अंबिकापुर की सुरबिल दास मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। सरगुजा जिले के लखनपुर ब्लॉक के ग्राम गोरता की रहने वाली सुरबिल पिछले पांच वर्षों से मशरूम की खेती कर रही हैं। अपनी मेहनत और नवाचार के दम पर वे मशरूम उत्पादन की नेशनल ट्रेनर बन चुकी हैं। इसके साथ ही वे सुभाष महिला स्व-सहायता समूह का भी सक्रिय रूप से संचालन कर रही हैं।
सुरबिल की विशेषज्ञता और प्रशिक्षण कौशल को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, अंबिकापुर ने उन्हें 20×28 आकार के दो सेटअप और उत्पादन के लिए जगह उपलब्ध कराई है। वे साल में दो सीजन में मशरूम का उत्पादन करती हैं। पिछले साल उन्होंने 2.5 टन ऑयस्टर मशरूम और 1.50 टन बटन मशरूम का उत्पादन किया था। इस साल भी उन्होंने ऑयस्टर मशरूम की खेती शुरू कर दी है, जबकि बटन मशरूम के लिए कम्पोस्ट तैयार है।
मशरूम के कचरे से बनाती हैं जैविक खाद
सुरबिल की खेती की सबसे खास बात उनकी शून्य अपशिष्ट तकनीक है। वे मशरूम उत्पादन के बाद बचने वाले अवशेषों को फेंकने के बजाय उनसे जैविक खाद तैयार करती हैं। इस तरह कृषि अपशिष्ट का दोबारा उपयोग होता है और खेती में रासायनिक पदार्थों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है।
वे जरूरत के अनुसार तैयार जैविक खाद की बिक्री भी करती हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होती है। इस तकनीक के जरिए वे मशरूम उत्पादन के साथ-साथ खेती के दूसरे कामों में भी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर रही हैं।
मशरूम से बड़ी, अचार और पापड़ बनाकर बढ़ा रहीं आमदनी
सुरबिल केवल मशरूम उगाने तक सीमित नहीं हैं। वे खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में भी काम कर रही हैं। मशरूम से बड़ी, अचार और पापड़ जैसे उत्पाद तैयार कर बाजार में बेचती हैं। इससे मशरूम का बेहतर उपयोग होता है और तैयार उत्पादों के जरिए अतिरिक्त आय का रास्ता खुलता है।
उनका प्रयास है कि महिलाएं केवल कच्चे उत्पाद के उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि उससे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करके अपनी कमाई बढ़ा सकें।
500 से अधिक लोगों को दे चुकी हैं प्रशिक्षण
सुरबिल दास अब तक 500 से अधिक लोगों को मशरूम उत्पादन की तकनीक सिखा चुकी हैं। वे सरगुजा जिले के 20 से 25 गांवों में जाकर महिलाओं को मशरूम उगाने के साथ-साथ फूड प्रोसेसिंग का प्रशिक्षण भी देती हैं।
उनका उद्देश्य महिलाओं को ऐसी तकनीक और कौशल से जोड़ना है, जिनकी मदद से वे घर पर ही मशरूम उत्पादन और उससे जुड़े उत्पाद तैयार कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
उद्यानिकी कॉलेज के विद्यार्थियों को भी दे रहीं मार्गदर्शन
सुरबिल की विशेषज्ञता का लाभ अब कृषि और उद्यानिकी के विद्यार्थियों को भी मिल रहा है। वे सिलफिली स्थित महात्मा गांधी उद्यानिकी कॉलेज में मशरूम उत्पादन शुरू कराने और तकनीकी मार्गदर्शन देने का काम कर रही हैं।
एक महिला किसान के रूप में सुरबिल दास की यह यात्रा दिखाती है कि मेहनत, नवाचार और प्रशिक्षण के जरिए खेती को आय के बेहतर अवसरों में बदला जा सकता है। साथ ही, उनका काम ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।






































