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इंदौर में 30 बेड का बाल सेवा विशिष्ट वार्ड शुरू होगा, गरीब और दिव्यांग बच्चों का होगा मुफ्त इलाज; 5 नवंबर को लोकार्पण

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इंदौर में आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 30 बेड का बाल सेवा विशिष्ट वार्ड शुरू किया जा रहा है। इस वार्ड में जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क उपचार, सर्जरी और पुनर्वास की सुविधाएं मिलेंगी। आरोग्य भारती इंदौर महानगर और नीमा इंस्टीट्यूट फॉर ऑर्थोपेडिक एंड रिहैबिलिटेशन ट्रस्ट की संयुक्त पहल पर तैयार किए जा रहे इस वार्ड का लोकार्पण 5 नवंबर को होगा।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह आलोक कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वहीं, आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय विशेष अतिथि रहेंगे।

36 साल में 30 हजार दिव्यांग बच्चों का हुआ मुफ्त इलाज

डॉ. प्रमोद नीमा ने बताया कि इस सेवा अभियान की शुरुआत वर्ष 1991 में हुई थी। पिछले 36 वर्षों में मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए करीब 30 हजार दिव्यांग बच्चों का निशुल्क ऑपरेशन किया जा चुका है।

इस दौरान कुल 548 चिकित्सा शिविर आयोजित किए गए। इनमें बच्चों की पहचान और स्वास्थ्य जांच से लेकर सर्जरी, कृत्रिम उपकरण उपलब्ध कराने और पुनर्वास तक की सुविधाएं दी गईं।

जरूरतमंद बच्चों को मिलेगा बेहतर जीवन का अवसर

डॉ. नीमा के मुताबिक, चिकित्सा का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों को सम्मान के साथ बेहतर जीवन जीने का अवसर देना भी है। आर्थिक परेशानियों के कारण कई परिवार अपने बच्चों का समय पर इलाज नहीं करा पाते। ऐसे में नया बाल सेवा विशिष्ट वार्ड उनके लिए काफी मददगार साबित होगा।

उन्होंने बताया कि पिछले 36 वर्षों से संचालित इस अभियान को अब 30 बेड के स्थायी निशुल्क बाल सेवा विशिष्ट वार्ड के रूप में विस्तार दिया जा रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग बच्चों को उपचार और पुनर्वास की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

Muskan Negi

muskannegi1302@gmail.com

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Weather

Weather Alert: 3 राज्यों में बदला मौसम, ओडिशा में 7 की मौत, यूपी में कोहरा और तमिलनाडु में बारिश

देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम (Weather) का मिजाज बदल रहा है। कहीं भारी बारिश और भूस्खलन लोगों के लिए मुसीबत बन रहे हैं, तो कहीं घना कोहरा यातायात को प्रभावित कर रहा है। ओडिशा में चक्रवात के बाद हुए भूस्खलन ने कई परिवारों को तबाह कर दिया है। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6 लोग लापता हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के करीब 20 शहरों में शुक्रवार सुबह घना कोहरा छाया रहा। इसका असर रेल यातायात पर भी पड़ा है। दूसरी ओर तमिलनाडु में मौसम विभाग ने कई जिलों में बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। Odisha में Landslide से 7 की मौत, 6 लोग लापता ओडिशा के गंजाम जिले के गिडीपाबली गांव में भूस्खलन से भारी तबाही हुई है। 28 अक्टूबर को आए चक्रवात अर्नब के बाद हुई मूसलाधार बारिश के कारण पहाड़ी से बड़े-बड़े पत्थर, मिट्टी और पेड़ नीचे आ गिरे। इसकी चपेट में गांव के कई मकान आ गए। हादसे के बाद से लगातार राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। गुरुवार को बचाव दल ने मलबे से पांच और शव बरामद किए। इससे भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है। लापता 6 लोगों की तलाश अब भी जारी है। बरामद किए गए पांच शव एक ही परिवार के सदस्यों के थे। इनमें पति-पत्नी और उनके तीन बच्चे शामिल हैं। परिवार के सदस्यों की पहचान के बाद प्रशासन ने परिजनों की इच्छा के अनुसार घटनास्थल पर ही अंतिम संस्कार की व्यवस्था की। प्रशासन के मुताबिक, बचाव अभियान में ODRAF, NDRF, दमकल विभाग और रेलवे की टीमें जुटी हुई हैं। करीब 200 से 250 बचावकर्मी अभियान में लगाए गए हैं। मौसम में कुछ सुधार होने से राहत कार्य में तेजी आई है, लेकिन बड़े पत्थरों और दुर्गम रास्तों के कारण अभियान अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इस आपदा में ओडिशा के अन्य इलाकों में हुई मौतों को मिलाकर कुल मृतकों की संख्या 11 तक पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है। UP के 20 शहरों में घना कोहरा, 5 ट्रेनें रद्द उत्तर प्रदेश में नवंबर की शुरुआत के साथ ही सुबह और रात के तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। शुक्रवार सुबह प्रदेश के करीब 20 शहरों में घना कोहरा छाया रहा। लखनऊ, बाराबंकी, महाराजगंज, श्रावस्ती और संभल समेत कई इलाकों में विजिबिलिटी कम होने से लोगों को परेशानी हुई। श्रावस्ती में दृश्यता 10 मीटर से भी कम दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। सुबह के समय सड़कों पर वाहन चालकों को खास सावधानी बरतनी पड़ी। कोहरे के बीच रेल यात्रियों की परेशानी भी बढ़ी है। मिर्जापुर से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, सर्दियों की रेलवे समय-सारणी के तहत पांच ट्रेनों को अगले तीन महीने के लिए रद्द किया गया है। यात्रियों को सलाह है कि स्टेशन पहुंचने से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस और रेलवे की ओर से जारी अपडेट जरूर देख लें। Tamil Nadu के 10 जिलों में Rain Alert दक्षिण भारत के तमिलनाडु में बारिश का दौर जारी है। चेन्नई के क्षेत्रीय मौसम केंद्र ने 6 नवंबर की शुरुआत में 10 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना जताई थी। इन जिलों में कांचीपुरम, तिरुवन्नामलाई, तिरुपत्तूर, वेल्लोर, कृष्णागिरी, धर्मपुरी, इरोड, सलेम, नमक्कल और नीलगिरी शामिल हैं। वहीं 6 नवंबर को राज्य के सात जिलों में भारी बारिश और गरज-चमक की आशंका जताई गई है। इनमें थेनी, डिंडीगुल, मदुरै, तूतीकोरिन, रामनाथपुरम, शिवगंगा और पुदुकोट्टई शामिल हैं। मौसम विभाग के अनुसार, तमिलनाडु में बारिश का असर अगले कुछ दिनों तक बने रहने की संभावना है। शनिवार को भी थेनी, डिंडीगुल और मदुरै में भारी बारिश हो सकती है। रविवार को बारिश का प्रभाव डेल्टा और दक्षिणी जिलों की ओर बढ़ने का अनुमान है। चेन्नई के कुछ हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और सड़कों पर फिसलन की स्थिति बन सकती है। Madhya Pradesh में भी बढ़ी ठंड, गिरा तापमान मध्य प्रदेश में फिलहाल मौसम शुष्क बना हुआ है, लेकिन रात के तापमान में गिरावट से ठंड का असर बढ़ने लगा है। भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में सुबह और रात के समय ठंड महसूस की जा रही है। शुक्रवार को शाजापुर के पास गिरवर में प्रदेश का न्यूनतम तापमान 11.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इंदौर में न्यूनतम तापमान 12.7 डिग्री और भोपाल में 13.5 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुसार, 6 से 8 नवंबर के बीच प्रदेश में बारिश की संभावना नहीं है। फिलहाल मौसम साफ और शुष्क रहने का अनुमान है। नवंबर के दूसरे पखवाड़े में ठंड का असर और बढ़ सकता है। लोगों के लिए मौसम विभाग की जरूरी सलाह कुल मिलाकर, 6 नवंबर को देश के कई राज्यों में मौसम का अलग-अलग असर देखने को मिल रहा है। ओडिशा में भूस्खलन के बाद लापता लोगों की तलाश जारी है, उत्तर प्रदेश में कोहरा रेल और सड़क यातायात के लिए परेशानी बन रहा है, जबकि तमिलनाडु में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। वहीं मध्य प्रदेश में धीरे-धीरे सर्दी अपना असर दिखाने लगी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
अमिताभ बच्चन

Mumbai Bomb Threat: अमिताभ बच्चन के बंगले ‘जलसा’ को उड़ाने की धमकी, Bombay HC और BSE भी निशाने पर

Mumbai में एक बार फिर बम की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया है। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के जुहू स्थित बंगले ‘जलसा’ को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस बार धमकी के दायरे में सिर्फ अमिताभ बच्चन का घर ही नहीं, बल्कि बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court), बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) और महालक्ष्मी रेसकोर्स भी शामिल हैं। 6 नवंबर को सामने आए इस मामले ने मुंबई की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। फिलहाल जांच की जा रही है कि यह ईमेल किसने भेजा और इसके पीछे उसका मकसद क्या है। Bombay High Court को मिला धमकी भरा Email मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को बॉम्बे हाईकोर्ट को एक धमकी भरा ईमेल मिला। इसमें मुंबई के कई महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाने की बात कही गई थी। ईमेल में अमिताभ बच्चन का बंगला जलसा, बॉम्बे हाईकोर्ट, BSE और महालक्ष्मी रेसकोर्स का नाम शामिल बताया गया है। इस सूचना के सामने आते ही सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं। हालांकि, अभी तक किसी वास्तविक विस्फोटक या हमले की पुष्टि नहीं हुई है। ईमेल भेजने वाले की पहचान और धमकी की गंभीरता का पता लगाने के लिए जांच जारी है। अक्टूबर में भी ‘जलसा’ को मिली थी धमकी अमिताभ बच्चन के बंगले को लेकर यह पहली धमकी नहीं है। इससे पहले 23 अक्टूबर 2026 को भी उनके बंगले जलसा को निशाना बनाने की धमकी मिली थी। उस समय मुंबई की मेयर ऋतु तावड़े के कार्यालय को एक धमकी भरा ईमेल भेजा गया था। इसमें मेयर कार्यालय, कुछ स्कूलों, अमिताभ बच्चन के बंगले और पंजाबी सिंगर दिलजीत दोसांझ के मुंबई कॉन्सर्ट का जिक्र किया गया था। ईमेल में कथित तौर पर खालिस्तान नेशनल आर्मी (KNA) का नाम भी इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, किसी संगठन की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी। धमकी के बाद बढ़ाई गई थी अमिताभ बच्चन की Security पिछली धमकी के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई थी। अमिताभ बच्चन के बंगले के आसपास निगरानी भी सख्त की गई थी। पुलिस ने संबंधित स्थानों की जांच की थी, लेकिन उस दौरान कोई संदिग्ध वस्तु मिलने की पुष्टि नहीं हुई थी। 2 नवंबर को अमिताभ बच्चन अपने बंगले जलसा के बाहर हर रविवार की तरह प्रशंसकों से मिलने पहुंचे थे। हालांकि, इस बार सुरक्षा पहले से ज्यादा कड़ी नजर आई। अमिताभ बच्चन बुलेटप्रूफ शीशे के पीछे से अपने प्रशंसकों का अभिवादन करते दिखाई दिए थे। इस दौरान अभिषेक बच्चन भी उनके साथ मौजूद थे। Mumbai में लगातार मिल रही धमकियों से बढ़ी चिंता मुंबई जैसे बड़े शहर में हाईकोर्ट, स्टॉक एक्सचेंज और मशहूर हस्तियों के घरों को धमकी मिलना निश्चित रूप से चिंता का विषय है। खासकर तब, जब कुछ ही दिनों के अंतराल में इसी तरह के मामले सामने आ रहे हों। अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि अलग-अलग धमकी भरे ईमेल के पीछे एक ही व्यक्ति या समूह है अथवा ये अलग-अलग मामले हैं। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और किसी भी संभावित खतरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि धमकी देने वाले का इरादा क्या था। जांच पूरी होने और आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो पाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi-NCR

Delhi-NCR Pollution: सुप्रीम कोर्ट की दो टूक, ज्यादा पाबंदियों से नहीं सुधरेगी दिल्ली की हवा

Delhi-NCR में प्रदूषण का स्तर लगातार लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। सुबह घर से निकलते ही धुंध और स्मॉग का सामना करना पड़ रहा है। कहीं आंखों में जलन है तो कहीं सांस लेने में परेशानी। ऐसे माहौल में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण को लेकर ऐसी टिप्पणी की है, जिसने एक बार फिर दिल्ली की एयर क्वालिटी और सरकारी इंतजामों पर चर्चा तेज कर दी है। 6 नवंबर 2026 को प्रदूषण के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पाबंदियां लगाने और एक के बाद एक आदेश जारी करने से समस्या खत्म नहीं होगी। कोर्ट की टिप्पणी थी कि जितने ज्यादा आदेश दिए जाएंगे, उनके उल्लंघन की आशंका भी उतनी ही बढ़ सकती है। अदालत ने साफ किया कि प्रदूषण से निपटने के लिए केवल कागजी आदेश नहीं, बल्कि जमीन पर असर दिखाने वाले कदम जरूरी हैं। Delhi AQI Today: 391 तक पहुंचा प्रदूषण का स्तर दिल्ली की हवा की स्थिति कितनी खराब है, इसका अंदाजा AQI के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 6 नवंबर को राजधानी का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 391 दर्ज किया गया। यह बेहद खराब श्रेणी में आता है और गंभीर स्तर के काफी करीब है। CPCB के मॉनिटरिंग आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से 30 पर AQI गंभीर श्रेणी में पहुंच गया। रोहिणी और IIT दिल्ली सहित कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर काफी ज्यादा दर्ज किया गया। इसका असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ रहा है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने गाड़ियों के धुएं पर उठाए सवाल सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिल्ली-NCR में बढ़ते ट्रैफिक और सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारों पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली को गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा से जोड़ने वाली सड़कों पर वाहनों का दबाव भी प्रदूषण की बड़ी वजह है। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ता है, जो रोजी-रोटी के लिए सड़कों पर काम करते हैं। इसलिए प्रदूषण रोकने के उपाय बनाते समय गरीब और मेहनतकश लोगों की परेशानियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पराली जलाने पर किसानों को सिर्फ आदेश देना काफी नहीं दिल्ली के प्रदूषण की चर्चा हो और पराली का मुद्दा न आए, ऐसा कम ही होता है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या के समाधान के लिए किसानों को आर्थिक विकल्प देने की जरूरत बताई। कोर्ट का कहना था कि किसानों को केवल पराली न जलाने का निर्देश देने से बात नहीं बनेगी। उन्हें यह भी समझाना होगा कि पराली के दूसरे तरीके से प्रबंधन करने पर उन्हें क्या आर्थिक फायदा मिल सकता है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि 5 नवंबर को दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत थी। हालांकि, प्रदूषण के लिए सिर्फ पराली को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वाहनों, उद्योगों और निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल पर भी नियंत्रण जरूरी है। Delhi NCR में GRAP-2 लागू, फिर भी राहत का इंतजार दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 2 नवंबर को GRAP-2 के तहत प्रतिबंध लागू किए थे। इसके बावजूद हवा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा। GRAP-2 के तहत कई कदम उठाए गए हैं: इन कदमों का मकसद प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ नियंत्रण करना है। 20 नवंबर तक Work From Home और Construction पर पाबंदी दिल्ली-NCR में प्रदूषण को देखते हुए 5 से 20 नवंबर तक अतिरिक्त एहतियाती उपाय भी लागू किए गए हैं। दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में सरकारी और निजी कार्यालयों को अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम करने और बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम देने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा NCR में धूल पैदा करने वाले निर्माण और तोड़फोड़ के कामों पर रोक लगाई गई है। हालांकि, अस्पताल, मेट्रो, रेलवे, एयरपोर्ट, जलापूर्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रोजेक्ट को कुछ छूट दी गई है। पुराने वाहनों की Entry पर भी सख्ती दिल्ली में बाहर से आने वाले पुराने वाहनों पर भी प्रतिबंध लागू किए गए हैं। 1 नवंबर से दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-VI से नीचे के पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। इलेक्ट्रिक, CNG और BS-VI मानक वाले वाहनों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की टीमें अलग-अलग बॉर्डर पर वाहनों की जांच कर रही हैं। School बंद होंगे या Hybrid Mode में चलेंगे? प्रदूषण का असर बच्चों पर भी पड़ रहा है। इसी वजह से स्कूल बंद करने या हाइब्रिड मोड में पढ़ाई कराने का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट में उठा। हालांकि, सुनवाई के दौरान सभी स्कूलों को बंद करने का कोई नया आदेश नहीं दिया गया। इस विषय पर विशेषज्ञों की राय और परिस्थितियों के आधार पर फैसला लेने की जरूरत बताई गई। 16 नवंबर को फिर होगी मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि दिल्ली के प्रदूषण का समाधान केवल नए प्रतिबंध लगाने में नहीं है। इसके लिए सरकारों को मिलकर ऐसी रणनीति बनानी होगी, जिसका असर लंबे समय तक दिखाई दे। वाहनों का धुआं, पराली जलाना, निर्माण कार्यों की धूल और औद्योगिक प्रदूषण जैसे सभी कारणों पर एक साथ काम करना होगा। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को तय की है। फिलहाल दिल्ली के लोगों को साफ हवा के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कितनी पाबंदियां लगाई गईं, बल्कि यह भी है कि जो नियम पहले से मौजूद हैं, उनका पालन आखिर कितनी गंभीरता से कराया जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Iran

Iran का नया Proposal: अमेरिका को भेजीं 7 शर्तें, होर्मुज खोलने से किया इनकार

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ दोनों देशों के बीच शांति की कोशिशें चल रही हैं, तो दूसरी तरफ शर्तों को लेकर टकराव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच ईरान ने अमेरिका के सामने सात शर्तों वाला नया प्रस्ताव रख दिया है। तेहरान का साफ कहना है कि जब तक उसकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी। इतना ही नहीं, ईरान ने दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापारिक रास्तों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने से भी इनकार कर दिया है। रॉयटर्स की 5 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को अपना नया परमाणु प्रस्ताव भेजा है। अमेरिकी प्रशासन फिलहाल इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है। ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेजाई ने रूस दौरे के दौरान कहा कि अमेरिका को पहले उसकी सात शर्तें माननी होंगी। इसके बाद ही बातचीत और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर विचार किया जाएगा। ईरान की 7 शर्तें क्या हैं? Iran की ओर से भेजे गए नए प्रस्ताव की पूरी आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों के बयानों और पहले पेश किए गए सात चरणों वाले प्रस्ताव के आधार पर कुछ प्रमुख मांगें सामने आई हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये मांगें अलग-अलग बयानों और पुराने प्रस्तावों से सामने आई हैं। इन्हें नए प्रस्ताव की प्रमाणित आधिकारिक सात-सूत्रीय सूची नहीं माना जाना चाहिए। Hormuz Strait को लेकर ईरान का सख्त रुख होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे विवाद का सबसे अहम हिस्सा बन गया है। यह समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले तेल व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। Iran का कहना है कि अमेरिका जब तक अपनी नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं करता और उसकी मांगों पर सहमति नहीं बनती, तब तक होर्मुज में सामान्य आवाजाही बहाल करने का फैसला नहीं लिया जाएगा। हालांकि, ईरान ने इससे पहले मध्यस्थों के सामने एक ऐसा प्रस्ताव भी रखा था, जिसके तहत समझौता होने पर दो दिनों के भीतर होर्मुज को खोलने की संभावना जताई गई थी। यानी रास्ता खोलने का विकल्प पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन इसके लिए ईरान अपनी शर्तों पर समझौता चाहता है। अमेरिका की मांग और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में सबसे बड़ी रुकावट परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है। वॉशिंगटन चाहता है कि किसी भी शुरुआती समझौते में ईरान के यूरेनियम संवर्धन, परमाणु भंडार और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण से जुड़े मुद्दों को शामिल किया जाए। दूसरी तरफ, तेहरान का कहना है कि पहले आर्थिक प्रतिबंधों और समुद्री नाकेबंदी जैसे मुद्दों का समाधान होना चाहिए। उसके बाद ही परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत आगे बढ़ सकती है। यही वजह है कि दोनों देश बातचीत के क्रम को लेकर भी सहमत नहीं हो पा रहे हैं। अमेरिका परमाणु मुद्दे को शुरुआत में शामिल करना चाहता है, जबकि ईरान पहले अपनी शर्तों पर कार्रवाई की मांग कर रहा है। कतर के जरिए जारी है बातचीत, लेकिन नहीं निकला समाधान दोनों देशों के बीच सीधे बातचीत के बजाय कतर के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान किया जा रहा है। 2 नवंबर को दोहा में ईरानी प्रतिनिधियों और कतर के मध्यस्थों के बीच बातचीत हुई थी। इस दौरान प्रस्ताव में बदलाव और समझौते के मसौदे पर चर्चा हुई, लेकिन कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी है और अब सब कुछ वॉशिंगटन के रुख पर निर्भर करता है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी कहा था कि सितंबर में पेश किए गए सात चरणों वाले प्रस्ताव को छोटा करके तेजी से लागू करने की संभावना पर काम किया जा रहा है। Trump ने सैन्य कार्रवाई का विकल्प रखा खुला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। हालांकि, उन्होंने सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला रखा है। इस बीच 3 नवंबर को अमेरिका ने ईरान के क़ेश्म द्वीप पर सीमित सैन्य कार्रवाई की थी। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे रक्षात्मक कार्रवाई बताया था। इसके बाद ईरान ने चेतावनी दी कि उस पर दोबारा हमला हुआ तो जवाबी कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बातचीत के जरिए समाधान निकलने की उम्मीद जताई है। वहीं, ईरान का कहना है कि वह अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है। चीन और रूस भी बढ़ा रहे कूटनीतिक प्रयास अमेरिका-ईरान तनाव के बीच चीन और रूस भी सक्रिय नजर आ रहे हैं। चीन ने सभी पक्षों से सैन्य कार्रवाई के बजाय राजनीतिक समाधान निकालने की अपील की है। वहीं, रूस ने भी दोबारा सैन्य संघर्ष शुरू होने की आशंका पर चिंता जताई है। कतर के अलावा ओमान और अन्य क्षेत्रीय देश भी तनाव कम करने की कोशिशों में जुटे हैं। इन देशों की चिंता है कि अगर संघर्ष दोबारा बढ़ा तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा और व्यापार पर पड़ सकता है। भारत पर क्या पड़ सकता है असर? होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक रुकावट रहने का असर भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों पर भी पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। अगर इस रास्ते से तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका असर आगे चलकर पेट्रोल-डीजल, माल ढुलाई और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा समुद्री जहाजों के बीमा और परिवहन खर्च में बढ़ोतरी से अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दबाव आ सकता है। अब आगे क्या होगा? फिलहाल ईरान का प्रस्ताव अमेरिका के पास है और उस पर समीक्षा जारी है। कतर समेत दूसरे मध्यस्थ दोनों देशों के बीच समझौते का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका ईरान की सात शर्तों पर सहमत होगा? या फिर परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज को लेकर दोनों देशों के...
Dhanteras आज, 6 और 7 नवंबर को खरीदारी के शुभ मुहूर्त

Dhanteras आज, 6 और 7 नवंबर को खरीदारी के शुभ मुहूर्त

दिवाली के पांच दिवसीय त्योहार की शुरुआत आज 6 नवंबर को Dhanteras के साथ हो गई है। हिंदू धर्म में Dhanteras का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता है कि धनतेरस पर नई चीजें खरीदने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। यही वजह है कि इस दिन बाजारों में सोना-चांदी, बर्तन, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है। इस बार त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर की सुबह 10:31 बजे शुरू होकर 7 नवंबर की सुबह 10:48 बजे तक रहेगी। ऐसे में दोनों दिन खरीदारी के लिए शुभ समय मिल रहा है। धनतेरस पर खरीदारी के शुभ मुहूर्त धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर शुभ चौघड़िया में खरीदारी करना अच्छा माना जाता है। भोपाल के पंचांग के अनुसार खरीदारी के कुछ प्रमुख शुभ समय इस प्रकार हैं। 6 नवंबर, शुक्रवार के शुभ मुहूर्त: 7 नवंबर, शनिवार के शुभ मुहूर्त: ध्यान दें कि ये समय भोपाल के स्थानीय पंचांग पर आधारित हैं। अलग-अलग शहरों में समय में कुछ अंतर हो सकता है। धनतेरस पर पूजा का शुभ समय धनतेरस के दिन शाम को भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। भोपाल में धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:10 बजे से रात 8:08 बजे तक रहेगा। वहीं प्रदोष काल शाम 5:39 बजे से रात 8:13 बजे तक है। इस दौरान घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने और भगवान से परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करने की परंपरा है। धनतेरस पर आखिर क्यों खरीदे जाते हैं बर्तन? धनतेरस पर नए बर्तन खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। इसके पीछे धार्मिक मान्यता भगवान धन्वंतरि से जुड़ी हुई है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी वजह से कलश और धातु के बर्तनों को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन नया बर्तन घर लाने से सुख-समृद्धि आती है। लोग अपनी सुविधा और बजट के अनुसार पीतल, तांबे, चांदी और स्टील के बर्तन खरीदते हैं। धनतेरस पर क्या-क्या खरीदना माना जाता है शुभ? धनतेरस पर कई चीजें खरीदने की परंपरा है। इनमें प्रमुख हैं: धनतेरस का क्या है धार्मिक महत्व? धनतेरस को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा विशेष रूप से की जाती है। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इसलिए धनतेरस केवल धन और संपत्ति से जुड़ा त्योहार नहीं है, बल्कि अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना का भी प्रतीक है। कुल मिलाकर, धनतेरस का संदेश सिर्फ खरीदारी तक सीमित नहीं है। यह त्योहार परिवार में खुशहाली, अच्छे स्वास्थ्य और सकारात्मकता का स्वागत करने का अवसर भी है। आप भी अपनी जरूरत और बजट के अनुसार खरीदारी करें और परिवार के साथ इस पर्व की खुशियां मनाएं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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