी संवाद का एक माध्यम है और उसे इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए। Gen-Z सवाल पूछती है, जवाब भी चाहती है भागवत ने कहा कि पहले की पीढ़ी बड़े-बुजुर्गों की बात बिना सवाल किए मान लेती थी, लेकिन आज की युवा पीढ़ी हर विषय पर सवाल पूछती है और तर्कसंगत जवाब चाहती है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल उत्तर ही नहीं, बल्कि विश्वास और अपनापन भी चाहिए। आंदोलन को देशविरोध से न जोड़ें RSS प्रमुख ने कहा कि यदि युवा किसी मुद्दे पर आंदोलन कर रहे हैं, तो उन्हें देशविरोधी नहीं कहा जाना चाहिए। उनके अनुसार वे देश की अगली पीढ़ी हैं और उनकी चिंताओं को गंभीरता से समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आंदोलन व्यवस्था में सुधार के उद्देश्य से होना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ। जंतर-मंतर की घटना पर कही यह बात जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के सवाल पर भागवत ने कहा कि किसी भी घटना पर निष्कर्ष निकालने से पहले उसके कारणों को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों में कुछ उपद्रवियों के शामिल होने की बात सामने आई है, लेकिन यदि उन्हें किसी पर भरोसा करना हो तो वह देश के युवाओं पर करेंगे। शिक्षा व्यवस्था में सुधार पर जोर भागवत ने कहा कि शिक्षा को व्यवसाय नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए और इसके लिए सरकार के साथ समाज की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बाद ही पाठ्यक्रम जैसे विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। विदेश नीति और सामाजिक मुद्दों पर भी रखी राय उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति में देश को सरकार के साथ खड़ा होना चाहिए, लेकिन संघर्ष समाप्त होने के बाद बातचीत का रास्ता तलाशना भी जरूरी है। समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि किसी भी सामाजिक व्यवस्था में बदलाव से पहले समाज को उसके लिए तैयार करना आवश्यक है। वहीं महिलाओं की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि उन्हें हर क्षेत्र में समान अवसर और बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए। ‘फिंगर क्लैप’ भी बना चर्चा का विषय कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने युवाओं के बीच लोकप्रिय ‘फिंगर क्लैप’ शैली में भी अपनी प्रतिक्रिया दी। यह ताली बजाने का एक तरीका है, जिसमें हथेलियों की बजाय उंगलियों से हल्की चुटकी जैसी आवाज निकालकर सराहना व्यक्त की जाती है। हाल के वर्षों में यह शैली सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुई है। देश, राजनीति और राष्ट्रीय घटनाक्रम की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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भारत-पाकिस्तान महामुकाबला, ACC ने जारी किया पूरा शेड्यूल

दुबई। एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) ने विमेंस एशिया कप 2026 का शेड्यूल जारी कर दिया है। टूर्नामेंट का सबसे बहुप्रतीक्षित मुकाबला भारत और पाकिस्तान के बीच 5 सितंबर को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। टी-20 फॉर्मेट में आयोजित होने वाला यह टूर्नामेंट 28 अगस्त से शुरू होगा। उद्घाटन मैच में थाईलैंड और हांगकांग-चीन की टीमें आमने-सामने होंगी। 8 टीमें लेंगी हिस्सा विमेंस एशिया कप 2026 में कुल आठ टीमें भाग लेंगी, जिन्हें दो ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप-A ग्रुप-B ग्रुप चरण के बाद दोनों ग्रुप की शीर्ष दो-दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी। टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला 13 सितंबर को खेला जाएगा। सभी मुकाबले दुबई में होंगे पूरे टूर्नामेंट के सभी मैच दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित किए जाएंगे। भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला मुकाबला टूर्नामेंट का सबसे चर्चित मैच माना जा रहा है, जिस पर दुनियाभर के क्रिकेट प्रशंसकों की नजर रहेगी। भारत सबसे सफल टीम टी-20 फॉर्मेट में अब तक खेले गए पांच विमेंस एशिया कप में भारतीय महिला टीम सबसे सफल रही है। भारत ने तीन बार खिताब अपने नाम किया है, जबकि बांग्लादेश और श्रीलंका ने एक-एक बार ट्रॉफी जीती है। श्रीलंका मौजूदा चैंपियन के रूप में इस टूर्नामेंट में उतरेगा। खेल जगत की ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में फायर फाइटर्स की छंटनी का आरोप, कर्मचारियों ने रोजगार और श्रम नियमों पर उठाए सवाल

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की फायर सेफ्टी व्यवस्था में कार्यरत फायर फाइटर्स ने ठेका बदलने के बाद छंटनी किए जाने का आरोप लगाया है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना पूर्व सूचना के कई लोगों को काम से हटा दिया गया, जिससे उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। वहीं, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने कर्मचारियों के आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि अनुबंध के अनुसार पर्याप्त कर्मचारी कार्यरत हैं और नियुक्ति या हटाने का अधिकार ठेकेदार के पास है। वर्षों से कर रहे थे सेवा कर्मचारियों के अनुसार, चकरभाठा क्षेत्र के धमनी, कड़ार, सेंवार, हिरी और आसपास के गांवों के कई युवक पिछले 3 से 13 वर्षों से हाईकोर्ट में फायर फाइटर के रूप में कार्यरत थे। उनका कहना है कि वे अलग-अलग शिफ्टों में नियमित रूप से अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनके मुताबिक, फायर सेफ्टी सिस्टम का ठेका बदलने के बाद नए ठेकेदार ने कई पुराने कर्मचारियों को काम से हटा दिया। निर्धारित संख्या से कम कर्मचारियों से काम कराने का आरोप फायर फाइटर्स का आरोप है कि अनुबंध के अनुसार कुशल और अकुशल मिलाकर 28 कर्मचारियों की नियुक्ति होनी चाहिए। उनका दावा है कि पहले केवल 16 कर्मचारियों से काम लिया गया और बाद में उनमें से भी आठ कर्मचारियों को हटा दिया गया। कर्मचारियों के अनुसार, वर्तमान में तीन शिफ्टों में केवल आठ फायर फाइटर्स से काम कराया जा रहा है। वेतन, ईपीएफ और सुरक्षा सुविधाओं पर भी सवाल कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें कलेक्टर दर के अनुसार मजदूरी नहीं मिल रही है और उनका मासिक वेतन केवल 8 से 10 हजार रुपये तक सीमित है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें ईपीएफ (EPF) और ईएसआई (ESI) जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। इसके अलावा कर्मचारियों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान आवश्यक सुरक्षा उपकरण भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं कराए जाते, जिससे कार्य के दौरान जोखिम बढ़ जाता है। कंपनी के पंजीकरण पर भी उठाए सवाल फायर फाइटर्स ने आरोप लगाया कि संबंधित कंपनी का पंजीकरण 25 मई 2026 को समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद उसी कंपनी से काम कराया जा रहा है। कर्मचारियों ने पूरे मामले की जांच कराने और श्रम कानूनों के पालन की मांग की है। विभाग ने आरोपों से किया इनकार लोक निर्माण विभाग के एसडीओ बिंद्रा प्रसाद ने कर्मचारियों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि हाईकोर्ट में अनुबंध के अनुसार 28 कर्मचारी कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि किसी कर्मचारी को नियुक्त करना या हटाना पूरी तरह ठेकेदार का अधिकार है। विभाग की जिम्मेदारी केवल अनुबंध के तहत कार्यों की निगरानी करना है और कर्मचारियों की नियुक्ति या हटाने के निर्णय में विभाग का कोई हस्तक्षेप नहीं होता। छत्तीसगढ़ और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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ईरान में विदेश मंत्री अराघची के खिलाफ महाभियोग की तैयारी! क्षेत्रीय तनाव के बीच कई बड़े घटनाक्रम

तेहरान। ईरान में विदेश मंत्री अब्बास अराघची के खिलाफ महाभियोग लाने की चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ सांसद उनके खिलाफ आवश्यक दस्तावेज और साक्ष्य जुटाने में लगे हैं। हालांकि, अभी तक महाभियोग की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू नहीं हुई है। एक वरिष्ठ सांसद के हवाले से कहा गया है कि उचित समय आने पर विदेश मंत्री के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया जाएगा। राष्ट्रपति की भूमिका सीमित होने का दावा इजराइली मीडिया की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व ने सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े अहम मामलों में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की भूमिका सीमित कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका के साथ संभावित वार्ता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ कमांडर अहमद वाहिदी की भूमिका अधिक प्रभावी हो सकती है। हालांकि, इस दावे की ईरानी अधिकारियों की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। अमेरिका-ईरान वार्ता पर अभी फैसला नहीं अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत को लेकर अभी तक न तो तारीख तय हुई है और न ही स्थान। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान और कतर संभावित मेजबान देशों के रूप में चर्चा में हैं और दोनों देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। ईरान की रणनीति में बदलाव का दावा अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान अब सीधे सैन्य टकराव के बजाय समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों पर दबाव बनाकर अमेरिका और उसके सहयोगियों की रणनीतिक लागत बढ़ाने की नीति पर काम कर सकता है। रीपर ड्रोन मार गिराने का दावा ईरान की IRGC ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर उड़ रहे MQ-9 रीपर ड्रोन को अपने एयर डिफेंस सिस्टम से मार गिराया। हालांकि, ईरान ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह ड्रोन किस देश का था और इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी है। अमेरिका भी नए विकल्पों पर कर रहा विचार मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अपने सैन्य विश्लेषकों से ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए नए रणनीतिक विकल्पों पर सुझाव मांगे हैं। इसे क्षेत्रीय तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हूती धमकी के बाद बदला जहाजों का रूट यमन के हूती विद्रोहियों की धमकियों के बाद छह सऊदी सुपरटैंकरों ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब मार्ग की बजाय अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से लंबा समुद्री रास्ता अपनाया है। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। दुनिया की ताजा और विश्वसनीय खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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4 साल बाद टेस्ट शतक के करीब पहुंचे बाबर आजम, वेस्टइंडीज के खिलाफ 88 रन बनाकर नाबाद

स्पोर्ट्स डेस्क। पाकिस्तान के टेस्ट कप्तान बाबर आजम चार साल बाद टेस्ट क्रिकेट में शतक के बेहद करीब पहुंच गए हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले जा रहे दूसरे टेस्ट की दूसरी पारी में बाबर 88 रन बनाकर नाबाद हैं और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचा चुके हैं। बाबर आजम ने अपना पिछला टेस्ट शतक वर्ष 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ कराची टेस्ट में लगाया था। उस मुकाबले में उन्होंने 161 रन की शानदार पारी खेली थी। संयोग से उस समय भी वह पाकिस्तान की कप्तानी कर रहे थे। कप्तानी में वापसी के बाद शानदार प्रदर्शन खराब फॉर्म के चलते बाबर आजम ने वर्ष 2023 में टेस्ट कप्तानी छोड़ दी थी, जिसके बाद शान मसूद को नियमित कप्तान बनाया गया। हालांकि, 5 जुलाई 2026 को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने एक बार फिर बाबर को टेस्ट टीम की कमान सौंपी। कप्तानी में वापसी के बाद उनका यह प्रदर्शन टीम के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। अब्दुल्ला शफीक के शतक से पाकिस्तान मजबूत दूसरी पारी में अब्दुल्ला शफीक के शानदार नाबाद शतक और बाबर आजम की अर्धशतकीय पारी की बदौलत पाकिस्तान ने 2 विकेट पर 273 रन बना लिए हैं। दोनों बल्लेबाजों के बीच तीसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी हो चुकी है। पहली पारी के आधार पर पाकिस्तान अब वेस्टइंडीज से केवल 71 रन पीछे है। दो साल बाद शतक लगाने में सफल रहे शफीक अब्दुल्ला शफीक ने अपने टेस्ट करियर का छठा शतक लगाया। यह उनका 2024 के बाद पहला टेस्ट शतक है। वह लंबे समय तक 99 रन पर रुके रहे, लेकिन बाद में जोमेल वॉरिकन की गेंद पर मिडविकेट की दिशा में चौका लगाकर तीन अंकों तक पहुंचे। अजान ओवैस ने दिलाई तेज शुरुआत पाकिस्तान की दूसरी पारी की शुरुआत युवा बल्लेबाज अजान ओवैस ने आक्रामक अंदाज में की। उन्होंने दूसरे ही ओवर में तेज गेंदबाज केमार रोच के खिलाफ लगातार तीन चौके जड़कर टीम को तेज शुरुआत दिलाई। हालांकि, इमाम-उल-हक तेज गेंदबाज शमार जोसेफ की गेंद पर स्लिप में कैच देकर आउट हो गए। ओवैस ने अर्धशतक जरूर पूरा किया, लेकिन बाद में जोमेल वॉरिकन की गेंद पर एलबीडब्ल्यू आउट हो गए। पहली पारी में 344 रन पर सिमटी थी वेस्टइंडीज इससे पहले वेस्टइंडीज की पहली पारी 344 रन पर समाप्त हुई थी। टीम की ओर से जस्टिन ग्रीव्स और रोस्टन चेज ने अर्धशतकीय पारियां खेलीं। पाकिस्तान के लिए अली उस्मान ने पहली ही गेंद पर जस्टिन ग्रीव्स का विकेट लिया। उबैद शाह ने रोस्टन चेज को बोल्ड किया, जबकि साजिद खान ने शमार जोसेफ का विकेट लेकर वेस्टइंडीज की पारी का अंत किया। क्रिकेट और खेल जगत की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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रायपुर के आरंग में महिला की संदिग्ध मौत, परिजनों ने पति पर हत्या का आरोप लगाया

रायपुर। राजधानी रायपुर से लगे आरंग क्षेत्र में एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतका के परिजनों ने उसके पति पर हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस से निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मृतका की पहचान पुष्पा सोनकर के रूप में हुई है, जो आरंग के वार्ड नंबर-14 स्थित शनि मंदिर के पास रहती थीं। परिजनों का आरोप- पति का दूसरी महिला से था संबंध मृतका के पिता रामधार सोनकर ने पुलिस को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की शादी करीब 20 वर्ष पहले भोला सोनकर से हुई थी। दोनों के चार बच्चे हैं। परिजनों का दावा है कि पिछले तीन वर्षों से भोला सोनकर का दूसरी महिला से संबंध था और उससे एक बच्चा भी है। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था। उनका आरोप है कि आरोपी पति आए दिन पुष्पा के साथ मारपीट करता था और उसे जान से मारने की धमकी भी देता था। घटना वाले दिन झगड़े का दावा परिजनों के अनुसार, घटना से एक रात पहले भोला सोनकर घर नहीं लौटा था। मृतका की बेटी का दावा है कि 31 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे वह घर पहुंचा, जिसके बाद पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ। परिजनों का आरोप है कि इसके बाद वह पुष्पा को घर के पीछे स्थित बाड़ी की ओर ले गया। बाद में सुबह करीब 8:15 बजे उसने फोन कर पुष्पा के कुएं में गिरने की सूचना परिवार को दी। इलाज के दौरान हुई मौत परिवार के मुताबिक, सूचना मिलने पर वे मौके पर पहुंचे तो पुष्पा गंभीर हालत में मिलीं। उन्हें पहले आरंग के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने रायपुर रेफर कर दिया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। “तैरना जानती थी, हादसा नहीं लग रहा” मृतका के परिजनों का कहना है कि पुष्पा को तैरना आता था, इसलिए उनके अनुसार कुएं में गिरने की घटना संदिग्ध है। उन्होंने आरोप लगाया है कि दूसरी महिला से संबंधों में बाधा बनने के कारण आरोपी पति ने उन्हें कुएं में धक्का दिया। पुलिस ने कहा- जांच के बाद होगी कार्रवाई मृतका के पिता, भाइयों और बेटियों ने आरंग थाने में लिखित शिकायत देकर आरोपी पति के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है। आरंग पुलिस ने बताया कि परिजनों का आवेदन प्राप्त हुआ है। मामले की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों तथा जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। छत्तीसगढ़ और देश की ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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मंडी शुल्क बढ़ाने के फैसले का खंडवा में विरोध, व्यापारियों ने सरकार से बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की

खंडवा। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कृषि उपज मंडियों में मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत किए जाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। मंगलवार को खंडवा में व्यापार एवं उद्योग कांग्रेस के पदाधिकारियों और व्यापारियों ने पुरानी अनाज मंडी कार्यालय पहुंचकर मंडी सचिव को ज्ञापन सौंपा और शुल्क में की गई 0.5 प्रतिशत बढ़ोतरी वापस लेने की मांग की। व्यापारियों ने बढ़ती लागत पर जताई चिंता ज्ञापन में व्यापारियों ने कहा कि मंडी शुल्क बढ़ने से व्यापार की लागत में इजाफा होगा, जिसका सीधा असर किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि बढ़ा हुआ शुल्क मध्य प्रदेश की मंडियों को पड़ोसी राज्यों की मंडियों की तुलना में प्रतिस्पर्धा में कमजोर कर सकता है, जिससे कृषि व्यापार प्रभावित होने की आशंका है। पुरानी व्यवस्था बहाल करने की मांग व्यापार एवं उद्योग कांग्रेस के खंडवा शहर अध्यक्ष संदीप सोनी ने कहा कि संगठन व्यापार और उद्योग से जुड़े मुद्दों को शासन-प्रशासन के सामने मजबूती से उठाएगा। उन्होंने बताया कि यह संगठन का पहला सामूहिक कार्यक्रम था, जिसमें बड़ी संख्या में व्यापारियों ने भाग लिया। उन्होंने सरकार से मंडी शुल्क में की गई वृद्धि को वापस लेकर पहले की व्यवस्था बहाल करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने दिया समर्थन कार्यक्रम में शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रतिभा रघुवंशी और नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने व्यापारियों की मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को ऐसे निर्णय लेने से बचना चाहिए, जिनका नकारात्मक प्रभाव व्यापार, कृषि और आम नागरिकों पर पड़े। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने “देश का कल्चर-एग्रीकल्चर” जैसे नारे लगाकर भी अपना विरोध दर्ज कराया। ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांग व्यापारियों ने सरकार से मांग की कि मंडी शुल्क में की गई 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी तत्काल वापस ली जाए और किसानों, व्यापारियों तथा उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए पहले वाली शुल्क व्यवस्था दोबारा लागू की जाए। मध्य प्रदेश और कारोबार से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें –deshharpal.com
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Supreme Court

Supreme Court on CJP Protest: प्रदर्शन पर रोक से इनकार, ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर का दावा

दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों की रोजी-रोटी का मुद्दा चर्चा में रहा। अदालत ने फिलहाल प्रदर्शन रोकने का आदेश देने से इनकार कर दिया। वहीं, व्यापारियों की ओर से दावा किया गया कि प्रदर्शन और उससे जुड़ी पाबंदियों के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने यह मामला रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क और आसपास के बाजारों में कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताई। उनका कहना था कि बाजारों में लोगों की आवाजाही बाधित होने से छोटे दुकानदारों और दूसरे कारोबारियों को परेशानी हो सकती है। CJI की टिप्पणी: किसी के लिए प्रदर्शन, किसी के लिए मूंगफली बेचना जरूरी सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रदर्शन के अधिकार और आम लोगों की आजीविका के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि किसी व्यक्ति के लिए प्रदर्शन करना जरूरी हो सकता है, जबकि किसी दूसरे के लिए मूंगफली बेचकर अपना परिवार चलाना महत्वपूर्ण है। CJI सूर्यकांत ने भी छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति का जिक्र किया। त्योहारों के समय दुकानदारों की कमाई बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में यदि बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो इसका असर उनकी रोजाना की आमदनी पर पड़ सकता है। अदालत की टिप्पणियों से साफ है कि इस मामले में केवल प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि आम लोगों की आजीविका और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जा रहा है। Delhi Business Loss: रोजाना ₹200 करोड़ के नुकसान का दावा व्यापारियों की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कनॉट प्लेस और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में प्रदर्शन के कारण रोजाना करीब ₹200 करोड़ के कारोबार पर असर पड़ सकता है। इसका प्रभाव बड़े कारोबारियों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ सकता है। बाजार में ग्राहकों की संख्या कम होने या आवाजाही प्रभावित होने से उनकी कमाई पर असर पड़ने की आशंका जताई गई। हालांकि, ₹200 करोड़ का आंकड़ा व्यापारियों की ओर से पेश किया गया दावा है। इसे वास्तविक नुकसान का प्रमाणित आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए। Central Park को बंद करने का मुद्दा भी उठा सुनवाई के दौरान कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को बंद करने से जुड़े प्रशासनिक फैसले का मुद्दा भी उठाया गया। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि इस कदम से आसपास के बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि किसी प्रतिबंध के कारण कारोबार या लोगों की आजीविका को अनुचित नुकसान पहुंचता है, तो उचित राहत देने के सवाल पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, तत्काल सुनवाई में प्रदर्शन पर रोक लगाने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया। CJP Protest: क्यों किया गया प्रदर्शन का ऐलान? CJP ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में तिरंगा मार्च और प्रदर्शन का आह्वान किया था। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में यह कदम उठाने की बात कही थी। प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था, बाजारों में आवाजाही और कारोबार पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने रोक लगाने से इनकार किया था, जबकि दिल्ली पुलिस ने कानून के अनुसार जरूरी कदम उठाने की बात कही थी। Supreme Court Hearing: अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने मामले को तत्काल आदेश के जरिए निपटाने के बजाय दशहरा अवकाश के बाद 26 या 27 अक्टूबर को सूचीबद्ध किए जाने का संकेत दिया। फिलहाल, प्रदर्शन पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया गया है। आगे की सुनवाई में प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था और व्यापारियों की आजीविका से जुड़े पहलुओं पर चर्चा महत्वपूर्ण रहेगी। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि विरोध दर्ज कराने के अधिकार और आम लोगों की रोजी-रोटी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अदालत की अगली सुनवाई से इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
PM Modi

PM Modi Canada Tour दिसंबर में होगी अहम बातचीत, Trade Deal से दोनों देशों को उम्मीद

PM Modi 11 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर जा सकते हैं। इस यात्रा को भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील यानी व्यापार समझौते को लेकर बातचीत होने की संभावना है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के बीच कनाडा भी अपने कारोबार के लिए नए बाजार तलाश रहा है। कनाडा लंबे समय से अमेरिकी बाजार पर काफी हद तक निर्भर रहा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार के साथ व्यापार बढ़ाना उसके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। दूसरी ओर, भारत की भी कोशिश है कि दूसरे देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़े और भारतीय कारोबारियों को नए अवसर मिलें। India-Canada Trade Deal पर क्यों है सबकी नजर? भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को लेकर काफी उम्मीदें हैं। इस समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाना, निवेश के अवसर खोलना और कारोबार से जुड़ी बाधाओं को कम करना है। अगर ट्रेड डील पर सहमति बनती है, तो दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार में कारोबार बढ़ाने का मौका मिल सकता है। इससे कृषि, ऊर्जा, तकनीक, शिक्षा और कई दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में प्रस्तावित समझौता इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। Trump के Tariff दबाव के बीच कनाडा क्यों खोज रहा नए बाजार? डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ाई है। इसका असर उन देशों पर भी पड़ता है, जिनका कारोबार अमेरिकी बाजार पर ज्यादा निर्भर है। कनाडा भी अपने व्यापारिक रिश्तों में विविधता लाने और नए बाजारों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है। भारत इस लिहाज से कनाडा के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है। भारत की बड़ी आबादी, बढ़ती अर्थव्यवस्था और अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ती मांग कनाडाई कंपनियों को आकर्षित करती है। हालांकि, भारत के साथ व्यापार बढ़ाना केवल अमेरिका पर निर्भरता कम करने तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच निवेश और कारोबारी सहयोग बढ़ने से लंबे समय में आर्थिक रिश्तों को भी मजबूती मिल सकती है। Energy और Technology सेक्टर में भी बढ़ सकते हैं मौके भारत और कनाडा के बीच कारोबार की संभावनाएं केवल ट्रेड डील तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, शिक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाया जा सकता है। कनाडा के पास प्राकृतिक संसाधन और ऊर्जा क्षेत्र में अनुभव है, जबकि भारत तेजी से बढ़ता हुआ बड़ा बाजार है। दोनों देश अपनी जरूरतों और क्षमताओं के आधार पर साझेदारी को आगे बढ़ा सकते हैं। व्यापार समझौते पर बातचीत आगे बढ़ने से कंपनियों और निवेशकों को भी सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक फायदा समझौते की शर्तों और उसके लागू होने पर निर्भर करेगा। पुराने तनाव के बाद रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कूटनीतिक तनाव भी देखने को मिला। इस वजह से दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग को लेकर कई सवाल उठे थे। अब व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे साझा हितों पर बातचीत बढ़ाना दोनों देशों के लिए अहम हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित यात्रा इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। फिर भी, व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी। इसलिए इस दौरे के दौरान होने वाली बातचीत और आधिकारिक घोषणाओं पर सबकी नजर रहेगी। भारत और कनाडा के लिए क्या होंगे इसके मायने? भारत-कनाडा ट्रेड डील आगे बढ़ती है, तो इससे दोनों देशों के कारोबारियों को नए बाजार मिल सकते हैं। निवेश बढ़ने, व्यापारिक अवसर पैदा होने और अलग-अलग क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत होने की संभावना भी रहेगी। कनाडा के लिए भारत के साथ व्यापार बढ़ाना अपने आर्थिक रिश्तों में विविधता लाने का अवसर है। वहीं, भारत के लिए यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के क्षेत्र में अपनी पहुंच मजबूत करने का एक और रास्ता हो सकता है। अब नजर 11 दिसंबर की प्रस्तावित यात्रा पर है। क्या प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के नेतृत्व के बीच ट्रेड डील को लेकर कोई ठोस सहमति बन पाएगी? इसका जवाब दोनों देशों की बातचीत और आगे होने वाली आधिकारिक घोषणाओं से ही साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Starlink

Reliance-Starlink Controversy: मस्क के आरोपों पर अंबानी की कंपनी का जवाब, कहा- Competition से नहीं डरते

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर रिलायंस (Reliance) इंडस्ट्रीज और एलन मस्क की कंपनी Starlink के बीच चर्चा तेज हो गई है। स्टारलिंक की भारत में एंट्री में देरी को लेकर मस्क ने सवाल उठाए थे। अब मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि वह प्रतिस्पर्धा से कभी नहीं डरी और भारत में स्टारलिंक का स्वागत करती है। Reliance के इस बयान के बाद देश के टेलीकॉम और सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में मुकाबले को लेकर चर्चा बढ़ गई है। एक तरफ एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ जियो भी सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। Reliance ने Starlink को लेकर क्या कहा? Reliance इंडस्ट्रीज ने अपने बयान में कहा कि कंपनी ने हमेशा प्रतिस्पर्धा का सामना किया है और वह नई कंपनियों के बाजार में आने से नहीं घबराती। कंपनी के मुताबिक, भारत में कारोबार करने वाली सभी कंपनियों को देश के नियमों का पालन करना चाहिए। रिलायंस ने स्टारलिंक का स्वागत करते हुए यह भी संकेत दिया कि सैटेलाइट इंटरनेट के क्षेत्र में मुकाबला ग्राहकों के लिए फायदेमंद हो सकता है। कंपनी का मानना है कि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवाओं की गुणवत्ता और ग्राहकों के अनुभव में सुधार की गुंजाइश बनती है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की शुरुआत को लेकर कई कंपनियां तैयारी कर रही हैं। Elon Musk ने Mukesh Ambani पर क्यों उठाए सवाल? एलन मस्क ने भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित कंपनी की भारतीय बाजार में एंट्री को मुश्किल बना रहे हैं। इस विवाद में रिलायंस और मुकेश अंबानी का नाम भी सामने आया। मस्क का कहना है कि स्टारलिंक जैसी कंपनियों को भारतीय बाजार में काम करने का अवसर मिलना चाहिए, ताकि ग्राहकों के पास इंटरनेट सेवा चुनने के अधिक विकल्प हों। हालांकि, इन आरोपों से यह साबित नहीं होता कि स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी के पीछे रिलायंस की भूमिका है। इसके लिए किसी ठोस प्रमाण की जरूरत होगी। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनियों को लाइसेंस के साथ-साथ दूसरी जरूरी मंजूरियां भी हासिल करनी होती हैं। Jio भी Satellite Internet Market में उतरने को तैयार Reliance जियो ने साल 2016 में भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा था। सस्ते डेटा और किफायती सेवाओं के कारण कंपनी ने तेजी से ग्राहक जोड़े और देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में अपनी जगह बनाई। अब जियो की नजर सैटेलाइट इंटरनेट बाजार पर भी है। इस तकनीक के जरिए उन इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड कनेक्शन उपलब्ध कराना मुश्किल है। दूसरी तरफ, स्टारलिंक अपने सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए भारत में इंटरनेट सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है। Starlink की India Launch में देरी की वजह क्या है? भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना केवल लाइसेंस मिलने तक सीमित नहीं है। कंपनियों को सुरक्षा मानकों, तकनीकी आवश्यकताओं और सरकारी नियमों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी होती हैं। स्टारलिंक के अलावा जियो और भारती समूह से जुड़ी Eutelsat OneWeb भी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इन कंपनियों की सेवाओं की शुरुआत जरूरी मंजूरियों और नियामकीय शर्तों पर निर्भर करती है। इसलिए स्टारलिंक की लॉन्चिंग में देरी को किसी एक कंपनी से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी। वास्तविक स्थिति समझने के लिए सरकारी मंजूरियों और संबंधित कंपनियों की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखना जरूरी है। आम लोगों को क्या होगा फायदा? अगर भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू होती हैं, तो इसका फायदा खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को मिल सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों और उन जगहों पर, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है, यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल इंटरनेट की कीमत, स्पीड और उपलब्धता का होगा। स्टारलिंक और जियो की सेवाएं कितनी किफायती होंगी, यह उनकी व्यावसायिक योजनाओं और लॉन्च के समय घोषित किए जाने वाले प्लान पर निर्भर करेगा। अब आगे क्या? रिलायंस के बयान से साफ है कि कंपनी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है। वहीं, एलन मस्क की स्टारलिंक भारतीय बाजार में अपनी सेवाएं शुरू करने का इंतजार कर रही है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि जरूरी सरकारी प्रक्रियाएं कब पूरी होती हैं और कंपनियां ग्राहकों के लिए अपनी सेवाएं कब पेश करती हैं। अगर बाजार में कई कंपनियां उतरती हैं, तो भारतीय ग्राहकों को इंटरनेट के नए विकल्प मिल सकते हैं। फिलहाल, रिलायंस और स्टारलिंक के बीच जारी यह बहस भारत के तेजी से बदलते डिजिटल और टेलीकॉम बाजार की एक अहम तस्वीर पेश करती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Weather

Weather Update राजस्थान में बारिश के साथ गिरे ओले, Kedarnath-Badrinath में बर्फबारी

देश के कई हिस्सों में मौसम (Weather) का मिजाज बदल गया है। राजस्थान में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है, जबकि उत्तराखंड के केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी देखने को मिली है। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बारिश को लेकर अलर्ट की खबर है। मौसम में आए इस बदलाव से कहीं गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है, तो कहीं किसानों और यात्रियों की चिंता बढ़ सकती है। Rajasthan Weather: बारिश के साथ ओलावृष्टि राजस्थान के कई इलाकों में बारिश के साथ ओले गिरने से मौसम सुहावना होने के साथ ठंडा भी हो गया है। अचानक बदले मौसम का असर आम जनजीवन पर पड़ सकता है। जिन इलाकों में ओलावृष्टि हुई है, वहां खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान होने की आशंका भी रहती है। ऐसे में किसानों को स्थानीय मौसम विभाग की सलाह पर ध्यान देना चाहिए। बारिश और तेज हवाओं के दौरान लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। Kedarnath-Badrinath में बर्फबारी, पहाड़ों पर बढ़ी ठंड उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम ने अलग ही रंग दिखाया है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और हेमकुंड साहिब में बर्फबारी के बाद ठंड बढ़ गई है। पहाड़ों पर मौसम तेजी से बदलता है, इसलिए यहां जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यात्रा की तैयारी सावधानी से करनी चाहिए। खासतौर पर धार्मिक स्थलों की यात्रा करने वाले लोगों को सड़क की स्थिति, मौसम का पूर्वानुमान और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए। UP-Bihar Rain Alert: इन राज्यों में भी बदल सकता है मौसम राजस्थान और उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में बारिश की संभावना को लेकर अलर्ट की खबर सामने आई है। बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि, बारिश का असर हर जिले में एक जैसा नहीं होगा। इसलिए अपने इलाके के लिए मौसम विभाग की ताजा चेतावनी जरूर देखें। किसानों और आम लोगों के लिए जरूरी सलाह बदलते मौसम को देखते हुए कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है। आंधी या बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों में रुकने से बचें। किसान अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए स्थानीय कृषि विशेषज्ञों की सलाह लें। वहीं, पहाड़ी इलाकों में जाने वाले यात्री मौसम और रास्तों की स्थिति की जानकारी पहले ही हासिल कर लें। Weather Update Today: आगे कैसा रहेगा मौसम? अक्टूबर के मध्य में बारिश और पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी ने मौसम का रुख बदल दिया है। राजस्थान में ओलावृष्टि और उत्तराखंड में बर्फ गिरने के बीच दूसरे राज्यों के लोगों की नजर भी बारिश के पूर्वानुमान पर है। मौसम से जुड़ी योजनाएं बनाने से पहले अपने शहर का ताजा अपडेट देखना बेहतर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Parliament

Parliament Special Session: इसी महीने बुलाया जा सकता है संसद का सत्र, लोकसभा सीटें बढ़ाने पर नजर

संसद (Parliament) के गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज होने की चर्चा है। केंद्र सरकार इसी महीने संसद का विशेष सत्र बुला सकती है। इस सत्र में लोकसभा की सीटें बढ़ाने, परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों पर आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक विशेष सत्र की तारीखों का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार इस बार जरूरी समर्थन जुटा पाएगी? अप्रैल 2026 में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला था। ऐसे में सरकार के सामने अब राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की चुनौती है। लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की चर्चा फिलहाल लोकसभा में 543 निर्वाचित सीटें हैं। प्रस्तावित योजना के तहत इनकी संख्या बढ़ाकर अधिकतम 850 करने की बात सामने आई है। इस बदलाव का संबंध महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया से भी जोड़ा जा रहा है। अगर लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी होती है, तो संसदीय क्षेत्रों और राज्यों के प्रतिनिधित्व में बदलाव हो सकता है। हालांकि, सीटों की अंतिम संख्या और उनके बंटवारे को लेकर स्थिति विधेयक के प्रावधानों तथा संवैधानिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। Delimitation Bill क्या है और इससे क्या बदलेगा? परिसीमन यानी Delimitation का मतलब लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं का दोबारा निर्धारण करना है। इसके जरिए निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया जा सकता है। यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि परिसीमन का असर संसद में अलग-अलग राज्यों की राजनीतिक भागीदारी पर पड़ सकता है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने चिंता जताई है कि आबादी के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होने से उनका मौजूदा प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। दूसरी ओर, सरकार की प्रस्तावित योजना में लोकसभा की सीटें बढ़ाने का मुद्दा शामिल है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए प्रस्ताव में राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़ी चिंताओं का किस तरह समाधान किया जाता है। महिला आरक्षण 2029 से लागू करने की तैयारी? महिला आरक्षण भी इस पूरे मामले का एक अहम हिस्सा है। संसद ने 2023 में महिला आरक्षण से जुड़ा कानून पारित किया था। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। हालांकि, इस कानून के क्रियान्वयन को जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया है। सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। इसी वजह से परिसीमन और संविधान संशोधन से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है। अप्रैल में क्यों पास नहीं हो पाया था बिल? अप्रैल 2026 में लोकसभा में संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान हुआ था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, विधेयक के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। इसके बावजूद जरूरी विशेष बहुमत नहीं मिल सका और विधेयक पारित नहीं हुआ। संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई मतों की जरूरत होती है। कुछ संविधान संशोधनों के लिए कम से कम आधे राज्यों की विधानसभाओं से मंजूरी लेना भी जरूरी होता है। यानी सरकार के लिए केवल सांसदों की साधारण बहुमत संख्या पर्याप्त नहीं होगी। उसे संवैधानिक नियमों के मुताबिक जरूरी समर्थन हासिल करना होगा। DMK समेत दूसरे दलों से संपर्क की चर्चा मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सरकार विधेयकों के समर्थन में राजनीतिक दलों से बातचीत कर रही है। इसमें डीएमके (DMK) और कुछ छोटे दलों से संपर्क किए जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन दलों के अंतिम रुख को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी नहीं है। विपक्षी दलों की प्रमुख चिंताओं में परिसीमन की प्रक्रिया, राज्यों का प्रतिनिधित्व और प्रस्तावित बदलावों पर व्यापक चर्चा शामिल है। ऐसे में विशेष सत्र बुलाए जाने पर संसद में इस मुद्दे पर बहस तेज हो सकती है। कब हो सकता है संसद का Special Session? मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर सकती है। 26 और 27 अक्टूबर को प्रस्तावित BRICS Parliamentary Forum के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए सत्र की तारीखें तय किए जाने की संभावना भी जताई गई है। लेकिन अभी तक विशेष सत्र का आधिकारिक कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है। इसलिए तारीखों और विधेयकों को लेकर सामने आ रही जानकारियों को संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। अब सरकार के सामने क्या चुनौती है? सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं—पहली, विधेयकों के लिए जरूरी संवैधानिक समर्थन जुटाना और दूसरी, परिसीमन को लेकर राज्यों की चिंताओं पर सहमति बनाना। अगर विशेष सत्र बुलाया जाता है, तो लोकसभा की सीटों में बढ़ोतरी, महिला आरक्षण और राज्यों के प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे फिर से चर्चा के केंद्र में आ सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर सरकार की आधिकारिक घोषणा और राजनीतिक दलों के रुख पर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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