UPI पेमेंट को लेकर इन दिनों एक बड़ा बदलाव चर्चा में है। सरकार ने Payment and Settlement Systems Act में संशोधन के जरिए भविष्य में कुछ चुनिंदा बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR यानी Merchant Discount Rate लगाने का रास्ता साफ किया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहकों से UPI पेमेंट पर सीधे कोई शुल्क लिया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि आम यूजर्स के UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगाया जाएगा।
क्या ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 0.4% चार्ज लगेगा?
फिलहाल यह समझना जरूरी है कि 0.4% MDR को सरकार ने सभी ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर लागू किया हुआ शुल्क नहीं बताया है। सरकार के आधिकारिक बयान के मुताबिक भविष्य में MDR लागू किया गया तो इसे एक तय सीमा से ऊपर के सीमित मर्चेंट ट्रांजैक्शन तक रखा जाएगा। इसकी दर और अंतिम दायरा संबंधित व्यवस्था के तहत तय होगा।
सबसे अहम बात यह है कि ग्राहक से UPI ट्रांजैक्शन फीस नहीं ली जाएगी। Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI पेमेंट भी फ्री रहेंगे।
सरकार ने बदलाव की जरूरत क्यों बताई?
सरकार का कहना है कि UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और इसे सुरक्षित, मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम बनाए रखने के लिए पूरे पेमेंट इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना जरूरी है।
जुलाई 2026 में UPI पर 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹29.88 लाख करोड़ रही। इस समय 741 बैंक UPI से जुड़े हुए थे। वित्त वर्ष 2025-26 में देश के डिजिटल पेमेंट में UPI की हिस्सेदारी करीब 84% रही।
MDR क्या होता है?
MDR यानी Merchant Discount Rate डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले मर्चेंट से जुड़ी फीस है। इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि किसी दुकानदार या कारोबारी को डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा उपलब्ध कराने की लागत का एक हिस्सा MDR के रूप में लिया जा सकता है।
यह ग्राहक से सीधे वसूला जाने वाला चार्ज नहीं है। सरकार ने भी कहा है कि UPI यूजर्स के लिए ट्रांजैक्शन फ्री रहेंगे।
क्या इसका असर दुकानदार पर पड़ेगा?
अगर भविष्य में किसी मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू होता है, तो इसका सीधा असर कारोबारी की पेमेंट लागत पर पड़ेगा।
हालांकि, कोई दुकानदार इस अतिरिक्त लागत को अपने कारोबार की कुल लागत में शामिल करता है या नहीं और इसका असर सामान या सेवा की कीमत पर पड़ता है या नहीं, यह कारोबारी और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
छोटे दुकानदारों के लिए क्या व्यवस्था है?
सरकार ने पहले भी छोटे कारोबारियों के लिए कम राशि वाले UPI पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना चलाई है। वित्त वर्ष 2024-25 की योजना में ₹2,000 तक के UPI P2M ट्रांजैक्शन पर छोटे मर्चेंट के लिए MDR शून्य रखा गया था और 0.15% तक का इंसेंटिव दिया गया था।
इसलिए ₹2,000 की सीमा से जुड़ी पुरानी इंसेंटिव व्यवस्था और भविष्य में MDR लगाने की सक्षम व्यवस्था को एक ही चीज नहीं समझना चाहिए।
सरकार ने UPI को फ्री रखने के लिए क्या किया?
UPI को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कम मूल्य वाले BHIM-UPI ट्रांजैक्शन के लिए इंसेंटिव स्कीम शुरू की थी। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए इस योजना पर ₹1,500 करोड़ का प्रावधान किया गया था। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों के बीच डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना था।
UPI पर कितना बड़ा नेटवर्क है?
जून 2026 तक करीब 55.49 करोड़ यूजर्स UPI प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड थे। वित्त वर्ष 2025-26 में UPI पर करीब 24,162 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹314 लाख करोड़ रही।
जुलाई 2026 तक 741 बैंक UPI से जुड़े थे और इसी महीने रिकॉर्ड करीब 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए।



