जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायक पोस्टर लेकर सदन में पहुंचे, जिन पर ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने की मांग की गई थी।
इसी बीच महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाओं में SIR की प्रक्रिया, संवैधानिक वैधता और इसे लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं।
10 महीने में 14 बार आपत्ति का दावा
मामला उस रिपोर्ट के बाद सामने आया है, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े चुनाव आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें कुछ आपत्तियां वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने और चुनावी डेटा से जुड़े फैसलों पर थीं।
हालांकि, चुनाव आयोग ने कहा था कि आयोग के भीतर इस तरह की चर्चाएं और मतभेद सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा SIR समेत अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
राहुल गांधी और विपक्ष ने CEC पर उठाए सवाल
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए और उनके इस्तीफे की मांग की। राहुल गांधी ने भी ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि उन्होंने वोट चोरी की है। ये आरोप राहुल गांधी के हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं पेश किया जा सकता। विपक्ष की ओर से ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर संसद में प्रस्ताव लाने की भी बात सामने आई है।
बॉम्बे हाईकोर्ट में SIR के खिलाफ दो याचिकाएं
पहली याचिका:
महाराष्ट्र के कुछ मतदाताओं की ओर से दायर याचिका में SIR के दौरान जारी 14 प्रशासनिक आदेशों को रद्द करने, हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और नाम हटाने की प्रक्रिया की जांच के लिए स्वतंत्र व्यवस्था की मांग की गई है। याचिका में SIR प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।
याचिका में महाराष्ट्र में नई और कानूनी रूप से वैध वोटर लिस्ट तैयार होने तक विधानसभा चुनाव टालने की मांग का भी उल्लेख है।
दूसरी याचिका:
दूसरी याचिका में ASDD मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया और SIR के दौरान दस्तावेज जमा करने से जुड़े नियमों पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने SIR और ASDD से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने तथा महाराष्ट्र से जुड़े SIR निर्देशों को रद्द करने की मांग की है।
याचिकाओं में 14 आदेशों को चुनौती
बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि 14 प्रशासनिक फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद लिए गए। अदालत से इन फैसलों की समीक्षा और SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की गई है।



