उत्तर प्रदेश की राजनीति में सोमवार को एक बड़ा सियासी घटनाक्रम देखने को मिला, जब सत्ता और विपक्ष दोनों दलों के ठाकुर समुदाय से जुड़े करीब 40 विधायक और विधान परिषद सदस्य एक मंच पर नजर आए। ‘कुटुंब परिवार’ नाम से आयोजित यह खास बैठक लखनऊ के फाइव-स्टार होटल क्लार्क अवध में हुई, जिसने विधानसभा सत्र के बीच राजनीतिक हलचल बढ़ा दी।
BJP और Opposition के Thakur नेता एक मंच पर
बैठक में BJP, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और निर्दलीय पृष्ठभूमि के ठाकुर विधायक शामिल हुए। इसमें सत्तारूढ़ पार्टी के मौजूदा MLA, सपा के बागी सदस्य और विपक्षी दलों के नेता भी मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक, इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य ठाकुर समुदाय के नेताओं के बीच एकजुटता और आपसी संवाद को मजबूत करना था।
‘कुटुंब परिवार’ WhatsApp Group और सांस्कृतिक Symbols
कार्यक्रम के बाद ‘कुटुंब परिवार’ नाम का एक व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया, जिसमें सत्ता और विपक्ष दोनों के ठाकुर नेता जुड़े हैं। इस मीटिंग में हर प्रतिभागी को भगवान राम की मूर्ति, महाराणा प्रताप की तस्वीर और पीतल का त्रिशूल भेंट किया गया, जिसे जातीय पहचान और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक माना जा रहा है।
8 साल बाद ऐसा जमावड़ा
पिछले आठ वर्षों में ठाकुर समुदाय के विधायकों का इतना बड़ा और संगठित जमावड़ा पहली बार हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इसे केवल सामाजिक कार्यक्रम न मानकर आने वाले समय की सियासी रणनीति और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक Significance
चूंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी ठाकुर समुदाय से आते हैं, इसलिए यह मीटिंग भाजपा के अंदर और बाहर दोनों ही जगह संदेश देने वाली मानी जा रही है। विधानसभा सत्र के दौरान इस तरह की एकजुटता भविष्य की राजनीति में बड़ा असर डाल सकती है।
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