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भारत में बल्क स्कॉच व्हिस्की का इंपोर्ट 1000% बढ़ा, भारत-ब्रिटेन ट्रेड डील का दिखने लगा असर

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नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लागू होने के बाद देश में बल्क स्कॉच व्हिस्की के आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। अगस्त 2026 में इसका इंपोर्ट सालाना आधार पर करीब 1000% बढ़कर 12.39 मिलियन डॉलर यानी लगभग 117 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती के बाद कंपनियों ने बड़े शिपमेंट मंगाने शुरू कर दिए हैं।

भारत-ब्रिटेन ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत पात्र स्कॉच व्हिस्की पर इंपोर्ट ड्यूटी 150% से घटाकर 75% कर दी गई है।

इंपोर्ट ड्यूटी 150% से घटकर 75% हुई

ट्रेड एग्रीमेंट के तहत स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क में कटौती की गई है। इसके बाद कंपनियों ने भारत में ब्लेंडिंग और बॉटलिंग के लिए बल्क स्कॉच व्हिस्की मंगाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

अगस्त में बल्क स्कॉच के आयात में हुई करीब 1000% की बढ़ोतरी को इसी टैरिफ कटौती के शुरुआती असर के तौर पर देखा जा रहा है।

2 लीटर से बड़े कंटेनरों में इंपोर्ट 679% बढ़ा

दो लीटर से अधिक क्षमता वाले कंटेनरों में स्कॉच व्हिस्की का आयात करीब 679% बढ़कर 2.5 मिलियन लीटर पर पहुंच गया। एक साल पहले इसी अवधि में यह आंकड़ा 3.20 लाख लीटर था।

इससे संकेत मिलता है कि आयात में बढ़ोतरी केवल कीमतों में बदलाव के कारण नहीं, बल्कि बल्क शिपमेंट की मात्रा बढ़ने से भी हुई है।

छोटी बोतलों में स्कॉच का इंपोर्ट 30% घटा

बल्क शिपमेंट के उलट दो लीटर या उससे कम क्षमता वाली बोतलों में स्कॉच व्हिस्की के आयात में गिरावट आई है।

अगस्त 2026 में इस श्रेणी का इंपोर्ट सालाना आधार पर 30% घटकर 3.08 मिलियन डॉलर यानी करीब 29 करोड़ रुपए रहा। पिछले साल इसी अवधि में यह 4.39 मिलियन डॉलर यानी लगभग 41 करोड़ रुपए था।

इसका आयात वॉल्यूम भी 30% घटकर 5,71,449 यूनिट से 4,02,507 यूनिट रह गया। इससे पता चलता है कि टैरिफ कटौती का शुरुआती असर छोटी बोतलों के मुकाबले बल्क शिपमेंट पर ज्यादा दिखाई दिया है।

वित्त वर्ष 2027 के पहले पांच महीनों में 349% की बढ़ोतरी

वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों में बल्क स्कॉच व्हिस्की का आयात पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 349% बढ़ा है। यह बढ़ोतरी भारत में स्कॉच व्हिस्की की ब्लेंडिंग और बॉटलिंग के लिए बढ़ती मांग को भी दर्शाती है।

जिन और रम का इंपोर्ट भी बढ़ा

ब्रिटेन से केवल स्कॉच व्हिस्की ही नहीं, बल्कि अन्य अल्कोहलिक पेय पदार्थों का आयात भी बढ़ा है।

अगस्त में दो लीटर या उससे कम क्षमता वाले कंटेनरों में जिन का इंपोर्ट 150% बढ़कर 0.84 मिलियन डॉलर यानी करीब 8 करोड़ रुपए रहा। इसका आयात वॉल्यूम 185% बढ़कर 2,16,438 यूनिट पर पहुंच गया। इसी श्रेणी में रम के आयात में भी 147% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

सितंबर में कुल अल्कोहलिक बेवरेज इंपोर्ट 7.2% बढ़ा

सितंबर 2026 में भारत का कुल अल्कोहलिक बेवरेज इंपोर्ट सालाना आधार पर 7.2% बढ़कर 40.43 मिलियन डॉलर यानी करीब 382 करोड़ रुपए रहा। इस दौरान कुल आयात वॉल्यूम में 335.3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

हालांकि, सितंबर के लिए स्कॉच व्हिस्की, जिन और रम के अलग-अलग आयात से जुड़े आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं।

बल्क स्कॉच के वर्गीकरण को लेकर विवाद

बल्क स्कॉच व्हिस्की के आयात में तेजी के बीच हार्मोनाइज्ड सिस्टम ऑफ नोमेनक्लेचर (HSN) के तहत इन शिपमेंट के वर्गीकरण को लेकर विवाद सामने आया है। मुख्य सवाल यह है कि क्या भारत में ब्लेंडिंग और बॉटलिंग के लिए मंगाई जाने वाली बल्क स्कॉच को भी ट्रेड एग्रीमेंट के तहत रियायती इंपोर्ट ड्यूटी का लाभ मिलेगा या नहीं।

कॉमर्स मिनिस्ट्री ने रियायत जारी रखने का दिया भरोसा

2 नवंबर को कॉमर्स मिनिस्ट्री ने शराब निर्माताओं को भरोसा दिलाया कि बल्क स्कॉच व्हिस्की के वर्गीकरण से जुड़े विवाद को सुलझाने और ट्रेड एग्रीमेंट का लाभ जारी रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने घरेलू और बहुराष्ट्रीय शराब कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि मंत्रालय इस मुद्दे के समाधान के लिए वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर काम करेगा, ताकि कंपनियों का कारोबार बिना किसी बाधा के जारी रह सके।

अगले 10 साल में 40% तक आ सकती है इंपोर्ट ड्यूटी

ट्रेड एग्रीमेंट के तहत स्कॉच व्हिस्की पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाकर 75% की गई है। इसके बाद अगले 10 वर्षों में इसे धीरे-धीरे घटाकर 40% तक लाने की योजना है।

हालांकि, बल्क स्कॉच के मामले में विवाद इस बात को लेकर है कि भारत में ब्लेंडिंग और बॉटलिंग के लिए आयात की जाने वाली व्हिस्की को रियायती शुल्क का पात्र माना जाएगा या नहीं। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने स्पष्ट किया है कि भारत में प्रोसेसिंग करने वाले घरेलू उद्योग को भी ट्रेड एग्रीमेंट का लाभ दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

HSN कोड क्या है और बल्क स्कॉच पर विवाद क्यों?

HSN (हार्मोनाइज्ड सिस्टम ऑफ नोमेनक्लेचर): यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्तेमाल होने वाला उत्पाद वर्गीकरण कोड है। इसके जरिए कस्टम और टैक्स विभाग अलग-अलग उत्पादों की पहचान करते हैं और उन पर लागू शुल्क निर्धारित करते हैं।

विवाद की वजह: भारत-ब्रिटेन ट्रेड डील में स्कॉच व्हिस्की पर इंपोर्ट ड्यूटी 150% से घटाकर 75% की गई है। लेकिन कस्टम विभाग के स्तर पर यह सवाल उठा कि रियायत केवल बिक्री के लिए तैयार पैक बोतलों पर लागू होगी या भारत में ब्लेंडिंग और बॉटलिंग के लिए मंगाई जाने वाली बल्क स्कॉच पर भी मिलेगी।

कॉमर्स मिनिस्ट्री का कहना है कि भारत में प्रोसेसिंग करने वाले घरेलू उद्योग को भी इस रियायत का लाभ दिलाने के लिए संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर समाधान निकाला जाएगा।

Muskan Negi

muskannegi1302@gmail.com

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बिलासपुर में SECL महिला कर्मचारी से चेन स्नेचिंग, विरोध करने पर बदमाश ने की मारपीट

बिलासपुर। सरकंडा थाना क्षेत्र स्थित संपदा कैंपस में स्कूटी सवार बदमाश ने टहल रही SECL की महिला कर्मचारी के गले से करीब दो तोले की सोने की चेन लूट ली। आरोपी ने पहले रास्ता पूछने के बहाने महिला को रोका और फिर झपट्टा मारकर चेन खींच ली। महिला ने विरोध किया तो बदमाश ने उनके साथ मारपीट की। घटना में महिला के गले और शरीर पर चोटें आई हैं। रास्ता पूछने के बहाने महिला को रोका जानकारी के मुताबिक, पीड़िता सुमन सिंह संपदा कैंपस में रहती हैं और SECL में कार्यरत हैं। सोमवार रात करीब 9 बजे खाना खाने के बाद वह कैंपस में टहल रही थीं। आमतौर पर वह पड़ोसियों के साथ टहलने जाती थीं, लेकिन उस दिन अकेली थीं। इसी दौरान स्कूटी सवार एक युवक उनके पास पहुंचा और बसंत का घर कहां है, यह पूछने लगा। महिला कुछ समझ पातीं, इससे पहले ही आरोपी ने उनके गले पर झपट्टा मारकर सोने की चेन खींच ली। चेन बचाने के लिए किया विरोध तो की मारपीट बदमाश ने सुमन सिंह के गले से करीब दो तोले की सोने की चेन लूट ली। महिला ने चेन बचाने के लिए विरोध किया तो आरोपी ने उनके साथ मारपीट की। झूमाझटकी के दौरान उनके गले और शरीर पर चोटें आईं। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी स्कूटी से मौके से फरार हो गया। घटना के बाद महिला ने पुलिस को इसकी सूचना दी। CCTV फुटेज में दिखा संदिग्ध, पुलिस कर रही तलाश सूचना मिलने पर सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्य पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पीड़िता से वारदात की जानकारी ली। आरोपी की तलाश में संपदा कैंपस और आसपास के रास्तों पर लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, फुटेज में संदिग्ध युवक और उसकी स्कूटी नजर आ रही है। फुटेज के आधार पर आरोपी की पहचान कर उसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

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Pune Metro Pink Line

Pune Metro Pink Line: पुणे को मिली नई Metro की सौगात, 4 नवंबर से शुरू होगी यात्रियों के लिए सेवा

Pune के लोगों के लिए मेट्रो से जुड़ी एक बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 नवंबर 2026 को पुणे मेट्रो Pink Line (Pune Metro Pink Line) नई लाइन-3 का उद्घाटन किया। करीब 23 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर हिंजेवाड़ी के IT हब को शिवाजीनगर से जोड़ेगा। इससे रोजाना नौकरी और दूसरे कामों के लिए इस रूट पर सफर करने वाले हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। इस मौके पर पीएम मोदी ने देश में मेट्रो नेटवर्क के बढ़ते दायरे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले भारत में मेट्रो नेटवर्क सिर्फ 248 किलोमीटर था, जो अब बढ़कर करीब 1,200 किलोमीटर हो गया है। पुणे में मेट्रो के विस्तार के लिए करीब 21,800 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। Pune Metro Pink Line: हिंजेवाड़ी से शिवाजीनगर तक आसान होगा सफर पुणे मेट्रो की नई लाइन-3 करीब 23.2 किलोमीटर लंबी है। यह मान से शुरू होकर हिंजेवाड़ी IT पार्क होते हुए शिवाजीनगर स्थित डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मेट्रो स्टेशन तक जाएगी। इस रूट पर कुल 23 स्टेशन बनाए गए हैं। हिंजेवाड़ी पुणे का प्रमुख IT हब है। यहां कई बड़ी कंपनियों के ऑफिस हैं और रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी काम के लिए पहुंचते हैं। इस इलाके में ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी समय से बनी हुई है। ऐसे में नई मेट्रो लाइन से कर्मचारियों और आम यात्रियों को सड़क पर लगने वाले जाम से कुछ राहत मिल सकती है। इस प्रोजेक्ट को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत तैयार किया गया है। इसकी लागत करीब 8,313 करोड़ रुपये बताई गई है। 4 नवंबर से आम यात्रियों के लिए शुरू होगी Metro सेवा 3 नवंबर को उद्घाटन के बाद पुणे मेट्रो की Pink Line पर 4 नवंबर से आम यात्रियों के लिए सेवाएं शुरू करने की घोषणा की गई है। शुरुआती चरण में 23 में से 17 स्टेशन यात्रियों के लिए खोले जाएंगे। बाकी स्टेशनों को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने की योजना है। मेट्रो के संचालन को लेकर जारी जानकारी के मुताबिक, व्यस्त समय यानी Peak Hours में हर 6 मिनट पर ट्रेन मिलेगी। वहीं सामान्य समय में ट्रेनों के बीच करीब 12 मिनट का अंतराल रहेगा। इससे ऑफिस जाने वाले लोगों, छात्रों और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है। Pink Line की खास बात, महिलाएं संभालेंगी Train Operations पुणे मेट्रो की नई Pink Line सिर्फ अपनी लंबाई और रूट के कारण ही चर्चा में नहीं है। इसके संचालन में महिलाओं की अहम भूमिका भी होगी। इस कॉरिडोर पर ट्रेन ऑपरेटर की जिम्मेदारी पूरी तरह महिला कर्मचारियों को दी गई है। इसके अलावा, मेट्रो की बिजली जरूरत का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा सौर ऊर्जा (Solar Energy) से पूरा करने की योजना है। इसका उद्देश्य ऊर्जा की खपत कम करना और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देना है। Pune Metro Phase 2: चार नए कॉरिडोर का भी होगा विस्तार Pink Line के उद्घाटन के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुणे मेट्रो के दूसरे चरण की चार नई लाइनों की आधारशिला भी रखी। इन परियोजनाओं पर करीब 13,500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इनमें शामिल हैं: इन नए रूट के जरिए पुणे के कई रिहायशी, व्यावसायिक और IT इलाकों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। खराड़ी, मगरपट्टा, हडपसर, स्वारगेट और वारजे जैसे इलाकों के लोगों को भी इसका फायदा मिलने की उम्मीद है। उद्घाटन से पहले Maan स्टेशन पर पानी रिसने की खबर मेट्रो लाइन के उद्घाटन से ठीक पहले मान स्टेशन पर पानी रिसने की खबर भी सामने आई थी। बारिश के बाद स्टेशन पर पानी आने की घटना ने निर्माण की गुणवत्ता और तैयारियों को लेकर सवाल खड़े किए। हालांकि, निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक 3 नवंबर को मेट्रो लाइन का उद्घाटन किया गया। अब यात्रियों के लिए सेवा शुरू होने के साथ स्टेशन की सुविधाओं और रखरखाव पर भी लोगों की नजर रहेगी। 2014 से अब तक कितना बढ़ा भारत का Metro Network? प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम के दौरान बताया कि 2014 से पहले देश में मेट्रो नेटवर्क करीब 248 किलोमीटर था। अब यह बढ़कर लगभग 1,200 किलोमीटर हो चुका है। पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, नागपुर और पुणे जैसे शहरों में मेट्रो सेवाओं का विस्तार हुआ है। इसका उद्देश्य बड़े शहरों में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करना और लोगों को सार्वजनिक परिवहन का बेहतर विकल्प देना है। पुणे की Pink Line और Phase-2 की नई परियोजनाएं भी इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। Pune Metro Pink Line से आम लोगों को क्या फायदा होगा? पुणे में नौकरी, पढ़ाई और कारोबार के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग एक इलाके से दूसरे इलाके तक जाते हैं। खासकर हिंजेवाड़ी IT पार्क में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए आने-जाने में काफी समय लगता है। नई मेट्रो लाइन शुरू होने से यात्रियों को कई तरह की सुविधाएं मिल सकती हैं: अब आगे क्या? पुणे मेट्रो की Pink Line का उद्घाटन शहर के सार्वजनिक परिवहन के लिए एक अहम कदम है। 4 नवंबर से यात्रियों के लिए सेवाएं शुरू होने के बाद इसका वास्तविक असर देखने को मिलेगा। वहीं, Phase-2 की चार नई लाइनों के पूरा होने से पुणे के मेट्रो नेटवर्क का दायरा और बढ़ सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई मेट्रो सेवा से हिंजेवाड़ी और शिवाजीनगर के बीच रोजाना सफर करने वाले लोगों का कितना समय बचेगा। इसका जवाब नियमित संचालन और यात्रियों के अनुभव से आने वाले दिनों में साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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