नई दिल्ली। दिल्ली में अक्टूबर के दौरान हुए प्रदर्शनों से जुड़ी याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि प्रदर्शनकारी हर समय किसी एक जगह पर कब्जा नहीं कर सकते, क्योंकि किसान, पत्रकार और दूसरे संगठनों को भी विरोध करने का अधिकार है। इसके लिए समय और व्यवस्था तय होनी चाहिए।
CJI ने कहा कि विरोध करने और व्यापार करने, दोनों के अधिकार महत्वपूर्ण हैं। ऐसे स्थान निर्धारित किए जाने चाहिए, जहां प्रदर्शन के कारण लोगों के रोजमर्रा के कामकाज प्रभावित न हों।
सुनवाई के दौरान व्यापारियों की ओर से पेश वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि प्रदर्शनों के कारण दुकानें बंद रहती हैं और त्योहारों के सीजन में कारोबार प्रभावित होता है। इस पर CJI ने कहा कि मामले में सभी संबंधित संगठनों को शामिल किया जाए और उनका जवाब भी मांगा जाए।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन में 7 हजार से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेने का आरोप
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच प्रदर्शन से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। इनमें पुलिस की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने, सार्वजनिक स्थानों पर आवाजाही रोकने और प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के लिए जुटे 7 हजार से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा पत्रकारों और वकीलों के साथ मारपीट, इंटरनेट सेवाएं बंद करने और मेट्रो सेवाएं रोककर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली पुलिस को जारी किए थे नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 15 अक्टूबर को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किए थे। कोर्ट ने घटनास्थल के CCTV फुटेज और डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने का निर्देश भी दिया था।
इसके साथ ही कोर्ट ने एक जैसे मुद्दों वाली याचिकाओं को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने और उन पर जवाब दाखिल करने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट में इन 8 मामलों पर एक साथ सुनवाई
प्रदर्शनों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट आठ प्रमुख मुद्दों पर सुनवाई कर रहा है।
1. मेट्रो और ट्रेन सेवाएं बंद करने का मामला
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में मेट्रो स्टेशन बंद करने और दिल्ली आने-जाने वाली ट्रेनों पर पाबंदियां लगाने के फैसले को याचिकाओं में चुनौती दी गई है।
2. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना का आरोप
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि अधिकारियों ने 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर से मेट्रो और ट्रेन सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं करने के निर्देश का पालन नहीं किया। इस मामले में अदालत के आदेश की अवमानना का मुद्दा उठाया गया है।
3. प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का मामला
10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया था। याचिकाकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई और हिरासत में लेने की कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
4. वकीलों के साथ मारपीट के आरोप
प्रदर्शन के दौरान वकीलों को हिरासत में लेने और पुलिस स्टेशन के अंदर उनके साथ मारपीट किए जाने के आरोपों से जुड़ी याचिकाएं भी सुनवाई के दायरे में हैं।
5. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति
याचिकाकर्ताओं ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले को चुनौती दी है। उनकी मांग है कि वहां दोबारा प्रदर्शन करने की अनुमति दी जाए।
6. धारा 163 के तहत लगाई गई पाबंदियां
दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा जारी की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने इन पाबंदियों के आधार और उन्हें लागू करने के तरीके पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने संबंधित आदेशों की प्रतियां पेश करने को कहा है।
7. रास्ते बंद करने और आवाजाही रोकने का मामला
प्रदर्शन के दौरान सड़कों पर बैरिकेडिंग करने, लोगों की आवाजाही रोकने और पुलिस की ओर से लगाई गई पाबंदियों को भी याचिकाओं में चुनौती दी गई है।
8. पहले दिए गए अदालती आदेशों के पालन का मामला
11 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में नहीं लेने और मेट्रो, ट्रेन तथा इंटरनेट सेवाएं सामान्य रखने के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया। इस मुद्दे पर भी कोर्ट सुनवाई करेगा।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित संगठनों को मामले में शामिल कर उनका पक्ष जानने की बात कही है। सुनवाई में प्रदर्शन के अधिकार, व्यापारिक गतिविधियों और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाने का मुद्दा प्रमुखता से उठा।


