सागर के विनायका थाना क्षेत्र में जुलाई 2025 में अपनी 50 वर्षीय मां की हत्या करने वाले आरोपी बेटे को बंडा न्यायालय ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएल शाक्य ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए अपराध को जघन्यतम श्रेणी का माना और आरोपी को दोषी ठहराया।
मामले में खास बात यह रही कि मृतका के पति और आरोपी के पिता ही फरियादी थे, लेकिन सुनवाई के दौरान उन्होंने आरोपी के पक्ष में बयान दिए। इसके बावजूद अभियोजन ने पुलिस जांच में जुटाए गए भौतिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अपराध साबित किया।
पिता अदालत में मुकर गए, DNA और फिंगरप्रिंट बने अहम साक्ष्य
मामले में मृतका के पति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, न्यायालयीन कार्रवाई के दौरान उन्होंने आरोपी के पक्ष में बयान दिए।
इसके बावजूद पुलिस जांच के दौरान जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य आरोपी के खिलाफ अहम साबित हुए। मृतका के शरीर से मिले जैविक साक्ष्य आरोपी के DNA से मैच हुए। वहीं घटनास्थल से मिले फिंगरप्रिंट भी आरोपी से मेल खाए।
अभियोजन पक्ष ने इन्हीं भौतिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ अपराध सिद्ध हुआ।
मां ने विरोध किया तो पत्थर और कुल्हाड़ी से हमला
घटना 19-20 जुलाई 2025 की दरम्यानी रात की है। मृतका का पति अपनी बेटी को लेने छतरपुर गया हुआ था। घर में उसकी पत्नी और इकलौता बेटा मौजूद थे।
20 जुलाई को जब पति वापस लौटा तो उसे घर में पत्नी का लहूलुहान शव मिला। घटना के बाद आरोपी बेटा घर से फरार था।
पुलिस जांच में आरोप सामने आया कि आरोपी ने अपनी मां के साथ गलत काम करने का प्रयास किया था। मां द्वारा विरोध किए जाने पर आरोपी ने कथित तौर पर पत्थर और कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी हत्या कर दी।
हत्या के बाद इंदौर भागा, सड़क से पकड़ा गया
हत्या के बाद आरोपी इंदौर भाग गया था। विनायका पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और उसे बांदरी-मालथौन रोड से गिरफ्तार किया।
प्रकरण की जांच विनायका थाना प्रभारी उप निरीक्षक भूपेंद्र विश्वकर्मा ने की। पुलिस ने घटनास्थल से भौतिक और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए और इन्हीं के आधार पर मामले को मजबूत किया।
अदालत ने अपराध को जघन्यतम श्रेणी में माना
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरएल शाक्य ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन की दलीलों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने अपराध को जघन्यतम श्रेणी का मानते हुए आरोपी को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
प्रकरण में अभियोजन की ओर से अतिरिक्त अभियोजन अधिकारी संजय पटेल ने पैरवी की।

