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Ujjain Shahi Masjid: सड़क चौड़ीकरण पर रोक से HC का इनकार, कमेटी को बड़ा झटका

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मध्य प्रदेश के उज्जैन (Ujjain) में सड़क चौड़ीकरण को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल जारी है। शाही मस्जिद (Shahi Masjid) से जुड़े मामले में इंदौर हाईकोर्ट से मस्जिद कमेटी को तत्काल राहत नहीं मिली है। कोर्ट के रुख के बाद सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई आगे जारी रहने की स्थिति बनी हुई है।

शाही मस्जिद कमेटी ने सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कमेटी की ओर से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने फिलहाल सड़क चौड़ीकरण के काम पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया।

सड़क चौड़ीकरण पर नहीं लगी रोक

हाईकोर्ट के इस रुख के बाद उज्जैन में चल रहा Road Widening का काम जारी रह सकता है। प्रशासन की ओर से सड़क को चौड़ा करने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कार्रवाई की जा रही है।

विवाद उस हिस्से को लेकर है, जहां सड़क चौड़ीकरण की जद में शाही मस्जिद से जुड़ा हिस्सा आने की बात कही जा रही है। मस्जिद कमेटी ने इसी को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

शाही मस्जिद कमेटी ने जताई आपत्ति

कमेटी की ओर से कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा गया कि चौड़ीकरण के दौरान मस्जिद से जुड़े हिस्से पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर कमेटी ने अदालत से राहत की मांग की थी।

हालांकि, हाईकोर्ट ने तत्काल कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई। ऐसे में प्रशासन के लिए सड़क चौड़ीकरण का काम आगे बढ़ाने का रास्ता बना हुआ है।

आगे भी जारी रह सकती है कानूनी लड़ाई

हाईकोर्ट के मौजूदा रुख के बाद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मामले से जुड़े दूसरे कानूनी पहलुओं पर आगे सुनवाई हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में कोर्ट की अगली कार्यवाही पर नजर रहेगी।

उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का यह मामला स्थानीय स्तर पर भी चर्चा में है। प्रशासन जहां सड़क और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रहा है, वहीं शाही मस्जिद कमेटी कानूनी रास्ते के जरिए अपने पक्ष को सामने रख रही है।

फिलहाल इंदौर हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद उज्जैन में Road Widening का काम जारी रहने की संभावना है। मामले में आगे अदालत का रुख ही तय करेगा कि विवाद किस दिशा में जाता है।

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Yukta

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Shahi Masjid

Ujjain Shahi Masjid: सड़क चौड़ीकरण पर रोक से HC का इनकार, कमेटी को बड़ा झटका

मध्य प्रदेश के उज्जैन (Ujjain) में सड़क चौड़ीकरण को लेकर चल रहा विवाद फिलहाल जारी है। शाही मस्जिद (Shahi Masjid) से जुड़े मामले में इंदौर हाईकोर्ट से मस्जिद कमेटी को तत्काल राहत नहीं मिली है। कोर्ट के रुख के बाद सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई आगे जारी रहने की स्थिति बनी हुई है। शाही मस्जिद कमेटी ने सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कमेटी की ओर से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने फिलहाल सड़क चौड़ीकरण के काम पर रोक लगाने का आदेश नहीं दिया। सड़क चौड़ीकरण पर नहीं लगी रोक हाईकोर्ट के इस रुख के बाद उज्जैन में चल रहा Road Widening का काम जारी रह सकता है। प्रशासन की ओर से सड़क को चौड़ा करने और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कार्रवाई की जा रही है। विवाद उस हिस्से को लेकर है, जहां सड़क चौड़ीकरण की जद में शाही मस्जिद से जुड़ा हिस्सा आने की बात कही जा रही है। मस्जिद कमेटी ने इसी को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। शाही मस्जिद कमेटी ने जताई आपत्ति कमेटी की ओर से कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा गया कि चौड़ीकरण के दौरान मस्जिद से जुड़े हिस्से पर असर पड़ सकता है। इसी आधार पर कमेटी ने अदालत से राहत की मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने तत्काल कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई। ऐसे में प्रशासन के लिए सड़क चौड़ीकरण का काम आगे बढ़ाने का रास्ता बना हुआ है। आगे भी जारी रह सकती है कानूनी लड़ाई हाईकोर्ट के मौजूदा रुख के बाद विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। मामले से जुड़े दूसरे कानूनी पहलुओं पर आगे सुनवाई हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में कोर्ट की अगली कार्यवाही पर नजर रहेगी। उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का यह मामला स्थानीय स्तर पर भी चर्चा में है। प्रशासन जहां सड़क और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रहा है, वहीं शाही मस्जिद कमेटी कानूनी रास्ते के जरिए अपने पक्ष को सामने रख रही है। फिलहाल इंदौर हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिलने के बाद उज्जैन में Road Widening का काम जारी रहने की संभावना है। मामले में आगे अदालत का रुख ही तय करेगा कि विवाद किस दिशा में जाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UPI

UPI Transaction Fee: सुप्रीम कोर्ट ने MDR पर रोक से किया इनकार, Centre-RBI-NPCI को Notice

UPI से पेमेंट करने वाले करोड़ों लोगों के लिए इस समय की बड़ी खबर है। UPI Transaction पर फीस लगाने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने Merchant Discount Rate यानी MDR को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार, RBI और NPCI समेत संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने सभी पक्षों से करीब चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है। ऐसे में अब इस मामले में अगली सुनवाई काफी अहम मानी जा रही है। ₹2,000 से ज्यादा के UPI Payment पर क्या है मामला? मामला मुख्य रूप से Person-to-Merchant (P2M) UPI Transactions से जुड़ा है। प्रस्तावित Framework के तहत ₹2,000 से ज्यादा के कुछ Merchant Payments पर MDR लागू करने की व्यवस्था की गई है। सामान्य तौर पर ऐसे पात्र Transactions पर 0.4% MDR प्रस्तावित है। वहीं ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। कुछ खास सेक्टर के लिए अलग शुल्क का प्रस्ताव है। रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में पात्र बड़े UPI Payments पर ₹5 का फ्लैट MDR रखा गया है। वहीं Mutual Funds, Securities और Stockbrokers से जुड़े कुछ भुगतान पर 0.02% MDR का प्रावधान है। हर UPI Payment पर नहीं लगेगी फीस यहां एक बात समझना जरूरी है कि प्रस्तावित व्यवस्था का मतलब हर UPI Transaction पर चार्ज लगना नहीं है। Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले पैसे को इस MDR व्यवस्था से बाहर रखा गया है। इसके अलावा छोटे UPI Payments भी इसके दायरे में नहीं आते। यानी रोजमर्रा में दोस्त या परिवार के सदस्य को किए जाने वाले सामान्य UPI Transfer पर इस प्रस्ताव का सीधा असर नहीं बताया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने क्यों मांगा जवाब? सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने MDR को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। कोर्ट ने यह जानना चाहा कि इस तरह की राशि की कानूनी प्रकृति क्या है और इसे किस आधार पर वसूला जा रहा है। सवाल यह भी है कि MDR को Tax, Fee या Payment Ecosystem से जुड़े Commercial/Settlement Charge के तौर पर किस रूप में देखा जाए। केंद्र की ओर से बताया गया कि MDR से मिलने वाली राशि सीधे सरकार के खाते में नहीं जाएगी। यह Payment Aggregators, Banks और दूसरे Service Providers के बीच Settlement या Service Charge के रूप में काम करेगी। 15 अक्टूबर से लागू हो सकता है Framework याचिकाकर्ता ने प्रस्तावित MDR व्यवस्था पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसका मतलब यह है कि अभी अदालत की तरफ से इस Framework के लागू होने पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से इससे जुड़े नियम लागू किए जा सकते हैं। हालांकि, अंतिम स्थिति आगे होने वाली सुनवाई और कोर्ट के आदेश पर निर्भर करेगी। UPI Users के लिए अभी क्या समझना जरूरी है? फिलहाल UPI को लेकर सबसे जरूरी बात यही है कि हर पेमेंट पर फीस लगाने का फैसला नहीं हुआ है। मामला मुख्य रूप से तय शर्तों के तहत होने वाले बड़े Merchant Payments से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, RBI और NPCI समेत संबंधित पक्षों को जवाब देने के लिए समय दिया है। इसलिए इस मामले में आगे कोर्ट क्या फैसला देता है, इस पर सभी की नजर रहेगी। अभी के लिए UPI Users को किसी सामान्य Person-to-Person Payment पर नई फीस लगने की चिंता करने की जरूरत नहीं है। अंतिम तस्वीर अदालत की आगे की सुनवाई के बाद ही साफ होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Gold Price

Gold Price Today: ₹1.48 लाख पर आया सोना, Silver ₹9,158 टूटी; सितंबर में बड़ी गिरावट

Gold Silver Price खरीदने वालों के लिए बाजार से बड़ी खबर सामने आई है। दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में सोमवार को तेज गिरावट दर्ज की गई। सोने का भाव ₹4,065 घटकर करीब ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं चांदी की कीमत में भी ₹9,158 प्रति किलो की बड़ी कमी हुई है। सितंबर महीने की बात करें तो सोने और चांदी की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिली है। इस महीने अब तक सोना करीब ₹8 हजार और चांदी लगभग ₹14 हजार प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। अचानक आई इस गिरावट पर बाजार में नजर बनी हुई है। Gold Price: सोने के भाव में ₹4 हजार से ज्यादा की गिरावट सोने की कीमत में एक ही दिन में ₹4,065 की कमी आई है। इसके बाद 10 ग्राम सोने का भाव करीब ₹1.48 लाख रह गया है। पिछले कुछ समय से सोने की कीमतों में तेजी और गिरावट का दौर जारी है और अब सितंबर में इसकी कीमत में अच्छी-खासी कमी देखने को मिली है। सोने के भाव पर घरेलू मांग के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति, डॉलर की चाल और निवेशकों की गतिविधियों का असर पड़ता है। यही वजह है कि ग्लोबल मार्केट में होने वाले बदलाव का असर भारतीय बाजार में भी दिखाई देता है। Silver Price: चांदी भी ₹9,158 हुई सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी बड़ी गिरावट आई है। चांदी का भाव ₹9,158 प्रति किलो घटा है। सितंबर में अब तक चांदी करीब ₹14 हजार प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। चांदी की कीमत पर निवेश मांग के साथ-साथ इंडस्ट्रियल डिमांड का भी असर रहता है। इसलिए ग्लोबल मार्केट में बदलाव होने पर चांदी के भाव में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। सितंबर में Gold-Silver के दाम में बड़ी कमी इस महीने की शुरुआत से अब तक दोनों कीमती धातुओं के भाव में अच्छी गिरावट दर्ज हुई है। इन आंकड़ों से साफ है कि सितंबर में Gold और Silver दोनों की कीमतों में दबाव देखने को मिला है। खरीदारी करने वालों के लिए क्या मायने? अगर आप आने वाले दिनों में सोना या चांदी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो ताजा बाजार भाव पर नजर रखना जरूरी है। ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold या Silver के बेस प्राइस को न देखें, क्योंकि इसके अलावा GST और Making Charges भी कीमत में जुड़ते हैं। शहर और दुकानदार के हिसाब से भी अंतिम कीमत में थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में भाव की पुष्टि करना बेहतर रहेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Iran

Iran Crisis: Trump ने दिया Military Action का संकेत, Midterm Election से पहले बढ़ा तनाव

Americs और Iran के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका इस संघर्ष में बहुत जल्द जीत हासिल करने वाला है। वहीं, नवंबर में होने वाले US Midterm Elections से पहले ईरान के खिलाफ किसी नई सैन्य कार्रवाई की संभावना को भी उन्होंने पूरी तरह खारिज नहीं किया है। ट्रंप के इस बयान के बाद अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खासकर ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के साथ-साथ बातचीत की कोशिशें भी चल रही हैं। Midterm Election से पहले Attack का सवाल ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या अमेरिका नवंबर में होने वाले Midterm Elections से पहले ईरान पर दोबारा हमला कर सकता है, तो उन्होंने इस संभावना को सीधे तौर पर नकारा नहीं। उन्होंने संकेत दिया कि हालात के हिसाब से आगे कोई भी फैसला लिया जा सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ चल रहा संघर्ष जल्द खत्म हो सकता है। उनका दावा है कि अमेरिका अपने लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। Iran भी किसी नए हमले के लिए तैयार अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बीच ईरान ने भी अपनी स्थिति साफ कर दी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश किसी भी नए अमेरिकी हमले का सामना करने के लिए तैयार है। हालांकि, ईरान ने बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया है। अराघची के मुताबिक, अगर कूटनीतिक तरीके से समाधान की संभावना बनती है तो Tehran बातचीत के विकल्प पर विचार कर सकता है। Strait of Hormuz बना बड़ा मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में Strait of Hormuz भी अहम मुद्दा बन चुका है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ईरान की ओर से इस रास्ते को फिर से खोलने को लेकर कुछ शर्तें रखी गई हैं। इनमें अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोकना और ईरान से जुड़े आर्थिक प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। बातचीत या फिर Military Action? मौजूदा हालात में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका और ईरान के बीच आगे बातचीत होगी या तनाव फिर सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ेगा। एक तरफ ट्रंप लगातार अमेरिका की सैन्य ताकत और जीत की बात कर रहे हैं, वहीं ईरान भी किसी हमले का जवाब देने की बात कह रहा है। दूसरी तरफ दोनों देशों के बीच Diplomacy की गुंजाइश अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। क्षेत्रीय देश भी तनाव कम करने और बातचीत का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल ट्रंप के बयान ने अमेरिका-ईरान विवाद को लेकर नई हलचल जरूर पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत और Strait of Hormuz को लेकर फैसले से यह साफ हो सकता है कि दोनों देश तनाव कम करने की दिशा में बढ़ते हैं या संघर्ष का दायरा और बढ़ता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

रायपुर में आज कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, वोट चोरी के आरोप और CEC के इस्तीफे की मांग

राजधानी रायपुर में कांग्रेस सोमवार को वोट चोरी के आरोप और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव करेगी। पार्टी का प्रदर्शन दोपहर में प्रस्तावित है। प्रदेश कांग्रेस के नए प्रभारी सुखदेव भगत भी इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। कांग्रेस ने देशभर में चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। इसके तहत 25 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस कमेटियों ने राज्य चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकाला था। अब आंदोलन के दूसरे चरण में 28 सितंबर को जिला कांग्रेस कमेटियों को कलेक्ट्रेट तक मार्च और प्रदर्शन करने के निर्देश दिए गए हैं। सुखदेव भगत की मौजूदगी में होगा प्रदर्शन प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखदेव भगत रविवार को रायपुर पहुंचे। सोमवार को वे पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसी दौरान कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालेंगे। प्रदर्शन में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के शामिल होने की तैयारी है। कांग्रेस नेता चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मुद्दे उठाएंगे। 25 सितंबर को राज्य चुनाव आयोग कार्यालय तक मार्च कांग्रेस ने आंदोलन के पहले चरण में 25 सितंबर को देशभर में प्रदर्शन किया था। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस कमेटियों को राज्य चुनाव आयोग के कार्यालयों तक मार्च निकालने का कार्यक्रम दिया गया था। अब 28 सितंबर को जिला स्तर पर कलेक्ट्रेट घेराव को आंदोलन का दूसरा चरण बताया जा रहा है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने जिला कांग्रेस समितियों को कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालने के निर्देश दिए हैं। चुनाव आयोग के फैसलों पर 14 बार आपत्ति का दावा विवाद के बीच इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों में दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई। रिपोर्ट में कहा गया कि इन आपत्तियों पर सुनवाई नहीं हुई। चुनाव आयोग ने बैठक के बाद इन दावों पर अपना पक्ष भी रखा। कांग्रेस ने आयोग की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि वह अंदरूनी मतभेद सामने आने के बाद स्थिति संभालने की कोशिश कर रहा है। पार्टी ने कई राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया को रोकने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पहले भी उठा चुकी है कांग्रेस अप्रैल 2026 में कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया था कि विपक्ष के 73 राज्यसभा सांसदों ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिया है। इसमें उनके खिलाफ ‘साबित कदाचार’ का आरोप लगाए जाने की बात कही गई थी। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। कांग्रेस ने SIR के दौरान वास्तविक मतदाताओं के प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की थी। इससे पहले लोकसभा में भी उन्हें हटाने से जुड़ा प्रस्ताव लाए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। पहले भी चुनाव आयोग में सामने आए हैं मतभेद 1993-95: टीएन शेषन और साथी चुनाव आयुक्त 1993 में दो और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के बाद चुनाव आयोग बहुसदस्यीय हो गया था। तत्कालीन CEC टीएन शेषन ने इस व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 14 जुलाई 1995 को सुप्रीम कोर्ट ने बहुसदस्यीय चुनाव आयोग की व्यवस्था को बरकरार रखा। इस दौरान शेषन और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच अधिकारों और कामकाज को लेकर मतभेद भी सामने आए थे। 2009: CEC ने चुनाव आयुक्त को हटाने की सिफारिश की जनवरी 2009 में तत्कालीन CEC एन. गोपालस्वामी ने चुनाव आयुक्त नवीन चावला को हटाने की सिफारिश राष्ट्रपति से की थी। उन्होंने चावला पर पक्षपात का आरोप लगाया था। राष्ट्रपति ने इस सिफारिश को स्वीकार नहीं किया। बाद में अप्रैल 2009 में नवीन चावला CEC बने। 2019: अशोक लवासा की अलग राय 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह से जुड़े आचार संहिता के कुछ मामलों में आयोग के बहुमत से अलग राय रखी थी। उन्होंने अपनी असहमति को आदेशों में दर्ज करने की मांग की थी। 21 मई 2019 को आयोग ने 2:1 के बहुमत से तय किया कि ऐसी असहमति को अंतिम आदेश में सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, हालांकि उसे फाइल में दर्ज किया जा सकता है। इसके बाद लवासा ने आचार संहिता से संबंधित कुछ बैठकों से खुद को अलग कर लिया था। कांग्रेस ने उठाए चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के जरिए मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। पार्टी CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग कर रही है।

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